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कठिन लोग

लूसी वोर्स्ले एक ब्रिटिश इतिहासकार और टीवी प्रस्तुतकर्ता हैं l जनता की नज़र में ज्यादातर लोगों की तरह, वह कभी-कभी एक बुरा मेल प्राप्त करती है─उसके मामले में, एक हलकी भाषण शक्ति बाधा पर, जिसमें उसके r,  w की तरह सुनाई देते हैं l एक व्यक्ति ने यह लिखा : लूसी,  मैं क्रुद्ध हो जाऊंगा : कृपया अपने मंद भाषण को सही करने या अपने आलेख से r हटाने के लिए अधिक प्रयास करें─मैं आपकी टीवी श्रृंखला में पूरे समय बैठ न सका क्योंकि इससे मुझे बहुत नाराजगी हुई l शुभकामनाएँ, डैरेन l”

कुछ लोगों के लिए,  इस तरह की असंवेदनशील टिप्पणी समान रूप से असभ्य जवाब को सक्रिय कर सकती है l लेकिन यहाँ लूसी ने इस तरह जवाब दिया : “ओह डैरेन,  मुझे लगता है कि आपने इंटरनेट के गुमनामी का इस्तेमाल कुछ कहने के लिए किया है, जो शायद आप मेरे सामने नहीं कहते l कृपया अपने निर्दयी शब्दों पर पुनर्विचार करें! लूसी l”

लूसी का नपा-तुला जवाब काम कर गया l डैरेन ने माफी मांगी और किसी को भी दोबारा ऐसा ई-मेल न भेजने का संकल्प किया l 

नीतिवचन कहता है, “कोमल उत्तर सुनने से गुस्सा ठंडा हो जाता है, परन्तु कटुवचन से क्रोध भड़क उठता है” (15:1) l जबकि क्रोधी व्यक्ति झगड़ा मचाता है, धीरजवंत व्यक्ति उसे शांत करता है (पद.18) l जब हमें किसी सहकर्मी से आलोचनात्मक टिप्पणी,  परिवार के किसी सदस्य से एक भद्दी टिप्पणी या किसी अजनबी से बुरा जवाब मिलता है,  तो हमारे पास एक विकल्प होता है : क्रोधी शब्दों को बोलने के लिए  जो आग की लपटों को भड़का दें या कोमल शब्द जो उन्हें बुझा दें l

ईश्वर हमें ऐसे शब्द बोलने में मदद करे जो क्रोध को दूर करते हैं—और शायद कठिन लोगों को बदलने में भी मदद कर सकें l

आपके लिए यीशु की प्रतिज्ञा

रोहित ऊंची आवाज़ में रोने लगा जब उसके माता-पिता ने उसे शीला के हवाले किया l यह उस बच्चे के लिए संडे स्कूल में पहली बार था जब उस अवधि में माँ और पिताजी उपासना में भाग लिये─और वह खुश नहीं था l शीला ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह ठीक हो जाएगा l उसने खिलौनों और किताबों के साथ, एक कुर्सी में उसे डुलाने, इधर उधर घूमाने, एक जगह शांत खड़े रहने, और उससे बात करते हुए कि उसे कितना मजा आएगा, उसे शांत करने की कोशिश की l लेकिन और बड़े आँसू के साथ और जोर से रोना जारी रहा l फिर उसने उसके कान में चार सरल शब्द फुसफुसाए, "मैं तुम्हारे साथ रहूँगी l” शांति और सुकून जल्दी आ गया l

यीशु ने अपने मित्रों को अपने क्रूस पर चढ़ने के सप्ताह के दौरान आराम के शब्द कहे : “पिता . . . तुम्हें एक और सहायक देगा कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे─सत्य का आत्मा” (यूहन्ना 14:16-17) l अपने पुनरुत्थान के बाद उसने उन्हें यह प्रतिज्ञा दी : “और देखो, मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूँ” (मत्ती 28:20) l यीशु जल्द ही स्वर्ग जानेवाला था,  लेकिन वह आत्मा को “रहने” के लिए और अपने लोगों के भीतर निवास के लिए भेजने वाला था l

जब हमारे आंसू बहते हैं तो हम आत्मा का दिलासा और शांति का अनुभव करते हैं l जब हम विचार करते हैं कि हम क्या करें उस समय हम उसका मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे (यूहन्ना 14:26) l वह परमेश्वर के बारे में और अधिक समझने के लिए हमारी आँखें खोलता है (इफिसियों 1:17-20),  और वह हमारी कमजोरी में मदद करता है और हमारे लिए प्रार्थना करता है (रोमियों 8: 26–27) l

वह हमेशा हमारे साथ रहता है l

भय द्वारा क्वारंटाइंड

2020 में, कोरोनोवायरस के प्रकोप ने संसार को डर से जकड़ लिया l लोगों को क्वारंटाइन किया गया, राष्ट्रों को तालेबंदी/लॉकडाउन के तहत रखा गया, उड़ानें और बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए गए l बिना किसी ज्ञात मामले वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अभी भी डर था कि उन्हें वायरस प्रभावित कर सकता है l चिंता/व्यग्रता के विशेषज्ञ ग्राहम डेवी का मानना ​​है कि नकारात्मक समाचार प्रसारण “कदाचित आपको और दुखी और अधिक चिंतित कर सकते हैं l” सोशल मीडिया पर प्रसारित एक जीवनशैली में एक व्यक्ति को टीवी पर समाचार देखते हुए दर्शाया गया, और उसने पूछा कि चिंता करना कैसे बंद करें l जवाब में,  कमरे में एक और व्यक्ति पहुँच गया और यह सुझाव देते हुए कि जवाब फोकस/केंद्र-बिंदु में बदलाव हो सकता है, टीवी के चैनल को बदल दिया!

लूका 12 हमें चिंता को रोकने में मदद करने के लिए कुछ सलाह देता है : “उसके राज्य की खोज में रहो” (पद.31) l हम परमेश्वर के राज्य की खोज करते हैं जब हम इस प्रतिज्ञा पर ध्यान केन्द्रित करते हैं कि उसके अनुयायियों के पास स्वर्ग में एक उत्तराधिकार है l जब हम कठिनाई का सामना करते हैं,  तो हम अपना ध्यान हटा सकते हैं और याद कर सकते हैं कि परमेश्वर हमें देखता है और हमारी आवश्यकताओं को जानता है (पद. 24–30) l

यीशु अपने शिष्यों को प्रोत्साहित करता है : “हे छोटे झुण्ड, मत डर, क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे” (पद.32) l परमेश्वर हमें आशीष देता है! आइए उसकी आराधना  करें,  यह जानते हुए कि वह आकाश के पक्षियों और मैदान के फूलों से अधिक हमारी देखभाल करता है (पद.22-29) l कठिन समय में भी,  हम पवित्रशास्त्र पढ़ सकते हैं, परमेश्वर की शांति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं,  और हमारे अच्छे और विश्वासयोग्य परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं l

कठोर भूमि और कोमल दया

जब जेम्स सिर्फ छह साल का था,  उसके बड़े भाई डेविड की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई l यह डेविड के चौदहवें जन्मदिन से पहले का दिन था l इसके बाद के वर्षों में,  जेम्स ने अपनी माँ, मार्गरेट को दिलासा देने की पूरी कोशिश की,  जो कभी-कभी अपने गहरे दुःख में खुद को याद दिलाती थी कि उसके बड़े बेटे को कभी बड़े होने की चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ेगा l जेम्स बैरी की फलदायक कल्पना में,  दशकों बाद वही विचार अत्यधिक प्रिय बच्चों की कहानी चरित्र के लिए प्रेरणा बन जाएगा,  जो कभी वृद्ध नहीं होगा : पीटर पैन l फुटपाथ की दरार से फूटकर निकलनेवाले फूल की तरह,  अकल्पनीय व्यथा की कठोर भूमि से भी उत्कृष्ट उभरा l

यह कितना सुकून देनेवाला विचार है कि परमेश्वर, असीम रूप से अधिक रचनात्मक तरीके से, हमारी सबसे कठिन परिस्थितियों में से अच्छा उत्पन्न करने में सक्षम है l रूत के पुराने नियम की कहानी में इसका एक सुंदर चित्रण है l नाओमी ने अपने दो बेटों को खो दिया, जिससे वह  किसी साधन या सहारा के बगैर रह गयी l उसकी विधवा बहू रूत ने नाओमी के साथ रहकर  उसकी मदद करने और उसके परमेश्वर की सेवा करने का चुनाव किया (रूत 1:16) l अंत में, परमेश्वर के प्रावधान से उसे अप्रत्याशित खुशी मिली l रूत ने दोबारा विवाह किया और उसके एक बेटा हुआ, और उन्होंने उस “लड़के का नाम ओबेद रखा l यिशै का पिता और दाऊद का दादा वही हुआ” (4:17) l उसे यीशु के पूर्वजों में भी सूचीबद्ध किया जाना था (मत्ती 1:5) l

परमेश्वर की कोमल दया हमारी थाह लेने की क्षमता से परे पहुँचती है और हमसे आश्चर्यजनक स्थानों में मुलाकात करती है l देखते रहिये! शायद आज आप इसे देख सकेंगे l