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यष्टि-चित्र(stick-figure) से सीख

मेरी एक सहेली – ठीक है, वह मेरी परामशदाता थी – ने एक कागज़ पर यष्टि चित्र(stick-figure) बनाया l उसने उसे निजी “व्यक्तित्व” संबोधित किया l उसके बाद उसने उस चित्र के चारोंओर रेखा खिंची, करीब आधा इंच बड़ा, और उसे “सार्वजनिक” व्यक्तित्व संबोधित किया l इन दोनों चित्रों में अंतर, निजी व्यक्तित्व और सार्वजनिक व्यक्तित्व, उस सीमा को दर्शाता है जिसमें हमारे पास ईमानदारी है l

मैं उनके पाठ पर विचार करके आश्चर्यचकित हुयी, क्या मैं सार्वजनिक रूप से वह व्यक्ति हूँ जो मैं व्यक्तिगत तौर से हूँ? क्या मैं ईमानदार हूँ?

पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को पत्र लिखा, यीशु के समान बनने के लिए अपनी शिक्षा में प्रेम और अनुशासन को मिला दिया l जब वह इस पत्री(2 कुरिन्थियों) के अंत में पहुँचा, उसने दोष लगानेवालों को जिन्होनें उसकी सत्यता को चुनौती दी थी यह कहते हुए संबोधित किया कि वह अपने पत्रियों में दृढ़ था परन्तु व्यक्तित्व में निर्बल (10:10) l इन आलोचकों ने अपने श्रोताओं से धन प्राप्त करने के लिए व्यवसायिक भाषणबाज़ी का उपयोग किया l जबकि पौलुस के पास शैक्षणिक कौशल था, वह निष्कपटता और सादगी से बोलता था l “मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभानेवाली वातें नहीं,” उसने पहले की एक पत्री में लिखा था, “परन्तु [उसमें] आत्मा और सामर्थ्य का प्रमाण था” (1 कुरिन्थियों 2:4) l बाद की उसकी पत्री ने उसकी ईमानदारी को उजागर किया : “जो ऐसा कहता है, वह यह समझ रखे कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे सामने हमारे काम भी होंगे” (2 कुरिन्थियों 10:11) l

पौलुस ने अपने को सार्वजनिक रूप में और व्यक्तिगत रूप में एक सा दर्शाया l हमारे विषय क्या है?

हमें जाननेवाला उद्धारकर्ता

मेरे बेटे ने पीछे की सीट से पूछा, “पापा, क्या समय है?” “अभी 5.30 बजा है” मैं जानता था वह आगे क्या कहेगा l “नहीं, अभी 5.28 बजा है!” मैंने उसके चेहरे पर चमक देखी l ठीक है! उसकी चमकती मुस्कराहट बोल पड़ी l मैं भी आनंदित हुआ – ऐसा आनंद जो एक माता-पिता को अपने बच्चे को जानने से मिलती है l

किसी सचेत माता-पिता की तरह, मैं अपने बच्चों को जानता हूँ l मुझे मालूम है कि मेरे उनको जगाने पर वे किस प्रकार उत्तर देंगे l मैं जानता हूँ उनको दोपहर के भोजन में क्या चाहिए l मैं उनके अनगणित रुचियों, इच्छाओं, और पसंद को जानता हूँ l

परन्तु उन सबके लिए, मैं उनको पूर्ण रूप से नहीं जान पाउँगा, अन्दर से बाहर, जिस तरह प्रभु हमें जानता है l

हम यूहन्ना 1 में घनिष्ट ज्ञान के प्रकार की झलक पाते हैं जो यीशु का अपने लोगों के लिए है l जैसे नतनएल, जिसे फिलिप्पुस ने यीशु से मुलाकात करने के लिए आग्रह किया था, यीशु की ओर गया l यीशु ने स्पष्ट किया, “देखो यह सचमुच इस्राएली है : इसमें कपट नहीं है” (पद.47) l आश्चर्यचकित होकर नतनएल ने उत्तर दिया, “ तू मुझे कैसे जानता है?” कुछ सहस्यमय तरीके से, यीशु ने उत्तर दिया कि उसने उसे अंजीर के पेड़ तले देखा था (पद.48) l

शायद हम नहीं जान पाएंगे क्यों यीशु ने इस ख़ास वर्णन को साझा किया, परन्तु ऐसा महसूस होता है नतनएल ने किया! अभिभूत होकर, उसने उत्तर दिया, “हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है” (पद.49) l

यीशु हम में से हर एक को इसी प्रकार जानता है : बहुत निकट से, पूर्ण रूप से, और सिद्धता से – जैसे हम चाहते है कि हम जाने जाएँ l और वे हमें सम्पूर्ण रूप से स्वीकार करता है – केवल हमें अपने अनुगामियों के रूप में नहीं, परन्तु अपने अतिप्रिय मित्रों की तरह (यूहन्ना 15:15) l

चोट पहुँचाने वाले शब्द

“खाल और हड्डी, खाल और हड्डी,” उस लड़के ने उपहास किया l “छड़ी,” एक अन्य ने उसके साथ स्वर मिलाया l जवाब में मैं भी बोल सकती थी “छड़ी और पत्थर से मेरी हड्डी टूट सकती है, किन्तु शब्दों से मुझे चोट कभी नहीं लगेगी l” परन्तु छोटी लड़की होते हुए भी, मैं जानती थी कि लोकप्रिय कविता सच नहीं थी l कठोर, विचारहीन शब्दों से चोट ज़रूर लगी – कभी-कभी बहुत अधिक, ये ऐसे घाव छोड़ गए जो बहुत गहरे थे और पत्थर या छड़ी की चोट से कहीं अधिक समय तक रहनेवाले घाव l

हन्ना विचारहीन शब्दों के डंक को ज़रूर जानती थी l उसका पति, एल्काना, उसे प्यार करता था परन्तु वह संतानहीन थी, जबकि उसकी दूसरी पत्नी, पनिन्ना, के पास अनेक बच्चे थे l  एक ऐसी संस्कृति में जहाँ स्त्री का महत्त्व संतान होने पर आधारित था, पनिन्ना संतानहीन हन्ना को अत्यंत चिढ़ाकर” उसकी पीड़ा को और कष्टप्रद बना देती थी l वह उसे कुढ़ाती रही जबतक कि हन्ना रो नहीं दी और भोजन न कर सकी (1 शमूएल 1:6-7) l

और एल्काना शायद अच्छा ही सोचता था, परन्तु उसका विचारहीन उत्तर, “हे हन्ना, तू क्यों रोटी है? . . . क्या तेरे लिए मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूँ” (पद.8) फिर भी कष्टदायक था l

हन्ना के समान, हममें से अनेक कष्टकर शब्दों का परिणाम सहते रहते हैं l और हममें से कुछ एक अपने ही शब्दों द्वारा घोर प्रहार करके और दूसरों को चोट पहुंचाकर कदाचित अपने ही घावों के प्रति प्रतिकार किये हैं l परन्तु हम सब सामर्थ्य और चंगाई के लिए अपने प्रेमी और दयालु परमेश्वर की पास जा सकते हैं (भजन 27:5, 12-14) l वह प्रेम और अनुग्रहकारी शब्द बोलकर प्यार सहित हमारे लिए आनंदित होता है l

स्पष्ट संवाद

एशिया में यात्रा करते वक्त, मेरा आई पैड/ipad (जिसमें मेरी पठन सामग्री और कई कार्य के दस्तावेज़ थे) अचानक काम करना बंद कर दिया, एक स्थिति जिसे “मृत्यु का काला स्क्रीन/the black screen of death” कहा जाता है l सहायता चाहते हुए, मुझे एक कंप्यूटर की दूकान मिली और मुझे एक और समस्या का सामना करना पड़ा – मुझे चीनी भाषा नहीं आती थी और दूकान का तकनीशियन अंग्रेजी भाषा नहीं बोलता था l समाधान? उसने एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम खोलकर चीनी भाषा में टाइप किया, किन्तु मैं उसे अंग्रेजी में पढ़ सकता था l प्रक्रिया विपरीत हो गयी जब मैंने अंग्रेजी में उत्तर दिया और उसने चीनी भाषा में पढ़ लिया l इस सॉफ्टवेयर ने हमें स्पष्ट संवाद करने की अनुमति दी, दूसरी भाषाओं में भी l

कभी-कभी, मैं अपने स्वर्गिक पिता से प्रार्थना करते समय उससे संवाद करने और स्पष्ट रूप से अपने दिल की बात बताने में खुद को अयोग्य महसूस करता हूँ – और मैं अकेला नहीं हूँ l हममें से अनेक प्रार्थना के साथ संघर्ष करते हैं l परन्तु प्रेरित पौलुस ने लिखा, “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है : क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर, जो ब्यान से बाहर हैं, हमारे लिए विनती करता है; और मनों का जांचनेवाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है? क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुसार विनती करता है l रोमियों 8:26-27

पवित्र आत्मा का दान कितना अद्भुत है! किसी भी कंप्यूटर कार्यक्रम से बेहतर l वह पिता के उद्देश्यों के सामंजस्य के साथ मेरे विचारों और इच्छाओं को संप्रेषित करता है l पवित्र आत्मा का कार्य प्रार्थना के कार्य को संभव बनाता है!

सिर्फ एक यायावर(gypsy) लड़का

“ओ, यह तो सिर्फ एक यायावर(gypsy) लड़का है,” किसी ने असंतोष से फुसफुसाया जब 1877 में एक आराधना के दौरान रॉडनी स्मिथ मसीह को स्वीकार करने के लिए चर्च के सामने आया l किसी ने असाक्षर यायावर माता-पिता के इस किशोर पुत्र के विषय अधिक कुछ नहीं सोचा था l फिर भी, रॉडनी ने इन आवाजों की ओर ध्यान नहीं दिया l वह निश्चित था कि उसके जीवन के लिए परमेश्वर के पास एक योजना थी इसलिए उसने अपने लिए एक बाइबल और एक इंग्लिश शब्दकोष खरीद लिया और खुद को पढ़ना लिखना सिखाया l एक बार उसने कहा, “यीशु के पास जाने का मार्ग कैंब्रिज, हार्वर्ड, येल, या दूसरे कवियों के द्वारा नहीं है l वह . . . एक पुरानी शैली की पहाड़ी है जिसे कलवरी कहते हैं l” सभी असमानताओं के विरुद्ध रॉडनी एक प्रचारक बना जिसे परमेश्वर ने इंगलैंड(UK) और अमरीका(US) में अनेक लोगों को यीशु के पास लाने में उपयोग किया l

पतरस भी सिर्फ एक साधारण व्यक्ति था – धार्मिक रब्बियों के विद्यालयों(सम्प्रदाय) में प्रशिक्षित नहीं था (प्रेरितों 4:13), गलील का मात्र एक मछुआ – जब यीशु ने चार शब्दों के द्वारा उसे बुलाया : “मेरे पीछे चले आओ” (मत्ती 4:19) l फिर भी वही पतरस, जिसने जीवन में अपने परवरिश और पराजयों के अनुभव के बावजूद, बाद में दावे से कहा कि यीशु का अनुसरण करनेवाले “एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा [हैं]” (1 पतरस 2:9) l

यीशु के द्वारा सभी लोग – चाहे कैसी भी उनकी शिक्षा, परवरिश, लिंग, या नस्ल/जाति हो – परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बन सकते हैं और उसके द्वारा उपयोग हो सकते हैं l परमेश्वर की “निज प्रजा” बनना उन सब के लिए है जो यीशु में विश्वास करते हैं l

पर्दा/आवरण हटाना

एक क्रूर कार एक्सीडेंट ने मैरी ऐन फ्रैंको को तबाह कर दिया l यद्यपि वह बच गयी, चोट ने पूरी तौर से उसकी दृष्टि छीन ली l “फ्रैंको ने समझाया, “मैं केवल अंधकार को देख सकती थी l” इक्कीस वर्ष बाद, गिरने के कारण उसकी पीठ को चोट पहुंची l सर्जरी से होश आने पर (जिसका उसके आँखों से कोई लेना-देना नहीं था), आश्चर्यजनक रूप से, उसकी दृष्टि लौट आई! दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, फ्रैंको ने अपनी बेटी का चेहरा देखा l न्यूरोसर्जन ने दृढ़ता से कहा कि उसकी दृष्टि के लौटने के लिए कोई वैगानिक स्पष्टीकरण नहीं है l वह अंधकार जो अंतिम दिखाई देता था ने खूबसूरती और ज्योति को रास्ता दिया l

बाइबल, के साथ हमारा अनुभव भी, हमें बताते हैं कि अज्ञानता और बुराई का पर्दा संसार को ढांके हुए है, हम सब को परमेश्वर के प्रेम के प्रति अँधा कर दिया है (यशायाह 25:7) l स्वार्थ और लालच, हमारी आत्मनिर्भरता, शक्ति या पद के लिए हमारी लालसा – ये सब विवशताओं ने हमारी दृष्टि को धुंधली कर दी है, जिससे हम उस परमेश्वर को स्पष्ट से देखने में असमर्थ है जिसने “आश्चर्यकर्म किये हैं” (पद.1) l

बाइबल का एक अनुवाद दृष्टिहीन करनेवाले इस परदे को “निराशा का पर्दा” कहता है(NLT l हम अपने आप में, केवल अन्धकार, भ्रम, और निराशा का अनुभव करते हैं l हम अक्सर खुद को फंसे हुए – अँधेरे में टटोलते और गिरते हुए पाते हैं, अपने आगे के मार्ग को देखने में असमर्थ हैं l धन्यवाद हो, यशायाह प्रतिज्ञा देता है कि “जो पर्दा सब देशों के लोगों पर पड़ा है, उसे” परमेश्वर आख़िरकार “नष्ट करेगा” (पद.7) l

परमेश्वर हमें आशाहीन नहीं छोड़ेगा l उसका दीप्तिमान प्रेम हमें दृष्टिहीन करनेवाली सब बैटन को हटाता है, हमें अच्छे जीवन और बहुतायत के अनुग्रह की खुबसूरत दृष्टि से चकित करता है l

सभी लोगों का परमेश्वर

फॉर्मर न्यूज़बॉयज(Former Newsboys) का अग्रणी गायक पीटर फर्लेर बैंड की स्तुति गीत “वह राज्य करता है”(He Reigns) के प्रदर्शन का वर्णन करता है l यह गीत हर एक जनजाति और राष्ट्र के विश्वासियों का एक साथ परमेश्वर की आराधना करने का सजीव वर्णन करता है l फर्लेर ने देखा कि जब भी न्यूज़बॉयज(Former Newsboys) ने इस गीत को गाया उसने विश्वासियों के समूह में पवित्र आत्मा को मंडराते हुए महसूस किया l

 “वह राज्य करता है”(He Reigns) गीत के अनुभव के साथ फर्लेर का वर्णन संभवतः उस भीड़ के साथ गूंज जाता जो पिन्तेकुस्त के दिन यरूशलेम में इकठ्ठा हुयी थी l जब चेले पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए (प्रेरितों 2:4), किसी के भी अनुभव के परे बातें होने लगीं l परिणामस्वरूप, प्रत्येक राष्ट्र से प्रतिनिधि यहूदी व्याकुलता/भ्रम में इकट्ठे हुए, क्योंकि हर एक अपनी ही भाषा में परमेश्वर की अद्भुत बातों को विदित होते हुए सुना (पद.5-6, 11) l पतरस ने भीड़ को समझाया कि यह पुराने नियम की नबूवत का पूरा होना था जिसमें परमेश्वर ने कहा था, “मैं [सभी लोगों पर] अपने आत्मा को उंडेलूँगा” (पद.17) l

परमेश्वर की अद्भुत सामर्थ्य का यह प्रदर्शन पतरस के सुसमाचार की घोषणा के प्रति भीड़ को सर्वग्राही बना दिया, परिणामस्वरूप एक ही दिन में तीन हज़ार लोग विश्वासी हो गए (पद.41) l इस असाधारण प्रारंभ के बाद, ये नए विश्वासी अपने साथ सुसमाचार को लेकर, संसार के अपने देश/प्रान्त को लौट गए l

सुसमाचार आज भी गूंज रहा है – सभी लोगों के लिए परमेश्वर की आशा का सन्देश l जब हम मिलकर परमेश्वर की स्तुति करते हैं, उसका आत्मा हमारे बीच मंडराता है, सभी देशों के लोगों को एक अद्भुत एकता में एक करता है l वह राज्य करता है! (He reigns!)

टुकड़ों को आपस में बाँटना

साठ वर्षीय बेघर सेवानिवृत सैनिक, स्टीव, गर्म मौसम वाले स्थान पर चला गया जहां पूरे साल खुले आसमान के नीचे सोना(विश्राम करना) बर्दास्त करने लायक था l एक शाम के समय, जब वह हाथ की बनाई हुई अपनी कला को प्रदर्शित कर रहा था – अपने प्रयास से कुछ पैसे कमाने के लिए – एक युवा स्त्री ने आगे आकर उसे पिज़्ज़ा के कुछ टुकड़े ऑफर किये l स्टीव ने धन्यवाद के साथ उसे स्वीकार कर लिया l कुछ क्षण बाद, स्टीव ने अपनी उदारता एक दूसरे भूखे, बेघर व्यक्ति के साथ साझा किया l लगभग तुरंत ही, उसी युवा स्त्री ने भोजन का एक और थाली लेकर आई, यह मानते हुए कि वह जो उसे मिला था के साथ बहुत ही उदार था l 

स्टीव की कहानी नीतिवचन 11:25 के सिद्धांत का वर्णन करती है कि जब हम दूसरों के साथ उदार हैं, हम भी कदाचित उदारता का अनुभव करेंगे l लेकिन हम वापस पाने की आशा से न दें; कभीकभार ही हमारी उदारता हमारे पास लौटती है और स्पष्तः जिस प्रकार उसके साथ हुआ l इसके बदले, हम परमेश्वर के निर्देश के प्रेममय प्रतिउत्तर में देकर दूसरों की मदद करते हैं (फिलिप्पियों 2:3-4; 1 यूहन्ना 3:17) l और जब हम ऐसा करते हैं, परमेश्वर प्रसन्न होता है l यद्यपि वह हमारी झोली या पेट को भरने के लिए बाध्य नहीं है, वह अक्सर हमें तरोताज़ा करने के लिए तरीके ढूढ़ता है – कभी-कभी भौतिक रूप से, और दूसरे समयों में आत्मिक रूप से l

स्टीव ने पिज़्ज़ा की अपनी दूसरी थाली भी मुस्कराहट और खुले हाथों के साथ साझा किया l अपने संसाधन की कमी के बावजूद, वह उदारतापूर्वक जीने का क्या अर्थ है का एक नमूना है, अपने लिए संग्रह करके रखने के विपरीत जो हमारे पास है उसे आनंद के साथ साझा करने की इच्छा l जैसे परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है और सामर्थ्य देता है, वैसा ही हमारे विषय भी कहा जाए l

ऐबी की प्रार्थना

जब ऐबी हाई स्कूल की छात्रा थी, उसने और उसकी माँ ने एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में बुरी तरह घायल एक व्यक्ति की कहानी सुनी – एक ऐसी दुर्घटना जिसमें उसके पिता और सौतेली माँ की मृत्यु हो गयी थी l यद्यपि वे इस व्यक्ति को नहीं जानते थे, ऐबी की माँ ने कहा, “हमें केवल इस व्यक्ति और इसके परिवार के लिए प्रार्थना करना होगा l और उन्होंने किया l

जल्द ही कुछ वर्ष बीत गए, और एक दिन ऐबी अपने विश्विद्यालय में एक कक्षा में प्रवेश की l एक विद्यार्थी ने उसे बैठने के लिए अपने करीब एक सीट दी l वह विद्यार्थी ऑस्टिन हैच था, हवाई दुर्घटना का शिकार जिसके लिए ऐबी ने प्रार्थना की थी l जल्द ही वे एक दूसरे के साथ मिलने लगे, और 2018 में उनका विवाह हो गया l

ऐबी ने अपने विवाह के तुरंत बाद एक साक्षात्कार में कहा, “यह सोचना पागलपन है कि मैं अपने भावी पति के लिए प्रार्थना कर रही थी l” दूसरों के लिए प्रार्थना करने का समय न निकालकर, अपने व्यक्तिगत ज़रूरतों और अपने निकट के लोगों के लिए अपनी प्रार्थनाओं को सीमित करना सरल है l हालाँकि, पौलुस इफिसुस के मसीहियों को लिखते हुए उनसे कहा कि “हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना और विनती करते रहो, और इसी लिए जागते रहो कि सब पवित्र लोगों के लिए लगातार विनती किया करो” (इफिसियों 6:18) l और 1 तीमुथियुस 2:1 हमसे अधिकारियों के साथ-साथ “सब मनुष्यों” के लिए प्रार्थना करने को कहता है l

आइये हम दूसरों के लिए प्रार्थना करें – उनके लिए भी जिनको हम जानते नहीं हैं l यह “एक दूसरे का भार”(गलातियों 6:2) उठाने का एक तरीका है l