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Articles by एमी बाउचर पाई

खेत में सिला बटोरना

तंजानिया की मेरी एक सहेली ने राजधानी दोदोमा में सुनसान/उजाड़ भूमि को खरीदने का दर्शन पाया l कुछ स्थानीय विधवाओं की ज़रूरतों को महसूस करके, रूत उस गन्दी भूमि को मुर्गी पालन और अनाज बोने के लिए तैयार करना चाहती थी l आवश्यक्तामंद लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने का उसका दर्शन परमेश्वर के लिए उसके प्रेम में स्थापित था, और बाइबल में उसके हमनाम, रूत से प्रेरित था l

परमेश्वर की व्यवस्था निर्धनों या परदेशियों को खेत के किनारों से अनाज की बालियाँ बीनने की अनुमति देता था (लैव्य. 19:9-10) l (बाइबल की) रूत परदेशी थी, इस कारण वह  खेतों में काम करके, अपने लिए और अपनी सास के लिए भोजन बटोर सकती थी l एक निकट सम्बन्धी, बोअज़ के खेत में सिला बीनने से, रूत और नाओमी को आख़िरकार एक घर और सुरक्षा मिल गयी l रूत ने अपने दैनिक कार्य में होशियारी और मेहनत की अर्थात् खेत के किनारों से भोजन इकठ्ठा किया और परमेश्वर ने उसे आशीष दी l

मेरी सहेली रूत का उत्साह और बाइबल के रूत का समर्पण मुझे परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए उभारता है कि किस प्रकार वह निर्धनों और कुचले हुओं को संभालता है l ये लोग मुझे अपने समुदाय में दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं और बड़े पैमाने पर देनेवाले परमेश्वर के प्रति मुझे धन्यवादी बनाते हैं l आप किस प्रकार दूसरों पर तरस दिखाकर परमेश्वर की उपासना कर सकते हैं?

उसकी हथेलियों पर खोदा हुआ

1800 के दशक में, चार्ल्स स्पर्जन ने लन्दन के चर्च में अपनी लम्बी सेवा के दौरान, यशायाह 49:16 की प्रचूरता पर उपदेश देना पसंद किया, जिसमें लिखा है कि परमेश्वर ने अपनी हथेलियों पर हमारे चित्र खोद रखे हैं l  उन्होंने कहा, “ऐसे पदों पर सौ बार उपदेश दिए जाने चाहिए!” यह विचार इतना बहुमूल्य है कि हम इसे बार-बार याद कर सकते हैं l

स्पर्जन प्रभु की इस प्रतिज्ञा का अद्भुत सम्बन्ध उसके इस्राएली लोग, और परमेश्वर पुत्र, यीशु, जो क्रूस पर हमारे लिए मृत्यु सही के बीच बताते हैं l स्पर्जन प्रश्न पूछते हैं, “उन हथेलियों में ये घाव कैसे हैं? . . . घाव बनानेवाला उपकरण कील था, जिसका साथ हथौड़े ने दिया था l उसे क्रूस पर जकड़ा गया, ताकि उसके लोगों के चित्र वास्तव में उसके हथेलियों में खोद दिए जाएं l” क्योंकि प्रभु ने अपनी हथेलियों पर अपने लोगों के चित्र खोदने की प्रतिज्ञा की,  इसलिए यीशु क्रूस पर अपनी बाहों को फैलाकर, अपनी हथेलियों में कीलों को स्वीकार किये ताकि हम अपने पापों से स्वतंत्र हो जाएं l

यदि और जब भी हम सोचने को प्रवृत होते हैं कि परमेश्वर भूल गया है, हमें अपने हथेलियों को देखकर परमेश्वर की प्रतिज्ञा को याद करना है l उसने अपनी हथेलियों पर हमारे लिए अमिट दाग बनाए हैं; वह हमसे अत्यधिक प्रेम करता है l

चट्टान पर बना घर

मेरे मित्र के घर की बैठक धीरे-धीरे ज़मीन में घंस रही थी-दीवारों पर दरारें थीं और अब खिड़की नहीं खुलती थी। उन्हें पता चला कि इस कमरे की नींव नहीं थी। इसे सुधारने के लिए महीनों कार्य चला क्योंकि बिल्डर को नई नींव डालनी पड़ी।

बाद में देखा तो दरारें नहीं थीं और खिड़की खुल रही थी। तब मुझे एक ठोस नींव के मायने समझ आए।

यह हमारे जीवन में भी सत्य है।

यीशु ने उनकी बातों को अनसुना करने की मूर्खता को समझाने के लिए बुद्धिमान और मूर्ख बिल्डर का दृष्टान्त सुनाया (लूका 6:46-49)। उनकी बातें सुनकर पालन करने वाले उस व्यक्ति के समान होते हैं जो एक मजबूत नींव पर घर बनाते हैं। बजाय उसके जो सुनकर उनकी आज्ञाओं की अवहेलना करते हैं। यीशु ने अपने श्रोताओं को आश्वासन दिया कि तूफान आने पर उनका घर खड़ा रहेगा। उनका विश्वास न डिगेगा।

इस बात में हमें शांति मिलती है कि यीशु की बात सुनने और मानने से वह हमारे जीवन की नींव मजबूत बनाते हैं। बाइबिल पढ़ने, प्रार्थना करने और अन्य मसीहियों से सीखने द्वारा हम उनके लिए अपने प्रेम को मजबूत कर सकते हैं। फिर जब तूफान आएगा-चाहे विश्वासघात, पीड़ा या निराशा-हमें भरोसा रहेगा कि हमारी नींव मजबूत है। हमारा उद्धारकर्ता वह सहायता प्रदान करेगा जिसकी हमें जरूरत होगी।

हम यीशु से भेंट करना चाहते हैं

मंच से गाड़ने की प्रार्थना करते हुए मैंने पीतल की पट्टिका पर यूहन्ना 12:21 लिखा देखा: "श्रीमान् हम यीशु...। मैंने सोचा कि जिस स्त्री के जीवन का समारोह हम आंसुओं और मुस्कुराहटों के साथ मना रहे थे उसमें हमने यीशु को कैसे देखा था? यद्यपि उसका जीवन चुनौतियों और निराशाओं से भरा था, उसने मसीही विश्वास कभी नहीं छोड़ा। उसमें परमेश्वर की आत्मा होने के कारण, हम उसमें यीशु को देख सकते थे।

यूहन्ना में यीशु के सवारी पर यरूशलेम पहुचने के उपरांत (12:12-16) कुछ यूनानियों ने फिलिपुस से कहा, "श्रीमान, हम यीशु..." (21) उनकी उत्सुकता का कारण कदाचित यीशु के चंगाई और अश्चार्य्कर्म थे, परन्तु यहूदी न होने के कारण, उन्हें भीतर जाने की अनुमति नहीं थी। जब यीशु को बताया गया तो उन्होंने कहा कि उनके महिमावंत होने का समय आ गया है (23)। अर्थात बहुतों के पापों के लिए वह मरेंगे। न केवल यहूदियों, परन्तु अन्यजातियों (20 पद में "यूनानियों") के लिए अपने मिशन को पूरा करेंगे, और फिर वे भी यीशु से भेंट कर सकेंगे।

मरणोपरांत, यीशु ने पवित्र आत्मा भेजी कि वह चेलों के साथ रहे (14:16-17)। इसलिए यीशु से प्रेम और उनकी सेवा करने पर हम उन्हें अपने जीवन में सक्रिय देख सकते हैं। और अद्भुत रूप से अन्य लोग हममें यीशु को देख सकते हैं!

जटिल रहस्य

सैर करते हुए मेरी मित्र और मैं बाइबिल के प्रति अपने प्रेम की बात करने लगे। उसने कहा, " मुझे पुराना नियम खास पसंद नहीं। जटिल बातें और प्रतिशोध-मुझे बस यीशु चाहिए!"

उसके कहे अनुसार कदापि हम भी नहूम जैसी पुस्तक में लिखे वचन को पढ़ कर, घबरा जाएँगे। “यहोवा जल उठने वाला...; (नहूम 1:2) और इसके बावजूद अगला ही पद हमें आशा से भरता है: "यहोवा विलम्ब से क्रोध...।" (पद 3)।

परमेश्वर के क्रोध के विषय पर अधिक गहराई से मनन करने पर हम पाते हैं कि वह अधिकतर अपने लोगों का या अपने नाम का बचाव करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। अपने असीम प्रेम के कारण, वह गलतियों के लिए न्याय और मनफिराव कर उनकी ओर मुड़ने वालों के लिए छुटकारा चाहते हैं। हम इसे न केवल पुराने नियम में देखते हैं-जब अपने लोगों को अपने पास वापस बुलाते हैं, परन्तु नए नियम में भी जब हमारे पापों के बलिदान के लिए वह अपने निज पुत्र को भेजते हैं।

भले ही हम परमेश्वर के चरित्र के रहस्यों को ना समझें, परन्तु हम भरोसा कर सकते हैं कि वह न केवल न्यायी परमेश्वर हैं वरन सभी प्रेमों का स्रोत भी हैं। हमें उनसे डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह "भला है; संकट के दिन में...।"(पद 7)

दुःख में आशा

 

जब मैं उन्नीस वर्ष की थी, एक कार एक्सीडेंट में मेरी एक निकट सहेली की मृत्यु हो गयी l आगे के सप्ताहों और महीनों में, मैं प्रतिदिन गहरे दुःख से होकर निकली l इतनी छोटी उम्र में किसी को खो देने के दुःख से मेरी दृष्टि धुंधली हो गयी, और कभी-कभी मुझे यह भी पता नहीं होता था कि मेरे आस-पास क्या हो रहा है l दुःख और पीड़ा ने मुझे इतना अँधा कर दिया था कि मैं परमेश्वर को भी नहीं देख पा रही थी l

लूका 24 में, दो शिष्य, यीशु की मृत्यु के बाद भ्रमित और अति दुखित होने के कारण जान न सके कि वे पुनरुत्थित गुरु ही के साथ चल रहें हैं l मार्ग में वह उन्हें शास्त्र से समझाता जा रहा था कि क्यों प्रतिज्ञात उद्धारकर्ता को बलिदान होना और जी उठना अवश्य था l यीशु द्वारा रोटी लेकर तोड़ने के बाद ही उन्होंने उसको पहचाना (पद.30-31) l यद्यपि उसके अनुयायियों ने यीशु की मृत्यु के समय बहुत ही भयंकर मृत्यु का सामना किया था, मृत्यु से जी उठने के द्वारा परमेश्वर ने उनको दिखा दिया कि फिर से आशा कैसे रखी जा सकती है l

हमें भी उन शिष्यों की तरह, घबड़ाहट या गहरा दुःख दबा देता है l किन्तु हम इस सच्चाई में कि यीशु जीवित है और संसार में और हममें कार्य कर रहा है आशा और विश्राम पा सकते हैं l यद्यपि हम अभी भी व्यथा और दुःख का सामना करते हैं, हम यीशु को हमारे दुःख में साथ चलने को बुलाएं l जगत की ज्योति होकर (जूहन्ना 8:12), वह आशा की किरणों से हमारे कोहरे को साफ़ कर देगा l

सर्वोत्तम उपहार

 

जब मैं लन्दन, घर जाने के लिए सामन पैक कर रही थी, मेरी माँ मेरे लिए एक उपहार लेकर आई – उनकी एक अंगूठी जो मुझे बहुत पसंद थी l चकित होकर, मैंने पूछा, “यह किस लिए?” उन्होंने उत्तर दिया, “मेरे विचार से अब तुम इसको पहनने का आनंद लो l मेरी मृत्यु तक इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है? कैसे भी यह मेरी ऊँगली में आती भी नहीं है l” मुस्कराकर मैंने उनका अनापेक्षित उपहार प्राप्त किया, आरंभिक विरासत जो मेरे लिए आनंद का कारण है l

मेरी माँ ने मुझे एक भौतिक उपहार दी, किन्तु यीशु की प्रतिज्ञा है कि उसका पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा देगा (लूका 11:13) l यदि पाप के साथ जन्में माता-पिता अपने बच्चों की ज़रूरतें(जैसे भोजन) पूरी करते हैं, तो हमारा स्वर्गिक पिता अपने वच्चों को और भी अधिक देगा l पवित्र आत्मा के वरदान के द्वारा(यूहन्ना 16:13), हम परेशानी के समय आशा, प्रेम, आनंद, और शांति का अनुभव कर सकते हैं और हम इन वरदानों को दूसरों के साथ बाँट सकते हैं l

उम्र में बढ़ते हुए, शायद हमारे माता-पिता पूरी तौर से हमसे प्रेम नहीं कर सके और हमारी देखभाल नहीं कर सके l अथवा हमारे माता-पिता बलिदानी प्रेम के प्रशिद्ध नमूना थे l अथवा हमारा अनुभव इन दोनों के बीच था l जो भी हमने अपने सांसारिक माता-पिता के विषय जाना है, हम इस प्रतिज्ञा को थामे रह सकते हैं कि हमारा स्वर्गिक पिता हमसे अत्यधिक प्रेम करता है l उसने अपने बच्चों को पवित्र आत्मा का उपहार दिया है l

स्वतंत्र

प्रमस्तिष्क पक्षाघात(Cerebral Palsy-मस्तिष्क क्षति जिसके कारण भुजाओं और टांगों पर नियंत्रण भी क्षतिग्रस्त हो जाता है) के साथ जन्मा एक लड़का बोलने या बातचीत करने में असमर्थ था l किन्तु उसकी माँ, शेटल ब्रायन ने हार नहीं मानी, और जब वह दस वर्ष का हुआ उसने अपने बेटे के साथ अपनी आखों और एक अक्षर बोर्ड की सहायता से बातचीत करना ढूंढ़ लिया l इस महत्वपूर्ण खोज के बाद, उसने कहा, “वह स्वतंत्र हो गया था और हम उससे कुछ भी पूछ सकते थे l” अब जोनाथन आँखों की सहायता से बातचीत करते हुए लिख और पढ़ सकता था जिसमें कविता भी सम्मिलित थी l जब उससे पुछा गया कि अपने परिवार और मित्रों से “बातचीत” करना कैसा लगता है, उसने कहा, “उनको बताना कि मैं उनसे प्यार करता हूँ अद्भुत है l”

जोनाथन की कहानी पूरी तौर से मार्मिक है और हमें विचार करने को मजबूर करती है कि परमेश्वर किस तरह हमें पाप के कैद से स्वतंत्र करता है l जिस तरह प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीहियों को लिखा, कि पहले हम “निकाले हुए थे” (कुलुस्से 1:21), हमारा बुरा स्वभाव हमें परमेश्वर का शत्रु बना दिया था, किन्तु क्रूस पर मसीह की मृत्यु के द्वारा हम परमेश्वर की उपस्थिति में “पवित्र” ठहराए गए हैं (पद.22) l फलवंत होते हुए हमारा “चाल-चलन प्रभु के योग्य” होता जाए, हम परमेश्वर के ज्ञान में उन्नत्ति करते जाएँ, और उसकी सामर्थ्य में सबल बनते जाएं l

हम अपनी स्वतंत्र आवाज़ को परमेश्वर की महिमा करने और उसका सुसमाचार बांटने के लिए उपयोग करते हुए दर्शाएँ कि अब हम पापी जीवन के दास नहीं हैं l अपने विश्वास में उन्नत्ति करते हुए, हम मसीह में अपनी आशा को थामे रहें l

नाम लेकर बुलाया गया

विज्ञापनदाता यह मानते हैं कि सर्वाधिक ध्यान आकर्षित करनेवाला शब्द दर्शक का नाम ही होता है जिस पर दर्शक प्रतिक्रिया करते हैं l इस प्रकार यू के में एक टेलीविजन चैनल ने अपने ऑनलाइन चलनेवाली सेवाओं में व्यक्तिगत विज्ञापनों को तैयार किया है l

हम टेलीविजन पर अपना नाम सुनना पसंद करेंगे, किन्तु जब तक आपका कोई प्रिय जो आपका नाम लेकर आपसे प्रेम करता है आपको न पुकारे तब तक वह सार्थक महसूस नहीं होता है l

मरियम मगदलीनी का ध्यान उस कब्र के निकट ठहर गया, जहां क्रूसित होने के बाद यीश का  शव रखा गया था, जब यीशु ने मरियम का नाम लिया (यूहन्ना 20:16) l एक शब्द से उसने अपने गुरु को अविश्वास और आनंद के एक तीव्र प्रवाह द्वारा पहचान लिया जिससे वह प्रेम करती थी और जिसका वह अनुसरण करती थी l जिस लोकप्रियता से उसने उसका नाम पुकारा, उसने बगैर शक के मरियम को आश्वस्त कर दिया कि जो उसे पूरी तरह जानता था मृतक नहीं किन्तु जीवित था l

यद्यपि मरियम ने यीशु के साथ एक अनोखा और विशेष क्षण का आनंद उठाया, परमेश्वर हमें भी व्यक्तिगत रूप से प्रेम करता है l यीशु ने मरियम से कहा कि वह पिता के पास जाएगा (पद.17), किन्तु उसने अपने शिष्यों से यह भी कहा था कि वह उन्हें अकेले नहीं छोड़ेगा (यूहन्ना 14:15-18) l परमेश्वर पवित्र आत्मा को अपनी संतानों में निवास करने के लिए भेजेगा (देखें प्रेरितों 2:1-13) l

परमेश्वर की कहानी बदलती नहीं है l चाहे तब या वर्तमान में, वह जिनसे प्रेम करता है उनको जानता है (देखें यूहन्ना 10:14-15) l वह हमें नाम लेकर बुलाता है l