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Articles by एलिसन कीडा

यीशु कारण जानता है

 

मेरे कुछ मित्र हैं जिन्होनें आंशिक चंगाई पायी है किन्तु अपनी बीमारियों के दुखद पहलुओं से अभी भी संघर्ष कर रहे हैं l दूसरे मित्र किसी नशे की लत से चंगाई पाए हैं किन्तु अपनी अयोग्यता की भावनाओं और आत्म-घृणा से अभी भी संघर्ष कर रहे हैं l और मैं चकित हूँ,क्यों नहीं परमेश्वर ने उनको एक बार में ही पूरी रीति से चंगा कर दिया?

मरकुस 8:22-26 में, यीशु के एक दृष्टिहीन व्यक्ति को चंगा करता है l सर्वप्रथम यीशु उस व्यक्ति को गाँव से बाहर ले गया l उसके बाद उसकी आँखों में थूका और “उस पर हाथ रखे l” उस व्यक्ति ने कहा कि उसे मनुष्य “चलते हुए पेड़ों जैसे दिखाई देते हैं” उसके बाद यीशु ने उसकी आँखों पर दोबारा हाथ रखे, और इस बार वह “सब कुछ साफ़-साफ़ देखने लगा l”

यीशु की सेवा में, उसके शब्द और कार्य अक्सर लोगों को और उसके शिष्यों को चकित और चौंका दिया करते थे (मत्ती 7:28; लूका 8:10; 11:14) और बहुतों को उससे दूर भी ले गए (यूहन्ना 6:60-66) l इसमें कोई शंका नहीं कि ये दोनों आश्चर्यक्रम भी गड़बड़ी उत्पन्न कर दी l इस व्यक्ति को तुरन्त  चंगा क्यों नहीं किया गया?

हम नहीं जानते क्यों l किन्तु यीशु जानता था कि उस क्षण इस व्यक्ति को और शिष्यों को जो इस चंगाई  के गवाह थे, क्या ज़रूरत थी l और वह जानता है कि आज हमें क्या चाहिए जिससे उसके साथ हमारे सम्बन्ध और निकट के हो जाएं, l यद्यपि हम हमेशा नहीं समझ पाएंगे, हम भरोसा करें कि परमेश्वर हमारे और हमारे प्रियों के जीवनों में कार्य कर रहा है और वह उसके पीछे चलने के लिए हमें सामर्थ्य, साहस और स्पष्टता देगा l

के बावजूद भी

कभी-कभी ज़िन्दगी हम पर भयानक वार करती है l अन्य समयों में आश्चर्यजनक होता है l

बेबीलोन में तीन युवक, उस देश के भयंकर राजा के सामने साहसपूर्वक डटे रहे और अपने सामने खड़ी सोने की बड़ी मूरत को किसी भी स्थिति में दण्डवत् करने से इनकार किया l वे एक साथ बोले : “इस विषय में तुझे उत्तर देने का हमें कुछ प्रयोजन नहीं जान पड़ता l हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते है वह हम को उस धधकते हुए भट्ठे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन् हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है l परन्तु यदि नहीं, तो हे राजा, तुझे मालूम हो, कि हम लोग . . . उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई . . .  मूरत को दण्डवत् करेंगे” (दानिय्येल 3:16-27) l

ये तीन युवक – शद्रक, मेशक, और अबेदनगो – धधकते हुए भट्ठे में फेंक दिए गए; और परमेश्वर ने आश्चर्जनक रूप से उनको छुड़ाया और उनके सिर का एक बाल भी न झुलसा और न ही उनके कपड़ों से जलने की गंध आई (पद.19-27) l  वे मृत्यु के लिए तैयार किये गए थे किन्तु परमेश्वर में उनका विश्वास अटल था – यदि वह उनको नहीं बचाता “तो भी l”

परमेश्वर की यह इच्छा है कि हम उससे लिपटे रहें –मेरे किसी प्रिय को चंगाई नहीं मिलने के बावजूद भी, हमारी नौकरी चले जाने के बावजूद भी, हमारे सताए जाने के बावजूद भी l कभी-कभी इस जीवन में परमेश्वर हमें बचाता है, और कभी-कभी नहीं भी बचाता है l लेकिन हमें इस सच्चाई पर अडिग रहना है : “परमेश्वर जिसकी हम सेवा करते हैं वह सक्षम है, और . . . . के बावजूद भी  “हमें प्यार करता है, और हमारे कठिनतम परीक्षा में हमारे साथ है l

एक बालक की नाई

आराधना के समय वो नन्हीं सी लड़की गलियारे में बड़ी प्रसन्नता और शालीनता से अकेली ही नाच रही थी। उसकी माँ मुस्कुरा रही थी और उसे रोका नहीं।

उसे देख कर मेरा दिल बहुत उत्साहित हो गया, मैं उसका साथ देना चाहती थी लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। बचपन के उस आनन्द और विस्मय की अभिव्यक्ति को मैं कुछ समय पहले खो चुकी हूँ। यद्यपि हमें बचपना छोड़कर परिपक्व बनना चाहिए, तो भी हमें अपने आनंद और विस्मय को नहीं खोना चाहिए, विशेषकर परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में।

यीशु के सांसारिक जीवन में उन्होंने छोटे बच्चों का खुली बाहों से स्वागत किया और अपनी शिक्षाओं में उनका उदाहरण दिया (मत्ती 11:25; 18:3;21:16)।  एक अवसर पर उसने अपने चेलों को फटकार लगाई जब वह किसी माता-पिता को अपने बच्चे को उनके पास लाने से रोक रहे थे। बालकों को मेरे पास आने दो... (मरकुस 10:14) यीशु बच्चों के बाल गुणों के बारे में कह रहे थे जो हमें मसीह को ग्रहण करने के लिए तैयार करते हैं -आनन्द और विस्मय, साथ ही सादगी, निर्भरता, विश्वास और विनम्रता।

बच्चों जैसा आनन्द और विस्मय (और इससे भी बड़कर) हमारे हृदय को यीशु को ग्रहण करने के लिए खोलता है वह हमें अपनी बाहों में लेने की प्रतीक्षा करते हैं।

जहाँ वह अगुवाई करें उसका अनुसरण करना

बचपन में रविवार की संध्या में होने वाली कलीसिया की सभा बहुत रोमांचक होती थी। इसमें प्रायः परिवारों, मित्रों और घर और व्यवसाए आदि को छोड़कर परमेश्वर की सेवा करने वाले मिशनरी आकर प्रेरणादायक सन्देश देते थे।

एलीशा ने भी परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए बहुत कुछ छोड़ा था। जब एल्लियाह नबी की उनसे भेंट हुई तब वह खेत में हल जोत रहे थे, उन्होंने अपने चौगे को एलीशा के कंधों पर डाल दिया (जो नबी के रूप में उनकी भूमिका का प्रतीक था) और उन्हें अपने पीछे हो लेने को कहा। माता और पिता को चूमकर विदा लेने के मात्र एक ही आवेदन के साथ एलीशा ने तुरंत अपने बैलों की बलि चढ़ाई और हल को जलाकर और अपने माता पिता से विदा लेकर उनके पीछे हो लिए।

हम में से अनेकों को अपने परिवारों और मित्रों को छोड़कर पूर्णकालिक रूप से परमेश्वर की सेवा की बुलाहट नहीं मिली है। तो भी परमेश्वर की इच्छा है कि हम सब विश्वासी के समान जैसे परमेश्वर ने [हमें] बुलाया है और जैसी भी स्थिति प्रभु ने [हमें] सौंपी है उसमें उनका अनुसरण करें।(1 कुरिन्थियों 7:17) परमेश्वर की सेवा रोमांच और चुनौतियों से भरा हो सकता है फिर चाहे हम कहीं भी हों-चाहे हम अपने घर भी ना छोड़ें।

अप्रत्याशित मित्रता

फेसबुक में जानवरों की अविश्वसनीय दोस्ती के प्यारे वीडियो पोस्ट किए जाते हैं जैसे  साथ रहने वाले पिल्ला और सुअर तथा  एक हिरण और बिल्ली, और बाघ के शावकों की माँ के समान देख रेख करने वाले वनमानुष का। ऐसी असामान्य मित्रता को देखकर मुझे अदन की वाटिका के विवरण की याद आती हैं। जहाँ आदम और हव्वा परमेश्वर की और एक दूसरे की संगति में रहते थे। क्योंकि खाने के लिये सभी प्रकार के पेड़ थे इसलिए जानवर भी उनके साथ शांति से रहते होंगे (उत्पत्ति 1:30)। परन्तु आदम और हव्वा ने पाप किया और इस सुखद दृश्य में बाधा आ गई थी (3:21–23)। अब मानव सबंध और सृष्टि दोनों में, संघर्ष और टकराव है।

भविष्यवक्ता यशायाह कहते हैं कि “तब भेडिय़ा भेड़ के बच्चे के संग रहा करेगा...” (11:6)। भविष्य में यीशु लौटकर जब राज्य करेंगे उस दिन को कई यूँ ही दिखाते हैं। तब विभाजन नहीं होगा और “मृत्यु न रहेगी...”। (प्रकाशितवाक्य 21:4) नवनिर्मित पृथ्वी पर, सृष्टि अपनी पूर्व स्वर संगति में लौट आएगी और हर जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से बड़ी भीड़, मिलकर एकत्रित होगी और परमेश्वर की जय-जय-कार करेगी (7:9–10; 22:1–5)।

तब तक, हमारे सम्बंध सँभालने और अप्रत्याशित मित्रता विकसित करने में परमेश्वर हमारी सहायता कर सकते हैं।

आनन्द

मैं जीबन की एक नई ऋतु की और बड रही हूँ-बुढ़ापे की "शीत"ऋतु-पर अभी वहां पहुंची नहीं हूँ। वर्ष गुज़रते जा रहे हैं और उनकी गति को धीमा करने का मन करता है, फिर भी मेरा आनन्द मुझे संभालता है। प्रति दिन एक नया दिन है जिसे प्रभु मुझे देते हैं। मैं कह सकती हूँ, "यहोवा का धन्यवाद करना भला है...। (भजन 92:1-2)

परमेश्वर मुझे सक्षम बनाते हैं कि भजनकार के साथ मिलकर "[उसके] हाथों के कामों के कारण आनन्द के गीत [गाऊँ]। (पद 4) इन आशीषों का: परिवार, मित्र, और संतोषजनक व्यवसाय। परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि और उनके प्रेरित वचन का आनन्द। आनन्द क्योंकि यीशु ने हमसे इतना प्रेम किया कि हमारे पापों के लिए अपनी जान दे दी। आनन्द इसलिए क्योंकि उसने हमें पवित्र आत्मा दी जो सच्चे आनन्द का स्रोत है। (रोमियों 15:13) प्रभु पर विश्वास करने वाले "...पुराने होने पर भी फलते रहेंगे" (भजन 92:12-14)।

हमारी परिस्थितियां या जीवन की ऋतु कैसी भी हों, हम अपने जीवन जीने के तरीके और अपने शब्दों के माध्यम से उनके प्रेम का उदाहरण बन सकते हैं। प्रभु को जानने में और उनके लिए जीवन जीने में और उनके बारे में दूसरों को बताने में आनन्द मिलता है।

यीशु मेसेल को प्रेम करता है

मेरी बहन मेसेल बचपन में अपने तरीके से एक परिचित गीत गाया करती थी : यीशु मुझसे करता प्यार, बाइबिल बताती मेसेल को l” इससे मैं अत्याधिक परेशान होती थी! क्योंकि उसकी बड़ी और बुद्धिमान बहन होने के कारण मैं जानती थी कि वास्तविक शब्द थे “यह सार,” न कि “मेसेल को l” किन्तु वह ज़िद  से अपने मन की गाती थी l

अब मैं सोचती हूँ कि मेरी बहन बिलकुल ठीक थी l बाइबिल सही में मेसेल से और हम सब से कहती है कि यीशु हम सब से प्यार करता है l हम बार-बार यह सच्चाई पढ़ते हैं, जैसे, हम यूहन्ना प्रेरित, “[चेला] जिससे यीशु प्रेम रखता था” (यूहन्ना 21:7,20) की पत्रियों में पढ़ते हैं l वह बाइबिल के एक सबसे अधिक जाने हुए पद में हमसे परमेश्वर के प्रेम के विषय बताता है : यूहन्ना 3:16, “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनंत जीवन पाए l”

यूहन्ना 1 यूहना 4:10 में इस सन्देश का समर्थन करता है : “प्रेम इसमें नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया, पर इस में है कि उसने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्चित के लिए अपने को भेजा l” जैसे कि यूहन्ना जानता था कि यीशु उससे प्रेम करता था, हमें भी वही निश्चय है : यीशु अवश्य  ही हमसे प्रेम करता है l बाइबिल हमें यह बताती है l

महान प्रेम

हाल ही में हमने अपनी बाईस महीने की नातिन, मोरिया को उसके बड़े भाइयों के बिना रात भर के लिए अपने घर ले गए l हमनें अधिक प्रेम के साथ उसका ध्यान दिया, और हम उसकी इच्छा पूरी करने में आनंदित हुए l अगले दिन उसको वापस घर पहुंचाने के बाद, हम अलविदा कहकर घर के बाहर निकलने लगे l ऐसा करते समय, मोरिया ने चुपचाप अपना बैग उठाकर(जो अभी भी दरवाजे के निकट बैठी हुयी थी) हमारे पीछे चलने लगी l

वह तस्वीर मेरी यादों में बैठ गयी : मोरिया अपनी चड्डी में और दो अलग-अलग सैंडल पहनी हुयी पुनः नाना-नानी के साथ जाने को तैयार थी l मैं इसके विषय सोचकर मुस्कराती हूँ l वह मेरे संग जाने को उत्सुक, और अधिक व्यक्तिगत ध्यान पाने के लिए तैयार थी l

यद्यपि हमारी नातिन अभी बता नहीं पाती है, वह प्रेम और उसका महत्व अनुभव करती है l एक छोटे रूप से, मोरिया के लिए हमारा प्रेम हमारे लिए अर्थात् उसकी संतान के लिए परमेश्वर के प्रेम की तस्वीर है l “देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की संतान कहलाएं; और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1) l

हम यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करके, उसकी संतान बन जाते हैं और हमारे लिए उसकी क्रूसित मृत्यु द्वारा उसके उदार प्रेम को समझने लगते हैं (पद.16) l हमारी इच्छा अपने वचन और कार्यों द्वारा उसको प्रसन्न करने(पद.6)-और उसको प्रेम करने और उसके साथ समय बिताने की होती है l

यदि मुझे उस वक्त मालूम होता ...

घर लौटते समय, मैं “Dear Younger Me,” गीत सुन रही थी जो खूबसूरती से पूछता है : यदि मैं अतीत में लौट पाती, जानते हुए जो मैं अभी जानती हूँ, आप अपने युवा व्यक्तित्व से क्या कहते? सुनते हुए, मैंने अपने कम बुद्धिमान युवा व्यक्तित्व को थोड़ी बुद्धि और चेतावनी देना चाही l हममें से बहुतों में जीवन के किसी मोड़ पर भिन्न तरीके से काम करने की इच्छा हुई होगी-काश हम सब कुछ दोहरा पाते l

किन्तु गीत बताता है कि यद्यपि हमारा अतीत हमें खेदित करे, हमारे समस्त अनुभवों ने हमें बनाया है l हम लौट नहीं सकते अथवा अपने चुनाव या पाप के परिणाम को बदल नहीं सकते l किन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमें अपने अतीत के भारी बोझ और गलतियों को उठाकर घूमने की ज़रूरत नहीं l यीशु के काम के कारण! “जिसने ... अपने बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिए नया जन्म दिया” (1 पतरस 1:3) l

विश्वास में उसकी ओर लौटकर अपने पापों के लिए खेदित होने पर, वह हमें क्षमा करेगा l हम उस दिन बिल्कुल नए बनाए जाएंगे और आत्मिक रूपांतरण की प्रक्रिया आरंभ करेंगे (2 कुरिं. 5:17) l हमने क्या किया था (अथवा नहीं किया था) इसका कोई औचित्य नहीं, क्योंकि उसके काम से हम क्षमा किये गए l हम आगे बढ़ते हुए, वर्तमान का पूरा लाभ उठाकर उसके साथ भविष्य की आशा कर सकते हैं l मसीह में, हम स्वतंत्र हैं!