मैं अपने कमरे के कोने में छोटे नीले रंग के सोफ़े पर बैठ कर उसे सांस लेते देखती थी। वह एक समय पर जीने का और एक ही समय पर मरने का प्रयत्न कर रहा था। वैज्ञानिक कहते हैं वैवाहिक जोड़ो की सांस लेने की और हृदय की गति कुछ समय के बाद परस्पर मिलने लगती है। अन्य लोग इस बात को नहीं समझ सकते हैं, पर मैं और आप जानते हैं कि यह सत्य है। अंत में जब श्वास लेने और छोड़ने में बहुत देर तक रुकावट नहीं हुई—और जब और सांस नहीं बची, प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हो चुकी थी— तुम्हारा हृदय धड़कना बंद हो चुका था, और सांस नहीं ले पा रहे थे। हाँ केवल मैं। यदि तुम वहाँ नहीं होते, यदि मैं और मेरा पति दोनों एक दूसरे से कई मील दूर होते —हम उसे महसूस कर सकते थे।

अप्रैल माह में दोपहर में वर्षा हो रही थी, मेरे पति की सांस बहुत रुक कर आ रही थी, और मेरे 22 वर्षीय पति ने अपनी अंतिम सांस ली—और मैंने उन्हें अंतिम विदाई दी। अभी मैं अपनी सांस रोक कर बैठी हूँ, कई वर्षों बाद, जब मैं लिख रही हूँ और याद करती हूँ, और मैं इस बात पर आश्चर्य कर रही हूँ कि क्या परिस्थितियाँ मुझे इस पृष्ठ तक ले कर आई हैं।मैं आपको देख रही हूँ; ऐसा लग रहा है कि आप भी अपनी सांस रोके हुए हैं। हम दोनों यहाँ पर एक ही कारण से हैं। आपके पति ने अंतिम श्वास ली, और आपकी श्वास तेज़ी से चल रही है। थाम कर रखें। सर्वव्यापी परमेश्वर की आत्मा, स्वर्ग और पृथ्वी के रचने वाले, इस जीवन, श्वास, मृत्यु और प्रत्येक स्थिति के संचालन में उपस्थित है।परमेश्वर की श्वास, उसकी उंडलती हुई आत्मा सदैव आपके साथ है। आप फिर से अपनी श्वास अंदर बाहर कर सकते हैं—सदैव अपनी श्वास को आप बिना किसी विषम धार दर्द के थाम कर रख सकते हैं। आप अपनी सांस थाम कर रख सकते हैं, और जी सकते हैं, क्योंकि आपका परमेश्वर जीवतों का परमेश्वर है।

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““दोपहर होने पर सारे देश में अँधियारा छा गया—तब यीशु ने बड़े शब्द से चिल्लाकर प्राण छोड़ दिये। और मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गया।” – मरकुस 15:33,37,38

कुछ लोग इस बात को इस प्रकार से वर्णन करते हैं जैसे कि उनका शरीर छिन्न भिन्न हो गया है। कुछ कहते हैं कि वे सांस नहीं ले सकते हैं, और कुछ कहते हैं कि उनका रक्त बहना नहीं रुका । आपको मालूम है कि उनका ऐसा कहने का क्या अर्थ है, क्योंकि उनका प्रिय उन्हें छोड़ कर जा चुका होता है। वह बिस्तर जो कभी किसी खराब दिन पर आप दोनों को बहुत छोटा लगता था,और अच्छे दिन पर अत्यंत आरामदेह लगा था,अब वह समुद्र की तरह विशाल और खाई के समान गहरा लगता है।

आपका पति यहाँ पर नहीं है, और आपको अपना हृदय नीरस स्थान लगता है। आपने कभी पहले इसे नहीं समझा था, पर अब आप समझते हैं। आपके लिए इस धरती पर “अँधियारा” है।

यीशु मसीह के द्वारा ली गई अंतिम श्वास उद्देश्यपूर्ण, और स्वतन्त्रता पूर्वक मृत्यु के अनुभव का इच्छापूर्वक समर्पण था। पर इस क्षण आपको यह मज़ाक लग रहा होगा श्वास लेने के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास करना—मृत्यु विजय नहीं पा सकी। वह प्रेम जो उस दिन तितर बितर हो गया, यह वही प्रेम था जिस पर उद्धार की नयी वाचा की आपके और मेरे लिए मुहर लगाई गई थी।यद्यपि वाचा का वह बन्ध जो आप और आपके पति के बीच में था वह दो भागों में बंट चुका है। उनकी मृत्यु आपकी इंद्रियों को सुन्न कर देती है और सारे समय प्रज्ज्वलित रहती है।

पौलुस प्रेरित नई वाचा के विषय में क्या कहते हैं, “क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल होकर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समता में, और पाप के बलिदान होने के लिए भेजकर, शरीर में पाप पर दंड की आज्ञा दी।” (रोमियों 8:3)

पर वाचा का वह प्रेम जिसका मूल्य वास्तव में चुकाया गया था, अब खोता हुआ प्रतीत होता है,और दुख के बंजर मैदान में पावित्र फल लगेंगे। यद्यपि अभी आपको यह जीवनरहित क्षितिज लगता है। क्यों : विवाह अस्थायी है: जो वास्तविकता वह दर्शाता है वह अनंत है।

जब आप अपने यादों के दर्पण में देखते हैं, आप उसमे अपने विवाह के महत्व और महिमा की झलक को देखते हैं। आपका यह दर्द उस भाग का “जब तक मृत्यु हमें अलग न करे” का अस्थायी भाग है, पर अनंत सच्चाई मृत्यु पर विजय है। इस सच्चाई को समझने के बाद आपके दुख की गहराई कम होने लगती है। मृत्यु परमेश्वर की अटल वाचा का उल्लंघन करती है। पर परमेश्वर ने मृत्यु पर विजय प्राप्त करी। “कि जब तक गेहूं का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परंतु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है।” (यूहन्ना 12:24)

फिर से आप अपने विवाह को दर्पण में देखें। आपने उसे एक बहता हुआ सोता सोचा था वह एक जीवनरहित क्षितिज था, आपके सामने बहुतायत से नए जीवन की फसल खड़ी है, जो मृत्यु के अंत की कल्पना का उल्लंघन करती है।

विवाह आपस में एक दूसरे का परस्पर प्रेम में समर्पण है। विवाह वाचाओं में बंधा होता है, अर्थातअदला बदलीविवाह में होना ही चाहिए। यद्यपि यह एक रहस्य है, एक बलिदान भी होना चाहिएबलिदान, लहू का। इसमें आश्चर्य की बात नहीं है इसीलिए विवाह कोवेदीकहा जाता है।

विवाह की वाचा एक रिश्ते की मुहर हैजो कि दोनों के मध्य में लहू और हृदयों की दैवीय एकता के कारण होती है।इस कारण पुरुष अपने माता पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक तन बने रहेंगे।” (उत्पत्ति 2:24) यह इसलिए है क्योंकि परमेश्वर ने इस वाचा पर मुहर लगाई है। अर्थात इसको जब तक नहीं तोड़ा जा सकता है जब तक कि इसमें विनाशकारी जटिलता या दर्द हो। आपने देखा कि परमेश्वर एक ऐसा गोंद है  जो दो भिन्न लोगो  को जोड़ता है और अद्भुत रीति से मजबूती से उनके प्रेम को एकरसता मे बांधता है। इस धरती के विवाह,यीशु और उसकी दुल्हन (कलीसिया ) की वाचा के प्रतिरूप हैं, और मृत्यु के आत्ममोह ने इसके महत्व को कम करके इस प्रतिरूप को नष्ट कर दिया है।

इस वाचा पत्र की गहराई इस बात का कारण है कि आपको अपने के खोने से बहुत आघात पंहुचता है :जो प्रभावशाली और अपरिवर्तनीय था, वह अब दो में बंट चुका है।

आपका दुख एक ऐसा अकथनीय दुख है जिसे एक पवित्र प्रत्युत्तर की आवश्यकता है। दुख या आघात शब्द का वर्णन भी नहीं किया जा सकता है। उसी प्रकार हमारे लिए यीशु का बलिदान एक ऐसा अकथनीय दर्द है, जिसका प्रत्युत्तर भी पवित्र होना चाहिए। यद्यपि शब्दों में उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है समविष्ट किया जा सकता है। पर नियम मृत्यु ने नहींपरमेश्वर ने बनाए हैं।

मंदिर के पर्दे के फटने के कारण जो भय उत्पन्न हुआ था, और जिसे विनाश का चिन्ह माना जा रहा था, वह अब एक विश्वासी को शांति देता है। क्योंकि जिस प्रकार से मंदिर का पर्दा फटा था, दुख का अंतराल भी उसकी विपुलता से कम हो जाएगा। उसका हृदय दुख से भरा था, दर्द था, ताकि आपके हृदय को चंगाई मिले। वही शक्ति जिसने पर्दे को फाड़ा था, उसने कब्र को खोला और जीवित यीशु भी कब्र को खोलेगा, जिस स्थिति में आपका हृदय अभी है—और उसको पुनर्जीवित करेगा जो आपको अनन्त लगता है।

हमारे राजा ने मृत्यु का सामना किया, कोई प्रतियोगिता नहीं थी। मेमने का मरा हुआ शरीर मृत्यु रूपी चेहरे से पुनर्जीवित हो गया था और सबके मुंह बंद कर दिये थे।

यीशु जानते हैं कि प्रेम का छिन जाना कैसा होता है। उसने अपनी मृत्यु के स्मरण में अपने लहू का प्याला बांटा जो इस बात की याद दिलाता है कि जो भी आप और मैं दुख भोगते हैं, वह उसने भी सहा है—और विजय पाकर निकला है। उसने अपने पिता से कहा, जैसा तू हे पिता मुझ में है, और मैं तुझ में हूँ, वैसे ही वे भी हम में हों। (यूहन्ना17:21) उसी प्रकार से उस दिन से आपके विवाह की वेदी, पर यह वाचा लागू कर दी गई। यीशु भी मृत्यु की छाया से बाहर निकले आप भी निकल सकते हैं।

अभी भी, कहीं दूर पर एक गीत सुनाई दे रहा है। यह आपका गीत है। अभी तक आपने उस मधुर आवाज़ को नहीं सुना है, पर आप उन शब्दों को जानते हैं: “जय ने मृत्यु को निगल लिया। हे मृत्यु तेरी जय कहाँ रही?” (1 कुरिन्थियों 15:54-55) यह सब बदल देती है।

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दुख कई प्रश्न पूछता है। वह उसके लिए भी लंबे समय तक रहता है जो अब है ही नहीं: आपका प्रिय। यदि वे यहाँ पर होते, और आप उन्हें ढूंढ नहीं पाते, तो वह खोज आपके लिए कोई महत्व नहीं रखती थी जब तक आप उन्हें खोज नहीं लेते थे। यही दुख के साथ भी होता है। आपको उनकी गर्माहट की आवश्यकता होती है, और आपको उत्तर चाहिए;आप जानना चाहते हैं क्यों। उत्तर यह जानकर कि अज्ञात है काफी नहीं होता है—क्योंकि आप जानते हैं, दुख कोई साधारण भाषा नहीं है, और उसे एक साधारण भाषा से संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। अज्ञात कोई भीबात को झुटला नहीं सकता है —शायद हो भी सकता है।

स्नायु विज्ञानी ने बहुत ही आत्मसंयम के साथ मेरे पति के प्राण घातक निदान की रिपोर्ट मेरे हाथों में दी। यह हमारे लिए बहुत ही अज्ञात बात थी। हमारे जीवन में एक रिक्तता आ गयी,या हमारा जीवन थम सा गया। जैसे कि मध्यरात्री में टीवी का शो जो उस दिन के लिए समाप्त हो जाता है। यह बहुत ही गहरा सदमा था। एक अज्ञात बात मुझे घूर रही थी, और मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझ में शिष्टाचार नहीं है। मुझे लगा इसको मुझे एक मुक्का मार देना चाहिए। पूरी रात और अगले दिन स्नायु विज्ञानी के शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। कुछ भी नहीं था केवल—अज्ञात।

समाचार तीव्रता से फैल गया, और अगली शाम को, एक कार मेरे निवास द्वार में आकर रुकी, फिर एक और अनेक। पूरे मार्ग में कारों की लाईन लग गई थी। मुझे नहीं ज्ञात कि उस दिन मेरे कितने मित्र आए थे, पर हमारे छोटे से घर में सब समा गए। उनकी संगति की मीठास स्थायी थी। पूरी रात सब रोते रहे, आनन्द बहुत दूर था, पर हम परमेश्वर से प्रार्थना करते रहे और चंगाई की विनती करते रहे। हमारा पुत्र सैमुएल और उसके मित्र ने गिटार बजा कर हमे परमेश्वर के अनुग्रह के सिंहासन के सामने आने के लिए प्रेरित किया। मुझे याद है मेरा पुत्र बेंजामिन हाथ उठा के चंगाई के लिए गा रहा था। वह 10 वर्ष का था।

“आमीन”के बाद, कमरे में गहरी शांति छा गई, और मुझे लगा कि अभी समाप्त नहीं हुआ है। परमेश्वर हमसे और प्रार्थना करने के लिए कह रहा है। काफी देर हो चुकी थी और हम सब थक चुके थे, पर हमने फिर सिरों को झुका लिया। एक प्रिय मित्र की आवाज़ सुनाई दी, “सुज़ेन, मुझे लगता है परमेश्वर चाहता है कि हम फिर से प्रार्थना करें क्योकि कुछ ऐसा है जो वह हमसे कहना चाहता है। वह तुम से कुछ कहना चाहता है। वह तुम्हें कहना चाहता है कि वह तुम्हारे इस अज्ञात दरवाज़े के मार्ग पर तुम्हारे साथ खड़ा है।

सिवाय परमेश्वर के कोई उस शब्द को नहीं जानता था जो मेरे मस्तिष्क में विचरण कर रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि परमेश्वर ने उसके संसार को मेरे लिए रोक दिया है, वापिस वह उस संसार को मेरे लिए जीवित रूप में लाया है। यदि परमेश्वर के पास यह विशेषता है, वह अज्ञात है। वह मुझ से कह रहा था कि जब भी कोई चीज़ तुम्हें अज्ञात लगे, वह वहाँ पर होगा, जो कि अपनी ध्वजा (बैनर) को इस बात को स्मरण दिलाने के लिए लहरा रहा होगा कि उसके पास मेरे विषय की असीमित जानकारी है। उस दिन के बाद से वह अज्ञात ज्ञात हो गया क्योंकि उसमें वह था। वह वहाँ था, जो मैं देख नहीं सकती थी, समझ सकती थी और मुझे ज्ञान नहीं था, वहाँ पर उसका निवास था।

अज्ञात परमेश्वर से मिलने का और उसके प्रेम को अनुभव करने का स्थान बन गया था। उसके शब्द में प्रेम था, मुझे बदल दिया था, जो आज भी इसी प्रकार निरंतर चला आ रहा है।

तुम मेरे दुख मनाने वाले मित्र, इस अज्ञात को अपने शरीर और मस्तिष्क को आराम देने के लिए समय दो और उसमें शरण लो जो तुम्हारे अज्ञात में भी सब कुछ जानता है। “अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है।” (इब्रानियों 11:1)

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शायद सुसमाचार के लिखने वालों ने यीशु की मृत्यु के विषय में बहुत ही कम शब्दों का प्रयोग किया है क्योंकि उस नियुक्त कार्य को करने के लिए कोई शब्द ही नहीं थे। क्या शब्द सटीक बैठते हैं? राजा की मृत्यु के पहले तीन घंटे तक दूसरे ही प्रकार के संसार का अंधकार था। और जब उसका समय आया, वह बड़े ही असाधारण तरीके से चीखा,वह आवाज़ इतनी उत्कर्ष और ताकतवर, कि मंदिर के पर्दे फट गए, और धरती कंपकपाई और थरथराने लगी। उसी समय इतिहास की सर्वोत्तम विजय और अद्वितीय दुख की घोषणा हो गई थी।

चाहे वह तुम्हारे साथी के अंतिम श्वास लेने के अंधकार भरे घंटे हों, आप उस आंतरिक चीख से परिचित होते हैं। आपका संसार थरथरा उठता है, और भूकंपीय झटके आपके जीवन की नींव को उथल पुथल करते रहते हैं। पर चूरा, मिट्टी और कीचड़ के मध्य, वही परमेश्वर जिसने सब बनाया, वही हमारे उद्धार की चट्टान है और हमें एक दृढ़ नीव पर स्थिर कर सकता है।

मैं केलिफोर्निया में पली और बड़ी हुई, इसलिए मैं भूकंपोंमें जीवन को जानती हूँ। मैं जानती हूँ कि जब भूकंप आता है, हम धरती और दीवारों के कंपकंपानेको रोकने मेंकितने छोटे और असहाय हो जाते हैं।जब हमने अपना पहला घर बनाया, हमने यह प्रयत्न किया कि हमारे घर की नींव उस परीक्षा मे पास हो जाए। हमारा मित्र रोलैंड एक ठेकेदार है, और हमने उसे यह काम करने को दिया। क्योंकि सर्दी के मध्य में काम आरंभ हुआ, उसे नींव को सही स्थिति में स्थिर करने के लिएनीचे की मिट्टी पर विशेष ध्यान देना पड़ा। ढांचे को सहारा देने के लिए नीचे की मिट्टी स्थिर होनी चाहिए, अन्यथा वह घर भरभरा कर नीचे गिर जाएगा। यदि नीचे की मिट्टी या जमीन ढीली है तो मकान बनाने से पहले उसके लिए अतिरिक्त ध्यान देना होगा। यह सब भूकंप आने की तीव्रता और मौसम के नमूनों की गंभीरता पर निर्भर करता है। जितनी तेज़ी से मिट्टी खिसकती है,नींव को समतल करने में उतना ही अधिक समय लगता है, ताकि वह उस मकान के लिए उपयुक्त हो।

दुख ने हमारे जीवन की नींव को हिला दिया है, सोचने के लिए बहुत कुछ है। जो हलचल हमारे अंदर है वह बहुत अधिक है और उसे स्थिर होने के लिए समय चाहिए। उसे स्थिर होने दें, दुख मना ले क्योंकि भविष्य की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अपने जीवन को किस प्रकार से शांत किया है। इस समय बहुत भागदौड़ करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

जिस प्रकार कि नींव के लिए सोच समझ कर योजना बनाई जाती है, आप भी दुख मनाने का समय लें। आप अपने दुख को मलबे के नीचे न दबा दें; वह समय के साथ क्षीण हो जाएगा।धैर्य रखें; परमेश्वर आपके लिए सब ठीक करेगा। और जब आप प्रतीक्षा कर रहे हैं, उसके प्रेम में बने रहें, जहां पर आपके दुख को दूर करने के लिए जिसकी आवश्यकता है, वह आपकी पंहुच में है।

आप संसार की नींव पर खड़े न हों, जहां पर मौसम तूफानी है और आपको समझौते की तरफ आकर्षित करता है। आपका स्वास्थ्य, रिश्ते, भावनाएं और आत्मिक स्थिरता केवल एक पर स्थिर होनी चाहिए,सच्ची नींव—यीशु मसीह। वह गिलाद देश का बलसान (औषधि) है जोसबके घाव को चंगा करता है। कहीं और झूठी शांति पाने के लिए इधर उधर न जाएँ,जिनका एकमात्र उद्देश्य अस्थायी शांति देना है।

गिलाद देश का बलसान संदर्भ को यिर्मयाह ने अपनी पुस्तक में (यिर्मयाह 8:22)में बताया है, जो यीशु मसीह के द्वारा चंगाई का प्रतिनिधित्व करता है। यह “बाम” या औषधि बलसान के वृक्ष में पाई जाती है, जो कि गिलाद नामक स्थान के पर्वतीय क्षेत्र में जो कि यरदन नदी के पूर्व में है वहाँ पर पाया जाता है। “गिलाद” का अर्थ है “गवाही का स्तम्भ”। यह औषधि इस पेड़ से जब निकलती है जब उसमें चीरा लगाया जाता है, और वह उसमें से बह कर निकलती है। यह एक बहुत अमूल्य तोहफा माना जाता है। इसी प्रकार यीशु मसीह हमारे ज़ख्मों को उसके बेशकीमती लहू के द्वारा शांति और चंगाई देता है, वह लहू जो उसके जख्मों से बहता है, वह हमारी चंगाई और गवाही के लिए है।

आप अपनेदुख को स्थिर होने दें और आप उसके भार के नीचे नहीं दबेंगे। परमेश्वर आपको स्थिर करने के लिए आपकी जड़ों को मजबूत करेगा, और आप फिर से खड़े होंगे—पर समय दें।

““—आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवंत करेगा”।(1 पतरस 5:10)”

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बैन अपने पिता का एक कमजोर रोता हुआ बच्चा था। पिताजी उसके डायपर बदलते थे, उल्टी साफ करते थे और रात को हौल में ऊपर नीचे बॉब को उठाकर लय में गाते थे, “याह-याह—याह –याह —याह—याह” जब तक बैन आराम से चैन की नींद नहीं सो जाता था।

जब बैन इतना बड़ा हो गया कि वह अपने घर के आसपास की घाटियो और पहाड़ियो पर चढ़ सके, दोनों पिता – पुत्र एक साथ चढ़ाई करते थे और द्र्श्यों,आवाज़ों, गंधों और अपनी बातचीत को आपस में बांटते थे। वह वास्तव में पिता और पुत्र की सुंदर यादें थीं। इससे अधिक, उसे याद है उसने अपने पिताजी से फुटबॉल (सौकर) खेलना सीखा क्योंकि उसके पिताजी ने पहले उसे सिखाया। संसार उसे संसार का सबसे “खूबसूरत खेल” मानता है, “पर बैन के लिए उसकी सुंदरता उसके बचपन के पिताजी के साथ बिताए हुए दिन थे, वह उसके साथ उसे जोड़ कर देखता था।

बैन का कई वर्षों तक उस खेल के प्रति लगाव बढ़ता ही गया। उसने कॉलेज में भी फुटबॉल को खेलने की आशा रखी, पर चोटों और परिस्थित्यों के कारण उसे अपने सपनों को पीछे छोड़ना पड़ा जो कि उसके घर के पिछवाड़े में कई वर्ष पहले आरंभ हुए थे। वह अपने पिताजी के लिए खेलना चाहता था। वह उसमें उत्तम होना चाहता था और चार वर्षों तक उसने विषम कठिन परिस्थियों मेंप्रयत्न किया, पर संभव नहीं हो पाया। फुटबॉलटीम के कप्तान को अपने कॉलेज के अंतिम वर्ष में फुटबॉल नहीं खेल पाने का दुख हुआ, इसका अर्थ था कि फुटबॉल को जाने देनाउसके पिताजी को भी जाने देना है, और वह यह नहीं देख पाया कि किस प्रकार वह ऐसे होने दे सकता।

एक रात हम दुख से शांति और निर्देश के लिए सिर झुका कर बैठे। परमेश्वर ने हम से उस रात बात करी, और उसने हमें दिखाया वह वास्तव में ऐसा था जो कभी नहीं देखा था। एक कमरा जिस में सीमाएं नहीं थीं, और वह सुनहरी थी। उस कमरे के बीच में एक धरीया (कुठाली) थी जो द्रव्य रूपी खजाने से भरी हुई थी। स्वर्ण को शुद्ध करने का तरीका जाना पहिचाना था; वह यीशु मसीह थे। वह मुस्कराए और रीति के अनुसार उस धातुमल के ऊपर के सुनहरे भाग को अपने हाथ से छान करनिकाला और मुझे बताया कि यह स्वर्ण का भाग बैन का दुख है। तब यीशु ने कहा, “उसे उसको रखना होगा।” जो यीशु ने छान कर ऊपर का भाग निकाला वह बैन का वह दुख था जिसका कोई उद्देश्य नहीं था। वह दुख का भाग जो बचा हुआ था वह बैन को रखना था, पर अभी उसके लिए अपने खजाने को शुद्ध करना था। परमेश्वर ने हमें आश्वासनदिया है कि वह उस काम को स्वयं संभालेगा; बैन को उसे करने की आवश्यकता नहीं है। उसे केवल विश्वास करना है।

धातु को आग के द्वारा शुद्ध करने का तरीका संसार में सबसे अधिक प्रचलित है और अभी भी प्रयोग में आता है। आग को 1000 डिग्री सेल्सियस तक जाना होता है, पर उसमें बचे हुए स्वर्ण के मूल्य में कोई कमी नहीं होती है, केवल उसकी कीमत और क्षमता में वृद्धि ही होती है।
धातुमल एक ऐसा दूषित पदार्थ है जिसे अलग करना होता है, अन्यथा मूल्यवान धातु की कीमत खत्म हो जाएगी।किसी को “शुद्ध” करने का वास्तविक अर्थ उसे स्वतंत्र करना और उत्तमत्ता के लिए उसमें सुधार करना है। ग्रीक भाषा में इसका अनुवाद है “प्रज्ज्वलित होना”। स्वर्ण का चिन्ह (Au) एक लेटिन भाषा के शब्द से आया है जिसका अर्थ है “चमकता हुआ या चमकती हुई भोर”,क्योंकि शुद्धिकरण के अंतिम स्तर पर, स्वर्ण बहुत ही “तीव्रता से चमकता” है। ऐसा दृश्य तब उत्पन्न होता है जब शुद्ध धातु से चमकती हुई रोशनी प्रज्ज्वलित होती है।

उस रात के प्रार्थना और दुख के समय वह दृश्य लगातार हमें सिखा रहा हमें उस धातुमल को कभी भी नहीं भूलता हैं। वह तो बेकार के पदार्थ से बना है और टूटे हुए हृदय को जोड़ने या चंगाई से रोकता है। उसे पीछे छोड़ देना कभी भी दुखदाई नहीं लगा, न उसने और दुख उत्पन्न किया, क्योंकि मालिक का हाथ काम कर रहा है और वह उसे समाप्त होते देखता है।

मैंने अपने हाथों में बहुत सारी चीजों को ले रखा है और मैंने सबको खो दिया है।पर जो भी मैंने परमेश्वर के हाथों में सौंपा है, वह अभी तक मेरे पास है |मार्टिन लूथर

मेरे दृढ़ मित्र, अभी जो तुम्हारे पास सांत्वना है वहकेवल तुम्हारे मुख पर आँसू ही हैं; और जब तुमआगे देखते हो, तो तुम्हें कहीं अंत नहीं दिखाई देता है, भविष्य के लिए कोई आशा नहीं है। तुम्हारे स्वप्न और जुनून, शौक तुम्हारे घर के पिछवाड़े में ही समाप्त हो गए हैं, और वह यादें तुम्हें चंगाई के स्थान पर कुरेदती ही रहती हैं। पर तुम्हारे पास एक दयालु शोधक है जिसकी लौ तुम्हें उस धन संपदा से कभी नहीं छोड़ेगी जो तुम प्रयोग नहीं कर सकते हो। उसका प्रेम तुम्हें कभी भी तुम्हारी कीमत और क्षमता को बेकार होने की अनुमति नहीं देगा।तुम्हारे दुख का खज़ाना तुम्हारे उद्देश्य को पूरा करेगा—पर जो बेकार है, और कुछ कीमती उत्पन्न नहीं करेगा, जो तुम्हारे भविष्य को दूषित करेगा, उसे प्रभु यीशु मसीह के शोधक हाथों में सौंप दो।

आप स्वयं धातुमल को अलग नहीं कर सकते हैं, बहुत कठिन है। पर कोई बात नहीं। अभी सब कुछ कठिन है। एक कम काम को थोड़ी फुर्सत में कर सकते हैं। वह अपने में ही चंगाई है। यह शुद्धता का काम आपके जीवन के दुखों में चलता रहेगा, पर जब प्रयत्न किया जाता है, तो आप उसमें से स्वर्ण की तरह शुद्ध निकलेंगे।

बैन फुटबॉल खेलना चाहता था, ताकि वह अपने पिता को सम्मान दे सके, उनके लिए सर्वोत्तम बनना चाहता था। ईश्वर के लिए शुद्धता का अर्थ है अपने जीवन को बिना धातुमल के दुख से बिताना अर्थात बिलकुल स्वतंत्र रहना, अपने में सुधार लाना, सर्वोत्तम होना। ऐसा लगता है कि बैन का सपना सच हुआ। इसमें आश्चर्य की बात नहीं है कि यीशु मुस्करा रहे थे।

परंतु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूँगा।” (अय्यूब 23:10).

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एक शाम, अंतिम समय में मैं बॉब के पास लेटी हुई थी। उस समय वह आराम कर रहा था। वह मेरी ओर मुड़ा और मुझे जोर से देखते हुए पकड़ा और कहा, “याद रखना। सदा याद रखना, मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ।” मैंने उसकी बातों को याद रखा। वह क्षण भूलना असंभव है। न ही उसके जीवन को भूलना। उसकी समाधि-प्रस्तर पर ये शब्द लिखे हुए हैं, “हम याद रखेंगें।”
थिओलोजीयन (धर्मशास्त्री) शेपर्ड कहते हैं याद रखने का अर्थ है “भूतकाल की बातों को या पिछली बातों को वर्तमान में लाना, इसलिए जो पहले हुआ था वह अभी भी होता रहे। उस समय जो सामने आया था, उसमें सदा के लिए सुधार करना ताकि उसे अभी भी“याद रखा जा सके।”

आप अपने विवाह की वेदी के विषय में सोचें, जहां पर परस्पर प्रेमके समर्पण की वाचा बांधी गई थी, एक और भी अन्य प्रकार की वेदी है, बहुत पवित्र। वह यादगारी की वेदी है जो परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की बेजोड़ शक्ति को बताती है जो उसके लोगों के मार्ग में कोई रुकावट नहीं आने देती है।
यह वेदी याद दिलाती है जहां यीशु मसीह ने स्वयं को बचाने से मना कर दिया था, ताकि वह हमें इस निरंतर अंधकार से बचा सके। वह हमेंनिमन्त्रण देता है कि जब हमारा मार्ग भय की परछाई से घिरा हो तो हम उस पर विश्वास करें। यह वेदी हमें इस बात की याद दिलाती है कि वह हमें किस प्रकार से असंभव के मध्य में से और अभी की अफरा तफ़री और भविष्य की अज्ञातता से बाहर निकलता है। वह हमारी कहानी कोदूसरों को बताता है और दुखी व खोये हुओं को घर पंहुचाता है। यह वेदी हमें याद दिलाती है कि प्रतिज्ञाएँ सदैव हमारे साथ हैं। इस वेदी में हमारे दर्द को शांति में बदलने की असीमित शक्ति है। यह वेदी हमें सदा के लिए सुधार देती है: जैसा कि होना भी चाहिए।

दुख को दूर होना चाहिए, हमें उसमें से बाहर आना चाहिए, पर हम उसमें से “बाहर नहीं आना चाहते हैं”। जीवन उसकेलिए बहुत पवित्र है। प्रिय मित्र इसका कोई अर्थ नहीं है, कि आपको कोई क्या कहता है, याद करना विश्वास की अभिव्यक्ति है जब हम परमेश्वर को समर्पण कर देते हैं, यह भी आराधना का एक रूप है।
“धन्य हैं वे जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे।” (मत्ती 5:4) शोक मनाना दुख को अनुभव और अभिव्यक्त करने का उत्कट तरीका है। शांति पाने के लिए हम शोक मनाते हैं। यह यहाँ पर है, यादगारी की वेदी पर, जहां पर आशीष आपकी प्रतीक्षा कर रही है, और आत्मिक मांसपेशी की रचना विश्वास और दर्द से हुई है। वेदी दुख मनाने और याद करने की आज्ञा देती है। आपका नुकसान आपके प्रयत्न से बहुत अधिक है— यद्यपि कल्पना करना कठिन है—वह शांति जो आप पाएंगे वह आपके पिछले रात्री के दुखों को भुला देगी।

इस बात को सोचें—जब इस्राएलियों ने यर्दन नदी पार करी थी और जो पत्थर उनके पैरों के नीचे आए थे, वे उनकी यादों की वेदी बन गए। वह जो मार्ग सोचा भी नहीं था वह उनकी महिमा बन गई, और एक नए स्थान पर, एक नए उद्देश्य के लिए, नए आरंभ का चिन्ह बन गई, और ऐसा ही आपके लिए भी होगा। अनमोल मित्र,तुम्हारी वेदी भी यर्दन नदी के बीच के पत्थरो से बनी होनी चाहिए। जानबूझकरयाद करना पवित्र है और वह अक्षरश ऊबड़ खाबड़ और दुख के कोने का पत्थर होना चाहिएताकि आप उस पर स्थिर रह सकें।

याद रखने का अवसर और तोहफा (ईनाम) कभी भी पुराने नियम में रुका नहीं। यीशु मसीह ने जिसके लिए प्रभुभोज की विधि को संस्थापित किया—वह एक बार नहीं, पर जब भी हम प्रभु भोज में भाग लें, उसकी यादगारी में करें। अटारी (ऊपरी कमरे) में शांति से व्यतीत किए गए घंटे फसह की याद दिलाते हैं, यह यहूदी लोगों के छुटकारे की यादगारी का चिन्ह है।
एक समय था जबकि हमारी बेटी जेनिफर को सदा ऐसा विचार सताता था जिसको शांत नहीं किया जा सकता था कि उसके पिताजी को अन्य लोग भूल जाएंगे, यद्यपि जितने भी उनको जानते थे वे उनसे उतना ही प्रेम करते थे। यह विचार कि उसके पिताजी को सब भूल गए हैं कई वर्षों तक उसके साथ चलता रहा। हमने उसकी यादों की वेदी पर कई पत्थर डाले। यहाँ तक कि उसके पिताजी के बिना हम उसको गिरजे के बगली रास्ता (आइल) में भी ले कर गए। और दो प्यारी बच्चियों के जन्म के विषय में भी बताया।और जब तीसरी बेटी पैदा होने वाली थी और पुत्र की आशा थी। जेनिफर के पति ने उसके साथ इस बात को बांटा कि परमेश्वर ने उसके हृदय में “जकर्याह” नाम डाला है। जिसका अर्थ है “यहोवा सदा याद रखता है”।

प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरंभ ही से हैं;क्योंकि ईश्वर मैं ही हूँ, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूँ और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।” (यशायाह 46:9)

मेरे दुखी मित्र, तुम अपने प्रिय को याद रखने के लिए स्वतंत्र हो, क्योंकि परमेश्वर ने तुमहें सबसे ऊंची वेदी पर याद रखा, और वह हम सबसे कहता है कि हम भी उसे याद रखें। 

इस बात का ध्यान रखें, सामना करें जबकि दूसरे आपसे मुंह फेर लेते हैं, परमेश्वर को और अपने प्रिय को सम्मान दो, और याद रखो—वह तुमसे बहुत प्रेम करता है।

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जब मैं यह लिख रही थी तब बसंत ऋतुके मध्य का समय था, हो सकता है कि आपके लिए बसंत ऋतु न हो, इससेकोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह वर्ष का कौन सा समय था।हाँ, अवश्य दुख की ठंडी लहर अभी तक मेरे साथ बसी हुई थी जबकि मौसम ऐसा नहीं था। पर और भी अन्य सत्य हैं जो हमारे साथ सदा ही रहते हैं, उसी प्रकार जैसे प्रात: काल होती है फिर सूरज ढलता है और पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती रहती है। यह आपका परमेश्वर है जो ऋतुओं को बदलता है, और वह है जो आपको शरद (सर्दी) ऋतु के मध्य में बचा कर रखता है।
उसके पराक्रम से ही स्वर्ग बना और अभी तक कायम है, और बादल उसके चरणों की धूल हैं। वह परमेश्वर जिसके साम्हने मृत्यु को भी झुकना चाहिए वह पृथ्वी को उसके कामों के फल से संतुष्ट करता है, और वह आपके खालीपन को भी भर सकता है।

वह सब चीजों की पुन:स्थापना करता है—वह आपको भी पुन:स्थापित करेगा। अभी भी प्रक्रिया आरंभ हो गई है। शाखा आवश्यकता की पूर्ति कर रही है, और तुम्हारा दर्द अच्छा फल लाएगा जब दाख की बारी को काटने वाला कोमलता से और अवश्य ही छँटाई करेगा। पर क्या आप उसे करने देंगे? क्या सुरक्षित है? हम सोचें: इस प्रकार से काटना कि उसे पुन:स्थापित किया जा सके, यह थोड़ा विषम संयोजन लगता है। पर परमेश्वर के मार्ग बहुत ऊंचे हैं और परिणाम भी।
यूहन्ना रचित सुसमाचार के यह प्रसिद्ध शब्द सुनें:

“सच्ची दाखलता मैं हूँ: और मेरा पिता किसान है। जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छाँटता है ताकि और फले। तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में:जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे , तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूँ: तुम डलियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।“ (यूहन्ना 15:1,2:4,5)
आप देखते हैं कि दाख की बारी काटने वाला व्यक्तिगत है, क्योंकि उसका पुत्र दाख है और आप लताएँ हैं। उद्देश्य विभिन्न प्रकार के हैं पर प्राथमिक उद्देश्य पुन:स्थापना का है। यह काम प्रेम के साथ किया जाता है। दाखलताओं की छँटाई सर्दी की ऋतु में करी जाती है जब दाख सुप्त अवस्था में या निष्क्रिय होते हैं। तब उसका मुख्य उद्देश्य होता है कि उन शाखाओं की कताई कर दी जाए जिनमें कोई रोग दिखाई देता है या वे अन्य शाखाओं को संक्रमित कर सकती हैं। यदि उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाए तो वे कम मात्र में “फलने वाली लकड़ी” के कारण बहुत घनी हो जाती हैं,और उन दाखों को श्वास लेने में भी विघ्न पैदाहोता है।

आप उस भावना को समझ सकते हैं।
दाख को काटने वाला अधिक फल लाने पर अपना ध्यान केन्द्रित करता है, पर गलत समय पर बहुत अधिक फल भी नहीं होने देता है। क्योंकि उससे दाख को पूरी तरह से बढ्ने और पूरी तरह से पकने के लिए मिलने वाली शक्ति और पौष्टिकता कम हो जाएगी।
दूसरा उद्देश्य शाखाओं को ढांचे के अनुकूल बनाना ताकि जब वह बढ़े तो उस ढांचे पर चढ़े। इस प्रकार वह भविष्य को भी ध्यान में रखता है। पुन: स्थापना कताई दाख को पुन: स्थापित करने पर ध्यान केन्द्रित करती है, विशेष तौर तूफान आने के बाद वह फिर से पुन:स्थापित की जा सके और बसंत ऋतु में मजबूती से बढ़ सके। दाख की बारी वाला उस समय नरम और ताकतवर दोनों ही होता है, विश्वासी और निर्णय लेने में सक्षम होता है। वह अपने दाख की बारी के हरेक “सदस्य” (दाख) के विषय में सम्पूर्ण जानकारी रखता है। । यही आपके और आपके दुख के विषय में है।

आप देख रहे हैं कि पुनर्स्थापना जितना आपसे लिया गया है उससे अधिक लौटती है। यह विजय है!उसी प्रकार से जिस प्रकार से सूखे से पीड़ित व्यक्ति का जो आराधनलय में था, मरकुस 3 में इस विषय में पढ़ते हैं।हम अपने टूटे हुए मन और दुख भरे अस्तित्व को उसके सामने रखते हैं और वह हमें पुनर्स्थापित करता है। यह परमेश्वर के स्वभाव की प्रचुरता है। उसका पुनर्स्थापना का अनुग्रह बढ़ता है और मृत्यु की सीमाओं को पार कर जाता है—क्योंकि उसका प्रेम समाहित नहीं है। यह इफिसियों 3:20 जैसा है, जिसको मापा नहीं जा सकता है।

अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है (इफिसियों 3:20).

पर पहले—छँटाई है। पीछे हटने की आवश्यकता नहीं है। सुनो: उसकी छँटाई उसका आलिंगन है, केवल आपकी मर्जी की आवश्यकता है। यह यूहन्ना 15 के “बने रहो” के अर्थ है। छँटाई का अर्थ है आराम करो।
कुछ अवशेष जीवन और दुख के लिए साधारण है, उनके ऐसे नाम हैं जो आपको ज्ञात हों, और आपसे चुरा लिए गए हों। अभी तक आप उनसे अपना पीछा नहीं छुड़ा पाये हों। इसलिए क्योंकि दाख की बारी वाला चाह रहा है कि आप ऐसा करें, आपको पुंर्स्थापित करें। मैं उन्हें एक नाम दूंगा, पर आपको उसे दाख की बारी वाले को छँटाई के लिए देना होगा।

चाहे उंगली आपकी ओर उठ रही हो या किसी ओर की तरफ, उन्हेंक्रोध, असंतोष, कड़वाहट, क्षमा नहीं करना, दोषारोपण,दुख, मूर्खता, दुख पंहुचने वाले संबंध, सांसारिक व्यसन और झूठी शांति देने वाली बातों के लिए छँटाई करनी होगी। आपको तुरंत ही इन शब्दों को पढ़ कर समझ में आ जाएगा कि किस प्रकार इन चीजों की उपस्थिती ने आपके हृदय और मस्तिष्क को प्रभावित किया है। ये स्वाद में कड़वे हैं, और आपके दुख, आपके प्रिय की याद और आपके भविष्य को और दूषित करते हैं।तब भी आपने इनसे समझौता कर लिया है, और अपने मित्रों की तरह आलिंगन कर लिया है।यदि आप उन्हें अपने पास रखेंगे, तो वे आपको ताने मारते रहेंगे और जिसको आपने खोया आप उसका अपमान करेंगे। वह आपके दुख को वापिस ले आएंगे और आपके नुकसान की कीमत किसी और को चुकाने को कहेंगे।
यहाँ पर विशेष बात है—किसी ने किया है।

मेरे मित्र, प्रत्येक ऋतु में उमड़ता हुआ अनुग्रह आपके लिए है, और दाख की बारी वाला आपको अवश्य ही पुनर्स्थापित करेगा—यद्यपि अभी आपको जीवन स्थायी रूप से निष्क्रिय या सुप्त लगता है। आपके दुख का पवित्र फल अवश्य पनपेगा, आपकी जड़ें और अधिक बढ़ेगी और आपको स्थिर करेंगी। क्योंकि आपकी दाख की बारी वाला याद रखता है, यह व्यक्तिगत है।

“अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिस ने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिए बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवंत करेगा”। (1पतरस 5:10).

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किसी को नहीं मालूम था, पर मैं बिस्तर के उस कोने पर कंबल के नीचे चली गई जहां पर बॉब ने अंतिम सांस ली थी। और कंबल से अपने आप को इस प्रकार ढँक लिया कि वह कपड़ा जिसे उसने अंतिम बार छुआ था वह मुझे भी छू रहा है।
कुछ अलविदा के क्षण सदा के लिए याद रह जाते हैं, इसलिए नहीं कि वे परिवर्तन को आसान बना देंगे, पर इसलिए क्योंकि वे एक निरंतर खराब चलचित्र की तरह महसूस होते हैं।

हमारे शब्द “गुडबाय” (अलविदा) शाब्दिक रूप से “गौड बी विथ यू” (परमेश्वर तुम्हारे साथ रहे) से आया है। अलग अलग संस्कृतियों में अलविदा कहने के अलग अलग तरीके हैं। रूस में अतिथि के जाने के बाद तुरंत ही कमरा साफ नहीं करते हैं। तुर्की में रिश्तेदारों और परिवार के इकट्ठा होने के बाद उनके अतिथियों के कार जाने के बाद सड़क पर पानी से भरी बाल्टी डालते हैं। यह इस बात का चिन्ह है कि जिस प्रकार से नदी का बहाव होता है उसीप्रकार उनके प्रिय जनों की यात्रा सहज और सुगम हो और साथ ही वापसी भी सुगम हो। तोरा की शिक्षा समाप्त करके यहूदी एक प्रकार से अलविदा के विषय यह पढ़ते हैं कि, “हम आपके पास वापिस आएंगे,”क्योंकि अलविदा अर्थात परमेश्वर की महिमा का कभी भी अंत नहीं होता है।
हम में से कई को अलविदा कहना कभी कभी अच्छा लगता है, पर जब हम इसमें परमेश्वर को देखते हैं—अलविदा में परमेश्वर के नाम को डालते हैं तो अर्थ बादल जाता है। सच्चाई यह है कि, पाप ही हर प्रकार के अलविदा का मुख्य कारण है। वही अलग करने वाला है।

परमेश्वर पाप से नफरत करता है क्योंकि वह किसी को उसके प्रिय से अलग करता है और आप इस प्रकार के अलगाव की गहनता को जानते हैं। पर परमेश्वर की पाप से घृणाऔर अलगाव मृत्यु को अवपथन करती है। परमेश्वर दया के द्वारा दुख पर विजय पाता है और निराशा को दूर करता है। परमेश्वर जानता है कि अपने प्रिय से अलग होना कितना अधिक कठिन होता है, और वह अविचारी बात को पूरा करने हमें फिर से एक साथ करने आया है। “क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोये हुओं को ढूँढने और उन का उद्धार करने आया है।” (लूका 19:10)
तब भी हम पूछते हैं, “क्यों?” अभी भी यह सहन करने योग्य नहीं है और हमारा स्वभाब माइक्रोफोन की ओर झुक कर यही प्रश्न पूछता है, “यदि परमेश्वर अच्छा है—?” हम चाहते हैं कि हमें कोई आकर विस्तार से समझाये; जैसे कि उसका वर्णन काफी होगा। इसलिए यीशु ने बहुत अधिक, बहुत अधिक—एक उत्तर से भी अधिक दिया है, क्योंकि एक साधारण उत्तर जीवन के सबसे बड़े “क्यों” के लिए काफी नहीं है। और मेरे मित्र, क्या इसका कोई महत्व है? आपका प्रिय तो तब भी वापिस नहीं आयेगा, यदि आपको इसका उत्तर मालूम है। इस लिए परमेश्वर उत्तर से भी अधिक देता है! वह प्रश्न जो हमने पूछा है उससे भी बहुत अधिक देता है।

यीशु के चेलों ने भी प्रश्न पूछा। उन्होने यह स्वीकार नहीं किया, और न वे यह समझे कि उसे उन्हें छोड़कर क्यों जाना है; उसे अलविदा कहना पड़ा। यूहन्ना 16:7 में यीशु ने उनसे कहा, “तौभी मैं तुमसे सच कहता हूँ, कि मेरा जाना तुम्हारे लिए अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊँ, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आयेगा, परंतु यदि मैं जाऊँगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा।”
हमारे उद्धारकर्ता का अलविदा बहुत कष्टकारी था, पर उसके द्वारा शैतान, और मृत्यु पर सदा के लिएरोक लग गई। अब हम न केवल उस परमेश्वर के लिए जीवित हैं जो हमारे साथ खड़ा है, पर वह हमारे अंदर है। यह “अलविदा”पर विजय है।
शैतान के द्वारा दुष्टता का बुना गया जाल परमेश्वर ने अच्छाई से बुन दिया है,पर शैतान विफल हो जाता है क्योंकि यीशु ने अपने जीवन के सबसे अधिक दर्द में अलविदा कहा, हम को उससे भी अधिक में रहने के लिए शक्ति मिलती है।
मैं अपने बीते हुए समय के कंबल से बाहर निकली:आप भी निकलें। परमेश्वर आपके टूटे दिलों को जोड़ने से और भी अधिक करेगा। उस अधिक में रहना सीखें। यही आपके अलविदा में अच्छा है।

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मेरे मित्र यहाँ की यात्रा छोटी है, पर मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप अब “अलविदा”
में भी अच्छा देख सकते हैं।आपका दुख आपको आपके खजाने के साथ बने रहने के लिए शिक्षा देता रहेगा। आपने क्षितिज के आश्चर्यकर्म को खोजना आरंभ कर दिया है,और मैं सम्मानित महसूस करता हूँ कि मैं भी आपके साथ नदी पार कर चला हूँ ताकि आपकी वेदी को बना सकूँ।
और अब, यह तुम्हारे भेजने के लिए है: लूका 9, में चेले जब बहुत थक चुके थे, उन्होने यीशु से कहा कि भीड़ को वहाँ से जा कर भोजन सामग्री लाने को कहे। पर यीशु विरोधाभास को जानते थे, यद्यपि चेलों ने प्रश्न किया कि वे एक “एकांत स्थान” पर हैं और उनके पास भीड़ को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
आप और मैं उस भावना को जानते हैं।

अपितु यीशु ने कहा, “तुम उन्हें खिलाओ”। कल्पना करें कि यह यीशु आप से कह रहे हैं—इस समय आपके एकांत, अज्ञात स्थान में। आप सोच रहे हैं कि मेरे पास तो कुछ भी नहीं है। पर क्या होगा यदि आपका बोझ बहुत अधिक है? वह आपके पास बहुतायत से है! याद रखें, वह खाद्य सामग्री जो यीशु के हाथों से आई थी और यीशु देते रहे—वह आपके लिए भी करेगा। उस दिन विशेष बात यह थी कि वे टुकड़े टूटे हुए थे “भरपूर”। यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी कि वह सदा उनके साथ और उनमें रहेगा।
पर यह एक आश्चर्यकर्म होगा, आप कहें। हाँ। वास्तव में।

पौलूस ने मकिदुनिया के गिरजों के विषय में कहा, “कि क्लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनंद और भरी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई।“ (2 कुरिन्थियों 8:2)
विश्वासी, जीवन के टुकडों को जो आप बेकार समझते हैं वो वास्तव में देने के लिए भोजन हैं। आपका मालिक आपको आश्चर्यचकित करेगा और प्रेम से आपको आनंद के द्वारा चंगा करेगा, और दुख आपका बड़ा खज़ाना बन जाएगा और वह दूसरों की ओर बहेगा। मृत्यु अंतिम शब्द नहीं है, क्योंकि विजय ने मृत्यु को निगल लिया है।
धैर्य रखो, मेरे मित्र, परमेश्वर समीप है। मैं प्रार्थना कर रहा हूँ।

“जो लोग अँधियारे में चल रहे थे उन्होने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अंधकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी।“ (यशायाह 9:2)

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