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Articles by जोशील डिक्सन

प्रार्थना करने का सही तरीका

मैं उन लोगों की प्रशंसा करती हूँ जो उन दैनिकी में प्रार्थना निवेदन लिखते हैं जो दैनिक उपयोग से फट जाते हैं, जो प्रत्येक प्रार्थना निवेदन और प्रशंसा का रिकॉर्ड रखते हुए विश्वासयोग्यता से अपनी सूची को अपडेट/सुव्यवस्थित रखते हैं l मैं उनसे प्रेरित हूँ जो दूसरों के साथ प्रार्थना के लिए इकठ्ठा होते हैं और जिनके झुके हुए घुटनों से उनके पलंग के निकट रखी दरी घिस जाती हैं l वर्षों से, मैंने उनकी शैली अपनाने का, सिद्ध प्रार्थना जीवन का अनुसरण करने का और लोगों से कहीं अधिक स्पष्टता से वाक्पटुता की नकल करने की कोशिश की है l मैंने प्रार्थना करने का सही तरीका सीखने की इच्छा रखते हुए, जो मेरे विचार से रहस्य था उसको समझने का प्रयास किया l

अंततः, मैंने सीख लिया है कि हमारा प्रभु ऐसी प्रार्थना चाहता है जिसका आरंभ और अंत दीनता है (मत्ती 6:5) l वह हमें घनिष्ट संवाद के लिए आमंत्रित करके हमारी सुनने का वादा करता है (पद.7) l वह हमें निश्चित करता है कि प्रार्थना एक वरदान है, उसके ऐश्वर्य का आदर करने का अवसर (पद.9-10), उसके प्रबंध में भरोसा करने का प्रदर्शन (पद.11), और उसकी क्षमा और मार्गदर्शन में हमारी सुरक्षा की निश्चयता (पद.12-13) l

परमेश्वर हमें भरोसा देता है कि वह हमारी प्रार्थनाओं में उच्चारित और अनुच्चारित हर एक शब्द के साथ-साथ, जो प्रार्थनाएँ आँसुओं के रूप में दिखाई देती हैं, उनको भी सुनता और उनकी भी चिंता करता है l जब हम परमेश्वर और हमारे लिए उसके प्रेम में अपना भरोसा जताते हैं, हम दीन हृदय से प्रार्थना करने के विषय निश्चित होते हैं जो उसके प्रति समर्पित है और उस पर निर्भर है और जो हमेशा प्रार्थना करने का सही  तरीका है l 

तारों के परे

2011 में, द नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एसोसिएशन ने अन्तरिक्ष खोज(अनुसन्धान) के तीस वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया l उन तीन दशकों में, 355 से अधिक लोग अन्तरिक्ष यानों से अन्तरिक्ष में गए  और अंतर्राष्ट्रीय अतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने मे सहायता की l पाँच अंतरिक्ष यानों के सेवामुक्त होने के बाद, नासा(NASA) ने अपना ध्यान गुरुत्वकर्षी और चुम्बकीय क्षेत्र के परे अनुसन्धान पर केन्द्रित कर दिया है l

मानव जाति ने सृष्टि/कायनात की विशालता का अध्ययन करने के लिए, बड़ी मात्रा में धन और समय का निवेश किया है, जिसमें कुछ अन्तरिक्ष यात्रियों की मृत्यु भी शामिल है l  इसके बावजूद हम परमेश्वर के वैभव/प्रताप का प्रमाण माप नहीं सकते हैं l

जब हम सृष्टि के सृजक और संभालनेवाले के विषय विचार करते हैं जो प्रत्येक तारे का नाम जानता है (यशायाह 40:26), हम भजनकार दाऊद द्वारा उसकी महानता की प्रशंसा करने का कारण समझ सकते हैं (भजन 8:1) l  परमेश्वर के हाथों(उँगलियों) के निशान “चंद्रमा और तारागण ... [पर हैं] जो . . .[उसने] नियुक्त किये हैं,” (पद.3) l स्वर्ग और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता सबके ऊपर राज्य करता है, लेकिन अपने सभी प्रिय बच्चों के निकट रहकर उनसे घनिष्ठता और व्यक्तिगत रूप से प्यार करता है (पद.4) l परमेश्वर ने, प्रेम में जो संसार हमें सौंपा है उसकी देखभाल करने, उसको जानने के लिए के लिए हमें महान शक्ति, उत्तरदायित्व, और अवसर देता है (पद.5-8) l

जब हम रात में आकाश को तारों से भरा देखते हैं, परमेश्वर हमें उसको उत्साह और दृढ़ता से खोजने के लिए आमंत्रित करता है l वह हमारे होंठों से निकली प्रत्येक प्रार्थना और प्रशंसा को सुनता है l

उदार दानी

हमारी कलीसिया में परमेश्वर के कार्यों की समीक्षा के बाद, अगुओं ने समुदाय की बेहतर सेवा के लिए एक जिम निर्माण का प्रस्ताव रखा। अगुओं ने निर्माण राशी पहले देने की प्रतिज्ञा की। मेरे पति और मैं इस प्रोजेक्ट के लिए प्रार्थना करने लगे। परमेश्वर निरंतर हमारी ज़रूरतों को पूरा करते आए हैं इस पर विचार कर हमने प्रत्येक माह भेंट देने का निर्णय किया। कलीसिया के भेंट देने द्वारा पूरी इमारत का भुगतान चुकता हो गया।

जिम का उपयोग सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए होते देख मैं परमेश्वर का आभार मानती हूं। मुझे एक और उदार दानी-राजा दाऊद का स्मरण आता है।mयद्यपि परमेश्वर ने उसे अपना मंदिर बनाने के लिए नहीं चुना था, तौभी दाऊद ने अपने सभी संसाधन मंदिर निर्माण के कार्य मे लगा दिए (1 इतिहास 29:1-5) I अगुओं और अन्य लोगों ने भी उदारता पूर्वक दिया (6-9)। राजा ने स्वीकार किया कि उन्हें देने वाला पहले परमेश्वर ही था-सृष्टिकर्ता, पालनहार, और हर वस्तु का स्वामी (पद 10-16)।

परमेश्वर सब वस्तुओं के स्वामी हैं, यह जानकर हम दूसरों के लाभ के लिए आभार और उदारता से दान दे सकते हैं। और हम परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं कि वह हमारी आवश्यकता को पूरा-और हमारी मदद हेतु दूसरों का उदारता पूर्वक प्रयोग भी कर सकते हैं।

अद्भुत निर्माता

एक शौकिया फोटोग्राफर होने के नाते, मैं कैमरे में परमेश्वर की रचनात्मकता की तस्वीरें खींचने का आनंद लेती हूं। फूल की कोमल पंखुड़ियों में, सूर्योदय-सूर्यास्त में, और आकाश रूपी कैनवास पर रंगे बादलों में और झिलमिलाते तारों में मैं उनकी उँगलियों के निशान देखती हूँ।

कैमरे से मैंने चेरी के पेड़ पर चहचहाती गिलहरी, खिलते हुए फूल पर मंडराती तितली, और समुद्र के तट पर धूप सेंकते हुए कछुओं की तस्वीरें ली हैं। हर तस्वीर मुझे अपने अद्भुत निर्माता की आराधना करने के लिए प्रेरित करती है।

भजन संहिता 104 का लेखक परमेश्वर के प्रकृति में बसी कला के कामों का स्तुति गान करता है (पद 24)। वह "विशाल समुद्र, की सराहना करता है जिसमें अनगिनत जलचर हैं" (पद 25) और उनकी निरंतर परवाह करने के लिए वह परमेश्वर में अनन्दित होता है (27-31)। भजनकार अपने चारों तरफ परमेश्वर की सृष्टि की महिमा देखते हुए, उनकी आराधना में कहता है:"मैं जीवन भर यहोवा ...।" (पद 33)।
परमेश्वर की भव्य और विशाल सृष्टि पर मनन करते हुए, हम उनके हाथों की रचनात्मकता और उनके विस्तार को ध्यान से देख सकते हैं। और भजनकार के समान, हम अपने सृष्टिकर्ता को धन्यवाद के साथ आराधना की भेंट दे सकते हैं क्योंकि वह कितने सामर्थशाली, प्रतापी, और प्रेममयी हैं और सर्वदा रहेंगे। हल्लिलूय्याह!

एक अच्छा पिता

मेरे पति अक्सर व्यापार यात्राओं पर रहते थे। हालाँकि वह फोन करते थे, तो भी कुछ कठिन रातें में हमारे नन्हें बेटे जेवियर को तसल्ली देने के लिए यह काफी नहीं होता था। जेवियर को जब पिता की ज़रूरत महसूस होती तो उसे दिलासा देने के लिए उसे मैं वो फोटो दिखाती जिसमें दोनों साथ हैं। ये यादें उसे प्रोत्साहित करतीं, और वह कहता कि, "मेरे पिता अच्छे हैं।"

उनकी अनुपस्थिति में जेवियर को उनके प्रेम की याद दिलाने की जरूरत को मैंने समझा।  अपने  कठिन समय या अकेलेपन में मुझे भी यह इस दिलासे की जरूरत होती है कि कोई मुझे प्रेम करता है खासतौर पर मेरा स्वर्गीय पिता।

रेगिस्तान में शत्रुओं से छिपता हुआ दाऊद परमेश्वर का अभिलाषी था (भजन संहिता 63:1)। परमेश्वर का असीम सामर्थ और प्रेम याद कर वह उनकी महिमा करने लगा (2-5), कठिन रातों में भी दाऊद अपने विश्वासयोग्य पिता की प्रेमपूर्ण परवाह (6-8) में आनन्दित था।

जब लगने लगे कि परमेश्वर हमारे साथ नहीं हैं, तो हम याद रखें कि परमेश्वर कौन हैं और उन्होंने अपने प्रेम का प्रदर्शन कैसे किया है। हमारे जीवन में उनकी भलाई को और पवित्रशास्त्र में वर्णित कार्यों को याद करें, और वह अनगिनत तरीकों में बताएँगे कि वह एक अच्छे अब्बा पिता हैं और हमसे प्रेम करते हैं।

प्रेम का उदार प्रगटन

 

हमारी शादी की सालगिरह पर मेरे पति, एलन मुझे ताज़े फूलों का गुलदस्ता देते हैं l संगठित पुनःनिर्माण कंपनी (corporate restructure)में नौकरी छूटने पर, मैंने प्रेम के खर्चीले प्रदर्शन जारी रहने की आशा नहीं की थी l किन्तु हमारे उन्नीसवीं सालगिरह पर, डाइनिंग हॉल के मेज़ पर रखे फूलों के रंगीन गुलदस्ते ने मेरा स्वागत किया l इसलिए कि उसके लिए यह वार्षिक रीत महत्वपूर्ण थी, एलन ने हर माह कुछ रूपये बचाकर मेरे लिए अपना व्यक्तिगत प्रेम प्रगट किया l

जिस तरह पौलुस ने कुरिन्थुस के विश्वासियों को संबोधित करते हुए उत्साहित किया, उसी प्रकार मेरे पति की चिन्ताशील योजना ने मेरे लिए भरपूर उदारता प्रगट की l प्रेरित पौलुस ने कलीसिया को उनके साभिप्राय और उत्साहवर्धक भेंट के लिए प्रशंसा करते हुए (2 कुरिं.9:2,5), उनको याद दिलाया कि परमेश्वर उदार और आनंद दे दिए गए भेंट से प्रसन्न होता है (पद.6-7) l आखिरकार, कोई भी हमारे प्रबंधकर्ता, जो हमारी हर एक ज़रूरत को पूरी करने को तत्पर है, से अधिक नहीं देता है, (पद.8-10) l

हम हर प्रकार के भेंट देने में उदार हो सकते हैं, परस्पर देखभाल कर सकते हैं क्योंकि प्रभु हमारे हर एक भौतिक, भावनात्मक, और आत्मिक ज़रूरतों को पूरी करता है (पद.11) l देने के द्वारा, हम परमेश्वर को सभी बातों के लिए धन्यवाद दे सकते हैं l हम दूसरों को भी परमेश्वर से प्राप्त आशीषों के लिए प्रशंसा करने और उसमें से देने हेतु प्रेरित कर सकते हैं (पद.12-13) l मुक्त हाथों का भेंट, प्रेम और कृतज्ञता का उदार प्रदर्शन, परमेश्वर के प्रबंध में हमारे भरोसे को प्रगट कर सकता है l

मैं तुम्हें देख सकता हूँ

जब ज़ेवियर दो वर्ष का था, वह जूते की एक छोटी दूकान के गलियारे में दौड़ लगाने लगा l तब मेरे पति, एलन ने कहा, “मैं तुम्हें देख सकता हूँ,” वह जूते के डिब्बों के पीछे छिपकर खिलखिलाता रहा l
कुछ क्षण बाद, मैंने एलन को घबराकर एक गलियारे से दूसरे में भागते देखा l वे ज़ेवियर को पुकार रहे थे l हम दोनों दौड़ कर स्टोर के सामने आ गए l हमारा बेटा अभी भी खिलखिला रहा था, और हमने उसे दूकान के सामने व्यस्त सड़क की ओर भागते देखा l

कुछ ही पलों में, एलन ने उसे गोद में उठा लिया l हमने उसे बाहों में लेकर परमेश्वर का  धन्यवाद किया l हमने सिसकते हुए अपने छोटे बेटे के गोल-मोल गालों को चूमा l एक वर्ष पूर्व ज़ेवियर के जन्म लेने से पहले मैं अपना पहला गर्भ खो चुकी थी l जब परमेश्वर ने हमें एक बेटा के रूप में आशीषित किया, मैं भयभीत माँ हो गयी l जूते की दूकान वाले अनुभव ने यह जता दिया था कि मैं हमेशा अपने बेटे पर दृष्टि रखने या उसे सुरक्षित रखने में असमर्थ हूँ l किन्तु मैंने चिंता और भय से संघर्ष करते समय अपने सर्व उपस्थित परमेश्वर पर जो मेरा सहायक और सुरक्षा देनेवाला है, भरोसा करके शांति का अनुभव किया l

हमारा स्वर्गिक पिता अपने बच्चों पर सदा अपनी दृष्टि रखता है (भजन 121:1-4) l जबकि हम परीक्षा, दुःख, या हानि को रोकने में असमर्थ हैं, हम सदा उपस्थित रहनेवाले और सुरक्षा देनेवाले परमेश्वर पर जो हमारे जीवनों पर दृष्टि रखता है, निश्चित भरोसे के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं (पद.5-8) l

हम ऐसे दिनों का सामना करेंगे जब हम खुद को खोया हुआ और मजबूर महसूस करेंगे l हम खुद को सामर्थहीन भी महसूस करेंगे जब हम अपनों की सुरक्षा नहीं कर पाएंगे l किन्तु हम सर्वज्ञानी परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं जो सदैव हम पर अर्थात् अपने प्रिय और अतिप्रिय बच्चों पर दृष्टि रखता है l 

जैसे विज्ञापित किया गया

छुट्टियों में, हम दोनों पति-पत्नी ने जॉर्जिया के शाताहुची नदी में रबर के बने नौका से सैर करने का फैसला किया l सैर की तैयारी में सैंडल, ग्रीष्मकालीन कपड़े, और एक चौड़ी टोपी पहनने के बाद हमनें पाया कि विज्ञापन के विपरीत हमारे सैर में थोड़ी गति से नौकायन करना भी शामिल था l यह तो भला था कि हम झागदार पानी में एक अनुभवी जोड़े के साथ नौकायन कर सके l उन्होंने मेरे पति को चप्पु चलाने की मूल बातें सिखाई और गंतव्य तक सुरक्षित पहुँचाने का वादा किया l मैं अपने जीवन रक्षक जैकेट के लिए धन्यवाद देती हूँ l नदी के निचले भाग के दलदली तट पर पहुँचने तक मैं चिल्लाती रही और नौका के प्लास्टिक हैंडल को जोर से पकड़ी रही l मैं नौका से तट पर उतरकर अपने थैले से पानी निचोड़ती रही और मेरे पति ने मेरे गीले कपड़ों को निचोड़ने में सहायता की l हम दोनों खूब खुश हुए, यद्यपि हमारा सैर विज्ञापन के विपरीत था l

उस सैर के विज्ञापन के विपरीत, जिसमें सैर के विषय ख़ास जानकारी नहीं थी, यीशु ने स्पष्ट रूप से अपने शिष्यों को बता दिया था कि भविष्य में कठिन दिन आएँगे l उसने उनसे कह दिया था कि वे सताए जाएंगे और शहीद भी होंगे और कि वह मृत्यु सहकर जी उठेगा l उसने अपनी विश्वसनीयता की गारन्टी देकर उन्हें आश्वस्त भी किया था कि वह निर्विवाद विजय और अनंत आशा की ओर उनकी अगुवाई करेगा (यूहन्ना 16:16-33) l

काश यीशु का अनुकरण करते समय जीवन सरल होता, किन्तु उसने स्पष्ट कर दिया था कि उसके शिष्य समस्याओं का सामना करेंगे l किन्तु उसने उनके साथ रहने का वादा किया है l परीक्षाएं हमारी सीमाओं को परिभाषित नहीं करेंगी, अथवा हमारे लिए परमेश्वर की योजना को नष्ट नहीं करेंगी, क्योंकि यीशु के पुनरुत्थान ने हमें अनंत विजय में पहुँचा दिया है l

सिद्ध पिता

भीड़ भरे एक स्टोर के गलियारे में खड़ी, मैं पिता दिवस का सबसे अच्छा कार्ड खोज रही थी l यद्यपि वर्षों बाद हम दोनों बाप बेटी ने एक तनावपूर्ण सम्बन्ध के बाद मेल-मिलाप कर लिया था, किन्तु मैं कभी भी अपने पिता से निकट सम्बन्ध नहीं रख पायी थी l

मेरे निकट खड़ी उस महिला ने आह भरकर उस कार्ड को फिर से उस शेल्फ में रख दिया l “वे उन लोगों के लिए कार्ड क्यों नहीं बनाते जिनका सम्बन्ध अपने पिता से ठीक नहीं है, किन्तु सही सम्बन्ध बनाने का प्रयास कर रहे हैं?”

मेरे उत्तर देने से पहले ही वह जल्दी से दूकान से बाहर चली गयी, इसलिए मैंने उसके लिए प्रार्थना किया l मैंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि केवल वही सिद्ध पिता है l मैंने उससे अपने पिता से सम्बन्ध मजबूत करने के लिए सामर्थ्य मांगी l

मैं अपने स्वर्गिक पिता से गहरा सम्बन्ध रखने की भी चाहत रखती हूँ l मैं परमेश्वर की नित्य उपस्थिति, सामर्थ्य, और सुरक्षा के लिए दाऊद का भरोसा चाहती हूँ (भजन 27:1-6) l

जब दाऊद ने सहायता माँगी, वह परमेश्वर के उत्तर की आशा रखता था (पद.7-9) l यद्यपि संसार के माता-पिता अपने बच्चों को त्याग देते हैं, छोड़ देते हैं अथवा उनकी उपेक्षा करते हैं, दाऊद ने परमेश्वर की शर्तहीन स्वीकार्यता की घोषणा करता है (पद.10) l वह परमेश्वर की भलाई की निश्चितता में जीता था (पद.11-13) l हममे से कईयों की तरह, दाऊद भी संघर्ष करता था, किन्तु पवित्र आत्मा उसे भरोसा रखने और प्रभु पर निर्भरता कायम रखने में उसकी सहायता करता था (पद.14) l

अनंत के इस ओर हम सब कठिन संबंधों का सामना करेंगे l किन्तु जब लोग चूक करें, हमें छोड़ दें, उस स्थिति में भी हमारा एक मात्र सिद्ध पिता हमसे पूर्ण प्रेम करता है और सुरक्षा देता है l