हमारी प्रतिदिन की रोटी

गहराई में से

समस्या के संकेत की चेतावनी पर मैंने जल की बारीकी से जांच की l मैंने जीवन-रक्षक की छः घंटे की शिफ्ट ड्यूटी में, तरणताल के किनारे से तैरनेवालों की सुरक्षा पर ध्यान देता रहा l अपनी जगह छोड़ना, अथवा अपनी सावधानी में ढीला होना, तरणताल में तैरनेवालों के लिए भयानक परिणाम ला सकता था l किसी तैराक की चोट या कौशल की कमी के कारण उसके डूबने की आशंका में, उसे तरणताल के बाहर निकलना मेरी जिम्मेदारी थी l

पलिश्तियों के विरुद्ध युद्ध में परमेश्वर की सहायता अनुभव करने के बाद (2 शमूएल 21:15-22), दाऊद अपने बचाव की तुलना “गहरे जल” (22:17) में से खींचकर बाहर निकाले जाने से करता है l स्वयं दाऊद का-और उसके लोगों का जीवन-उसके शत्रुओं के गंभीर खतरे में थी l परमेश्वर ने मुसीबत में डूबते हुए दाऊद के जीवन को बाहर निकाल लिया l जबकि तैरनेवालों की सुरक्षा के लिए जीवन-रक्षकों को भुगतान किया जाता है, अपितु, परमेश्वर, दाऊद से प्रसन्न  होकर उसे बचाया ([पद. 20) l मेरा हृदय यह जानकार अति आनंदित है कि परमेश्वर बाध्यता के कारण नहीं किन्तु अपनी इच्छा  से मेरी सुरक्षा करता है l

जीवन की समस्याओं से अभिभूत होने पर, हम इस ज्ञान में विश्राम पा सकते हैं कि परमेश्वर हमारा जीवन-रक्षक है, हमारे संघर्ष को जानता है और, अपनी प्रसन्नता के कारण हमारी सुरक्षा करता है l

जो हम वापस लाते हैं

जॉन एफ. बर्न्स विश्व घटनाओं पर 40 वर्षों तक द न्यू यॉर्क टाइम्स  के लिए लिखते रहे l 2015 में बर्न्स सेवानिवृति पश्चात् एक लेख में, कैंसर पीड़ित घनिष्ठ मित्र और संगी-पत्रकार के शब्द याद किये l “कभी न भूलना,” सहकर्मी ने कहा, “यह महत्वपूर्ण नहीं आपने कितनी लम्बी यात्रा की है; आप क्या वापस लाए हैं महत्वपूर्ण है l”

भजन 37 दाऊद की चरवाहा से सैनिक से राजा तक की जीवन यात्रा से “वापस लायी हुई बातों” की सूची हो सकती है l भजन 37 दुष्ट का धर्मी से तुलना, और प्रभु में भरोसा करनेवालों की पुष्टि करनेवाले दोहा श्रृंखला है l

“कुकर्मियों से मत कुढ़, कुटिल काम करनेवालों के विषय डाह न कर ! क्योंकि वे घास के समान ... मुरझा जाएँगे” (पद.1-2) l

“मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, ... चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है” (पद.23-24) l

“मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूँ; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े माँगते देखा है” (पद.25) l

परमेश्वर ने हमें, हमारे जीवन के अनुभवों से क्या सिखाया है? हमने कैसे उसकी विश्वासयोग्यता और प्रेम का अनुभव् किया है? किस तरह परमेश्वर के प्रेम ने हमारे जीवनों को गढ़ा है?

महत्वपूर्ण यह नहीं हम जीवन में कितनी दूर चले हैं, किन्तु जो हम वापस लेकर आये हैं l

समाज निर्माण

हेनरी नोवेन कहते हैं, “समाज” ऐसा स्थान है जहाँ वह व्यक्ति जिसके साथ आप शायद ही रहना पसंद करें हमेशा आपके साथ रहता है, l अक्सर हम अपने पसंदीदा लोगों के चारों ओर रहते हैं, जो एक क्लब अथवा गुट होता है, समाज नहीं l कोई भी क्लब बना सकता है; समाज निर्माण में मनोहरता, सहभाजी दर्शन, और मेहनत चाहिए l

इतिहास में मसीही कलीसिया यहूदी और गैर-यहूदी, पुरुष और स्त्री, दास और स्वतंत्र को बराबरी का दर्जा देनेवाली प्रथम व्यवस्था थी l प्रेरित पौलुस ने यह “भेद ... जो ... परमेश्वर में आदि से गुप्त था” की सार्थकता बतायी l पौलुस ने कहा कि विविध सदस्यों को मिलाकर एक समाज के निर्माण से, हमारे पास संसार के ध्यान के साथ-साथ पार अलौकिक संसार का ध्यान भी आकर्षित करने का अवसर है (इफि. 3:9-10) l

कलीसिया इस कार्य में कई तरीके से दुर्भाग्यवश पराजित हुई है l  फिर भी, कलीसिया ही एकमात्र स्थान है जहाँ मैं पीढ़ियों को एक साथ आते देखता हूँ : नवजात जो अभी भी माताओं की बाहों में हैं, समस्त गलत समय में कसमसाते और खीस दिखाते बच्चे, जिम्मेदार व्यस्क जो हर समय उचित कार्य करना जानते हैं, और वे जो उपदेशक के लम्बे सन्देश देने पर सो जाते हैं l

यदि हम सामाजिक अनुभव चाहते हैं जो परमेश्वर हमें देना चाहता है, हमारे पास  “अपने से भिन्न” लोगों की मण्डली खोजने का कारण है l

United States

Our Story Isn't About Us.

It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

Over the…

हमारा उद्देष्य

हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।

हमारा दर्शन

हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।