अपने शत्रुओं से प्रेम
अमेरिकी गृहयुद्ध ने कई कड़वी भावनाओं को जन्म दिया, अब्राहम लिंकन ने दक्षिण के बारे में एक दयालु शब्द बोलना उचित समझा l एक हैरान दर्शक ने पूछा कि वह ऐसा कैसे कर सकता है l उन्होंने उत्तर दिया, “महोदया, क्या मैं अपने शत्रुओं को मित्र बनाकर उन्हें नष्ट नहीं कर देता हूँ?” एक शताब्दी के बाद उन शब्दों पर विचार करते हुए, मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने टिप्पणी की, “यह मुक्तिदायक प्रेम की शक्ति है l”
यीशु मसीह के शिष्यों को अपने शत्रुओं से प्रेम करने के लिए बुलाते समय, किंग ने यीशु की शिक्षाओं पर ध्यान दिया l उन्होंने कहा कि यद्यपि विश्वासियों को उन्हें सताने वालों से प्यार करने में कठिनाई हो सकती है, यह प्यार “परमेश्वर के प्रति निरंतर और पूर्ण समर्पण” से बढ़ता है l किंग ने कहा, “जब हम इस तरह से प्यार करते हैं, हम परमेश्वर को जानेंगे और उसकी पवित्रता की सुन्दरता का अनुभव करेंगे l”
किंग ने यीशु के पहाड़ी उपदेश का सन्दर्भ दिया जिसमें उन्होंने कहा था, “अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिए प्रार्थना करो, जिस से तुम अपने स्वर्गीय पिता की संतान ठहरोगे: (मत्ती 5:44-45) l यीशु ने अपने पड़ोसियों से प्रेम और अपने शत्रुओं से घृणा करने के उस समय के पारंपरिक ज्ञान के विरुद्ध सलाह दी l बल्कि, पिता परमेश्वर अपने बच्चों को विरोध करनेवालों से प्रेम करने की सामर्थ्य देता है l
अपने शत्रुओं से प्यार करना असंभव लग सकता है, लेकिन जब हम मदद के लिए परमेश्वर की ओर देखते हैं, तो वह हमारी प्रार्थनाओं का जवाब देगा l वह इस कठिन पद्धति को अपनाने का साहस देता है, क्योंकि जैसा कि यीशु ने कहा था, “परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है” (19:26) l एमी बूशर पाई
परमेश्वर का परिवर्तनकारी वचन
जब क्रिस्टिन अपने चीनी पति के लिए एक विशेष पुस्तक खरीदना चाहती थी, तो उसे चीनी भाषा में केवल एक बाइबल ही मिली l हलाकि उनमें से कोई भी मसीह में विश्वास करने वाला नहीं था, फिर भी उसे उम्मीद थी कि वह उपहार की सराहना करेगा l बाइबल को पहली नज़र में देखकर वह क्रोधित हो गया, लेकिन अंततः उसने इसे समझ लिया l जैसे-जैसे उसने पढ़ा, वह इसके पन्नों की सच्चाई से विवश हो गया l इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से परेशान होकर, क्रिस्टिन ने उसका खंडन करने के लिए धर्मग्रंथ पढ़ना आरम्भ कर दिया l उसे आश्चर्य हुआ, उसने जो पढ़ा उससे आश्वस्त होकर उसे भी यीशु पर विश्वास हो गया l
प्रेरित पौलुस पवित्रशास्त्र की बदलती प्रकृति को जानता था l रोम की जेल से लिखते हुए, उसने तीमुथियुस से, जिसका उन्होंने मार्गदर्शन किया था, आग्रह किया कि “तू उन बातों पर जो तू ने सीखीं हैं . . . दृढ़ रह” क्योंकि “बचपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है” (2 तीमुथियुस 3:14-15) l मूल भाषा, यूनानी में “दृढ़ रह” का अर्थ बाइबल में बताई गयी बातों में “बने रहना” है l यह जानते हुए कि तीमुथियुस को विरोध और उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा, पौलुस चाहता था कि वह चुनौतियों के लिए तैयार रहे; उसका मानना था कि उसके शिष्य को बाइबल में ताकत और ज्ञान मिलेगा क्योंकि उसने इसकी सच्चाई पर विचार करने में समय बिताया था l
परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा पवित्रात्मा को हमारे लिए जीवित करता है l जैसे ही हम उसमें निवास करते हैं, वह हमें उसके जैसा बनाने के लिए बदल देता है l जैसा कि उन्होंने सियो-हू और क्रिस्टिन के साथ किया था l एमी बूशर पाई
परमेश्वर का कार्यकर्ता
मध्य पूर्व के एक शरणार्थी शिविर में, जब रेज़ा को बाइबल मिली, तो उसे यीशु के बारे में पता चला और वह उस पर विश्वास करने लगा। मसीह के नाम में उसकी पहली प्रार्थना थी, "मुझे अपने कार्यकर्ता के रूप में उपयोग करें।" बाद में, शिविर छोड़ने के पश्चात्, परमेश्वर ने उस प्रार्थना का जवाब दिया जब उसे अचानक से एक राहत एजेंसी में नौकरी मिल गई, और वह उन लोगों की सेवा करने के लिए शिविर में लौट आया जिन्हें वह जानता था और प्यार करता था। उसने खेल-कूद क्लब, भाषा कक्षाएं और कानूनी परामर्श की स्थापना की—"कुछ भी जो लोगों को आशा दे सकता है।" वह इन कार्यक्रमों को दूसरों की सेवा करने और परमेश्वर के ज्ञान और प्रेम को साझा करने के एक तरीके के रूप में देखता है।
अपनी बाइबल पढ़ते समय, रेज़ा को उत्पत्ति से यूसुफ की कहानी के साथ तत्काल संबंध महसूस हुआ। उसने देखा कि जब वह जेल में था तब परमेश्वर ने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए यूसुफ का उपयोग कैसे किया। चूँकि परमेश्वर यूसुफ के साथ था, उसने उस पर दया की और उस पर अनुग्रह किया। जेल प्रबंधक ने यूसुफ को प्रभारी बना दिया और उसे वहां के मामलों पर ध्यान नहीं देना पड़ा क्योंकि परमेश्वर ने यूसुफ को "जो कुछ वह करता था . . . उस में सफलता देता था।" (उत्पत्ति 39:23)।
परमेश्वर भी हमारे साथ रहने का वादा करता है l चाहे हम कारावास का सामना कर रहे हों— शाब्दिक या आलंकारिक—कठिनाई, विस्थापन, मनोव्यथा, या दुःख, हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा। जिस तरह उसने रेज़ा को शिविर में लोगों की सेवा करने और यूसुफ को जेल में उत्तरदायित्व निभाने में सक्षम बनाया l वह हमेशा हमारे पास रहेगा। एमी बूशर पाई
एक बात अवश्य
मार्च में एक बार, मैंने मरियम और मार्था, जो बेथनी की बहनें थीं, जिनसे यीशु उनके भाई लाजर के साथ प्यार करते थे, (यूहन्ना 11:5) के विषय पर एक रिट्रीट का आयोजन किया। हम अंग्रेजी समुद्र तट के किनारे एक सुदूर स्थान पर थे। जब हम पर अप्रत्याशित रूप से बर्फबारी हुई, तो उन्होंने टिप्पणी की कि कैसे एक साथ अतिरिक्त दिन बिताने का मतलब है कि वे मरियम की तरह मसीह के चरणों में बैठने का अभ्यास कर सकते हैं। वे "एक चीज़ जो ज़रूरी है" (लूका 10:42) का अनुसरण करना चाहते थे, जिसे यीशु ने प्यार से मार्था को अपनाने के लिए कहा था, जो कि यीशु के करीब आने और उससे सीखने का चुनाव करना था।
जब यीशु मार्था, मरियम और लाजर के घर गए, तो मार्था को पहले से पता नहीं था कि वे आ रहे हैं, इसलिए हम समझ सकते हैं कि वह मरियम से कैसे नाराज़ हो सकती थी क्योंकि उसने यीशु और उसके दोस्तों को खाना खिलाने की तैयारी में मदद नहीं की। लेकिन वह यह भूल गई कि वास्तव में क्या मायने रखता है - यीशु से प्राप्त करना जैसा कि उसने उनसे सीखा। मसीह उसे उसकी सेवा करने की इच्छा के लिए डांट नहीं रहा था, बल्कि उसे याद दिला रहा था कि वह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ खो रही थी
जब रुकावटें हमें चिड़चिड़ा बना देती हैं या हम उन कई चीजों के बारे में व्याकुल हो जाते हैं जिन्हें हम पूरा करना चाहते हैं, तो हम रुक सकते हैं और खुद को याद दिला सकते हैं कि जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है। जैसे ही हम खुद को धीमा करते हैं, खुद को यीशु के चरणों में बैठे हुए कल्पना करते हैं, हम उनसे अपना प्यार और जीवन से भरने के लिए कह सकते हैं। हम उनके प्रिय शिष्य होने का आनंद उठा सकते हैं।
— एमी बाउचर पाई
आश्चर्यकर्म करने वाला परमेश्वर
सम्मेलन केंद्र में अंधेरा छा गया, और हज़ारों विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपना सिर झुका लिया, जब वक्ता ने समर्पण की प्रार्थना में हमारी अगुवाई की । जब उन्होंने उन लोगों का स्वागत किया, जो विदेशी मिशनों में सेवा करने के लिए बुलाए गए थे, तो मैं महसूस कर सकता था कि मेरी दोस्त लिनेट अपनी सीट छोड़ रही थी और जानती थी कि वह फिलीपींस में रहने और सेवा करने का वादा कर रही थी। फिर भी मुझे खड़े होने की कोई इच्छा नहीं हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका में ज़रूरतों को देखते हुए, मैं अपनी जन्मभूमि में परमेश्वर के प्रेम को साझा करना चाहता था। परन्तु एक दशक बाद, मैने दूसरे देश में परमेश्वर की सेवा करते हुए उन लोगों के बीच अपना घर बनाया जो उसने मेरे पड़ोसियों के रूप में मुझे दिए थे। मैं अपना जीवन कैसे व्यतीत करूँगा, इस बारे में मेरे विचार तब बदल गए जब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे उस अभियान से अलग कार्य के लिए आमंत्रित किया है जिसका मैंने अनुमान लगाया था।
जिन लोगों से यीशु मिलता था उनको अक्सर वह आश्चर्यचकित किया करता था, जिसमें वे मछुआरे भी शामिल थे जिन्हें उसने अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया था। जब मसीह ने उन्हें लोगों को पकड़ने का एक नया मिशन (विशेष कार्य) दिया, तो पतरस और अन्द्रियास “तुरंत” अपना जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए (मत्ती 4:20), और याकूब एवं योना ने भी “तुरंत” अपनी नाव छोड़ दी (पद 22)। वे उस पर भरोसा करते हुए यह न जानते हुए भी कि वे कहाँ जा रहे थे, यीशु के साथ इस नए अभियान पर निकल पड़े। निःसंदेह, परमेश्वर बहुत से लोगों को अपनी सेवा वहीं पर करने के लिए बुलाता है जहाँ पर वे हैं! चाहे रुकना हो या जाना हो, हम सब उसकी ओर हमें अद्भुत अनुभवों और उसके लिए जीवन व्यतीत करने के अवसरों के साथ आश्चर्यचकित करने की आशा से देख सकते हैं, जिस तरह से हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा।
—एमी बाऊचर पाय
दासत्व से मुक्ति
“आप मूसा के समान हैं, हमें दासत्व से छुड़ानेवाले!” जमीला चिल्लाई l पाकिस्तान में एक बंधुआ ईंट-भट्ठा मज़दूर के रूप में, वह और उसका परिवार भट्ठा मालिक को दिए गए अत्यधिक ऋण के कारण पीड़ित थे। उन्होंने अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा सिर्फ़ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिया। लेकिन जब उन्हें एक गैर-लाभकारी एजेंसी से एक उपहार मिला जिसने उन्हें उनके ऋण से मुक्त कर दिया, तो उन्हें बहुत राहत महसूस हुई। अपनी आज़ादी के लिए एजेंसी के प्रतिनिधि को धन्यवाद देते हुए, यीशु में विश्वास रखने वाली जमीला ने मूसा और इस्राएलियों को गुलामी से मुक्त करने के परमेश्वर के उदाहरण की ओर इशारा किया।
कठोर परिस्थितियों में काम करते हुए, सैकड़ों वर्षों से इस्राएलियों को मिस्रियों द्वारा सताया गया था l उन्होंने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा (निर्गमन 2:23) l लेकिन उनके काम का बोझ बढ़ गया, क्योंकि फिरौन ने उन्हें ईंटें बनाने के साथ-साथ पुआल भी इकठ्ठा करने का आदेश दिया (5:6-8) l जब इस्राएलियों ने उत्पीड़न के विरुद्ध पुकारना जारी रखा, तो परमेश्वर ने उनके परमेश्वर होने की अपनी प्रतिज्ञा दोहरायी (6:7) l वे अब और दास नहीं रहेंगे, क्योंकि वह उन्हें “अपनी भुजा बढ़ाकर” छुड़ा लेगा (पद.6) l
परमेश्वर के निर्देशन में, मूसा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर ले गया (अध्याय 14 देखें) l आज भी परमेश्वर हमें क्रूस पर अपने पुत्र, यीशु की फैली हुयी भुजाओं द्वारा छुड़ाता है l हम उस पाप के बहुत बड़े दासत्व से मुक्त हैं जिसने कभी हमें नियंत्रित किया था l हम अब गुलाम नहीं, स्वतंत्र हैं!
—एमी बाउचर पाई
आत्मा से भीगना
लेखक और अमेरिकी न्यू टेस्टामेंट विद्वान स्कॉट मैकनाइट बताते हैं कि जब वह हाई स्कूल में थे, तो उन्हें वह अनुभव हुआ जिसे वे "आत्मा से भर जाना अनुभव" कहते हैं। एक शिविर में, वक्ता ने उन्हें चुनौती दी कि वह मसीह को अपने जीवन के सिंहासन पर बैठाये अपने आपको पवित्र आत्मा को समर्पित करने के द्वारा । बाद में, वह एक पेड़ के नीचे बैठ गए और प्रार्थना की, “हे पिता, मेरे पापों को क्षमा करे। और पवित्र आत्मा, मेरे भीतर आ और मुझे भर दे।” उन्होंने कहा, कुछ शक्तिशाली घटित हुआ। “उस क्षण से मेरा जीवन बिल्कुल अलग हो गया है। सिद्ध नहीं, लेकिन अलग।'' उन्हें अचानक बाइबिल पढ़ने, प्रार्थना करने, यीशु में अन्य विश्वासियों से मिलने और परमेश्वर की सेवा करने की इच्छा हुई।
जी उठे यीशु के स्वर्ग में जाने से पहले, उसने अपने मित्रों से कहा: "यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा किये हुए उपहार की बाट जाहते रहो" (प्रेरितों 1:4)। वे यरूशलेम में, और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक उसके गवाह बनने के लिए "सामर्थ प्राप्त करेंगे" (पद 8)। परमेश्वर उन सभी में वास करने के लिए पवित्र आत्मा देता है जो यीशु पर विश्वास करते हैं। यह पहली बार पिन्तेकुस्त में हुआ (देखें प्रेरितों के काम 2); आज ऐसा तब होता है जब कोई मसीह पर भरोसा करता है।
परमेश्वर का आत्मा अब भी लगतार उन लोगों को भरता है जो यीशु पर विश्वास करते हैं। हम भी, आत्मा की सहायता से, बदले हुए चरित्र और अभिलाषाओं के फल प्रकट करते हैं (गलातियों 5:22-23)। आइए हम परमेश्वर की स्तुति करे और उसका धन्यवाद करे की वह हमें शान्ति देता है, कायल करता है, सहयोग करता है और हमसे प्रेम करता है।
विश्वास सुनने से आता है
जब पादरी बॉब को चोट लगी जिससे उनकी आवाज पर असर हुआ, तो उन्होंने पंद्रह साल तक संकट और निराशा का सामना किया। उन्होने सोचा, कि एक पादरी जो बात नहीं कर सकता वह क्या करे? वह इस प्रश्न से जूझता रहा, उसने अपने दुःख और भ्रम को परमेश्वर के सामने उंडेल दिया। उन्होंने बताया, “मैं केवल एक बात जानता था – परमेश्वर के वचन की तलाश करना।” जैसे–जैसे उसने बाइबल पढ़ने में समय बिताया, परमेश्वर के लिए उसका प्यार बढ़ता गया — “मैंने अपना जीवन पवित्रशास्त्र में आत्मसात करने और उसमें डूबने के लिए समर्पित कर दिया है क्योंकि विश्वास सुनने से और सुनना परमेश्वर के वचन से आता है।”
रोमियों को लिखी प्रेरित पौलुस की पत्री में हम इस वाक्यांश को पाते हैं “विश्वास सुनने से आता है”। पौलुस अपने सभी साथी यहूदी लोगों से मसीह में विश्वास करने और बचाए जाने की लालसा रखता था (रोमियों10:9)। वे कैसे विश्वास करेंगे? उस विश्वास के द्वारा जो वचन सुनने से होता है— मसीह के वचन से (पद 17)।
पादरी बॉब मसीह के वचन को ग्रहण करना और उसमें विश्वास करना चाहते हैं, खासकर जब वह बाइबल पढ़ते हैं। वह दिन में केवल एक घंटे के लिए ही बोल सकते हैं और ऐसा करने पर उन्हें लगातार दर्द होता है, लेकिन वह पवित्रशास्त्र में अपने आप को डुबो देने के द्वारा परमेश्वर से शांति और संतोष पाते रहते हैं। इसलिए हम भी भरोसा कर सकते हैं कि यीशु हमारे संघर्षों में खुद को हमारे सामने प्रकट करेंगे। जब हम उसका वचन सुनते हैं, चाहे हम किसी भी चुनौती का सामना करें, वह हमारे विश्वास को बढ़ाएगा।
परीक्षाओं से बल पाना
जब मैंने कुछ लिफाफों में एक स्टिकर को देखा, जिस पर लिखा था, “मैंने आँखों की जाँच कराई है”, तो मेरी यादें फिर से ताजा हो गईं। अपने मन में मुझे अपने चार साल के बेटे का ध्यान आया जिसने अपनी आंखों में चुभने वाली दवा को सहन करने के बाद गर्व से यह स्टिकर लगा रखा था। आँख की कमजोर मांसपेशियों के कारण, उसे सही और शक्तिशाली आंख पर हर दिन घंटों तक पट्टी बांध कर रखना पड़ता था ताकि कमजोर आँख विकसित हो सके। उसे सर्जरी की भी आवश्यकता थी। उसने सांत्वना के लिए अपने माता-पिता के रूप में हमारी ओर देखते हुए, और बच्चों के समान विश्वास के साथ परमेश्वर पर निर्भर रहते हुए, एक-एक करके इन चुनौतियों का सामना किया। इन चुनौतियों के माध्यम से उसमें बहुत मजबूती (प्रतिरोध क्षमता) आ गई थी।
जो लोग परीक्षाओं और कष्टों को सहन करते हैं, वे अक्सर उस अनुभव के द्वारा परिवर्तित हो जाते हैं। परन्तु प्रेरित पौलुस ने और आगे बढ़कर कहा कि “हम अपने क्लेशों में भी घमंड करें” क्योंकि उन्हीं के द्वारा हम धीरज को विकसित करते हैं। धीरज से खरा निकलना उत्पन्न होता है; और खरे निकलने से, आशा उत्पन्न होती है (रोमियों 5:3-4)। पौलुस निश्चय ही उन परीक्षाओं को जानता था, जिसमें न केवल जहाज़ों का टूटना था, बल्कि कारावास भी जो उसके विश्वास के लिए था। फिर भी उसने रोम के विश्वासियों को लिखा कि “आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (पद 5)। इस प्रेरित ने पहचान लिया कि जब हम परमेश्वर पर अपना भरोसा रखते हैं तो परमेश्वर का आत्मा यीशु में हमारी आशा को जीवित रखता है।
आप चाहे किसी भी कठिनाई का सामना करें, परन्तु यह जान लें कि परमेश्वर आप पर अपना अनुग्रह और दया उंडेलेगा। वह आप से प्रेम करता है।