Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by जोशील डिक्सन

जो भी हम करते हैं

सी. एस. लयूईस ने सरप्राइज्ड बाई जॉय(Surprised by Joy) पुस्तक में स्वीकार किया कि झटकारते हुए, संघर्ष-अनुक्रिया करते हुए, क्रोधित, और बच निकलने के लिए हर दिशा में देखने के बाद तैतीस वर्ष की उम्र में उन्होंने मसीहियत को ग्रहण किया l लयूईस के अपने व्यक्तिगत प्रतिरोध, उसकी गलतियाँ, और जिन बाधाओं का उन्होंने सामना किया था, के बावजूद, प्रभु ने उन्हें विश्वास का साहसी और रचनात्मक समर्थक बना दिया l लयूईस परमेश्वर की सच्चाई और प्रेम को शक्तिशाली लेखों और उप्नयासों के द्वारा घोषित किया जो आज भी पढ़े और अध्ययन किया जाते हैं, और उनकी मृत्यु के पचपन वर्षों से अधिक के बाद भी साझा किये जाते हैं l उनका जीवन उनके विश्वास को प्रतिबिंबित करता है कि एक व्यक्ति “एक और लक्ष्य निर्धारित करने या एक नया दर्शन/स्वप्न देखने के लिए कभी भी बहुत बूढ़ा नहीं होता है l”

जब हम योजना बनाते हैं सपनों का पीछा करते हैं, परमेश्वर हमारे उद्देश्यों को शुद्ध कर सकता है और हम जो भी करते हैं उनको उसे समर्पित करने के लिए हमें सशक्त बनाता है (नीतिवचन 16:1-3) l सबसे साधारण कार्यों से लेकर महानतम चुनौतियों तक, हम अपने सर्शक्तिमान सृष्टिकर्ता की महिमा के लिए जीवन जी सकते हैं, जिसने “सब वस्तुएँ विशेष उद्देश्य के लिए बनाई हैं” (पद.4) l हर एक कार्य, हर एक शब्द, और हर एक विचार हृदय को छू जानेवाली आराधना का प्रगटीकरण हो सकता है, हमारे प्रभु के आदर में एक त्यागपूर्ण उपहार, जब वह हमारी हिफाजत करता है (पद.7) l

परमेश्वर हमारी सीमाओं, हमारी शर्तों, या तय करने या छोटे सपने देखने की हमारी प्रवृति द्वारा सीमित नहीं किया जा सकता है l जब हम – उसके प्रति समर्पित और उसपर निर्भर होकर –उसके लिए जीने का निर्णय करते हैं वह हमारे लिए अपनी योजनाएं पूरी करेगा l जो हम करने में सक्षम हैं उसके साथ, उसके लिए, और केवल उसके कारण किये जा सकते हैं l

जीएं l प्रार्थना करें l प्रेम करें l

यीशु में दृढ़ विश्वासी माता-पिता से प्रभावित प्रसिद्ध धावक जेसी ओवन्स साहसी विश्वासी का जीवन जीया l बर्लिन में, 1936 के ओलिंपिक खेल के दौरान, अमरीकी दल में इने-गिने अफ़्रीकी अमरीकियों में से एक, ओवन्स ने, द्वेष से पूर्ण नाज़ियों और उनके लीडर, हिट्लर की उपस्थिति में चार स्वर्ण पदक प्राप्त किया l उसने जर्मनी के एक साथी खिलाड़ी, लूज़ लॉन्ग, से भी मित्रता की l नाज़ी मत प्रचार के बीच, ओवन्स के प्रगट विश्वास के सरल कार्य ने लूज़ के जीवन को प्रभावित किया l बाद में, लॉन्ग ने ओवन्स को लिखा : “उस वक्त बर्लिन में जब मैं पहली बार तुम से बात की, जब तुम घुटने पर थे, मैं समझ गया था तुम प्रार्थना कर रहे हो . . . मेरे विचार से मैं परमेश्वर में विश्वास कर सकता हूँ l”

ओवन्स ने दिखाया कि विश्वासी कैसे प्रेरित पौलुस की “बुराई से घृणा करो” और “भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे से स्नेह रखो” की आज्ञा पूरी कर सकते हैं (रोमिमों 12:9-10) l यद्यपि वह अपने चारों ओर की बुराई का बदला घृणा द्वारा दे सकता था, ओवन्स ने विश्वास से जीने का चुनाव किया और एक व्यक्ति को प्रेम दिखाया जो आगे चलकर उसका मित्र बनने वाला था और आख़िरकार परमेश्वर में विश्वास करने पर विचार करने वाला था l

जब परमेश्वर के लोग “प्रार्थना में नित्य लगे [रहने]” (पद.12), के लिए समर्पित होते हैं वह हमें “आपस में एक सा मन [रखने]” (पद.16) की सामर्थ्य देता है l

हम प्रार्थना पर आधारित होकर, अपने विश्वास को जी सकते हैं और परमेश्वर के स्वरूप में रचे हुए समस्त लोगों से प्रेम कर सकते हैं l जब हम परमेश्वर को पुकारते हैं, वह हमें बेड़ियों को तोड़ने और हमारे पड़ोसियों के साथ पुल बांधने में/अंतर मिटाने में सहायता करेगा l

परमेश्वर की रचनात्मकता का उत्सव मनाना

जैसे ही चर्च प्रेक्षालय (auditorium) संगीत से भर गया, रंग के प्रति दृष्टिहीन कलाकार लैंस ब्राउन मंच पर आया l वह एक बड़े सफ़ेद फलक के सामने खड़ा था, उसकी पीठ दर्शकों की ओर थी और उसने अपने ब्रश को काले पेंट में डुबोया l उसने सरलता से फलक पर तूलिका फेरते हुए एक क्रूस बनाया l अपने हाथों और तूलिकाओं का उपयोग करते हुए, इस दृश्य कहानी वाचक ने मसीह के क्रूसीकरण और पुनरुत्थान के अनेक तस्वीरें बना डालीं l उसने फलक के बड़े खण्डों को काले रंग से भर दिया और छः मिनट से भी कम समय में इस अमूर्त चित्रकला में नीला और सफेद रंग भरकर पूरा कर दिया l उसने फलक को उठाकर  उल्टा कर दिया, और एक छिपे हुए चित्र को प्रगट किया – करुणा से पूर्ण चेहरा – यीशु l

ब्राउन ने कहा कि जब उसके एक मित्र ने उससे चर्च आराधना में गति-चित्रकारी करने की सलाह दी वह अनिच्छुक था l फिर भी अब वह अंतर्राष्ट्रीय यात्रा करके आराधना करने में लोगों की अगुवाई करते हुए चित्रकारी करके दूसरों के साथ मसीह को साझा करता है l

प्रेरित पौलुस परमेश्वर द्वारा अपने लोगों को दिए गए विविध वरदानों के महत्त्व और उद्देश्य को अनुमोदित करता है l उसके परिवार का हर एक सदस्य प्रभु की महिमा करने और दूसरों को प्रेम में विकसित करने के लिए सज्जित किया गया है (रोमियों 12:3-5) l पौलुस हमें अपने वरदानों को पहचान कर दूसरों को लाभ पहुंचाने और यीशु की ओर इंगित करते हुए कर्मठता और प्रसन्नता से सेवा करने हेतु उत्साहित करता है (पद. 6-8) l

परमेश्वर ने हममें से हर एक को पूरे मन से परदे के पीछे या सबसे आगे रहकर सेवा करने के लिए आत्मिक वरदान, गुण, कौशल और अनुभव दिए हैं l जब हम उसके रचनात्मकता का उत्सव मानते हैं, वह हमारी अद्वितीयता का उपयोग सुसमाचार फैलाने और प्रेम में दूसरों को निर्मित करने के लिए करता हैं l

वह कौन है?

अपना सुहागरात(honeymoon) मनाने के बाद अपने घर लौटते समय, हम दोनों पति-पत्नी एअरपोर्ट पर अपना सामान चेक-इन करने के लिए इंतज़ार करने लगे l मैंने उसे कुहनी से थोड़ा धक्का मारकर थोड़ी दूर खड़े एक व्यक्ति की ओर इशारा किया l

मेरे पति ने कनखी मार कर कहा l “वह कौन है?”

मैंने उत्तेजित होकर जोर से उस अभिनेता की सबसे अधिक उल्लेखनीय भूमिका बतायी, तब उनके निकट जाकर उनसे हमारे साथ एक तस्वीर खिंचवाने का आग्रह किया l बीस साल के बाद भी, मैं उस दिन की कहानी साझा करना चाहती हूँ कि मैं एक फ़िल्म अभिनेता से मिली थी l

एक लोकप्रिय अभिनेता को मान्यता देना एक बात है, परन्तु एक और अधिक विशेष है जिसे मैं व्यक्तिगत रूप से जानकार धन्यवादित हूँ l “वह प्रतापी राजा कौन है?” (भजन 24:8) l भजनकार दाऊद सर्वशक्तिमान प्रभु को सृष्टिकर्ता, संभालनेवाला, और सभी पर राज्य करनेवाला दर्शाता है, “पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है, जगत और उस में निवास करनेवाले भी l क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है” (पद.1-2) l विस्मयाभिभूत आश्चर्य में, दाऊद परमेश्वर के सभी के ऊपर, फिर भी घनिष्टता से सुलभ घोषित करता है (पद.3-4) l हम उसे जान सकते हैं, उसके द्वारा सशक्त किये जाते हैं, और जब हम उसके लिए जीवन जीते हैं, हमारे पक्ष में लड़ने के लिए उसपर भरोसा कर सकते हैं (पद.8) l

परमेश्वर हमें उसे एकमात्र उत्कृष्ट दूसरों के साथ साझा करने योग्य घोषित करने के सुअवसर देता है l जब हम उसके चरित्र को प्रतिबिंबित करते हैं, जो उसे नहीं पहचानते हैं के पास पूछने के और भी कारण है , “वह कौन है?” दाऊद की तरह, हम भी विस्मयाभिभूत आश्चर्य के साथ प्रभु की ओर इशारा करके उसकी कहानी बता सकते है!

मरुभूमि में पुष्पित

दूसरी मरुभूमियों की तरह माहावी मरुभूमि(Mojave Desert) में रेत के टीले, निर्जल घाटियाँ, ढलुआ पठार, और पहाड़ सम्मिलित हैं l परन्तु अमरीकी जीवविज्ञानी एडमण्ड जेगर ने देखा कि कुछ वर्षों के बाद होनेवाली व्यापक बारिश का परिणाम “ढेर सारे फूलों का खिलना होता है कि लगभग एक फुट रेत या कंकरीली मिटटी के नीचे ढेर सारे फूल छिपे होते हैं l” यद्यपि, माहावी के जंगली फूलों का दिखाई देना वार्षिक घटना नहीं है l शोधकर्ता पुष्टि करते हैं कि इससे पहले कि मरुभूमि चमकीले रंगों के फूलों से ढक जाए, बिलकुल ठीक समय में सुखी भूमि को आँधी-पानी और सूर्य की गर्मी से भीगना ज़रूरी होता है l

निर्जल भुभाग के बावजूद जीवन उत्पन्न करने वाला परमेश्वर की यह छवि मुझे यशायाह का स्मरण कराता है l समस्त राष्ट्रों को परमेश्वर के न्याय का सन्देश पहुँचाने के बाद वह  आशा के एक उत्साहवर्धक दर्शन साझा करता है (यशायाह 35) l एक भविष्य युग का वर्णन करते हुए जब परमेश्वर सब बातों को ठीक कर देगा, नबी ने कहा, “जंगल और निर्जल देश प्रफुल्लित होंगे, मरुभूमि मगन होकर केसर के समान फूलेगी” (पद.1) l उसने घोषित किया कि परमेश्वर के बचाए हुए लोग उसके राज्य में “जयजयकार करते हुए सिय्योन में आएँगे, और उनके सिर पर सदा का आनंद होगा l वे हर्ष और आनंद पाएंगे और शोक और लम्बी सांस का लेना जाता रहेगा” (पद.10) l

परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं में सुरक्षित अनंत भविष्य के साथ, हम जीवन के शुष्क और तर करनेवाले अतिवृष्टि के ऋतुओं में उसपर भरोसा कर सकते हैं l हम उसके प्रेम में जड़वत होकर, बिलकुल ठीक समय तक, बढ़ते हुए, जब यीशु लौटेगा और सभी बातों को ठीक कर देगा, उसकी समानता में पुष्पित हो सकते हैं l

निडर प्रेम

वर्षों तक मैंने अपने हृदय की सुरक्षा के लिए भय का एक ढाल पहन रखा था l यह नयी बातों का प्रयास करने, अपने सपनों का पीछा करने, और परमेश्वर की आज्ञा मानने से बचने के लिए एक बहाना बन चुका था l परन्तु हानि का भय, दुःख, और तिरस्कार ने मेरे लिए  परमेश्वर और दूसरों से प्रेमी सम्बन्ध विकसित…

प्रेम रुकेगा नहीं

जब मैं उन्नीस वर्ष की हो गयी, और वर्षों पहले जब मेरे पास पेजर या मोबाइल फ़ोन नहीं था, मैं अपनी माँ से कई सौ मील से अधिक की दूरी पर रहने चली गयी l एक दिन सुबह के समय, फोन पर नियोजित बातचीत का समय भूलकर, मैं बहुत सुबह रोज के काम के लिए निकल गयी l उस रात को, दो पुलिस वाले मुझसे मिलने आए l माँ चिंतित थी क्योंकि मैंने उनसे बात करने का मौका कभी नहीं छोड़ा था l बार-बार पुकारने के बाद और व्यस्त संकेत मिलने पर, उन्होंने अधिकारियों को सूचित कर उनसे मेरे विषय पता लगाने का निवेदन किया l उनमें से एक अधिकारी ने मेरी ओर मुड़कर कहा, “यह जानना आशीषमय है कि प्रेम आपको ढूँढने में नहीं रुकेगा l”

जब मैंने अपनी माँ को पुकारने के लिए फ़ोन उठाया, मैंने जाना कि मैंने भूल से रिसीवर को उसके उपयुक्त स्थान से अलग रख दिया था l मेरे क्षमा मांगने के बाद, उन्होंने कहा कि यह खुशखबरी परिवार और मित्रों को बताना ज़रूरी हैं जिन्हें उन्होंने हमारे गुम होने के विषय सूचित किया था l मैंने यह सोच कर फ़ोन रख दिया कि वह थोड़ा अति प्रतिक्रिया करेगी, यद्यपि यह अधिक प्रेम किया जाना अच्छा महसूस हुआ l

बाइबल परमेश्वर का जो प्रेम है, एक खुबसूरत तस्वीर बनाती है, जो लगातार अपने भटकनेवाले बच्चों को अपने निकट बुलाता है l एक अच्छे चरवाहा की तरह, वह हमारी चिंता करता है और हर एक खोयी हुयी भेड़ को ढूंढता है, परमेश्वर के हर एक प्रिय बच्चे की बहुमूल्य कीमत की पुष्टि करता है (लूका 15:1-7) l

प्रेम हमें कभी भी ढूंढना नहीं छोड़ता है l वह हमारा पीछा हमारे उसके पास लौटने तक करेगा l हम दूसरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं जिन्हें जानना है कि प्रेम – परमेश्वर – भी उनको ढूँढना नहीं छोड़ता है l

रचनात्मकता का उत्सव

कैलिफोर्निया के बाजा के निकट चार हज़ार फीट नीचे समुद्र की गहराई में, कभी-कभी दिखाई देनेवाली जेलिफ़िश(समुद्री जीव) जल-प्रवाह के साथ नाचती हुई दिखाई देती है l गहरे रंग के जल की पृष्ठभूमि में उसका शरीर नीला, बैगनी, और गुलाबी रंगों में प्रतिदीप्त हल्की छाया के साथ दिखाई दे रहा था l उसके घंटी नुमा सिर के हर इशारे से सुन्दर स्पर्शक खूबसूरती से तरंगित हो रहे थे l जब मैं नेशनल जियोग्राफिक पर इस विशेष जेलीफिश(Halitrephes maasi) का अद्भुत दृश्य देख रही थी, मैंने इस पर विचार किया कि परमेश्वर ने किस तरह इस सुन्दर जेलिटिन के प्रकार के जंतु को ख़ास रूप दिया l उसने अन्य 2,000 प्रकार के जेलिफिश को भी रूप दिया जिन्हें वैज्ञानिकों ने अक्टूबर 2017 तक पहचाना है l

यद्यपि हम परमेश्वर को सृष्टिकर्ता के रूप में जानते हैं, क्या हम बाइबल के पहले अध्याय में प्रगट अद्भुत सच्चाई को वास्तविक रूप से समझने में काफी शिथिल हो जाते हैं? हमारे अद्भुत परमेश्वर ने रचनात्मक विविध संसार को जिसे उसने अपने वचन की सामर्थ्य से रचा था प्रकाश और जीवन दिया l उसने “जाति जाति के बड़े बड़े जल-जंतुओं की . . . भी सृष्टि की . . .  जिन से जल बहुत ही भर गया” (उत्पत्ति 1:21) l वैज्ञानिक परमेश्वर द्वारा आरम्भ में रचे गए अद्भुत प्राणियों का केवल एक अंश ही खोज पाए हैं l

परमेश्वर ने संसार में प्रत्येक व्यक्ति को साभिप्राय बनाया है, हमारी पहली श्वास लेने से पूर्व हमारे जीवन के हर दिन में उद्देश्य डाला है (भजन 139:13-16) l जब हम प्रभु की रचनात्मकता का उत्सव मनाते हैं, हम उन अनेक तरीकों के विषय भी आनंदित हों जो वह हमें उसके साथ और उसकी महिमा के लिए कल्पित करने और रचने में सहायता करता है l

सबसे बड़ा उपहार

वर्षों से मेरी सहेली बारबरा ने मुझे अनगिनत (उत्साहवर्धक) कार्ड्स और विचारशील उपहार दिए हैं। जब मैंने उसे बताया कि मैंने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया है तो उसने मुझे अब तक का सबसे बड़ा उपहार दिया-मेरी पहली बाइबल। उसने कहा. “परमेश्वर से प्रतिदिन मिलने, पवित्रशास्त्र पढ़ने, प्रार्थना करने और उस पर भरोसा रखने और उसकी आज्ञा का पालन करने के द्वारा तुम परमेश्वर की नज़दीकी और आत्मिक परिपक्वता में बढ़ती जाओगी।” मेरा जीवन बदल गया जब बारबरा ने मुझे परमेश्वर को और अच्छे से जानने के लिए आमन्त्रित किया।

बारबरा मुझे प्रेरित फिलिप्पुस की याद दिलाती है। यीशु के फिलिप्पुस को उनके पीछे चलने के लिए आमन्त्रित करने के पश्चात (यूहन्ना 1:43), उस प्रेरित ने तुरन्त अपने मित्र नतनएल को बताया कि “जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्‍ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।” (पद 45) । जब नतनएल ने सन्देह किया, तो फिलिप्पुस से वाद-विवाद, आलोचना नहीं की या अपने मित्र के लिए हार नहीं मान ली। उसने अब उसे यीशु से साक्षात रूप में मिलने के लिए आमन्त्रित किया। उसने उससे कहा “चलकर देख ले।”  

मैं फिलिप्पुस के आनन्द की कल्पना कर सकती हूँ, जब उसने नतनएल को यह कहते हुए सुना कि यीशु “परमेश्वर का पुत्र” और “इस्राएल का राजा” है (पद 49) । यह जानना कितनी बड़ी आशीष है कि उसका मित्र “बड़े बड़े कामों” को देखने से चूकेगा नहीं, जिनकी प्रतिज्ञा यीशु ने की थी कि वे उन्हें देखेंगे (पद 50-51)।

पवित्र आत्मा परमेश्वर के साथ हमारे घनिष्ठ सम्बन्ध का आरम्भ करते हैं और फिर उन सब में वास करते हैं, जो विश्वास के साथ उत्तर देते हैं। वह हमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानने और अपने आत्मा और पवित्रशास्त्र के द्वारा प्रतिदिन उनसे मिलने के योग्य करते हैं। यीशु को और अच्छे से जानने का आमन्त्रण देने और लेने के लिए सबसे बड़ा उपहार है।