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Articles by एलिसन कीडा

मुड़कर भागो

ऐली के पास प्रेमी माता-पिता थे और वह एक खुबसूरत, स्मार्ट, और प्रतिभाशाली किशोरी थी l परन्तु हाई स्कूल के बाद किसी व्यक्ति या स्थिति ने उसे हेरोइन(नशीला पदार्थ) लेने को उकसाया l उसके माता पिता ने उसके अन्दर बदलाव देखकर उसे स्वास्थ्यलाभ/पुनर्वासन केंद्र भेज दिया जिसके बाद ऐली ने आख़िरकार उसके ऊपर होनेवाले प्रभाव को स्वीकार किया l इलाज के बाद, उन्होंने उससे पूछा कि नशीला पदार्थ के उपयोग के विषय वह अपने मित्रों से क्या कहना चाहेगी l उसकी सलाह थी : “केवल मुड़कर भागो l” उसने निवेदन किया कि “केवल नहीं कहना” प्रर्याप्त नहीं है l 

दुखद रूप से, ऐली पुनः पूर्व दशा में चली गयी और नशीले पदार्थ के अधिक मात्रा में सेवन करने के कारण बाईस वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु हो गयी l उसके दुखी माता-पिता दूसरों को उस नियति से बचाने के प्रयास में, एक स्थानीय न्यूज़ कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रोताओं से उन स्थितियों से दूर रहकर जहाँ वे नशीले पदार्थ और दूसरे खतरों के संपर्क में आ सकते हैं उन्हें “ऐली के लिए दौड़ेने” के लिए उत्साहित किया l

प्रेरित पौलुस ने अपने आत्मिक पुत्र तीमुथियुस से (और हम सबसे) बुराई से भागने पर जोर दिया (2 तीमुथियुस 2:22), और प्रेरित पतरस ने भी उसी प्रकार चेतावनी दी, “सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए l विश्वास में दृढ़ होकर . . .  उसका सामना करो” (1 पतरस 5:8-9) l

हममें से कोई भी परीक्षा से मुक्त नहीं है l और अक्सर सबसे अच्छी बात यह है कि हम उन स्थितियों से दूर हो जाएं जहां हमारे सामने परीक्षा आ सकती है – यद्यपि हमेशा परीक्षाएं टाली नहीं जा सकती हैं l परन्तु हम बाइबल पर आधारित होकर और प्रार्थना की सामर्थ्य से मजबूत विशवास रखते हुए बेहतर तैयार रह सकते हैं l जब हम “विश्वास में दृढ़ [खड़े रहते हैं] हम जानेंगे कब हमें मुड़ना है और कब परमेश्वर की ओर भागना है l

विशवास की विरासत

निर्णायक क्षण से बहुत पहले जब बिली ग्रैहम सोलह वर्ष की उम्र में मसीह में विश्वास में आए, यीशु के प्रति उनके माता-पिता की भक्ति प्रगट थी l वे दोनों विश्वासियों के एक परिवार में विशवास किये थे और उनका पालन पोषण भी वहीं हुआ था l बिली के माता-पिता ने अपने विवाह के बाद, प्रेमपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के द्वारा उस विरासत को जारी रखा, जिसमें प्रार्थना और बाइबल पठन और बच्चों के साथ विश्वासयोग्यता से चर्च जाना शामिल था l ग्रैहम के माता-पिता द्वारा बिली के लिए दृढ़ बुनियाद रखना ही वह मिटटी थी जिसे परमेश्वर ने उसे विश्वास में लाने के लिए उपयोग किया और, अंततः, एक दृढ़ सुसमाचार प्रचारक की उसकी बुलाहट भी l

प्रेरित पौलुस का युवा शागिर्द तीमुथियुस भी एक मजबूत आत्मिक बुनियाद से फायदा उठाया था l पौलुस ने लिखा, “मुझे तेरे उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माता युनिके में था” (2 तीमुथियुस 1:5) l इस विरासत ने तीमुथियुस को तैयार किया और उसके हृदय को मसीह में विश्वास करने की ओर ले चला l

अब पौलुस तीमुथियुस को अपने विशवास की परम्परा को आगे ले चलने का आग्रह करता है (पद.5), “परमेश्वर के . . . वरदान को . . . [पवित्र आत्मा द्वारा जो] “सामर्थ्य” [देता है,  अपने अन्दर] प्रज्वलित कर दे” (पद.6-7) l आत्मा की सामर्थ्य के कारण, तीमुथियुस निर्भय होकर सुसमाचार के लिए जी सकता था (पद.8) l एक मजबूत आत्मिक विरासत गारन्टी नहीं देता है कि हम विश्वास में आ जाएंगे, परन्तु दूसरों का नमूना और सलाह मार्ग प्रशस्त करने में सहायता कर सकता है l और हमारे यीशु को उद्धारकर्ता ग्रहण करने के बाद, आत्मा सेवा में, उसके साथ जीवन जीने में, और दूसरों के विश्वास को पोषित करने में भी हमारी अगुवाई करेगा l

बस एक साँस

बॉबी की अचानक मृत्यु ने मुझे मृत्यु की कठोर सच्चाई और जीवन की अल्पता याद दिलायी l मेरे बचपन की सहेली केवल चौबीस वर्ष की थी जब बर्फीले सड़क पर एक दुखद दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी l एक बिगड़े परिवार में उसका पालन-पोषण हुआ, अभी हाल ही में वह उन्नति करती हुयी दिखाई दे रही थी l यीशु में एक नयी विश्वासिनी, उसका जीवन इतना जल्दी कैसे समाप्त हो सकता था?

कभी-कभी जीवन बहुत ही छोटा और दुःख भरा दिखाई देता है l भजन 39 में भजनकार दाऊद अपने दुःख पर विलाप करते हुए पुकारता है : “हे यहोवा, ऐसा कर कि मेरा अंत मुझे मालूम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिससे मैं जान लूँ कि मैं कैसा अनित्य हूँ! देख, तू ने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं l सचमुच सब मनुष्य कैसे भी स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं” (पद.4-5) l जीवन छोटा है l यदि हम एक सौ वर्ष भी जीवित रहें, हमारा पृथ्वी पर का जीवन समस्त समय में मात्र एक बूंद है l

और फिर भी, दाऊद के साथ, हम कह सकते हैं, “मेरी आशा तो [प्रभु की] ओर लगी है” (पद. 7) l हम भरोसा कर सकते हैं कि हमारे जीवनों में सार्थकता है l यद्यपि हमारा शरीर क्षीण होता जाता है, विश्वासी होने के कारण हमें भरोसा है कि हमारा “भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” – और एक दिन हम उसके साथ अनंत जीवन का आनंद उठाएंगे (2 कुरिन्थियों 4:16-5:1) l हमें यह ज्ञात है क्योंकि परमेश्वर ने “हमें बयाने में आत्मा . . . दिया है”! (5:5) l

चोट पहुँचाने वाले शब्द

“खाल और हड्डी, खाल और हड्डी,” उस लड़के ने उपहास किया l “छड़ी,” एक अन्य ने उसके साथ स्वर मिलाया l जवाब में मैं भी बोल सकती थी “छड़ी और पत्थर से मेरी हड्डी टूट सकती है, किन्तु शब्दों से मुझे चोट कभी नहीं लगेगी l” परन्तु छोटी लड़की होते हुए भी, मैं जानती थी कि लोकप्रिय कविता सच नहीं थी l कठोर, विचारहीन शब्दों से चोट ज़रूर लगी – कभी-कभी बहुत अधिक, ये ऐसे घाव छोड़ गए जो बहुत गहरे थे और पत्थर या छड़ी की चोट से कहीं अधिक समय तक रहनेवाले घाव l

हन्ना विचारहीन शब्दों के डंक को ज़रूर जानती थी l उसका पति, एल्काना, उसे प्यार करता था परन्तु वह संतानहीन थी, जबकि उसकी दूसरी पत्नी, पनिन्ना, के पास अनेक बच्चे थे l  एक ऐसी संस्कृति में जहाँ स्त्री का महत्त्व संतान होने पर आधारित था, पनिन्ना संतानहीन हन्ना को अत्यंत चिढ़ाकर” उसकी पीड़ा को और कष्टप्रद बना देती थी l वह उसे कुढ़ाती रही जबतक कि हन्ना रो नहीं दी और भोजन न कर सकी (1 शमूएल 1:6-7) l

और एल्काना शायद अच्छा ही सोचता था, परन्तु उसका विचारहीन उत्तर, “हे हन्ना, तू क्यों रोटी है? . . . क्या तेरे लिए मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूँ” (पद.8) फिर भी कष्टदायक था l

हन्ना के समान, हममें से अनेक कष्टकर शब्दों का परिणाम सहते रहते हैं l और हममें से कुछ एक अपने ही शब्दों द्वारा घोर प्रहार करके और दूसरों को चोट पहुंचाकर कदाचित अपने ही घावों के प्रति प्रतिकार किये हैं l परन्तु हम सब सामर्थ्य और चंगाई के लिए अपने प्रेमी और दयालु परमेश्वर की पास जा सकते हैं (भजन 27:5, 12-14) l वह प्रेम और अनुग्रहकारी शब्द बोलकर प्यार सहित हमारे लिए आनंदित होता है l

पत्थर फेंकना

लीसा के मन में उनके लिए कोई सहानुभूति नहीं है जिन्होनें अपने जीवनसाथी ले साथ बेवफ़ाई की है . . . जबतक उसने अपने विवाह में गहरे असंतुष्टता का अनुभव नहीं किया और एक खतरनाक आकर्षण पर क़ाबू पाने की कोशिश करते हुए पाया l उस पीड़ादायक अनुभव ने उसे दूसरों के लिए नयी करुणा और मसीह के शब्दों की…

फूल की तरह प्रफुल्लता

मेरा सबसे छोटा पौत्र केवल दो महीने का है, फिर भी हर बार जब मैं उसे देखती हूँ मैं उसमें छोटे-छोटे बदलाव पाती हूँ l हाल ही में, जब मैं उसको दुलार रही थी, वह मेरी ओर देखकर मुस्कराया! और अचानक मैं रोने लगी l शायद वह आनन्द था जो मैं अपने बच्चों की पहली मुस्कराहट के साथ याद कर रही थी l कुछ क्षण ऐसे ही होते हैं – वर्णन से बाहर l

भजन 103 में दाऊद ने एक काव्यात्मक गीत लिखा जिससे परमेश्वर की प्रशंसा के साथ इस पर भी विचार किया गया है कि हमारे जीवनों के आनंदित क्षण कितनी जल्दी गुज़र जाते हैं : “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मलता है” (पद. 15-16) l

परन्तु जीवन की अल्पता को जानने के बावजूद, दाऊद फूल को फलता-फूलता या बढ़ता हुआ वर्णन करता है l यद्यपि हर एक फूल अकेले ही शीघ्रता से खिलता और फूलता है, उसकी खुशबु और रंग और सुन्दरता उस क्षण को बहुत ही आनंदित करती है l और यद्यपि एक अकेला फूल शीघ्र ही भुलाया जा सकता है – “न वह अपने स्थान में फिर मिलता है” (पद.16) – तुलनात्मक तौर पर हमें निश्चय है कि “यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग . . . प्रगट होता रहता है” (पद.17) l

हम भी फूलों की तरह, उस क्षण में आनंदित होते और फलते-फूलते है; किन्तु हम इस सत्य का भी उत्सव मना सकते हैं कि हमारे जीवन के क्षण वास्तव में कभी भूलाए नहीं जाएंगे l परमेश्वर हमारे जीवनों के हर एक अंश को संभाले रखता है, और उसका अनंत प्रेम सदैव उसके बच्चों के साथ है l

मेरे पिता को स्मरण करना

जब मैं अपने पिता को याद करता हूँ, तो मैंने उन्हें सबसे अच्छी रीति से हथौड़ा चलाते, बागबानी करते या सीढ़ियों के नीचे अव्यवस्थित कमरे में आकर्षक औजारों और यंत्रों के साथ देखता हूँ। उनके हाथ हमेशा किसी न किसी कार्य को पूरा करने में लगे होते थे-कुछ न कुछ बनाना (कोई गैरेज या एक छत या एक चिड़िया के लिए घर), कईबार ताले ठीक करना और कईबार आभूषण बनाना या शीशे की कलाकृति करना।   

मेरे पिता को स्मरण करना मुझे मेरे स्वर्गीय पिता और सृष्टिकर्ता के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है, जो सर्वदा से ही कार्य करने में व्यस्त रहे हैं। आदि में, “[परमेश्वर] ने पृथ्वी की नींव डाली. . .उस पर किसने सूत खींचा . . . जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्‍वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे” (अय्यूब 38:4–7)। जो कुछ भी उन्होंने बनाया वह एक कला, एक सर्वोत्तम कृति थी। उन्होंने एक विस्मयकारी सुन्दर संसार की सृष्टि की और इसे “बहुत अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:31)।

उसमें आप और मैं भी शामिल हैं। परमेश्वर ने हमें भयानक और अद्भुत रीति से रचा है (भजन संहिता 139:13–16); और उसने हमें एक लक्ष्य और कार्य करने का एक लक्ष्य प्रदान किया है, जिसमें इस पृथ्वी पर अधिकार रखना और इसके जीव-जन्तुओं की देखभाल करना शामिल है (उत्पत्ति 1:26–28; 2:15) । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या काम करते हैं-हमारे काम में या हमारे आराम में-परमेश्वर हमें सामर्थ प्रदान करता है, जिसकी हमें पूरे दिल के साथ उसके लिए कार्य करने के लिए आवश्यक होती है। जो कुछ भी हम करें, परमेश्वर करे कि वह उन्हें प्रसन्न करने के लिए हो।

परमेश्वर सुनता है

जब समूह के अन्य लोग चुनौतियों अथवा बीमारी से जूझ रहे अपने परिजनों और मित्रों के लिए मांग रहे थे डाईएन सुन रही थी l उसके परिवार का एक सदस्य वर्षों से नशे की लत से संघर्ष कर रहा था l किन्तु डाईएन ने अपना निवेदन साझा नहीं किया l उसकी ऊँची आवाज़ में बोले गए शब्दों के प्रतिउत्तर में लोगों के चेहरों के भाव या उनका प्रश्न पूछना या उनकी सलाह वह सहन नहीं कर पाती थी l उसने महसूस किया कि उसका निवेदन नहीं बताना और चुप रहना ही बेहतर था l दूसरे समझ नहीं पाए कि उसका प्रिय यीशु का विश्वासी होकर भी दैनिक संघर्ष कैसे कर सकता था l
यद्यपि डाईएन ने समूह के साथ अपना निवेदन साझा नहीं किया, उसने कुछ भरोसेमंद मित्रों से उसके साथ प्रार्थना करने को कहा l उनके साथ मिलकर उसने परमेश्वर से अपने प्रिय के लिए नशे की वास्तविक बंधन से छुटकारा माँगा कि वह मसीह में स्वतंत्रता का अनुभव कर सके – और कि परमेश्वर डाईएन को आवश्यक शांति और धीरज दे l प्रार्थना करने पर, उसने अपने प्रिय के साथ अपने सम्बन्ध में आराम और सामर्थ्य महसूस किया l
हममें से अनेक के पास वास्तविक, दृढ़ प्रार्थना निवेदन होते हैं जो अनुत्तरित महसूस होते हैं l किन्तु हम आश्वास्त हों कि परमेश्वर ध्यान देता ही है और वह हमारे सभी निवेदन सुनता ही है l वह हमसे “आशा में आनन्दित, क्लेश में स्थिर, प्रार्थना में नित्य लगे” (रोमियों 12:12) रहकर उसके निकट चलने को प्रेरित करता है l हम उसपर भरोसा कर सकते हैं l

मैं माफ़ी चाहता हूँ

2005में, कॉलिंस के एक रिपोर्ट को झूठा ठहराने के कारण मेगी को चार साल के लिए जेल जाना पड़ा, और मेगी जेल से छूटने के बाद कॉलिंस को ढूंढ़ कर उसे “हानि” पहुँचाने की कसम खायी l अंततः सबकुछ खोने के बाद, मेगी दोषमुक्त हो गया l इस बीच, कॉलिंस के सभी रिपोर्ट झूठे साबित हुए, उसकी नौकरी छूट गयी, उसे भी कई वर्षों के लिए जेल में रहना पड़ा l जेल में रहते हुए दोनों मसीह में विश्वास में आ गए l
2015 में, दोनों ने खुद को एक साथ एक विश्वास-आधारित कंपनी में नौकरी करते हुए पाया l कॉलिंस याद करता है, “[मैंने मेगी से कहा], ‘इमानदारी से, मेरे पास स्पष्ट करने के लिए कुछ भी नहीं है, मैं केवल यह कह सकता हूँ मुझे क्षमा कर दो l” मेगी का उत्तर था, “मैं लगभग यही सुनना चाहता था,” और उसने उसे माफ़ कर दिया l दोनों में मेल हो सका क्योंकि उन्होंने परमेश्वर का अतुलनीय प्रेम और क्षमा का अनुभव किया था, जो हमें “एक दूसरे . . . [को] . . . क्षमा” करने की योग्यता देता है (कुलुस्सियों) 3;13) l
वर्तमान में दोनों घनिष्ठ मित्र हैं l “हमारे पास संसार को बताने के लिए एक संयुक्त मिशन है . . . कि यदि आपको किसी से क्षमा मांगनी है, तो अहंकार छोड़कर उससे क्षमा मांग लें,” कॉलिंस ने कहा l “और यदि आपको किसी के विरुद्ध कोई शिकायत है, कड़वाहट छोड़ दें क्योंकि यह इस आशा से ज़हर पीने के समान है कि यह उन्हें हानि पहुंचेगा l”
परमेश्वर विश्वासियों को शांति और एकता में रहने के लिए बुलाता है l यदि हमारे पास  “किसी पर दोष देने का कोई कारण हो,” हम उसे परमेश्वर के पास ले जाएँ l वह हमें मेल करने में मदद करेगा (पद.13-15; फिलिप्पियों 4:6-7) l