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परिवार से बढ़कर

जोन को एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पूर्ण प्रोफेसर के रूप में स्थापित किया गया था l उनके बड़े भाई डेविड प्रसन्न थे, लेकिन, जैसा कि भाई करते हैं, वह जोन को चिढ़ाने से खुद को नहीं रोक सके कि जब वे लड़के थे तो कैसे उन्हें उसे कुश्ती में ज़मीन पर गिरा दिया था l जोन जीवन में बहुत आगे बढ़ गए थे, लेकिन वह हमेशा डेविड के छोटे भाई रहेंगे l

परिवार को प्रभावित करना कठिन है—भले ही आप मसीहा हों l यीशु नासरत के लोगों के बीच बड़ा हुआ था, इसलिए उन्हें यह विश्वास करने में कठनाई हुयी कि वह उन सबसे विशेष l और उसे देखकर हैरान हुए l “कैसे सामर्थ्य के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैं? क्या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्र . . . है? (मरकुस 6:2-3) l यीशु ने उनसे कहा, “भविष्यद्वक्ता अपने देश, और अपने कुटुम्ब, और अपने घर को छोड़ और कही भी निरादर नहीं होता” (पद.4) l ये लोग यीशु को अच्छी तरह से जानते थे, लेकिन वे विश्वास नहीं कर सकते थे कि वह परमेश्वर का पुत्र था l

शायद आपका पालन-पोषण एक धार्मिक घर में हुआ हो l आपकी आरंभिक यादों में चर्च जाना और भजन संहिता गाना शामिल है l यीशु को हमेशा परिवार जैसे महसूस हुआ है l यदि आप उस पर विश्वास करते हैं और उसका अनुसरण करते हैं, तो यीशु आपका परिवार है l वह “[हमें] भाई-बहन कहने से नहीं लजाता” (इब्रानियों 2:11) l परमेश्वर के परिवार में यीशु हमारा बड़ा भाई है (रोमियों 8:29)! यह एक बड़ा विशेषाधिकार है, लेकिन हमारी निकटता उसे सामान्य बना सकती है l सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति परिवार है इसका मतलब यह नहीं है कि वह विशेष नहीं है l

क्या आप खुश नहीं है कि यीशु आपका परिवार है, और परिवार से भी बढ़कर? जैसा कि आप आज उसका अनुसरण करते हैं, वह आपके लिए और अधिक व्यक्तिगत और अधिक विशेष हो जाए l माइक विटमर 

 

 

दोषी करार दिया गया और स्वतंत्र किया गया

“मैंने यह नहीं किया!” यह एक झूठ था, और मैं इससे लगभग बच ही गया था, जब तक कि परमेश्वर ने मुझे नहीं रोका l जब मैं माध्यमिक स्कूल में था, मैं एक प्रदर्शन के दौरान हमारे बैंड के पीछे स्पिटबॉल शूट करने वाले समूह का हिस्सा था l हमारे निदेशक एक पूर्व नौसैनिक थे और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे, और मैं उनसे डरता था l इसलिए जब अपराध में मेरे साझेदारों ने मुझे फंसाया, तो मैंने इस बारे में उनसे झूठ बोला l फिर मैंने अपने पिता से भी झूठ बोला l

लेकिन परमेश्वर झूठ को चलने नहीं देने वाला था l उसने मेरे भीतर अपराधबोध की भावना जागृत की l कई सप्ताहों तक विरोध करने के बाद, मैं मान गया l मैंने परमेश्वर और अपने पिता से क्षमा मांगी l थोड़ी देर बाद, मैं अपने निदेशक के घर गया और रोते हुए स्वीकार किया l शुक्र है, वह दयालु और क्षमाशील था l

मैं कभी नहीं भूलूंगा कि उस बोझ का हटाया जाना कितना अच्छा लगा l मैं कई सप्ताहों में पहली बार अपराधबोध के बोझ से मुक्त और आनंदित था l दाऊद अपने जीवन में भी दृढ़ विश्वास और स्वीकारोक्ति के समय का वर्णन करता है l वह परमेश्वर से कहता है, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गयीं l क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा l” वह आगे कहता है, “मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया” (भजन संहिता संहिता 32:3-5) l

परमेश्वर के लिए सत्यता मायने रखती है l वह चाहता है कि हम उसके सामने अपने पापों को स्वीकार करें और उन लोगों के लिए क्षमा भी मांगे जिनके साथ हमने अन्याय किया है l दाऊद घोषणा करता है, “तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया [है]” (पद.5) l परमेश्वर की क्षमा की स्वतंत्रता को जानना कितना अच्छा है! जेम्स बैंक्स

 

हमारा झंडा मायने रखता है

पिंगली वेंकैया को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के मूल डिजाइनर के रूप में श्रेय दिया जाता है। एक दूरदर्शी, जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करने से बहुत पहले एक स्वतंत्र देश के रूप में देखा और एक ऐसे ध्वज को देखने का सपना देखा जो भारत की विविधता का प्रतिनिधित्व करता हो। उन्होंने ए नेशनल फ्लैग फॉर इंडिया नामक एक पुस्तक प्रकाशित की जिसमें उन्होंने विचार के लिए 24 डिज़ाइन पेश किए। इसके बाद वे विजयवाड़ा में महात्मा गांधी से मिले और स्वतंत्रता के क्षितिज पर आने से पहले ही राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यकता पर जोर दिया। उनकी दृढ़ता के कारण, 1947 में भारत की स्वतंत्रता से बहुत पहले, गांधीजी द्वारा सुझाए गए कुछ संशोधनों के साथ ध्वज को अंतिम रूप दिया गया।

यीशु एक अन्य व्यक्ति की दृढ़ता की बात करते हैं: एक विधवा। लूका 18:1-8 के दृष्टांत में, एक विधवा के हठ ने एक अन्यायी न्यायाधीश को राजी कर लिया, जिसका उसके प्रति न्याय करने का कोई झुकाव नहीं था (पद.5)। इस दृष्टांत में विधवा यीशु के शिष्यों का प्रतिनिधित्व करती है जिनके बारे में यीशु जानते थे कि उन्हें जल्द ही बहुत सताव सहना पड़ेगा (पद.1)। मसीह ने उन्हें बिना आशा छोड़े, ऐसी विपत्ति का सामना करते हुए लगातार प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित किया, जैसा कि विधवा ने न्यायाधीश से किया था (पद.6)। क्योंकि जहाँ उत्साही और निरंतर प्रार्थना और दृढ़ कार्रवाई होती है, वहाँ परमेश्वर की विश्वासयोग्यता न्याय सुनिश्चित करेगी (पद.8)।

हमारे संसार में सताव और अन्याय बहुत है। हिंसा, घृणा और भ्रष्टाचार के बीच, हमें प्रार्थना में बने रहने के लिए कहा गया है। क्योंकि जब हम बने रहते हैं, तो हमारा स्वर्गीय न्यायाधीश हमें न्याय देने का वादा करता है। जैसा कि यीशु ने हमें सिखाया, आइए प्रार्थना करें, “तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो” (मत्ती 7:10)। जब वह वापस आए तो हम प्रार्थना में विश्वासयोग्य पाए जाएँ (लूका 18:8)। —रेबेका विजयन

 

जेल की सलाखों के पीछे

एक प्रसिद्ध खिलाड़ी/athlete ने ऐसे मंच पर कदम रखा जो कोई खेल स्टेडियम नहीं था l उसने जेल सुविधा में तीन सौ कैदियों से बात की और उनसे यशायाह के शब्दों को साझा किया l

हालाँकि, यह पल किसी प्रसिद्ध खिलाड़ी के प्रदर्शन के बारे में नहीं था, बल्कि टूटी हुयी और आहत आत्माओं के बारे में था l इस विशेष समय में, परमेश्वर सलाखों के पीछे दिखायी हुए l एक पर्यवेक्षक ने ट्वीट किया कि “छोटे चर्च स्तुति और आराधना का माहौल अचानक जोश और उमंग से भर गया I l” पुरुष एक साथ रो रहे थे और प्रार्थना कर रहे थे l अंत में, लगभग सत्ताईस कैदियों ने मसीह को अपना जीवन दिया l

एक तरह से, हम सभी अपनी ही बनायी जेलों में हैं, अपने लालच, स्वार्थ और लत की सलाखों के पीछे फंसे हुए हैं l लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, परमेश्वर प्रकट होता है l उस सुबह जेल में मुख्य पद था, “देखो, मैं एक नयी बात करता हूँ; वह अभी प्रगट होगी, क्या तुम उससे अनजान रहोगे?” (यशायाह 43:19) l यह अनुच्छेद हमें “बीती हुयी घटनाओं का स्मरण [नहीं करने] के लिए प्रोत्साहित करता है (पद.18) क्योंकि परमेश्वर कहता है, “मैं वही हूँ जो . . . तेरे पापों को स्मरण न करूँगा” (पद.25) l

फिर भी परमेश्वर यह स्पष्ट करता है: “मैं ही यहोवा हूँ और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नहीं” (पद.11) l केवल मसीह को अपने जीवन देकर ही हम स्वतंत्र हुए हैं l हममें से कुछ को ऐसा करने की जरूरत है; हममें से कुछ लोगों ने ऐसा किया भी है, लेकिन हमें यह याद दिलाने की जरुरत है कि वास्तव में हमारे जीवन का परमेश्वर कौन है l हमें निश्चय दिया गया है कि, मसीह के द्वारा, परमेश्वर वास्तव में “एक नया काम” करेगा l तो आइये देखें क्या होता है! केनेथ पीटरसन

 

वागत की चटाई

अपने स्थानीय सुपरमार्केट में प्रदर्शित चटाई/doormat को देखते हुए, मैंने उनकी सतहों पर अंकित संदेशों को देखा l “हेलो होम” जिसमें "O" की जगह दिल बना था l और जो अधिक प्रचलित और परंपरागत था, मैंने उसे चुना, “स्वागत है l” इसे घर में रखकर मैंने अपने हृदय की जांच की l क्या मेरा घर वास्तव में उस तरह का स्वागत कर रहा था जैसा परमेश्वर चाहता है? संकट या पारिवारिक अशांति में फंसे बच्चे का? ज़रूरतमंद पड़ोसी या शहर के बाहर से परिवार का कोई सदस्य जिसने अचानक ही फोन कर दिया?

मरकुस 9 में, यीशु रूपांतरण के पर्वत से आगे बढ़ता है जहां पतरस, याकूब और यूहन्ना उसकी पवित्र उपस्थिति में विस्मय में खड़े थे (पद.1-13), एक पिता के साथ एक दुष्टात्माग्रस्त लड़के को ठीक करने के लिए जो आशा खो चुका था (पद.14-29) l असहज या अप्रिय (पद.30-32) l वे उसकी बात से बुरी तरह चूक गए (पद.33-34) l जबाब में, यीशु ने एक बच्चे को अपने गोद में उठाया और कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता, वह मुझे नहीं, वरन् मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है” (पद.37) l यहाँ स्वागत शब्द का अर्थ अतिथि के रूप में स्वागत करना और स्वीकार करना है l यीशु चाहते हैं कि उनके शिष्य सभी का स्वागत करें, यहाँ तक कि कम महत्व वाले और असहज या अप्रिय लोगों का भी, मानो हम उनका स्वागत कर रहे हों l

मैंने अपने स्वागत चटाई/mat के बारे में सोचा और विचारा कि मैं दूसरों तक उसका प्रेम कैसे बढ़ाती हूँ l इसका आरम्भ यीशु को एक बहुमूल्य अतिथि के रूप में स्वागत करने से होता है l क्या मैं उन्हें अपना नेतृत्व करने की अनुमति दूंगी, दूसरों का उस तरह से स्वागत करते हुए जिस तरह वह चाहते है? एलिसा मॉर्गन

 

हीरे का पेपर वेट

“जेकब डायमंड” को दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा हीरा माना जाता है। यह एक रंगहीन हीरा है, जिसके विषय ऐसा कहा जाता है कि यह रत्न कई सालों तक खो गया था और भुला दिया गया था जब तक कि हैदराबाद के आखिरी निज़ाम को यह अपने दिवंगत पिता के जूते में नहीं मिला। अजीब बात यह है कि निज़ाम ने इस दुर्लभ खजाने को कई सालों तक एक पेपर वेट के रूप में इस्तेमाल किया जब तक कि इसे भारतीय रिजर्व बैंक ने 108 करोड़ रूपए की अद्भुत् कीमत पर संरक्षित कर लिया। उनके पिता ने अपने जूते में छोड़े गए हीरे से निज़ाम का जीवन समृद्ध कर दिया l

प्रेरित पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया का ध्यान यीशु की ओर आकर्षित करता है: सबसे मूल्यवान खजाना उन्हें हमारे परमेश्वर, पिता द्वारा दिया गया था (पद.4)। पौलुस लिखता है कि कुरिन्थियों को यीशु के साथ उसकी आत्मा के द्वारा जो संगति मिली थी, उसके कारण वे “समृद्ध” हुए हैं (पद.5-9)। वह उन्हें इस अमूल्य उपहार को महत्व देने का आग्रह करता है, जो कि मसीह है। वह उन्हें यह भी याद दिलाता है कि जब उनके पास मसीह होता है, तो उन्हें किसी चीज़ की कमी नहीं होती। इसके अलावा, पौलुस कलीसिया से आग्रह करता है कि वे उन अनेक “आध्यात्मिक वरदानों” पर विचार करें जो परमेश्वर ने उन्हें दिए हैं (पद.5-7)। उसका मानना है कि जब कलीसिया इस खजाने की रक्षा करती है, जो कि मसीह है, तो यह उन्हें उसके लौटने के दिन तक निर्दोष बने रहने में मदद करेगा।

जब हम जीवन से असंतुष्ट महसूस करते हैं, खासकर जब हम अपनी कमी के बारे में कुड़कुड़ाते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि हम आंतरिक रूप से समृद्ध हैं क्योंकि हमारे पास यीशु है। हानि, वित्तीय उथल-पुथल, घरेलू संकट या किसी अन्य अशांति के दौरान, हमें याद रखना चाहिए कि हम भी अपने पिता द्वारा हर तरह से वास्तव में “समृद्ध” हैं। उसने पवित्र आत्मा की स्थायी उपस्थिति के द्वारा मसीह के खजाने को हमारे अंदर निवेश किया है (2 कुरिन्थियों 1:22)। —रेबेका विजयन

 

परमेश्वर से चिपके रहना

जब जोनी एरिक्सन टाडा रीका के बारे में बात करती है, तो वह अपनी सहेली का की “समय की कसौटी पर खरा उतरा,परमेश्वर में गहरा और अटूट विश्वास” और एक दुर्बल पुरानी स्थिति के साथ रहते हुए उसके द्वारा विकसित किए गए धैर्य पर प्रकाश डालती है l रीका पिछले पंद्रह वर्षों से भी अधिक समय से बिस्तर पर पड़ी है और अपने कमरे की छोटी सी खिड़की से चाँद को देखने में भी असमर्थ है l लेकिन उसने उम्मीद नहीं खोई है; वह परमेश्वर पर भरोसा करती है, बाइबल पढ़ती है और उसका अध्ययन करती है, और जैसा कि जोनी इसका वर्णन करती है, वह “जानती है कि निराशा के विरुद्ध भयंकर लड़ाई के दौरान कैसे दृढ रहना है l”

जोनी ने रीका की दृढ़ता की तुलना एलीआज़र से की, जो राजा दाऊद के समय का एक सैनिक था, जिसने पलिश्तियों से भागने से इनकार कर दिया था l भागने वाले सैनिकों में शामिल होने के बजाय, एलीआज़र अपनी बात पर अड़ा रहा “जब तक उसका(एलीआज़र) [का] हाथ थक न गया, और तलवार हाथ से चिपट न गयी” (2 शमूएल 23:10) l परमेश्वर की सामर्थ के द्वारा, “यहोवा ने बड़ी विजय कराई(प्राप्त की)” (पद.10) l जैसा कि जोनी ने देखा, जैसे एलीआज़र ने दृढ संकल्प के साथ तलवार को पकड़ लिया, वैसे ही रीका भी “आत्मा की तलवार, जो परमेश्वर का वचन है” से चिपक गयी (इफिसियों 6:17) l और वहाँ, परमेश्वर में वह अपनी शक्ति पाती है l

चाहे चमकता हुआ अच्छा स्वास्थ्य हो या पुरानी स्थिति में निराशा से जूझना हो, हम भी अपनी आशा के भण्डार को गहरा करने और हम सहन करने में मदद करने के लिए परमेश्वर की ओर देख सकते हैं l मसीह में हम अपनी शक्ति पाते हैं l एमी बाउचर पाय

 

व्यवहार में प्रेम

अकेली माँ पांच वर्ष से अधिक समय तक वृद्ध सज्जन के पड़ोस में रहती थी l एक दिन, उनका कुशल क्षेम जानने के लिए, उन्होंने उनके दरवाजे की घंटी बजाई l उन्होंने कहा, “मैंने आपको लगभग एक सप्ताह से नहीं देखा है l मैं बस यह जानने का प्रयास कर रही थी कि आप ठीक हैं या नहीं l” अपने पड़ोसी की खरियत/हालचाल जानने से उन्हें भी प्रोत्साहन और तसल्ली मिली l कम उम्र में अपने पिता को खोने के बाद, वह उस दयालु व्यक्ति की सराहना करती थी जो उनका और उनके परिवार का ख्याल रखता था l

जब मुफ्त में देने और पाने में अनमो दयालुता का उपहार सिर्फ अच्छा होने से आगे बढ़ जाता है, तो हम दूसरों के साथ मसीह का प्यार साझा करके उनकी सेवा कर रहे होते हैं l इब्रानियों के लेखक ने कहा कि यीशु में विश्वास करने वालों “स्तुति रूपी बलिदान , अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर को सर्वदा चढ़ाया करें” (इब्रानियों 13:15) l फिर, लेखक ने उन्हें अपने विश्वास को जीने की आज्ञा देते हुए कहा, “भलाई करना और उदारता दिखाना न भूलो, क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है” (पद.16) l

यीशु के नाम का दावा करके यीशु की उपासना करना एक ख़ुशी और विशेषाधिकार है l लेकिन जब हम यीशु की तरह प्रेम करते हैं तो हम परमेश्वर की तरह सच्चा प्रेम व्यक्त करते हैं l हम पवित्र आत्मा से हमें अवसरों के बारे में जागरूक करने और हमें अपने परिवार के भीतर और बाहर दूसरों से अच्छे से प्यार करने के लिए सशक्त बनाने के लिए कह सकते हैं l उन सेवकाई के क्षणों के द्वारा, हम क्रिया/व्यवहार में प्रेम के शक्तिशाली सन्देश के द्वारा यीशु को साझा कर सकेंगे l सोची डिक्सन

 

 

तारों को एकटक देखना

जब मैं निराश या हताश होती हूँ, तो मैं अपने घर की छत पर जाना पसंद करती हूँ। वहाँ, मैं खुलकर प्रार्थना कर सकती हूँ और अपने आँसू बहा सकती हूँ। लेकिन, वहाँ खड़े होकर, ठंडी रात की हवा से घिरी हुयी, मैं अक्सर ऊपर देखती हूँ और हरे, नीले, लाल और पीले रंग की टिमटिमाती रोशनी को आश्चर्य और प्रशंसा से निहारती हूँ। वे मुझे मेरे मन की उथल-पुथल को भुला देते हैं। एक साफ रात के आसमान की खूबसूरती मेरा ध्यान मेरी समस्याओं से हटाकर हमारे सृष्टिकर् की महानता पर केंद्रित कर देती है।

जब अय्यूब अपने कष्टों का कारण समझने में असमर्थ था, तो उसने प्रार्थना की कि परमेश्वर उससे बात करे (अय्यूब 13:20-22)। परमेश्वर ने अय्यूब को आलंकारिक प्रश्नों की एक श्रृंखला का उत्तर देने के लिए चुनौती देकर उत्तर दिया (38:3)। अय्यूब ‘क्या तुम जानते हो . . . ?’ वह प्रश्नों से चकित था जो परमेश्वर ने उसके ऊपर मंडराने हुए रखे थे। उन्हें पूछकर, परमेश्वर ने अय्यूब का ध्यान उसकी समस्याओं से हटाकर ब्रह्माण् के शानदार विवरणों पर केंद्रित कर दिया (अय्यूब 38-41)। परमेश्वर की सामर्थ्य और बुद्धि से अभिभूत, अय्यूब जीवन के एक नए दृष्टिकोण पर पहुँच गया। उसने अपनी अयोग्यता और कमज़ोरी पर विचार किया (40:4), और उसने पश्चाताप किया क्योंकि उसे एहसास हुआ कि परमेश्वर के तरीके और उसकी बुद्धि उसकी समझ से बहुत परे थे (42:5-6)।

जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होती हैं, तो हमारे मन में सवाल और संदेह पैदा होते हैं। अय्यूब की तरह, हम उन्हें परमेश्वर के पास ले जा सकते हैं और उसके साथ ईमानदार रहकर उसे बता सकते हैं कि हम कैसा महसूस करते हैं। हो सकता है कि हम अपने जीवन में परमेश्वर की अलौकिक आवाज़ को गरजते हुए न सुन पाएँ। लेकिन जब हम हवा में उड़ते पक्षियों, पीछे के आँगन में पेड़ों को अपनी शाखाएँ लहराते हुए या रात के आसमान में टिमटिमाते तारों की ओर देखते हैं, तो हम निश्चित रूप से जानते हैं कि जो परमेश्वर इन सबकी देखभाल करता है, वह हमारे जीवन को भी नियंत्रित करता है (मत्ती 6:26-27)। कैरल मैकवॉन