यूहन्ना 13:1-11 

1 फसह के पर्व से पहले, जब यीशु ने जान लिया कि मेरी वह घड़ी आ पहुँची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊँ, तो अपने लोगों से जो जगत में थे जैसा प्रेम वह रखता था, अंत तक वैसा ही प्रेम रखता रहा l 2 जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय 3 यीशु ने, यह जानकार कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्वर के पास से आया हूँ और परमेश्वर के पास जाता हूँ, 4 भोजन पर से उठकर अपने ऊपरी कपड़े उतार दिए, और अँगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी l 5 तब बर्तन में पानी भरकर चेलों के पाँव धोने और जिस अंगोछे से उसकी कमर बंधी थी उसी से पोंछने लगा l 6 जब वह शमौन पतरस के पास आया, तब पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, क्या तू मेरे पाँव धोता है?” 7 यीशु उसको उत्तर दिया, “जो मैं करता हूँ, तू उसे अभी नहीं जानता, परन्तु इसके बाद समझेगा l” 8 पतरस ने उससे कहा, “तू मेरे पाँव कभी न धोने पाएगा !” यह सुनकर यीशु ने उससे कहा, “यदि मैं तुझे न धोऊँ, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं l” 9 शमौन पतरस ने उससे कहा, “हे प्रभु, तो मेरे पाँव ही नहीं, वरन् हाथ और सर भी धो दे l” 10 यीशु ने उससे कहा, “जो नहा चुका है उसे पाँव के सिवाय और कुछ धोने की आवश्यकता नहीं, परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है; और तुम शुद्ध हो, परन्तु सब के सब नहीं l” 11 वह तो अपने पकड़वानेवाले को जानता था इसी लिए उसने  कहा, तुम सब के सब शुद्ध नहीं l”

 

 

मनुष्य का पुत्र इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिए आया कि जाप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे l मरकुस 10:45

बहुत समय पहले, स्कॉटलैंड के राजा कभी-कभी अपने शाही वस्त्र उतारकर आम आदमी के कपड़े पहन लेते थे। वह ऐसा क्यों करते थे? ताकि वह लोगों के बीच स्वतंत्रता से घूम सकें। वह महल के बाहर के जीवन को समझना चाहते थे और अपनी प्रजा के बीच कुछ समय के लिए वैसा ही जीवन जीना चाहते थे। यह विनम्रता का एक जानबूझकर किया गया कार्य था क्योंकि राजा एक ऐसी दुनिया में कदम रख रहे थे जो उनकी हैसियत से बिल्कुल अलग थी।

लेकिन यीशु ने इससे भी कहीं ज़्यादा किया। हालाँकि यीशु परमेश्वर था, फिर भी वह इस दुनिया में आया और एक सेवक बना । पौलुस ने लिखा कि मसीह ने “अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया” (फिलिप्पियों 2:7)।

अपने मुकदमे और क्रूस पर चढ़ने से एक रात पहले अपने शिष्यों के साथ फसह का भोज खाते हुए, यीशु ने हमारे लिए इसे स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। उसका शिष्य यूहन्ना हमें बताता हैं कि यीशु “भोजन पर से उठकर, अपने ऊपरी कपड़े उतार दिए, और अंगोछा लेकर अपनी कमर बाँधी” (यूहन्ना 13:4)। फिर वह अपने शिष्यों के गंदे पैरों को धोया।

यह विनम्र कार्य मसीह के अपने मिशन के मूल्यांकन को प्रमाणित करता है : “क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे” (मरकुस 10:45)। तो फिर हमें इस बात पर आश्चर्य क्यों होता है कि वह अपने शिष्यों के पैर धोने के लिए एक कटोरा और तौलिया ले गया? यीशु ने हमें सेवा करने वाले राजा का हृदय दिखाया।

 

दूसरों की सेवा करने के यीशु के अद्भुत उदाहरण पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, यहाँ तक कि सबसे तुच्छ कार्यों में भी? आज आप किसी की सेवा कैसे कर सकते हैं?

प्रेमी उद्धारकर्ता, आपकी सेवा के विनम्र उदाहरण से हम विनम्र किये जाते हैं। आज हमारे जीवन में इसे और अधिक प्रदर्शित करने में हमारी सहायता करें।