मनीला में वॉयस (संगीत) प्रशिक्षक लूर्डेस तीस साल से ज़्यादा समय से छात्रों को आमने-सामने पढ़ाती आ रही हैं। जब उनसे ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कहा गया, तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने बताया, “मैं कंप्यूटर चलाने में अच्छी नहीं हूँ।” “मेरा लैपटॉप पुराना है और मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म से परिचित नहीं हूँ।” हालाँकि कुछ लोगों को यह छोटी सी बात लग सकती है, लेकिन यह उनके लिए बहुत तनावपूर्ण था।
उन्होंने कहा, “मैं अकेली रहती हूँ, इसलिए मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है।” “मुझे चिंता है कि मेरे छात्र पढ़ाई छोड़ देंगे और मुझे आय की ज़रूरत है।” हर क्लास से पहले लूर्डेस अपने लैपटॉप के ठीक से काम करने के लिए प्रार्थना करती थीं। उन्होंने कहा, “फिलिप्पियों 4:5-6 मेरी स्क्रीन पर वॉलपेपर था।” “मैं उन शब्दों से कितनी जुड़ी रही। ।”
पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है कि हम किसी भी बात की चिंता न करें, क्योंकि “प्रभु निकट है” (फिलिप्पियों 4:5)। परमेश्वर की उपस्थिति के वादे को हमें पकड़े रखना है। जब हम उसकी निकटता में आराम करते हैं और प्रार्थना में सब कुछ—बड़ा और छोटा दोनों—उसे सौंप देते हैं उसकी शांति हमारे “हृदय और . . . विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित . . . रखती है” (पद.7)।
लूर्डेस ने कहा, “परमेश्वर ने मुझे कंप्यूटर की गड़बड़ियाँ ठीक करने वाली वेबसाइटों तक पहुंचाया।” “उन्होंने मुझे ऐसे धैर्यवान छात्र भी दिए जो मेरी तकनीकी सीमाओं को समझते थे।” परमेश्वर की उपस्थिति, सहायता और शांति का आनंद लेना हमारे लिए आवश्यक है क्योंकि हम अपने जीवन के सभी दिनों में उसका अनुसरण करना चाहते हैं। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं : “प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो!” (पद.4)।
—करेन हुआंग
यह जानना कि परमेश्वर निकट है आपकी चिंता की प्रतिक्रिया को शांति में कैसे बदल सकता है? आप उन्हें कौन से विशिष्ट अनुरोध प्रस्तुत कर सकते हैं?
प्रिय परमेश्वर, मेरे निकट रहने के लिए धन्यवाद। आपके प्रेमपूर्ण उपस्थिति, मदद और शांति के कारण, मुझे चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।
