आध्यात्मिक नवीनीकरण
चीनी चिकित्सा ने हज़ारों वर्षों से पर्ल पाउडर एक्सफोलिएशन/pearl powder exfoliation(त्वचा की सतह से मृत कोशिकाओं को हटाना) का अभ्यास किया है, जिससे त्वचा के ऊपर की मृत कोशिकाओं को साफ़ करने के लिए पिसे हुए मोतियों का उपयोग किया जाता है l रोमानिया में, कायाकल्प चिकित्सीय मिट्टी/लेप व्यापक रूप से मांग वाला एक्सफोलिएन्ट/exfoliant(त्वचा पर से मृत कोशिकाएं हटाने वाला एक उत्पाद) बन गया है जो त्वचा को युवा और चमकदार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है l पूरे संसार में, लोग शरीर की देखभाल के तरीकों का उपयोग करते हैं, उनका मानना है कि यह सबसे बेजान त्वचा को भी नवीनीकृत करेगा l
हालाँकि, हमारे भौतिक शरीर को बनाए रखने के लिए हमने जो साधन विकसित किये हैं, वे हमें केवल अस्थायी संतुष्टि ही दे सकते हैं l इससे भी बड़ी बात यह है कि हम आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बने रहें l यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमें उसके द्वारा आध्यात्मिक नवीनीकरण का उपहार दिया गया है l प्रेरित पौलुस ने लिखा, “यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्ट होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” (2 कुरिन्थियों 4:16) जब हम भय, पीड़ा और चिंता जैसी चीजों को थामे रहते हैं तो हम जिन चुनौतियों का सामना करते हैं, वे हमें दबा सकती हैंl आध्यात्मिक नवीनीकरण तब आता है जब हम “देखी हुयी वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं” (पद.18) हम ऐसा अपनी दैनिक चिंताओं को परमेश्वर पर छोड़ देने और पवित्र आत्मा के फल के लिए प्रार्थना करने के द्वारा करते हैं—जिसमें प्रेम, आनंद और शांति शामिल है—हमारे जीवन में नए सिरे से उभरने के लिए (गलातियों 5:22-23) जब हम अपनी परेशानियों को परमेश्वर पर छोड़ते हैं और उसकी आत्मा को हर दिन हमारे माध्यम से चमकने देते हैं, तो वह हमारी आत्माओं को पुनर्स्थापित करता है l
खाली दौडना
ग्लोबल हैल्थ क्राइसेस (वैश्विक स्वास्थ्य संकट) में एक नर्स के रूप में निराशा की भारी भावना का सामना करने पर चर्चा करते हुये मेरी सहेली ने रोते हुये कहा “मुझे नहीं लगता कि मैं अब और ऐसा कर सकती हूं। मुझे पता है कि परमेश्वर ने मुझे नर्सिंग के लिए बुलाया है, लेकिन मैं अभिभूत हूं और भावनात्मक रूप से खाली हो चुकी हूं”, उसने कबूल किया। यह देखकर कि वह थक चुकी है, मैंने जवाब दिया “मुझे पता है कि आप अभी असहाय महसूस कर रही हैं, लेकिन परमेश्वर से मांगें कि वह आपको वह दिशा दे जिसकी आप तलाश कर रही हैं और दृढ़ रहने की शक्ति दें।” उस क्षण, उसने स्वेच्छा से प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर को खोजने का निर्णय लिया। इसके तुरंत बाद, मेरी दोस्त उद्देश्य की एक नई भावना के साथ भर गई । न केवल उन्हें नर्सिंग जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिला, बल्कि परमेश्वर ने उन्हें देश भर के अस्पतालों की यात्रा करके और भी अधिक लोगों की सेवा करने की शक्ति दी।
यीशु में विश्वासियों के रूप में, हम हमेशा सहायता और प्रोत्साहन के लिए परमेश्वर की ओर देख सकते हैं, जब हम अधिक बोझ महसूस करते हैं क्योंकि “वह न थकता है और न श्रमित होता है” (यशायाह 40:28)। भविष्यवक्ता यशायाह कहता है कि स्वर्ग में हमारा पिता “थके हुए को बल देता और शक्तिहीन को बहुत बल देता है” (पद 29) यद्यपि परमेश्वर की शक्ति चिरस्थायी है, वह जानता है कि निसन्देह ऐसे दिन होंगे जब हम शारीरिक और भावनात्मक रूप से खाली हो जाएंगे (पद 30)। लेकिन जब हम जीवन की चुनौतियों को अकेले पार करने की कोशिश करने के बजाय अपनी ताकत के लिए परमेश्वर को देखते हैं, तो वह हमें पुनर्स्थापित और बहाल करेगा और हमें विश्वास में आगे बढ़ने का संकल्प देगा।
पहुंचना (हाथ बढ़ाना)
हाल ही में एक पोस्ट में, ब्लॉगर बोनी ग्रे ने उस पल को याद किया जब उसके दिल में भारी उदासी छाने लगी थी। उसने कहा, “मेरे जीवन के सबसे सुखद हिस्से (अध्याय) में, मुझे अचानक घबराहट और निराशा का अनुभव होने लगा।” ग्रे ने अपने दर्द को दूर करने के लिए अलग अलग तरीके खोजने की कोशिश की, लेकिन उसने जल्द ही महसूस किया कि वह अकेले इसे संभालने के लिए काफी मजबूत नहीं थी। उसने बताया कि, “मैं नहीं चाहती थी कि कोई मेरे विश्वास पर सवाल उठाए, इसलिए मैं चुप रही और प्रार्थना की, कि मेरी निराशा दूर हो जाए। परन्तु परमेश्वर हमें चंगा करना चाहता है, न कि हमें लज्जित करना चाहता है; और न ही हमें हमारे दुखों से छिपाना चाहता है।” ग्रे ने परमेश्वर की उपस्थिति की शान्ति में चंगाई पाई; तूफानों की लहरों के बीच, जिसमें उसे डूबने का खतरा, था वह उसका सहारा था ।
जब हम नीची जगह पर होते हैं और निराशा से भरे होते हैं, तो परमेश्वर वहां होते हैं और हमें संभालेंगे भी। भजन संहिता 18 में, दाऊद ने परमेश्वर की प्रशंसा की कि उसने उसे उस नीची जगह से छुड़ाया, जिसमें वह अपने शत्रुओं से लगभग पराजित होने के बाद था। उसने घोषणा की – “उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, उसने मुझे गहरे जल में से खींच लिया” (पद 16)। ऐसे क्षणों में भी जब निराशा हमें समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त लहरों की तरह नष्ट करने लगती है, परमेश्वर हमसे इतना प्यार करते हैं कि वह हमारे पास पहुंचेंगे और हमारी मदद करेंगे, हमें शांति और सुरक्षा के “खुले स्थान” में लाएंगे (पद 19)। जब हम जीवन की चुनौतियों से व्याकुल महसूस करते हैं, तो आइए हम उसे अपने शरणस्थान के रूप में देखें।
प्रेम की मजदूरी
1986 में, यूक्रेन में चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना ने संसार का ध्यान खींचा l जैसे ही आपदा की भयावहता स्पष्ट हुयी, अधिकारी विकिरण(radiation) को रोकने के अत्यंत आवश्यक कार्य में जुट गए l अत्यधिक रेडियोधर्मी(radioactive) मलबे से निकलने वाली घातक गामा किरणें(gamma rays) कचरे को साफ़ करने के लिए तैनात किये गए रोबोटों(robots) को नष्ट करती रहीं l
इसलिए उन्हें “जैव रोबोट(bio robots)”—मानवों का उपयोग करना पड़ा! हज़ारों वीर व्यक्ति नब्बे सेकंड या उससे कम की “पालियों(shifts)” में खतरनाक सामग्री को निपटाते हुए “चेरनोबिल परिसमापक/नष्ट करनेवाले(Chernobyl liquidators)” बन गए l लोगों ने बड़े व्यक्तिगत जोखिम पर वह किया जो तकनीक नहीं कर सकी l
बहुत समय पहले, परमेश्वर के विरुद्ध हमारे विद्रोह ने एक ऐसी तबाही ला दी थी जिसके कारण अन्य सभी आपदाएं हुयी(उत्पत्ति 3 देखें) l आदम और हव्वा के द्वारा, हमनें अपने सृष्टिकर्ता से अलग होने का फैसला किया और इस प्रक्रिया में हमने अपने संसार को एक जहरीली गन्दगी बना दिया l हम कभी भी इसे स्वयं साफ़ नहीं कर सकते थे l
यही क्रिसमस का सम्पूर्ण उद्देश्य है l प्रेरित यूहन्ना ने यीशु के बारे में लिखा, “यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उसकी गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनंत जीवन का समाचार देते हैं जो पिता के साथ था और हम पर प्रगट हुआ”(1 यूहन्ना 1:2) l उसके बाद यूहन्ना ने घोषणा की, “[परमेश्वर के] पुत्र का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है”(पद.7) l
यीशु ने वह प्रबंध किया जो उसके प्राणी/मनुष्य नहीं कर सके l जैसे ही हम उस पर विश्वास करते हैं, वह हमें अपने पिता के साथ एक सही सम्बन्ध में बहाल करता है l उसने मृत्यु को ही नष्ट कर दिया है l जीवन प्रगट हुआ है l
चुपचाप रह
जब मैं उस चैम्बर (कमरे) में शांति से बैठ गया, तो मेरा शरीर पानी के ऊपर आराम से तैरने लगा, और कमरे में अंधेरा हो गया और बैकग्राउंड (पृष्ठभूमि) में चल रहा हल्का हल्का संगीत शांत हो गया। मैंने पढ़ा था कि आइसोलेशन टैंक तनाव और चिंता से राहत देने की चिकित्सा करने वाले टैंक होते हैं। परन्तु मैंने ऐसा कुछ पहले कभी अनुभव नहीं किया था । ऐसा लगा कि मानो संसार का शोरगुल और गड़बड़ी रुक गई हो, और मैं अपने अंदरूनी विचारों को स्पष्ट रूप से सुन सकता था। मैंने यह स्मरण करते हुए कि शांति में शक्ति होती है, उस अनुभव को संतुलित और फिर से नया करके छोड़ दिया।
हम परमेश्वर की उपस्थिति की खामोशी में बड़ी शांति से विश्राम कर सकते हैं, जो हमारी सामर्थ्य को फिर से नया करता है और हमें उन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है जिनका हम हर दिन सामना करते हैं। जब हम शोर को शांत करते हुए और हमारे जीवन के ध्यान भटकाने वाली चीजों को दूर करते हुए खामोश रहते हैं, तो परमेश्वर हमें मजबूत करता है ताकि हम उसकी कोमल आवाज को अधिक स्पष्टता से सुन सकें (भजन संहिता 37:7)।
जबकि सैन्सरी डैपरीवेशन चैम्बर (संवेदी वंचना कक्ष) निश्चित रूप से खामोशी का ही एक रूप है, तो परमेश्वर हमें उसके साथ निर्बाध समय बिताने का एक सरल तरीका प्रदान करता है। वह कहता है कि “जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्द कर के अपने पिता से... प्रार्थना कर” (मत्ती 6:6)। जब हम परमेश्वर की शानदार उपस्थिति की खामोशी में जीवन की चुनौतियों का उत्तर खोजते हैं तो वह हमारे कदमों का मार्गदर्शन करेगा और उसकी धार्मिकता को हमारे माध्यम से चमकाएगा (भजन संहिता 37:5-6)।
परमेश्वर की उपस्थिति की प्राथमिकता
2009 में, अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की एक शोध टीम ने एक प्रयोग में दो सौ से अधिक छात्रों का अध्ययन किया जिसमें कार्यों और स्मृति अभ्यासों के बीच अदला-बदली करना शामिल था l आश्चर्यजनक रूप से, पाया गया कि जो छात्र स्वयं को एक समय में अनेक कार्य करने में कुशल मानते थे, एक समय में एक कार्य करनेवालों की तुलना में बुरा प्रदर्शन किया l बहुकार्यन ने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करना और अप्रासंगिक जानकारी को फ़िल्टर करना अधिक कठिन बना दिया l जब हमारा मन विकर्षित हो तो ध्यान केन्द्रित करना एक चुनौती हो सकती है l
जब यीशु मरियम और मार्था के घर आया, मार्था काम में व्यस्त थी और “सेवा करते करते घबरा गयी” थी (लूका 10:40) l उसकी बहन मरियम ने बैठकर यीशु से सीखने, बुद्धि और शांति प्राप्त करने का चुनाव किया जो उससे छीना न जाएगा (पद. 39-42) l जब मार्था ने यीशु से मरियम को उसका सहयोग करने के लिए उत्साहित करने के लिए कहा, तो उसने उत्तर दिया, “तू बहुत बातों के लिए चिंता करती और घबराती है l परन्तु एक बात आवश्यक है” (पद. 41-42) l
परमेश्वर हमारा ध्यान चाहता है l लेकिन, मार्था की तरह, हम अक्सर कार्यों और समस्याओं से विचलित होते हैं l हम परमेश्वर की उपस्थिति की उपेक्षा करते हैं, यद्यपि वह हमें आवश्यक बुद्धि और आशा दे सकता है l जब हम प्रार्थना द्वारा उसके साथ समय बिताने और पवित्रशास्त्र पर मनन को प्राथमिकता देते हैं, तो वह हमें उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और शक्ति देगा जिनका हम सामना करते हैं l
आवाज की शक्ति
इतिहास में सबसे शक्तिशाली वक्ता अक्सर वे नेता होते हैं जिन्होंने अपनी आवाज का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया है। फ्रेडरिक डगलस पर विचार करें, जिनके दासता को समाप्त करने और स्वतंत्रता पर भाषणों ने एक आंदोलन को बढ़ावा दिया, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका में दासता का अंत करने में मदद मिली । अगर उसने चुप रहना चुना होता तो क्या होता? हम सभी में दूसरों को प्रेरित करने और उनकी मदद करने के लिए अपनी आवाज का उपयोग करने की क्षमता होती है, लेकिन बोलने का डर हमें शक्तिहीन बना सकता है। ऐसे क्षणों में जब हम इस भय से अभिभूत महसूस करते हैं, हम परमेश्वर की ओर देख सकते हैं, जो हमारे ईश्वरीय ज्ञान और प्रोत्साहन का स्रोत है।
जब परमेश्वर ने यिर्मयाह को अन्यजातियों के लिए भविष्यद्वक्ता होने के लिए बुलाया, तो वह तुरंत अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगा। वह चिल्ला उठा, “मैं तो बोलना भी नहीं जानता, क्योंकि मैं तो लड़का छोटा हूं” (यिर्मयाह 1:6)। लेकिन परमेश्वर यिर्मयाह के डर को उसकी आवाज के द्वारा एक पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उसकी ईश्वरीय बुलाहट के रास्ते में नहीं आने देगा। इसके बजाय, उसने भविष्यवक्ता को निर्देश दिया कि वह जो कुछ भी कहे और जो कुछ भी उसने आज्ञा दी है उसे करने के द्वारा केवल परमेश्वर पर भरोसा रखे (पद 7)। यिर्मयाह की पुष्टि करने के अतिरिक्त, उसने उसे समर्थ भी किया। “मैंने अपना वचन तेरे मुंह में डाल दिया है” (पद 9), उसने उसे आश्वासन दिया।
जब हम परमेश्वर से यह दिखाने के लिए कहते हैं कि वह हमें कैसे उपयोग करना चाहता है, तो वह हमें हमारे उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामर्थ देगा । उसकी मदद से, हम अपने आस–पास के लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए साहसपूर्वक अपनी आवाज़ का उपयोग कर सकते हैं।
विश्वास की छलांग
जैसे ही मैं रेन फारस्ट (वर्षा वन ) के सबसे ऊंचे स्थान से जिप लाइन पर चढ़ने को तैयार हुआ तो मेरे अंदर भय समा गया। मंच से कूदने से कुछ क्षण पहले, मेरे मन में हर उस बात के बारे में विचार आने लगे, जो गलत हो सकती है। परन्तु उस पूरे साहस के साथ जो मैं जुटा सकता था (और वापस मुड़ने के कुछ विकल्पों के साथ), मैंने मंच छोड दिया। जंगल की ऊंचाईयों से गिरते हुये हरे भरे पेड़ों से होकर मैं नीचे आ रहा था। हवा मेरे बालों से लग कर बह रही थी और धीरे धीरे मेरी चिन्ता लुप्त होने लगी; जैसे जैसे मैं हवा में ग्रैविटी को मुझे नीचे लाने दे रहा था, अगले मंच मुझे साफ नज़र आने लगा और धीरे से रुकने के बाद, मुझे पता चल गया कि मैं सुरक्षित पहुँच गया हूँ।
ज़िप लाइन पर बिताया गया मेरा समय मेरे लिए ऐसे समय के रूप चित्रित किया गया है जिसमें परमेश्वर हमसे नये और चुनौतीपूर्ण प्रयास करवाता है। जब हम संदेह और अनिश्चितता को महसूस करते हैं तो पवित्रशास्त्र हमें परमेश्वर पर अपना भरोसा रखने और “अपनी समझ का सहारा न लेने” की शिक्षा देता है (नीतिवचन 3:5)। जब हमारा मन भय और शंकाओं से भरा होता है, तो हमारे मार्ग अस्पष्ट और विकृत हो सकते हैं। परन्तु एक बार जब हमने परमेश्वर को अपना मार्ग सौंपने के द्वारा विश्वास में कदम उठाने का निर्णय ले लिया, तो “वह हमारे लिए सीधा मार्ग निकालेगा” (पद 6)। प्रार्थना और पवित्रशास्त्र में समय व्यतीत करने के द्वारा यह सीखकर कि परमेश्वर कौन है,हम विश्वास की छलांग लगाने के लिए और अधिक आश्वस्त हो जाते हैं।
जब हम परमेश्वर से जुड़े रहते हैं और उसे हमारे जीवन में बदलावों के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन करने की अनुमति देते हैं,तो हम जीवन की चुनौतियों में भी स्वतंत्रता और शांति प्राप्त कर सकते हैं।
परमेश्वर जो पुनर्स्थापित करता है
4 नवंबर, 1966 को, फ्लोरेंस, इटली में एक विनाशकारी बाढ़ आई, जिसने जियोर्जियो वासरी की कला के प्रसिद्ध काम द लास्ट सपर को मिट्टी, पानी और गर्म तेल के एक पूल के नीचे बारह घंटे से अधिक समय तक डुबो दिया। इसके पेंट के नरम होने और इसके लकड़ी के फ्रेम को काफी क्षतिग्रस्त होने के कारण, कई लोगों का मानना था कि यह टुकड़ा मरम्मत से परे था। हालांकि, पचास साल के कठिन संरक्षण प्रयास के बाद, विशेषज्ञ और स्वयंसेवक स्मारकीय बाधाओं को दूर करने और मूल्यवान पेंटिंग को पुनर्स्थापित करने में सक्षम थे।
जब बाबेलवासीयों ने इस्राएल पर विजय प्राप्त की, तो लोग निराश महसूस करते थे - मृत्यु और विनाश से घिरे हुए थे और उन्हें बहाली की आवश्यकता थी (विलापगीत 1 देखें)। उथल-पुथल की इस अवधि के दौरान, परमेश्वर भविष्यवक्ता यहेजकेल को एक घाटी में ले गया और उसे एक दर्शन दिया जहां वह सूखी हड्डियों से घिरा हुआ था। "क्या ये हड्डियाँ जी सकती हैं?" प्रभु ने पूछा। यहेजकेल ने उत्तर दिया, "हे यहोवा, केवल तू ही जानता है" (यहेजकेल 37:3)। तब परमेश्वर ने उससे कहा कि वह हड्डियों के ऊपर भविष्यवाणी करें ताकि वे फिर से जीवित हो सकें। "जब मैं भविष्यवाणी कर रहा था," यहेजकेल ने कहा, "एक शोर हुआ, एक गड़गड़ाहट की आवाज हुई, और हड्डियां एक साथ आ गईं" (पद. 7)। इस दर्शन के द्वारा, परमेश्वर ने यहेजकेल को प्रकट किया कि इस्राएल की पुनर्स्थापना केवल उसके द्वारा ही हो सकती है।
जब हमें लगता है कि जीवन में चीजें टूट गई हैं और मरम्मत से परे हैं, तो परमेश्वर हमें आश्वस्त करता है कि वह हमारे टूटे हुए टुकड़ों को फिर से बना सकता है। वह हमें नई सांस और नया जीवन देंगे।