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Articles by जोशील डिक्सन

फिर . . . प्रार्थना करने का समय

मैं अपने पड़ोसी मिरियम और उसकी छोटी लड़की एलिज़बेथ की ओर हाथ हिलाते हुए अपनी कार को अपने घर के आगे सड़क पर बढ़ाया l इन वर्षों में, एलिज़बेथ वादा किये गए “कुछ मिनटों” की तुलना में लम्बे समय तक चलने वाली हमारी सहज चैट की आदि हो गयी थी और प्रार्थना सभाओं में भाग लेने लगी थी l वह अपने सामने के अहाते के बीच में लगे हुए पेड़ पर चढ़ गयी, एक डाली से अपने पैरों को हिलाने लगी, और व्यस्त हो गयी जब उसकी माँ और मैं बातचीत करते रहे l कुछ समय के बाद, एलिज़बेथ अपनी डाली से नीचे कूदकर  वहाँ आ गयी जहाँ हम दोनों खड़े थे l वह हमारे हाथों को पकड़कर, मुस्कुराई और लगभग गाने लगी, फिर . . . प्रार्थना करने का समय है l” छोटी उम्र में भी, एलिज़बेथ समझने लगी थी कि हमारी मित्रता में प्रार्थना कितना प्रमुख था l 

विश्वासियों को “प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवंत” बनने के लिए उत्साहित करने के बाद (इफिसियों 6:10), प्रेरित पौलुस ने निरंतर प्रार्थना की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष अंतर्दृष्टि प्रदान की l उसने उस आवश्यक हथियारबंदी का वर्णन किया जिसकी ज़रूरत परमेश्वर के लोगों को प्रभु के साथ उनके आत्मिक राह में चाहिए, जो अपनी सच्चाई में सुरक्षा, विवेक और भरोसा देता है (पद.11-17) l हालाँकि, प्रेरित ने जोर देकर कहा कि परमेश्वर प्रदत्त यह सामर्थ्य प्रार्थना के जीवन-दायक उपहार में संकल्पित तन्मयता से बढ़ता है (पद.18-20) l 

परमेश्वर हमारी चिंताओं के विषय सुनता है और फ़िक्र करता है, चाहे उनके विषय दृढ़ता से बोली जाए, सिसकते हुए कहा जाए, या एक दुखते हुए हृदय में छिपा कर रखा जाए l वह सदा हमें अपनी सामर्थ्य में शक्तिशाली बनाने के तैयार रहता है, जब वह वह हमें बार-बार प्रार्थना करने को आमंत्रित करता है l

दो अच्छे हैं

हवाई में,1997 के आयरनमैंन ट्रायथलॉन (एक ऐसा खेल जिसमें साइकिल चलाना, तैराकी और लम्बी दूरी दौड़ना शामिल है) में, दो महिलाएँ समापन रेखा तक पहुँचने के लिए लड़खड़ाते हुए संघर्ष करती रहीं l जब तक सियन वेल्च वेंडी इंग्राहम से टकराई नहीं, तब तक थकीं हुई, धाविकाएँ अपने डगमगाते पैरों पर डटी रहीं l दोनों ज़मीं पर गिर गयीं l खड़े होने के लिए संघर्ष करते हुए, वे आगे को लड़खड़ा गयीं, और समापन रेखा से लगभग बीस मीटर पहले फिर गिर पड़ीं l जब वेंडी अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ने लगी, तो भीड़ ने तालियाँ बजाईं l जब उसकी प्रतियोगी ने पीछा किया, तो उन्होंने जोर से शाबाशी दी l वेंडी ने चौथे स्थान पर समापन रेखा पार की, और वह अपने समर्थकों की खुली बाहों में गिरी l फिर वह मुड़कर अपनी गिरी हुयी बहन के पास पहुँचीं l सियन आगे की ओर झुककर, अपनी थकी हुए भुजा वेंडी के हाथों की ओर और समापन रेखा कि ओर बढ़ाया l जैसे ही उसने पांचवें स्थान पर दौड़ पूरी की, भीड़ ने ऊँची आवाज़ में उनको अनुमोदित किया l 

इस जोड़े द्वारा 140 मील की दौड़ पूरी करने से बहुत लोग प्रेरित हुए l परन्तु थके प्रतियोगी के एक साथ धीरज से दौड़ने की छवि मेरे मन में अंकित है, और सभोपदेशक 4:9-11 में जीवन को समर्थ बनानेवाली सच्चाई को दृढ़ करता है l 

जीवन में हम सभी को सहायता चाहिए इस बात को स्वीकार करने में कोई शर्म की बात नहीं है (पद.9), विशेषकर इसलिए कि हम ईमानदारी  से अपनी आवश्यकताओं से इन्कार नहीं कर सकते हैं या सर्वज्ञानी परमेश्वर से उसे छिपा नहीं सकते हैं l एक समय या किसी अन्य समय पर, चाहे वह शारीरिक या भावनात्मक रूप से हो, हम सभी गिरते हैं l जब हम दृढ़ रहते हैं यह जानना कि हम अकेले नहीं हैं हमें आराम पहुंचाता है l जब हमारा स्वर्गिक पिता हमारी मदद करता है, वह हमें दूसरे ज़रुरतमंदों तक पहुँचने में समर्थ बनाते हुए, यह निश्चय देता है कि वे भी अकेले नहीं हैं l 

जब जीवन कठिन हो

शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक रूप से थकने के बाद, मैं अपनी आराम कुर्सी में बैठ गयी l हमारे परिवार ने परमेश्वर की अगुवाई में तेलेंगाना से कर्नाटक चले आये थे l हमारे आने के बाद, हमारी कार खराब हो गयी और दो महीनों तक हमारे पास वाहन नहीं था l इस बीच, अप्रत्याशित पीठ की सर्जरी के बाद मेरे पति की सीमित गतिशीलता और मेरे पुराने दर्द ने हमारे सामान के खोलने को जटिल बना दिया l हमने अपने नए घर में, जो पुराना था महँगी समस्याओं का सामना किया l हमारा बूढ़ा कुत्ता स्वास्थ्य समस्याओं से जूझा l और यद्यपि हमें हमारे नए पिल्ले ने आनंद दिया, उर्जा से भरा इस रोयेंदार पिल्ले की सेवा करना अपेक्षा से परे था l मेरा रवैया अप्रिय हो गया l कठिनाइयों के ऊबड़खाबड़ मार्ग पर यात्रा करते समय किस तरह मुझमें अटल विश्वास होना चाहिए था? 

जैसे कि मैंने प्रार्थना की, परमेश्वर ने मुझे भजनकार की याद दिलाई, जिसकी प्रशंसा परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती है l दाऊद ने अपने भावनाओं को बाहर निकाला, अक्सर बहुत अधिक अतिसंवेदनशीलता के साथ, और परमेश्वर की उपस्थिति में शरण मांगी (भजन 16:1) l परमेश्वर को प्रदाता और रक्षक (पद.5-6) के रूप में स्वीकार करते हुए, उन्होंने उसकी प्रशंसा की और उसके परामर्श का पालन किया (पद.7) l दाऊद ने पुष्टि की कि वह  “कभी न [डगमगाएगा]” क्योंकि उसने “यहोवा को निरंतर अपने सम्मुख रखा है” (पद.8) l इसलिए, वह आनंदित हुआ और परमेश्वर की उपस्थिति की ख़ुशी में विश्राम किया (पद.9-11) l 

हम भी जानने में प्रसन्न हो सकते हैं कि हमारी अपनी शांति वर्तमान स्थिति पर निर्भर नहीं करती है l जब हम अपने अपरिवर्तनीय परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं कि वह कौन है और हमेशा रहेगा, उसकी उपस्थिति हमारे दृढ़ विश्वास को बढ़ाएगी l 

महानतम रहस्य

इससे पहले कि मैं यीशु में विश्वास करती, मैं सुसमाचार का प्रचार सुनी थी लेकिन मुझे उसकी पहचान के साथ जूझना पड़ा l जब बाइबल कहती है कि केवल परमेश्वर ही पापों को क्षमा कर सकता है तो वह[यीशु] मेरे पापों के लिए क्षमा कैसे प्रदान कर सकता है? जे. आई. पैकर की पुस्तक नोइंग गॉड(knowing God) पढ़ने के बाद मुझे पता चला कि मैं अपने संघर्षों में अकेली नहीं थी l पैकर का सुझाव है कि कई अविश्वासियों के लिए “वास्तव में चौंका देनेवाला मसीही दावा है कि नासरत का यीशु परमेश्वर था जो मनुष्य बना . . . और वास्तव में और पूरी तरह दिव्य था जैसे वह मनुष्य था l” फिर भी यह ही सच है जो उद्धार को संभव बनाता है l 

जब प्रेरित पौलुस मसीह को “अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप” में संदर्भित करता है, तो वह कहता है कि यीश पूरी तरह से और सिद्धता से परमेश्वर है – स्वर्ग और पृथ्वी में सभी चीजों का सृष्टिकर्ता और थामनेवाला – लेकिन पूरी तौर से मानव भी (कुलुस्सियों 1:15-17) l इस सच्चाई के कारण, हम आश्वास्त हो सकते हैं कि मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा, उसने न केवल हमारे पापों का दण्ड ही नहीं उठाया है, बल्कि मानव स्वभाव को भी पापों से मुक्त किया है, ताकि हम - और समस्त सृष्टि का – परमेश्वर के साथ सामंजस्य स्थापित हो सके (पद.20-22) l 

प्रेम के अद्भुत, प्रारंभिक कार्य में, परमेश्वर पिता स्वयं को पवित्र शास्त्र में और पवित्रशास्त्र के द्वारा परमेश्वर और पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से और परमेश्वर पुत्र के जीवन के द्वारा  प्रगट करता है l जो यीशु पर विश्वास करते हैं वे बच जाते हैं क्योंकि वह इम्मानुएल हैं – परमेश्वर हमारे साथ l हल्लेल्युयाह! 

गुप्त सुपुर्दगी

सुन्दर लाल और सफ़ेद गुलाब के साथ डैफोडिल्स फुलों के एक स्पष्ट, कांच के फूलदान ने उसके सामना के दरवाजे पर कला का अभिवादन किया l सात महीनों तक, यीशु के एक अनाम विश्वासी ने कला को सुन्दर गुलदस्ते भेजे l प्रत्येक मासिक उपहार, वचन के शाब्दिक प्रोत्साहन से भरे एक पत्र के साथ आता था और हस्ताक्षरित होता था : “यीशु से प्यार करो l”

कला ने इन गुप्त सुपुर्दगियों की तस्वीरे फेसबुक पर शेयर कीं l फूलों ने उस एक व्यक्ति की दयालुता का जश्न मनाने और परमेश्वर द्वारा अपने लोगों के द्वारा से अपने प्रेम का इज़हार करने के तरीके को स्वीकार करने का अवसर दिया l जब उसने एक अनत्य बीमारी(terminal disease) के साथ अपनी लड़ाई के माध्यम से उस पर भरोसा किया, हर रंगीन फूल और लिखित पत्र ने उसके लिए परमेश्वर की दयालुता की पुष्टि की l 

प्रेषक की गुमनामी दिल की मंशा को दर्शाती है जो यीशु अपने लोगों से दान देने के समय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है l वह दूसरों के द्वारा “दिखाने के लिए” धार्मिक कार्यों का अभ्यास करने के खिलाफ चेतवानी देता है (मत्ती 6:1) l अच्छे कामों का उद्देश्य हमारे लिए परमेश्वर द्वारा किये गए समस्त कार्य के लिए कृतज्ञता से भरे उपासना के भाव हैं जो हमारे हृदयों से उमंड़ते हैं l सम्मानित होने की आशा या अपेक्षा के साथ हमारी खुद की उदारता की विशिष्टता दर्शाने से सभी अच्छी वस्तुओं के दाता –यीशु – से ध्यान खिंच सकता है l 

परमेश्वर जानता है जब हम अच्छे इरादों के साथ देते हैं (पद.4) l बस वह चाहता है कि हमारी उदारता प्रेम द्वारा प्रेरित हो जब हम उसको महिमा, आदर, और प्रशंसा देते हैं l 

प्रेम में धोया हुआ

दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक छोटे से चर्च ने व्यवहारिक तरीके से परमेश्वर के प्रेम को व्यक्त करना पहचान लिया l यीशु में विश्वासियों ने एक स्थानीय धोबीघाट(laundromat) में इकठ्ठा होकर आर्थिक आवश्यकताओं में लोगों के कपड़े धोकर अपने समुदाय की मदद की l उन्होंने मिलकर कपड़े धोये और उनको तह किये, और कभी-कभी गर्म भोजन या एक थैला किराने का सामान पानेवालों को देते थे l

एक स्वयंसेवक को मालूम चला कि सबसे बड़ा ईनाम “लोगों के साथ . . . वास्तविक संपर्क में था जो उनकी कहानी सुनते थे l” यीशु के साथ उनके संबंधों के कारण, ये स्वयंसेवक प्यार भरे शब्दों और कार्यों के जरिये अपना विश्वास दर्शाना चाहते थे, जिससे उन्हें दूसरों के साथ वास्तविक संबंधों को पोषित करने में मदद मिली l

प्रेरित याकूब इस बात की पुष्टि करते हैं कि एक दावा करनेवाले विश्वासी की प्रेमपूर्ण सेवा का हर एक कार्य वास्तविक विश्वास का एक परिणाम है l वह कहता है कि “विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है” (याकूब 2:14-17) l घोषणा करना कि हम विश्वास करते हैं हमें परमेश्वर की संतान बनाता है, लेकिन जब हम दूसरों की सेवा करके उसकी सेवा करते हैं तब हम उन विश्वासियों के रूप में कार्य करते हैं जो भरोसा करते हैं और यीशु का अनुसरण करते हैं (पद.24) l विश्वास और सेवा शरीर और आत्मा के रूप में अन्योन्याश्रित(interdependent) हैं (पद.26), मसीह की सामर्थ्य का एक सुन्दर प्रदर्शन, जैसा कि वह हमारे अन्दर और हमारे द्वारा काम करता है l

व्यक्तिगत रूप से यह स्वीकार करने के बाद कि क्रूस पर परमेश्वर का बलिदान हमें सिद्ध प्रेम में धोता है, हम असली विश्वास में प्रत्युतर दे सकते हैं जो हमारी सेवा के तरीकों में अधिकाई से दिखाई देता है l

परमेश्वर के साथ वर्तमान में चलें

पुस्तक मियर ख्रिस्चियेनिटी(Mere Christianity) में सी.एस. लयूईस ने लिखा : “लगभग निश्चित रूप से परमेश्वर समय में नहीं है l उसके जीवन में एक के बाद एक क्षण शामिल नहीं है - साढ़े-दस – और संसार के आरम्भ से हर दूसरा क्षण – हमेशा उसके लिए मौजूद है l” फिर भी इंतज़ार की ऋतुएँ अक्सर अंतहीन महसूस होती हैं l परन्तु जब हम समय के अनंत सृष्टिकर्ता पर भरोसा करना सीखते हैं, हम इस सत्य को स्वीकार कर सकते हैं कि हमारा नाजुक अस्तित्व उसके हाथों में सुरक्षित है l

भजन 102 में विलाप करता हुआ, भजनकार मानता है कि उसके दिन “ढलती हुयी छाया” और मुरझाने वाली घास के समान क्षणभंगुर हैं, जबकि परमेश्वर “पीढ़ी से पीढ़ी तक” बना रहेगा (पद.11-12) l पीड़ा से थकित लेखक, घोषित करता है कि परमेश्वर “सदैव विराजमान रहेगा” (पद.12) l वह पुष्टि करता है कि परमेश्वर की सामर्थ्य और निरंतर करुणा उसके व्यक्तिगत फैलाव/अंतराल के परे पहुँचते हैं (पद.13-18) l यहाँ तक कि उसकी निराशा में भी (पद.19-24), भजनकार अपना ध्यान सृष्टिकर्ता के रूप में परमेश्वर की सामर्थ्य पर लगता है (पद.25) l यद्यपि उसकी रचनाएँ नष्ट हो जाएँगी, वह अनंतकाल के लिए वही रहेगा (पद.26-27) l

जब समय स्थिर अथवा खींचता महसूस हो, तो यह परमेश्वर पर यह आरोप लगाना प्रलोभक है कि वह विलम्ब कर रहा है या अननुक्रियाशील(non-responsive) है l हम अधीर हो सकते हैं और स्थिर अवस्था में रहने से निराश हो सकते हैं l हम भूल सकते हैं कि उसने हमारे लिए जो नियोजित पथ तैयार किया है उसके लिए प्रत्येक फर्शी पत्थर(cobblestone) का चुनाव भी किया है l परन्तु वह हमें अपने लिए प्रबंध करने के लिए नहीं छोड़ेगा l जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में विश्वास के द्वारा जीवन जीते हैं, हम वर्तमान में परमेश्वर के साथ चल सकते हैं l

एक ईमानदार धन्यवाद

ज़ेवियर के पहले जॉब इन्टरव्यू की तैयारी में, मेरे पति, एलन ने हमारे बेटे को भावी नियोक्ताओं के साथ मुलाकात के बाद उनको भेजने के लिए उसे धन्यवाद कार्ड का एक पैकेट दिया l फिर उन्होंने किसी को नौकरी पर रखनेवाले साक्षात्कारकर्ता होने का नाटक किया, अपने दशकों के प्रबंधक के अनुभव का उपयोग करते हुए ज़ेवियर से सवाल पूछे l भूमिका निभाने के बाद, हमारे बेटे ने अपने संक्षिप्त विवरण(resume) की कई प्रतियाँ एक फोल्डर में रख लिया l वह मुस्कुराया जब एलन ने उसे कार्ड्स के विषय याद दिलाया l “मुझे मालूम है,” उसने कहा l एक ईमानदार धन्यवाद-नोट मुझे अन्य सभी आवेदकों से अलग कर देगा l”

जब प्रबंधक ने ज़विएर को नौकरी पर रखने के लिए बुलाया, उसने पहले हाथ से लिखे धन्यवाद-कार्ड के लिए आभार व्यक्त किया, जो उसने वर्षों बाद प्राप्त किया था l

धन्यवाद कहना एक स्थायी प्रभाव बनाता है l भजन संहिता की पुस्तक में भजनकारों की हार्दिक प्रार्थनाओं और कृतज्ञ उपासना को संरक्षित किया गया था l हालाँकि एक सौ पचास भजन हैं, ये दो पद कृतज्ञता के सन्देश को दर्शाते हैं : “हे यहोवा परमेश्वर, मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूँगा; मैं तेरे सब आश्चर्यकर्मों का वर्णन करूँगा l मैं तेरे कारण आनंदित और प्रफुल्लित होऊंगा, हे परमप्रधान, मैं तेरे नाम का भजन गाऊँगा” (भजन 9:1-2) l

हम सभी परमेश्वर के अद्भुत कार्यों के लिए अपना आभार व्यक्त करना समाप्त नहीं कर पाएंगे l लेकिन हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा ईमानदारी से धन्यवाद की शुरुआत कर सकते हैं, हम कृतज्ञ उपासना की जीवन शैली को विकसित कर सकते हैं, परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए उसके द्वारा किये गए सभी कार्यों को स्वीकार करके और सब कुछ जो वह पूरी करने का वादा करता है l

आशा कभी न छोड़े

जब मेरी सहेली को कैंसर का निदान मिला, तो डॉक्टर ने उसे अपने सभी मामले व्यवस्थित करने की सलाह दी l अपने पति और छोटे बच्चों के विषय चिंता करते हुए, उसने मुझे फोन किया l मैंने अपने आपसी मित्रों के साथ उसका तत्काल प्रार्थना अनुरोध साझा किया l हमें प्रसन्नता हुयी जब एक दूसरे डॉक्टर ने उसे कभी उम्मीद न छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया और पुष्टि की कि उसकी टीम अपनी ओर से उसकी मदद के लिए पूरी कोशिश करेगी l हालाँकि कुछ दिन दूसरों की तुलना में कठिन थे, उसने अपने खिलाफ कड़ी बाधाओं के बजाय परमेश्वर पर ध्यान केन्द्रित किया l उसने कभी हार नहीं मानी l

मेरी सहेली का दृढ विश्वास मुझे लूका 8 में हताश महिला की याद दिलाता है l बारह साल से चल रही पीड़ा, निराशा और अलगाव के कारण, उसने पीछे से यीशु से संपर्क किया और अपने हाथ को उसके वस्त्र की छोर की ओर बढ़ाया l उसके तत्काल चंगाई ने उसके विश्वास के कार्य का अनुसरण किया : लगातार उम्मीद करना . . .  विश्वास करना कि यीशु वह करने में सक्षम था जो दूसरे नहीं कर सकते थे . . . इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसकी स्थिति कितनी ससंभव दिखाई दे रही थी (पद.43-44) l

हम दर्द का अनुभव कर सकते हैं जो अंतहीन महसूस होता है, ऐसी परिस्थितियाँ जो निराशाजनक दिखती हैं, या प्रतीक्षा जो असहनीय लगती हैं l हम उन क्षणों को सहन कर सकते हैं जब हमारे खिलाफ कठिनाईयों को ऊँचा और व्यापक रूप से ढेर किया जाता है l हम उस चंगाई का अनुभव नहीं कर सकते हैं जिसकी हमें इच्छा है, जब हम मसीह पर भरोसा करना जारी रखते हैं l लेकिन फिर भी, यीशु हमें उसके निकट पहुँचने के लिए आमंत्रित करता है, उस पर भरोसा करने के लिए और कभी आशा नहीं छोड़ने के लिए, और यह विश्वास करने के लिए कि वह हमेशा सक्षम है, हमेशा भरोसे के योग्य है, और हमेशा पहुँच के भीतर है l