यशायाह 7:10-17
10 फिर यहोवा ने आहाज से कहा, 11 “अपने परमेश्वर यहोवा से कोई चिन्ह माँग, चाहे वह गहिरे स्थान का हो, या ऊपर आसमान का हो l” 12 आहाज ने कहा, “मैं नहीं माँगने का, और मैं यहोवा की परीक्षा नहीं करूँगा l”
13 तब उसने कहा, “हे दाऊद के घराने, सुनो ! क्या तुम मनुष्यों को उकता देना छोटी बात समझकर अब मेरे परमेश्वर को भी उकता दोगे? 14 इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा l सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जानेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी l 15 और जब तक वह बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना न जाने तब तक वह मक्खन और मधु खाएगा l 16 क्योंकि उससे पहले कि वह लड़का बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना जाने, वह देश जिसके दोनों राजाओं से तू घबरा रहा है निर्जन हो जाएगा l 17 यहोवा तुझ पर, तेरी प्रजा पर और तेरे पिता के घराने पर ऐसे दिनों को ले आएगा कि जब से एप्रैम यहूदा से अलग हो गया, तब से वैसे दिन कभी नहीं आए——अर्थात् अश्शूर के राजा के दिन l”
प्रभु आप ही तुमको एक चिन्ह देगा l सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र को जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी l यशायाह 7:14
मेरी पत्नी द्वारा दूसरे बेटे को जन्म देने के बाद, कुछ समय तक हम उसका नाम रखने में मुश्किल में थे। आइसक्रीम की दुकानों में कई घंटे बिताने और कार की लम्बी यात्रा के बाद भी, हम तय नहीं कर पाए। तीन दिन तक उसका नाम बस “बेबी विलियम्स” रखा गया, जिसके बाद आखिरकार उसका नाम माइका रखा गया।
सही नाम का चुनाव करना थोड़ा परेशान करने वाला हो सकता है। खैर, जब तक परमेश्वर जिसने उस व्यक्ति लिए सिद्ध नाम नहीं दिया जो हमेशा के लिए चीज़ें बदल देने बाला था। भविष्यद्वक्ता यशायाह के द्वारा, परमेश्वर ने राजा आहाज को अपने विश्वास को मज़बूत करने के लिए उससे “एक चिन्ह” मांगने के लिए कहा (यशायाह7:10–11)। हालांकि राजा ने चिन्ह मांगने से मना कर दिया, फिर भी परमेश्वर ने उसे एक चिन्ह दिया : “एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र को जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी” (पद 14)। परमेश्वर ने बालक का नाम रखा, और वह निराशा से गुज़र रहे लोगों के लिए उम्मीद की निशानी होने वाला होगा l यह नाम लोगों के दिलों में बस गया और मत्ती ने जब यीशु के जन्म की कहानी लिखी तो उसमें नया मतलब डाल दिया (मत्ती 1:23)। यीशु “इम्मानुएल” होगा l वह सिर्फ़ परमेश्वर का प्रतिनिधि नहीं होगा, बल्कि वह देह में परमेश्वर होगा, जो अपने लोगों को पाप की निराशा से बचाने वाला होगा l
परमेश्वर ने हमें एक चिन्ह दिया l वह चिन्ह एक पुत्र है। पुत्र का नाम इम्मानुएल है——परमेश्वर हमारे साथ। यह एक ऐसा नाम है जो उसकी उपस्थिति और प्रेम दिखाता है। आज, वह हमें इम्मानुएल को अपनाने और यह जानने के लिए बुलाता है कि वह हमारे साथ हैं।
आपको कौन सी बात यह मानने से रोकती है कि परमेश्वर अभी आपके बुरे समय और मुश्किल समय में नई जान डाल सकता है? इस सप्ताह आप यीशु को इम्मानुएल के तौर पर कैसे अपनाएंगे?
स्वर्गीय पिता, इम्मानुएल——आपके बेटे यीशु, के लिए धन्यवाद।
आज मैं उसकी उपस्थिति और प्यार में खुश रहूँ l