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Articles by एलिसन कीडा

यदि मुझे उस वक्त मालूम होता ...

घर लौटते समय, मैं “Dear Younger Me,” गीत सुन रही थी जो खूबसूरती से पूछता है : यदि मैं अतीत में लौट पाती, जानते हुए जो मैं अभी जानती हूँ, आप अपने युवा व्यक्तित्व से क्या कहते? सुनते हुए, मैंने अपने कम बुद्धिमान युवा व्यक्तित्व को थोड़ी बुद्धि और चेतावनी देना चाही l हममें से बहुतों में जीवन के किसी मोड़ पर भिन्न तरीके से काम करने की इच्छा हुई होगी-काश हम सब कुछ दोहरा पाते l

किन्तु गीत बताता है कि यद्यपि हमारा अतीत हमें खेदित करे, हमारे समस्त अनुभवों ने हमें बनाया है l हम लौट नहीं सकते अथवा अपने चुनाव या पाप के परिणाम को बदल नहीं सकते l किन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमें अपने अतीत के भारी बोझ और गलतियों को उठाकर घूमने की ज़रूरत नहीं l यीशु के काम के कारण! “जिसने ... अपने बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिए नया जन्म दिया” (1 पतरस 1:3) l

विश्वास में उसकी ओर लौटकर अपने पापों के लिए खेदित होने पर, वह हमें क्षमा करेगा l हम उस दिन बिल्कुल नए बनाए जाएंगे और आत्मिक रूपांतरण की प्रक्रिया आरंभ करेंगे (2 कुरिं. 5:17) l हमने क्या किया था (अथवा नहीं किया था) इसका कोई औचित्य नहीं, क्योंकि उसके काम से हम क्षमा किये गए l हम आगे बढ़ते हुए, वर्तमान का पूरा लाभ उठाकर उसके साथ भविष्य की आशा कर सकते हैं l मसीह में, हम स्वतंत्र हैं!

स्वर्ग की झलक

मैं अपने अध्ययन कमरे की खुली खिड़की के बाहर चिड़ियों को चहकते और पेड़ों पर मंद-मंद हवा चलते देखती हूँ l मेरे पड़ोसी के जोते हुए खेत में पुआल के ढेर, और चमकदार नीले आसमान के विपरीत सफ़ेद बादल दिखाई देते हैं l

मेरे घर के निकट निरंतर यातायात का शोर और मेरे पीठ में हलके दर्द को छोड़ दें तो मैं स्वर्ग का अल्प आनंद उठा रही हूँ l मैं स्वर्ग  शब्द को हलके तौर पर उपयोग कर रही हूँ क्योंकि यद्यपि हमारा संसार एक समय पूरी तौर से अच्छा था, अब नहीं है l मानवता के पापी होने के बाद, हमें अदन के बाग़ से निष्कासित कर दिया गया और भूमि को “श्रापित” किया गया (देखें उत्प.3) l उस समय से पृथ्वी और उसमें की हर वस्तु “पतन के आधीन” है l” पीड़ा, बीमारी, और हमारी मृत्यु मानव के पाप में गिरने का परिणाम है (रोमियों 8:18-23) l

फिर भी परमेश्वर सब कुछ नया कर रहा है l एक दिन उसका निवास उसके लोगों के बीच और पुनःस्थापित संसार में होगा-“एक नया आकाश और एक नयी पृथ्वी”-जहाँ मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं” (प्रकाशित 21:1-4) l हम उस दिन तक चमकीले रंग और कभी-कभी अपने संसार के विस्तृत अद्भुत खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं, जो आनेवाले “स्वर्ग” की एक झलक है l

दुःख से आनंद तक

केली की गर्भावस्था में परेशानी आ गयी, और डॉक्टर चिंतित हो गए l उसके

लम्बे प्रसव पीड़ा में, उन्होंने फुर्ती से सर्जरी (Cesarean section) करने का निर्णय लिया l  किन्तु कठिन समय में, केली अपना दर्द भूल गयी जब उसने अपने नवजात बेटे को अपनी गोद में उठाया l दर्द आनंद में बदल गया l

बाइबिल इस सच्चाई की पुष्टि करती है : “प्रसव के समय स्त्री को शोक होता है, क्योंकि उसकी दुःख की घड़ी आ पहुंची है, परन्तु जब वह बालक को जन्म दे चुकती है, तो इस आनंद से कि संसार में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती” (यूहन्ना 16:21) l यीशु ने इस बात पर बल देने के लिए अपने शिष्यों के साथ इस उदाहरण का उपयोग किया कि उसके शीघ्र जाने से उनको दुःख होगा, किन्तु जब वे उसे पुनः देखेंगे उनका मन फिर आनंद से भर जाएगा (पद.20-22) l

यीशु अपनी मृत्यु और जी उठने और उसके बाद आनेवाली बातों के विषय कह रहा था l उसके जी उठने के बाद, शिष्य आनंदित हुए, क्योंकि यीशु उनको छोड़कर स्वर्ग जाने से पूर्व चालीस दिनों तक उनके साथ रहा और उनको सिखाता रहा (प्रेरितों 1:3) l फिर भी यीशु उनको दुखित नहीं छोड़ा l पवित्र आत्मा उनको आनंद से भरने वाला था (यूहन्ना 16:7-15; प्रेरितों 13:52) l

यद्यपि हम लोगों ने यीशु को आमने-सामने नहीं देखा है, विश्वासी होने के कारण हमें भरोसा है कि एक दिन हम उसे देखेंगे l उस दिन, हम पृथ्वी पर का दुःख भूल जाएंगे l किन्तु उस समय तक, प्रभु ने हमें आनंद के बिना नहीं छोड़ा है l उसने हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है (रोमि. 15:13; 1 पतरस 1:8-9) l

कपड़े पहनकर

अपनी पुस्तक Wearing God  में, लेखक लॉरेन विनर कहती है कि हमारे वस्त्र शांति से हमारा व्यक्तित्व संप्रेषित करते हैं l हमारे पहिरावे जीविका, समाज या पहिचान, मिजाज़, अथवा सामजिक स्थिति दर्शाते हैं l स्लोगन वाला टी-शर्ट, बिज़नस सूट, यूनिफार्म, अथवा ग्रीस लगी जीन्स की विषय विचारे और वे क्या प्रगत करते हैं l वह लिखती है, “यह विचार कि, वस्त्र की तरह, मसीही शब्दहीन होकर यीशु के विषय कुछ कह सकते हैं-चित्ताकर्षक है l”

पौलुस के अनुसार, हम भी मसीह का प्रतिनिधित्व शब्दहीन तरीके से कर सकते हैं l रोमियों 13:14 हमसे “मसीह को [पहिनने], और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाए [नहीं करने]” को कहता है l इसका अर्थ क्या है? मसीही हो जानने के बाद, हम मसीह की पहिचान बन जाते है l हम “विश्वास के द्वारा ... परमेश्वर की संतान” हैं (गला.3:26-27) l यही हमारा दर्जा है l फिर भी हमें प्रतिदिन उसके चरित्र को धारण करना है l हम यीशु की तरह जी कर और उसकी तरह और भी बनकर, भक्ति, प्रेम और आज्ञाकारिता में उन्नति करते हुए और एक समय हमें दास बनाने वाले पापों की ओर पीठ फेरकर ऐसा करते हैं l       

यह उन्नत्ति पवित्र आत्मा का हमारे भीतर कार्य, और वचन, प्रार्थना, और दूसरे मसीहियों के साथ संगति का परिणाम है (यूहन्ना 14:26) l जब दूसरे हमारे शब्द और आचरण को देखते हैं, हम मसीह के विषय क्या बोल रहे हैं?

आनंदित हृदय

मेरी नातिन का पसंदीदा सुर जॉन फ़िलिप सौसा का एक प्रयाण गीत(marching tune) है l 19 वीं शताब्दी में, सौसा, “सेना प्रयाण” का अमरीकी रचयिता और बैंड मास्टर था l मोरियाह प्रयाण बैंड में  नहीं है; वह केवल 20 महीने की है l वह इस सुर को पसंद करती है और कुछ एक सुर को गुनगुनाती भी है l यह उसके लिए आनंदित समय होता है l हमारे पारिवारिक मिलन के समय, हम इस गीत को तालियों और दूसरी प्रबल आवाजों के साथ गुनगुनाते हैं, और नाती-पोते इसके ताल पर नाचते अथवा गोल-गोल घूमकर परेड करते हैं l

हमारे आनंदित स्वर हमें उस भजन का स्मरण कराते हैं जो हमसे “आनंद से यहोवा की आराधना” करने को कहते हैं (भजन 100:2) l जब सुलेमान ने मंदिर का अर्पित किया, इस्राएलियों ने प्रशंसा के साथ उत्सव मनाया (2 इतीहास 7:5-6) l भजन 100 उनका एक गीत  रहा होगा l भजन घोषणा करता है : हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा का जयजयकार करो ! ... उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आँगनो में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो ! (पद. 1,4) l क्यों? “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करुणा सदा के लिए [है]! (पद.5) l

हमारा भला परमेश्वर हमसे प्रेम करता है ! कृतज्ञ प्रतिउत्तर में, आइये “जयजयकार” [करें] ! (भजन 100:1) l

बहुत अच्छा!

कुछ दिनों में एक ही विषय दिखाई देता है l हाल ही में मेरा एक दिन ऐसा ही था l हमारे पासवान ने विस्मयकारी, दो मिनट के अन्तराल में खिलते फूलों की फोटोग्राफी के साथ  उत्पत्ति पर अपना उपदेश आरंभ किया l तब, घर में, सोशल मीडिया की सूची में फूलों के अनेक चित्र दिखाई दिए l बाद में जंगल में घूमते समय, बसंत के जंगली फूल से हम घिरे थे-लाखों में जंगली गेंदे और आईरिस l

सृष्टि के तीसरे दिन परमेश्वर ने फूल और हर दूसरे प्रकार की वनस्पति (और सुखी भूमि जिसमें वे पैदा हो सकें) बनाए l और उस दिन दूसरी बार, परमेश्वर ने उन्हें “अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:10, 12) l केवल सृष्टि के छठवें दिन, परमेश्वर ने दो बार “अच्छा” कहा (पद.24,31) l वास्तव में, इस दिन जब उसने मनुष्य को रचा और उसकी श्रेष्ठकृति पूरी हो गई, उसने अपने द्वारा रचित सभी वस्तुओं को देखा “कि वह बहुत ही अच्छा है!”

सृष्टि की कहानी में, हम एक ऐसा सृष्टिकर्ता देखते हैं जो अपनी सृष्टि में आनंद लेता है-और सृष्टि करने में आनंदित दिखाई देता है l अन्यथा ऐसा रंगीन और अद्भुत विविधता वाला संसार क्यों बनाया जाए? और उसने सर्वोत्तम को अंत के लिए रखा जब उसने “मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार उत्पन्न किया” (पद.27) l उसकी छविवाले होने के कारण हम उसकी खूबसूरत हस्तकला द्वारा आशीषित और प्रेरित हैं l

मिलकर समय बिताना

एक परिजन के विवाह से कार में लौटते समय दो घंटे की यात्रा में, मेरी माँ तीन बार मुझसे पूछी कि मेरे काम में नया क्या है l मैं उनको कुछ ख़ास बातें बतायीं जैसे मैं पहली बार बता रही थी, जबकि सोचती रही कि मेरे कौन से शब्द संभवतः  यादगार बन सकते हैं l मेरी माँ स्मरण शक्ति नष्ट करनेवाली मानसिक रोग से पीड़ित है, जो गंभीर रूप से व्यवहार को प्रभावित करके बोलचाल की शक्ति के साथ और भी हानि कर सकता है l

माँ की बीमारी पर मैं दुखित होती हूँ किन्तु मैं उनके जीवित रहने और हमारे साथ समय बिताने और बात करने के लिए धन्यवादित हूँ l मैं उनसे मिलकर उत्तेजित होती हूँ क्योंकि वह आनंदित होकर कहती है, “एलिसन, कितना खूबसूरत आश्चर्य!” हम एक दूसरे की संगति का आनंद लेते हैं और उनकी खामोशी में भी, संगति करते हैं l

यह परमेश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध की छोटी तस्वीर है l बाइबिल हमें बताती है, “यहोवा अपने डरवैयों ही से प्रसन्न होता है, अर्थात् उन से जो उसकी करुणा की आशा लगाए रहते हैं" (भजन 147:11) l परमेश्वर यीशु को अपना उद्धारकर्ता माननेवालों को अपनी संतान कहता है (यूहन्ना 1:12) l और यद्यपि हम शब्दों की कमी के कारण बार-बार वे ही निवेदन करते हैं, वह धीरजवंत है क्योंकि वह हमसे प्रेम सम्बन्ध रखता है l उससे प्रार्थना में शब्दों की कमी में भी वह खुश होता है l

ईर्ष्या का इलाज

मैं माता-पिता के शाम के बाहर जाने पर ख़ुशी से बच्चों की देखभाल करने हेतु सहमत हुई l उनको गले लगाकर मैंने लड़कों से उनके सप्ताहांत का अनुभव पुछा l (दोनों के अलग-अलग अनुभव थे l) तीन वर्षीय, ब्रिजर ने एक सांस में अपने अंकल और आंटी के संग एक रात बिताना, आइसक्रीम, हिंडोला में झुलना और एक फिल्म देखने का अनुभव बताया! पाँच वर्षीय सैमुएल ने कहा, “कैम्पिंग l” मैंने पुछा, “मजा आया?” “ज्यादा नहीं,” उसने दयनीय भाव में उत्तर दिया l

सैमुएल ने ईर्ष्या का पुराना भाव अनुभव किया l वह अपने भाई के उत्साहित होकर सप्ताहांत का अनुभव सुनते वक्त अपने पिता के साथ कैम्पिंग का आनंद भूल गया l

हम सब ईर्ष्या का शिकार होते हैं l राजा शाऊल दाऊद की प्रशंसा सुनकर ईर्ष्या के दानव से हार मान लिया : “शाऊल ने तो हज़ारों को, परन्तु दाऊद ने लाखों को मारा है” (1 शमूएल 18:7) l शाऊल क्रोधित होकर “उस दिन से दाऊद की ताक में लगा रहा” (1 शमूएल 18:9) l  वह चिढ़कर दाऊद को मारना चाहा!

तुलना खेल मूर्ख और आत्म-घाती है l दूसरों के पास जो है वह हमारे पास नहीं है अथवा हमसे भिन्न अनुभव l किन्तु परमेश्वर ने हमें अनेक आशीषें, जिसमें पृथ्वी पर जीवन और सभी विश्वास करनेवालों के साथ अनंत जीवन की प्रतिज्ञा दी है l हम उसकी सहायता पर निर्भर होकर और धन्यवादी मन से उस पर केन्द्रित रहकर ईर्ष्या पर विजयी हो सकते हैं l

शिविर-स्थल भजन

जब हम पति-पत्नी प्रकृति देखने जाते हैं, हम अपने कैमरे से अपने पाँवों के निकट संसार का सूक्ष्म रूप समान दिखाई दिखनेवाले पौधों के भी फ़ोटो पास से खींचते हैं l रात-ही-रात में उगने वाले, जंगलों में चमकीले नारंगी, लाल, और पीले रंगों की छठा बिखेरते कुकुरमुत्ते में हम अदभुत विविधता और सुन्दरता देखते हैं!

जीवन के चित्र मुझे अपनी आँखें केवल कुकुरमुत्ते को नहीं किन्तु आसमान के तारों को निहारने की प्रेरणा देते हैं l उसने अनंत विस्तार और विविधता का संसार अभिकल्पित किया l और उसने हमें इस खूबसूरती का आनंद लेने और इसको अपने अधिकार में करने हेतु रचकर इसके बीच रखा (उत्पत्ति 1:27-28; भजन 8:6-8) l

मेरा ध्यान हमारे परिवार के एक शिविर-स्थल भजन-जिसे हम आग के चारों ओर बैठकर पढ़ते हैं-की ओर जाता है l “हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है . . . जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चन्द्रमा और तारागन को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूँ; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन 8:1-4) l

यह कितना अदभुत है कि समस्त भव्यता के इस संसार का सृष्टिकर्ता आपकी और मेरी चिंता करता है!

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आपका सुरक्षित स्थान

मेरी बेटी और मैं एक बड़े पारिवारिक उत्सव के लिए तैयारी कर रहे थे l इसलिए कि वह उत्सव के विषय घबरायी हुई थी मैंने कहा कि मैं गाड़ी ड्राइव करुँगी l “ठीक है l किन्तु मैं अपनी कार में सुरक्षित महसूस करती हूँ l क्या आप चलाएंगी?” उसने पुछा l यह महसूस करके कि उसे मेरी गाड़ी छोटी लगती है, मैंने पूछा कि क्या मेरी गाड़ी बहुत छोटी थी l उसका उत्तर था, “नहीं, बस मेरी गाड़ी मुझे सुरक्षित लगती है l पता नहीं क्यों, मैं अपनी गाड़ी में आरामदायक महसूस करती हूँ l”

उसकी टिप्पणी ने मुझे मेरे “सुरक्षित स्थान” के सम्बन्ध में मुझे सोचने की चुनौती दी l तुरंत ही मैंने नीतिवचन 18:10 के विषय सोची, “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है, धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है l” पुराने नियम के काल में, दीवारें और पहरे की मीनार लोगों को बाहरी खतरों की चेतावनी के साथ-साथ उनकी रक्षा भी करती थीं l लेखक बताना चाहता है कि परमेश्वर का नाम, जो उसका चरित्र है, व्यक्तित्व और सब कुछ है जो वह है, उसके लोगों को वास्तविक सुरक्षा देती है l

ख़ास भौतिक स्थान खतरनाक क्षणों में इच्छित सुरक्षा देने का वादा करते हैं l तूफ़ान के मध्य एक मजबूत छत l चिकित्सीय सहायता देनेवाला एक हॉस्पिटल l एक प्रिय का गले लगाना l

आपका “सुरक्षित स्थान” क्या है? हम जहाँ भी सुरक्षा खोजते हैं, उस स्थान पर हमारे साथ परमेश्वर की उपस्थिति ही है जो हमारी ज़रूरत में हमें ताकत और सुरक्षा देती है l

जब खूबसूरती ख़त्म नहीं होती

मुझे ग्रैंड घाटी देखना पसंद है l जब मैं घाटी के किनारे खड़ा होता हूँ, मैं परमेश्वर की चौंकानेवाली कृति देखता हूँ l 

यद्यपि वह भूमि में एक (बहुत बड़ा) “गड्ढा” है, ग्रैंड घाटी मुझे स्वर्ग पर विचार करने हेतु विवश करता है l एक बारह वर्षीय ईमानदार युवक ने एक बार मुझ से पूछा, “क्या स्वर्ग अरुचिकर नहीं होगा? क्या आप नहीं सोचते कि हम हमेशा परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए थक जाएंगे?” किन्तु यदि भूमि में एक “गड्ढा” इतना जबरदस्त खुबसूरत है और हम उसे देखते नहीं थकते हैं, हम खूबसूरती के श्रोत-हमारे प्रेमी सृष्टिकर्ता-को नयी सृष्टि के सम्पूर्ण असली आश्चर्य में एक दिन देखने की कल्पना ही कर सकते हैं l

“एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ,” (भजन 27:4) दाऊद ने इन शब्दों को लिखते हुए यह इच्छा प्रगट की l परमेश्वर की उपस्थिति से सुन्दर कुछ नहीं, जो इस पृथ्वी पर हमारे निकट आती है जब हम भविष्य में उसका चेहरा आमने-सामने देखने की चाह में उसे विश्वास से खोजते हैं l

उस दिन हम अपने अद्भुत प्रभु की प्रशंसा करते हुए नहीं थकेंगे, क्योंकि हम उसकी उत्तम भलाई और उसके हाथों के कार्य के आश्चर्य की तरोताज़गी, और नयी खोज के अंत में कभी नहीं पहुंचेंगे l उसकी उपस्थिति उसकी खूबसूरती और उसके प्रेम का असाधारण प्रकाशन प्रगट करेगी l

हमारे पास सामर्थ्य है

कड़कड़ाहट की आवाज़ ने मुझे चौंका दिया l मैं आवाज़ को पहचानकर रसोई की ओर भागी l मैंने भूल से कॉफ़ी बनाने वाला बिजली का उपकरण ऑन कर दिया था l मैंने उपकरण का प्लग हटाकर, उसके तले को छूकर देखना चाही कि टाइल का काउंटर पैर रखने लायक बहुत गर्म तो नहीं है l उसके चिकने भाग से मेरी उंगलियाँ जल गयीं, और मेरे कोमल पैरों में छाले हो गए l

मेरे पति द्वारा मेरे घाव में दावा लगाते समय मैंने अपना सिर हिलाया l मैं जानती थी कि कांच गरम होगा l “मैं ईमानदारी से कहती हूँ, मुझे नहीं मालुम मैंने उसे क्यों छू दिया,” मैं बोली l

मेरी गलती ने मुझे वचन में एक गंभीर विषय, पाप के स्वभाव के विषय पौलुस का प्रतिउत्तर याद दिलाया l

प्रेरित स्वीकारता है कि जो वह करता है उस को नहीं जानता; क्योंकि जो वह चाहता है वह नहीं करता (रोमि. 7:15) l स्वीकार करते हुए कि वचन सही और गलत को निश्चित करता है (पद.7), वह पाप के विरुद्ध शरीर और आत्मा के बीच निरंतर चलनेवाली जटिल और वास्तविक युद्ध को पहचानता है (पद.15-23) l वह अपनी दुर्बलता स्वीकारते हुए, वर्तमान और सर्वदा की विजय की आशा प्रस्तुत करता है (पद.24-25) l

जब हम मसीह को अपना जीवन समर्पित करते हैं, वह हमें पवित्र आत्मा देता है जो हमें सही करने के लिए सामर्थी बनाता है (8:8-10) l जब वह हमें परमेश्वर का वचन मानने के लिए आज्ञाकारी बनाता है, हम झुलसाने वाले पाप से दूर हो सकते हैं जो हमें उस बहुतायत के जीवन से दूर करता है जो परमेश्वर अपने प्रेम करनेवाले को देने की प्रतिज्ञा की है l