स्काउट्स मूवमेंट(आन्दोलन), जिसे भारत में “भारत स्काउट्स एंड गाइड्स” के नाम से जाना जाता है, का एक बहुत ही दिलचस्प नारा है, “प्रतिदिन एक अच्छा काम करें।” इसका मतलब यह है कि हर दिन इसके सदस्यों से किसी की मदद करने के लिए कुछ करने की उम्मीद की जाती है। यह दयालुता और मदद का कोई भी छोटा सा भाव हो सकता है जिसका उद्देश्य अपने देश को एक बेहतर जगह बनाना हो। हालाँकि इस बात का कोई वर्णन नहीं है कि वह “अच्छा काम” कैसा दिख सकता है, लेकिन आम तौर पर यह समझा जाता है कि इसका उद्देश् बनाना हैंI

भजन संहिता (90:12) कहता है, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं।” जब कि शुरू में यह बड़े लोगों के लिए सलाह लग सकती है। हालाँकि, इसे करीब से पढ़ने पर, हम समझते हैं कि यह सभी के लिए है, युवा और वृद्ध सभी के लिए। भजन संहिताकार बताता है, कि हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष भी हो जाएँ (पद.10) l जबकि पहले तो ऐसा लगता है कि वर्षों की संख्या मानव जीवन की लंबी आयु को दर्शाती है, लेकिन करीब से देखने पर हम समझ जाते हैं कि भजन संहिताकार किसी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा का शाब्दिक अर्थ नहीं ले रहा था, बल्कि वह हमसे यह सुनिश्चित करने के लिए कह रहा था कि पृथ्वी पर हमारे दिन सार्थक हों।

दयालुता के छोटे-छोटे कार्य, विनम्र शिष्टाचार, मदद के भाव और दूसरों के साथ उनकी स्थिति की परवाह किए बिना निष्पक्ष व्यवहार करना हमारे दिनों को सही रीति से जीने के कुछ सरल तरीके हैं। हालाँकि हम कभी भी यह अनुमान नहीं लगा पाएँगे कि हमारे पास पृथ्वी पर कितना समय है, लेकिन हम हर दिन अच्छाई करके जितना संभव हो उतना प्रभाव छोड़ने का संकल्प ले सकते हैं। और जैसे-जैसे हम मसीह में बढ़ते हैं और उसके गुणों को प्रदर्शित करते हैं, हम निश्चित रूप से हर दिन को महत्वपूर्ण बनाएँगे। —नोएल बर्मन