यशायाह 53:1-6   

1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किसने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?

2 क्योंकि वह उसके सामने अँकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते l

3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दुखी पुरुष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उससे मुख फेर लेते थे l वह तुच्छ जाना गया, और हम ने उसका मूल्य न जाना l

4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुखों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा l

5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाएँ l

6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया, और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया l

 

 

हमारी ही शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके  कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाए l यशायाह 53:5

पति की मृत्यु के बाद रीना का पहला क्रिसमस एक असफलता जैसा लगा। वह अपने दो छोटे बच्चों के लिए इसे एक आनंदित दिन बनाना चाहती थी, ताकि इस त्यौहार के मौसम में उन्हें अपने पिता की बहुत ज़्यादा याद न आए। लेकिन वह अपने दिल में दबे दुःख और दर्द को उनसे छिपाने में संघर्ष कर रही थी। उसने जो विशेष भोजन बनाने का प्रयास किया था, वह असफल रहा और आँसुओं में खत्म हुआ। लेकिन उसके माता-पिता और दोस्तों ने उसे दिलासा दिया और उसका दर्द कम करने में मदद की। उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना की कि वह उन्हें एक सार्थक त्योहार बनाने में मदद करे जिसका वह और उसके बच्चे आनंद ले सकें।

प्रोत्साहित होकर, रीना ने “दुखी पुरुष, यीशु, “रोग से जिसकी पहिचान थी” (यशायाह 53:3)——जिसने स्वयं अलगाव और हानि का अनुभव किया था, का उत्सव मनाने का फैसला किया।

भविष्यवक्ता यशायाह का यह अंश परमेश्वर के लोगों को बेबीलोन की बंधुआई के लिए तैयार करने, परमेश्वर में उनकी आशा और विश्वास को गहरा करने के लिए दिया गया था। लेकिन यह भविष्यवाणी यीशु के जन्म, जीवन और मृत्यु के द्वारा भी पूरी होती है : “निश्चय उसने  हमारे रोगों को सह लिया और हमारी ही शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाएँ” (पद 4,5) l

यीशु ने इस धरती पर दुःख झेला, लेकिन अपनी मृत्यु के द्वारा उसने हमें क्षमा और स्वतंत्रता प्रदान की है। उसके घावों के द्वारा हमें शांति और चंगाई मिलती है——तब भी जब हम अपनों से दूर क्रिसमस मनाते हैं।

यह तथ्य कि यीशु “दुःख से परिचित” था, आपको कैसे सांत्वना और आशा प्रदान करता है? परमेश्वर ने आपके दर्द और हानि के अनुभवों को कैसे कम किया है?

यीशु, आप जो मनुष्य और परमेश्वर हैं, आपने स्वर्ग छोड़ दिया और यहाँ धरती पर धोखा, पीड़ा  और मृत्यु का सामना किया——और यह सब मुझे बचाने के लिए। आप में मेरी आशा मज़बूत हो जाए और दुनिया में दुःख और संघर्ष के कारण मेरे दुःख कम करें।