रोमियों 8:1-10
1 अतः अब जो मसीह यीशु में हैं, उन आर दण्ड की आज्ञा नहीं l [क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्मा के अनुसार चलते हैं l] 2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया l 3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल होकर न कर सकी, उस को परमेश्वर ने किया, अर्थात् अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिए भेजकर, शरीर में पाप पर दंड की आज्ञा दी l 4 इसलिए कि व्यवस्था की विधि हममें जो शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए l 5 क्योंकि शारीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं : परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शांति है; 7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है और न हो सकता है; 8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते l
9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं परन्तु आत्मिक दशा में हो l यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं l 10 यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुयी है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है l
[परमेश्वर ने] अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिए [भेजा] l रोमियों 8:3
एक सेकंड-हैंड सामान की सेल में, मुझे एक टूटे-फूटे कार्ड-बोर्ड बॉक्स में एक क्रिसमस सेट मिला। जैसे ही मैंने बालक यीशु(baby Jesus) को उठाया, मैंने बच्चे के शरीर की बारीक नक्काशी देखी। यह नया बच्चा कंबल में नहीं लिपटा था और आँखें बंद थीं——वह जागा हुआ था और कपड़े में थोड़ा खुला हुआ पड़ा था, उसकी बाहें फैली हुई थीं, हाथ खुले थे और उंगलियाँ फैली हुई थीं। ऐसा लग रहा था जैसे कह रहा हो, “मैं यहाँ हूँ!”
यह छोटी मूर्ति क्रिसमस के आश्चर्यकर्म को दिखा रही थी——कि परमेश्वर ने अपने बेटे को मनुष्य के शरीर में धरती पर भेजा। जैसे-जैसे यीशु का बालक शरीर बड़ा होता गया, उसके छोटे हाथ खिलौनों से खेलने लगे, आखिरकार उसने तोरा—यहूदियों का पञ्च ग्रन्थ(Torah) को पकड़ा और फिर अपनी सेवा शुरू करने से पहले फर्नीचर बनाया। उसके पैर, जो जन्म के समय मोटे और सुन्दर थे, उसे जगह-जगह उपदेश देने और चंगाई देने के लिए ले जाने के लिए बड़े हुए। उसके जीवन के आखिर में, इन मानवीय हाथों और पैरों में कीलें ठोंकी जाने वालीं थीं ताकि उसके शरीर को क्रूस पर लटकाया जा सके।
रोमियों 8:3 कहता है, “उस शरीर में परमेश्वर ने हमारे पापों के लिए अपने पुत्र को बलिदान के रूप में देकर हम पर पाप के नियंत्रण को खत्म करने की घोषणा की” l अगर हम यीशु के बलिदान को अपनी सभी गलतियों के लिए कीमत के तौर पर स्वीकार करते हैं और अपना जीवन उन्हें सौंप देते हैं, तो हमें पाप के बंधन से छुटकारा मिलेगी। क्योंकि परमेश्वर का पुत्र हमारे लिए एक असली, खेलने वाले बच्चे के रूप में जन्म लिया, इसलिए परमेश्वर के साथ शांति और हमेशा के लिए शांति का भरोसा पाने का एक तरीका है।
क्रिसमस में यीशु का उत्सव मनाने और क्रिसमस के मौसम का उत्सव मानाने में क्या अंतर है?
प्रिय परमेश्वर, मुझे पाप और मृत्यु के बंधन से स्वतंत्र करने के लिए यीशु को एक मानव बालक के रूप में धरती पर भेजने के लिए धन्यवाद।