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Articles by एलिसन कीडा

अग्नि द्वारा उर्जित

जब दो अग्निशामक,  थके हुए और कालिख लगे हुए,  नाश्ते के लिए एक रेस्तरां में रुके,  तो वेटर ने समाचार से उन पुरुषों को पहचान लिया और उसे एहसास हुआ कि वे रात को गोदाम की आग से जूझ रहे थे l अपना आभार दिखाने के लिए, उसने अपने बिल पर एक नोट लिखा, “आपका नाश्ता आज मेरी ओर से है l आपको धन्यवाद. . .  दूसरों की सेवा करने और उन स्थानों में जाने के लिए जिनसे सभी भागते हैं . . . अग्नि द्वारा उर्जित और साहस द्वारा प्रेरित, आप कितने बड़े उदाहरण है l”

पुराने नियम में,  हम तीन युवकों : शद्रक,  मेशक, और अबेदनगो के कार्यों में साहस का एक उदाहरण देखते हैं (दानिय्येल 3) l बेबीलोन के राजा की प्रतिमा को नमन करने के हुक्म का पालन करने के बजाय,  इन युवकों ने साहसपूर्वक अपने इनकार के द्वारा परमेश्वर के लिए अपना प्यार दिखाया l उनका दंड उन्हें धधकते भट्टी में फेंकना था l फिर भी वे लोग पीछे नहीं हटे : “हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्ठे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन् हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है l परन्तु यदि नहीं, तो [भी] . . . हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी कड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत् करेंगे” (पद.17-18) l

परमेश्वर ने उन्हें सचमुच बचाया और यहाँ तक ​​कि उनके साथ आग में चला भी (पद. 25–27) l आज हमारे अग्निमय आजमाइशों और परेशानियों में,  हमें भी यह निश्चय है कि परमेश्वर  हमारे साथ है l वह सक्षम है l

सम्पूर्ण शांति का परमेश्वर

टिम्मी सिर्फ एक बिल्ली का बच्चा था जब उसके मालिक ने उसे एक पशु आश्रय में छोड़ दिया, यह सोचकर कि वह ठीक होने के लिए बहुत बीमार था l बिल्ली के बच्चे का इलाज किया गया और वह स्वस्थ हो गया और पशु चिकित्सक द्वारा अपना लिया गया l फिर वह आश्रय स्थल पर एक पूर्णकालिक निवासी बन गया और अब अपने दिन बिल्लियों और कुत्तों को “आराम” देने में बिताता है─तुरंत सर्जरी से बाहर आनेवालों या किसी बीमारी से उबरनेवालों के साथ─अपनी गर्म उपस्थिति और कोमल घुरघुराहट के द्वारा l

यह कहानी एक छोटी सी तस्वीर है जो हमारा प्रेमी परमेश्वर हमारे लिए करता है─और बदले में हम दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं l वह हमारी बीमारी और संघर्ष में हमारी परवाह करता है, और वह हमें अपनी उपस्थिति से आराम पहुँचाता है l 2 कुरिन्थियों में प्रेरित पौलुस हमारे परमेश्वर को, “दया का पिता और सब प्रकार की शांति का परमेश्वर” संबोधित करता है (1:3) l जब हम हतोत्साहित, निराश या हमसे बुरा व्यवहार किया जाता है, तो वह हमारे लिए उपस्थित रहता है l जब हम प्रार्थना में उसकी ओर मुड़ते हैं, तो वह “हमारे सब क्लेशों में शांति देता है” (पद.4) l

लेकिन पद 4 वहाँ समाप्त नहीं होता है l पौलुस, जिसने गहन पीड़ा का अनुभव किया था, आगे कहता है, “ताकि हम उस शांति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शांति दें सकें जो किसी प्रकार के क्लेश में [हैं] l” हमारा पिता हमें शांति देता है, और जब हम उसकी शांति का अनुभव कर लेते हैं, हम दूसरों को शांति देने में सक्षम होते हैं l

हमारा दयालु उद्धारकर्ता, जिसने हमारे लिए पीड़ा सही, वह हमारे दुःख और संकट में शांति देने में सक्षम से भी बढ़कर है (पद.5) l वह हमारे दर्द में हमारी मदद करता है और हमें दूसरों के लिए भी ऐसा करने के लिए तैयार करता है l

बगीचे में

मेरे पिताजी पुराने भजन गाना बहुत पसंद करते थे l उनके पसंदीदा में से एक “इन द गार्डन(In the Garden)” था l कुछ साल पहले,  हमने इसे उनके अंतिम संस्कार में गाया था l कोरस सरल है : “और वह मेरे साथ चलता है, और वह मेरे साथ बात करता है,  और वह मुझसे कहता है कि मैं उसका अपना हूँ,  और वहाँ ठहरकर जो आनंद हम साझा करते हैं, कोई और नहीं जानता है l” इस गीत से मेरे पिताजी खुश होते थे – और उसी तरह मैं भी खुश होता हूँ l

गीत के लेखक सी. ऑस्टिन माइल्स का कहना है कि उन्होंने यूहन्ना के सुसमाचार के अध्याय 20 को पढने के बाद यह गीत 1912 के वसंत ऋतु में लिखा l “जब मैं इसे उस दिन पढ़ रहा था, मैंने महसूस हुआ कि मैं उस दृश्य का हिस्सा हूँ l मैं मरियम के जीवन में उस नाटकीय क्षण का एक मूक गवाह बन गया जब वह अपने प्रभु के सामने घुटने टेक कर पुकारी, ‘रब्बूनी![गुरु] l’ ”

यूहन्ना 20 में,  हम मरियम मगदलीनी को यीशु की खाली कब्र के पास रोते हुए पाते हैं l वहाँ उसकी मुलाकात एक आदमी से हुई जिसने पूछा कि वह क्यों रो रही थी l यह सोचकर कि वह माली था, वह जी उठे उद्धारकर्ता से बोली─यीशु! उसका दुख आनंद में बदल गया,  और वह शिष्यों को बताने के लिए दौड़ी, “"मैंने प्रभु को देखा!” (पद.18) l

हमारे पास भी यह आश्वासन है कि यीशु जी उठा है! वह अब पिता के साथ स्वर्ग में है,  लेकिन उसने हमें अपने उपर नहीं छोड़ा है l मसीह में विश्वासी अपने अन्दर उसकी आत्मा को रखे है, और हमारे पास यह जानने का आश्वासन है कि वह हमारे साथ है, और हम “उसके अपने हैं l”

मुझे देखिये

“दादी माँ, मेरी परियों की राजकुमारी का नृत्य देखिये!” हमारे केबिन के आँगन में चारोंओर दौड़ लगाती हुयी मेरी तीन साल की नातिन ने उल्लासित होकर पुकारा l उसका “नाचना” मुस्कराहट ला दिया; और उसके बड़े भाई की निराशा, “वह नाच नहीं रही है, केवल दौड़ रही है,” ने छुट्टियों में परिवार के साथ रहना उसके आनंद को ख़त्म न कर सका l
प्रथम खजूर का रविवार उतार चढ़ाव का दिन था l जब यीशु एक गधे पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया, भीड़ उल्लासित होकर चिल्लाई, “होशाना!” . . . धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है (मत्ती 21:9) l फिर भी भीड़ में अनेक लोग उन्हें रोम से छुड़ाने के लिए एक मुक्तिदाता(Messiah) की आशा कर रहे थे, एक उद्धारकर्ता नहीं जो उसी सप्ताह उनके पापों के लिए मरने वाला था l
बाद में उसी दिन, महायाजकों के डर के बावजूद जिन्होंने यीशु के अधिकार पर प्रश्न किया, मंदिर में बच्चों ने चिल्लाते हुए अपने आनंद को प्रगट किया, “दाऊद के संतान को होशाना” (पद.15), शायद कूदते और खजूर की डालियाँ हिलाते हुए जब वे आँगन के चारों ओर दौड़ रहे थे l वे उसकी उपासना करने से खुद को रोक न सके, यीशु ने क्रोधित अगुओं से कहा, बालकों और दूध पिते बच्चों के मुंह से [परमेश्वर ने अपनी] अपार स्तुति कराई” (पद.16) l वे उद्धारकर्ता की उपस्थिति में थे!
यीशु कौन है वह हमें भी देखने के लिए बुलाता है l जब हम आनंद की बहुतायत के साथ एक बच्चे की तरह ऐसा करते हैं, हम उसकी उपस्थिति का आनंद लेने से खुद को रोक नहीं पाते l

एक SOS(संकट सन्देश) भेजना

जब अलास्का के एक पहाड़ी क्षेत्र में बसने वाले की झोपड़ी में आग लग गई, तो बसने वाला अमेरिका के सबसे ठंडे राज्य में पर्याप्त आश्रय के बिना और कुछ प्रावधानों के साथ ही रह गया l तीन हफ्ते बाद, उस आदमी को आखिरकार बचा लिया गया जब एक विमान ने उड़ान भरी और उस बड़े SOS(संकट सन्देश) को देख लिया जो उसने बर्फ पर लिखकर उसे कालिख से काला कर दिया था l
भजनकार दाऊद निश्चय ही भयानक कठिनाई में था l वह ईर्ष्यालु राजा शाऊल द्वारा पीछा किया जा रहा था जो उसे मारना चाहता था l और इसलिए वह गत नगर भाग गया, जहाँ उसने अपने जीवन को बचाने के लिए पागल होने का नाटक किया (देखें 1 शमूएल 21) l उन घटनाओं में से भजन 34 का उदय हुआ, जहाँ दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना की और शांति को प्राप्त किया (पद.4,6) l परमेश्वर ने उसकी विनती सुनी और उसको छुड़ाया l
क्या आप निराशजनक स्थिति में हैं और मदद के लिए पुकार रहे हैं? आश्वस्त रहें कि परमेश्वर आज भी हमारी निराशजनक प्रार्थनाओं को सुनता है और उनका जवाब देता है l जैसे दाऊद के साथ, वह हमारे संकट के पुकार के प्रति चौकस है और हमारे डर को दूर करता है (पद.4) —और कभी-कभी हमें “हमारे कष्टों से [छुड़ा लेता है]” (पद.6) l
पवित्रशास्त्र हमें “अपना बोझ यहोवा पर डाल” देने के लिए आमंत्रित करता है और “वह [हमें] संभालेगा” (भजन 55:22) l जब हम अपनी कठिन परिस्थितियों को परमेश्वर को दे देते हैं, तो हम विश्वास कर सकते हैं कि वह हमें ज़रूर सहायता देगा l हम उसके सक्षम हाथों में सुरक्षित हैं l

चक्र तोड़ना

डेविड की पहली पिटाई उसके पिता के हाथों उसके सातवें जन्मदिन पर हुई,  जब उसने गलती से एक खिड़की तोड़ दी थी l “उन्होंने मुझे लात मारी और मुझे मुक्का मारा,”  डेविड ने कहा l  “बाद में,  उन्होंने माफी मांगी l वे एक अपमानजनक शराबी थे,  और अब मैं इस चक्र को समाप्त करने की पूरी कोशिश कर रहा हूँ l

लेकिन डेविड को इस मुकाम तक पहुंचने में काफी समय लगा l  उसके अधिकांश किशोर वर्ष और बीस वर्ष के बाद के वर्ष जेल में या परीक्षा/परख काल में, और नशा उपचार केन्द्रों के बाहर अन्दर आते जाते हुए बीते l जब उसे लगा कि उसके सपने पूरी तरह से धराशायी हो गए हैं, तब उसने मसीह-केन्द्रित उपचार केंद्र में यीशु के साथ एक रिश्ते के द्वारा आशा प्राप्त की l

“मैं कुछ भी नहीं परन्तु निराशा से भरा हुआ था,” डेविड कहता है l अब मैं खुद को दूसरी दिशा में धकेल रहा हूँ l जब मैं सुबह उठता हूँ, तो पहली चीज जो मैं परमेश्वर को बताता हूं,  वह यह है कि मैं अपनी इच्छा उसे समर्पण कर रहा हूँ l

जब हम ध्वस्त जीवनों के साथ परमेश्वर के पास आते हैं, चाहे वह दूसरों के या खुद के अन्याय के कारण है, परमेश्वर हमारे टूटे हृदयों को लेकर हमें नया बना देता है : “यदि कोई मसीह में है तो . . . पुरानी बातें बीत गयी हैं, सब बातें नई हो गयी है” (2 कुरिन्थियों 5:17) l मसीह का प्रेम और जीवन हमारे अतीत के चक्रों में तोड़कर घुस जाता है,  जिससे हमें एक नया भविष्य मिलता है (पद.14-15) l और वह वहाँ खत्म नहीं होता है! हमारे सम्पूर्ण जीवन में,  हम परमेश्वर के किये हुए काम और जो वह निरंतर हममें कर रहा है आशा और सामर्थ्य प्राप्त करते हैं – प्रत्येक और हर पल l

एक अच्छी पुस्तक के साथ समय

छोटा सा देश आइसलैंड पाठकों का देश है । वास्तव में,  यह बताया गया कि प्रत्येक वर्ष यह देश किसी भी अन्य देश की तुलना में प्रति व्यक्ति अधिक पुस्तकें प्रकाशित करता और पढ़ता है । क्रिसमस की पूर्व संध्या पर,  आइसलैंड के लोगों के लिए परिवार और दोस्तों को किताबें देना और फिर रात में देर तक पढ़ना एक परंपरा है । यह परंपरा द्वितीय विश्व युद्ध के समय की है, जब आयात प्रतिबंधित था लेकिन कागज सस्ता था । आइसलैंड के प्रकाशकों ने शरद ऋतु के बाद तक नयी पुस्तकें बाज़ार में भरना शुरू कर दिया । अब देश के नए रिलीज/प्रकाशन की एक सूची नवंबर के मध्य में आइसलैंड के  प्रत्येक घर को भेजी जाती है । इस परंपरा को क्रिसमस बुक फ्लड के नाम से जाना जाता है ।

हम आभारी हो सकते हैं कि ईश्वर ने बहुतों को एक अच्छी कहानी गढ़ने और दूसरों को अपने शब्दों के माध्यम से शिक्षित करने,  प्रोत्साहित करने या प्रेरित करने की क्षमता प्रदान की है । एक अच्छी किताब जैसा कुछ नहीं है! सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब,  बाइबल,  कई लेखकों द्वारा लिखी गई थी,  जिन्होंने काव्य और गद्य में लिखी थी - कुछ महान कहानियाँ,  कुछ उतनी नहीं - लेकिन सब प्रेरित l जैसा कि प्रेरित पौलुस ने तीमुथियुस को याद दिलाया था,  “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिए लाभदायक है” (2 तीमुथियुस 3:16–17) । बाइबल को पढ़ना,  प्रेरित करता है, दोष सिद्ध करता है  और उसके लिए जीने में हमारी मदद करता है - और हमें सच्चाई में मार्गदर्शन करता है (2:15) ।

जब हम पढ़ते हैं, तो सबसे महान पुस्तक, बाइबल को पढ़ने का समय निकालना न भूलें ।

श्वास और संक्षिप्तता

मेरी माँ, मेरी बहनें, और मैंने पिताजी के बिस्तर के निकट इंतजार किया क्योंकि उनकी साँसें समाप्त होने तक उथली और कम होती गई l पिताजी नवासी वर्ष से कुछ ही दिन कम थे,  जब वह इस जीवन के पार शांति से चले गए, जहाँ परमेश्वर उनकी प्रतीक्षा कर रहा था l उनका जाना हमें एक शून्य के साथ छोड़ गया जहां वह एक समय रहते थे और हमें याद दिलाने के लिए केवल यादें और स्मृति चिन्ह थे । फिर भी हमें उम्मीद है कि एक दिन हम फिर से मिलेंगे ।

हमारे पास वह आशा है क्योंकि हम मानते हैं कि पिताजी परमेश्वर के साथ हैं, जो उन्हें जानता है और उनसे प्यार करता है । जब पिताजी ने अपनी पहली सांस ली, तब परमेश्वर उनके फेफड़ों में सांस भर रहा था (यशायाह 42:5) । फिर भी उनके पहले और बीच में हर सांस के साथ, परमेश्वर पिताजी के जीवन के प्रत्येक विवरण में अंतरंग रूप से शामिल था, जैसे वह आपके और मेरे में है l यह परमेश्वर था जिसने उन्हें गर्भ में अद्भुत रूप से अभिकल्पित किया था और एक साथ "बुना" था (भजन 139: 13-14) । और जब पिताजी ने अपनी अंतिम सांस ली, तो परमेश्वर की आत्मा वहाँ थी, उसे प्यार से पकड़कर अपने साथ ले जा रही थी (पद.7-10) l

परमेश्वर के सभी बच्चों के लिए भी यही सच है । वह पृथ्वी पर हमारे संक्षिप्त जीवन का प्रत्येक क्षण जानता है (vv। 1-4) । हम उसके लिए अनमोल हैं । शेष प्रत्येक दिन और उससे आगे के जीवन की प्रत्याशा में, उसकी प्रशंसा करने के लिए "जितने भी प्राणी हैं” सब के सब याह की स्तुति करें l “याह की स्तुति करो l”

प्रत्येक को सलाहकार चाहिये

जब मैंने अपने नए पर्यवेक्षक के कार्यालय में कदम रखा, मैंने अपने आप को सावधान और भावनात्मक रूप से अनुभवहीन महसूस किया l मेरे पुराने पर्यवेक्षक ने हमारे विभाग को कठोरता और गुरूर के साथ चलाया था, और अक्सर मुझे (और अन्यों को) रोते हुए छोड़ दिया था l अब मैंने सोचा, मेरा नया बॉस कैसा होगा? जैसे ही मैंने अपने नए बॉस के कार्यालय में कदम रखा, मुझे लगा कि मेरा डर गायब हो गया था जब उन्होंने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया और मुझसे अपने बारे में और मेरी कुंठाओं को साझा करने के लिए कहा । उसने गौर से सुना, और मैं उनकी दयालु अभिव्यक्ति और कोमल शब्दों से जान गया कि वह वास्तव में परवाह करता था । यीशु में एक विश्वासी, वह मेरा कार्य सलाहकार, प्रोत्साहन देने वाला और मित्र बन गया ।

प्रेरित पौलुस, तीतुस के लिए एक आध्यात्मिक सलाहकार था, जो "विश्वास की सहभागिता के विचार से [उसका] सच्चा पुत्र” था (तीतुस 1:4) । तीतुस को लिखे अपने पत्र में, पौलुस ने उसे चर्च में उसकी भूमिका के लिए उपयोगी निर्देश और मार्गदर्शन दिए । उसने न केवल शिक्षा दी  बल्कि आदर्श बनकर दिखाया जो “खरे उपदेश के योग्य है” (2:1), और कैसे “भले कामों का नमूना,” और “उपदेश में सफाई, गंभीरता, और . . . खराई” हो (पद.7-8) l परिणामस्वरूप, तीतुस उसका सहयोगी, भाई और सहकर्मी बन गया (2 कुरिन्थियों 2:13; 8:23) — और दूसरों का सलाहकार ।

हममें से कई लोगों ने परामर्शदाता से लाभ प्राप्त किया है - एक शिक्षक, कोच, दादा-दादी, युवा अगुवा या पास्टर से, जिन्होंने हमें अपने ज्ञान, बुद्धि, प्रोत्साहन और विश्वास के साथ मार्गदर्शन किया है । यीशु के साथ आपकी यात्रा में सीखे गए आध्यात्मिक पाठों से कौन लाभ उठा सकता है?