मत्ती 24:4-14, 32-33
4 यीशु ने उनको उत्तर दिया, “सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए, 5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं मसीह हूँ’, और बहुतों को भरमाएँगे l 6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे, तो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अंत न होगा l 7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भूकंप होंगे l 8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी l
9 तब वे क्लेश देने के लिए तुम्हें पकड़वाएँगे, और तुम्हें मार डालेंगे, और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे l 10 तब बहुत से ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे को पकड़वाएँगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे l 11 बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएँगे l 12 अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा, 13 परन्तु जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा l 14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अंत आ जाएगा l
32 अंजीर के पेड़ से यह दृष्टान्त सीखो : जब उसकी डाली कोमल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्म काल निकट है l 33 इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है l
इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो कि वह निकट है, वरन् द्वार ही पर है l मत्ती 24:33
“यह ज़रूर दिखाई देगा!” नीरज न्यूज़ चैनल पर भविष्यवाणी की गई बहु-ग्रहों की एक झलक पाने के लिए रात में देर तक जागता रहा। हमारा आसमान आमतौर पर इतना साफ़ नहीं होता कि ऐसी एक रेखा दिखाई दे, लेकिन हम देर रात अपनी छत पर इकट्ठा हुए थे क्योंकि उसके स्कूल में और ऑनलाइन इस खगोलीय घटना के बारे में काफ़ी उत्साहपूर्ण चर्चा हो रही थी। हमें कितना आश्चर्य हुआ कि हम उन ग्रहों को देख पाए जो नंगी आँखों से दिखाई नहीं देते! यह एक अद्भुत दृश्य था! और अगर नीरज सतर्क न होता तो हम इसे देख नहीं पाते।
जब यीशु के शिष्यों ने उसके आगमन के बारे में पूछा, तो उसने उन्हें वे संकेत दिए जिन पर ध्यान देना चाहिए। बढ़ती प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाएँ (मत्ती 24:6-7) “पीड़ाओं” (पद 8) की शुरुआत होंगी। उत्पीड़न और भ्रामक सिद्धांतों (पद 9-11) में वृद्धि, “धीरज धरे रहने” (पद 13) को और कठिन बना देगी। फिर भी, इस दौरान सुसमाचार पूरे संसार में फैलता रहेगा (पद 14)।
जब हम ऊपर की विनाशकारी घटनाओं को देखते और सहते हैं, तो हम यह सोचने के लिए प्रेरित हो सकते हैं कि संसार नियंत्रण से बाहर हो गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। यीशु के वचन हमारी आशा जगाते हैं। जब हम ये चीज़ें देखेंगे, तो वह कहता है, हम जान जाएँगे कि वह “निकट है, वरन् द्वार ही पर है” (पद 33)। हमारे संसार की बढ़ती अराजकता मसीह की योजना को कमज़ोर नहीं करती है । बल्कि, यह इस बात की पुष्टि करती है कि वह जल्द ही आ रहा है।
डेबी फ्रैलिक
क्या आप मत्ती 24 में यीशु द्वारा बताए गए संकेतों में वृद्धि देख रहे हैं?
उसके शीघ्र पुनःआगमन का आपके आस-पास के संसार में व्याप्त अराजकता को देखने के आपके दृष्टिकोण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
प्रभु यीशु, मैं उस दिन का इंतज़ार कर रहा हूँ जब आप आएंगे और स्थायी शांति लाएँगे।
आपका धन्यवाद कि संसार चाहे कितना भी अनियंत्रित क्यों न लगे, आपके पास एक ऐसी योजना है जिसे कोई भी विफल नहीं कर सकता।