ऋषि को सिर पर और चेहरे पर चोट के निशान के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह एक गांव में चर्च का अगुआ था लेकिन धार्मिक चरमपंथियों द्वारा हिंसक हमला किए जाने पर भी उसने अपनी रक्षा नहीं की l ओपन डोर्स पर उसकी कहानी व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई और उसके ठीक होने के बाद उसने कहा, “हालाँकि मुझ पर दो बार हमला किया गया था, फिर भी मैं अपने जीवन में परमेश्वर की सुरक्षा महसूस कर सकता हूँ। मैं अपने परमेश्वर पर भरोसा करना जारी रखूँगा और जहाँ भी प्रभु मुझे भेजेगा, उसकी सेवा करूँगा।”
जब सैनिकों की टुकड़ी यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले की रात को गिरफ्तार करने आई, तो पतरस ने तलवार निकाली और महायाजक के सेवक का कान काट दिया (पद.10)। कोई यह तर्क दे सकता है कि यह आत्मरक्षा में किया गया था जबकि अन्य कह सकते हैं कि यह मूर्खतापूर्ण था क्योंकि भारी हथियारों से लैस सैनिकों की संख्या शिष्यों से कहीं अधिक थी। यीशु की प्रतिक्रिया पूरी तरह से अलग थी। उसने पतरस को तलवार म्यान में रखने की आज्ञा देते हुए कहा, “जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे न पीऊँ?” (पद.11)। यीशु समझ गया कि उस पर हमला भी परमेश्वर की इच्छा के अनुसार था। इसलिए, यीशु के शब्द आज चर्च के लिए बहुत महत्व रखते हैं। क्योंकि जब यीशु ने पतरस को हिंसा का सहारा लेने से मना किया, तो उसने चर्च को भी हमेशा के लिए निःशस्त्र कर दिया।
ऐसे समय हो सकते हैं जब हम खुद का बचाव करने में उचित महसूस करते हैं, खासकर जब हमारे साथ अन्याय होता है। लेकिन दूसरा गाल आगे कर देना मसीह का सम्मान करने वाला जवाब होगा (मत्ती 5:29)। गलत समझे जाने के जोखिम पर भी, हमें अंतिम न्याय हमारे न्यायी परमेश्वर के हाथों में छोड़ देना चाहिए। क्योंकि हम जानते हैं कि अनंत काल के परिप्रेक्ष्य में उसकी योजनाएँ हमेशा आज की हमारी तत्काल धारणा से अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। —नोएल बर्मन
जब आपके साथ अन्याय होता है, तो आप कैसे प्रतिक्रिया करते हैं?
दूसरा गाल आगे कर देने का क्या मतलब होगा?
प्रिय यीशु, मुझे आपके जैसा बनने में मदद करें l
मुझे उन लोगों के प्रति प्रेम से प्रतिक्रिया करना सिखाएँ जिन्होंने मुझे चोट पहुँचाई है।
