Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by मोनिका ब्रांड्स

अनुसरण करने की स्वतंत्रता

एक बार मेरे स्कूल के कोच ने मुझे एक दौड़ के पहले कहा, “आगे-आगे मत दौड़ना l आगे दौड़ने वाले जल्द ही थक जाते हैं l” इसके बदले उनकी सलाह थी कि मैं सबसे तेज दौड़ने वाले के निकट रहूँ l तेज दौड़ने वालों द्वारा गति बनाए रखने के कारण मैं अपने मानसिक और शारीरिक ताकत को बनाए रख सकूँगा और दौड़ भी अच्छी तरह पूरी कर लूँगा l

नेतृत्व थका सकता है; अनुसरण स्वतंत्र रखता है l इसको जानकार मेरा दौड़ना और बेहतर हो गया, किन्तु मसीही शिष्यता में यह लागू कैसे होता है, जानने में समय लगा l मेरे खुद के जीवन में, मेरी सोच थी कि यीशु का विश्वासी होने का अर्थ है सश्रम कोशिश करना  l एक मसीही को कैसा होना चाहिए के विषय अपनी थकाऊ इच्छा का पीछा करने के द्वारा, मैं सरलता से उसका अनुसरण करने की जगह गलती से आनंद और स्वतंत्रता को खो रहा था (यूहन्ना 8:32,36) l

किन्तु हमें अपने जीवनों को चलाने कि ज़रूरत नहीं है, और यीशु ने आत्म-सुधार कार्यक्रम आरंभ नहीं किया था l इसके बदले, उसकी प्रतिज्ञा थी कि उसका अनुसरण करके हम उस शांति को प्राप्त करेंगे जिसकी हम इच्छा करते हैं (मत्ती 11:25-28) l अन्य धार्मिक शिक्षकों के विपरीत जो वचन के कठोर अध्ययन अथवा नियम पालन पर बल देते हैं, यीशु की शिक्षा थी कि उसको जानने के द्वारा हम परमेश्वर को जान सकते हैं (पद.27) l उसको खोजने से, हमारे भारी बोझ उतर जाएंगे (पद.28-30) और हमारे जीवन बदल जाएंगे l

क्योंकि नम्र और दीन अगुए के पीछे चलना सरल है (पद.29) – यह आशा और चंगाई का मार्ग है l उसके प्रेम में विश्राम करने से हम स्वतंत्र रहते हैं l

अनाम दया

ग्रेजुएशन के बाद मुझे एक कड़ा बजट बनाना पड़ा- सप्ताह में पच्चीस डॉलर। एक दिन, बिलिंग लाइन में मुझे लगा कि मेरा सामान मेरे बजट से अधिक लागत का है। "बीस डॉलर तक पहुंचकर बिलिंग रोक देना" मैंने केशियर से कहा। मिर्च छोड़कर बाकि सभी चीजें बिल हो गईं।

मैं निकल ही रही थी कि एक व्यक्ति मेरी कार के पास आया। मुझे एक पैकेट पकड़ा कर उसने कहा “आपकी मिर्ची यह रही”। इससे पहले मैं उसे धन्यवाद देती, वह जा चुका था।

दया के कार्य की इस भलाई की याद, मेरे दिल को आज भी छू जाती है और मत्ती 6 में यीशु के शब्दों का स्मरण दिलाती है। यीशु ने उन कपटियों की आलोचना करते हुए जो दिखावे के लिए दान देते थे, (पद 2) अपने चेलों को अलग रास्ता सिखाया। उन्होंने दान को ऐसे गुप्त रखने की प्रेरणा दी कि “जो तेरा दाहिना हाथ...(पद 3)!

एक अंजान व्यक्ति की दया ने मुझे याद दिलाया, देना कभी हमारे बारे में कभी न हो। हम देते हैं क्योंकि हमारे उदार परमेश्वर ने हमें बहुतायत से दिया है (2 कुरिन्थियों 9:6-11) गुप्त और उदार रूप से दान देकर हम यह दर्शाते हैं कि वह कौन हैं-और परमेश्वर को धन्यवाद की भेंट मिलती हैं जिसके केवल वो ही योग्य हैं (पद 11)।

जीवित रहने का मुद्दा

वित्तीय सलाह पर अधिकांश पुस्तकों में मैंने एक रोचक विचारधारा देखी है, कि आज खर्चे कम करो कल करोड़पति बनो। एक पुस्तक का भिन्न दृष्टिकोण था, समृद्ध जीवन जीना हो तो सादगी से जिओ। यदि आनन्द अनुभव करने के लिए आपको अधिक फैंसी सामान चाहिए, तो “आप जीने के मुख्य मुद्दे से चूक गए हैं”।

इस व्यावहारिक ज्ञान से यीशु की प्रतिक्रिया याद आती है जब किसी ने उनसे उसके भाई से सम्पति बाँटने को कहा। “जीवन सम्पति की बहुतायत से नहीं होता” कहते हुए यीशु ने “हर प्रकार के लोभ” से बचने की चेतावनी दी (लूका 12:14-15)। उन्होंने बताया कि सुखी जीवन के लालच में एक धनवान ने फ़सल भंडार में रखने की योजना बनाई-पहली सदी की रिटायरमेंट प्लानिंग-जिसका कटु परिणाम हुआ। सम्पति ने उसे सुख न दिया क्योंकि उसी रात उसकी मृत्यु हो गई (पद 16-20 )।

यीशु के शब्द हमें अपनी मंशा जाँचने की प्रेरणा देते है। हमारा हृदय परमेश्वर के राज्य की खोज में-उन्हें जानने में और दूसरों की सेवा करने में लगना चाहिए न कि भविष्य सुरक्षित करने में (पद 29-31)। जब हम यीशु के लिए जिएँ और उनका सन्देश निसंकोच दूसरों से बांटें, तो हम उनके साथ सुखी जीवन जी सकते हैं अभी -ऐसे राज्य में जो हमारे जीवन को अर्थ देता है (पद 32-36)।

जीवन कैसे परिवर्तित करें

रॉक एंड रोल के सुप्रसिद्ध कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन के कठिन बचपन में और डिप्रेशन से लगतार संघर्ष करने में सगींत कलाकारों के काम ने ही मदद की थी। अपने कार्य का अभिप्राय उन्हें उसी सत्य से मिला, जिसका अनुभव उन्होंने स्वयं किया था, “एक उचित गीत से आप किसी के जीवन को तीन मिनट में परिवर्तित कर सकते हैं”।

ध्यान से चुने हुए शब्द हमें आशा देते हैं, यहां तक कि जीवन बदल सकते हैं। जैसे किसी शिक्षक के शब्द जो संसार को देखने का हमारा नजरिया बदलते हैं, आत्मविश्वास बढ़ाने वाले उत्साह वर्धक शब्द, कठिन समय में मित्र के नम्र शब्द जो हमें सम्भालते हैं।

वचन की पुस्तक शब्दों को खज़ाना समझने और बुद्धिमानी से उनका उपयोग करने के हमारे उत्तरदायित्व पर बल देती है। हमारे शब्दों में मृत्यु और जीवन के परिणाम हो सकते हैं, (18:21 नीति)। शब्दों से हम किसी की आत्मा को दु:खित कर सकते हैं, या दूसरों के मनोबल को बढ़ा कर उन्हें मजबूत कर सकते हैं (15:4)।

प्रभावशाली संगीत बनाने की क्षमता हम सब में नहीं है। परन्तु अपनी बातों के माध्यम से दूसरों की सेवा करने के लिए हम परमेश्वर की बुद्धि मांग सकते हैं (भजन 141:3)। किसी के जीवन को कुछ शब्दों से बदलने के लिए परमेश्वर हमारा उपयोग कर सकते हैं।

बाहर का भाग अन्दर?

“परिवर्तन : अन्दर का भाग बाहर अथवा बाहर का भाग अन्दर?” मुख्य समाचार में यही लिखा था और वर्तमान का प्रचलित चलन दर्शा रहा था कि बाहरी बदलाव जैसे सौन्दर्य प्रसाधन द्वारा बदलाव अथवा बेहतर ढंग अन्दर की भावनाओं को जानने का और जीवन बदलने का भी एक सरल तरीका हो सकता है l

एक आकर्षक विचार कहता है कि कौन नहीं चाहता कि हमारे जीवन नए रूप की तरह अत्यंत सरल हो जाएँ? हममें से अनेक लोगों ने कठिन तरीके से सीखा है कि पुरानी आदतों को  छोड़ना लगभग असम्भव होता है l सरल बाहरी बदलाव पर ध्यान लगाने से आशा दिखाई देती है कि हमारे जीवनों में सुधार लाने का एक तेज़ तरीका है l

किन्तु यद्यपि ये बदलाव हमारे जीवनों में सुधार ला सकते हैं, बाइबिल चाहती है कि हम एक गंभीर बदलाव का प्रयास करें जो खुद पर भरोसा करने से संभव नहीं है l वास्तव में, गलातियों 3 में भी पौलुस का तर्क है कि परमेश्वर की व्यवस्था अर्थात् अनमोल उपहार जिसके द्वारा उसकी इच्छा प्रगट हुई, भी परमेश्वर के लोगों के टूटेपन को चंगा नहीं कर सका (पद.19-22) l वास्तविक चंगाई और छुटकारे के लिए ज़रूरी था कि वे विश्वास और पवित्र आत्मा के द्वारा ((5:5) मसीह को “पहिन” लें (पद.27) l उसके द्वारा चुने जाकर और रूप पाकर, उनकी पहचान मूल्यवान हो जाएगी अर्थात् हर एक विश्वासी परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं का बराबर से हक़दार होगा (3:28-29) l

हम आसानी से आत्म-सुधार तकनीक में अत्यधिक ऊर्जा खर्च कर सकते हैं l किन्तु उस प्रेम को जो ज्ञान से परे है और जो सब कुछ बदल सकता है, को जानने से ही हम अपने हृदयों में गहरा और अत्यधिक संतोषजनक बदलाव अनुभव कर सकते हैं (इफि. 3:17-19) l

परमेश्वर द्वरा थामा गया

एक दोपहर अपनी बहन और उसके बच्चों के संग भोजन समाप्त करते समय, मेरी बहन ने मेरी तीन वर्षीय भांजी, अनिका से कहा कि दोपहर में उसके सोने का समय हो गया है l वह चौंक गयी l “किन्तु मोनिका आंटी ने आज मुझे गोद में नहीं लिया!” वह आँसुओं से बोली l मेरी बहन मुस्कराकर बोली l “ठीक है, तुम कितनी देर तक चाहती हो कि वह तुम्हें गोद में उठाए?” उसका उत्तर था, “पाँच मिनट l”

अपनी भांजी को गोद में लेकर, मैं कृतज्ञ हूँ कि प्रयास के अभाव में भी, वह मुझे याद दिलाती है प्रेम करना और प्रेम पाने का अनुभव क्या होता है l मेरी सोच में हमारी विश्वास यात्रा कल्पना से परे परमेश्वर का प्रेम अनुभव करने का है (इफि.3:18) l अपना ध्यान खोने पर हम यीशु के उड़ाऊ पुत्र के दृष्टान्त में जेठा पुत्र स्वरुप होते हैं, और भूलकर कि हमारे पास सब कुछ है, परमेश्वर का समर्थन पाने की कोशिश करते हैं (लूका 15:25-32) l

भजन 131 वचन में एक प्रार्थना है जो हमें “बालकों के समान”(मत्ती. 18:3) बनने में मदद करता है और हमें हमारे मस्तिष्क के नहीं समझने वाले द्वन्द से दूर करता है (भजन 131:1) l इसके बदले, हम समय के साथ उसमें शांति स्थान में लौट सकते हैं (पद.2),उसके प्रेम में आवश्यक आशा प्राप्त कर सकते हैं (पद.3)-जैसे हम शांति और चैन से अपनी माता के बाहों में हों (पद.2) l

पूरी तरह संभाला गया

हाल ही में मुझे कॉलेज की अपनी कुछ डायरी मिली जिसे मैं दोबारा पढ़ने के लिए मजबूर हुयी l लेखों को पढ़ते हुए, मैंने महसूस किया कि मैं उस समय खुद के विषय ऐसा महसूस नहीं करती थी l इस समय मैं खुद को अकेलेपन से संघर्ष करते हुए और अपने विश्वास पर शक करते हुए देखकर हरी हुई महसूर करती होती हूँ, किन्तु मुझे याद है कि किस तरह परमेश्वर मुझे बेहतर स्थान पर ले गया था l उन दिनों में परमेश्वर की अगुवाई याद करके आज मैं मजबूत महसूर करती हूँ जो एक दिन उसके चंगा करनेवाले प्रेम की बड़ी कहानी का भाग होगा l

भजन 30 उत्सव भजन है जो आश्चर्य और धन्यवाद के साथ बीते समय में परमेश्वर की सामर्थी चंगाई को याद करता है : रोग से आरोग्यता तक, मृत्यु के डर से जीवन तक, परमेश्वर के न्याय से उसकी कृपादृष्टि तक, विलाप से आनंद तक (पद.2-3,11) l

हम इस भजन में, दाऊद का दर्द-भरा शोक देखते हैं l किन्तु दाऊद ने असाधारण चंगाई का अनुभव भी प्राप्त किया जिसे वह बता पाया, “कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है” (पद.5) l समस्त दुःख उठाने के बाद भी, दाऊद ने और भी बड़ी बात खोज ली अर्थात् परमेश्वर का चंगा करनेवाला हाथ l

यदि आज आप दुखित हैं और आपको उत्साह चाहिए, अतीत को याद करें जब परमेश्वर ने आपको चंगाई के स्थान पर लिए चला l भरोसा के लिए प्रार्थना करें कि वह आज भी करेगा l

भरपूर जीवन

जब मैं अपनी बहन के घर गयी, मेरे भांजों ने उत्सुकता से मुझे दैनिक कार्यों का हिसाब रखनेवाला एक कार्य प्रणाली, दिखाया l प्रत्येक रंगीन इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड उनके कार्य का हिसाब रखता है l ढंग से किये हुए कार्य अर्थात् एक बच्चा हरा बटन दबा सकता है, जो उनके “खर्च” अकाउंट में अंक जोड़ता है l पीछे का दरवाजा खुला छोड़ने जैसा एक गलत कार्य के लिए दण्ड देना पड़ता है जिससे कुल योग से अंक कम हो जाता है l उच्च अंक कंप्यूटर समय प्राप्त करने के समान आकर्षक पुरस्कार देता है-और गलत कार्य कुल योग से अंक कम करता है-मेरे भांजे असामान्य रूप से अपने कार्य करने और दरवाजा बंद रखने के लिए प्रेरित हैं l

यह शानदार प्रणाली मेरे लिए मजाक बन गया कि मुझे यह प्रेरणादायक उपकरण प्राप्त करने की इच्छा हुई! किन्तु वास्तव में परमेश्वर ने हमें प्रेरणा दी है l यूँ ही आज्ञाकारिता का आदेश देने की बजाए, यीशु ने प्रतिज्ञा की है कि उसका अनुसरण करनेवाला जीवन जबकि, कीमती है, बहुतायत का जीवन भी है, “जीवन ... बहुतायत से” (यूहन्ना 10:10) l उसके राज्य में जीवन का अनुभव कीमत से “सौ फीसदी” अधिक है – अभी और अनंत तक (मरकुस 10:29-30) l

हम इस सच्चाई में आनंदित हो सकते हैं कि हम एक उदार परमेश्वर की सेवा करते हैं, और जिसके हम लायक हैं वह उसके अनुसार हमें पुरस्कृत अथवा दण्डित नहीं करता है l वह हमारे कमज़ोर प्रयासों को भी उदारता से स्वीकार करता है-अपने राज्य में पहले आनेवालों के साथ-साथ देर से आनेवालों का भी स्वागत करता हैं और पुरस्कार देता है (देखें मत्ती 20:1-16) l इस सच्चाई के प्रकाश में, आइये हम आज उसकी सेवा आनंदपूर्वक करें l

घर की सफाई

हाल ही में मुझे अपना कमरा बदलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा, क्योंकि मुझे एक सम्पूर्ण नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहिए था l पुराने कमरे की घंटों सफाई और छंटाई के बाद, सामान भरे हुए थैले फेंकने, बांटने, या पुनर्चक्रण के लिए मेरे दरवाजे पर थे l किन्तु इस थकाऊ प्रक्रिया के अंत में मेरे रहने के लिए एक सुन्दर कमरा था l

 मुझे घर साफ़ करने की योजना से 1 पतरस 2:1 पढ़ते समय एक नूतन दृष्टिकोण प्राप्त हुआ, जैसे द मेसेज (बाइबिल) में सरल ढंग से लिखा गया है : “इसलिए, घर साफ़ करें! बैरभाव और छल, डाह और निंदा को पूरी तौर से हटाएँ l” रुचिकर बात यह है, नए जीवन के आनंददायक अंगीकार के बाद (1:1-12) पतरस मसीह में उनसे हानिकारक व्यवहार हटाने को कहता है (1:13-2:3) l जब परमेश्वर के साथ हमारी चाल अव्यवस्थित और दूसरों के लिए हमारा प्रेम अस्वाभाविक लगे, यह हमारे उद्धार पर प्रश्न न उठाए l हम बचेंगे के लिए नहीं किन्तु हम बचे हुए हैं के कारण अपना जीवन बदलते हैं (1:23) l

मसीह में नए जीवन की वास्तविकता की तरह, हमारे बुरे आचरण रातों रात गायब नहीं होते l हमें प्रति दिन “घर की सफाई” करनी है, दूसरों को प्रेम करने से रोकनेवाली(1:22) और उन्नति में बाधक(2:2) बातों को हटाना है l तब, उस नए स्थान में, हम मसीह की सामर्थ्य और जीवन द्वारा नूतन निर्माण (पद.5) का आश्चर्य अनुभव करेंगे l