कुलुस्सियों 3:9-14 

9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो, क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्व को उसके कामों समेत उतार डाला है 10 और नए मनुष्यत्व को पहिन लिया है, जो अपने सृजनहार के स्वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिए नया बनता जाता है l 11 उसमें न तो यूनानी रहा न यहूदी, न खतना न खात्नाराहित, न जंगली, न स्कूती, न दास और न स्वतंत्र : केवल मसीह सब कुछ और सब  में है l

12 इसलिए परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो, 13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो; जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किये, वैसे ही तुम भी करो l 14 इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्ध है बाँध लो l

 

 

उसमें न तो यूनानी रहा न यहूदी . . . न दास न स्वतंत्र : केवल मसीह सब कुछ और सब में है l कुलुस्सियों 3:11

यूनाइटेड किंगडम के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले सम्राट ने एक अन्य सम्राट का अनुसरण किया, जो प्रतिदिन यीशु का अनुसरण करने का प्रयास करता था : “मसीह की शिक्षाएँ… एक ढाँचा प्रदान करती हैं जिसके अनुसार मैं अपना जीवन जीने का प्रयास करता हूँ।“ परिणामस्वरूप, महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने अपनी प्रजा से सद्भाव से रहने और पक्षपात न करने का आह्वान किया। उनके विचार में, मसीह ने अपने संसार को “यह स्पष्ट करके आश्चर्यचकित कर दिया कि दुर्भाग्यशाली और वंचितों का स्वर्ग के राज्य में धनी और शक्तिशाली लोगों के समान स्थान है”।

महारानी का दूसरों से प्रेम करने और उनकी सेवा करने का आह्वान प्रेरित पौलुस के आह्वान से मेल खाता था, जिसने कुलुस्से की कलीसिया को एक भावुक पत्र लिखा था। झूठे शिक्षक लोगों को भ्रमित कर रहे थे, लेकिन पौलुस चाहता था कि वे मसीह के ज्ञान की ओर लौट आएँ। विश्वासियों को पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा “नए मनुष्यत्व को पहिन” लेना था (कुलुस्सियों 3:10)। अतः, इसलिए कि “उसमें न तो यूनानी रहा न यहूदी, न खतना न खतनाराहित, न जंगली, न स्कूती, न दास और न स्वतंत्र : केवल मसीह सब कुछ और सब में है” (पद 11)।

जब हम मसीह में अपने विश्वास को स्थापित करते हैं, तो हम पाते हैं कि वह हमें अपने जैसा बना रहा होता है। शायद हम समाज में अपने स्थान को पहले से कम महत्व देते हैं, या शायद हम आवश्यकतामंदों की मदद करने के लिए उत्सुक हो जाते हैं। जब हम सबसे महान राजा की सेवा करते हैं, तो हम इस बात पर प्रसन्न होते हैं कि हम “परमेश्वर के चुने हुए लोग” हैं, जिन्हें वह राजसी वस्त्र नहीं, बल्कि “करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता” प्रदान करता है (पद 12)।

राजा की सेवा करने से शक्ति और धन के प्रति आपके दृष्टिकोण पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आप अपने आस-पास दिखाई देने वाले किसी भी विभाजन को कैसे दूर कर सकते हैं?

राजाओं के राजा, आप महान और सामर्थी हैं, और फिर भी आपने अपने पुत्र को मेरे लिए मरने के लिए भेजा। मुझे आपसे और दूसरों से प्रेम करने और उनकी सेवा करने में मदद करें।