यूहन्ना 14:15-21
15 “यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे l 16 मैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे l 17 अर्थात् सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है; तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा l 18 “मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोडूँगा; मैं तुम्हारे पास आता हूँ l 19 और थोड़ी देर रह गयी है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे; इसलिए कि मैं जीवित हूँ, तुम भी जीवित रहोगे l 20 उस दिन तुम जानोगे कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझ में, और मैं तुम में l 21 जिस के पास मेरे आज्ञाएं हैं और वह उन्हें मानता है, वही मुझे से प्रेम रखता है; और जो मुझ से प्रेम रखता है उससे मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उससे प्रेम रखूँगा और अपने आप को उस पर प्रगट करूँगा l”
उस दिन तुम जानोगे कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझ में, और मैं तुम में l यूहन्ना 14:20
जब 14 वर्षीय जय उदास और दुखी महसूस कर रहा था, तो उसने अपने युवा नेता की ओर रुख किया। “हर किसी के जीवन में निराशा के क्षण आते हैं,” उस वृद्ध व्यक्ति ने समझाया। “लेकिन आपके लिए हमेशा कोई न कोई मौजूद होता है, वह यीशु है। आप अकेले नहीं हैं।“ जैसे-जैसे जय युवा क्लब में जाता रहा, उसने यीशु में अपना विश्वास बनाए रखा। उसने निष्कर्ष निकाला, “यीशु हमारे लिए मरा, और उसने मुझे अच्छे के लिए बदल दिया।“ जय इस बदलाव का श्रेय यीशु की उपस्थिति को देता है : “मैं हमेशा से जानता था कि वह वहाँ है, लेकिन अब यीशु मेरे अंदर है; वह मेरा एक हिस्सा है l”
जय अपने भीतर निवास करने वाले पवित्र आत्मा के उपहार के बारे में बात करता है, जिसकी प्रतिज्ञा यीशु ने अपने मित्रों से किया था जब वह उन्हें अपनी मृत्यु के बाद के जीवन के लिए तैयार कर रहा था। यीशु ने कहा कि वह पिता से उनके लिए “सत्य का आत्मा” भेजने के लिए कहेगा, जिसे वे पहचानेंगे क्योंकि “वह तुम्हारे साथ रहता है और तुम में रहेगा” : “उस दिन तुम जान लोगे कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझ में हो, और मैं तुम में” (पद 20)। यह एक रहस्य है, लेकिन जय इसे बखूबी व्यक्त करता है जब वह कहता है कि यीशु उसके भीतर है।
हम भी शांति, स्थिरता और क्षमा के लिए यीशु की ओर देख सकते हैं। उसके हमारे भीतर रहने से, हम जानते हैं कि वह हमें अच्छे के लिए बदल सकता है और बदलेगा । जैसे उसने जय को बदला है।
यह जानना कि यीशु आपके भीतर रहता है, आपके दैनिक जीवन में कैसे बदलाव लाता है? आप बदलाव और रूपांतरण के लिए परमेश्वर की ओर कैसे देख सकते हैं?
हे अन्दर निवास करनेवाले परमेश्वर, आपको जानने और आपकी सेवा करने के अनुग्रह के लिए धन्यवाद। मुझे अपने जीवन में आपकी प्रेमपूर्ण उपस्थिति को स्वीकार करने में सहायता करें।