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Articles by fabiolafrancis

हू-आ!

अमरीकी सेना की उक्ति “हू-आ” सैन्य दस्ता द्वारा कन्ठ से उच्चारित अनुमोदन है l इसका मूल अर्थ इतिहास में खो गया, किन्तु कुछ कहते हैं यह एक पुराने परिवर्णी शब्द HUA से है - सुना गया(Heard), समझा गया(Understood), और पालन किया गया(Acknowledged) l मैंने यह शब्द आरंभिक प्रशिक्षण में सुना l

वर्षों बाद, बुधवार प्रातःकाल पुरुष बाइबल अध्ययन सभा में…

जब प्रश्न शेष हों

अक्टूबर 31, 2014 को एक प्रयोगात्मक वायुयान जांच उड़ान में टूटकर मोजावे मरुभूमि में दुर्घटनाग्रस्त हो गया l सहचालक मर गया जबकि चालक बच गया l दुर्घटना का कारण जांचकर्ता नहीं जान सके l एक अखबार ने दुर्घटना के विषय लिखा “प्रश्न शेष हैं l”

सम्पूर्ण जीवन हम संतोषजनक स्पष्टीकरण के बिना दुख अनुभव करेंगे l दूरगामी प्रभाव के साथ…

सब उसकी कृपा

हमारी जीवन यात्रा में एक आवर्तक कठिनाई क्षणिक ज़रूरतों पर अत्यधिक केन्द्रित होकर भूल जाना है कि हमारे पास क्या है l मुझे यह ताकीद मिली जब हमारी कलीसिया की गायक-मण्डली ने भजन 103 पर आधारित एक गाना गया l “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना” (पद. 2) l हमारा प्रभु क्षमाशील,…

क्रिसमस का बलिदान

हेनरी की उत्कृष्ट कृति “The Tale of the Magi” आर्थिक संघर्ष करते एक विवाहित युवा जोड़ा, जिम और डेला की कहानी है l क्रिसमस के समय वे एक दुसरे को विशेष उपहार देना चाहते हैं, किन्तु आर्थिक तंगी के कारण वे कठोर निर्णय लेते हैं l जिम अपनी एकमात्र बहुमूल्य निधि सोने की घड़ी बेचकर डेला के खूबसूरत बालों के…

Annuals_Hindi_2016

आपके द्वारा यीशु मसीह के साथ बनाया गया रिश्ता सब रिश्तों से विशेष होगा l इसलिए हम चाहते हैं कि समस्त राष्ट्र के लोग जाने कि वह कौन है और उसके साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध स्थापित करें l हम चाहते हैं सभी लोग अपने विश्वास में उन्नत्ति करें, मसीह के स्वरुप में और भी ढलते जाएँ, और परमेश्वर के वचन की…

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हम क्या विश्वास करते हैं...

हमारा विश्वास  

 

हम विश्वास करते हैं कि पुराना और नया नया नियम परमेश्वर द्वारा प्रेरित वचन है, जिसकी मूल पाण्डुलिपियों में कोई त्रुटि नहीं है, जो मसीह में पूरी हुई है, और हमारी सृष्टि, पतन, छुटकारा और उद्धार का प्रकाशन है।

हम त्रिएक परमेश्वर: पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा में विश्वास करते हैं।

हम विश्वास करते हैं कि यीशु मसीह पूर्ण…

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अदृश्यता की अंगूठी

यूनानी दार्शनिक प्लेटो (c. 427-c. 348 ई.पु.) मानव हृदय के अँधेरे भाग पर ज्योति चमकाने का काल्पनिक तरीका खोज लिया था l उसने एक चरवाहे की कहानी बतायी जिसे अचानक भूमि की गहराई में दबी एक सोने की अंगूठी मिली l एक दिन भूकंप से पहाड़ के निकट एक कब्र खुल गई और अंगूठी चरवाहे को दिखाई दी l संयोग से उसे यह भी ज्ञात हुआ कि उस जादुई अंगूठी को पहननेवाला इच्छा से अदृश्य हो सकता था l अदृश्यता पर विचार करते हुए, प्लेटो ने एक प्रश्न किया : यदि लोग को पकड़े जाने और दंड पाने का भय नहीं होता, क्या वे गलत करने से परहेज करते?

यूहन्ना के सुसमाचार में यीशु इस विचार को एक भिन्न दिशा में ले जाता है l वहां पर, अच्छा चरवाहा, यीशु, ऐसे हृदयों की बात करता है जो अँधेरे की आड़ में अपने कार्यों को छिपाते हैं (यूहन्ना 3:19-20) l वह हमारे छिपाने की इच्छा पर हमारा ध्यान हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं करता है, किन्तु उसके द्वारा उद्धार पाने के लिए (पद.17) l हृदयों का चरवाहा होकर, वह हमारे मानव स्वभाव के सबसे ख़राब हिस्से को भी प्रगट करके हमें बताता है कि परमेश्वर हमसे कितना अधिक प्रेम करता है (पद.16) l

परमेश्वर अपनी करुणा में हमें अंधकार से निकलकर ज्योति में उसका अनुसरण करने के लिए आमंत्रित करता है l

सम्पूर्ण पहुँच

कुछ वर्ष पूर्व, मेरा एक मित्र मुझे प्रथम गोल्फ प्रतियोगिता देखने के लिए आमंत्रित किया l पहली बार देखने के कारण, मेरी अपेक्षाएं शून्य थीं l वहाँ पहुँचकर, मैं उपहार, सूचना, और गोल्फ के मैदान का नक्शा पाकर चकित हुआ l लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि हमें 18 वीं ग्रीन (गोल्फ खेल में एक विशेष बिंदु/स्थान) के पीछे विशिष्ट दीर्घा में पहुँच मिली, जहाँ मुफ्त भोजन और बैठने का स्थान था l यद्यपि मैं इस आतिथ्य दीर्घा में स्वयं नहीं पहुँच सकता था l मुख्य व्यक्ति मेरा मित्र था; केवल उसके द्वारा मुझे पूर्ण पहुँच मिली l

खुद पर भरोसे से हम, नाउम्मीदी में परमेश्वर से दूर रहते l किन्तु यीशु, हमारा दंड लेकर, अपना जीवन और परमेश्वर तक पहुँच देता है l प्रेरित पौलुस ने लिखा, “[परमेश्वर की इच्छा थी कि] अब कलीसिया के द्वारा, परमेश्वर का विभिन्न प्रकार का ज्ञान ... प्रगट किया जाए” (इफि. 3:10) l इस ज्ञान ने यहूदी और गैरयहूदी का मसीह में मेल कराया, जिसने हमारे लिए परमेश्वर पिता तक पहुँच दी l “[यीशु पर] विश्वास करने से साहस और भरोसे के साथ परमेश्वर के निकट आने का अधिकार है” (पद.12) l

यीशु में भरोसा करने पर, हमें सबसे महान पहुँच मिलती है-परमेश्वर तक पहुँच जो हमसे प्रेम करता है और हमसे सम्बन्ध रखना चाहता है l

सम्पूर्ण मन से!

कालिब “सम्पूर्ण मन” का व्यक्ति था l वह और यहोशू मूसा और लोगों को प्रतिज्ञात देश की छानबीन रिपोर्ट देनेवाले बारह-व्यक्तियों की टोह लेनेवाली टीम का हिस्सा थे l कालिब ने कहा, “हम अभी ... उस देश को अपना कर लें; क्योंकि निःसंदेह हम में ऐसा करने की शक्ति है” (गिनती 13:30) l किन्तु टीम के बाकी दस लोगों ने परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के बाद भी, इसे असंभव कहकर केवल बाधाएं देखीं (पद. 31-33) l

दस लोगों द्वारा लोगों को हताश करके परमेश्वर के विरुद्ध बड़बड़ाने से उन्हें निर्जन-स्थान में चालीस वर्ष भटकना पड़ा l किन्तु कालिब डटा रहा l परमेश्वर ने कहा, “इस कारण कि ... कालिब के साथ और ही आत्मा है, और उसने ... मेरा अनुसरण किया है, मैं उसको उस देश में ... पहुँचाऊँगा, और उसका वंश उस देश का अधिकारी होगा” (गिनती 14:24) l पैंतालिस वर्ष बाद परमेश्वर ने 85 वर्षीय कालिब को, हेब्रोन नगर दिया “क्योंकि वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था” (यहोशू 14:14) l

शताब्दियों बाद एक व्यवस्थापक ने यीशु से पूछा, “कौन सी आज्ञा बड़ी है?” यीशु ने उत्तर दिया, “ ‘तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन ... सारे प्राण, ... सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख l’ बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है” (मत्ती 22:35-38) l

आज, कालिब हमारे मन के सम्पूर्ण प्रेम, भरोसा, और समर्पण के योग्य परमेश्वर में अपने भरोसे से हमें प्रेरित कर रहा है l