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Articles by लिसा सैमरा

मैं हानि से नहीं डरूंगा

1957 में, मेल्बा पेटिलो बील्स  “लिटिल रॉक नाइन(Little Rock Nine),”  के एक सदस्य के रूप में चुनी गयी, जो नौ अफ्रीकन अमेरिकन विद्यार्थियों का एक समूह था जिन्होनें अरकंसास, लिटिल रॉक के सेंट्रल हाई स्कूल को सबसे पहले श्वेतों और अश्वेतों दोनों ही के लिए अनिवार्य कर दिया और जो पूर्व में केवल श्वेत लोगों के लिए था l अपने 2018 के वृतांत, आई विल नॉट फियर : माई स्टोरी ऑफ़ ए लाइफटाइम ऑफ़ बिल्डिंग फैथ अंडर फायर (I Will Not Fear: My Story of a Lifetime of Building Faith under Fire), में बील्स उस अन्याय और उत्पीड़न का एक मर्मस्पर्शी वर्णन करती है जिसका सामना वह पंद्रह वर्ष की छात्रा के रूप में प्रतिदिन संघर्ष करते हुए साहस के साथ करती थी l

परन्तु उसने परमेश्वर में अपने गहरे विश्वास के विषय भी लिखा l अपने सबसे अंधकारपूर्ण पलों में, जब भय ने उसे पूर्ण रूप से पराजित करना चाहा, बील्स ने बाइबल के लोकप्रिय पदों को दोहराया जो उसने बचपन में अपनी दादी से सीखे थे l उनको दोहराते समय, उसे अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति याद आई, और वचन ने उसे दृढ़ रहने के लिए साहस दिया l

बील्स अक्सर भजन 23 को दोहराती थी, “चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुयी तराई में होकर चलूँ, तौभी हानि से न [डरूंगी]; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है” (पद.4) और इसे अंगीकार करके आराम पाती थी l उसकी दादी का प्रोत्साहन उसके कानों में गूंजता था और उसे आश्वासन देता था कि परमेश्वर “अति निकट है, और तुम केवल उससे ही सहायता मांग सकती हो l”

यद्यपि हमारी ख़ास स्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं, कदाचित हम सब कठिन संघर्षों एवं अभिभूत करनेवाली स्थितियों को सहन करेंगे जो हमें भयभीत करके आसानी से हार मानने के लिए उत्प्रेरित करेंगी l आपका हृदय इस सच्चाई में उत्साहित हो कि परमेश्वर की सामर्थी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ है l

सेवक का मन

रसोइया l कार्यक्रम आयोजक (Event Planner) l आहार विज्ञ(Nutritionist) l नर्स l ये कुछ एक जिम्मेदारियां हैं जो आधुनिक माताएं निभाती हैं l 2016 में, शोध के अनुमान के अनुसार माताएं सभवतः एक सप्ताह में बच्चे से सम्बंधित कार्य उन्सठ से छियानवे घंटे करती हैं l

माताएं हमेशा थकी होती हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं है! माँ होने का मतलब है बच्चों की देखभाल के लिए अत्यधिक समय और ऊर्जा खर्च करना, जिन्हें बहुत अधिक सयायता चाहिए  जब वे संसार को जानना सीखते हैं l

जब मेरा दिन मुझे लम्बा महसूस होता है और मुझे ताकीद चाहिए कि दूसरों की देखभाल एक ईमानदार कोशिश है, मुझे बड़ी आशा मिलती है जब मैं यीशु को सेवा करनेवालों को अनुमोदित करते हुए देखती हूँ l

मरकुस रचित सुसमाचार में, शिष्य आपस में वाद-विवाद कर रहे थे कि उनमें बड़ा कौन है l

यीशु शांति से बैठकर उन्हें स्मरण दिलाया कि “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने” (9:35) l उसके बाद उसने एक बालक को गोद में लेकर दूसरों की सेवा करने का महत्त्व दर्शाया, विशेषकर जो हममें सबसे अधिक असहाय हैं (पद.36-37) l

मसीह का प्रतिउत्तर उसके राज्य में महानता का पैमाना क्या होना चाहिए को पुनः स्थापित कर देता है l उसका मानक दूसरों की सेवा करने वाला हृदय है l और यीशु ने प्रतिज्ञा की है कि परमेश्वर की सामर्थी उपस्थिति सेवा करने का चुनाव करनेवालों के साथ रहेगी (पद.37) l

जब आपके पास अपने परिवार या समुदाय में सेवा करने के अवसर हैं, उत्साहित हो जाएं कि यीशु उस समय को और प्रयास को जो आप दूसरों की सेवा में लगाएंगे स्थायी महत्व देता है l

विजय जुलूस

2016 में जब शिकागो कब्स बेसबॉल टीम ने एक शताब्दी से अधिक समय में पहली बार विषय सीरीज जीत ली, चैंपियनशिप का जश्न मानाने के लिए पचास लाख लोग शहर के मध्य जुलूस में शामिल हुए l

विजय जुलूस कोई आधुनिक अविष्कार नहीं हैं l रोमी की जीत एक लोकप्रिय प्राचीन जुलूस थी, जिसमें विजयी सेनापति भीड़ वाले मार्गों में अपनी सेना और युद्धबंदियों के जुलूस की अगुवाई करते थे l

कदाचित इस प्रकार की जुलूस का चित्र पौलुस के मन में था जब उसने कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखते हुए परमेश्वर के विश्वासियों को “जय के उत्सव में लिए [फिरने]” के लिए धन्यवाद दिया (2 कुरिन्थियों 2:14) l यह मुझे चित्ताकर्षक लगता है कि इस चित्र में, मसीह के अनुयायी बंदी हैं l हालाँकि, विश्वासी के रूप में हम भागदारी करने के लिए विवश नहीं हैं, परन्तु इच्छुक “बंदी,” जो स्वेच्छापूर्वक विजयी, पुनरुत्थित मसीह की जुलूस का भाग हैं l मसीही के रूप में, हम जश्न मानते हैं कि मसीह की विजय द्वारा, वह अपना राज्य बना रहा है और अधोलोक की फाटकें उसपर प्रबल नहीं होंगी (मत्ती 16:18) l

जब हम क्रूस पर यीशु की विजय और स्वतंत्रता के विषय बात करते हैं जो वह विश्वासियों को देता है, हम “[उसके] ज्ञान की सुगन्ध” हर जगह फैलाते हैं (2 कुरिन्थियों 2:14) l और चाहे लोग सुगंध को उद्धार के आश्वासन के रूप में ग्रहण करें या अपनी हार की गंध माने, यह अदृश्य किन्तु शक्तिशाली सुगंध हर जगह उपस्थित है जहां हम जाते हैं l

जब हम मसीह का अनुसरण करते हैं, हम उसके पुनरुत्थान के विजय की घोषणा करते हैं, वह विजय जो संसार के लिए उद्धार को उपलब्ध करता है l

खूंटियों को गिराना

जब मैंने अपने मित्र इरिन के टखने पर टैटू देखा जिसमें बॉल फेंककर खूटियों का गिरना दर्शाया गया था तो मेरे मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुयी l इरिन को इस अद्वितीय टैटू को प्राप्त करने की प्रेरणा सारा ग्रोव्स के गीत “सेटिंग अप द पिन्स” को सुनकर मिली थी l यह दक्ष गीतकाव्य श्रोताओं को अपने दोहराए जानेवाले, दिनचर्या में आनंद खोजने के लिए उत्साहित करता है जो कभी-कभी अपने हाथों से बार-बार उन खूंटियों को पुनः खड़ा करने की तरह व्यर्थ महसूस होता है, केवल फिर से किसी के द्वारा पुनः गिराए जाने के लिए l

कपड़े धोना, भोजन बनाना, मैदान साफ़ करना l जीवन कामों से भरा हुआ है जिन्हें, एक बार पूरा करने के बाद, पुनः दोहराया जाना है – बार-बार l यह कोई नया संघर्ष नहीं है परन्तु एक पुरानी निराशा, जिसके साथ पुराने नियम के सभोपदेशक पुस्तक में भी जूझा गया था l यह पुस्तक लेखक द्वारा शिकायत करते हुए आरम्भ होता है कि दैनिक मानव जीवन न ख़त्म होने वाले चक्र की भांति व्यर्थ है (1:2-3), अर्थहीन भी, क्योंकि “जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा” (पद.9) l

फिर भी, मेरे मित्र की तरह, लेखक यह याद करके पुनः आनंद का भाव और अर्थ प्राप्त कर सका कि हमारी आखिरी तृप्ति “परमेश्वर का भय [मानना] और उसकी आज्ञाओं का पालन है” (12:13) l यह जानने से तसल्ली मिलती है कि परमेश्वर साधारण, कदाचित जीवन के नीरस पहलुओं को भी महत्त्व देता है और हमारी विश्वासयोग्यता को पुरुस्कृत करेगा (पद.14) l

आप निरंतर कौन सी “खुटियाँ” खड़ी कर रहे है? उन दिनों में जब दोहराए जानेवाले कार्य थकानेवाले महसूस हो, काश हम थोड़ा समय निकालकर हर एक कार्य को प्रेम के बलिदान के रूप में परमेश्वर को सौंपेंl

बाइबल का नुस्ख़ा

ग्रेग और एलिज़ाबेथ नियमित रूप से स्कूल जाने वाले अपने चार बच्चों के साथ “चुटकुलों की रात” रखते हैं l हर एक बच्चा अनेक चुटकुले लेकर खाने की मेज़ पर बताने के लिए आता है जो उसने सप्ताह के दौरान पढ़े हैं या सुने हैं (या खुद से बनाए है!) इस परंपरा ने मेज़ के आस-पास बांटे गए आमोद-प्रमोद के आनंददायक यादों को स्थापित किया है l ग्रेग और एलिज़ाबेथ ने अपने बच्चों के लिए हंसी को स्वास्थ्यवर्धक, कठिन दिनों में उनके मनोबल को ऊँचा करने वाला भी महसूस किया है l

भोजन की मेज़ के आस-पास आनंदायक बातचीत के लाभ को सी. एस. लेयुईस ने पहचाना था, जिसने लिखा, “सूर्य भोजन के समय एक हँसते हुए परिवार से अधिक किसी और पर इतना नहीं चमकता है l”

एक आनंदित हृदय को बुद्धि से पोषित करने का वर्णन नीतिवचन 17:22 में मिलता है, जहाँ हम पढ़ते हैं, “मन का आनंद अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं l” यह नीतिवचन स्वास्थ्य और चंगाई को प्रोत्साहित करने का एक “नुस्ख़ा” पेश करता है – हमारे हृदयों को आनंद से भरने की अनुमति देता है, एक औषधि जिसकी कीमत कम और परिणाम बहुत बड़ा है l

हम सब को बाइबल का यह नुस्ख़ा चाहिए l जब हम अपने बातचीत में आनंद को आने देते हैं, वह हमारे असहमति को सही परिपेक्ष्य में पहुंचता है l यह हमें स्कूल में एक तनावपूर्ण परीक्षा या एक कठिन दिन के कार्य के बावजूद भी शांति का अनुभव करने देता है l परिवार एवं मित्रों के बीच हँसी एक सुरक्षित स्थान बना सकता है जहां हम दोनों जानते एवं अनुभव करते हैं कि हम प्रेम किये गए हैं l

क्या आपको अपने जीवन में अपनी आत्मा के लिए और अधिक “अच्छी औषधि” को सम्मिलित करने की ज़रूरत है? स्मरण रखें, आपको बाइबल से एक आनंदित हृदय को विकसित करने का प्रोत्साहन मिलता है l

साफ़ धोए हुए

मैं विश्वास नहीं कर सकी l एक नीला जेल पेन मेरे सफ़ेद तौलिये में खुद को छिपा लिया था और केवल ड्रायर में तड़कने के लिए, वाशिंग मशीन में बच गया था l बदसूरत नीले दाग़ सभी जगह थे l मेरे सफ़ेद तौलिये ख़राब हो चुके थे l अत्यधिक ब्लीच(दाग़ हटाने का द्रव्य या पाउडर) भी उन गहरे दाग़ों को हटाने में असमर्थ थे l

जब मैं हिचकिचाते हुए उन तौलियों को फटे पुराने कपड़ों के ढेर में डाल रही थी, मैंने पुराने नियम में क्षति पहुंचाने वाले पाप के प्रभाव का वर्णन करने वाले यिर्मयाह नबी के विलाप को याद किया l परमेश्वर का तिरस्कार करने और मूरतों की ओर मुड़ने (यिर्मयाह 2:13) के द्वारा, यिर्मयाह ने घोषित किया कि इस्राएल के लोगों ने परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध में एक स्थायी दाग़ बना लिया था : “चाहे तू अपने को सज्जी से धोए और बहुत सा साबुन भी प्रयोग करे, तौभी तेरे अधर्म का धब्बा मेरे सामने बना रहेगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है” (पद.22) l अपने द्वारा की गयी हानि को ठीक करने में वे असमर्थ थे l

खुद से, अपने पाप का दाग़ हटाना संभव नहीं है l किन्तु यीशु ने वह कर दिया जो हम करने में असमर्थ थे l अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान की सामर्थ्य के द्वारा, वह “[विश्वासियों के] पापों को क्षमा” करता है (1 यूहन्ना 1:7) l

जब विश्वास करना कठिन हो, इस खुबसूरत सच्चाई को थामें रहें : यीशु पाप के हर एक हानि को पूरी रीति से हटा सकता है l परमेश्वर उसकी ओर लौटनेवाले हर इच्छित व्यक्ति के पाप के प्रभाव को धो देने के लिए तैयार है (पद.9) l हम मसीह के द्वारा, हर दिन को आज़ादी और आशा में जी सकते हैं l

सृष्टिकर्ता और सम्भालने वाला

आवर्धक लैंस और चिमटी के साथ काम करते हुए, स्विस घड़ीसाज फिलिप्प ने सतर्कतापूर्वक मुझे बताया कि वह विशेष घड़ियों के छोटे-छोटे कलपुर्ज़ों को किस प्रकार निकालता, साफ़ करता और फिर से जोड़ता है। जटिल पुर्जों को देखते हुए फिलिप्प ने मुझे घड़ी के मुख्य पुर्जे, मुख्य स्प्रिंग, को दिखाया। मुख्य स्प्रिंग वह कलपुर्जा है, जो घड़ी को समय दिखाने के लिए सभी गरारियों को चलाता है और घड़ी को समय बताने में सहायता करता है। इसके बिना, अत्यधिक कुशलता से बनाई गई घड़ियाँ भी काम नहीं करेंगी।  

नया नियम के एक सुन्दर पद्यांश में, जो इब्रानियों की पुस्तक में पाया जाता है, लेखक बहुत ही उत्तम रीति से यीशु की वह व्यक्ति होने के लिए प्रशंसा करता है जिसके द्वारा परमेश्वर ने आकाशमण्डल और पृथ्वी को बनाया था। एक विशेष घड़ी की जटिलता के समान हमारे आकाशमण्डल को यीशु ने बनाया है (इब्रानियों 1:2)। हमारे सौरमण्डल से लेकर हमारे ऊँगलियों के निशान तक, सभी वस्तुएँ उनके द्वारा ही बनाई गई हैं।

परन्तु एक सृष्टिकर्ता से अधिक, यीशु, एक घड़ी के एक मुख्य स्प्रिंग के समान सृष्टि के कार्य करने और फलने-फूलने के लिए जरूरी हैं। उनकी उपस्थिति  “सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से” संभालती है (पद 3) और जो कुछ उसने बनाया है, उसे इसकी अद्भुत जटिलता में काम करते रहने के लिए बनाए रखता है।

आज जब आप सृष्टि की सुन्दरता का अनुभव करने का अवसर पाते हैं, तो याद रखें कि “सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं” (कुलुस्सियों 1:17)। प्रभु करे कि आकाशमण्डल को बनाने और सम्भालने में यीशु की मुख्य भूमिका का परिणाम एक आनन्द से भरा हुआ हृदय और एक प्रशंसा की एक प्रतिक्रिया हो, जब हम हमारे लिए उनकी लगातार उपलब्धता को पहचानते हैं।

राष्ट्रों में धर्मी

इस्राएल के याद वाशेम के हौलोकास्ट म्यूजियम में मैं और मेरे पति राष्ट्रों में धार्मिक बगीचे में गए, जो उन पुरुष और महिलाओं के सम्मान में है जिन्होंने यहूदियों के सर्वनाश के समय यहूदी लोगों को बचाने के अपने प्राणों की आहूति दी थी । मेमोरियल को देखते हुए हमारी भेंट नीदरलैंड से आए एक समूह से हुई। एक महिला उस बड़े पत्थरों पर अपने दादा-दादी का नाम खोजने के लिए आई थी। युक्ति के साथ हम ने उसके परिवार की कहानी के बारे में पूछा।

रेजिस्टेंस नेटवर्क के सदस्य, उस महिला के दादा-दादी रेव. पीटर और आद्रिआना ने एक यहूदी लड़के को अपने घर में आने दिया और उसे 1943-1945 तक अपने आठ बच्चों में सबसे छोटे बच्चे के रूप में रखे रखा।

उस कहानी से भावुक हो कर हम ने पूछा, “क्या वह लड़का जीवित बचा?” उस समूह से एक वृद्ध भद्रपुरुष आगे आया और बोला, “मैं वह छोटा लड़का हूँ!”

यहूदियों के लिए अनेक लोगों की वीरता मुझे रानी एस्तेर की याद दिलाती है। हो सकता है 350 ईस्वी में रानी ने सोचा कि वह राजा क्षयर्ष के यहूदियों को मार डालने के आदेश से बच सकती थी, क्योंकि उसने अपनी पहचान को छिपाए रखा था। परन्तु वह यह कार्य करने के ली कायल हो गई-यहाँ तक कि मृत्यु तक के जोखिम में-जब उसके चचेरे भाई ने उससे यहूदी विरासत के बारे में शांत न रहने की दोहाई दी क्योंकि उसे “ऐसे समयों के लिए ही” उस पद पर रखा गया था (एस्तेर 4:14)।

हो सकता है हमें कभी भी ऐसा नाटकीय निर्णय लेने के लिए कभी न कहा जाए। परन्तु सम्भव है हमें एक अन्याय के बारे में बोलने या शान्त रहने; मुसीबत में किसी की सहायता करने या छोड़ देने के चुनाव का सामना करना पड़े। परमेश्वर हमें साहस प्रदान करे।

ठन्डे मौसम की बर्फ

सर्दियों में, मैंने अक्सर संसार को प्रातःकाल के बर्फ में लिपटा हुआ और शांत पाकर उसकी खूबसूरती से चकित हूँ l बसंत की आंधी की तरह बड़ी आवाज़ के साथ नहीं जो रात में अपनी उपस्थिति दर्शाती है, किन्तु बर्फ शांति से गिरती है l

“सर्दियों के बर्फ गीत में” (Winter Snow Song), में ऑड्रे एस्साद गाते हैं कि यीशु आंधी की तरह शक्ति के साथ पृथ्वी पर आ सकता था, किन्तु इसके बदले वह सर्दियों के बर्फ की तरह शांत और धीरे से मेरी खिड़की के बाहर आया l

यीशु का आना बहुतों को आश्चर्यचकित कर दिया l एक महल में जन्म लेने के बदले, वह एक विपरीत स्थान में जन्म लिया, बैतलहम के बाहर एक दीन निवास l और वह एक चरनी में सोया, केवल वही उसके लिए था (लूका 2:7) l उच्च अधिकारी और सरकारी अधिकारी उससे मिलने नहीं आए, साधारण चरवाहों ने उसका स्वागत किया (पद.15-16) l धन की कमी के कारण, यीशु के माता-पिता दो पक्षियों के सस्ते बलिदान भी चढ़ाने में असमर्थ थे जब उन्होंने उसको मंदिर में प्रस्तुत किया (पद.24) l

यीशु का संसार में प्रवेश करने वाला सरल तरीका नबी यशायाह का पूर्वाभास है, जिसने आनेवाले उद्धारकर्ता की नबूवत की थी कि “न वह चिल्लाएगा (यशायाह 42:2) न ही वह सामर्थ्य में आकर एक नरकट को तोड़ेगा या एक टिमटिमाती बत्ती को बुझाएगा (पद.3) l इसके बदले परमेश्वर की शांति की पेशकश के साथ वह हमें कोमलता से अपनी ओर खींचेगा l ऐसी शांति जो चरनी में जन्मे उद्धारकर्ता की अनपेक्षित कहानी पर विश्वास करनेवाले के लिए अभी भी उपलब्ध है l