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एक अच्छा काम

स्काउट्स मूवमेंट(आन्दोलन), जिसे भारत में “भारत स्काउट्स एंड गाइड्स” के नाम से जाना जाता है, का एक बहुत ही दिलचस्प नारा है, “प्रतिदिन एक अच्छा काम करें।” इसका मतलब यह है कि हर दिन इसके सदस्यों से किसी की मदद करने के लिए कुछ करने की उम्मीद की जाती है। यह दयालुता और मदद का कोई भी छोटा सा भाव हो सकता है जिसका उद्देश्य अपने देश को एक बेहतर जगह बनाना हो। हालाँकि इस बात का कोई वर्णन नहीं है कि वह “अच्छा काम” कैसा दिख सकता है, लेकिन आम तौर पर यह समझा जाता है कि इसका उद्देश् बनाना हैंI

भजन संहिता (90:12) कहता है, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं।” जब कि शुरू में यह बड़े लोगों के लिए सलाह लग सकती है। हालाँकि, इसे करीब से पढ़ने पर, हम समझते हैं कि यह सभी के लिए है, युवा और वृद्ध सभी के लिए। भजन संहिताकार बताता है, कि हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष भी हो जाएँ (पद.10) l जबकि पहले तो ऐसा लगता है कि वर्षों की संख्या मानव जीवन की लंबी आयु को दर्शाती है, लेकिन करीब से देखने पर हम समझ जाते हैं कि भजन संहिताकार किसी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा का शाब्दिक अर्थ नहीं ले रहा था, बल्कि वह हमसे यह सुनिश्चित करने के लिए कह रहा था कि पृथ्वी पर हमारे दिन सार्थक हों।

दयालुता के छोटे-छोटे कार्य, विनम्र शिष्टाचार, मदद के भाव और दूसरों के साथ उनकी स्थिति की परवाह किए बिना निष्पक्ष व्यवहार करना हमारे दिनों को सही रीति से जीने के कुछ सरल तरीके हैं। हालाँकि हम कभी भी यह अनुमान नहीं लगा पाएँगे कि हमारे पास पृथ्वी पर कितना समय है, लेकिन हम हर दिन अच्छाई करके जितना संभव हो उतना प्रभाव छोड़ने का संकल्प ले सकते हैं। और जैसे-जैसे हम मसीह में बढ़ते हैं और उसके गुणों को प्रदर्शित करते हैं, हम निश्चित रूप से हर दिन को महत्वपूर्ण बनाएँगे। —नोएल बर्मन

दुविधा और गहरा विश्वास

शनिवार की सुबह बाइबल अध्ययन के दौरान, एक पिता हैरान था क्योंकि उसकी प्यारी, मनमौजी बेटी शहर लौट आई थी, लेकिन अपने घर में उसके व्यवहार के कारण वह उससे असहज था l एक अन्य सहभागी अस्वस्थ थी क्योंकि लम्बे समय की बिमारी और उम्र बढ़ने के शारीरिक प्रभावों ने उस पर असर डाला था l कई डॉक्टरों के पास बार-बार जाने से कम से कम प्रगति हुई l वह हतोत्साहित थी l परमेश्वरीय योजना के अनुसार, मरकुस अध्याय 5 बाइबल का वह अंश था जिसका उसने उस दिन अध्ययन किया था l और जब अध्ययन समाप्त हुआ, तो आशा और ख़ुशी स्पष्ट थी l

मरकुस 5:23 में, याईर, एक बीमार का पिता, चिल्लाकर बोला, “मेरी छोटी बेटी मरने पर है l” लड़की से मिलने के लिए जाते समय, यीशु ने एक अनाम स्त्री को उसकी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या से ठीक करते हुए कहा, “पुत्री, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है” (पद.34) l यीशु में विश्वास से मजबूर होकर याईर और स्त्री ने उसे खोजा और वे निराश नहीं हुए l लेकिन दोनों ही मामलों में, यीशु से मिलने से पहले, चीज़ें बहतर होने से पहले “बुरी से बद्तर” की ओर बढ़ चुकी थीं l

जीवन की दुविधाएं भेदभाव नहीं करती l लिंग या उम्र, नस्ल या वर्ग की परवाह किए बिना, हम सभी ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं जो हमें भ्रमित कर देती हैं और हमें उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करती हैं l चुनौतियों को हमें यीशु से दूर रखने की अनुमति देने के बजाय, आइये हम उन्हें उस व्यक्ति में गहरे विश्वास के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें जो इसे महसूस करता है जब हम उसे छूते हैं(पद.30) और जो हमें ठीक कर सकता है l आर्थर क्रॉवडर

ईस्टर विरोधाभास

2019 में ईस्टर के दिन, श्रीलंका में आत्मघाती बम विस्फोटों में तीन चर्च और तीन आलीशान होटल निशाना बनाए गए। जैसे ही यह खबर फैली, कुछ चर्चों ने अपनी आराधनाओं को बीच में ही बंद कर दिया। लोग घबराए और डरे हुए घर भागे। उनकी खुशी का जश्न गम में बदल गया।

तब से हर साल, ईस्टर उन प्रियजनों की यादें वापस लाता है जो बेवजह हिंसा में मारे गए थे जिसे अब “ईस्टर बमबारी” के रूप में जाना जाता है। फिर भी, वह त्रासदी, निर्दोष लोगों की हत्या और प्रियजनों को खोने वालों का दुख पुनरुत्थान के विरोधाभास की सरासर याद दिलाता है। यीशु मरा ताकि हम जी सकें। हालाँकि हम एक दिन मरेंगे, हम यह भी जानते हैं कि हम फिर से जी उठेंगे, बशर्ते हम उसके(यीशु के) जीवन को साझा करें। यही पुनरुत्थान की आशा है।

मसीह का पुनरुत्थान हमें विश्वास के साथ पौलुस के प्रश्न पर जोर देता है, “हे मृत्यु, तेरी जय कहाँ रही? हे मृत्यु, तेरा डंक कहाँ रहा?” और बोलने को कहता है, “परमेश्वर का धन्यवाद हो! जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करता है”(पद..55-57)।

पुनरुत्थान रविवार पाप और मृत्यु पर मसीह की जीत का उत्सव है, और यह हमें सबसे बड़ी आशा देता है। 4वीं शताब्दी के चर्च के पित जॉन ख्रिसोस्तम ने कहा, “मसीह जी उठा है, और तुम(मृत्यु) परास्त हो गयी हो! मसीह जी उठा है, और दुष्टात्माएं गिराए गए हैं! मसीह जी उठा है, और स्वर्गदूत आनन्दित हैं! मसीह जी उठा है, और जीवन राज करता है! मसीह जी उठा है, और कब्र में एक भी मृतक नहीं बचा है!” जब हम अप्रत्याशित या असामयिक नुकसान का अनुभव करते हैं, तो हमारी आशा इस आश्वासन पर केंद्रित हो कि क्योंकि यीशु जीवित है, इसलिए उसके विजयी पुनरुत्थान में आनन्दित होना संभव है। नोएल बर्मन

 

सुलेख और संविधान

भारतीय संविधान की आधिकारिक प्रति केवल एक कानूनी पुस्तक नहीं है। यह कला का एक काम है, जो काले चमड़े से मढ़ा हुआ है और सोने से अलंकृत है। यह दस्तावेज़ कलात्मक महत्व रखता है क्योंकि इसे प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा ने 15 से अधिक प्रकार की स्याही निब का उपयोग करके हाथ से लिखा था। उनकी सुंदर सुलेख संविधान के पन्नों को एक कालातीत सुन्दरता प्रदान करता है। शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा किए गए चित्रण इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं, जो पन्नों को सिंधु घाटी सभ्यता की कला से सजाते हैं और देश भर से विभिन्न आदिवासी कलाकृतियों को प्रदर्शित करते हैं। वर्तमान में हीलियम कक्ष में संरक्षित, यह भारतीय गणराज्य की सबसे क़ीमती संपत्तियों में से एक है।

संविधान की तरह, जो नागरिकों के रूप में हमारे लिए अमूल्य है, बाइबल मसीह में विश्वासियों के रूप में हमारे लिए एक क़ीमती संपत्ति है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये शब्द हमें सही मार्ग पर चलने में मदद करते हैं (पद.9)। यह उठाने के लिए बोझ नहीं है, बल्कि एक खुशी और आनंद है (पद.14-16)। भजन संहिताकार ने पवित्र शास्त्र की तुलना "सब प्रकार के धन"(पद.14) से की है, जिसके बारे में वह कहता है कि यह उसके हृदय में "रखी हुई है," क्योंकि वह जानता है कि यह उसके दैनिक जीवन में कितना मूल्य जोड़ता है (पद.11)।

हमारी तेज़-रफ़्तार दुनिया में, परमेश्वर के वचन के साथ समय बिताना अक्सर एक ऐसा काम लगता है, जिसे टाला जा सकता है। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह एक ख़ज़ाना है। अक्सर जब हम कठिन निर्णयों का सामना करते हैं, तो यह परमेश्वर का वचन ही होता है जो हमें मार्गदर्शन, सांत्वना और फटकार देता है। जब हम पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में प्रतिदिन पवित्रशास्त्र को पढ़ते, मनन करते और उससे जुड़ते हैं, तो हम वास्तव में परमेश्वर के अपरिवर्तनीय वचन के ख़ज़ाने की सीमा को समझ पाएँगे। रेबेका विजयन

गुरुत्वाकर्षण पहाड़ी

रहस्यों को समझना एक ऐसी चीज़ है जो कई लोगों को आकर्षित करती है, जिनमें मैं भी शामिल हूँ। ऐसा ही एक रहस्य है लेह, लद्दाख के पास एक पहाड़ी जिस पर वाहन नीचे की ओर जाने के बजाय अपने आप ऊपर की ओर लुढ़कते हैं। लोकप्रिय रूप से “ग्रेविटी हिल” के नाम से प्रसिद्ध, लोगों का मानना है कि यह एक दृष्टिभ्रम हो सकता है, या पहाड़ी में एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हो सकता है या यह कि परिदृश्य एक मानसिक धोखा है। कारण जो भी हो, एक बात तो तय है, यह घटना गुरुत्वाकर्षण के नियमों के विरुद्ध प्रतीत होती है——यह एक रहस्य है। 

प्रेरित पौलुस, जो अपने समय का एक प्रसिद्ध विद्वान था, के पास अपने श्रेष्ठ ज्ञान, बुद्धि और शैक्षणिक प्रतिष्ठा पर घमंड करने का हर कारण था (पद.1-2)। फिर भी वह डरते और कांपते हुए कुरिन्थियों के पास गया क्योंकि वह जिस “रहस्य” का साक्षी था वह उसकी बौद्धिक क्षमता से कहीं अधिक था। यह “रहस्य” मानवजाति को पाप से छुड़ाने के लिए परमेश्वर की अपरिमेय योजना है, और यह उसके पुत्र, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा प्रकट हुयी। इसका प्रबंध करने में परमेश्वर की बुद्धि एक रहस्य है जिसे केवल पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से ही समझा जा सकता है (पद.5-10)। 

जब हम मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो हम इस महान “रहस्य” का हिस्सा बन जाते हैं, जिसे परमेश्वर ने हमारे अंदर स्थापित किया है। परमेश्वर की बुद्धि किसी भी सांसारिक बुद्धि से महान है, और पवित्र आत्मा के द्वारा यह हमारे लिए उपलब्ध है। जीवन के चौराहे पर, जब हम परिवार, मित्रों या साथियों की बुद्धि पर निर्भर होने के लिए लुभाए जाते हैं, तो हमें सभी बुद्धि के अंतिम स्रोत——पवित्र आत्मा (कुलुस्सियों 1:9) का उपयोग करना ही चाहिए l क्योंकि जब मनुष्य की बुद्धि अच्छी है, तो परमेश्वर की बुद्धि उससे भी बेहतर है, और उसकी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ रहती है।

रेबेका विजयन 

अत्यधिक अतिप्रवाह

स्कूल में, हमारे तमिल शिक्षकों ने हमारे लिए पोंगल नामक एक तमिल त्यौहार के सांस्कृतिक उत्सव का अनुभव करने का आयोजन किया, जिसे अन्य स्थानों पर लोहरी और मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने एक पारंपरिक चूल्हा स्थापित किया, छोटी लकड़ियाँ जलाईं और उस पर चावल, चीनी और दूध से भरा एक मिट्टी का बर्तन रखा। हम चकित होकर देखते रहे और बर्तन की सामग्री के उबलने पर चिल्लाते रहे। हममें से प्रत्येक ने थोड़ा पोंगल खाने के बाद, हम कक्षा में वापस चले गए। तमिल संस्कृति में, 'पोंगल'जिसका अर्थ है 'अतिप्रवाह' फसल की प्रचुरता का प्रतीक है।

यूहन्ना 7 एक यहूदी त्यौहार के बारे में बात करता है जिसे झोपड़ियों का पर्व कहा जाता है। इस पर्व के अंतिम दिन, यीशु खड़े होकर ऊंची आवाज़ में बोला, "यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए" (पद.37)। उसने प्रतिज्ञा की कि जो कोई भी उस पर विश्वास करेगा, उसके "हृदय में से" "जीवन के जल की नदियाँ" बह निकलेंगी (पद.38)। लेखक यूहन्ना कहता है कि यीशु जिस अतिप्रवाह का उल्लेख कर रहा था, वह प्रतिज्ञा किया गया पवित्र आत्मा है जिसे बाद में सभी पर उंडेला जाएगा (पद.39)। यीशु के मरने, पुनरुत्थित होने और स्वर्गारोहण के बाद, उसने एक अन्य त्योहार, पिन्तेकुस्त के दिन, के दौरान इस वादे को पूरा किया (प्रेरितों के काम 2:1)। आत्मा से भरपूर होकर, उसके शिष्यों ने विभिन्न भाषाओं में सुसमाचार का प्रचार किया, अपने संसाधनों को स्वेच्छा से साझा किया और एक देखभाल करने वाला समुदाय बन गए (प्रेरितों के काम 2:3,52)।

यीशु ने हमें अपनी आत्मा दी है ताकि हम अपने भीतर की अपनी आध्यात्मिक प्यास बुझा सकें (यूहन्ना 7:38-39)। आत्मा हमें उत्साहित करता है, हमें शांति और आनंद देता है, और हमें भरपूर मात्रा में भर देता है (पद.38)। और जैसे-जैसे हम भरते हैं, हम दूसरों को भी भरने के लिए भरपूर मात्रा में अतिप्रवाहित होते हैं। ऍन हरिकीर्तन

एक साधारण अनुरोध

"सोने जाने से पहले कृपया सामने का कमरा साफ कर देना", मैंने अपनी एक बेटी से कहा। तुरंत उत्तर आया, "वह क्यों नहीं करती है?"

जब हमारी बेटियाँ छोटी थीं तब हमारे घर में ऐसा हल्का विरोध अक्सर होता था। मेरी प्रतिक्रिया हमेशा एक ही थी : "अपनी बहनों के बारे में चिंता मत करो; मैंने तुम से कहा है।"

यूहन्ना 21 में, हम शिष्यों के बीच इस मानवीय प्रवृत्ति को चित्रित होते हुए देखते हैं। पतरस द्वारा तीन बार उसका इन्कार किये जाने के बाद यीशु ने पतरस को बहाल कर दिया था (यूहन्ना 18:15-18, 25-27 देखें)। अब यीशु ने पतरस से कहा, मेरे पीछे हो ले! (21:19)—एक सरल लेकिन कठिन आदेश । यीशु ने समझाया कि पतरस मृत्यु तक उसका अनुसरण करेगा (पद.18-19)।

पतरस के पास यीशु के शब्दों को समझने का समय ही नहीं था, इससे पहले उसने उसके पीछे आते शिष्य के बारे में पूछा : "हे प्रभु, इस का क्या?" (पद.21) l यीशु ने उत्तर दिया, "यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या?" फिर उसने कहा, "तू मेरे पीछे हो ले।" (पद.22)।

कितनी बार हम पतरस की तरह होते हैं! हम दूसरों की विश्वास यात्राओं के बारे में सोचते हैं न कि परमेश्वर हमारे साथ क्या कर रहा है उसके बारे में । अपने जीवन के अंत में, जब यूहन्ना 21 में यीशु की मृत्यु की भविष्यवाणी बहुत करीब थी, पतरस ने मसीह के सरल आदेश को विस्तार से बताया : "आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो । पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।"(1 पतरस 1:14-15)। यह हममें से प्रत्येक को यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए पर्याप्त है, न कि हमारे आस-पास के लोगों पर। मैट लूकस

कोई मूल्य टैग नहीं

मेरे शहर में एक छोटे से पारिवारिक सुपरमार्केट ने नए साल के दौरान गरीब लोगों को उपहार देने का फैसला किया। मार्ट ने सामान की कीमत चुकायी, और कर्मचारियों ने स्टोर को कुछ आवश्यक वस्तुओं, कपड़े और भोजन से भर दिया। जैसे ही आमंत्रित गरीब लोग मार्ट में दाखिल हुए, उन्होंने एक आवाज़ सुनी, जो कह रही थी, "कोई मूल्य टैग नहीं है, जो भी आपको चाहिए ले लीजिए। यह आज आपके लिए मुफ़्त है!" चूँकि उन्होंने कभी नए कपड़े, ताज़ा भोजन और आवश्यक वस्तुओं को मुफ़्त में दिए जाते नहीं देखा था, इसलिए उनकी कृतज्ञता वास्तव में दिल को छू लेने वाली थी।

प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र, यीशु के द्वारा एक उपहार दिया है जो पूरी तरह से मुफ़्त है। परमेश्वर ने इस उपहार के लिए यीशु के द्वारा भुगतान किया जिसने हमें पाप और मृत्यु की शक्ति से बचाया ताकि हम हमेशा के लिए उसके साथ रह सकें (रोमियों 6:23)। परमेश्वर ने स्वयं इसकी कीमत पहले से चुकाकर हमारे लिए उद्धार को मुफ़्त कर दिया। कीमत मसीह का लहू था। क्योंकि उसने हमें छुड़ाया है और हमें अपना बना लिया है, हम अब अपने नहीं हैं, हम उसके हैं (1 कुरिन्थियों 6:20)। हमारे प्रयासों से यह मूल्यवान संभावना नहीं खरीदी जा सकती थी (इफिसियों 2:8-9)। यह पूरी तरह से उसके महान प्रेम के कारण है कि हमें और उन सभी को जो विश्वास में उसकी ओर मुड़ते हैं, उद्धार मुफ्त में दी जाती है।

जैसे सुपरमार्केट के मालिकों ने दिए गए सामान के लिए भुगतान किया, वैसे ही यीशु ने क्रूस पर हमारी जगह लेकर हमारे उद्धार की कीमत चुकाई। क्योंकि उसने ऐसा किया, हम बिना कीमत चुकाए उद्धार का उपहार प्राप्त कर सकते हैं, जैसे बिना किसी कीमत के गरीब लोगों को वह मिला जिसकी उन्हें ज़रूरत थी। जितने वे आभारी थे, आइए हम भी, उसके प्यार भरे फैसले के लिए उतने ही आभारी हों, जिसने हमें मुफ्त में अपना उद्धार प्रदान किया। —रवि एस. रात्रे

राष्ट्रों से प्रेम करना

मध्य और दक्षिण अमेरिका के दो प्यारे और मेहनती माता-पिता की बेटी होने के नाते, मैं आभारी हूँ कि उनमें बेहतर अवसरों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवास करने वाले अपने परिवार के पहले व्यक्ति होने का साहस था l वे न्यूयॉर्क शहर में युवा वयस्कों के रूप में मिले, विवाह किया, उनके पास मेरी बहन और मैं थी, और वे आगे बढ़कर अपना-अपना व्यवसाय चलाने लगे l 

न्यूयॉर्क के मूल निवासी के रूप में, मैं अपनी हिस्पैनिक/Hispanic(लातिनी अमरिकी) विरासत को अपनाते हुए बड़ी हुयी हूँ और विविध पृष्ठभूमि के लोगों से आकर्षित हुयी हूँ l उदाहरण के लिए, मैंने एक बार एक बहुसांस्कृतिक(multicultural) चर्च में एक शाम की आराधना में विश्वास की अपनी कहानी साझा की थी जो एक पूर्व ब्रॉडवे थिएटर(Broadway theater) में इकठ्ठा होती है l परमेश्वर के प्रेम के बारे में एक बहुसांस्कृतिक समूह से बात करना केवल इस बात की एक झलक है कि स्वर्ग कैसा होगा जब हम विभिन राष्ट्रों के लोगों को मसीह की देह के रूप में एक साथ मिलते देखेंगे l 

प्रकाशितवाक्य में, प्रेरित यूहन्ना हमें स्वर्ग का यह अद्भुत चित्र देता है : “मैंने दृष्टि की, और देखो, हर एक जाति और कुल और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था . . . मेमने के सामने खड़ी है”(प्रकाशितवाक्य 7:9) l हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को “स्तुति और महिमा’ प्राप्त होगी और इससे भी अधिक वह “युगानुयुग बनी रहे”(पद.12) l 

अभी तो हमें बस एक झलक मिली है कि स्वर्ग कैसा होगा l लेकिन एक दिन, हम जो यीशु में विश्वास करते हैं, उनके साथ और विभिन्न देशों, संस्कृतियों और भाषाओं के लोगों के साथ एकजुट होंगे l चूँकि परमेश्वर राष्ट्रों से प्रेम करता है, आइये हम भी मसीह में अपने वैश्विक परिवार से प्रेम करें l