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Articles by एलिसन कीडा

चोट पहुँचाने वाले शब्द

“खाल और हड्डी, खाल और हड्डी,” उस लड़के ने उपहास किया l “छड़ी,” एक अन्य ने उसके साथ स्वर मिलाया l जवाब में मैं भी बोल सकती थी “छड़ी और पत्थर से मेरी हड्डी टूट सकती है, किन्तु शब्दों से मुझे चोट कभी नहीं लगेगी l” परन्तु छोटी लड़की होते हुए भी, मैं जानती थी कि लोकप्रिय कविता सच नहीं थी l कठोर, विचारहीन शब्दों से चोट ज़रूर लगी – कभी-कभी बहुत अधिक, ये ऐसे घाव छोड़ गए जो बहुत गहरे थे और पत्थर या छड़ी की चोट से कहीं अधिक समय तक रहनेवाले घाव l

हन्ना विचारहीन शब्दों के डंक को ज़रूर जानती थी l उसका पति, एल्काना, उसे प्यार करता था परन्तु वह संतानहीन थी, जबकि उसकी दूसरी पत्नी, पनिन्ना, के पास अनेक बच्चे थे l  एक ऐसी संस्कृति में जहाँ स्त्री का महत्त्व संतान होने पर आधारित था, पनिन्ना संतानहीन हन्ना को अत्यंत चिढ़ाकर” उसकी पीड़ा को और कष्टप्रद बना देती थी l वह उसे कुढ़ाती रही जबतक कि हन्ना रो नहीं दी और भोजन न कर सकी (1 शमूएल 1:6-7) l

और एल्काना शायद अच्छा ही सोचता था, परन्तु उसका विचारहीन उत्तर, “हे हन्ना, तू क्यों रोटी है? . . . क्या तेरे लिए मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूँ” (पद.8) फिर भी कष्टदायक था l

हन्ना के समान, हममें से अनेक कष्टकर शब्दों का परिणाम सहते रहते हैं l और हममें से कुछ एक अपने ही शब्दों द्वारा घोर प्रहार करके और दूसरों को चोट पहुंचाकर कदाचित अपने ही घावों के प्रति प्रतिकार किये हैं l परन्तु हम सब सामर्थ्य और चंगाई के लिए अपने प्रेमी और दयालु परमेश्वर की पास जा सकते हैं (भजन 27:5, 12-14) l वह प्रेम और अनुग्रहकारी शब्द बोलकर प्यार सहित हमारे लिए आनंदित होता है l

पत्थर फेंकना

लीसा के मन में उनके लिए कोई सहानुभूति नहीं है जिन्होनें अपने जीवनसाथी ले साथ बेवफ़ाई की है . . . जबतक उसने अपने विवाह में गहरे असंतुष्टता का अनुभव नहीं किया और एक खतरनाक आकर्षण पर क़ाबू पाने की कोशिश करते हुए पाया l उस पीड़ादायक अनुभव ने उसे दूसरों के लिए नयी करुणा और मसीह के शब्दों की…

फूल की तरह प्रफुल्लता

मेरा सबसे छोटा पौत्र केवल दो महीने का है, फिर भी हर बार जब मैं उसे देखती हूँ मैं उसमें छोटे-छोटे बदलाव पाती हूँ l हाल ही में, जब मैं उसको दुलार रही थी, वह मेरी ओर देखकर मुस्कराया! और अचानक मैं रोने लगी l शायद वह आनन्द था जो मैं अपने बच्चों की पहली मुस्कराहट के साथ याद कर रही थी l कुछ क्षण ऐसे ही होते हैं – वर्णन से बाहर l

भजन 103 में दाऊद ने एक काव्यात्मक गीत लिखा जिससे परमेश्वर की प्रशंसा के साथ इस पर भी विचार किया गया है कि हमारे जीवनों के आनंदित क्षण कितनी जल्दी गुज़र जाते हैं : “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मलता है” (पद. 15-16) l

परन्तु जीवन की अल्पता को जानने के बावजूद, दाऊद फूल को फलता-फूलता या बढ़ता हुआ वर्णन करता है l यद्यपि हर एक फूल अकेले ही शीघ्रता से खिलता और फूलता है, उसकी खुशबु और रंग और सुन्दरता उस क्षण को बहुत ही आनंदित करती है l और यद्यपि एक अकेला फूल शीघ्र ही भुलाया जा सकता है – “न वह अपने स्थान में फिर मिलता है” (पद.16) – तुलनात्मक तौर पर हमें निश्चय है कि “यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग . . . प्रगट होता रहता है” (पद.17) l

हम भी फूलों की तरह, उस क्षण में आनंदित होते और फलते-फूलते है; किन्तु हम इस सत्य का भी उत्सव मना सकते हैं कि हमारे जीवन के क्षण वास्तव में कभी भूलाए नहीं जाएंगे l परमेश्वर हमारे जीवनों के हर एक अंश को संभाले रखता है, और उसका अनंत प्रेम सदैव उसके बच्चों के साथ है l

मेरे पिता को स्मरण करना

जब मैं अपने पिता को याद करता हूँ, तो मैंने उन्हें सबसे अच्छी रीति से हथौड़ा चलाते, बागबानी करते या सीढ़ियों के नीचे अव्यवस्थित कमरे में आकर्षक औजारों और यंत्रों के साथ देखता हूँ। उनके हाथ हमेशा किसी न किसी कार्य को पूरा करने में लगे होते थे-कुछ न कुछ बनाना (कोई गैरेज या एक छत या एक चिड़िया के लिए घर), कईबार ताले ठीक करना और कईबार आभूषण बनाना या शीशे की कलाकृति करना।   

मेरे पिता को स्मरण करना मुझे मेरे स्वर्गीय पिता और सृष्टिकर्ता के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है, जो सर्वदा से ही कार्य करने में व्यस्त रहे हैं। आदि में, “[परमेश्वर] ने पृथ्वी की नींव डाली. . .उस पर किसने सूत खींचा . . . जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्‍वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे” (अय्यूब 38:4–7)। जो कुछ भी उन्होंने बनाया वह एक कला, एक सर्वोत्तम कृति थी। उन्होंने एक विस्मयकारी सुन्दर संसार की सृष्टि की और इसे “बहुत अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:31)।

उसमें आप और मैं भी शामिल हैं। परमेश्वर ने हमें भयानक और अद्भुत रीति से रचा है (भजन संहिता 139:13–16); और उसने हमें एक लक्ष्य और कार्य करने का एक लक्ष्य प्रदान किया है, जिसमें इस पृथ्वी पर अधिकार रखना और इसके जीव-जन्तुओं की देखभाल करना शामिल है (उत्पत्ति 1:26–28; 2:15) । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या काम करते हैं-हमारे काम में या हमारे आराम में-परमेश्वर हमें सामर्थ प्रदान करता है, जिसकी हमें पूरे दिल के साथ उसके लिए कार्य करने के लिए आवश्यक होती है। जो कुछ भी हम करें, परमेश्वर करे कि वह उन्हें प्रसन्न करने के लिए हो।

परमेश्वर सुनता है

जब समूह के अन्य लोग चुनौतियों अथवा बीमारी से जूझ रहे अपने परिजनों और मित्रों के लिए मांग रहे थे डाईएन सुन रही थी l उसके परिवार का एक सदस्य वर्षों से नशे की लत से संघर्ष कर रहा था l किन्तु डाईएन ने अपना निवेदन साझा नहीं किया l उसकी ऊँची आवाज़ में बोले गए शब्दों के प्रतिउत्तर में लोगों के चेहरों के भाव या उनका प्रश्न पूछना या उनकी सलाह वह सहन नहीं कर पाती थी l उसने महसूस किया कि उसका निवेदन नहीं बताना और चुप रहना ही बेहतर था l दूसरे समझ नहीं पाए कि उसका प्रिय यीशु का विश्वासी होकर भी दैनिक संघर्ष कैसे कर सकता था l
यद्यपि डाईएन ने समूह के साथ अपना निवेदन साझा नहीं किया, उसने कुछ भरोसेमंद मित्रों से उसके साथ प्रार्थना करने को कहा l उनके साथ मिलकर उसने परमेश्वर से अपने प्रिय के लिए नशे की वास्तविक बंधन से छुटकारा माँगा कि वह मसीह में स्वतंत्रता का अनुभव कर सके – और कि परमेश्वर डाईएन को आवश्यक शांति और धीरज दे l प्रार्थना करने पर, उसने अपने प्रिय के साथ अपने सम्बन्ध में आराम और सामर्थ्य महसूस किया l
हममें से अनेक के पास वास्तविक, दृढ़ प्रार्थना निवेदन होते हैं जो अनुत्तरित महसूस होते हैं l किन्तु हम आश्वास्त हों कि परमेश्वर ध्यान देता ही है और वह हमारे सभी निवेदन सुनता ही है l वह हमसे “आशा में आनन्दित, क्लेश में स्थिर, प्रार्थना में नित्य लगे” (रोमियों 12:12) रहकर उसके निकट चलने को प्रेरित करता है l हम उसपर भरोसा कर सकते हैं l

मैं माफ़ी चाहता हूँ

2005में, कॉलिंस के एक रिपोर्ट को झूठा ठहराने के कारण मेगी को चार साल के लिए जेल जाना पड़ा, और मेगी जेल से छूटने के बाद कॉलिंस को ढूंढ़ कर उसे “हानि” पहुँचाने की कसम खायी l अंततः सबकुछ खोने के बाद, मेगी दोषमुक्त हो गया l इस बीच, कॉलिंस के सभी रिपोर्ट झूठे साबित हुए, उसकी नौकरी छूट गयी, उसे भी कई वर्षों के लिए जेल में रहना पड़ा l जेल में रहते हुए दोनों मसीह में विश्वास में आ गए l
2015 में, दोनों ने खुद को एक साथ एक विश्वास-आधारित कंपनी में नौकरी करते हुए पाया l कॉलिंस याद करता है, “[मैंने मेगी से कहा], ‘इमानदारी से, मेरे पास स्पष्ट करने के लिए कुछ भी नहीं है, मैं केवल यह कह सकता हूँ मुझे क्षमा कर दो l” मेगी का उत्तर था, “मैं लगभग यही सुनना चाहता था,” और उसने उसे माफ़ कर दिया l दोनों में मेल हो सका क्योंकि उन्होंने परमेश्वर का अतुलनीय प्रेम और क्षमा का अनुभव किया था, जो हमें “एक दूसरे . . . [को] . . . क्षमा” करने की योग्यता देता है (कुलुस्सियों) 3;13) l
वर्तमान में दोनों घनिष्ठ मित्र हैं l “हमारे पास संसार को बताने के लिए एक संयुक्त मिशन है . . . कि यदि आपको किसी से क्षमा मांगनी है, तो अहंकार छोड़कर उससे क्षमा मांग लें,” कॉलिंस ने कहा l “और यदि आपको किसी के विरुद्ध कोई शिकायत है, कड़वाहट छोड़ दें क्योंकि यह इस आशा से ज़हर पीने के समान है कि यह उन्हें हानि पहुंचेगा l”
परमेश्वर विश्वासियों को शांति और एकता में रहने के लिए बुलाता है l यदि हमारे पास  “किसी पर दोष देने का कोई कारण हो,” हम उसे परमेश्वर के पास ले जाएँ l वह हमें मेल करने में मदद करेगा (पद.13-15; फिलिप्पियों 4:6-7) l

पशुओं से पूछो

बचाए गए एक चील/गरुड़(Bald Eagle) को देखकर हमारे नाती-पोते भावविभोर हो उठे l वे उसे स्पर्श भी कर सके l चिड़ियाघर के स्वयंसेविका ने बाँह पर बैठाए उस शक्तिशाली पक्षी के विषय बताया कि इस नर पक्षी के पंखों का फैलाव साढ़े छह फीट है, फिर भी खोखली हड्डियों के कारण उनका वजन केवल आठ पौंड है l यह सुनकर मैं चकित हुआ l
उपरोक्त बात से मैंने एक गरुड़ को याद किया जिसे मैंने झील के ऊपर उड़ते देखा था और जो गति से नीचे आकर शिकार को अपने चंगुल में लेनेवाला था l और मैंने कल्पना किया कि लम्बे टांगों वाला एक बगुला एक तालाब के किनारे स्थिर खड़ा हुआ अपनी लम्बी चोंच से जल के अन्दर शिकार करने को तैयार है l हमारे सृष्टिकर्ता की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाले लगभग 10,000 प्रजातियों में से ये केवल दो ही हैं l     
अय्यूब की पुस्तक में, अय्यूब के मित्र उसके दुःख के कारण पर तर्क-वितर्क करते हुए पूछते हैं, “क्या तू परमेश्वर का गूढ़ भेद पा सकता है?” (देखें 11:5-9) l प्रतिउत्तर देते हुए अय्यूब स्पष्ट करता है, “पशुओं से तो पूछ और वे तुझे सिखाएँगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बताएँगे” (अय्यूब 12:7) l परमेश्वर की अभिकल्पना, देखभाल, और सृष्टि पर नियंत्रण की सच्चाई को पशु सत्यापित करते हैं : “उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है” (पद.10) l
क्योंकि परमेश्वर पक्षियों की देखभाल करता है (मत्ती 6:26; 10:29), हम भी आश्वास्त हैं कि वह आपसे और मुझसे प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है, उस समय भी जब हम अपनी परिस्थितियों को नहीं समझते हैं l चारोंओर देखें और उससे सीखें l  

जब हम थक जाते हैं

कभी-कभी सही काम थका देता है l हम सोच सकते हैं, क्या सही इरादों के साथ शब्दों और कार्यों से कुछ अंतर पड़ता है या नहीं?  हाल ही में मैं इस पर विचार कर रही थी जब मैंने प्रार्थना के साथ विचार करके एक मित्र को उत्साहित करने के लिए ई-मेल भेजा, जिसका क्रोधित प्रतिउत्तर मिला l मेरी अविलम्ब प्रतिक्रिया ठेस और क्रोध दोनों ही थी l मुझे इतना  गलत कैसे समझा जा सकता था?

क्रोध में प्रतिउत्तर देने से पहले, मैंने स्मरण किया कि ज़रूरी नहीं कि किसी को भी यीशु के प्रेम के विषय बताने का परिणाम(या इच्छित परिणाम) मिले l दूसरों की भलाई करके उन्हें यीशु के निकट लाने की आशा करने पर, वे हमें अस्वीकार करेंगे l किसी को सही कार्य करने के हमारे विनम्र प्रयास की उपेक्षा हो सकती है l

अपने सच्चे प्रयास के प्रतिउत्तर के परिणामस्वरूप निराश होने पर गलातियों 6 में जाना अच्छा है l यहाँ पर प्रेरित पौलुस हमें अपने इरादों पर विचार करने के लिए उत्साहित करता है अर्थात् जो कुछ हम बोलते और करते हैं, अर्थात् “अपने काम को जाँच [लें]” (पद.1-4) l ऐसा करने के बाद, वह हमें दृढ़ रहने हेतु उत्साहित करता है : “हम भले काम करने में साहस न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे l इसलिए जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्वासी भाईयों के साथ” (पद.9-10) l

परमेश्वर चाहता है कि हम उसके लिए निरंतर जीवन बिताएं, जिसमें दूसरों के लिए प्रार्थना और उसके विषय उनको बताना शामिल है अर्थात् “भले काम l” परिणाम वह देगा l

हमारे लिए परमेश्वर की परवाह

मेरे नाती, जो अभी नन्हें हैं, उन्हें अपने कपड़े खुद पहनना पसंद है। वे अक्सर अपनी कमीज़ पीछे ज्यादा खींच देते हैं और अपने जूते उल्टे पहन लेते हैं। मुझे उनकी गलती सुधारने का मन नहीं करता क्योंकि मुझे उनकी मासूमियत और दुनिया को उनकी आंखों से देखना पसंद है।

उनके लिए सब कुछ एक नया अनुभव हैI, टूटे पेड़ पर चलना, कछुए की जासूसी करना, या उत्साह से दमकल ट्रक गुजरते देखना। वास्तव में मेरे नन्हें नाती इतने मासूम नहीं हैं। बिस्तर पर ना जाने के उनके पास दर्जन बहाने होते हैं और वो दूसरे का खिलौना झटपट छीन लेते हैं। फिर भी मैं उनसे बहुत प्रेम करती हूँ।

पहले मानव आदम-हव्वा कई मायनों में मेरे नातियों के समान थे।I परमेश्वर के साथ बगीचे में चलते हुए हर चीज़ उनके लिए आश्चर्यजनक रही होगी। परन्तु एक दिन उन्होंने मनमानी और अवज्ञा की और उस पेड़ का फल खा लिया जिसकी मनाही थी (उत्पत्ति 2:15-17;3:6)। परिणामस्वरूप वह झूठ बोलने और दोष लगाने लगे (3:8-13)।

फिर भी, परमेश्वर ने उनसे प्रेम किया और उनकी परवाह करते रहे। उन्होंने चमड़े के अंगरखे बना कर उन्हें पहिना दिए (पद 21)-और आगे चलकर अपने पुत्र के बलिदान द्वारा सभी पापियों के लिए उद्धार का मार्ग प्रदान किया (यूहन्ना 3:16)। वह हमें बहुत प्रेम करते हैं!