मसीह में शांत विश्वसनीयता
पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।
मैं अपने होटल में नाश्ते के लिए आया था। भोजन कक्ष में सब कुछ साफ़ था। बुफ़े टेबल(buffet table) भरी हुई थी. रेफ्रिजरेटर में सामान भरा हुआ था, बर्तन डिब्बे भरे हुए थे। सब कुछ सही था।
फिर मैंने उसे देखा l एक सीधा-सादा आदमी ने इसे फिर से भरा, उसे पोछा l उसने अपनी ओर ध्यान नहीं खींचा, लेकिन जितनी देर मैं बैठा रहा, उतना ही मैं चकित होता गया। वह आदमी बहुत तेज़ी से काम कर रहा था, हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था, और इससे पहले कि किसी को किसी चीज़ की ज़रूरत हो सब कुछ फिर से भर रहा था। मैंने देखा कि एक खाद्य सेवा अनुभवी के रूप में, हर चीज पर उसका निरंतर ध्यान था । सब कुछ सही था क्योंकि यह आदमी ईमानदारी से काम कर रहा था—भले ही केवल कुछ लोगों ने ही ध्यान दिया हो।
इस आदमी को इतनी सावधानी से काम करते हुए देखकर, मुझे थिस्सलुनिकियों को कहे गए पौलुस के शब्द याद आए l “चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो; ताकि बाहरवालों से आदर प्राप्त करो” (1 थिस्सलुनीकियों 4:11-12)। पौलुस ने समझा कि यह इस बात की शांत गवाही देता है कि कैसे सुसमाचार दूसरों के लिए सेवा के छोटे-से प्रतीत होने वाले कार्य को भी गरिमा और उद्देश्य के साथ प्रेरित कर सकता है
मैं नहीं जानता कि जिस व्यक्ति को मैंने उस दिन देखा था वह यीशु में विश्वास करने वाला था या नहीं । लेकिन मैं आभारी हूं कि उसके शांत लगन (परिश्रम) ने मुझे शांत विश्वसनीयता(ईमानदारी) के साथ जीने के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने की याद दिलाई जो उसके विश्वसनीय तरीकों को दर्शाता है।
ध्यान भटकाने की इच्छा
छोटे स्क्रीन पर प्रसारित होने वाली छवियों, विचारों और सूचनाओं के निरंतर विस्फोट से थक कर मैंने अपना फ़ोन नीचे रख दिया। फिर, मैंने उसे उठाया और फिर से चालू कर दिया। क्यों?
अपनी 2013 की पुस्तक द शैलोज़(The Shallows) में, निकोलस कार ने वर्णन किया है कि कैसे इंटरनेट ने मौनता/शांति के साथ हमारे रिश्ते को आकार दिया है : “नेट जो कर रहा है वह एकाग्रता और चिंतन की मेरी क्षमता को ख़त्म कर रहा है। चाहे मैं ऑनलाइन हूं या नहीं, मेरा दिमाग अब उसी तरह से जानकारी लेने की उम्मीद करता है जैसे नेट उसे वितरित करता है : कणों की तेजी से चलती धारा में। एक समय मैं शब्दों के समुद्र में स्कूबा गोताखोर(श्वासयंत्र के साथ गोता लगानेवाला) था। अब मैं जेट स्की(पानी पर चलने वाला एक छोटा स्वचालित वाहन) पर सवार व्यक्ति की तरह सतह पर तेजी से चलता हूं।''
मानसिक जेट स्की पर जीवन बिताना स्वस्थ नहीं लगता। लेकिन हम स्थिर आत्मिक जल में गहराई से गोता लगाने के लिए, धीमे कैसे हो सकते हैं?
भजन 131 में, दाऊद लिखता हैं, “मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है” (पद.2) l दाऊद के शब्द मुझे याद दिलाते हैं कि मेरे पास जिम्मेदारी है। आदत बदलने की शुरुआत मेरे शांत रहने के चुनाव से होता है—भले ही मुझे वह चुनाव बार-बार करना पड़े। हालाँकि, धीरे-धीरे, हम परमेश्वर के संतुष्टिदायक भलाई का अनुभव करते हैं। एक छोटे बच्चे की तरह, हम संतोष में आराम करते हैं, यह याद रखते हुए कि वह ही अकेले आशा प्रदान करता है (पद.3)—आत्मिक संतुष्टि जिसे कोई स्मार्टफोन ऐप नहीं छू सकता है और कोई सोशल मीडिया साइट प्रदान नहीं कर सकता।
पाप फिर स्मरण न करना
मैंने कभी बर्फ नहीं देखी। लेकिन मुझे यह महसूस हुआ। पिकअप का पिछला हिस्सा जो मैं चला रहा था—मेरे दादा जी का— मछली की पूंछ की तरह फिसल गया। एक घुमाव, दो, तीन— और मैं हवा में पंद्रह फुट ऊंचे तटबंध से उड़ रहा था। मुझे याद है कि मैं सोच रहा था, अगर मैं मरने वाला नहीं होता तो यह बहुत शानदार होता। एक क्षण बाद, ट्रक खड़ी ढलान में फिसल गया और नीचे लुढ़क गया। मैं कुचली हुई गाड़ी से बिना किसी चोट के रेंगकर बाहर निकल गया।
1992 की दिसंबर की सुबह ट्रक पूरी तरह जलकर खाक हो गया। परमेश्वर ने मुझे बचा लिया था । लेकिन मेरे दादा जी के बारे में क्या? वह क्या कहेंगे? दरअसल, उन्होंने ट्रक के बारे में एक शब्द नहीं कहा। एक भी नहीं। कोई डांट-फटकार नहीं थी, कोई पुनर्भुगतान योजना नहीं थी, कुछ भी नहीं था। बस माफ़ी। और दादा जी की मुस्कान कि मैं ठीक था।
मेरे दादा जी की अनुग्रह मुझे यिर्मयाह 31 में परमेश्वर की अनुग्रह की याद दिलाती है। वहां, उनकी जबरदस्त असफलताओं के बावजूद, परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक पुनर्स्थापित रिश्ते का वादा करते हैं, यह कहते,"मैं उनका अधर्म क्षमा करूँगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूँगा।"(पद 34)
मुझे यकीन है कि मेरे दादा जी कभी नहीं भूले होंगे कि मैंने उनके ट्रक को बर्बाद कर दिया था। लेकिन उसने बिल्कुल वैसा ही व्यवहार किया जैसे परमेश्वर यहाँ करते है, इसे याद नहीं रखा, मुझे शर्मिंदा नहीं किया, मुझसे उस ऋण को चुकाने के लिए काम नहीं कराया जिसका मैं उचित हकदार था। जैसा कि परमेश्वर कहते हैं कि वह ऐसा करेंगे, मेरे दादा जी ने इसे याद नहीं रखने का फैसला किया, जैसे कि मैंने जो विनाशकारी काम किया था वह कभी हुआ ही नहीं।
सूची में सबसे पहले
के लिए मैं लगभग अपने बिस्तर से कूद कर बाहर निकला । बच्चों को स्कूल ले जाना । चेक । काम पर जाना। चेक । मैंने अपनी “काम को करने" की सूची लिखने में पूरा ज़ोर लगा दिया, जिसमें व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्य, बर्फीले तूफान जैसी सूची की तरह एक साथ गिरे:
“. . . 13. लेख संपादित करना 14. ऑफिस साफ़ करना 15. रणनीतिक टीम योजना बनाना. 16. टेक ब्लॉग लिखना. 17. बेसमेंट साफ़ करना 18. प्रार्थना करना।” जब मैं अठारहवें नंबर पर पहुंचा, तब मुझे याद आया कि मुझे परमेश्वर की मदद की ज़रूरत है। लेकिन काफी दूर अकेले जाने के बाद मुझे यह एहसास होता कि मैं तो अपनी खुद की गति तय करने की कोशिश कर रहा हूं I
यीशु जानते थे; उन्हें पता था कि हमारे दिन, लगातार होने वाली अत्याधिक आवश्यकता के सागर में एक-दूसरे से टकराते रहेंगे । इसलिए उन्होंने निर्देश दिया, “पहले तुम परमेश्वर के राज्य और उसके धर्म की खोज करो, तो ये सब वस्तुएँ भी तुम्हें मिल जाएंगी।“ (मत्ती 6:33)। यीशु के शब्दों को एक आदेश के रूप में सुनना स्वाभाविक है। और वे हैं भी। लेकिन यहां और भी कुछ है—एक निमंत्रण। मत्ती 6 में, यीशु हमें दिन-ब-दिन विश्वास के जीवन के लिए दुनिया की उत्तेजित करने वाली चिंता (पद 25-32) का आदान-प्रदान करने के लिए आमंत्रित करते है। परमेश्वर, अपनी कृपा से, हमारे सभी दिनों में हमारी मदद करते है - तब भी जब हम अपने जीवन को उनके दृष्टिकोण से देखने से पहले ही अपनी काम करने की सूची के अठारहवें नंबर पर पहुँच जाते है I
अज्ञात मार्ग
शायद मुझे एक दौड़ में ब्रायन से नहीं जुड़ना चाहिए था l मैं विदेश में था, और अज्ञान था कि हम कहाँ या कितनी दूर जाएंगे या इलाका कैसा होगा l साथ ही, वह एक तेज धावक था l क्या उसके साथ बने रहने की कोशिश में मेरा टखना तो नहीं मुड़ जाएगा? मुझे ब्रायन पर जो रास्ता जानता था भरोसा करना ही था l आरम्भ में, मैं बहुत चिंतित हो गया l पगडण्डी उबड़-खाबड़, असमतल भूमि पर घने जंगल से होकर गुजरती थी l शुक्र है कि ब्रायन मुझ पर नज़र रखता रहा और मुझे आगे के असमतल रास्ते के बारे में चेतावनी देता रहा l
शायद बाइबल के समय में कुछ लोगों ने अपरिचित क्षेत्र में प्रवेश करते समय ऐसा ही महसूस किया था—कनान में अब्राहम, जंगल में इस्राएली, और यीशु के चेले सुसमाचार सुनाने के अपने मिशन पर l उन्हें अंदाजा नहीं था कि यात्रा कैसी होगी, सिवाय इसके कि यह निश्चित ही कठिन होगी l लेकिन उनका नेतृत्व करने वाला आगे का रास्ता जनता था l उन्हें भरोसा करना था कि परमेश्वर उन्हें सामना करने की शक्ति देगा और उनकी देखभाल करेगा l वे उसका अनुसरण कर सकते थे क्योंकि वह जानता था कि आगे क्या है l
इस आश्वासन ने दाऊद को यह दिलासा दिया जब वह भाग रहा था l बड़ी अनिश्चितता के बावजूद, उसने परमेश्वर से कहा : “जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो . . . तब तू मेरा पथ जानता [है]” (भजन संहिता 142:3) l जीवन में कई बार हम डरते हैं कि आगे क्या है l परन्तु हम यह जानते हैं कि हमारे संग चलने वाला हमारा परमेश्वर, मार्ग जानता है l
पथ पर स्वतंत्रता
बीप बेसबॉल में, नेत्रहीन खिलाड़ी यह जानने के लिए कि क्या करना है और कहाँ जाना है, बीपिंग बॉल या बज़िंग बेस को सुनते हैं l आँखों पर पट्टी वाला बल्लेबाज (दृष्टिहीनता की विभिन्न डिग्री के कारण) और देखनेवाला बॉल फेंकनेवाला एक ही टीम में होते हैं l बल्लेबाज बीपिंग बॉल को मारकर, बीपिंग बेस की ओर दौड़ता हैं l बल्लेबाज आउट हो जाता है यदि एक क्षेत्ररक्षक गेंद को बल्लेबाज के बेस तक पहुँचने से पूर्व पकड़ लेता है; अन्यथा, बल्लेबाज एक रन बनाता है l एक खिलाड़ी ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि वह “दौड़ने में बड़ी स्वतंत्रता” महसूस करता है क्योंकि वह जानता है कि एक स्पष्ट पथ और दिशा है l
यशायाह की पुस्तक हमें बताती है कि परमेश्वर, “जो स्वयं सच्चाई है, वह धर्मी की अगुवाई करता है” (26:7) l जब यह लिखी गयी थी, तब इस्राएलियों का मार्ग बिलकुल चौरस नहीं था; वे अनाज्ञाकारिता के लिए ईश्वरीय न्याय सह रहे थे l यशायाह ने उन्हें विश्वास और आज्ञाकारिता में चलने का उपदेश दिया—जो अक्सर कठिन लेकिन सुगम मार्ग होता है l परमेश्वर के “नाम के स्मरण” के लिए लालायित होना (पद.8) उनके दिलों का केंद्र होना था l
यीशु में विश्वासी होकर, हम परमेश्वर के बारे में और अधिक जानते हैं और उसके विश्वासयोग्य चरित्र में अपना भरोसा बढ़ाते हैं क्योंकि हम आज्ञा मानकर उसके मार्गों का पालन करते हैं l हो सकता है कि जीवन में हमारा मार्ग हमेशा सहज न दिखे या महसूस हो, लेकिन हम भरोसा करके निश्चित हैं कि परमेश्वर साथ है और रास्ता बना रहा है l हम भी स्वतंत्रता महसूस कर सकते हैं जब हम अपने लिए परमेश्वर के सर्वोत्तम मार्ग पर आज्ञाकारिता से दौड़ते हैं l
सब कुछ खोना
इससे खराब समय नहीं हो सकता था l पुल, स्मारक और बड़ी इमारतें बनाकर छोटी सफलता प्राप्त करने के बाद, सीज़र नया प्रयास करना चाहता था l इसलिए उसने अपना पहला व्यवसाय बेच कर पैसा बैंक में जमा कर, जल्द ही इसे फिर से निवेश करने की योजना बना रहा था l तब ही, सरकार ने निजी बैंक खातों में रखी संपत्तियों को जब्त कर लिए l एक पल में, सीजर की जीवन भर की बचत चली गयी l
अन्याय को शिकायत का कारण न मानकर, सीजर ने परमेश्वर के मार्गदर्शन में पुनः आरम्भ किया l
एक भयानक पल में, अय्यूब ने अपनी संपत्ति से कहीं अधिक खो दिया l उसने अपने अधिकाँश सेवकों और अपने सभी बच्चों को खो दिया (अय्यूब 1:13-22) l फिर उसका स्वास्थ्य बिगड़ गया (2:7-8) l अय्यूब की प्रतिक्रिया हमारे लिए एक असामयिक उदाहरण बनी हुयी है l उसने प्रार्थना की, “मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है” (1:21) l अध्याय समाप्त होता है, “इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मुर्खता से दोष लगाया” (पद.22) l
अय्यूब की तरह, सीज़र ने परमेश्वर पर भरोसा करके कुछ ही वर्षों में अधिक सफल व्यवसाय खड़ा कर लिया l उसकी कहानी अय्यूब के परिणाम के समान है (देखें अय्यूब 42) l लेकिन भले ही सीज़र कभी भी आर्थिक रूप से ठीक नहीं हुआ, वह जानता था कि उसका असली खज़ाना वैसे भी इस पृथ्वी पर नहीं था (मत्ती 6:19-20) l वह अभी भी ईश्वर पर भरोसा करता रहेगा l
निराशा के साथ पेश आना
“जीवन भर की यात्रा” के लिए पूरे साल पैसे जुटाने के बाद, अमेरिका के ओक्लाहोमा हाई स्कूल के वरिष्ठ नागरिक हवाई अड्डे पहुँचकर यह जाने कि उनमें से कई ने एक फर्जी एयरलाइन से टिकट खरीदे थे l एक स्कूल प्रशासक ने कहा, “यह पीड़ादायक है l” फिर भी, भले ही उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ी विद्यार्थियों ने “इसका अधिकतम लाभ उठाने” का निर्णय लिया l उन्होंने पास के आकर्षणों में दो दिनों का आनंद लिया, जिन्होंने टिकट दान किये l
विफल या बदली हुयी योजनाओं से निपटना निराशाजनक या दिल तोड़ने वाला भी हो सकता है l खासकर जब हम योजना बनाने में समय, पैसा या भावनाओं का निवेश किए हों l राजा दाऊद की “इच्छा तो थी कि (वह) यहोवा के वाचा के संदूक के लिए . . एक भवन [बनाए]” ( 1 इतिहास 28:2), परन्तु परमेश्वर ने कहा : “तू मेरे नाम का भवन बनाने न पाएगा . . . तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे भवन . . . को बनाएगा” (पद. 3, 6) l दाऊद निराश नहीं हुआ l इस्राएल पर राजा होने के लिए उसने परमेश्वर की स्तुति की, और सुलैमान को मंदिर की योजनाओं को पूरा करने के लिए दिया (पद.11-13) l उसने उसे उत्साहित किए : “हिवाव बाँध और दृढ़ होकर इस काम में लग जा . . . क्योंकि यहोवा परमेश्वर . . . तेरे संग है” (पद. 20) l
योजनाएँ विफल होने का, चाहे कोई भी कारण हो, हम अपनी निराशा परमेश्वर के सामने लाएँ क्योंकि उसको [हमारा] ध्यान है” (1 पतरस 5:7) l वह अनुग्रह के साथ हमारी निराशा को दूर करने में हमारी सहायता करेगा l
विनम्र लेकिन आशान्वित
चर्च आराधना के अंत में पास्टर के निमंत्रण पर, लेट्रीस आगे गयी l जब उसे मंडली का अभिवादन करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उसके द्वारा बोले गए वज़नी और अनोखे शब्दों के लिए कोई भी तैयार नहीं था l वह केंटकी, अमेरिका से स्थानांतरित हो गयी थी, जहाँ दिसम्बर 2021 में विनाशकारी बवंडर ने उसके परिवार के सात सदस्यों की जान ले ली थी l “मैं अभी भी मुस्कुरा सकती हूँ क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ है,” उसने कहा l यद्यपि आजमाइश से घायल हुयी, उसकी गवाही उन लोगों के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन थी जो स्वयं की चुनौतियों का सामना कर रहे थे l
भजन 22 में दाऊद के शब्द (जो यीशु की पीड़ा की ओर संकेत करते हैं) एक प्रताड़ित व्यक्ति के हैं जो परमेश्वर द्वारा त्यागा हुआ महसूस करता है (पद.1), दूसरों द्वारा तिरस्कृत और उपहास किया जाता है (पद.6-8), और आक्रमणकारियों से घिरा हुआ है (पद. 12-13) l उसने कमज़ोर और थका हुआ महसूस किया (पद.14-18)—लेकिन वह निराश नहीं था l “परन्तु हे यहोवा, तू दूर न रह! हे मेरे सहायक, मेरी सहायता के लिए फुर्ती कर!” (पद.19) l आपकी वर्तमान चुनौती—हालाँकि संभवतः दाऊद या लेट्रीस की तरह एक ही किस्म की नहीं है—उतनी ही असली है l और पद 24 के शब्द उतने ही अर्थपूर्ण हैं : “उसने दुखी को तुच्छ नहीं जाना; . . . पर जब उसने उसकी दोहाई दी, तब उसकी सुन ली l” और जब हम परमेश्वर की सहायता का अनुभव करते हैं, तो आइए हम उसकी भलाई की घोषणा करें ताकि दूसरे इसके बारे में सुन सकें (पद.22) l