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Articles by एलिसन कीडा

प्रार्थना के लिए एक आह्वान

अब्राहम लिंकन ने अपने एक मित्र को गुप्त रूप से कहा, "मैं कई बार इस दबाने वाला दृढ़ निश्चय के कारण घुटनों पर बैठा हूँ क्योंकि मेरे पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं थी ।" अमेरिकी गृहयुद्ध के भयावह वर्षों में, राष्ट्रपति लिंकन ने न केवल उत्साही प्रार्थना में समय बिताया, बल्कि पूरे देश को अपने साथ शामिल होने के लिए भी बुलाया। 1861 में, उन्होंने "अपमान, प्रार्थना और उपवास" का दिन" घोषित किया। और उन्होंने 1863 में फिर से ऐसा करते हुए कहा, "यह राष्ट्रों के साथ-साथ मनुष्यों का भी कर्तव्य है कि वे परमेश्वर की सर्वशक्तिमान शक्ति पर अपनी निर्भरता रखें: विनम्र दुःख के साथ अपने पापों और अपराधों को स्वीकार करें, फिर भी आश्वस्त आशा के साथ कि सच्चा पश्चाताप दया और क्षमा की ओर ले जाएगा।"

इस्राएलियों के सत्तर वर्ष तक बेबीलोन में बंदी रहने के बाद, राजा अर्तक्षत्र ने इस्राएलियों को यरूशलेम लौटने की अनुमति दी, बचे हुये कुछ लोग वापस लौटे। और जब नहेम्याह, जो एक इस्राएली (नहेम्याह 1:6) और बेबीलोन के राजा का पिलानेवाला था(पद.11) को पता चला कि जो लोग लौट आए थे वे "बड़े दुर्दशा में पड़े है, और उनकी निंदा होती है" (पद.3), तो वह "बैठ कर रोने लगा" और कितने दिन तक विलाप करता, और . . . प्रार्थना करता रहा (पद.4)। उसने अपने राष्ट्र के लिए दिन रात प्रार्थना की (पद. 5-11)। और बाद में, उसने भी अपने लोगों को उपवास और प्रार्थना करने के लिए बुलाया (9:1-37)।

सदियों बाद, रोमन साम्राज्य के दिनों में, प्रेरित पौलुस ने इसी तरह अपने पाठकों से अधिकार प्राप्त लोगों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया (1 तीमुथियुस 2:1-2)। हमारा परमेश्वर अभी भी उन मामलों के बारे में हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है जो दूसरों के जीवन को प्रभावित करते हैं। एलिसन कीडा

परीक्षाओं पर विजय पाना

 

ऐनी गरीबी और दुःख में पली बढ़ी। उसके दो भाई-बहनों की मृत्यु बचपन में ही हो गयी। पाँच साल की उम्र में, एक नेत्र रोग के कारण वह आंशिक रूप से अंधी हो गई और पढ़ने या लिखने में असमर्थ हो गई। जब ऐनी आठ वर्ष की थी, तब उसकी माँ की मृत्यु टी.बी. से हो गई। कुछ ही समय बाद, उसके दुर्व्यवहारी पिता ने अपने तीन जीवित बच्चों को छोड़ दिया। सबसे छोटे को रिश्तेदारों के साथ रहने के लिए भेजा गया, लेकिन ऐनी और उसका भाई, जिम्मी, सरकार द्वारा संचालित टेवक्सबरी अल्म्सहाउस में चले गए, जो एक जीर्ण-शीर्ण (पुराना), भीड़भाड़ वाला अनाथालय था; कुछ महीनों बाद जिम्मी की मृत्यु हो गई।

चौदह वर्ष की उम्र में ऐनी की परिस्थितियाँ बेहतर हो गईं । उसे अंधे लोगों के स्कूल में भेजा गया, जहाँ उसने अपनी दृष्टि सुधारने के लिए सर्जरी करवाई और पढ़ना-लिखना सीखा। हालाँकि उसे फिट होने में संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उसने शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और स्नातक की उपाधि प्राप्त की। आज हम उसे हेलेन केलर की शिक्षिका और साथी ऐनी सुलिवन के रूप में सबसे अच्छी तरह से जानते हैं। प्रयास, धैर्य और प्रेम के माध्यम से, ऐनी ने अंधी और बहरी हेलेन को बोलना, ब्रेल पढ़ना और कॉलेज से स्नातक होना सिखाया।

यूसुफ को भी कठिन परीक्षा जीतना पड़ा : सत्रह साल की उम्र में, उसके ईर्ष्यालु भाइयों ने उसे गुलामी में  बेच दिया और बाद में वह ग़लत तरीके से कैद हुआ (उत्पत्ति 37; 39-41)। फिर भी परमेश्वर ने मिस्र और उसके परिवार को अकाल से बचाने के लिए उसका उपयोग किया (50:20)।

हम सब परीक्षाओं और परेशानियों का सामना करते हैं। लेकिन जिस तरह परमेश्वर ने युसूफ और ऐनी को दूसरों के जीवन पर काबू पाने और गहरा प्रभाव डालने में मदद किया, वह हमारी सहायता और उपयोग कर सकते हैं। मदद और मार्गदर्शन के लिए उससे पूछें। वह देखता है और सुनता है।

—एलिसन कीडा

अमूल्य परिणाम

 
पिछले तीन सालों से हर स्कूल के दिन कोलीन अपने बच्चों का स्वागत करने के लिए अलग-अलग पोशाक या मुखौटा पहनती रही हैं, जब वे हर दोपहर स्कूल बस से बाहर निकलते हैं। इससे बस में मौजूद हर किसी का दिन खुशनुमा हो जाता है - बस ड्राइवर सहित: "[वह] मेरी बस में मौजूद बच्चों के लिए बहुत खुशी लेकर आती है, यह अद्भुत है। मुझे यह बहुत पसंद है।" कोलीन के बच्चे भी इस बात से सहमत हैं। 
 
यह सब तब शुरू हुआ जब कोलीन ने बच्चों को पालना शुरू किया। यह जानते हुए कि माता-पिता से अलग होना और नए स्कूल में जाना कितना मुश्किल है, उसने बच्चों का स्वागत वेशभूषा में करना शुरू कर दिया। ऐसा करने के तीन दिन बाद, बच्चे नहीं चाहते थे कि वह रुके। इसलिए कोलीन  ऐसा करती रही । यह थ्रिफ्ट शॉप्स में समय और पैसे का निवेश था, लेकिन, जैसा कि रिपोर्टर मेरेडिथ टेरहार ने बताया, इससे "अनमोल परिणाम मिला: खुशी।" 
 
राजा सुलैमान द्वारा अपने बेटे को दी गई बुद्धिमानी और मजाकिया सलाह की एक किताब के बीच एक पद इस माँ की हरकतों के परिणामों को सारांशित करती है: "मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं।" (नीतिवचन 17:22)। अपने सभी बच्चों (जैविक, गोद लिए गए और पालक) को खुश करके, वह कुचली हुई आत्माओं को रोकने की उम्मीद करती थी। सच्चे और स्थायी आनंद का स्रोत पवित्र आत्मा के माध्यम से परमेश्वर है (लूका 10:21; गलातियों 5:22)। आत्मा हमें परमेश्वर के प्रकाश को चमकाने में सक्षम बनाती है जब हम दूसरों को खुशी देने का प्रयास करते हैं, एक खुशी जो परीक्षणों का सामना करने के लिए आशा और ताकत प्रदान करती है।   
 
— एलिसन किडा  
 

बगीचे में

मेरे पिताजी को बाहर, परमेश्वर की सृष्टि के बीच में रह कर कैंपिंग करना, मछली पकड़ना और रॉक-क्लाइम्बिंग करना पसंद था। उन्हें अपने आँगन और बगीचे में काम करने में भी आनंद आता था। लेकिन इसमें बहुत मेहनत लगी! उन्होंने छँटाई, गुड़ाई, बीज या फूल रोपने, खरपतवार निकालने, लॉन की घास काटने और आँगन तथा बगीचे में पानी देने में घंटों बिताये। परिणाम इसके योग्य थे - एक सुंदर लॉन, स्वादिष्ट टमाटर और सुंदर शांति गुलाब (peace roses)। हर साल वह गुलाबों को जमीन के करीब से काटते थे, और हर साल वे वापस उग आते थे और हमें अपनी सुगंध और सुंदरता से भर देते थे। 
उत्पत्ति में, हम अदन के बगीचे के बारे में पढ़ते हैं जहाँ आदम और हव्वा रहते थे, फले-फूले और परमेश्वर के साथ रहते थे । वहाँ, परमेश्वर ने "भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे है उगाए” (उत्पत्ति 2:9)। मैं कल्पना करता हूं कि उस आदर्श बगीचे में सुंदर, मीठी महक वाले फूल भी शामिल थे - शायद कांटों के बिना गुलाब के फूल भी  ! 
परमेश्वर के विरुद्ध आदम और हव्वा के विद्रोह के बाद, उन्हें बगीचे से निकाल दिया गया और फिर उन्हें अपने बगीचे लगाने और उनकी देखभाल करने की आवश्यकता पड़ी, जिसका अर्थ था कठोर भूमि को तोड़ना, कांटों से लड़ना और अन्य चुनौतियाँ (3:17-19, 23-24)I फिर भी परमेश्वर ने उनका भरण पोषण करना जारी रखा (पद 21)। और उसने हमें उसकी ओर आकर्षित करने के लिए सृष्टि की सुंदरता के बिना मानवता को नहीं छोड़ा   (रोमियों 1:20) बगीचे में फूल हमें परमेश्वर  के निरंतर प्रेम और नवीनीकृत सृष्टि के वादे की याद दिलाते हैं - आशा और आराम के प्रतीक! 
-एलीसन काइडा 

करुणामय कार्य

 
गर्भपात से पीड़ित होने के महीनों बाद, वैलेरी ने गैरेज बिक्री करने का फैसला किया। कुछ मील की दूरी पर रहने वाले उसके एक पड़ोसी शिल्पकार, जेरल्ड ने बड़ी उत्सुकता से उससे बच्चे का वह पालना खरीद लिया जिसे वह बेच रही थी। वहाँ पर बात करते हुए, उसकी पत्नी को वैलेरी के गर्भपात के बारे में मालूम हुआ। घर जाते हुए रास्ते में उसकी स्थिति के बारे में सुनने के बाद, जेरल्ड ने वैलेरी के उस पालने का उपयोग करके उसके लिए एक उपहार बनाने का निर्णय लिया। एक सप्ताह के बाद, उसने आँसुओं के साथ वैलेरी को एक सुंदर बेंच भेंट की। वैलेरी ने कहा कि “संसार में अच्छे लोग भी हैं, और उसका प्रमाण यहाँ पर है।” 
वैलेरी की तरह, रूत और नाओमी को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। नाओमी के पति और दो पुत्रों की मृत्यु हो गई थी। और अब उसके तथा उसकी दुखी बहू रूत के कोई वारिस न थे, और न ही कोई उनका भरण-पोषण करनेवाला था (रूत 1:1-5)। यहीं पर बोअज का आना हुआ। जब रूत बचे हुए अनाज को चुनने के लिए एक खेत में गई, तो खेत के मालिक बोअज ने उसके बारे में पूछा। जब उसे पता चला कि वह कौन है, तो वह उसके प्रति दयालु हुआ (2:5-9)। रूत ने चकित होकर पूछा, “क्या कारण है कि तूने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि करके मेरी सुधि ली है?” (पद 10 ) बोआज़ ने उत्तर दिया कि “जो कुछ तूने पति की मृत्यु के बाद अपनी सास से किया है...यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।” (पद 11) 
बाद में बोअज ने रूत से विवाह किया और नाओमी की देखभाल की (4 अध्याय)। उनके विवाह से, दाऊद और यीशु के एक पूर्वज का जन्म हुआ। जैसे दूसरे के दुःख को बदलने में सहायता करने के लिए परमेश्वर ने जेरल्ड और बोअज को उपयोग किया, वैसे ही वह पीड़ा में पड़े दूसरे लोगों के प्रति करुणा और सहानुभूति प्रकट करने के लिए हमारे माध्यम से भी काम कर सकता है।  
—एलीसन काइडा 

निराशा से निपटना

पूरे साल “जीवन भर की यात्रा” के लिए पैसे जुटाने के बाद, ओक्लाहोमा हाई स्कूल के वरिष्ठ छात्र हवाई अड्डे पर पहुंचे और उन्हें पता चला कि उनमें से कई ने एक फर्जी कंपनी से टिकट खरीदे थे। एक स्कूल प्रशासक ने कहा, “यह दिल तोड़ने वाला है।” फिर भी, भले ही उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ी, छात्रों ने “इसका पूरा लाभ उठाने” का फैसला किया। उन्होंने पास के आकर्षणों में दो दिन का आनंद लिया, जिन्होंने टिकट दान किए थे। 
असफल या बदली हुई योजनाओं से निपटना निराशाजनक या दिल तोड़ने वाला भी हो सकता है। खासकर तब जब हमने योजना बनाने में समय, पैसा या भावनाएँ निवेश की हों। राजा दाऊद के मन में परमेश्वर के लिए एक मंदिर बनाने की इच्छा थी (1 इतिहास 28:2), लेकिन परमेश्वर ने उससे कहा: "तू मेरे नाम के लिए भवन नहीं बनाना... तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरा भवन बनाएगा" (पद 3, 6)। दाऊद निराश नहीं हुआ। उसने इस्राएल का राजा बनने के लिए परमेश्वर की स्तुति की और उसने सुलैमान को मंदिर की योजनाएँ पूरी करने के लिए दीं ( पद 11-13)। ऐसा करते समय, उसने उसे प्रोत्साहित किया: "दृढ़ और साहसी बनो और काम करो... क्योंकि प्रभु परमेश्वर... तुम्हारे साथ है" ( पद 20)। जब हमारी योजनाएँ विफल हो जाती हैं, चाहे कारण कुछ भी हो, हम अपनी निराशा परमेश्वर के सामने ला सकते हैं जो "हमारी परवाह करता है" (1 पतरस 5:7)। वह हमारी निराशा को शालीनता से संभालने में हमारी मदद करेंगे। 
 
—एलिसन कीडा 

हमारी पसंद मायने रखती है

 
न्यू जर्सी में एक तैराकी प्रशिक्षक ने एक कार को न्यूर्क खाड़ी में डूबते हुए देखा और अंदर बैठे ड्राइवर को चिल्लाते हुए सुना “मैं तैर नहीं सकता” और उसकी एसयूवी तेज़ी से गंदे पानी में डूब गई। किनारे से भीड़ देख रही थी, एंथनी किनारे पर चट्टानों की ओर भागा, अपना कृत्रिम पैर निकाला और 68 वर्षीय व्यक्ति को बचाने के लिए पानी में कूद गया और उसे सुरक्षित किनारे पर पहुँचाया। एंथनी की निर्णायक कार्रवाई की बदौलत एक और व्यक्ति बच गया। 
  
हमारी पसंद मायने रखती है। कुलपिता (वंश का प्रधान) याकूब पर विचार करें, जो कई पुत्रों का पिता था, जिसने खुले तौर पर अपने सत्रह वर्षीय पुत्र यूसुफ का पक्ष लिया। उसने मूर्खता से यूसुफ को "एक रंग बिरंगा अंगरखा " बना दिया (उत्पत्ति 37:3)। परिणाम? यूसुफ के भाई उससे घृणा करने लगे (पद. 4); और जब अवसर मिला, तो उन्होंने उसे गुलामी के लिए बेच डाला (पद 28)। फिर भी, क्योंकि यूसुफ मिस्र में पहुंच गया, परमेश्वर ने उसे सात साल के अकाल के दौरान याकूब के परिवार और कई अन्य लोगों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया - यूसुफ के भाइयों द्वारा उसे नुकसान पहुँचाने के इरादे के बावजूद (देखें 50:20)। जिस विकल्प ने इसे गति प्रदान की वह यूसुफ का सम्मानजनक होने और पोतीफर की पत्नी से दूर जाने का निर्णय था (39:1-12)। इसका परिणाम जेल (39:20) और फिरौन के साथ एक अंतिम मुलाकात (अध्याय 41) था।   
एंथोनी को भले ही ट्रेनिंग का फायदा मिला हो, लेकिन फिर भी उसे चुनाव करना था। जब हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं और उसकी सेवा करना चाहते हैं, तो वह हमें जीवन को पुष्ट करने वाले और ईश्वर को सम्मान देने वाले विकल्प लेने  में मदद करता है। यदि हमारे पास पहले से नहीं है, तो हम यीशु पर भरोसा करके शुरुआत कर सकते हैं। 
 

जोर से हंसना

अमेरिकी कॉमेडियन और लेखक जॉन ब्रैनियन ने कहा,  “हमने हँसी के बारे में नहीं सोचा था;  यह हमारा विचार नहीं था। यह हमें परमेश्वर ने दी, जो जानता था कि हमें जीवन से गुजरने के लिए इसकी आवश्यकता होगी । क्योंकि वह जानता था कि हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, वह जानता था कि हमें संघर्ष करना होगा,  वह जानता था कि बहुत कुछ होगा । . . . हँसना एक उपहार है।” 
 
परमेश्वर के  बनाये जीवों पर जल्दी से एक नज़र डालने से हंसी आ सकती है; चाहे उनकी विचित्रताओं के कारण— (जैसे बत्तख के मुँह की तरह प्लैटिपस/platypus) या अद्भुत (जैसे चंचल ऊदबिलाव) । परमेश्वर ने समुद्र में रहने वाले स्तनधारियों और लंबी टांगों वाले पक्षियों को बनाया जो उड़ नहीं सकते। परमेश्वर स्पष्ट रूप से हास्य की भावना रखते हैं;  और क्योंकि हम उसके स्वरूप में सृजे गए हैं,  हमें भी हमें हँसी का आनंद मिला  है । 
हम सबसे पहले बाइबल में अब्राहम और सारा की कहानी में हँसी शब्द देखते हैं। परमेश्वर ने इस वृद्ध दंपत्ति को एक बच्चे का वादा किया : “तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा ” (उत्पत्ति 15:4) । और परमेश्वर ने कहा था,  “आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन . . . तेरा वंश ऐसा ही होगा” (पद.5) l जब सारा ने आखिरकार नब्बे वर्ष की उम्र में जन्म दिया,  तो इब्राहीम ने अपने बेटे का नाम इसहाक रखा,  जिसका अर्थ है “हँसी l” जैसा कि सारा ने कहा,  “परमेश्‍वर ने मुझे हँसाया है,  और जो कोई इस बात को सुनेगा वह मेरे साथ हँसेगा” (21:6) l उसे आश्चर्य हुआ कि वह अपनी उम्र में एक बच्चे का पालन-पोषण कर सकती है! जब उसने सुना कि वह बच्चे को जन्म देगी (18:12) तो परमेश्वर ने उसकी शक्की हँसी को पूर्ण आनन्द की हँसी में बदल दिया । 
हँसी के उपहार के लिए परमेश्वर का धन्यवाद हो!  
 

परमेश्वर सुन रहा है

चक(Chuck), एक अभिनेता और मार्शल कलाकार(युद्ध-विद्या/कला में प्रशिक्षित) ने अपनी माँ को उनके सौंवे जन्मदिन पर यह बताकर सम्मानित किया कि उनके आध्यात्मिक परिवर्तन में उनकी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है l “माँ दृढ़ता और विश्वास का एक उदाहरण रही है,” उसने लिखाl महामंदी(Great Depression) के दौरान उन्होंने तीन बेटों को अपने दम पर पाला; दो पतियों, एक बेटा, एक सौतेले बेटा और पोते—पोतियों की मौत का सामना किया; और कई ऑपरेशन(surgeries) झेले l “[उन्होंने] सुख दुःख में, जीवन भर मेरे लिए प्रार्थना की हैl” उसने आगे कहा, “जब मैं हॉलीवुड(hollywood) में अपनी आत्मा लगभग हार चुका था, तो वह घर पर मेरी सफलता और उद्धार के लिए प्रार्थना कर रही थीl” उसने निष्कर्ष निकाला, “मैं [अपनी माँ] को परमेश्वर की मदद करने के लिए धन्यवाद देता हूँ कि मुझे वह सब कुछ बनाने में की जो मैं कर सकता हूँ और जो मुझे होना चाहिएl” 

चक की माँ की प्रार्थनाओं ने उसे उद्धार पाने में—और एक धर्मपरायण पत्नी पाने में उसकी मदद की l उसने अपने बेटे के लिए बहुत प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन लीl हमें हमेशा अपनी प्रार्थनाओं का उत्तर उस तरह से नहीं मिलता जैसा हम चाहते हैं, इसलिए हम प्रार्थना को जादू की छड़ी के रूप में उपयोग नहीं कर सकते l हालाँकि, याकूब हमें आश्वस्त करता है कि “धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है” (5:16)  इस माँ की तरह, हमें बीमारों और मुसीबत में पड़े लोगों के लिए प्रार्थना करना जारी रखना है (पद.13-15) जब, उसकी तरह, हम प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर के साथ बातचीत करते हैं, तो हमें प्रोत्साहन और शांति और आश्वासन मिलता है कि आत्मा काम कर रही है l 

क्या आपके जीवन में किसी को उद्धार अथवा चंगाई या सहायता चाहिए? विश्वास में अपनी प्रार्थना को परमेश्वर तक उठाएं l वह सुन रहा है l