एक बात अवश्य
मार्च में एक बार, मैंने मरियम और मार्था, जो बेथनी की बहनें थीं, जिनसे यीशु उनके भाई लाजर के साथ प्यार करते थे, (यूहन्ना 11:5) के विषय पर एक रिट्रीट का आयोजन किया। हम अंग्रेजी समुद्र तट के किनारे एक सुदूर स्थान पर थे। जब हम पर अप्रत्याशित रूप से बर्फबारी हुई, तो उन्होंने टिप्पणी की कि कैसे एक साथ अतिरिक्त दिन बिताने का मतलब है कि वे मरियम की तरह मसीह के चरणों में बैठने का अभ्यास कर सकते हैं। वे "एक चीज़ जो ज़रूरी है" (लूका 10:42) का अनुसरण करना चाहते थे, जिसे यीशु ने प्यार से मार्था को अपनाने के लिए कहा था, जो कि यीशु के करीब आने और उससे सीखने का चुनाव करना था।
जब यीशु मार्था, मरियम और लाजर के घर गए, तो मार्था को पहले से पता नहीं था कि वे आ रहे हैं, इसलिए हम समझ सकते हैं कि वह मरियम से कैसे नाराज़ हो सकती थी क्योंकि उसने यीशु और उसके दोस्तों को खाना खिलाने की तैयारी में मदद नहीं की। लेकिन वह यह भूल गई कि वास्तव में क्या मायने रखता है - यीशु से प्राप्त करना जैसा कि उसने उनसे सीखा। मसीह उसे उसकी सेवा करने की इच्छा के लिए डांट नहीं रहा था, बल्कि उसे याद दिला रहा था कि वह सबसे महत्वपूर्ण चीज़ खो रही थी
जब रुकावटें हमें चिड़चिड़ा बना देती हैं या हम उन कई चीजों के बारे में व्याकुल हो जाते हैं जिन्हें हम पूरा करना चाहते हैं, तो हम रुक सकते हैं और खुद को याद दिला सकते हैं कि जीवन में वास्तव में क्या मायने रखता है। जैसे ही हम खुद को धीमा करते हैं, खुद को यीशु के चरणों में बैठे हुए कल्पना करते हैं, हम उनसे अपना प्यार और जीवन से भरने के लिए कह सकते हैं। हम उनके प्रिय शिष्य होने का आनंद उठा सकते हैं।
— एमी बाउचर पाई
आश्चर्यकर्म करने वाला परमेश्वर
सम्मेलन केंद्र में अंधेरा छा गया, और हज़ारों विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपना सिर झुका लिया, जब वक्ता ने समर्पण की प्रार्थना में हमारी अगुवाई की । जब उन्होंने उन लोगों का स्वागत किया, जो विदेशी मिशनों में सेवा करने के लिए बुलाए गए थे, तो मैं महसूस कर सकता था कि मेरी दोस्त लिनेट अपनी सीट छोड़ रही थी और जानती थी कि वह फिलीपींस में रहने और सेवा करने का वादा कर रही थी। फिर भी मुझे खड़े होने की कोई इच्छा नहीं हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका में ज़रूरतों को देखते हुए, मैं अपनी जन्मभूमि में परमेश्वर के प्रेम को साझा करना चाहता था। परन्तु एक दशक बाद, मैने दूसरे देश में परमेश्वर की सेवा करते हुए उन लोगों के बीच अपना घर बनाया जो उसने मेरे पड़ोसियों के रूप में मुझे दिए थे। मैं अपना जीवन कैसे व्यतीत करूँगा, इस बारे में मेरे विचार तब बदल गए जब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे उस अभियान से अलग कार्य के लिए आमंत्रित किया है जिसका मैंने अनुमान लगाया था।
जिन लोगों से यीशु मिलता था उनको अक्सर वह आश्चर्यचकित किया करता था, जिसमें वे मछुआरे भी शामिल थे जिन्हें उसने अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया था। जब मसीह ने उन्हें लोगों को पकड़ने का एक नया मिशन (विशेष कार्य) दिया, तो पतरस और अन्द्रियास “तुरंत” अपना जाल छोड़कर उसके पीछे हो लिए (मत्ती 4:20), और याकूब एवं योना ने भी “तुरंत” अपनी नाव छोड़ दी (पद 22)। वे उस पर भरोसा करते हुए यह न जानते हुए भी कि वे कहाँ जा रहे थे, यीशु के साथ इस नए अभियान पर निकल पड़े। निःसंदेह, परमेश्वर बहुत से लोगों को अपनी सेवा वहीं पर करने के लिए बुलाता है जहाँ पर वे हैं! चाहे रुकना हो या जाना हो, हम सब उसकी ओर हमें अद्भुत अनुभवों और उसके लिए जीवन व्यतीत करने के अवसरों के साथ आश्चर्यचकित करने की आशा से देख सकते हैं, जिस तरह से हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा।
—एमी बाऊचर पाय
दासत्व से मुक्ति
“आप मूसा के समान हैं, हमें दासत्व से छुड़ानेवाले!” जमीला चिल्लाई l पाकिस्तान में एक बंधुआ ईंट-भट्ठा मज़दूर के रूप में, वह और उसका परिवार भट्ठा मालिक को दिए गए अत्यधिक ऋण के कारण पीड़ित थे। उन्होंने अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा सिर्फ़ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिया। लेकिन जब उन्हें एक गैर-लाभकारी एजेंसी से एक उपहार मिला जिसने उन्हें उनके ऋण से मुक्त कर दिया, तो उन्हें बहुत राहत महसूस हुई। अपनी आज़ादी के लिए एजेंसी के प्रतिनिधि को धन्यवाद देते हुए, यीशु में विश्वास रखने वाली जमीला ने मूसा और इस्राएलियों को गुलामी से मुक्त करने के परमेश्वर के उदाहरण की ओर इशारा किया।
कठोर परिस्थितियों में काम करते हुए, सैकड़ों वर्षों से इस्राएलियों को मिस्रियों द्वारा सताया गया था l उन्होंने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा (निर्गमन 2:23) l लेकिन उनके काम का बोझ बढ़ गया, क्योंकि फिरौन ने उन्हें ईंटें बनाने के साथ-साथ पुआल भी इकठ्ठा करने का आदेश दिया (5:6-8) l जब इस्राएलियों ने उत्पीड़न के विरुद्ध पुकारना जारी रखा, तो परमेश्वर ने उनके परमेश्वर होने की अपनी प्रतिज्ञा दोहरायी (6:7) l वे अब और दास नहीं रहेंगे, क्योंकि वह उन्हें “अपनी भुजा बढ़ाकर” छुड़ा लेगा (पद.6) l
परमेश्वर के निर्देशन में, मूसा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर ले गया (अध्याय 14 देखें) l आज भी परमेश्वर हमें क्रूस पर अपने पुत्र, यीशु की फैली हुयी भुजाओं द्वारा छुड़ाता है l हम उस पाप के बहुत बड़े दासत्व से मुक्त हैं जिसने कभी हमें नियंत्रित किया था l हम अब गुलाम नहीं, स्वतंत्र हैं!
—एमी बाउचर पाई
आत्मा से भीगना
लेखक और अमेरिकी न्यू टेस्टामेंट विद्वान स्कॉट मैकनाइट बताते हैं कि जब वह हाई स्कूल में थे, तो उन्हें वह अनुभव हुआ जिसे वे "आत्मा से भर जाना अनुभव" कहते हैं। एक शिविर में, वक्ता ने उन्हें चुनौती दी कि वह मसीह को अपने जीवन के सिंहासन पर बैठाये अपने आपको पवित्र आत्मा को समर्पित करने के द्वारा । बाद में, वह एक पेड़ के नीचे बैठ गए और प्रार्थना की, “हे पिता, मेरे पापों को क्षमा करे। और पवित्र आत्मा, मेरे भीतर आ और मुझे भर दे।” उन्होंने कहा, कुछ शक्तिशाली घटित हुआ। “उस क्षण से मेरा जीवन बिल्कुल अलग हो गया है। सिद्ध नहीं, लेकिन अलग।'' उन्हें अचानक बाइबिल पढ़ने, प्रार्थना करने, यीशु में अन्य विश्वासियों से मिलने और परमेश्वर की सेवा करने की इच्छा हुई।
जी उठे यीशु के स्वर्ग में जाने से पहले, उसने अपने मित्रों से कहा: "यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा किये हुए उपहार की बाट जाहते रहो" (प्रेरितों 1:4)। वे यरूशलेम में, और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक उसके गवाह बनने के लिए "सामर्थ प्राप्त करेंगे" (पद 8)। परमेश्वर उन सभी में वास करने के लिए पवित्र आत्मा देता है जो यीशु पर विश्वास करते हैं। यह पहली बार पिन्तेकुस्त में हुआ (देखें प्रेरितों के काम 2); आज ऐसा तब होता है जब कोई मसीह पर भरोसा करता है।
परमेश्वर का आत्मा अब भी लगतार उन लोगों को भरता है जो यीशु पर विश्वास करते हैं। हम भी, आत्मा की सहायता से, बदले हुए चरित्र और अभिलाषाओं के फल प्रकट करते हैं (गलातियों 5:22-23)। आइए हम परमेश्वर की स्तुति करे और उसका धन्यवाद करे की वह हमें शान्ति देता है, कायल करता है, सहयोग करता है और हमसे प्रेम करता है।
विश्वास सुनने से आता है
जब पादरी बॉब को चोट लगी जिससे उनकी आवाज पर असर हुआ, तो उन्होंने पंद्रह साल तक संकट और निराशा का सामना किया। उन्होने सोचा, कि एक पादरी जो बात नहीं कर सकता वह क्या करे? वह इस प्रश्न से जूझता रहा, उसने अपने दुःख और भ्रम को परमेश्वर के सामने उंडेल दिया। उन्होंने बताया, “मैं केवल एक बात जानता था – परमेश्वर के वचन की तलाश करना।” जैसे–जैसे उसने बाइबल पढ़ने में समय बिताया, परमेश्वर के लिए उसका प्यार बढ़ता गया — “मैंने अपना जीवन पवित्रशास्त्र में आत्मसात करने और उसमें डूबने के लिए समर्पित कर दिया है क्योंकि विश्वास सुनने से और सुनना परमेश्वर के वचन से आता है।”
रोमियों को लिखी प्रेरित पौलुस की पत्री में हम इस वाक्यांश को पाते हैं “विश्वास सुनने से आता है”। पौलुस अपने सभी साथी यहूदी लोगों से मसीह में विश्वास करने और बचाए जाने की लालसा रखता था (रोमियों10:9)। वे कैसे विश्वास करेंगे? उस विश्वास के द्वारा जो वचन सुनने से होता है— मसीह के वचन से (पद 17)।
पादरी बॉब मसीह के वचन को ग्रहण करना और उसमें विश्वास करना चाहते हैं, खासकर जब वह बाइबल पढ़ते हैं। वह दिन में केवल एक घंटे के लिए ही बोल सकते हैं और ऐसा करने पर उन्हें लगातार दर्द होता है, लेकिन वह पवित्रशास्त्र में अपने आप को डुबो देने के द्वारा परमेश्वर से शांति और संतोष पाते रहते हैं। इसलिए हम भी भरोसा कर सकते हैं कि यीशु हमारे संघर्षों में खुद को हमारे सामने प्रकट करेंगे। जब हम उसका वचन सुनते हैं, चाहे हम किसी भी चुनौती का सामना करें, वह हमारे विश्वास को बढ़ाएगा।
परीक्षाओं से बल पाना
जब मैंने कुछ लिफाफों में एक स्टिकर को देखा, जिस पर लिखा था, “मैंने आँखों की जाँच कराई है”, तो मेरी यादें फिर से ताजा हो गईं। अपने मन में मुझे अपने चार साल के बेटे का ध्यान आया जिसने अपनी आंखों में चुभने वाली दवा को सहन करने के बाद गर्व से यह स्टिकर लगा रखा था। आँख की कमजोर मांसपेशियों के कारण, उसे सही और शक्तिशाली आंख पर हर दिन घंटों तक पट्टी बांध कर रखना पड़ता था ताकि कमजोर आँख विकसित हो सके। उसे सर्जरी की भी आवश्यकता थी। उसने सांत्वना के लिए अपने माता-पिता के रूप में हमारी ओर देखते हुए, और बच्चों के समान विश्वास के साथ परमेश्वर पर निर्भर रहते हुए, एक-एक करके इन चुनौतियों का सामना किया। इन चुनौतियों के माध्यम से उसमें बहुत मजबूती (प्रतिरोध क्षमता) आ गई थी।
जो लोग परीक्षाओं और कष्टों को सहन करते हैं, वे अक्सर उस अनुभव के द्वारा परिवर्तित हो जाते हैं। परन्तु प्रेरित पौलुस ने और आगे बढ़कर कहा कि “हम अपने क्लेशों में भी घमंड करें” क्योंकि उन्हीं के द्वारा हम धीरज को विकसित करते हैं। धीरज से खरा निकलना उत्पन्न होता है; और खरे निकलने से, आशा उत्पन्न होती है (रोमियों 5:3-4)। पौलुस निश्चय ही उन परीक्षाओं को जानता था, जिसमें न केवल जहाज़ों का टूटना था, बल्कि कारावास भी जो उसके विश्वास के लिए था। फिर भी उसने रोम के विश्वासियों को लिखा कि “आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (पद 5)। इस प्रेरित ने पहचान लिया कि जब हम परमेश्वर पर अपना भरोसा रखते हैं तो परमेश्वर का आत्मा यीशु में हमारी आशा को जीवित रखता है।
आप चाहे किसी भी कठिनाई का सामना करें, परन्तु यह जान लें कि परमेश्वर आप पर अपना अनुग्रह और दया उंडेलेगा। वह आप से प्रेम करता है।
दुख और आनंद
एंजेला का परिवार दुख से भर गया क्योंकि उन्हें सिर्फ़ चार हफ़्तों में तीन बार दुखों का सामना करना पड़ा। अपने भतीजे की अचानक मौत के बाद, एंजेला और उसकी दो बहनें तीन दिनों तक रसोई की मेज़ के इर्द-गिर्द इकट्ठा रहीं, सिर्फ़ एक कलश खरीदने, खाना मंगवाने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बाहर निकलीं। जब वे उसकी मौत पर रो रही थीं, तो वे अपनी सबसे छोटी बहन के अंदर पनप रहे नए जीवन की अल्ट्रासाउंड तस्वीरों को देखकर भी खुश थीं।
समय के साथ, एंजेला को एज्रा की पुरानी नियम की पुस्तक से सांत्वना और आशा मिली। इसमें बाबेलवासीयों द्वारा मंदिर को नष्ट करने और उन्हें उनके प्रिय शहर से निर्वासित करने के बाद परमेश्वर के लोगों के यरूशलेम लौटने का वर्णन किया गया है (एज्रा 1 देखें)। जब उन्होंने मंदिर का पुनर्निर्माण होते देखा, तो लोगों ने याजकों और लेवियों द्वारा परमेश्वर को दी जा रही आनन्दमय स्तुति सुनी (3:10-11)। लेकिन कुछ पुराने याजकों, लेवियों और अन्य नेताओं का रोना भी था, जिन्हें निर्वासन से पहले का जीवन याद था (वचन 12)।
एक पद ने एंजेला को विशेष रूप से सांत्वना दी: " लोग, आनन्द के जय जयकार का शब्द, लोगों के रोने के शब्द से अलग पहिचान न सके, क्योंकि लोग ऊंचे शब्द से जय जयकार कर रहे थे " (पद. 13)। उसने महसूस किया कि भले ही वह गहरे दुख में डूबी हो, फिर भी खुशी प्रकट हो सकती है। हम भी किसी प्रियजन की मृत्यु पर शोक मना सकते हैं या किसी अन्य नुकसान का शोक मना सकते हैं। यदि ऐसा है, तो हम अपने दर्द के रोने के साथ-साथ अपने आनंद के क्षणों को भी ईश्वर के सामने व्यक्त कर सकते हैं, यह जानते हुए कि वह हमारी सुनता है और हमें अपनी बाहों में समेटता है।
महान प्रेम
पवित्र सप्ताह के कुछ दिन पहले, जब दुनिया भर के मसीही यीशु के बलिदान को याद करते हैं और उनके पुनरुत्थान का जश्न मनाते हैं, दक्षिण पश्चिम फ़्रांस के एक सुपरमार्केट में एक आतंकवादी ने धावा बोलकर गोलीबारी की और दो लोगों की हत्या कर दी। बातचीत के बाद, आतंकवादी ने सभी को रिहा कर दिया पर एक को बंधक बनाकर रखा, जिसे उसने खुद को बचाने के लिए एक मानव ढाल के रूप में उपयोग किया। खतरे को जानते हुए, पुलिस अधिकारी अरनौद बेल्ट्रैम ने अकल्पनीय काम किया : उन्होंने महिला की जगह स्वेच्छा से खुद को सौंपा । अपराधी ने उसे छोड़ दिया, लेकिन आगे की हाथापाई में बेल्ट्रैम घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई ।
एक पास्टर जो उस पुलिस अधिकारी को जानते थे, उन्होंने उसकी वीरता का जिम्मेदार यीशु में उनके विश्वास को ठहराया, यूहन्ना 15:13 में उसके शब्दों की ओर इशारा करते हुए : “इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिए अपना प्राण दे l” ये वे शब्द थे जो मसीह ने अपने शिष्यों के साथ उनके अंतिम भोजन के बाद कहे थे। उसने अपने दोस्तों से कहा कि “जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो” (पद.12) और यह कि सबसे बड़ा प्रेम यह है कि एक दूसरे के लिये अपना प्राण दे दे (पद.13) । ठीक यही यीशु ने अगले दिन किया, जब वह हमें हमारे पापों से बचाने के लिए क्रूस पर चढ़ा—जो केवल वही कर सकता था l
हो सकता है हमें कभी भी अरनौद बेल्ट्रैम की वीरता का अनुसरण करने के लिए न बुलाया जाए। लेकिन जब हम परमेश्वर के प्रेम में बने रहते हैं, जब हम उसके महान प्रेम को साझा करना चाहते हैं तो अपनी योजनाओं और इच्छाओं को सामने रखते हुए हम त्यागपूर्वक दूसरों की सेवा कर सकते हैं, ।
तरोताजगी देनेवाला मरुद्यान
जब एंड्रयू और उनका परिवार केन्या में सफारी की सैर पर गया, तो उन्हें एक छोटी सी झील में बार-बार आनेवाले कई तरह के जानवरों को देखने का आनंद मिला, जो हलचल भरे परिदृश्य में दिखाई दिए l जिराफ़, अफ़्रीकी बारासिंघे, दरियाई घोड़े, और जलपक्षी सभी इस जीवन देनेवाले पानी के स्रोत पर आते थे l जब एंड्रयू ने उनके आने और जाने का अवलोकन किया, उन्होंने सोचा कि कैसे “बाइबल एक दिव्य पानी के गड्ढे/झील की तरह है” —न केवल यह मार्गदर्शन और बुद्धि का स्रोत है, बल्कि यह एक ताज़ा मरुउद्यान है जहाँ जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग अपनी प्यास बुझा सकते हैं l
एंड्रयू के अवलोकन ने भजनकार को प्रतिध्वनित किया जिसने लोगों को “धन्य” कहा जब वे ईश्वर की व्यवस्था से प्रसन्न होते हैं और उस पर ध्यान देते हैं, पुराने नियम में उनके निर्देश और आज्ञाओं का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जानेवाला शब्द l जो लोग पवित्रशास्त्र पर मनन करते हैं, वे “उस वृक्ष के समान हैं, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है,और अपनी ऋतु में फलता हैI” (भजन 1:3)जिस प्रकार एक पेड़ की जड़ें ताज़गी के स्रोत को खोजने के लिए मिट्टी में पहुँचती हैं, वैसे ही जो लोग वास्तव में परमेश्वर में विश्वास करते हैं और उनसे प्यार करते हैं, वे खुद को पवित्रशास्त्र में गहराई से जड़ पकड़ लेंगे और उन्हें वह ताकत मिलेगी जिसकी उन्हें ज़रूरत है l
अपने आप को परमेश्वर की बुद्धि के अधीन करना हमारी नींव को उसमें गहराई से जोड़े रखेगा; हम “भूसी के समान नहीं होंगे जो पवन से उड़ाई जाती हैI” (पद.4) जब हम मनन करते हैं कि परमेश्वर ने हमें बाइबल में क्या दिया है, तो हम पोषण प्राप्त करते हैं जो हमें स्थायी फल उत्पन्न करने की ओर ले जा सकता है l