भजन 118:1-14

1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!

2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है l 3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है l 4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूँ सदा की है l

5 मैं ने सकती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुनकर, मुझे चौड़े स्थान में पहुँचाया l 6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूँगा l मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 7 यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर संतुष्ट हूँगा l

8 यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है l 9 यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है l 10 सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा l 11 उन्होंने मुझ को घेर लिया है, निःसंदेह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा! 12 उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु काँटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नष्ट कर डालूँगा ! 13 तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूँ, परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की l 14 परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है l

 

परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है l भजन 118: 14

एक प्रसिद्ध टीवी प्रस्तुतकर्ता और टिप्पणीकार, कहते हैं कि वे अपने काम से प्रेम करते हैं,  लेकिन उन्हें अपने करियर(आजीविका) से परिभाषित होना पसंद नहीं। इसके बजाय, वे “परिवार, मित्र और विश्वास” से संचालित होते हैं। और, वे आगे कहते हैं, “जो चीज़ें मायने नहीं रखतीं, वे हैं प्रसिद्धि, धन और वह झाग अथवा व्यर्थ का बकवाद जो कभी-कभी इस उद्योग के साथ आता है l”

लोगों की नज़रों में सेवा करते हुए, वे यीशु के प्रति सच्चे बने रहने का प्रयास करते हैं। वे कहते हैं, “मेरे विश्वास——मेरी मसीहियत——के संदर्भ में मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मुझे एक दृष्टिकोण प्रदान करता है l”

जब उन्हें दूसरों से नहीं, बल्कि परमेश्वर से अपनी पुष्टि मिलती है, तो “प्रशंसा मुझे कभी बहुत ऊँचा नहीं उठाती, और आलोचना मुझे कभी बहुत नीचा नहीं दिखाती l” इसमें वे भजनहार की बात दोहराते हैं : “यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा करने से उत्तम है” (भजन संहिता 118:8)। हालाँकि इस भजन के रचयिता का नाम अज्ञात है, हो सकता है कि वह राजा दाऊद रहा  हों, क्योंकि यह गीत दूसरे मंदिर के समर्पण के समय गाया गया था (देखें एज्रा 3:11)। दाऊद ने एक चरवाहे के रूप में रहते हुए, और बाद में शाऊल से भागते समय, परमेश्वर की प्रेमपूर्ण सुरक्षा को जाना था। इसलिए वह निडर होकर कह सका, “यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूँगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है?” (पद 6) ।

हमें शत्रुओं से भागने या टीवी पर समाचार प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हम भी अपने प्रेममय और सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर भरोसा रख सकते हैं। वह हमारा सहायक है, जिस पर हम पूर्ण विश्वास कर सकते हैं।

आप परमेश्वर के बजाय लोगों को प्रसन्न करने से कैसे बचते हैं, या परमेश्वर की बात सुनने के बजाय दूसरों की टिप्पणियों में अपना मूल्य कैसे ढूँढ़ते हैं? आज आप परमेश्वर की पुष्टि कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

सृष्टिकर्ता परमेश्वर, आपने मुझे अपनी छवि में बनाया है और मैं जानता हूँ कि मैं अद्भुत रूप से रचा गया हूँ। अपने पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा मुझे मेरे सच्चे स्वरूप में पुनर्स्थापित करें।