“अंग्रेजी की यह कहावत ” “गुड ग्रीफ (सुखद शोक)!” यदि आप इसके बारे में सोचे, तो यह एक अजीब कहावत है। ईमानदारी से, क्या शोक जैसी कोई चीज वास्तव में अच्छी होती है? जैसा कहा जाता है, वैसा है। नुकसान के साथ जीने से पता चलता है कि जब हम अपने नुकसान का शोक मनाते हैं तो आत्मा को कैसे आराम मिल सकता है। इस निम्नलिखित पृष्ठ में, सलाहाकार और साथी-शोककर्ता, टिम जैक्सन, हमें इस बात पर विचार करने के लिए आमंत्रित करते हैं कि, जीवन में दिल के दर्द कैसे हमें अपने निर्माता और एक दूसरे पर निर्भर होने के लिए खोलते है।

नुकसान की मेरी गर्मी

एक ख़ूबसूरत दोपहर में, जब मैं स्थानीय मॉल के एक दुकान में खड़ा था, मेरा मोबाईल फ़ोन बजने लगा। यह मेरा बड़ा भाई स्टीव था। उसने सिर्फ दो शब्द कहे, “माँ चली गई।” मेरे भाई ७०० मील दूर था, फोन पर उसे सिसकते सुन, मेरे पेट में दर्द होने लगा—मैं असहाय और अकेला महसूस करने लगा।

यह असली था: मैं एक मॉल में खड़ा हूं और अभी सुना है कि माँ मर चुकी है। कितना विचित्र है! मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अंदर ही अंदर मर रहा हूं। मैंने फोन काट दिया, किसी तरह मेरी कार की तरफ पहुंचा, और जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया, मैं फूट-फूट कर रोने लगा। सच में सिसकियाँ थी। न जाने मैं कितनी देर वहीं बैठा रोता रहा।
कुछ दिनों बाद, हम परिवार और दोस्तों के साथ उस अद्भुत महिला को याद करने के लिए एकत्रित हुए, जिसे हम “माँ, दादी और अनमोल दोस्त” मानते थे। और हमने माँ के बिना अपने जीवन की यात्रा की शुरुआत की।

आठ हफ्ते बाद, मुझे एक दूसरा फोन आया, इस बार मेरे छोटे भाई का। उसने मुझे बताया कि पिताजी ने अल्जाइमर (मानसीक रोग) के साथ अपनी 6 साल की लड़ाई पूरी तरह से हार गए।
घर लौटते वक़्त मेरे आँखों में आंसू आ गए। मैं दुखी था, फिर भी आभारी रहा। उनकी रिहाई के लिए आभारी -कि मेरे पिता अब बीमारी से पीड़ित नहीं थे और वह अपने उद्धारकर्ता के साथ थे। मैंने अपने बेटे को फोन किया और खबर साझा की। हमने इस बारे में बात की कि उस दिन हमारे साथ बाहर रहने पर “पापा” को कितना मज़ा आया होगा। और हम रोए।

शोक (दुख) एक यात्रा है जिसे आज-कल में हम सभी को अवश्य ही करना है। हम किस तरह इस यात्रा को करते हैं, यही सारा फर्क लाता है।

जब मैं घर पहुंचा तो मैंने अपने परिवार के बाकी सदस्यो को खबर साझा की। हमने बात की। हम रोए। हमने प्रार्थना की। और हमें दुख हुआ। यह 2011 था – मेरी “नुकसान की गर्मी।”

एक सलाहकार के रूप में, मैंने विभिन्न प्रकार के लोगों की शोक-संघर्ष में मदद की है। शोक (दु:ख) के माध्यम से अपनी यात्रा पर मैं जो सीख रहा हूं, एक यात्रा जो मैं अभी भी कर रहा हूं, वह यह है कि विश्वास अनिवार्य है। परमेश्वर के साथ हमारा संबंध, हमारी क्षमता को प्रभावित करता है, की हम कैसे इस महसूस होने वाले असहनीय दर्द से बाहर निकले।

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दुःख हमारे सामने आने वाली हानियों से निपटने की एक जटिल और दर्दनाक प्रक्रिया है, जो हम पूरे जीवन में महसूस करते है। परमेश्वर के निमंत्रण में निहित है कि संबंधों के साथ आनंद लेके जिए, क्यूँ की एक दिन हम उनके नुकसान का शोक मना सकते हैं; जीवन के कुछ क्षेत्र प्रतिरक्षीत हैं। या तो बदलती परिस्थितियों के माध्यम से या, अंत में, हमारी अपनी मृत्यु, अंततः, हम सब कुछ खो देते है।
दुख की एक बुनियादी सच्चाई यह है कि हमारे रिश्तों की परिस्थितियां – परिवार, दोस्त, करीब से जानने वाले, पराये, या अन्यथा – सब हमारे जीवन को गहराई और लंबाई से प्रभावित करते हैं यहां तक ​​कि हमने जो खोया है उस पर दुख का अनुभव भी करते है।

नुकसान अपनों की मौत तक सीमित नहीं है। जब भी हम कोई संबध खो देते हैं, हम शोक मानते हैं। कम नुकसान से निपटने के लिए सीख – हालांकि महत्वहीन नहीं – बाद में आने वाले कठिन नुक़्सानो के लिए हमें तैयार करती है।

सबके दुख अलग है

दुःख सभी के लिए एक सामान्य यात्रा है, कोई भी आपको यह नहीं बता सकता कि आपको कैसे शोक मनाना चहिये क्योंकि यह एक व्यक्तिगत मार्ग है जो हर उस व्यक्ति के लिए अनोखा है जो इस पर चलता है। और कोई कोई एक सही तरीका नहीं है शोक मानाने का। हालाँकि, यह समझना कि दुःख कैसे काम करता है और इसको क्या प्रभावीत करता है, आपको नुक्सान के बाद के समय को जीने में बेहतर रीती से तैयार करेगा।

दुख, विश्वास को उजागर करता है।

जीवन की महान विडंबनाओं में से एक यह है कि आप अपने आप को धार्मिक मानते है या नहीं, शोक सभी में, विश्वास के तत्व को प्रकट करता है। यह दिखाता है कि नुक्सान का सामना होने पर आप अपना भरोसा कहां रखते हैं — और वह विश्वास है।

हर दुःखी आश्चर्य करता है, “क्या जीवन कभी बेहतर होगा? ये दर्द कब जायेगा? क्या में कभी इससे निकल पाउँगा?

बाइबिल नुकसान के समय एक मार्ग प्रकट करता है जो हमे उच्च भूमि की और ले जाता है। ये अनुभव, जो अक्सर मौत जैसा लगता है, और “साया की घाटी” जैसा खतरनाक रास्ता है जो दाऊद, भजन संहिता 23:4 में कहता है। यह पसंदीदा भजन हमें याद दिलाता है, “चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौ भी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है”। एक अच्छे चरवाहा की तरह मज़बूती से वह हमारा मार्गदर्शन करता है। वह हमारे डर को शांत करता है, हमें दिलासा देता है और हमें आश्वस्त करता है कि हम इन परिस्थितियों को पार कर लेंगे; हालांकि कभी-कभी हम इतने निश्चित नहीं होते ।

जबकि रिश्तों और परिस्थितियों की विविधता से दु: ख अपरिहार्य और जटिल है, जीवन में, अंतत: हर पीड़ित सोचता है, “क्या जीवन कभी बेहतर होगा? क्या दर्द कभी दूर होगा? क्या में कभी इससे निकल पाउँगा?

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म संबधो के लिए बनाए गए हैं। शुरुआत से, एकान्त अस्तित्व कभी भी उपलब्ध उपाय नहीं था (उत्पत्ति 2:18)। हमें अंतरंगता, निकटता, समुदाय के लिए सृजा गया है। अर्थपुर्ण जुड़ावों के माध्यम से, हमारी व्यक्तिगत कहानियां गहरा अर्थ और अधिक महत्व रखती हैं। ये हमारे जीवन के लिए संदर्भ बिंदु बन जाते हैं। जब ये संबंध टूट जाते हैं या खो जाते हैं, तो यह एक अमानवीय स्तर का दर्द पैदा करती है, और यही वह दर्द है जो दुःख पैदा करता है। “शोक हमारे प्यार के अनुभव का एक सार्वभौमिक और अभिन्न अंग है. . . यह प्रक्रिया की समाप्ती नहीं है बल्कि इसके चरणों में से एक है; नृत्य में रुकावट नहीं बल्कि अगला आंकड़ा।”

भ्रम की अपेक्षा करें। सी. एस. लुईस ने दुःख के साथ अपने संघर्ष को इस प्रकार वर्णित किया: “दुःख में, कुछ भी एक समान नहीं रहता है। हम एक चरण से उभरते है, लेकिन यह हमेशा दोहराता रहता है। गोल गोल होकर। सब कुछ दोहराता है। क्या मैं गोल चक्कर काट रहा हूं, या मुझे उम्मीद है कि मैं एक सर्पिल पर हूं? लेकिन अगर एक सर्पिल, क्या मैं ऊपर या नीचे जा रहा हूँ?”मैं ऊपर या नीचे जा रहा हूँ?”

लेकिन अगर एक सर्पिल पर हुं, तो क्या मैं ऊपर या नीचे जा रहा हूँ?”

यह मेरे लिए सच रहा है, और मैंने इसे उन लोगों के जीवन में देखा है जिन्हें मैंने सलाह दी है। यात्रा कभी-कभी अपरिभाषित और भटकाव वाली हो सकती है, जिससे पीड़ित अपने रास्ते पर सवाल उठा सकते हैं। दुःख की अवस्थाओं से कोई भी उसी क्रम में या उसी गति से आगे नहीं बढ़ता है। जब चीजें समझ में नहीं आती हैं या बार-बार होने लगती हैं तो हमें चिंतित होने की जरूरत नहीं है। अगर हम जानते हैं कि भ्रम की स्थिति आ रही है, तो हम इसका सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं। शोक करने की प्रक्रिया व्यवस्थित से बहुत दूर है। यह गडबड है और कभी-कभी ऐसा महसूस हो सकता है कि आप अपना दिमाग खो रहे हैं। आप नहीं खो रहे हैं। दु: ख के लिए कोई विश्वव्यापी ढांचा नहीं है।

सदमा सामान्य है। नुकसान की खबर के बाद इसकी उम्मीद की जा सकती है। हमारी प्रारंभिक रक्षात्मक प्रतिक्रिया है जो हमें अविश्वसनीय परिस्थितियों में आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है। परमेश्वर हमें झटका (सदमा) हमारी रक्षा करने के लिए देता है, जो हमें जीवित रहने में मदद करता है, जब अन्यथा हमारे लिए दु: ख के भावनात्मक अधिभार के तहत कार्य करना असंभव होता है। सदमा को अपना कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

शुभचिंतकों को सदमा को “हल्का समझने” की कोशिश नहीं करनी चाहिए, न ही दवा का नुस्खा स्पष्ट संकेत के बिना उपयोग किया जाना चाहिए जब तक पीड़ित व्यक्ति सक्षम न हो।

दुःख की अवस्थाओं से कोई भी उसी क्रम में या उसी गति से आगे नहीं बढ़ता है।

बहाना मत बनाओ। इनकार का विरोध करें। असली रहें। “मजबूत होकर” दुःख के दर्द को दूर करने का प्रयास करना व्यर्थ है। यह केवल आपकी प्रगति में बाधक होगा। फ्रेडरिक ब्यूचनर ने इनकार को अपने पिता की आत्महत्या से निपटने के अपने असफल प्रयासों में एक समस्या के रूप में पहचाना। ब्यूचनर ने कहा कि जीवन की कठोर वास्तविकताओं के खिलाफ खुद को मजबूत करने से आप कुछ दर्द तो कम कर सकते है, पर वही लोहा, सलाखे बन सकता है जो आपको “उस पवित्र शक्ति से परिवर्तित होने से रोकता है जिससे जीवन स्वयं आता है।” वह उस शक्ति को अपने आप में काम करने की अनुमति देने की आवश्यकता पर जोर देता है: “आप अपने दम पर जीवित रह सकते हैं। आप अपने दम पर मजबूत हो सकते हैं। आप अपने दम पर भी जीत सकते हैं। लेकिन आप अपने दम पर इंसान नहीं बन सकते।”

एक दुःखी व्यक्ति के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जो कुछ खो गया है उसकी वास्तविकता को स्वीकार करें। जो है उसे वैसे ही बोलो। यह इनकार को दूर करने में मदद करता है और दु: ख के माध्यम से यात्रा का एक बड़ा कदम है।

अपनी भावनाओं के बारे में ईमानदार रहें

परमेश्वर भी दुखी होते हैं। एक चढ़ाई दुर्घटना में अपने बेटे को खोने वाले निकोलस वोल्टरस्टॉर्फ ने कहा कि “हमारे आँसुओं के माध्यम से हम परमेश्वर के आँसू देखते हैं।” जब हम शोक करते हैं, तो हम परमेश्वर के साथ उस विलापपूर्ण सुंदरता में शामिल हो जाते हैं जो टूट गई है, और हम उस दिन की प्रत्याशा में शोक मनाते हैं जब सब कुछ बहाल हो जाएगा।

यह जितना मुश्किल है, मृतक प्रियजन के शरीर को देखने से कई पीड़ितों को नुकसान की अंतिम स्थिति को स्वीकार करने में मदद मिलती है। बहुत से लोग जिन्होंने कभी किसी प्रियजन का शरीर नहीं देखा, वे अक्सर इनकार से जूझने में परेशान रहते है, ऐसा महसूस करते हुए कि यह सब सिर्फ एक लंबा बुरा सपना हो सकता है।

बहाली की लालसा, सभी चीजों को नया बनाने के लिए (प्रकाशितवाक्य 21:4-5), और यह जागरूकता कि नवीनीकरण अभी भविष्य है, हमारे सभी दुखों का केंद्र है। दुनिया खूबसूरत है, लेकिन हमें अक्सर याद दिलाया जाता है कि वो भी टूटी हुई है। यह तब होता है जब हम अपने जीवन में कुछ सुंदरता खो देते हैं और इस टूटने के अनुभव से ही हम शोक मनाते हैं, एक बेहतर दुनिया की लालसा के लिए।

नुकसान के बाद, दु: ख एक भावनात्मक पहाड जैसे संकट को पैदा करता है जो हमें अपने पैरों पर फिसला सकता है और हमें भावनाओं के ढेर के नीचे दबा सकता है जिसे हम नहीं समझते हैं।

आप जो महसूस करते हैं उसे महसूस करें। दु: ख के साथ हमारे संघर्ष में किसी मौके पर, कोई कह सकता है, “आपको ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए।” या हम स्वयं अपनी भावनाओं को दबाने का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन हम गहराई से महसूस करते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपनी तरह की गहन भावनात्मक क्षमता दी है। एक साथी सलाहकार ने एक बार कहा था, “आप जो महसूस नहीं कर सकते, उसे आप ठीक नहीं कर सकते।” एक दर्दनाक नुकसान हमें अपनी भावनाओं को दबाने के लिए मजबूर कर सकता है। लेकिन भावनाएं हमें हमारे सभी अनुभवों में गहराई और समृद्धि के लिए खोलती हैं।

एक नुकसान के बाद, दु: ख एक भावनात्मक पहाड जैसे संकट को पैदा करता है जो हमें अपने पैरों पर फिसला सकता है और हमें भावनाओं के ढेर के नीचे दबा सकता है जिसे हम नहीं समझते हैं। शोक करने वालों की सूची अंतहीन लगती है: सदमे, दर्द, अविश्वास, भटकाव, वियोग, इनकार, गुस्सा, अन्याय, भय, परित्याग, अकेलापन, अवसाद और चिंता। उपचार प्रक्रिया शुरू होने से पहले, हमें उन भावनाओं को सुलझाना होगा जो हमारे अंदर हैं।

उदाहरण के लिए, गुस्सा असामान्य नहीं है, यहाँ तक कि परमेश्वर के प्रति गुस्सा भी। यह गुस्सा या तो यह महसूस करने से उपज हो सकता है कि परमेश्वर ने वह नहीं किया जो उसे करना चाहिए था या कि उसने ऐसा कुछ किया या अनुमति दी जिसके परिणामस्वरूप हमें पीड़ा हुई।

मुझे याद है कि एक दशक पहले एक चढ़ाई दुर्घटना में एक प्रिय मित्र की मृत्यु हो जाने पर मुझे कितना गुस्सा आया था। मैं प्रभु पर चिल्लाया। इसका कोई मतलब नहीं था कि जब वह ईमानदारी से उसकी सेवा कर रहा था तो वह मेरे मित्र की जान ले लेगा। यह क्रूर और भयानक लगा। लेकिन परमेश्वर काफी बड़ा है, काफी मजबूत है, काफी प्यार करनेवाला और हमारी भावनाओं को संभालने के लिए पर्याप्त है, तब भी जब हम एक दुखद नुकसान के बाद गंभीर दर्द में पड़ जाते हैं।

हम अक्सर अपने दुख और दर्द के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि केवल ईश्वर ही है जिसे हम दोष दे सकते हैं। भजनसंहिता ऐसे लोगों से भरी हुई है जो परमेश्वर के सामने अपना दिल बहलाते हुए ‘क्यों’ जैसे गहरे प्रश्न का उत्तर मांगते है।

सोना, खाना, काम करना-सिर्फ सादा जीवन-दु:ख की भावनात्मक बमबारी के तहत श्रमसाध्य हो सकता है। । भ्रम, जिसे कभी-कभी “दुःख का कोहरा” कहा जाता है, सामान्य है। दिन को सपने देखना, काम या घर पर निष्फल होना, कुछ शुरू करना और फिर मध्य-क्रिया में भूल जाना जो आप कर रहे थे, और ऐसा महसूस करना कि आप अपना दिमाग खो रहे हैं, ये सभी सामान्य अनुभव हैं। आप पागल नहीं है। आप शोक मना रहे है।

वर्णन करें कि आपने क्या खोया है। अपने आप को, परमेश्वर और दूसरों को बताना कि आपने क्या खोया है, एक व्यावहारिक अभ्यास है जो आपके नुकसान की स्वीकृति को मजबूत करता है। बहुत से लोग पाते हैं कि अपने दुःख का वर्णन करने से, एक पत्रिका या एक पत्र के माध्यम से (शायद परमेश्वर को संबोधित करते हुए) उन भावनाओं को पहचानने और स्पष्ट करने में मदद मिलती है जो अस्पष्ट या मायावी रही हो।
अय्यूब, एक ऐसा व्यक्ति जिसे कई नुकसान हुए थे, उसने अपने बच्चों, अपने धन और अपने स्वास्थ्य के नुकसान का वर्णन उन शब्दों में किया है जिनके साथ कई लोगों ने पहचान की है: ” क्योंकि जिस डरावनी बात से मैं डरता हूँ, वही मुझ पर आ पड़ती है, और जिस बात से मैं भय खाता हूँ वही मुझ पर आ जाती है। मुझे न तो चैन, न शान्ति, न विश्राम मिलता है; परन्तु दु:ख ही आता है।” (अय्यूब 3: 25-26)। और राजा दाऊद, जिसने अपना राज्य खो दिया था और अपने ही पुत्र के द्वारा धोखा दिया गया था (2 शमूएल 15), उन्होंने अपने कुछ अनुयायियों को “उस पर अपना मन उण्डेलने” के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि परमेश्वर हमारा शरणस्थान है” (भजन 62:8 एनआईवी)। दिल में पीड़ा से जूझ रहे इन दोनों लोगों ने पाया कि अपने दुख को शब्दों में कहने से उन्हें अपने नुकसान को स्वीकार करने में मदद मिली।

आंसू कमजोरी की निशानी नहीं हैं, ये परमेश्वर की देन हैं। अपने दुख को ईमानदारी से परमेश्वर के सामने व्यक्त करने से डरो मत।

मैं समर्थन और प्रोत्साहन के लिए काफी लोगो के साथ नियमित रूप से मिलता हूं। अपने नुकसान के बारे में बात करने के लिए यह मेरे लिए एक सुरक्षित जगह रही है। कई बार नाश्ते करते हुए, उन्होंने मेरे संघर्षों और दर्द को सुना है, जिससे मुझे उम्मीद है कि मैं अंततः इसे अपने दुःख के माध्यम से प्राप्त कर लूंगा। उन्होंने मुझे न केवल मेरी भावनाओं के बारे में ईमानदार होने दिया, बल्की इसे प्रोत्साहित भी किया। साझा करने और ईमानदारी का वह समय, उपचार की दिशा में कदम रहा है।

अपने आँसुओं के साथ सहज हो जाओ। रोना ठीक है; वास्तव में, यह महत्वपूर्ण है कि आप रोया करे। आँसू एक भावनात्मक और शारीरिक रिहाई है जो शोक की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। आंतरिक दबाव बनाना और इसे छोड़ा जाना चाहिए। अच्छी तरह रोने से शरीर और आत्मा दोनों के लिए उपचार होता है।

कुछ नेक-नीयत लोग “सख्त ऊपरी होंठ” को बनाए रखने की वकालत करते हैं, यह कहते हुए कि आँसू परमेश्वर की शक्ति और वादों में विश्वास की कमी को दर्शाते हैं। लेकिन आंसू कमजोरी की निशानी नहीं हैं, वे परमेश्वर की ओर से एक उपहार हैं। अपने दुख को ईमानदारी से परमेश्वर के सामने व्यक्त करने से डरो मत। अपने टूटे हुए दिल के आँसुओं को उसके पास लाना ठीक है। वह समझता है।

प्रेरित पौलुस यह स्पष्ट करता है कि जबकि यीशु के अनुयायी अभी भी शोक मनाते हैं, हम “बाकी मानवजाति के समान शोकित नहीं होते, जिन्हें आशा नहीं है” (1 थिस्सलुनीकियों 4:13 एनआईवी)। इसके बजाय, हम आशा के साथ शोक मनाते हैं—आशा जो यीशु के पुनरुत्थान में टिकी हुई है और जो हमें आने वाले दिन की याद दिलाती है “फिर न मृत्यु होगी, न शोक, न रोना, न पीड़ा” (प्रकाशित वाक्य 21:4 एनआईवी)।

“विश्वास किसी भी तरह के दुःख में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। लेकिन उस तरह से नहीं जैसा कुछ लोग सोचते हैं।” ग्रेंजर वेस्टरबर्ग, गुड ग्रीफ।

लेकिन आशा के साथ शोक करने से भावनात्मक उथल-पुथल या हमारे दर्द की तीव्रता कम नहीं होती है। दर्द की अनुपस्थिति यीशु का अनुसरण करने के लाभों में से एक नहीं है (यूहन्ना 16:33)। स्वयं यीशु ने दुख का अनुभव किया और आंसू बहाए। वह “दुःख का व्यक्ति था और दुःख से परिचित था” (यशायाह 53:3)। वह अपने प्रिय मित्र लाजार की कब्र पर खुलकर रोया (यूहन्ना 11:35)। इस ज्ञान के बावजूद कि वह जल्द ही लाजार को उठाएगा, यीशु ने अपने दुःखी मित्रों के दर्द को किसी प्रियजन की मृत्यु पर साझा किया।

आपकी भावनाओं की गड़गड़ाहट में यीशु आपके साथ चलेंगे। उस पर विश्वास करे और वो ही आपके दर्द को समझेगा और आपको आराम प्रदान करेगा।

परमेश्वर और अन्य लोगों द्वारा दिए गए आराम के लिए अपना दिल खोलकर, समय के साथ, आपको ताकत और दृष्टिकोण की एक नई भावना खोजने में मदद मिलेगी।

आराम पाने के लिए खुद को खोलें। “बोलना आसान है।” यह तब महसूस होता है जब हम शोख़ मना रहे हो । दोस्तों और प्रियजनों के आराम के प्रयास, हालांकि नेक इरादो से दिए गए हो पर हमारे दुःख को वह खोखला महसूस करवा सकता है। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम दुःख को आराम से अलग न होने दें जो दोस्तों और परिवार की उपस्थिति और शब्दों में पाया जा सकता है। अपने आप को आराम की अनुमति आपको दूसरों से जोड़े रखता है और सही समय पर आपको आवश्यक प्रोत्साहन और दिशा प्रदान कर सकता है।

गतसमनी की वाटिका में अपनी गिरफ्तारी की रात को, यीशु “दुःख से भर गया था और मृत्यु के चरम सीमा पर था” (मत्ती 26:38 एनआईवी)। उसने अपने शिष्यों को उसके साथ रहने को कहा ताकि वह परमेश्वर से प्रार्थना कर सके। उसकी पीड़ा के समय में उनकी उपस्थिति उसके व्याकुल हृदय के लिए एक सांत्वना थी। अय्यूब के दोस्तों के लिए भी यही सच था जो उसके दुःख में आराम देने के लिए आए थे। उन्होंने सात दिन और सात रात उसके संग भूमि पर बैठ कर अपनी उपस्थिति की पेशकश की जब वे शोक में था (अय्यूब 2:11-13)।

अपने नुकसान के साथ जीना

नए सामान्य को स्वीकार करें। नुकसान हमें बदल देता है। यह अनिवार्य है। आप कैसे बदलेंगे? वह आप पर निर्भर करता है। एक महत्वपूर्ण नुकसान हमारे जीवन में एक निशान जैसा बन जाता है। “दुर्घटना से पहले,” “तलाक के बाद,” “माँ को कैंसर होने से पहले,” या “पिताजी की कोविड की मृत्यु के बाद” जैसे वाक्य “नए सामान्य” का वर्णन करने के तरीके हैं। इस तरह हम इस वास्तविकता को स्वीकार करते हैं कि जीवन बदल गया है; पुराना सामान्य चला गया है और एक नया सामान्य यहाँ है।

रिचर्ड दरशायमर ने इसे “नुकसान पर दृष्टिकोण प्राप्त करना, उस समय के रूप में वर्णित किया है जब दर्द नरम हो जाता है और एक मीठी उदासी द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।.. नुकसान की तीव्र भावना इस समय पल-पल की व्यस्तता से बदल जाती है।.. विशेष परिस्थितियों से उत्पन्न एक प्रासंगिक उदासी के लिए।”

मेरे पिताजी की मृत्यु के चार महीने बाद, मैंने दोपहर शिकार में बिताया, एक गतिविधि जिसमें मेरे पिताजी और मैं एक साथ आनंद लिया करते थे। जब मैं जंगल में अकेला बैठा, तो मैं भावुक हो उठा और बेकाबू होकर रोने लगा। मैंने सोचा, मैं इसे खो रहा हूँ। मेरे साथ क्या हो रहा है? तब मुझे एहसास हुआ: पिताजी इसे साझा करने के लिए यहां नहीं हैं, और वे वास्तव में इसे पसंद करते। यह मेरा नया सामान्य है। हालांकि मैं अपने जीवन के साथ आगे बढ़ रहा हूं, मैं खोए हुए प्रियजनों के दर्द से कभी दूर नहीं हूं। कभी-कभी यह मेरे साथ तब होता है जब मैं इसकी कम से कम उम्मीद करता हूं, और यह मुझे याद दिलाता है कि मैं उन्हें कितना याद करता हूं।

जब आप ठोकर खाते हैं और दुःख के माध्यम से अपनी यात्रा पर गिरते हैं – और आप करेंगे, जो हम सभी करते हैं – कोई ऐसा व्यक्ति होना, जो जानता हो कि आप कहाँ हैं और जो आपकी मदद कर सकता है, वह आपके लिए एक जीवनदान है।

जुड़े रहें। नए सामान्य से जुड़ते वक़्त अलगाव, अकेलापन और परित्याग की भावनाएं आम हैं। जब आप दर्द कम होने की प्रतीक्षा करते हैं तो खुद को अलग करना चाहते हैं यह स्वाभाविक है। नई विधवा या विधुर को पहली बार एहसास होता है कि स्कूल, चर्च और यहां तक ​​कि परिवार के कार्यों में एक बार फिर से एक व्यक्ति के रूप में उपस्थित होना कितना अकेला है। कोई पति या पत्नी, अकेले पालन-पोषण की योजना नहीं बनाते हैं। लेकिन जब मृत्यु एक साथी को हमसे अलग करती है, तो परिवार की वित्तीय, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक भलाई अचानक माता-पिता के कंधों पर आ जाती है, जो केवल जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, परिवार की देखभाल की तो बात ही छोड़ दें।

दु: ख के अलगाव के लिए सबसे अच्छा मारक जुड़ा रहना है। यह आसान नहीं होगा। आप असुरक्षित महसूस करेंगे। लेकिन अकेले जाने से कभी काम नहीं चलता। जब आप ठोकर खाते हैं और दु: ख के माध्यम से अपनी यात्रा पर गिरते हैं – और आप गिरेंगे, हम सभी गीरते हैं – किसी ऐसे व्यक्ति का होना जो जानता हो कि आप कहां हैं और जो आपकी मदद कर सकता है, वह आपके लिए एक जीवनदान है।

कुछ लोगो के लिए, दु: ख समूह मददगार हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले नुकसान हुआ हो, उनके साथ जुड़ने से व्यक्ति को दूसरों से अंतर्दृष्टि, समझ और आराम प्राप्त होता है, जो दुःख के रास्ते में और कमजोर महसूस कर रहा हो। यह अहसास कि आप एक उपचार समुदाय का हिस्सा हैं, कई लोगों के लिए नई आशा बहाल कर सकती है।
जो लोग अपने दुःख की यात्रा में प्रगति करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, या जिनके पास एक सहायक समुदाय नहीं है या दु: ख के जटिल रूपों से निपट रहे हैं, एक सलाहकार की आवश्यकता हो सकती है। मदद लेने से न डरें। सभोपदेशक के लेखक हमें याद दिलाता है, “एक से दो अच्छे हैं . . . यदि दोनों में से कोई नीचे गिरता है तो एक दूसरे को ऊपर उठाने में मदद कर सकता है। लेकिन किसी पर दया करो जो गिर जाता है और उसकी मदद करने वाला कोई नहीं है” (सभोपदेशक 4:9-10 एनआईवी)।

दूसरों को आपके दुःख के बोझ को कंधा देने में मदद करने से उन्हें आपकी सेवा करने का आनंद मिलता है (गलातीयों 6:2)।

अपने आप को फिर से जीवन का आनंद लेने की स्वतंत्रता दें। हां, आपके प्रियजन के बिना जीवन हमेशा के लिए अलग होगा, लेकिन अलग का मतलब बुरा नहीं है। अपने जीवन के साथ आगे बढ़ना कठिन होगा और परस्पर विरोधी भावनाएँ ला सकता है। लेकिन आप अपने प्रियजन को धोखा नहीं दे रहे हैं यदि आप फिर से हंसते हैं, दोस्तों के साथ खाने के लिए बाहर जाते हैं, छुट्टी लेते हैं, या फिर प्यार करते हैं। आपका प्रियजन नहीं चाहेगा कि आपका जीवन रुक जाए; वे चाहते हैं कि आप जीवन का आनंद लें। थोड़ी देर के लिए जिंदगी एक छोटी सी चाबी के जैसे खेली जाएगी, लेकिन खुशी अक्सर हमें चौंका देती है। जब यह होगा, तो अपने आप को इसमें भिगो दें।

आप अपने प्रियजन को धोखा नहीं दे रहे हैं यदि आप फिर से हंसते हैं तो, दोस्तों के साथ रात को खाने के लिए बाहर जाते हैं, छुट्टी लेते हैं, या फिर प्यार करते हैं।

पहली बार दोबारा हंसने पर आपको अजीब लग सकता है। लेकिन यह संकेत है कि जीवन का आनंद फिर से उभर रहा है। मेरे माता-पिता के घर में मेरे भाइयों, उनकी पत्नियों और बच्चों के साथ रहना एक कड़वा-मीठा अनुभव था। जो हम में से किसी के लिए, भारी और निराशाजनक हो सकता था, वह हम सभी के लिए चिकित्सीय रहा। हम हँसे, हम रोए, और हमने कहानियां सुनाईं क्योंकि हम उनके 61 साल के जीवन को महसूस कर रहे थे। जीवन, जबकि अलग था, अभी भी अच्छा था और इसे मनाया और साझा किया जाना चाहिए।

Reinvest in Love

आज जीने का आनंद लें। एक बार फिर से दूसरों के साथ जुड़ने की इच्छा सबसे अच्छा संकेतक है कि आप अच्छी तरह से शोक मना रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। रिश्तों में निवेश का प्रतिरोध यह दर्शाता है कि हम किसी और को खोने के जोखिम से बहुत डरते हैं। कोई भी नुकसान के दर्द के लिए तत्पर नहीं है, लेकिन उस पर विश्वास जो हमें कभी नहीं छोड़ेगा, हमें फिर से प्यार करने में मदद करेगा। सभी रिश्ते अपने साथ दर्द और हानि की संभावना लेकर चलते हैं। जॉन ब्रैंटर लिखते हैं, “केवल वे लोग जो प्रेम से बचते हैं , दुःख से बच सकते हैं। मुद्दा [दुख] से सीखना है और प्यार के प्रति संवेदनशील रहना है।”

मेरे माता-पिता की मृत्यु के बाद की गर्मियों में, मेरे बेटे ने एक प्यारी महिला से शादी कर ली। यह एक खुशी का मौका था, फिर भी हम सभी इस बात से वाकिफ थे कि मम्मी और पापा को हमारे साथ जश्न मनाना कितना अच्छा लगता। दो बर्च के पेड़, मेरे माता-पिता-मेरे बेटे और उसकी दुल्हन के विचार का सम्मान करने के लिए कार्यक्रम स्थल पर लगाए गये थे। वे अब हमारे आंगन में हमें याद दिलाने के लिए लगाए गए हैं कि जीवन चल रहा है, अच्छा है, और साझा किया जाना है।

अपने आराम को दूसरों के साथ साझा करें। दु: ख से निपटने के लिए हमें और अधिक दयालु और बुद्धिमानी से दूसरों तक पहुंचने के लिए तैयार किया जाता है, जिन्हें हमें प्राप्त वही आराम की आवश्यकता होती है।

जंगल में मेरा टूटना याद है? मैंने कुछ आनंद लेने का जोखिम उठाया था – कनसास की यात्रा करना और एक नए दोस्त के साथ शिकार करना। मैंने अच्छा समय बिताया। हालाँकि, मुझे अपने पिताजी की अनुपस्थिति का कड़वा दंश भी महसूस हुआ। उस शाम शिविर में अपने दोस्त के साथ कहानी साझा करते हुए जीने की खुशी और नुकसान की पीड़ा दोनों मैंने महसूस किया। जैसे ही हम अगले दिन घर के लिए निकले, हमने शिकार और जीवन के बारे में बात की। उसका इकलौता बेटा, उसका शिकार करने वाला दोस्त, 20 साल पहले हृदय विकार से मर गया था, एक युवा पत्नी को पीछे छोड़ गया। हमारी बातचीत हम दोनों के लिए सुकून देने वाली थी जब हमने अपने प्यार, अपने नुकसान, अपने दर्द, और कैसे वे यीशु में हमारे विश्वास की कहानी में फिट होते हैं, के बारे में बात की।

परमेश्वर हमें हमारे दुख में जो सुकून देते हैं, वह बस हमारे लिए ही नहीं है

परमेश्वर हमें हमारे दुख में जो सुकून देते हैं, वह हमारे लिए ही नहीं है। यह साझा करने के लिए है। पौलुस ने कुरिन्थियों को लिखते समय इसे और अधिक स्पष्ट कर दिया: “हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों।” (2 कुरिन्थियों 1:3-4 एनआईवी)।

अपने दुःख को किसी ऐसी चीज़ के रूप में देखना जो हमें दूसरों की मदद करने में सक्षम बनाती है, यह ऐसा दृष्टिकोण नहीं है जो दुःख की प्रक्रिया में जल्दी आता है और न ही इसे मजबूर किया जाना चाहिए। दुख के हर हिस्से में, समय आवश्यक घटकों में से एक है ।

सहानुभूति और करुणा नुकसान के साथ दर्दनाक मुठभेड़ों से पैदा होती है। जब हम दूसरों को अपने दुख के आंसुओं के माध्यम से देखते हैं, तो हमारे पास एक अलग दृष्टिकोण होता है जो हमें विशिष्ट रूप से उन लोगों के लिए करुणामय रूप से सेवा करने के लिए योग्य बनाता है जो दर्द में हैं।

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मौत मूल दुनिया में अस्तित्व में नही थी। आदम और हव्वा के अपने तरीके से जीवन जीने से परमेश्वर के साथ उनके रिश्ते टूट गए थे, उनकी सुरक्षा चकनाचूर हो गयी थी और परिणामस्वरूप पूरी मानवता के लिए मौत की सजा दे दी गयी थी।

प्रेरित पौलुस ने आदम और हव्वा के पाप का उल्लेख करते हुए लिखा, “इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।” (रोमियो 5:12)

हम शोक मनाते हैं क्योंकि हम पाप और मृत्यु से त्रस्त दुनिया में रहते हैं। पाप का संक्रमण शोक में कराहना पैदा करता है जो हमारे दिलों को पकड़ लेता है और सारी सृष्टि में व्याप्त हो जाता है:
क्‍योंकि हम जानते हैं कि सारी सृष्टि आज भी जनम के वक़्त की पीड़ा से कराहती है। इतना ही नहीं, वरन हम भी जिनके पास आत्मा का पहला फल है, हम भी अपने भीतर कराहते हैं, और गोद लेने, अपने शरीर के छुटकारे का बेसब्री से इंतजार करते हैं। क्योंकि हम इसी आशा में बचाए गए थे (रोमियो 8: 22-24)।

यह बहाली के लिए अंदर की कराहना है जो दु: ख के साथ हमारे संघर्ष के मूल में है।

शोक के प्रारंभिक चरणों में, तर्कसंगत व्याख्याएं लापरवाह और असंबद्ध होती हैं। तर्कसंगत रूप से सोचने के लिए आत्मा बहुत अधिक दर्द में होता है। हालाँकि, मसीह के विश्वासी जो ईमानदारी से नुकसान के साथ संघर्ष करते हैं, उन्हें परमेश्वर का वादा याद रखना चाहिए – वे वादे जो दुःख के माध्यम से यात्रा के लिए अत्यंत आवश्यक आशा प्रदान करते हैं।

क्या कभी नहीं खोया जा सकता है?

हमारे लिए परमेश्वर के स्थायी प्रेम की सबसे गहरी अभिव्यक्ति यीशु का देहधारण, बलिदान और पुनरुत्थान था।

परमेश्वर की आश्वस्त उपस्थिति। यह जानने से सुकून मिलता है कि, हम मौत से घिरे हुए हैं और नुकसान के दर्द ने हमारे दिलों को छेद दिया है, फिर भी हम अकेले नहीं हैं। भजन संहिता 23: 4 की छड़ी और लाठी परमेश्वर की उपस्थिति और सुरक्षा के प्रतीक हैं जब हम दु:ख की विश्वासघाती घाटी से गुजरते हैं। शायद ही कभी हमारे दुख और शोक के लिए एक संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया हो। बजाय, परमेश्वर अपने पीड़ित पुत्र के माध्यम से हमारे दुखों को साझा करता है जो हमारा विश्वासयोग्य और दयालु महायाजक है (इब्रानीयों 2:9,17) जो हमें कभी नहीं छोड़ता (रोमियो 8:31; इब्रानीयों 13:5)।

परमेश्वर की आश्वस्त उपस्थिति। यह जानने से सुकून मिलता है कि, हम मौत से घिरे हुए हैं और नुकसान के दर्द ने हमारे दिलों को छेद दिया है, फिर भी हम अकेले नहीं हैं। भजन संहिता 23: 4 की छड़ी और लाठी परमेश्वर की उपस्थिति और सुरक्षा के प्रतीक हैं जब हम दु:ख की विश्वासघाती घाटी से गुजरते हैं। शायद ही कभी हमारे दुख और शोक के लिए एक संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया हो। बजाय, परमेश्वर अपने पीड़ित पुत्र के माध्यम से हमारे दुखों को साझा करता है जो हमारा विश्वासयोग्य और दयालु महायाजक है (इब्रानीयों 2:9,17) जो हमें कभी नहीं छोड़ता (रोमियो 8:31; इब्रानीयों 13:5)।

क्या पाया जा सकता है?

परमेश्वर पर नए सिरे से निर्भरता। “विश्वास एक फुटब्रिज है जिसे आप नहीं जानते हैं, जब तक आप उस पर चलने के लिए मजबूर नहीं होते हैं, तब तक आपको खाई के ऊपर पकड़ लेंगे।” मसीह के अनुयायी जो दु:ख और हानि से गुज़रते हैं, अक्सर समय के साथ पीछे मुड़कर देखते हैं और उसके साथ उस स्तर की घनिष्ठता के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं जो पहले अज्ञात था। नुकसान की निरंतर पीड़ा के बावजूद, उनका परमेश्वर के साथ अधिक भरोसेमंद वाला रिश्ता है, जिसके लिए वे गहराई से आभारी हैं।

अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद से, मैं पहले से कहीं ज्यादा परमेश्वर के करीब हूं। मैं यीशु के करीब हूं जिसने हम सभी के लिए पुनरुत्थान जीवन संभव बनाया है जिन्होंने उस पर भरोसा किया है, चाहे वह मृत हो या जीवित (यूहन्ना 11:25-26)। मैं निश्चित रूप से इस बात से अधिक अवगत हूं कि वास्तव में जीवन कितना नाजुक और क्षणभंगुर है और मैं ईश्वर पर कितना गहरा निर्भर हूं। वह ज्ञान जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है, उस पर मेरा ध्यान केंद्रित रहता है।

जीवन में फिर से खोजा गया उद्देश्य। कुछ लोगों के लिए दुख की यात्रा एक नई दिशा का द्वार बन जाती है। जो माता-पिता एक बच्चे को खोने का दर्द जानते हैं, उन्हें कभी-कभी दूसरे शोकग्रस्त माता-पिता तक पहुंचने का नया उद्देश्य मिल सकता है। एक दशक पहले एक कार दुर्घटना में अपनी बेटी को खोने वाले डेव ब्रैनन कहते हैं, “यह वह सेवकाई नहीं है जिसे मैंने कभी चुना होगा, लेकिन यह वह है जो मुझे दिया गया है।” डेव के अनुभव ने उन्हें एक किताब, बियॉन्ड द वैली, में अपने दुःख की यात्रा के बारे में खुलकर बोलने के लिए प्रेरित किया। उनकी यात्रा ने कई दुखी माता-पिता की मदद की है। जो मार्ग पर आगे गए है, अक्सर वापस देने के तरीके ढूंढते हैं। कई तरह के कष्ट और नुकसान-तलाक, मृत्यु, गर्भपात-ने लोगों को अपने दर्द से निपटने में एक-दूसरे की मदद करने में सक्षम बनाया है।

जो मार्ग पर आगे गए है, अक्सर वापस देने के तरीके ढूंढते हैं। कई तरह के कष्ट और नुकसान-तलाक, मृत्यु, गर्भपात-ने लोगों को अपने दर्द से निपटने में एक-दूसरे की मदद करने में सक्षम बनाया है।

मैंने अनगिनत घंटे ऐसे लोगों की सलाह देने में बिताए हैं जो कई तरह के नुकसान से दुखी थे। इस दौरान मैंने ये अनुभव किया कि परमेश्वर मेरे नुक़्सानो का उपयोग, मेरे ग्राहकों के नुक़्सानो से जोड़ने के लिए करता है। आपका जो भी नुकसान हो, परमेश्वर आपको अपनी कहानी साझा करने और दूसरों को उनकी यात्रा पर प्रोत्साहित करने का अवसर देता हैं।

नुकसान से अच्छा?

जब हमारी दुनिया किसी प्रियजन के खोने से हिल जाती है, तो उससे कुछ अच्छा आने का विचार बेतुका लगता है, यहां तक ​​कि अश्लील भी। परन्तु गलील की पहाड़ी पर, यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि “धन्य हैं वे जो शोक करते हैं, क्योंकि उन्हें शान्ति मिलेगी” (मत्ती 5:4)। दुःख में हमारी आशा यह है: किसी भी नुकसान पर दुःख का अच्छा प्रभाव हो सकता है यदि यह हमें उद्धारकर्ता के चरणों में लाता है, अगर यह हमें उन लोगों के बीच रखता है जो यीशु के पास आराम और बचाव के लिए आए थे क्योंकि हम मानते हैं कि वह हमारी एकमात्र आशा है (4:23–5:1)।

जब हमारी दुनिया किसी प्रियजन के नुकसान से हिलती है, तो उससे कुछ अच्छा आने का विचार बेतुका लगता है, यहां तक ​​​​कि अश्लील भी। 

परेशान करने वाली वास्तविकता यह है कि हानि और परिवर्तन अनिवार्य रूप से जुड़े हुए हैं। नुकसान, चीजों को हमेशा के लिए बदल देता है। हालांकि, हम उस बदलाव में निष्क्रिय खिलाड़ी नहीं हैं; हमें यह तय करना है कि यह हमें कैसे आकार देता है, क्या यह हमें कड़वा या बेहतर बनाता है। दु: ख और हानि का घडिया चरित्र बनाता है। परमेश्वर हमारे ऊपर निर्भरता को गहरा करने के लिए सबसे दर्दनाक परिस्थितियों का भी उपयोग करना चाहता है (रोमियो 5:2-5)। उनकी अच्छाई दर्दनाक नुकसान की अंधेरी पृष्ठभूमि के खिलाफ उन तरीकों से प्रकट होती है जिन्हें हम अन्यथा कभी नहीं जानते होंगे।

निकोलस वाल्टरस्टॉर्फ ने इसका अच्छी तरह से वर्णन किया है:

मसीह के पुनस्र्ज्जीवन और मृत्यु में विश्वास करने के लिए भी शक्ति और चुनौती होनी चाहिए जो हम सभी पीड़ितों को अन्धेरे कब्रों से उठने के लिए प्रेरित करती है। अगर दुनिया के घावों के लिए सहानुभूति हमारी पीड़ा से नहीं बढ़ती है, अगर हमारे आसपास के लोगों के लिए प्यार का विस्तार नहीं होता है, अगर अच्छाई के लिए कृतज्ञता नहीं जलती है, अगर अंतर्दृष्टि गहरी नहीं है, अगर महत्वपूर्ण के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत नहीं होती है, अगर नए दिन के लिए तड़पना तेज नहीं होता, आशा कमजोर हो जाती है, और विश्वास कम हो जाता है, यदि मृत्यु के अनुभव से कुछ भी अच्छा नहीं आता है, तो मृत्यु की जीत हुई है।

मृत्यु का अंतिम कहना नहीं होता। हां, यह अंतिम शत्रु है जिसे नष्ट किया जाना है (1 कुरिन्थियों 15:26), लेकिन यीशु, हमारी आशा, ने अपने पुनरुत्थान में मृत्यु को कुचल दिया है (15:54-57)। इसलिए हमारे पास आशा और आराम की पेशकश है और हम उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब हम फिर कभी अलविदा नहीं कहेंगे।

उस दिन के आने तक, दु: ख आशा के साथ—पुनरुत्थान की आशा— हमें फिर से जीवन का आनंद लेने के लिए मुक्त करती है। हमारे नुकसान को याद करने से हमेशा दर्द होता है और कभी-कभी हमें फिर से आंसू बहाना पड़ सकता है (जैसा कि यह लेख लिखते वक़्त)। लेकिन दुःखों की जीवन बदलने वाली घाटी जीवन के लिए हमारी प्रशंसा और मसीह की वापसी की हमारी प्रत्याशा /संभावना को भी बढ़ाती है।

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