मत्ती 2:13-15
13 उनके चले जाने के बाद प्रभु के एक दूत ने स्वप्न में युसूफ को दिखाई देकर कहा, “उठ, उस बालक को और उसकी माता को लेकर मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूँ, तब तक वहीँ रहना; क्योंकि हेरोदेश इस बालक को ढूँढ़ने पर है कि उसे मरवा डाले l”
14 तब वह रात ही को उठकर बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र को चल दिया, 15 और हेरोदेस के मरने तक वहीँ रहा l इसलिए कि वह वचन जो प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था पूरा हो : “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया है l”
मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया है l मत्ती 2:15
ब्रिटेन में हाल की सर्दियाँ बेहद कठिन रही हैं। बढ़ती लागत का मतलब है कि वृद्धों, कम आय वाले परिवारों और लाखों अन्य लोगों के सामने अपने घरों को गर्म करने या खाने का इंतज़ाम करने का विकल्प।
इसके जवाब में, हज़ारों चर्च “हार्दिक स्वागत अभियान(Warm Welcome Campaign)” में शामिल हो गए हैं और आवश्यकतामंदों के लिए अपनी इमारतों को “गर्म स्थान” के रूप में पेश कर रहे हैं।
अभियान के संस्थापक बताते हैं, “क्रिसमस की कहानी में हम याद करते हैं कि यीशु का जन्म एक साधारण स्थान में हुआ था और फिर वह एक शरणार्थी के रूप में मिस्र ले जाया गया था, उसकी सक्रिय सेवा समाज के सबसे गरीब लोगों के बीच थी। चर्च आज ब्रिटेन भर में ज़रूरतमंद लोगों की सेवा करने और उनका गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आगे आकर इस कहानी को जी रहे हैं।”
यह अभियान यीशु के अपने दुख के अनुभव और पीड़ित लोगों के प्रति उसके प्रेम पर आधारित था। यीशु के आरम्भिक वर्षों में भी, परमेश्वर ने उसके सांसारिक पिता, यूसुफ से कहा था, “मिस्र देश को भाग जा; और जब तक मैं तुझ से न कहूँ, तब तक वहीं रहना, क्योंकि हेरोदेस इस बालक को ढूँढ़ने पर है कि उसे मार डाले” (मत्ती 2:13)। कुछ समय बाद ही यीशु इस्राएल लौट पाया, जिससे यह भविष्यवाणी पूरी हुई : “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया है” (पद 15)। यह आरम्भ से ही एक प्राचीन प्रकाशन था कि, यीशु को कष्ट सहना होगा।
क्रिसमस की कहानी में वर्णित परीक्षाएँ और अभाव हमें याद दिलाते हैं कि हमारा उद्धारकर्ता जानता है कि गरीब और ज़रूरतमंद होना क्या होता है। जब हम भी इसी तरह कष्ट सहते हैं, तो हम निश्चिंत हो सकते हैं कि हमें हमेशा उसका “हार्दिक स्वागत” मिलेगा।
यह जानना कि यीशु वास्तव में दुखों को समझता है, आपको कैसे मदद करता है? इस मौसम में आप दूसरों को उसका “हार्दिक स्वागत” कैसे दे सकते हैं?
प्रिय यीशु, जब जीवन असहनीय रूप से कठिन होता है, तो मुझे यह जानकर आराम मिलता है कि आप वास्तव में समझते हैं। धन्यवाद कि मैं हमेशा प्रार्थना में आपके पास सब कुछ लाने के लिए स्वागत योग्य हूँ।