हमारी प्रतिदिन की रोटी

साफ़ कंटेनर्स

“ढोनेवाले कंटेनर में नफरत से जंग लग जाता है l” ये शब्द पूर्व विधायक(Senator) एलन सिम्सन ने जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के अंतिम संस्कार में बोले थे l अपने मित्र की दयालुता का वर्णन करने का प्रयास करते हुए, सीनेटर सिम्सन ने याद किया कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका के चालीसवें राष्ट्रपति ने अपने पेशवर नेतृत्व और व्यक्तिगत संबंधों में घृणा के बजाय हास्य और प्रेम को अपनाया l

मैं सीनेटर के उद्धरण से सम्बद्ध रखता हूँ, क्या आप नहीं रखते हैं? ओह, मेरी कितनी हानि होती है जब मैंने नफरत को पनाह देता हूँ!

चिकित्सा अनुसन्धान हमारे शरीर को हुए नुक्सान को प्रगट करता है जब हम नकारात्मक क्रोध से चिपके रहते हैं या हम क्रोध का बौछार करते हैं l हमारा रक्त चाप बढ़ जाता है l हमारा हृदय जोर से धड़कने लगता है l हमारी आत्मा बैठती है l हमारे कंटेनर(व्यक्तित्व) बिगड़ने लगते हैं l 

नीतिवचन 10:12 में राजा सुलैमान कहता है, “बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं l” यहाँ नफरत के परिणामस्वरुप जो संघर्ष होता है, वह विभिन्न जनजातियों और जातियों के लोगों के बीच खुनी संघर्ष है l इस तरह की नफरत बदला लेने के लिए सहज प्रवृति को बढ़ावा देती है ताकि जो लोग एक दूसरे से घृणा करते हैं वे मिल न सकें l 

इसके विपरीत, परमेश्वर के प्यार का तरीका ढांपता है – सभी गलतियों - के ऊपर एक पर्दा डालता है, को छुपाता है, या उनको क्षमा करता है l इसका मतलब यह नहीं है कि हम त्रुटियों को अनदेखा करते हैं या गलत काम करनेवाले की सहायता करते हैं l लेकिन हम गलतियों को पोषित नहीं करते हैं कोई सच में पश्च्तापी है l और यदि वे कभी पश्चाताप नहीं करते हैं, इसके बावजूद भी हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर को बताते हैं l (1 पतरस 4:8) l हम जो महः प्रेम करनेवाले को जानते हैं “एक दूसरे से प्रेम [रखें] क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है” (1 पतरस 4:8) l 

जब परमेश्वर हस्तक्षेप करता है

“दिस चाइल्ड इज़ बिलवेड(This Child Is Beloved)” शीर्षक कविता में, एक अफ़्रीकी पास्टर अपने माता-पिता द्वारा अपने गर्भावस्था को समाप्त करने के प्रयासों के बारे में लिखा है, जिसके परिणामस्वरूप उनका जन्म हुआ l कई असामान्य घटनाओं के बाद, जिसने उन्हें गर्भपात करने से रोका, उन्होंने इसके बजाय अपने बच्चे का स्वागत करने का फैसला किया l परमेश्वर के उनके जीवन के संरक्षण के ज्ञान ने ओमाउमी को पूर्णकालिक सेवा के पक्ष में एक आकर्षक जीविका छोड़ने के लिए प्रेरित किया l आज, वह विश्वासपूर्वक लन्दन के एक चर्च के पास्टरीय सेवा करते हैं l 

इस पास्टर की तरह, इस्राएलियों ने अपने इतिहास में एक अतिसंवेदनशील समय में परमेश्वर के हस्तक्षेप का अनुभव किया l जंगल में यात्रा करते हुए, वे मोआब के राजा बालाक के नज़र में आ गए l उनकी विजय और उनकी विशाल जनसंख्या से भयभीत, बालाक ने सीधे-सादे यात्रियों (गिनती 22:2-6) पर एक अभिशाप लगाने के लिए बालाम नामक एक दृष्टा/नबी को लगा दिया l

लेकिन कुछ आश्चर्यजनक हुआ l जब भी बालाम ने शाप देने के लिए अपना मुँह खोला, उसके बदले आशीष निकली l “देख, आशीर्वाद ही देने की आज्ञा मैं ने पायी है : वह आशीष दे चुका है, और मैं उसे नहीं पलट सकता,” उसने घोषणा की l “उसने याकूब में अनर्थ नहीं पाया; और न इस्राएल में अन्याय देखा है l उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग है . . . उनको मिस्र में से ईश्वर ही निकाले लिए आ रहा है” (गिनती 23:20-22) l परमेश्वर ने इस्राएलियों को एक ऐसी लड़ाई से बचाया, जो उन्हें पता भी नहीं था कि वह क्रोधित था!

चाहे हम इसे देखें या न देखें, परमेश्वर आज भी अपने लोगों की देखभाल करता है l हम कृतज्ञता और भय में उसकी उपासना करें जो हमें धन्य कहता है l  

बदले के स्थान पर

1956 में जिम इलियट और चार मिशनरियों को हुआवरनी आदिवासियों(Huaorani tribesmen) द्वारा मार दिए जाने के बाद, किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि आगे क्या होगा l जिम की पत्नी, एलिज़ाबेथ, उसकी युवा बेटी और एक अन्य मिशनरी की बहन ने स्वेच्छा से उन लोगों के बीच अपना घर बनाने का चुनाव किया, जिन्होंने उनके प्रियजनों की हत्या की थी l उन्होंने हुआवरनी समुदाय में रहने, उनकी भाषा सीखने और उनके लिए बाइबल का अनुवाद करने में कई साल बिताए l इन महिलाओं की क्षमा और दयालुता की गवाही ने हुआवरनी लोगों को उनके लिए परमेश्वर के प्रेम के विषय आश्वास्त किया और कईयों ने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया l 

जो एलिज़ाबेथ और उसके मित्रों ने किया वह बुराई के बदले बुराई नहीं बल्कि उसका बदला  अच्छाई (रोमियों 12:17) से देने का एक अविश्वसनीय उदाहरण है l प्रेरित पौलुस ने रोम की कलीसिया को अपने कार्यों से उस रूपांतरण को दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया जो परमेश्वर उनके जीवनों में लाया था l पौलुस के मन में क्या था? उनको बदला लेने की स्वाभाविक इच्छा से परे जाना था; इसके बदले, उन्हें अपने बैरियों की ज़रूरतों को पूरा करके प्रेम दिखाना था, जैसे कि खाना या पानी का प्रबंध करना l 

ऐसा क्यों करें? पौलुस पुराने नियम से एक लोकोक्ति कहता है : “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना; और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना” (पद.20; नीतिवचन 25:21-22) l प्रेरित यह प्रगट कर रहा था कि विश्वासियों ने अपने शत्रुओं पर जो दया दिखाई, वह उन्हें जीत सकती है और उनके दिलों में पश्चाताप की आग को जला सकती है l 





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