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Articles by करेन हुआंग

मसीह के लिए हृदय

मैंने खुद से कहा, जब तक मैं अपना मुंह बंद रखूंगी, मैं कुछ भी गलत नहीं करूंगी। एक सहकर्मी द्वारा कही गई बातों की गलत व्याख्या करने के बाद मैं बाहरी तौर पर उसके प्रति अपना गुस्सा दबा रहा थी । चूँकि हमें हर दिन एक-दूसरे से मिलना होता था, इसलिए मैंने अपनी बातचीत को केवल उसी तक सीमित रखने का निर्णय लिया जो आवश्यक था (और अपने मौन व्यवहार से प्रतिशोध लेता थी)। शांत आचरण गलत कैसे हो सकता है?

यीशु ने कहा कि पाप हृदय से शुरू होता है (मत्ती 15:18-20)। मेरी चुप्पी ने लोगों को मूर्ख बनाया होगा कि सब कुछ ठीक है, परन्तु परमेश्वर को मूर्ख नहीं बना रहा था। वह जानते थे । कि मैं क्रोध से भरा हृदय छिपा रही हूँ। मैं उन फरीसियों के समान थी जो होठों से तो परमेश्वर का आदर करते थे, परन्तु उनके हृदय परमेश्वर से दूर थे (पद 8)। भले ही मेरा बाहरी रूप मेरी सच्ची भावनाओं को नहीं दर्शाता था, लेकिन मेरे अंदर कड़वाहट पनप रही थी। अपने स्वर्गीय पिता के साथ जो आनंद और निकटता मुझे हमेशा महसूस होती थी, वह ख़त्म हो गई। पाप को पालना और छुपाना यही यह सब उत्पन्न करता है।

परमेश्वर की कृपा से, मैंने अपने सहकर्मी को बताया कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं और माफी मांगी। उसने बड़ी दयालुता से मुझे माफ कर दिया और अंततः हम अच्छे मित्र बन गये। यीशु कहता है, “बुरे विचार मन से निकलते हैं” (पद 19)। हमारे हृदय की स्थिति मायने रखती है क्योंकि वहाँ रहने वाली बुराई हमारे जीवन में प्रवेश कर सकती है। हमारा बाहरी और आंतरिक दोनों ही मायने रखता है। केरेन हुआंग

 

जब यीशु ठहर जाता है

बीमार बिल्ली कई दिनों तक मेरे कार्यस्थल के पास एक बक्से में छिपकर रोती रही l सड़क पर छोड़े गए इस बिल्ली के बच्चे पर वहां से गुजरने वाले कई लोगों का ध्यान नहीं गया—जब तक कि जुन नहीं आ गया l सड़क का सफाई करनेवाला व्यक्ति बिल्ली को घर ले गया, जहाँ वह दो कुत्तों के साथ रहता था, जो पहले आवारा थे l

जुन ने कहा, “मुझे उनकी परवाह है क्योंकि वे ऐसे प्राणी हैं जिन पर किसी का ध्यान नहीं जाता l” “मैं उनमें खुद को देखता हूँ l आखिरकार सफाई कर्मचारी पर किसी का ध्यान नहीं जाता l”

यीशु यरिहो के रास्ते यरूशलेम की ओर जा रहा था, एक दृष्टिहीन आदमी सड़क के किनारे भीख मांग रहा था l उस पर भी किसी का ध्यान नहीं गया l और विशेष रूप से इस दिन—जब भीड़ गुज़र रही थी और सभी की निगाहें यीशु मसीह पर टिकी थीं—कोई भी भिखारी की मदद करने के लिए नहीं रुका l

केवल यीशु l शोर मचाती भीड़ के बीच में, उसने भूले हुए आदमी की चीख सुनी l “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ,” मसीह ने पूछा, और उन्हें दिली उत्तर मिला, “हे प्रभु, यह कि मैं देखने लगूं l” यीशु ने कहा, “देखने लग; तेरे विश्वास ने तुझे अच्छा कर दिया है” (लूका 18:41-42) l

क्या हम कभी-कभी उपेक्षित महसूस करते हैं? क्या हमारी चीखें उन लोगों द्वारा दबा दी जाती हैं जो हमसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं? हमारा उद्धारकर्ता उन लोगों पर ध्यान देता है जिन पर दुनिया ध्यान देने की परवाह नहीं करती है l मदद के लिए उसे बुलाएं! जबकि अन्य लोग हमारी उपेक्षा कर सकते हैं, वह हमारे लिए रुकेगा l केरेन ह्वांग

 

यीशु में बढ़ना

बचपन में, मैं बड़ों को बुद्धिमान और असफल होने में असमर्थ मानता था l मुझे लगता था कि वे हमेशा जानते हैं कि क्या करना है l एक दिन, बड़ा होने पर, मुझे भी हमेशा पता रहेगा कि मुझे क्या करना है l खैर, कई वर्ष बाद “एक दिन” आया, और इसने मुझे बस इतना सिखाया है कि, कई बार, मैं अभी भी नहीं जानता कि क्या करना है l चाहे परिवार में बीमारी, काम में समस्याएँ, या किसी रिश्ते में संघर्ष हो, ऐसे समय ने व्यक्तिगत नियंत्रण और ताकत के सभी भ्रमों को दूर कर दिया है, बस एक ही विकल्प बचता है—अपनी आँखें बंद करके फुसफुसाने का, “परमेश्वर, मदद कीजिए l मुझे नहीं पता क्या करना है l”

प्रेरित पौलुस ने बेबसी को समझा l उसके जीवन में “काँटा,” संभवतः एक शारीरिक बिमारी, ने उसे बहुत निराशा और पीड़ा पहुंचाई l हलाकि, इसका कारण कांटा ही था, कि पौलुस ने परमेश्वर के प्रेम, प्रतिज्ञाओं और आशीषों को अनुभव किया जो उसके लिए अपनी कठिनाइयों को सहने और काबू पाने के लिए पर्याप्त था (2 कुरिन्थियों 12:9) l उसने सीखा कि व्यक्तिगत कमजोरी और लाचारी हार नहीं है l जब ये विश्वास संग परमेश्वर को समर्पित किया जाता है, तो वे इन परिस्थितियों में और उनके द्वारा काम करने के लिए उसके लिए उपकरण बन जाते हैं (पद.9-10) l

हमारा बड़ा होना यह नहीं है कि हम सर्वज्ञ हैं l वास्तव में, हम उम्र के साथ समझदार होते जाते हैं, लेकिन अंततः हमारी कमजोरियां अक्सर हमारी वास्तविक शक्तिहीनता दर्शाती हैं l हमारी सच्ची शक्ति मसीह में हैं: “क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी बलवंत होता हूँ” (पद.10) l वास्तव में “बड़े होने” का अर्थ उस शक्ति को जानना, भरोसा करना और उसका पालन करना है जो तब आती है जब हमें एहसास होता है कि हमें परमेश्वर की सहायता की ज़रूरत है l केरेन ह्वांग

यीशु में दृढ़ रहना

जब मैं वर्षों पहले सेमिनरी में पढ़ रहा था, तो हमारे यहां साप्ताहिक चैपल आराधना सभा होती थी। एक सभा में, जब हम छात्र " कितना महान, कितना महान" गा रहे थे, तो मैंने अपने तीन प्रिय प्रोफेसरों को उत्साह के साथ गाते हुए देखा। उनके चेहरों पर खुशी झलक रही थी, जो परमेश्वर में उनके विश्वास से ही संभव हुआ। वर्षों बाद, जब हर एक जानलेवा बीमारी से गुज़रा, यह विश्वास ही था जिसने उन्हें सहन करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाया।

आज, मेरे शिक्षकों के गायन की याद मुझे मेरी आजमाइशों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। मेरे लिए, वे उन लोगों की कई प्रेरक कहानियों में से कुछ हैं जो विश्वास के आधार पर जीते थे। वे इस बात की याद दिलाते हैं कि हम इब्रानियों 12:2-3 में लेखक के आह्वान का पालन कैसे कर सकते हैं ताकि हम अपनी आँखें यीशु पर केंद्रित कर सकें जो "जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था . . . क्रूस का दुख सहा"(पद.2)।

जब आजमाइशें—अत्याचार या जीवन की चुनौतियों से—चलते रहना कठिन हो जाता है, तो हमारे पास उन लोगों का उदाहरण है जिन्होंने परमेश्वर के वचनों पर और उसके वादों पर विश्वास किया । हम "वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से [दौड़ सकते हैं]" (पद.1), यह याद करते हुए कि यीशु—और जो हमसे पहले चले गए हैं—सहन करने में सक्षम थे। लेखक हमसे "उस पर ध्यान करने" का आग्रह करता है . . . ताकि [हम]निराश होकर हियाव न छोड़ दें"(पद.3)।

मेरे शिक्षक, जो अब स्वर्ग में खुश हैं, संभवतः कहेंगे : "विश्वास का जीवन इसके लायक है। चलते रहिये।" करेन ह्वांग

 

मेरा प्रभु निकट है

मनीला में वॉयस (संगीत) प्रशिक्षक लूर्डेस तीस साल से ज़्यादा समय से छात्रों को आमने-सामने पढ़ाती आ रही हैं। जब उनसे ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कहा गया, तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने बताया, "मैं कंप्यूटर चलाने में अच्छी नहीं हूँ।" "मेरा लैपटॉप पुराना है और मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म से परिचित नहीं हूँ।" हालाँकि कुछ लोगों को यह छोटी सी बात लग सकती है, लेकिन यह उनके लिए बहुत तनावपूर्ण था।

उन्होंने कहा, "मैं अकेली रहती हूँ, इसलिए मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है।" "मुझे चिंता है कि मेरे छात्र पढ़ाई छोड़ देंगे और मुझे आय की ज़रूरत है।" हर क्लास से पहले लूर्डेस अपने लैपटॉप के ठीक से काम करने के लिए प्रार्थना करती थीं। उन्होंने कहा, "फिलिप्पियों 4:5-6 मेरी स्क्रीन पर वॉलपेपर था।" "मैं उन शब्दों से कितनी जुड़ी रही। ।" 

पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है कि हम किसी भी बात की चिंता न करें, क्योंकि "प्रभु निकट है" (फिलिप्पियों 4:5)। परमेश्वर की उपस्थिति के वादे को हमें पकड़े रखना है। जब हम उसकी निकटता में आराम करते हैं और प्रार्थना में सब कुछ—बड़ा और छोटा दोनों—उसे सौंप देते हैं उसकी शांति हमारे "हृदय और . . . विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित . . . रखती है” (पद.7)।

लूर्डेस ने कहा, "परमेश्वर ने मुझे कंप्यूटर की गड़बड़ियाँ ठीक करने वाली वेबसाइटों तक पहुंचाया।" “उन्होंने मुझे ऐसे धैर्यवान छात्र भी दिए जो मेरी तकनीकी सीमाओं को समझते थे।” परमेश्वर की उपस्थिति, सहायता और शांति का आनंद लेना हमारे लिए आवश्यक है क्योंकि हम अपने जीवन के सभी दिनों में उसका अनुसरण करना चाहते हैं। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं : “प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो!” (पद.4)।

—करेन हुआंग

परमेश्वर आपको नहीं भूलेगा

बचपन में, मैं डाक टिकटें इकट्ठा करता था। जब मेरे अंगकोंग (फुकिएनीज़ में "दादा" के लिए) ने मेरे शौक के बारे में सुना, तो उन्होंने हर दिन अपने कार्यालय के मेल से टिकटें सहेजना शुरू कर दिया। जब भी मैं अपने दादा-दादी से मिलने जाता, अंगकोंग मुझे कई तरह के खूबसूरत टिकटों से भरा एक लिफ़ाफ़ा देता। एक बार उसने मुझसे कहा, "भले ही मैं हमेशा व्यस्त रहता हूँ, लेकिन मैं तुम्हें नहीं भूलूँगा।"

अंगकोंग को खुलेआम स्नेह दिखाने की आदत नहीं थी, लेकिन मैंने उसके प्यार को गहराई से महसूस किया। असीम रूप से गहरे तरीके से, परमेश्वर ने इस्राएल के प्रति अपने प्यार का प्रदर्शन किया जब उसने घोषणा की, "मैं तुम्हें नहीं भूलूँगा!" (यशायाह 49:15)। बीते दिनों में मूर्तिपूजा और अवज्ञा के कारण बेबीलोन में पीड़ित, उसके लोगों ने विलाप किया, "प्रभु ने मुझे भूल गया है" ( पद 14)। लेकिन अपने लोगों के लिए परमेश्वर का प्यार नहीं बदला था। उसने उन्हें क्षमा और पुनर्स्थापना का वादा किया (पद 8-13)।

परमेश्वर ने इस्राएल से कहा, “मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोदकर बनाया है” जैसा कि वह आज हमसे भी कहता है (पद.16)। जब मैं उसके आश्वासन के शब्दों पर विचार करता हूं, यह मुझे गहराई से यीशु के कीलों से दागे हाथों की याद दिलाता है—जो हमारे लिए और हमारे उद्धार के लिए प्रेम में फैला हुआ था (यूहन्ना 20:24-27)। यह मुझे यीशु के कीलों से जख्मी हाथों का बहुत गहराई से याद दिलाता है- जो हमारे लिए और हमारे उद्धार के लिए प्रेम में फैला हुआ है (यूहन्ना 20:24-27)। मेरे दादाजी के टिकटों और उनके स्नेहपूर्ण शब्दों के तरह, परमेश्वर अपने प्रेम के अनन्त प्रतीक के रूप में अपना क्षमाशील हाथ बढ़ाता है। आइए हम उसके प्रेम—एक अपरिवर्तनीय प्रेम के लिए उन्हें धन्यवाद दें। वह हमें कभी नहीं भूलेगा।

—केरेन हुआंग

परमेश्वर पर भरोसा रखना

 

मुझे तत्काल दो दवाओं की आवश्यकता थी। एक मेरी माँ की एलर्जी के लिए था और दूसरा मेरी भतीजी के एक्जिमा के लिए था। उनकी परेशानी बिगड़ती जा रही थी, लेकिन दवाएँ अब फार्मेसियों में उपलब्ध नहीं थीं। मैंने हताश और असहाय होकर बार-बार प्रार्थना की, हे प्रभु, कृपया इनकी सहायता करें।

 

कुछ सप्ताह बाद, उनकी स्थिति संभालने लायक हो गई। परमेश्वर कह रहे थे: “ कभी कभी मैं चंगा करने के लिये दवाइयों का उपयोग करता हूं। पर दवाइयां का प्रभाव निर्णायक नहीं होता है  मेरा होता है। मैं चंगा करता हूं।  । उन पर नहीं, बल्कि मुझ पर भरोसा रखो।”

 

भजन संहिता 20 में, राजा दाऊद ने परमेश्वर की विश्वसनीयता पर सांत्वना व्यक्त की। इस्राएलियों के पास एक शक्तिशाली सेना थी, लेकिन वे जानते थे कि उनकी सबसे बड़ी ताकत "प्रभु के नाम" से आती है (पद 7)। उन्होंने परमेश्वर के नाम पर भरोसा रखा—वह कौन है, उसके अपरिवर्तनीय चरित्र और अटल वादों पर। वे इस सत्य पर कायम रहे कि वह जो सभी स्थितियों पर प्रभु और शक्तिशाली है, वह उनकी प्रार्थना सुनेगा और उन्हें उनके शत्रुओं से बचाएगा (पद 6)।

 

यद्यपि परमेश्वर हमारी सहायता के लिए इस संसार के संसाधनों का उपयोग कर सकता है, अंततः, हमारी समस्याओं पर विजय उसी से मिलती है। चाहे वह हमें कोई संकल्प दे या सहन करने की कृपा, हम भरोसा कर सकते हैं कि हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमारे लिए वह सब कुछ होगा जो वह कहता है कि वह है। हमें अपनी परेशानियों से घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन हम उनकी आशा और शांति के साथ उनका सामना कर सकते हैं।

—कैरन हुआंग

 

यीशु से लिपटे रहना

 
कार्यालय भवन की सीढ़ियों पर मुझे चक्कर आ गया। मैंने रेलिंग को पकड़ लिया क्योंकि सीढ़ियाँ घूमती हुई लग रही थीं। जैसे ही मेरा दिल धड़कने लगा और मेरे पैर लड़खड़ा गए,  मैं रेलिंग से चिपक गया, इसकी ताकत के लिए आभारी था। मेडिकल टेस्ट से पता चला कि मुझे एनीमिया (खून की कमी) है। हालाँकि इसका कारण गंभीर नहीं था और मेरी  स्थिति ठीक हो गई थी, मैं कभी नहीं भूलूँगा कि उस दिन मैं कितना कमज़ोर महसूस कर रहा था। 
 
इसीलिए मैं उस महिला की सराहना करता हूं जिसने यीशु को छूआ। वह न केवल अपनी कमजोर अवस्था में भीड़ के बीच से गुजरी, बल्कि उसने बाहर निकलकर उनके पास आने का साहस भी किया (मत्ती 9:20-22)। उसके पास डरने का अच्छा कारण था: यहूदी कानून ने उसे अशुद्ध के रूप में परिभाषित किया और दूसरों को उसकी अशुद्धता उजागर करने से उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते थे (लैव्यव्यवस्था 15:25−27)। लेकिन यह विचार यदि मैं उसके वस्त्र ही को छू लूँगी, उसे प्रेरित करती रही। मत्ती 9:21 में जिस यूनानी शब्द का अनुवाद "छू " के रूप में किया गया है, वह केवल छूना नहीं है, बल्कि इससे गहरा अर्थ "पकड़ना" या "अपने आप को जोड़ना" है। स्त्री ने यीशु को कसकर पकड़ लिया। उसे विश्वास था कि वह उसे ठीक कर सकता है। 
 
यीशु ने भीड़ के बीच में एक महिला का हताश विश्वास को देखा। जब हम भी विश्वास में आगे बढ़कर अपनी ज़रूरतों में मसीह से लिपट जाते हैं, तो वह हमारा स्वागत करता है और हमारी सहायता के लिए आता है। हम उसे अस्वीकृति या सज़ा के डर के बिना अपनी कहानी बता सकते हैं। यीशु आज हमसे कहते हैं, "मुझसे लिपटे रहो।" 
 
—कैरेन हुआंग 
 

आप परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं

जब मेरी बिल्ली मिकी की आंखों में संक्रमण (infection) हुआ, तो मैं उसकी आंखों में रोजाना आँख की दवाई डालता था। जैसे ही मैंने उसे बाथरूम काउंटर पर रखा, वह बैठ गया, मुझे भयभीत आँखों से देखा, और फिर अपने आप को दवाई डलवाने के लिए तैयार कर लिया। "अच्छा लड़का," मैंने कहा। हालाँकि उसे समझ नहीं आया कि मैं क्या कर रहा हूँ, फिर भी उसने  उछल-कूद नहीं की, सिसकारा नहीं, या मुझे खरोंचा नहीं। इसके बजाय, वह मेरे और नज़दीक आ गया, मेरे – जो उसे कष्ट पहुंचा रहा था। वह जानता था कि वह मुझ पर भरोसा कर सकता है। 
जब दाऊद ने भजन 9 लिखा, तो संभवतः उसे पहले से ही परमेश्वर के प्रेम और विश्वासयोग्यता का बहुत अनुभव हो चुका था। वह अपने शत्रुओं से सुरक्षा के लिए उसकी ओर मुड़ा था, और परमेश्वर ने उसकी ओर से कार्य किया था (पद- 3−6)। दाऊद की ज़रूरत के समय में, परमेश्वर ने उसे निराश नहीं किया। परिणामस्वरूप, दाऊद को पता चला कि वह कैसा था—वह शक्तिशाली और धर्मी, प्यारा और वफादार था। और इसलिए, दाऊद ने उस पर भरोसा किया। वह जानता था कि परमेश्वर भरोसेमंद है। 
जिस रात मैंने मिकी को सड़क पर एक छोटे, भूखे बिल्ली के बच्चे के रूप में पाया था, तब से मैंने कई बीमारियों के दौरान उसकी देखभाल की है। वह जानता है कि वह मुझ पर भरोसा कर सकता है—तब भी जब मैं उसके साथ ऐसी चीजें करता हूं जो उसे समझ में नहीं आतीं। इसी प्रकार, हमारे प्रति परमेश्वर की निष्ठा और उसके चरित्र को याद करने से हमें उस पर भरोसा करने में मदद मिलती है जब हम यह नहीं समझ पाते कि वह क्या कर रहा है। हम जीवन के कठिन समय में भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें। 
-केरन हुआंग