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Articles by डेविड मैकैसलैंड

कुछ छिपा नहीं

2015 में एक अंतर्राष्ट्रीय शोध कंपनी का कथन था कि पूरे विश्व में दो करोड़ पैंतालिस लाख निगरानी कैमरे लगे हुए हैं, और इनकी संख्या प्रतिवर्ष 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है l इसके अलावा, करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन से हर दिन, जन्मदिन उत्सव से लेकर बैंक डकैती तक की तस्वीर खींचते हैं l चाहे हम बढ़ी हुई सुरक्षा की सराहना करें या क्षीण एकान्तता की निंदा करें, हम वैश्विक, कैमरा-सर्वत्र समाज में रहते हैं l

नये नियम की पुस्तक इब्रानियों के अनुसार परमेश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध में, हम कैमरे की आँख की चौकसी की तुलना में खुलासा और जबाबदेही का बृहद स्तर अनुभव करते हैं l दो धारी तलवार की तरह, उसका वचन, हमारे व्यक्तित्व के गहराई को बेधता है जहाँ वह “मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है l सृष्टि की कोई वस्तु उससे छिपी नहीं है वरन् जिस से हमें काम है, उसकी आँखों के सामने सब वस्तुएँ खुली और प्रगट हैं” (इब्रा. 4:12-13) l

क्योंकि हमारा उद्धारकर्ता यीशु बिना पाप किये हमारी निर्बलताओं और परीक्षाओं का अनुभव किया, हम “अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बांधकर चलें कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे” (पद. 15-16) l हमें उससे डरने की ज़रूरत नहीं किन्तु उसके निकट आने पर अनुग्रह हेतु आश्वस्त रहें l

पूर्ण उपहार

अमरीका में क्रिसमस के बाद के सप्ताह वर्ष का सबसे व्यस्त समय व्यवसाय के पुनः आरंभ होने का समय जब लोग अनचाहे उपहारों का लेन-देन वास्तविक ज़रुरतों की वस्तुओं से करते हैं l फिर भी शायद आप पूर्ण उपहार देनेवालों को जानते होंगे l उनको कैसे मालूम दूसरे व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण और अवसर के लिए उचित क्या है? सही उपहार देना दूसरों को सुनने और व्यक्ति की रुचि जानने से होती है कि वह किसमें आनंदित और प्रसन्नचित होते हैं l

यह परिवार और मित्रों के साथ सही है l किन्तु परमेश्वर के साथ क्या? क्या परमेश्वर को भेट करने के लिए कुछ अर्थपूर्ण और विशेष है? क्या कुछ है जो उसके पास नहीं है?

 रोमियों 11:33-36, परमेश्वर की महान बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और महिमा के लिए प्रशंसा के गीत पश्चात उसके प्रति हमारे समर्पण की बुलाहट है l ”इसलिए हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर विनती करता हूँ कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ l यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है” (पद. 12:1) l अपने चारो ओर के संसार के सदृश न बनकर, हमारे “मन के नए हो जाने से [हमारा] चालचलन भी बदलता जाए” (पद.2) l

आज हम कौन सा सर्वोत्तम उपहार परमेश्वर को दे सकते हैं? हम धन्यवाद, दीनता, और प्रेम में सम्पूर्ण रूप से अपने को दें-हृदय,मन,और इच्छा l प्रभु यही हमसे चाहता है l

सबके लिए आनंद

सिंगापुर में एक मसीही प्रकाशन सम्मेलन के आखिरी दिन, 50 देशों के 280 भागिदार एक समूह तस्वीर के लिए होटल के बाहिरी मैदान में इकट्ठे हुए l दूसरी मंजिल के बालकनी से, फोटोग्राफर ने अलग-अलग कोण से अनेक तस्वीर खींचे इससे पूर्व कि वह कहता, “फोटो खिंच गयीं l”  भीड़ में से चैन की एक आवाज़ आयी, “अच्छा, खुश हों!” तुरंत, जवाब आया, “खुदावन्द आया है l” जल्द ही सभी क्रिसमस का परिचित गीत तारतम्य से गा रहे थे l मैं एकता और आनंद के इस मार्मिक प्रदर्शन को नहीं भूल सकता l

लूका के क्रिसमस की कहानी के वर्णन में, एक स्वर्गदूत ने चरवाहों को यीशु के जन्म की सूचना दी, “मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10-11) l

आनंद कुछ लोगों के लिए नहीं किन्तु सब के लिए था l “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनंत जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16) l

जब हम यीशु का जीवन-परिवर्तन करने वाला सन्देश दूसरों को बांटते हैं, हम विश्वव्यापी रूप से “उसकी धार्मिकता और उसके प्रेम का आश्चर्य” मिलकर बांटते हैं l

“खुश हो खुदावंद आया है!”

कैद में क्रिसमस

हिटलर का विरोध करने के कारण जर्मनी के एक प्रसिद्ध पासवान, रेव्ह. मार्टिन निमोलर को, नाज़ी नज़रबन्दी-शिविर में लगभग आठ वर्ष बिताने पड़े l उसने डकाऊ में 1944 की एक क्रिसमस संध्या में, अपने सह-कैदियों से आशा के वचन कहे : “मेरे प्रिय मित्रों, हम इस क्रिसमस ... बैतलहम के बालक में, उसको खोजें जो उस बोझ को उठाने आया जिनसे हम दबे हैं ... परमेश्वर ने खुद से हम तक पहुँचने हेतु एक सेतु बनाया है! ऊपर से एक ज्योति हम तक पहुंची है!”

क्रिसमस में हम शुभसंदेश को गले लगाते हैं कि परमेश्वर, मसीह में, हमारे स्थान पर हमारे निकट आया और हमारे बीच की खाई को पाट दिया l वह हमारे अन्धकार के कैदखाने में अपनी ज्योति द्वारा प्रवेश करके हमें दबाने वाले दुःख, दोष, या एकाकीपन को हटाता है l

कैदखाने के उस अंधकारमय क्रिसमस संध्या में, निलोमर ने यह सुसमाचार बांटा : “उस ज्योति से जिससे चरवाहे घिरे थे हमारे अन्धकार में एक चमकीली किरण प्रवेश करेगी l” उसके वचन नबी यशायाह की याद दिलाती है जिसने कहा, “जो लोग अंधियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशा. 9:2) l

 चाहे हम जिस स्थिति में हों, यीशु अपने आनंद और अपनी ज्योति से हमारे अंधकारमय संसार में प्रवेश किया है l

शुभ सन्देश!

विश्व समाचार इन्टरनेट, टेलीविजन, रेडियो, और मोबाइल से हम पर बौछार करते हैं l  अधिकतर गलत बातें बतातीं हैं-अपराध, आतंकवाद, युद्ध और आर्थिक समस्याएँ l फिर भी कभी-कभी सुसमाचार हमारे दुःख और निराशा के अंधकारमय समय में प्रवेश करता है-स्वार्थहीन कार्यों की कहानी, एक चिकित्सीय खोज, या युद्ध से बर्बाद स्थानों में शांति प्रयास l

बाइबिल के पुराने नियम में दो लोगों के शब्द लड़ाई से व्यथित लोगों के लिए बड़ी आशा लेकर आयी l

एक बेरहम और शक्तिशाली राष्ट्र पर परमेश्वर के भावी न्याय का वर्णन करके, नहूम कहता है, “देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनानेवाला और शांति का प्रचार करनेवाला आ रहा है!” (नहूम 1:15) l इस खबर ने क्रूरता से शोषित लोगों के लिए आशा लेकर आयी l

एक मिलताजुलता वाक्यांश यशायाह में है : “पहाड़ों पर उसके पाँव क्या ही सुहाने हैं जो शुभ समाचार लाता है, जो शांति की बातें सुनाता है और कल्याण का शुभ समाचार और उद्धार का सन्देश देता है” (यशा. 52:7) l

नहूम और यशायाह के भविष्यसूचक शब्दों की परिपूर्णता प्रथम क्रिसमस में हुई जब स्वर्गदूत ने चरवाहों से कहा, “मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10-11) l

हमारे दैनिक जीवनों में बोला गया सर्वोत्तम समाचार है-मसीह उद्धारकर्ता जन्मा है!

प्रोत्साहन का उपहार

मेरी हैगार्ड का एक पुराना गीत, “इफ़ वी मेक इट थ्रू दिसम्बर,” एक व्यक्ति की कहानी है जिसकी नौकरी छुटने के बाद अपनी छोटी बेटी के लिए क्रिसमस उपहार खरीदने में असमर्थ है l यद्यपि दिसम्बर एक आनंदित समय होना चाहिए, उसका जीवन अँधेरा और ठंडा था l

निराशा दिसम्बर के लिए अनूठी नहीं है, किन्तु उस समय बढ़ सकती है l हमारी अपेक्षाएं बड़ी और हमारी उदासी अधिक l थोड़ा प्रोत्साहन अति सहायक होता है l  

साइप्रस का, यूसुफ, यीशु का आरंभिक अनुयायी था l प्रेरित उसे बरनबास पुकारते थे, अर्थात् “शांति का पुत्र l” हम उससे प्रेरितों 4:36-37 में मिलते हैं जहाँ उसने आवश्यकतामंद विश्वासियों की सहायता हेतु भूमि बेचकर रुपये दान कर दिए l

बाद में, हम पढ़ते हैं कि शिष्य शाऊल से भयभीत थे (प्रेरितों 9:26) l “किन्तु बरनबास उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले [गया]” (पद.27) l बरनबास ने विश्वासियों को घात करने का प्रयास करनेवाला, शाऊल, जो बाद में पौलुस कहलाया, का बचाव मसीह द्वारा रूपांतरित व्यक्ति के रूप में किया l

हमारे चारों ओर के लोगों को प्रोत्साहन चाहिए l एक सामयिक वचन, एक फोन कॉल, अथवा एक प्रार्थना यीशु में उनके विश्वास को सहारा दे सकता है l

बरनबास की उदारता और सहारा प्रदर्शित करता है कि शांति का पुत्र या पुत्री होना क्या है l इस क्रिसमस शायद हम यही महानतम उपहार दूसरों को दे सकते हैं l

400 मील से दृष्टि

अंतरिक्ष यान के अंतरिक्ष यात्री, चार्ल्स फ्रैंक बोल्डन जूनियर कहते हैं, “पहली ही बार अंतरिक्ष में जाने पर पृथ्वी के विषय मेरा दृष्टिकोण नाटकीय ढँग से बदल गया l पृथ्वी से 400 मील ऊपर से, उसको सब कुछ शांतिमय और खुबसूरत दिखाई दिया l फिर भी बोल्डन ने याद किया कि मध्य पूर्व के ऊपर से गुज़रते समय, वह वहाँ पर जारी द्वन्द पर विचारते हुए “वास्तविकता में पहुँच” गया l फिल्म निर्माता जैरेड लेटो से एक साक्षात्कार में, बोल्डन ने उस क्षण पृथ्वी को उस अवस्था में देखा जैसा उसे होना चाहिए-और तब उसे बेहतर बनाने की चुनौती महसूस की l

बैतलहम में यीशु के जन्म के समय, संसार परमेश्वर की इच्छानुसार नहीं था l इस नैतिक और आत्मिक अंधकार में यीशु सबके लिए जीवन और ज्योति लेकर आया (यूहन्ना 1:4) l यद्यपि संसार ने उसे नहीं पहचाना, “जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया” (पद.12) l

जीवन के अपने मूल अवस्था में नहीं होने के कारण हम दुखित होते हैं-जब परिवार टूटते हैं, बच्चे भूखे होते हैं, और संसार युद्ध में संलग्न है l किन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि कोई भी मसीह में विश्वास करके एक नयी दिशा में बढ़ सकता है l

क्रिसमस का मौसम हमें स्मरण कराता है कि उद्धारकर्ता, यीशु, उसको ग्रहण करने और उसका अनुसरण करनेवाले को जीवन और ज्योति देता है l

मैं धनी हूँ!

शायद आपने वह टीवी विज्ञापन देखा है जिसमें एक व्यक्ति दरवाजे में एक बड़ा चेक प्राप्त करता है l तब प्राप्तकर्ता चिल्लाने, नाचने, कूदने, और सभों को गले लगाता है l “मैं जीत गया! मुझे विश्वास नहीं है! मेरी समस्याएँ हल हो गई हैं!” समृद्धि अत्याधिक भावनात्मक प्रतिउत्तर जगाता है l

बाइबिल के सबसे लम्बे अध्याय भजन119 में हम यह उललेखनीय कथन पढ़ते हैं : “मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानो सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूँ” (पद.14) l गज़ब की  तुलना! परमेश्वर के निर्देश मानना धन प्राप्ति की तरह हर्षित करता है! पद 16 इन शब्दों को दोहराते हुए भजनकार प्रभु की आज्ञाओं के लिए कृतज्ञ आनंद प्रकट करता है l “मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा l”

किन्तु यदि हम ऐसा अहसास नहीं करते हैं तो? किस तरह परमेश्वर की आज्ञाओं में आनंदित होना धन प्राप्ति के बराबर आनंददायक है? यह सब धन्यवाद से आरंभ होता है, जो आचरण और चुनाव है l हम उस पर ध्यान देते हैं जिसको हम महत्व देते हैं, इसलिए हम परमेश्वर के उन उपहारों के लिए धन्यवाद दें जिससे हमारी आत्माएं तृप्त होती हैं l हम उसके वचन में बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और शांति का भण्डार देखने हेतु हमारी आँखों को खोलने का कहें l

जब प्रतिदिन यीशु के लिए हमारा प्रेम बढ़ेगा, हम वास्तव में धनी बनेंगे!

न भेजें

ई-मेल भेजकर क्या आपने अचानक जाना कि वह गलत व्यक्ति तक पहुँच गया या उसमें हानिकारक, कठोर शब्द थे? काश आप बटन दबाकर उसे रोक सकते l वाह, अब संभव है l अनेक कंपनियां अब एक फीचर देती हैं जिससे आप अल्प समय में ई-मेल को जाने से रोक सकते हैं l उसके बाद, ई-मेल एक उच्चारित शब्द की तरह हो जाता है जो अनकहा नहीं हो सकता l इसे सर्वरोगहारी देखने की बजाए, एक “भेजा नहीं” फीचर हमें स्मरण दिलाए कि हमें अपने शब्दों पर लगाम लगाना होगा l

प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में यीशु के अनुगामियों से कहा, “बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो ... जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे l वह बुराई का साथ छोड़ें, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़ें, और उसके यत्न में रहे” (1 पतरस 3:9-11) l

भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुख पर पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार की रखवाली कर” (भजन 141:3) l यह शब्दों द्वारा प्रहार की इच्छा के आरंभ में और प्रत्येक स्थिति में एक महान प्रार्थना है l

प्रभु, आज हमारे शब्दों की रखवाली कर जिससे हम हानि न करें l

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सब त्याग दें

कॉलेज बास्केटबॉल खेलते समय, मैंने हरेक खेल के मौसम में अभिज्ञ निर्णय किया कि मैं जिम में जाकर अपने को पूरी तरह कोच के अधीन करूँगा-कोच की आज्ञानुसार सब करूँगा l

मेरे टीम के लिए यह बोलना लाभकारी नहीं होता, “हे कोच! मैं यहाँ हूँ l मैं बास्केट में  बाल डालना चाहता हूँ और बाल को आगे ले जाना चाहता हूँ, किन्तु मुझसे बाल लेकर दौड़ने, बचाव करने और पसीना बहाने को न कहें !”

टीम की भलाई के लिए प्रत्येक सफल खिलाड़ी को कोच की बातों पर पर्याप्त् भरोसा करना होगा l

मसीह में, हमें परमेश्वर का “जीवित बलिदान” बनना होगा (रोमियों 12:1) l हम अपने उद्धारकर्ता और प्रभु से बोलते हैं : “मैं आप पर भरोसा करता हूँ l जो भी आप मुझे आज्ञा देंगे, मैं करूँगा l” तब वह हमें हमारे मस्तिष्क को उसकी इच्छित वस्तुओं पर केन्द्रित होने के लिए “रूपांतरित” करता है l

यह जानना सहायक होगा कि परमेश्वर वही हमसे करवाता है जिसके लिए सज्जित किया है l जैसे पौलुस याद दिलाता है, “उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न-भिन्न वरदान मिले हैं” (पद.6) l

जानते हुए कि हम अपने जीवनों में परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं, हम अपना जीवन उस पर निछावर कर सकते हैं, यह जानकार कि उसने हमें बनाया और उसके लिए समस्त प्रयास में हमारी मदद करता हैं l

जीवन की श्वास

एक ठंडी और तुषाराच्छादित सुबह में, मेरी बेटी और मैं स्कूल जाते समय, अपने श्वास को भाप में बदलते देखा l हमारे मुहं से निकलनेवाली वाष्पमय बादलों पर हम खिलखिला रहे थे l मैंने उस क्षण को उपहार स्वरूप लिया, उसके साथ आनंद करना और जीवित l

आम तौर पर हमारा अदृश्य श्वास ठंडी हवा में दिखाई दिया, और श्वास और जीवन के श्रोत-हमारा सृष्टिकर्ता प्रभु-के विषय सोचने को कायल किया l आदम को धूल से रचकर उसमें श्वास फूंकनेवाला हमें और समस्त जीवों को जीवन देता है (उत्प. 2:7) l सब वस्तुएँ उसकी ओर से हैं-हमारा श्वास भी, जिसे हम बगैर सोचे लेते हैं l      

इस सुविधा युक्त और तकनीकी संसार में रहते हुए हम हमारे आरंभ को और कि परमेश्वर हमारा जीवनदाता है को भूलने की परीक्षा में पड़ सकते हैं l किन्तु जब हम ठहरकर विचारते हैं कि परमेश्वर हमारा बनानेवाला है, हम अपने दिनचर्या में धन्यवादी आचरण जोड़ सकते हैं l हम दीन, धन्यवादी हृदयों से जीवन के उपहार को स्वीकार करने हेतु उससे सहायता मांग सकते हैं l हमारा धन्यवाद छलक कर दूसरों को स्पर्श करें, ताकि वे भी प्रभु की भलाइयों और विश्वासयोग्यता के लिए उसे धन्यवाद दे सकें l

बांटने योग्य धन

1974 के मार्च में, एक कुआं खोदते समय चीनी किसानों ने चौकानेवाली खोज की l मध्य चीन के सूखी धरती के नीचे लाल भूरे रंग की पकी मिट्टी की सेना (Terracotta Army) मिली-ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की आदम कद पकी मिट्टी की मूर्तियाँ l इस अद्भुत खोज में लगभग 8,000 सैनिक, 150 अश्वारोही सेना, और 520 घोड़ों द्वारा खींचे जानेवाले 130 रथ l  यह टेराकोटा सेना चीन के सैलानी स्थलों में सबसे अधिक प्रसिद्ध है, जिसे लाखों लोग देखने आते हैं l यह अदभुत धन शताब्दियों से छिपा था किन्तु अब संसार के साथ बांटा जा रहा है l

प्रेरित पौलुस ने मसीह के अनुगामियों को लिखा कि उनके अन्दर एक धन है जिसे संसार के साथ बांटना होगा : “वही [ज्योति] हमारे हृदयों में चमकी ... परन्तु हमारे पास वह धन मिट्टी की बरतनों में रखा है” (2 कुरिं. 4:7) l यह धन हमारे अन्दर मसीह और उसके प्रेम का है l

यह धन छिपाने के लिए नहीं बांटने के लिए है कि परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह द्वारा प्रत्येक राष्ट्र के लोग उसके परिवार में शामिल हो सकें l काश हम भी, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में आज किसी के साथ यह धन बाँट सकें l