हमारी प्रतिदिन की रोटी

घेरनेवाली आवाज़(Surround Sound)

वाल्ट डिज़नी ने सर्वप्रथम चलचित्र की आवाज़ सुनने का स्टीरियोफोनिक धवनि” या सराउंड साउंड प्रस्तुत किया क्योंकि निर्माता चाहते थे कि दर्शक संगीत एक नए ढंग से सुने l

किन्तु “सराउंड साउंड” का उपयोग हजारों वर्ष पहले, नहेम्याह ने यरूशलेम की पुनःनिर्मित दीवार के समर्पण के समय किया था l “मैं ने यहूदी हाकिमों [के] ... दो बड़े दल ठहराए, जो धन्यवाद करते हुए ... चलते थे,” उसने कहा (नहे. 12:31) l दो संगीत समूह दक्षिण की ओर, अर्थात् कूड़ाफाटक की ओर ... चले l एक बांयीं ओर और दूसरा दाहिनी ओर चला, और उन्होंने यरूशलेम की शहरपनाह को स्तुति से घेर लिया (पद. 31, 37-40) l

संगीत समूहों ने लोगों को आनंद करने में अगुवाई की क्योंकि “परमेश्वर ने उनको बहुत ही आनंदित किया था” (पद.43) l वास्तव में, उनके आनंद की ध्वनि दूर दूर तक फ़ैल गई (पद.43) l

उनकी प्रशंसा परमेश्वर की सहायता का परिणाम था क्योंकि लोग सम्बल्लत जैसे शत्रुओं के विरोध पर विजय पाकर दीवार को पुनःनिर्मित किया था l परमेश्वर ने हमें क्या दिया है जिससे आनंद और प्रशंसा उमड़ता है? परमेश्वर का हमारे जीवनों में स्पष्ट मार्गदर्शन? या हमारा एकमात्र उपहार : उद्धार?

शायद हम अपनी प्रशंसा से “सराउंड साउंड” नहीं रच सकते, किन्तु हम परमेश्वर द्वारा प्राप्त “महान आनंद” में आनंदित हों l तब दूसरे हमें परमेश्वर की प्रशंसा करते सुनकर हमारे जीवनों में उसके कार्य देख सकते हैं l

खुबसूरत एकता

तीन बड़े हिंसक पशुओं का आपस में लिपटना और खेलना अति असामान्य है l किन्तु प्रतिदिन जोर्जिया के पशु शरणस्थल में बिलकुल यही होता है l 2001 में उपेक्षा और दुर्व्यवहार पश्चात, एक शेर, बंगाल का एक बाघ, एक काले  भालू को नोआह आर्क पशु शरणस्थल ने बचाया l “हम उनको अलग रख सकते थे,” उपनिदेशक ने कहा l “किन्तु इसलिए कि वे एक परिवार की तरह आए थे, हमने उनको एक साथ रखे l” तीनों ने दुर्व्यवहार के समय  एक दूसरे में सुख पाया, और, उनकी भिन्नता के बावजूद, वे शांति से एक दूसरे के साथ रहते हैं l

एकता खुबसूरत बात है l किन्तु जिस एकता के विषय पौलुस इफिसुस के विश्वासियों को लिखता है, अनूठा है l पौलुस इफिसियों को मसीह में एक देह के अंग की तरह अपनी बुलाहट के अनुकूल जीवन जीने को कहता है (इफि. 4:4-5) l पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से एकता में रहकर उन्होंने दीनता, नम्रता, और धीरज विकसित की l इस तरह का आचरण हमें प्रेमपूर्वक मसीह यीशु में सामान्य आधार द्वारा “एक दूसरे को सह[ने] (4:2) की अनुमति देता है l

हमारी भिन्नताओं के बावजूद, परमेश्वर के परिवार के सदस्य के रूप में उसने हमारा मेल हमारे उद्धारकर्ता की मृत्यु द्वारा किया और हमारे जीवनों में पवित्र आत्मा के कार्य द्वारा परस्पर मेल कराया l

स्थायी दयालुता

मैं बचपन में एल. फ्रैंक बौम की लैंड ऑफ़ ओज़ पुस्तकों का उत्साही पाठक था l हाल ही में मुझे रिंकीटिंक इन ओज़  समस्त मूल कलाकृतियों के साथ मिली l मैं पुनः बौम के अदम्य, दयालु राजा रिंकीटिंक की व्यवहारिक भलाइयों पर हँसा l युवराज इंगा उत्तम वर्णन करता है : “उसका हृदय दयालु और कोमल है और यह बुद्धिमान होने से बेहतर है l”

किनता सरल और विवेकपूर्ण l फिर भी हमारे किसी प्रिय का हृदय किस ने कठोर शब्द से नहीं दुखाया है? ऐसा करके, हम उस समय की शांति और सुख में विघ्न डालकर   अपने प्रेमियों से की गई भलाइयों को बिगाड़ते हैं l  “एक छोटी सी दयाहीनता एक बड़ी गलती है,” 18 वीं शताब्दी के अंग्रेजी लेखक हैना ने कहा l

और यहाँ खुसखबरी है : कोई भी दयालु हो सकता है l शायद हम प्रेरणादायक उपदेश, कठिन प्रश्नों का हल न दे सकें, अथवा बहुतों को सुसमाचारित न कर सकें, किन्तु दयालु हो सकते हैं l

कैसे? प्रार्थना द्वारा l यही हमारे हृदयों को नम्र बना सकता है l “हे यहोवा, मेरे मुख पर पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार की रखवाली कर! मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दें” (भजन 141:3-4) l

संसार, जहाँ प्रेम ठंडा हो गया हैं, हमारे द्वारा दूसरों के समक्ष परमेश्वर के हृदय से निकलने वाली दयालुता सबसे अधिक सहायक और चंगा करने वाली होगी l

United States

Our Story Isn't About Us.

It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

Over the…

हमारा उद्देष्य

हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।

हमारा दर्शन

हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।