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Articles by रेमी ओयडिली

लालची लोभी

प्राचीन कथा द बॉय एंड द फिल्बर्ट्स(नट्स)The Boy and the Filberts(Nuts) में, एक लड़का अपने हाथ बादाम के जार में डालकर मुठी भर बादाम निकालना चाहता है l लेकिन उसकी मुट्ठी इतनी भरी हुयी होती है कि वह जार में फंस जाती है l अपने इनाम का थोड़ा सा भी हिस्सा खोने के लिए तैयार नहीं होने पर, लड़का रोने लगता है l आखिरकार, उसे कुछ बादाम छोड़ने की सलाह दी जाती है कि उसका हाथ निकल जाए l लालच एक कठोर बॉस हो सकता है l  

सभोपदेशक का बुद्धिमान शिक्षक हाथों के विषय एक सबक के साथ इस नैतिकता को दर्शाता है और वह हमारे बारे में क्या कहते हैं l उसने लालची के साथ आलसी की तुलना और विषमता दिखाया जब उसने लिखा : “मुर्ख छाती पर हाथ रखे रहता, और अपना मांस खाता है l चैन के साथ एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना है” (4:5-6) l जबकि आलसी तब तक विलम्ब करते हैं जब तक वे बर्बाद नहीं हो जाते, जो लोग धन का पीछा करते हैं उन्हें एहसास होता है कि उनका प्रयास “व्यर्थ है – एक दुखी व्यवसाय!” (पद.8) l

शिक्षक के अनुसार, अभिलाषित अवस्था लालची लोभी के परिश्रम से अलग होकर जो वास्तव में हमारा है उसमें संतोष प्राप्त करना है l क्योंकि जो हमारा है वह सदैव बना रहेगा l जैसे यीशु ने कहा, “यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा?

जब हम प्रशंसा करते हैं

जब 2014 में नौ वर्ष का विली उसके सामने के अहाते से अगवा कर लिए गया था, उसने एवरी प्रेज़(Every Praise) अपना प्रिय सुसमाचार गीत बार-बार गया l अपहरणकर्ता द्वारा उसे तीन घंटे यहाँ-वहाँ घुमाने के दौरान, विली ने उसके बार-बार चुप रहने के आदेशों की अनदेखी की l आखिरकार, अपहरणकर्ता ने उसे कार के बाहर सुरक्षित छोड़ दिया l बाद में, विली ने मुठभेड़ का वर्णन करते हुए कहा कि जब उसने अनुभव किया कि उसके भय ने विश्वास के समक्ष हार मान ली है, अपहरणकर्ता गीत से परेशान दिखाई दिया l

विली की अपनी गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया पौलुस और सीलास द्वारा साझा किये गए अनुभव की याद दिलाती है l कोड़े लगाकर जेल में डाल दिये जाने के बाद, वे “प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रह थे, और कैदी उनकी सुन रहे थे l इतने में एकाएक बड़ा भूकंप आया, यहाँ तक कि बंदीगृह की नींव हिल गयी, और तुरंत सब द्वार खुल गए; और सब के बंधन खुल पड़े” (प्रेरितों 16:25-26) l

सामर्थ्य के इस भयानक प्रदर्शन का साक्षी होकर, जेलर ने पौलुस और सीलास के परमेश्वर पर विश्वास किया, और उसका सम्पूर्ण घराना उसके साथ बपतिस्मा लिया (पद.27-34) l प्रार्थना के द्वारा, उस रात भौतिक और आत्मिक दोनों ही जंजीरें टूट गयीं l

हम हमेशा पौलुस और सीलास, या विली की तरह प्रत्यक्ष रूप से नाटकीय बचाव का अनुभव नहीं कर सकते हैं l परन्तु हम जानते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों की प्रशंसा का प्रतिउत्तर देता है! जब वह क्रिया करता है, जंजीरें टूट जाती हैं l

विश्वास-कदम

डेस्मंड डॉस दूसरे विश्व यूद्ध में एक गैर सैनिक के रूप में भर्ती हुए थे l यद्यपि उनका धार्मिक मत उन्हें बंदूक उठाने से रोकता था, डॉस प्रवीणता से सैनिक डॉक्टर के तौर पर सेवा किए l एक युद्ध में, अत्यधिक और बार-बार दुश्मन की गोलाबारी का सामना करते हुए उन्होंने पचहतर घायल सैनिकों को अपनी इकाई में सुरंक्षित पहुँचाया l उसकी कहानी एक दस्तावेज़ी फिल्म(documentary) द कॉनसेनशियस ऑबजेक्टर(The Conscientious Objector) में बतायी गयी है और फिल्म हैकसॉ रिट्ज (Hacksaw Ridge) में नाटकीकृत की गयी है l

मसीही विश्वास के नायकों की सूची में अब्राहम, मूसा, दाऊद, एलिय्याह, पतरस, और पौलुस जैसे साहसी चरित्र शामिल हैं l फिर भी अरिमतिया का यूसुफ और निकुदेमुस कुछ ऐसे नायकों में हैं जिन्हें प्रशंसा और पहचान नहीं मिली, जिन्होंने मसीह की क्रूसीकृत शव को ले जाकर उसे सम्मानित तौर से मिटटी देने के लिए यहूदी अगुओं के सामने अपने पद को जोखिम में डाला (यूहन्ना 19:40-42) l यह यीशु का भयभीत, गुप्त विश्वासी था और एक अन्य, निकुदेमुस था, जिसने केवल रात में उससे मिलने की साहस किया था (पद.38-39) l इससे अधिक प्रभावशाली यह बात है कि यीशु के विजयी रूप से कब्र से जी उठने से पूर्व उन्होंने अपने विश्वास का कदम उठाया l क्यों?

शायद यीशु की मृत्यु का तरीका और तुरंत होने वाली घटनाओं (मत्ती 27:50-54) ने इन भयभीत अनुयायियों के अनुभवहीन विश्वास को दृढ़ कर दिया था l संभवतः उन्होंने मनुष्य उनके साथ क्या कर सकते थे से अधिक परमेश्वर कौन है पर केन्द्रित होना सीख लिया था l प्रेरणा चाहे कुछ भी रही हो, आज दूसरों के लिए काश हम भी उनके नमूना पर चलनेवाले बनकर अपने परमेश्वर में विश्वास का जोखिम उठाने का साहस प्रगट कर सकें l

नियंत्रण का भ्रम

हम जीवन की घटनाओं पर प्रभाव का जो स्तर रखते हैं, 1975 में एलेन लैंगर के अध्ययन का शीर्षक द इल्यूजन ऑफ़ कन्ट्रोल(The Illusion of Control)  ने इसकी जांच की l उसने पाया कि अधिकतर स्थितियों में हम अपने नियंत्रण की स्थिति को वास्तविक से अधिक समझते हैं l इस अध्ययन ने यह भी दर्शाया कि किस प्रकार वास्तविकता लगभग हमेशा हमारे भ्रम को टुकड़े-टुकड़े कर देता है l

अध्ययन के प्रकाशित होने के बाद से एलेन लैंगर के निष्कर्ष दूसरों के प्रयोगों द्वारा समर्थित है l हालाँकि, उसके द्वारा उल्लेख करने से पूर्व याकूब ने बहुत पहले इस तथ्य को पहचान लिया था l याकूब 4 में, उसने लिखा, “तुम जो यह कहते हूँ, ‘आज या कल हम किसी और नगर में जाकर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार करके लाभ कमाएंगे l’ और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा l सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो भाफ के समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है फिर लोप हो जाती है” (पद.13-14) l

उसके बाद याकूब पूर्ण नियंत्रण रखने वाले की ओर इशारा करते हुए इस भ्रम का इलाज बताता है : “इसके विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, ‘यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे” (पद.15) l इन कुछ एक पदों में, याकूब मानवीय स्थिति और उसका उपचार दोनों को ही मूल असफलता कहता है l

हम यह जान सकें कि हमारी नियति हमारे हाथों में नहीं हैं l क्योंकि परमेश्वर अपने नियंत्रण में सब कुछ रखा है, हम उसकी योजनाओं पर भरोसा कर सकते हैं!

जीवित रंगों में

अपने दसवें जन्मदिन पर चाची सेलेना द्वारा भेजा गया चश्मा लगाकर ज़ेवियर मेक्युरी रो पड़ा l रंग दृष्टिहीन जन्मा, ज़ेवियर ने संसार को केवल स्लेटी, सफ़ेद, और काले रंग में ही देखा था l अपने एनक्रोमा चश्मे(विशेष प्रकार का चश्मा) से, हालाँकि, ज़ेवियर ने पहली बार रंग देखा l अपने चारों ओर की ख़ूबसूरती को देखकर उसके उल्लास और उन्माद ने उसके परिवार को महसूस कराया मानो उन्होंने आश्चर्यकर्म देखा हो l

परमेश्वर की रंगीन चमक ने प्रेरित यूहना के भीतर भी शक्तिशाली प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी (प्रकाशितवाक्य 1:17) l पुनरुथित मसीह की सम्पूर्ण महिमा का सामना करने के बाद, यूहन्ना ने देखा कि “एक सिंहासन स्वर्ग में रखा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है l जो उस पर बैठा है वह यशब और माणिक्य-सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत-सा एक मेघधनुष दिखाई देता है . . . उस सिंहासन में से बिजलियाँ और गर्जन निकलते हैं” (प्रकाशितवाक्य 4:2-5) l

किसी और समय, यहेजकेल ने भी इसी प्रकार का दर्शन देखा जिसमें “नीलम का बना हुआ सिंहासन था,” जिसके ऊपर मनुष्य के समान कोई दिखाई दे रहा था जो “कमर से लेकर ऊपर की ओर . . . झलकाया हुआ पीतल-सा दिखाई पड़ा, और उसके भीतर और चारों ओर आग-सी दिखाई” पड़ती थी (यहेजकेल 1:26-27) l इस तेजस्वी आकृति के चारों ओर मेघधनुष-सा प्रकाश था (पद.28) l

एक दिन हम आमने-सामने पुनरुथित मसीह के साथ मुलाकात करेंगे l ये दर्शन हमें उस वैभव की एक हलकी झलक देते हैं जो हमारा इंतज़ार कर रही है l जब हम यहाँ पर और अभी परमेश्वर की रचना की ख़ूबसूरती का उत्सव मनाते हैं, काश हम प्रगट होनेवाली महिमा की बाट जोहते हुए अपना जीवन बिताएं l

निस्सारता आग के हवाले

1497 के फरवरी में, गिरोलामा सेवोनारोला नाम के एक भिक्षु/सन्यासी ने एक आग आरंभ की l इस बात को आगे बढ़ाते हुए, वह और उसके शिष्यों ने ऐसी वस्तुएं इकठ्ठा किये जो शायद लोगों को पाप करने की ओर आकर्षित कर सकते हैं या जिससे उनके धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने में लापरवाही हो सकती थी – जिसमें कलाकृतियाँ, सौन्दर्य प्रसाधन, वाद्ययंत्र, और वस्त्र सम्मिलित थे l नियुक्त दिन में, निस्सारता सम्बंधित हज़ारों सामग्रियां इटली के फ्लोरेंस शहर में एक सार्वजनिक चौराहे में इकट्ठी करके उनको आग के हवाले कर दी गयी l इस घटना को निस्सारता(Vanity) का अलाव/उत्त्सवाग्नि संबोधित किया गया l

संभवतः सेवोनारोला ने पहाड़ी उपदेश के चकित करनेवाले कुछ एक कथनों में अपने कठोर कार्यों के लिए प्रेरणा खोजी हो l “यदि तेरी दाहिनी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे,” यीशु ने कहा, [और] “यदि तेरा दाहिना हाथ तुझे ठोकर खिलाए, तो उस को काटकर फेंक दे” (मत्ती 5:29-30) l परन्तु यदि हम यीशु के शब्दों की शब्दशः व्याख्या करते हैं, हम उपदेश के मुख्य बिंदु से चूक जाते हैं l यह पूरा उपदेश सतह से गहरे में जाने के विषय है, बाहरी विकर्षण और परीक्षाओं पर अपने व्यवहार को दोष देने की अपेक्षा अपने हृदयों की दशा पर केन्द्रित होना l

निस्सारता(Vanity) का अलाव/उत्त्सवाग्नि ने वस्तुओं और कलाकृतियों को नष्ट करने का एक बड़ा दिखावा था, परन्तु यह असम्भाव्य है कि इस प्रक्रिया में उसमें शामिल लोगों के हृदय बदले हों l केवल परमेश्वर ही किसी हृदय को बदल सकता है l इसीलिए भजनकार की प्रार्थना थी, “हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर” (भजन 51:10) l यह हमारा हृदय ही है जो महत्वपूर्ण है l

सभी लोगों का परमेश्वर

फॉर्मर न्यूज़बॉयज(Former Newsboys) का अग्रणी गायक पीटर फर्लेर बैंड की स्तुति गीत “वह राज्य करता है”(He Reigns) के प्रदर्शन का वर्णन करता है l यह गीत हर एक जनजाति और राष्ट्र के विश्वासियों का एक साथ परमेश्वर की आराधना करने का सजीव वर्णन करता है l फर्लेर ने देखा कि जब भी न्यूज़बॉयज(Former Newsboys) ने इस गीत को गाया उसने विश्वासियों के समूह में पवित्र आत्मा को मंडराते हुए महसूस किया l

 “वह राज्य करता है”(He Reigns) गीत के अनुभव के साथ फर्लेर का वर्णन संभवतः उस भीड़ के साथ गूंज जाता जो पिन्तेकुस्त के दिन यरूशलेम में इकठ्ठा हुयी थी l जब चेले पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए (प्रेरितों 2:4), किसी के भी अनुभव के परे बातें होने लगीं l परिणामस्वरूप, प्रत्येक राष्ट्र से प्रतिनिधि यहूदी व्याकुलता/भ्रम में इकट्ठे हुए, क्योंकि हर एक अपनी ही भाषा में परमेश्वर की अद्भुत बातों को विदित होते हुए सुना (पद.5-6, 11) l पतरस ने भीड़ को समझाया कि यह पुराने नियम की नबूवत का पूरा होना था जिसमें परमेश्वर ने कहा था, “मैं [सभी लोगों पर] अपने आत्मा को उंडेलूँगा” (पद.17) l

परमेश्वर की अद्भुत सामर्थ्य का यह प्रदर्शन पतरस के सुसमाचार की घोषणा के प्रति भीड़ को सर्वग्राही बना दिया, परिणामस्वरूप एक ही दिन में तीन हज़ार लोग विश्वासी हो गए (पद.41) l इस असाधारण प्रारंभ के बाद, ये नए विश्वासी अपने साथ सुसमाचार को लेकर, संसार के अपने देश/प्रान्त को लौट गए l

सुसमाचार आज भी गूंज रहा है – सभी लोगों के लिए परमेश्वर की आशा का सन्देश l जब हम मिलकर परमेश्वर की स्तुति करते हैं, उसका आत्मा हमारे बीच मंडराता है, सभी देशों के लोगों को एक अद्भुत एकता में एक करता है l वह राज्य करता है! (He reigns!)

दिव्य बचाव

अगाथा ख्रिस्ती का हर्क्यूल पोइरोट रहस्य द क्लॉक(The Clock)  में शत्रु पेश किये गए हैं जो कई हत्याएँ करते हैं l यद्यपि उनकी पहली साजिश केवल एक शत्रु पर केन्द्रित है, वे मूल अपराध को छिपाने के लिए और हत्याएं करते हैं l पोइरोट द्वारा सामना करने पर, एक षड्यंत्रकारी कबूलता है, “यह केवल उस पहली हत्या की बात थी…

संतों और पापियों की

मरुभूमि में रहकर यूहन्ना बप्तिस्मा दाता के पद चिन्हों पर चलने के पूर्व, मिस्र की मेरी (c. AD 344-421) ने अपनी युवावस्था को अनुचित अभिलाषाओं और पुरुषों को बुरे रास्तों पर ले जाने में बिताए l अपने अनैतिक पेशे के शिखर पर, वह तीर्थयात्रियों को भ्रष्ट करने के प्रयास में यरूशलेम गयी l उसके बदले में, उसने अपने पापों के गहरे दोष का अनुभव किया और इसलिए निर्जन प्रदेश में पश्चाताप और एकाकीपन का जीवन व्यतीत किया l मेरी का मौलिक रुपान्तरण परमेश्वर के अनुग्रह का परिमाण और क्रूस के पुनर्स्थापन सामर्थ्य को समझाता है l

शिष्य पतरस ने यीशु का तीन बार इनकार किया l इनकार के कुछ घंटे पूर्व, पतरस ने यीशु के लिए मृत्यु सहने की इच्छा की घोषणा की थी (लूका 22:33), इसलिए उसके पराजय का अहसास एक तीव्र प्रहार था (पद.61-62) l यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के बाद, पतरस कुछ शिष्यों के साथ मछली पकड़ रहा था जब यीशु उनके सामने प्रगट हुआ l यीशु ने तीन बार पतरस को उसके लिए अपने प्रेम को दर्शाने का अवसर दिया – उसके हर एक इनकार के लिए एक बार (यूहन्ना 21:1-3) l तब, हर एक घोषणा के बाद, यीशु ने पतरस से उसके लोगों की देखभाल करने की आज्ञा दी (पद.15-17) l अनुग्रह के इस चकित करनेवाले प्रदर्शन का परिणाम यह था कि पतरस ने कलीसिया निर्माण में मुख्य भूमिका निभायी और अंततः मसीह के लिए बलिदान हुआ l  

हममें से किसी की भी जीवनी हमारे पराजय और हार की सूची से आरम्भ हो सकती है l किन्तु परमेश्वर का अनुग्रह हमेशा एक भिन्न अंत की अनुमति देता है l वह अपने अनुग्रह से, हमें छुटकारा देता है और रूपान्तरित करता है l