मैं केवल चालक हूँ
“पिताजी, क्या मैं अपनी सहेली के संग रात बिता सकती हूँ?” मेरी बेटी ने अभ्यास के बाद कार में बैठते हुए पूछा l “प्रिय, तुम्हें उत्तर मालूम है,” मैंने कहा l “मैं केवल ड्राईवर हूँ l मुझे नहीं पता क्या हो रहा है l चलो माँ से बात करते हैं l”
“मैं केवल ड्राईवर हूँ” यह वाक्य अब हमारे घर में हंसी की बात बन गया है l प्रतिदिन, मैं अपनी व्यवस्थित पत्नी से पूछता हूँ कि मुझे कहाँ, कब रहना है और मैं किसे कहाँ ले जा रहा हूँ l तीन किशोरों के साथ, एक “टैक्सी ड्राईवर” के रूप में मेरा अतिरिक्त कार्य कभी-कभी दूसरी नौकरी की तरह महसूस होता है l अक्सर मुझे नहीं पता होता कि मुझे क्या नहीं पता l मुझे मुख्य कैलेंडर प्रभारी से होने वाली गातिविधियों की पुष्टि करनी होती हैं l
मत्ती 8 में, यीशु का सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो निर्देश लेने और देने के बारे में भी कुछ जानता था l इस आदमी, रोमी सूबेदार, ने समझा कि यीशु के पास चंगा करने का अधिकार था, जैसे सूबेदार के पास उसके अधीन लोगों को आदेश जारी करने का अधिकार था l “केवल मुख से कह दे और मेरा सेवक चंगा हो जाएगा l क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं” (पद.8-9) l मसीह ने उस व्यक्ति के विश्वास की सराहना की (पद.10,13), यह जानकर आश्चर्यचकित हुआ कि वह समझ गया था कि उसका अधिकार कार्य में कैसा दिखता है l
तो हमारा क्या? यीशु से मिलने वाले दैनिक कार्यों के लिए उस पर भरोसा करना कैसा लगता है? क्योंकि भले ही हम सोचते हैं कि हम “सिर्फ चालक” हैं, प्रत्येक कार्य का एक अलग अर्थ और उद्देश्य होता है l एडम होल्ज़
यीशु दाग हटाता है
“क्या आप। मज़ाक कर रहे है?!” मैं चिल्लाया, मै ड्रायर (सुखाने की मशीन) को पकड कर अपनी कमीज़ ढूंढ रहा था। ओह! मुझे मिल गई और यह क्या मुझे कुछ और भी मिला। मेरी सफेद कमीज़ पर स्याही का धब्बा था। वास्तव में, यह जैगुआर (तेंदुआ) की खाल जैसा दिखता था! वास्तव में स्याही के धब्बों ने सब कुछ खराब कर दिया था। मैंने अपनी जेबे नहीं देखीं थीं। और एक पेन (कलम) था जो लीक कर गया था जिससे कपड़ों पर धब्बे पड गये थे।
पवित्रशास्त्र अक्सर पाप का वर्णन करने के लिए धब्बा (दाग) शब्द का उपयोग करता है। दाग किसी चीज़ के ढांचे में घुस जाता है और उसे बर्बाद कर देता है। और इस प्रकार परमेश्वर ने, भविष्यवक्ता यिर्मयाह के माध्यम से बोलते हुए, पाप का वर्णन किया, और अपने लोगों को याद दिलाया कि उनका दाग साफ करना उनकी क्षमता से परे है: “चाहे तू अपने को सज्जी से धोए और बहुत सा साबुन भी प्रयोग करें,तौभी तेरे अधर्म का धब्बा मेरे साम्हने बना रहेगा” (यिर्मयाह 2:22)।
शुक्र है, पाप को अंतिम शब्द नहीं मिलता। यशायाह 1:18 में, हम परमेश्वर का वादा सुनते हैं कि वह हमें पाप के दाग से शुद्ध कर सकता है: “तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम की नाईं उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।”
मैं अपनी कमीज़ से स्याही का दाग नहीं हटा सका। न ही मैं अपने पाप का दाग मिटा सकता हूँ। भला है, परमेश्वर हमें मसीह में शुद्ध करते हैं, जैसा कि 1 यूहन्ना 1:9 वादा करता है: “यदि हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं, तो वह विश्वासयोग्य और न्यायी है और हमारे पापों को क्षमा करेगा और हमें सभी अधर्म से शुद्ध करेगा।” एडम आर. होल्ज़
परमेश्वर द्वारा पसंद और प्यार किया हुआ
ऐसा आभास होता है जैसे “लाइक”—आप जानते हैं, फेसबुक पर छोटे-छोटे थम्स-अप हमेशा हमारे साथ रहे हैं l लेकिन यह पता चला है कि पुष्टि का यह आभासी प्रतीक केवल 2009 से ही अस्तित्व में है l
“लाइक” का डिज़ाइन बनाने वाला जस्टिन रोसेंस्टीन ने कहा कि वह “एक ऐसा संसार बनाने में सहायता करना चाहते हैं जिसमें लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय एक-दूसरे की उन्नति करें l” लेकिन रोसेंस्टीन को इस बात पर अफ़सोस हुआ कि कैसे उनके आविष्कार ने उपयोगकर्ताओं की सोशल मिडिया के प्रति अस्वास्थ्यकर लत को सक्षम कर दिया होगा l
मुझे लगता है कि रोसेंस्टीन की रचना पुष्टि और जुड़ाव की हमारी कठोर आवश्यकता को बताती है l हम जानना चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें जानते हैं, हम पर ध्यान देते हैं—और हाँ, हमें पसंद करते हैं l “लाइक” बिलकुल नया है l लेकिन जानने और पहचा ने जाने की हमारी भूख उतनी ही पुरानी है जितनी कि परमेश्वर द्वारा मनुष्य की रचना।
फिर भी, लाइक/like बटन से काम पूरा नहीं होता है, क्या ऐसा होता है? शुक्र है, हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जिसका प्यार डिजिटल सहमती प्रकट करने से कहीं अधिक गहरा है l यिर्मयाह 1:5 में, हम एक भविष्यवक्ता के साथ उसके गहराई से उद्देश्पूर्ण सम्बन्ध को देखते हैं जिसे उसने अपने पास बुलाया था l “गर्भ में रचने से पहले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहले ही मैं ने तेरा अभिषेक किया l”
परमेश्वर भविष्यवक्ता को उसकी माँ के गर्भ में आने से पहले ही जानता था और उन्हें अर्थ और मिशन के जीवन के लिए बनाया था(पद.8-10) l और वह हमें भी एक उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए आमंत्रित करता है क्योंकि हम हमें करीब से जानने वाले, प्यार करने वाले और पसंद करनेवाले पिता को जानते हैं l एडम आर. होल्ज़
“मेरे अविश्वास का उपाए कर!”
“मेरा विश्वास कहाँ है?—यहाँ गहराई में भी खालीपन और अँधेरे के सिवा कुछ भी नहीं है . . . यदि परमेश्वर है तो कृपया मुझे क्षमा करें l”
उन शब्दों की लेखिका आपको आश्चर्यचकित कर सकती है : मदर टेरेसा l भारत के कलकत्ता में गरीबों की एक अथक सेविका के रूप में प्रिय और प्रसिद्ध, मदर टेरेसा ने पांच दशकों तक चुपचाप अपने विश्वास के लिए एक हताश युद्ध छेड़ा l 1997 में उनकी मृत्यु के बाद, वह संघर्ष तब सामने आया जब उनकी पत्रिका के अंश कम बी माई लाईट पुस्तक में प्रकाशित हुए l
हम परमेश्वर की अनुपस्थिति के अपने संदेहों या भावनाओं के साथ क्या करते हैं? वे क्षण कुछ विश्वासियों को दूसरों की तुलना में अधिक परेशान कर सकते हैं l लेकिन यीशु में कई वफादार विश्वासियों को, अपने जीवन में किसी बिंदु पर, ऐसे संदेह के क्षणों या अवसरों का अनुभव हो सकता है l
मैं आभारी हूँ कि पवित्रशास्त्र ने हमें एक सुन्दर, असंगत/दोअर्थी प्रार्थना दी है जो विश्वास और उसकी कमी दोनों को बताती है l मरकुस 9 में, यीशु का सामना एक ऐसे पिता से होता है जिसका बेटा बचपन से ही दुष्टात्मा पीड़ित था (पद.21) l जब यीशु ने कहा कि मनुष्य में विश्वास होना चाहिए (“विश्वास करनेवाले के लिए सब कुछ हो सकता है,” पद.23), तो उस व्यक्ति ने जवाब दिया, “मैं विश्वास करता हूँ, मेरे अविश्वास का उपाय कर” (पद.24) l
वह ईमानदार, स्नेहपूर्ण विनती उनको आमंत्रित करती है जो संदेह के साथ संघर्ष करते हुए इसे परमेश्वर को सौंपते हैं, विश्वास के साथ कि वह हमारे विश्वास को मजबूत कर सकता है और उन सबसे गहरी, अँधेरी घाटियों में भी हमें मजबूती से थामे रख सकता है, जिनसे हम कभी गुजरे होंगे lएडम आर. होल्ज़
मसीह में शांत विश्वसनीयता
पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।
मैं अपने होटल में नाश्ते के लिए आया था। भोजन कक्ष में सब कुछ साफ़ था। बुफ़े टेबल भरी हुई थी. रेफ्रिजरेटर में सामान भरा हुआ था, बर्तन डिब्बे भरे हुए थे। सब कुछ सही था।
फिर मैंने उसे देखा l एक सीधा-सादा आदमी ने इसे फिर से भरा, उसे पोछा l उसने अपनी ओर ध्यान नहीं खींचा, लेकिन जितनी देर मैं बैठा रहा, उतना ही मैं चकित होता गया। वह आदमी बहुत तेज़ी से काम कर रहा था, हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था, और इससे पहले कि किसी को किसी चीज़ की ज़रूरत हो सब कुछ फिर से भर रहा था। मैंने देखा कि एक खाद्य सेवा अनुभवी के रूप में, हर चीज पर उसका निरंतर ध्यान था । सब कुछ सही था क्योंकि यह आदमी ईमानदारी से काम कर रहा था—भले ही केवल कुछ लोगों ने ही ध्यान दिया हो।
इस आदमी को इतनी सावधानी से काम करते हुए देखकर, मुझे थिस्सलुनिकियों को कहे गए पौलुस के शब्द याद आए l "चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो; ताकि बाहरवालों से आदर प्राप्त करो" (1 थिस्सलुनीकियों 4:11-12)। पौलुस ने समझा कि यह इस बात की शांत गवाही देता है कि कैसे सुसमाचार दूसरों के लिए सेवा के छोटे-से प्रतीत होने वाले कार्य को भी गरिमा और उद्देश्य के साथ प्रेरित कर सकता है
मैं नहीं जानता कि जिस व्यक्ति को मैंने उस दिन देखा था वह यीशु में विश्वास करने वाला था या नहीं । लेकिन मैं आभारी हूं कि उसके शांत लगन (परिश्रम) ने मुझे शांत विश्वसनीयता(ईमानदारी) के साथ जीने के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने की याद दिलाई जो उसके विश्वसनीय तरीकों को दर्शाता है। एडम आर. होल्ज़
ध्यान भटकाने की इच्छा
मैंने अपना फ़ोन रख दिया, मैं उस छोटी सी स्क्रीन पर लगातार आने वाली छवियों, विचारों और सूचनाओं की बमबारी से थक गया था। फिर, मैंने उसे उठाया और फिर से चालू किया। क्यों? अपनी पुस्तक द शैलोज़ में, निकोलस कैर ने बताया है कि इंटरनेट ने शांति के साथ हमारे रिश्ते को कैसे आकार दिया है: "नेट जो कर रहा है वह मेरी एकाग्रता और चिंतन की क्षमता को कम कर रहा है। चाहे मैं ऑनलाइन हूँ या नहीं, मेरा दिमाग अब जानकारी को उसी तरह लेने की उम्मीद करता है जिस तरह से नेट इसे वितरित करता है: कणों की एक तेज़ गति से चलने वाली धारा में। एक बार मैं शब्दों के समुद्र में एक स्कूबा गोताखोर था। अब मैं जेट स्की पर सवार एक आदमी की तरह सतह पर तैरता हूँ।"
मानसिक जेट स्की पर जीवन जीना स्वस्थ नहीं लगता। लेकिन हम कैसे धीमा होना शुरू करें, शांत आत्मिक जल में गहराई से गोता लगाने के लिए ?
भजन संहिता 131 में, दाऊद लिखता हैं, “मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है” (पद.2) l दाऊद के शब्द मुझे याद दिलाते हैं कि मेरे पास जिम्मेदारी है। आदत बदलने की शुरुआत मेरे शांत रहने के चुनाव से होता है—भले ही मुझे वह चुनाव बार-बार करना पड़े। हालाँकि, धीरे-धीरे, हम परमेश्वर के संतुष्टिदायक भलाई का अनुभव करते हैं। एक छोटे बच्चे की तरह, हम संतोष में आराम करते हैं, यह याद रखते हुए कि वह ही अकेले आशा प्रदान करता है (पद.3)—आत्मिक संतुष्टि जिसे कोई स्मार्टफोन ऐप नहीं छू सकता है और कोई सोशल मीडिया साइट प्रदान नहीं कर सकता।
—एडम आर. होल्ज़
पाप फिर स्मरण न करना
मैंने कभी बर्फ नहीं देखी। लेकिन मैंने इसे महसूस किया। मैं जिस पिकअप को चला रहा था - मेरे दादाजी की - उसका पिछला हिस्सा फिशटेल की तरह मुड़ गया। एक मोड़, दो, तीन - और मैं हवा में उड़ गया, बांध से 15 फीट दूर । मुझे याद है कि मैंने सोचा था, अगर मैं मरने वाला नहीं होता तो यह बहुत बढ़िया होता। एक पल बाद, ट्रक खड़ी ढलान में जा गिरा और नीचे लुढ़क गया। मैं कुचली हुई गाड़ी से बाहर रेंगकर आया, बिना किसी चोट के।
1992 की दिसंबर की सुबह ट्रक पूरी तरह जलकर खाक हो गया। परमेश्वर ने मुझे बचा लिया था । लेकिन मेरे दादा जी के बारे में क्या? वह क्या कहेंगे? दरअसल, उन्होंने ट्रक के बारे में एक शब्द नहीं कहा। एक भी नहीं। कोई डांट-फटकार नहीं थी, कोई पुनर्भुगतान योजना नहीं थी, कुछ भी नहीं था। बस माफ़ी। और दादा जी की मुस्कान कि मैं ठीक था।
मेरे दादा जी की अनुग्रह मुझे यिर्मयाह 31 में परमेश्वर की अनुग्रह की याद दिलाती है। वहां, उनकी जबरदस्त असफलताओं के बावजूद, परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक पुनर्स्थापित रिश्ते का वादा करते हैं, यह कहते,"मैं उनका अधर्म क्षमा करूँगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूँगा।"(पद 34)
मुझे यकीन है कि मेरे दादा जी कभी नहीं भूले होंगे कि मैंने उनके ट्रक को बर्बाद कर दिया था। लेकिन उसने बिल्कुल वैसा ही व्यवहार किया जैसे परमेश्वर यहाँ करते है, इसे याद नहीं रखा, मुझे शर्मिंदा नहीं किया, मुझसे उस ऋण को चुकाने के लिए काम नहीं कराया जिसका मैं उचित हकदार था। जैसा कि परमेश्वर कहते हैं कि वह ऐसा करेंगे, मेरे दादा जी ने इसे याद नहीं रखने का फैसला किया, जैसे कि मैंने जो विनाशकारी काम किया था वह कभी हुआ ही नहीं।
— एडम आर. होल्ज़
सूची में सबसे पहले
सुबह की शुरुआत एक दौड प्रतियोगिता (track meet) की तरह हुई। दिन भर के सभी कामों को समय-सीमा के भीतर समाप्त करने के लिए मैं लगभग अपने बिस्तर से कूद कर बाहर निकला । बच्चों को स्कूल ले जाना । चेक । काम पर जाना। चेक । मैंने अपनी “काम को करने" की सूची लिखने में पूरा ज़ोर लगा दिया, जिसमें व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्य, बर्फीले तूफान जैसी सूची की तरह एक साथ गिरे:
“. . . 13. लेख संपादित करना 14. ऑफिस साफ़ करना 15. रणनीतिक टीम योजना बनाना. 16. व्यवसायिक ब्लॉग लिखना. 17. बेसमेंट साफ़ करना 18. प्रार्थना करना।” जब मैं अठारहवें नंबर पर पहुंचा, तब मुझे याद आया कि मुझे परमेश्वर की मदद की ज़रूरत है। लेकिन काफी दूर अकेले जाने के बाद मुझे यह एहसास होता कि मैं तो अपनी खुद की गति तय करने की कोशिश कर रहा हूं I
यीशु जानते थे; उन्हें पता था कि हमारे दिन, लगातार होने वाली अत्याधिक आवश्यकता के सागर में एक-दूसरे से टकराते रहेंगे । इसलिए उन्होंने निर्देश दिया, “पहले तुम परमेश्वर के राज्य और उसके धर्म की खोज करो, तो ये सब वस्तुएँ भी तुम्हें मिल जाएंगी।“ (मत्ती 6:33)। यीशु के शब्दों को एक आदेश के रूप में सुनना स्वाभाविक है। और वे हैं भी। लेकिन यहां और भी कुछ है—एक निमंत्रण। मत्ती 6 में, यीशु हमें दिन-ब-दिन विश्वास के जीवन के लिए दुनिया की उत्तेजित करने वाली चिंता (पद 25-32) का आदान-प्रदान करने के लिए आमंत्रित करते है। परमेश्वर, अपनी कृपा से, हमारे सभी दिनों में हमारी मदद करते है - तब भी जब हम अपने जीवन को उनके दृष्टिकोण से देखने से पहले ही अपनी काम करने की सूची के अठारहवें नंबर पर पहुँच जाते है I
-एडम आर. होल्ज़
ब्राण्ड राजदूत से कहीं अधिक
इंटरनेट के दौर में प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा हो गई है। कंपनियाँ तेज़ी से ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए रचनात्मक तरीके विकसित कर रही हैं। उदाहरण के लिए, सुबारू वाहनों को ही लें। सुबारू के मालिक मशहूर रूप से वफ़ादार हैं, इसलिए कंपनी ने “सुब्बी सुपरफ़ैन” को वाहनों का “ब्रांड एंबेसडर” बनने के लिए आमंत्रित किया है।
कंपनी की वेबसाइट पर लिखा है, "सुबारू एंबेसडर ऊर्जावान व्यक्तियों का एक विशेष समूह है, जो सुबारू के बारे में लोगों को बताने और ब्रांड के भविष्य को आकार देने में अपना जुनून और उत्साह दिखाते हैं।" कंपनी चाहती है कि सुबारू स्वामित्व लोगों की पहचान का हिस्सा बन जाए - कुछ ऐसा जिसके बारे में वे इतने भावुक हैं कि वे इसे साझा किए बिना नहीं रह सकते।
2 कुरिन्थियों 5 में, पौलुस एक अलग “राजदूत” कार्यक्रम का वर्णन करता है, जो दूसरों को यीशु का अनुसरण करने के लिए आमंत्रित करता है l “इसलिए प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं” (पद.11) l पौलुस आगे कहता है “उस ने मेल-मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है l इसलिए, हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा विनती कर रहा है l हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं कि परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप कर लो” (पद.19-20) l
कई उत्पाद हमें गहरी ज़रूरतों को पूरा करने, ख़ुशी, पूर्णता, और उद्देश्य की भावना देने की प्रतिज्ञा करते हैं l लेकिन केवल एक सन्देश—यीशु में विश्वासियों के रूप में हमें सौंपा गया मेल-मिलाप का सन्देश—वास्तव में अच्छी खबर है l और हमें हताश संसार को वह सन्देश देने का सौभाग्य मिला है l
—एडम होल्ज़