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मसीह में अनमोल जीवन

मेरी खोई हुई सगाई की अंगूठी को पागल की तरह खोजने के दौरान मेरे गालों से आंसू बह निकले l सोफे के तकियों को उठाने और हमारे घर का हर एक कोना और दरार की सफाई के एक घंटे बाद, एलेन बोला, “मैं माफ़ी चाहता हूँ । हम दूसरा ले लेंगे l” 

“धन्यवाद,” मैंने उत्तर दिया l “लेकिन इसका भावनात्मक मूल्य इसकी सामग्री मूल्य से अधिक है l दूसरी अंगूठी उसकी जगह नहीं ले सकती है l” प्रार्थना करते हुए, मैं उस आभूषण की खोज जारी रखा । “परमेश्वर, कृपया, मुझे ढूंढने में मेरी मदद करें l”

बाद में, सप्ताह के शुरुआत में पहने हुए अपने स्वेटर के जेब में हाथ डालने पर, मुझे वह कीमती आभूषण मिल गया l “धन्यवाद, यीशु!” मैंने कहा । जब मैं और मेरा पति आनंदित हुए, मैंने वह अंगूठी पहन ली और उस उस स्त्री के दृष्टान्त को याद किया जिसने एक सिक्का खोया था (लुका 15:8-10) । उस स्त्री की तरह जिसने अपने खोये हुए चांदी के सिक्के को खोजने का यत्न किया था, मैं खोयी हुयी चीज़ के मूल्य को जान गयी थी l हम में से कोई भी अपने मूल्यवान चीज को पाने के लिए गलत नहीं थे । यीशु ने केवल उस कहानी का उपयोग अपने द्वारा बनाए गए प्रत्येक व्यक्ति को बचाने की अपनी इच्छा पर जोर देने के लिए किया l एक पापी के पश्चाताप का परिणाम स्वर्ग में उत्सव है l  

ऐसा व्यक्ति बनना कितना बड़ा उपहार होगा जो दूसरों के लिए उतनी ही लगन से प्रार्थना करता है जितना हम खोए हुए खजाने को पाने के लिए प्रार्थना करते हैं l यह मनाना क्या ही सौभाग्य है जब कोई पश्चाताप करता और अपना जीवन मसीह को समर्पित कर देता है, तो उसका जश्न मनाना क्या ही विशेषाधिकार है l अगर हमने यीशु पर अपना भरोसा रखा है, तो हम आभारी हो सकते हैं कि हमने किसी ऐसे व्यक्ति से प्यार किये जाने की ख़ुशी का अनुभव किया है जिसने कभी हार नहीं मानी क्योंकि उसने सोचा कि हम खोजने लायक हैं l

ईर्ष्या पर काबू पाना

एक प्रसिद्ध अंग्रेजी फिल्म में, एक उम्रदराज संगीतकार मुलाकात करने आए एक पुराहित के लिए पियानो पर अपना कुछ संगीत बजाता है l लज्जित पुरोहित कबूल करता है कि वह धुन को नहीं पहचानता है l तुरंत ही एक परिचित धुन बजाते हुए संगीतकार कहता है, “और इसका क्या?” “मुझे नहीं पता था कि उसे आपने लिखा था,” वह पुरोहित कहता है l “मैंने नहीं” उसने जबाब दिया l “वह मोजार्ट था!” जब दर्शकों को पता चलता है, मोजार्ट की सफलता ने इस संगीतकार में एक गहरी ईर्ष्या उत्पन्न कर दी थी──यहाँ तक कि मोजार्ट की मृत्यु में एक भूमिका निभाने में अग्रणी l 

एक और ईर्ष्या की कहानी के केंद्र में एक गीत निहित है l गोलियत पर दाऊद की जीत के बाद, इस्राएलियों ने दिल से गाया “शाऊल ने तो हजारों को, परन्तु दाऊद ने लाखों को मारा है” (1 शमूएल 18:7) l यह तुलना राजा शाऊल के साथ अच्छी तरह नहीं बैठती l दाऊद की सफलता से डाह रखकर और अपना सिंहासन खोने के डर से (पद. 8-9), शाऊल दाऊद को मारने के लिए, लम्बे समय तक उसका पीछा करता है l 

संगीत के साथ इस संगीतकार या शक्ति के साथ शाऊल की तरह, हम आमतौर पर उन लोगों से ईर्ष्या करने के लिए ललचाते हैं जिनके पास हमारे पास समान लेकिन अधिक वरदान हैं l और चाहे उनके काम में गलती निकालनी हो या उनके काम को कम करना हो, हम भी अपने “प्रतिद्वंदियों” को नुक्सान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं l 

शाऊल को दिव्य रूप से उसके कार्य के लिए चुना गया था (10:6-7,24), एक स्थिति जिसे  ईर्ष्या के बजाय उसके अंदर सुरक्षा को बढ़ावा देना चाहिए था l चूँकि हम में से प्रत्येक के पास भी अद्वितीय बुलाहट है (इफिसियों 2:10) ईर्ष्या पर विजय पाने का शायद सर्वोत्तम तरीका तुलना करना बंद करना है l इसके बदले आइये हम परस्पर सफलताओं का उत्सव मनाएँ l 

यीशु हमारी शांति है

टेलेमैकुस नाम का एक सन्यासी शांत जीवन व्यतीत करता था, लेकिन चौथी सदी के अंत में उसकी मृत्यु ने संसार को बदल दिया l पूर्व से रोम में आकर, टेलेमैकुस ने पेशेवर लड़ाका रंगशाला (gladiatorial arena) के रक्त खेल में हस्तक्षेप किया l वह रंगशाला की दीवार से कूदकर लड़ाकों को एक दूसरे को मारने से रोकने की कोशिश की l पर क्रोधित भीड़ ने पथराव करके सन्यासी को मार डाला l हालांकि, सम्राट होनोरिअस, टेलेमैकुस के कार्य के द्वारा द्रवित हुआ और 500 वर्षों के ग्लैडिएटर खेलों के अंत का फैसला किया ।

जब पौलुस यीशु को ‘हमारी शांति’ कहता है, तो वह यहूदियों और गैरयहूदियों के बीच के विद्वेश के अंत को दर्शाता है (इफिसियों 2:14) l परमेश्वर के चुने हुए इस्राएली लोग बाकी देशों से अलग थे और कुछ विशेषाधिकारों का आनंद लेते थे l उदाहरण के लिए, जबकि गैरयहूदियों को यरूशलेम के मन्दिर में उपासना करने की अनुमति थी, एक विभाजित करनेवाली दीवार उन्हें बाहरी आँगन तक सीमित रखती थी──उल्लंघन करने पर मृत्युदंड तय थी l यहूदी गैरयहूदियों को अशुद्ध मानते थे, और वे परस्पर शत्रुता अनुभव करते थे l लेकिन  अब, सभी के लिए यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा, यहूदी और गैरयहूदी दोनों ही उसमें विश्वास करने के द्वारा स्वतंत्रापूर्वक परमेश्वर की आराधना कर सकते हैं (पद.18-22) l प्रभु के सामने दोनों बराबर हैं l 

जिस तरह टेलेमैकस ने अपनी मृत्यु के द्वारा योद्धाओं को शांति दी, उसी तरह यीशु सभी के लिए जो उस पर उसकी मृत्यु और पुनरुथान के द्वारा विश्वास करते हैं शांति और मेल को संभव बनाता है l इसलिए यदि, यीशु हमारी शांति है, तो हम अपनी विभिन्नताओं को हमें विभाजित करने न दें l उसने हमें अपनी मृत्यु द्वारा एक किया है l 

परमेश्वर का प्रेम अधिक ताकतवर है

2020 में एलिस्सा मेंडोज़ा ने मध्य रात्रि के समय अपने पिता से एक चौकाने वाला ई-मेल प्राप्त किया । उस संदेश में निर्देश था कि उसे अपनी माँ के लिए माता-पिता की 25वीं वर्षगाठ पर क्या करना था l यह चौकाने वाला क्यों था? एलिस्सा के पिता 10 महीने पहले गुजर चुके थे । उसने यह जाना कि उन्होंने इसे अपनी बीमारी के दौरान लिखा था और ई-मेल को भजने के लिए नियत किया था, यह जानते हुए कि शायद वह जीवित नहीं रहेंगे l उन्होंने आने वाले वर्षों में अपनी पत्नी के जन्मदिन, आनेवाले वर्षगांठ, और वेलेंटाइन डे पर भेजने के लिए फूलों की व्यवस्था करके कीमत भी चुका दी थी l  

यह कहानी उस प्रकार के प्रेम के उदाहरण के रूप में हो सकता है जिसका सविस्तार वर्णन श्रेष्ठगीत में किया गया है l “क्योंकि प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है, और ईर्ष्या कब्र के समान निर्दयी है” (8:6) प्रेम के साथ कब्र और मृत्यु की तुलना करना अजीब लगता है, लेकिन वे ताकतवर हैं क्योंकि वे अपने बन्दियों को छोड़ते नहीं हैं l हलांकि, सच्चा प्रेम भी अपने प्रियजनों को नहीं छोड़ेगा । यह किताब पद 6-7 में अपने शिखर पर पहुंचता है, वैवाहिक प्रेम को इतना शक्तिशाली बताते हुए कि “पानी के बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता” (पद.7) l 

सम्पूर्ण बाइबल में, एक पति और पत्नी के प्रेम की तुलना परमेश्वर के प्रेम से की गयी है  (यशायाह 54:5; इफिसियों 5:25; प्रकाशितवाक्य 21:2) । यीशु दूल्हा है और कलीसिया उसकी दुल्हन । परमेश्वर ने मसीह को मृत्यु का सामना करने के लिए भेजकर हमारे लिए अपना प्रेम दिखाया (यूहन्ना 3:16) । चाहे हम शादी-शुदा हैं या कुंवारें, हम याद कर सकते हैं कि प्रभु का प्रेम किसी भी चीज़ से जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं से कहीं अधिक सामर्थी है ।