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Articles by एमी बाउचर पाई

पत्र लेखन

मेरी माँ और उनकी बहने शीघ्र लुप्त हो रही कला रूप - पत्र लेखन करती हैं l  दोनों ही लगातार एक दूसरे को व्यक्तिगत पत्र लिखतीं हैं इस कारण पत्र नहीं होने पर डाकिया चिंतित होता है! उनके पत्र में जीवन, आनंद और दुःख के साथ-साथ मित्रों और परिवार में होनेवाली दैनिक घटनाएँ होती हैं l

मुझे अपने परिवार की इन महिलाओं के साप्ताहिक अभ्यास पर विचार करना पसंद है l इससे मैं प्रेरित पौलुस के शब्दों को कि यीशु के विश्वासी “मसीह की पत्री” हैं जो “स्याही से नहीं परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से ... लिखी है” की प्रशंसा कर पाता हूँ (2 कुरिं. 3:3) l उसके सन्देश को नहीं माननेवाले झूठे शिक्षकों के प्रतिउत्तर में (देखें 2 कुरिं. 11), पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को उसके उपदेश के अनुसार सच्चे और जीवते परमेश्वर का अनुसरण करने हेतु उत्साहित किया l ऐसा करके, उसने यादगार ढंग से विश्वासियों को मसीह का पत्र कहा, जो किसी और लिखित पत्र की तुलना में पौलुस की सेवा द्वारा अपने बदले हुए जीवनों से पवित्र आत्मा के अधिक सामर्थी गवाह थे l

कितना अद्भुत है कि परमेश्वर का आत्मा हममें अनुग्रह और छुटकारे की कहानी लिखता है! हमारे जीवन लिखित अर्थपूर्ण शब्दों से अधिक सुसमाचार की सच्चाई का सबसे उत्तम साक्षी है, क्योंकि वे हमारी दयालुता, सेवा, धन्यवाद, और आनंद द्वारा अत्यधिक बोलते हैं l हमारे शब्द और कार्य द्वारा, प्रभु जीवनदायक प्रेम फैलता है l आज आप क्या सन्देश फैला रहे हैं?

साफ़ किया गया

जब मैंने बर्तन धोने की अपनी मशीन खोली, मैं उसकी खराबी के विषय सोचने लगी l साफ़ चमकदार बरतनों की जगह, मैंने उसमें से गन्दी थालियाँ और गिलास निकाले l मैं सोचने लगी कि कहीं मेरे इलाके का पानी या बर्तन धोने की मशीन तो खराब नहीं हो गयी है l

परमेश्वर का साफ़ करना, बर्तन धोने की उस ख़राब मशीन से भिन्न है l वह हमारे समस्त अशुद्धताओं को धो देता है l हम यहेजकेल की पुस्तक में पढ़ते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों को वापस अपने पास बुलाता है जब यहेजकेल परमेश्वर के प्रेम और क्षमा का सन्देश सुनता है l इस्राएली दूसरे देवताओं और राष्ट्रों के प्रति निष्ठा जताकर परमेश्वर के विरुद्ध पापी ठहरे थे l हालाँकि, परमेश्वर ने करुणा दिखाकर उनको अपने पास बुलाया l उसने उनको उनकी “सारी अशुद्धता  और मूरतों” (36:25) से शुद्ध करने की प्रतिज्ञा की l अपनी आत्मा उनमें डाल कर (पद.27), वह उनको अकाल में नहीं बल्कि फलदायक स्थान में ले जाने वाला था l (पद.30) l

यहेजकेल के दिनों की तरह, वर्तमान में भी जब हम भटक जाते हैं, प्रभु हमें अपने निकट बुलाता है l जब हम अपने को उसकी इच्छा और मार्ग के अधीन कर देते हैं, वह हमारे पापों को धोकर हमें बदल देता है l हमारे अन्दर अपने पवित्र आत्मा द्वारा निवास करते हुए प्रति दिन उसके पीछे चलने में मदद करता है l

कटनी के लिए तैयार

गर्मी बाद, हम इंगलैंड के न्यू फारेस्ट में घूमने गए और वहां पर जंगली बेर चुनने का आनंद लिया और पास ही घोड़ों को उछलते कूदते देखा l  दूसरों के द्वारा वर्षों पहले लगाए गए पेड़ों के मीठे फलों का आनंद लेते हुए, मैंने यीशु द्वारा शिष्यों को कहे गए शब्दों को याद किये, “मैंने तुम्हें वह खेत काटने के लिए भेजा जिसमें तुमने परिश्रम नहीं किया” (यूहन्ना 4:38) l

मैं इन शब्दों में परमेश्वर के राज्य की उदारता पसंद करता हूँ l वह हमें दूसरों की मेहनत के फल का आनंद लेने देता है, जैसे जब हम किसी सहेली के साथ, जिसके परिवार को हम नहीं जानते हैं, और जो वर्षों से उसके लिए प्रार्थना कर रहा है, के साथ मसीह का प्रेम बांटते हैं l मुझे यीशु के शब्दों की सीमा भी पसंद है, कि हम बीज बोएँगे किन्तु हम नहीं कोई और कटनी काट सकेगा l इसलिए हम उस कार्य में भरोसा कर सकते हैं जो हमारे सामने है l हम इस सोच से धोखा नहीं खाएंगे कि हम परिणाम के लिए जिम्मेदार हैं l आखिरकार, परमेश्वर का कार्य हम पर निर्भर नहीं है l भरपूर कटनी के लिए उसके पास समस्त साधन है, और हम सौभाग्यशाली हैं कि हम भी उसमें भूमिका निभा सकते हैं l

मैं सोचता हूँ कि किस तरह के खेत आपके सामने और मेरे सामने कटनी के लिए तैयार हैं? हम यीशु के प्रेमी निर्देश का पालन करें : “अपनी आँखें उठाकर खेतों पर दृष्टि डालो कि वे कटनी के लिए पाक चुके हैं” (पद. 4:35) l

भय नहीं किन्तु विश्वास

मेरी एक सहेली ने मुझे बताया कि उसके पति को दूसरे देश में जाकर कार्य करने की तरक्की मिली, किन्तु इससे उसके मन में घर छोड़ने का भय उत्पन्न हो गया जिससे उसके पति ने नहीं चाहकर भी उस पेशकश को ठुकरा दिया l उसने समझाया कि इस बड़े बदलाव के समय उसके भय ने उसे इस नए अभियान को अपनाने से रोका, और वह कभी-कभी सोचती रही कि उसने उस अवसर को उन्होंने खो दिया था जिससे उन्नत्ति रुक गयी थी l  

इस्राएलियों की चिंता ने उन्हें भरपूर और उपजाऊ देश में जाने से रोका जिसमें “दूध और शहद” (निर्ग. 33:3) की धाराएं बहती थीं l वे बड़े नगरों में शक्तिशाली लोगों के विषय सुनकर (पद.27), डरने लगे l अधिकतर लोगों ने प्रतिज्ञात देश में प्रवेश करने से इनकार किया l

किन्तु यहोशू और कालेब ने यह कहकर लोगों को परमेश्वर पर भरोसा करने को कहा, “न उस देश के लोगों से डरो, क्योंकि ... यहोवा हमारे संग है” (पद.9) l यद्यपि दुश्मन बहुत थे, वे भरोसा कर सकते थे कि परमेश्वर उनके साथ है l

मेरे सहेली को इस्राएलियों की तरह दूसरे देश में जाने की आज्ञा नहीं मिली थी, फिर भी उसके भय ने उसको उस सुअवसर को प्राप्त करने से रोक दिया l आपके साथ कैसा है, क्या आप भयभीत करनेवाली स्थिति का सामना कर रहे हैं? यदि हाँ, तो जानिये कि परमेश्वर आपके साथ है और आपका मार्गदर्शन करेगा l उसके अचूक प्रेम पर भरोसा करके, हम विश्वास से आगे बढ़ सकते हैं l

हर काम का निश्चित समय

हाल ही के विमान यात्रा में मैंने एक माँ और उसके बच्चों पर ध्यान दिया l नन्हे बच्चे के शांति से खेलते समय, माँ अपने नवजात शिशु की आँखों में निहारती और मुस्कराती हुई उसके गाल सहलाए l बच्चा भी अचरज से आँखें फाड़कर देखा l मैंने थोड़ी उत्कंठा से उस क्षण का आनंद लेकर अपने बच्चों के बीते हुए बचपन को याद किया l

हालाँकि, मैंने सभोपदेशक में “प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है” के विषय राजा सुलेमान के शब्द स्मरण किये (पद.1) l वह विपरीत शब्दों की श्रृंखला द्वारा संबोधित किया कि किस तरह “हर एक बात का एक अवसर” होता है (पद.1) : “जन्म का समय, और मरन का भी समय, बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय” (पद.2) l शायद इन पदों में राजा सुलेमान जीवन के व्यर्थ चक्र से निराश हुआ l किन्तु वह प्रत्येक ऋतू में परमेश्वर की भूमिका को भी देखा, कि हमारा कार्य “परमेश्वर का दान” है (पद.13) और “जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा” (पद.14) l

हम अपने जीवनों में समयों को लालसा से याद कर सकते हैं, जैसे मैंने अपने बच्चों को शिशुओं के रूप में याद किया l यद्यपि, हम जानते हैं, कि प्रभु हमारे साथ जीवन के हर ऋतू में रहेगा (यशा.41:10) l  हम उसकी उपस्थिति पर भरोसा करके उसमें चलने का अपना उद्देश्य खोज सकते हैं l

आमने-सामने

यद्यपि संसार आज इलेक्ट्रानिक तरीके से जिस तरह जुड़ा है, पूर्व में कभी नहीं था, व्यक्तिक रूप से बिताया गया समय सर्वोत्तम है l हम सहभागिता और खिलखिलाहट द्वारा-लगभग अनजाने में-अगले व्यक्ति के चेहरे की गत्विधियों को देखकर उसकी भावनाएं जान जाते हैं l जो आपस में प्रेम करते हैं, चाहे परिवार या मित्र, आमने-सामने संगति करना चाहते हैं l

हम इस तरह का आमने-सामने का सम्बन्ध परमेश्वर और उसके लोगों की अगुवाई करने वाले, मूसा के मध्य देखते हैं l मूसा परमेश्वर का अनुसरण करता गया, और लोगों के अक्खड़पन और मूर्तिपूजा के बावजूद उसका अनुसरण करता रहा l लोगों द्वारा प्रभु के बदले सोने के बछड़े की उपासना करने के बाद (देखें निर्ग. 32), मूसा ने परमेश्वर से मुलाकात करने हेतु एक तम्बू लगाया, जबकि लोग दूर ही से देख सकते थे (33:7-11) l जब परमेश्वर की उपस्थिति बादल के खम्बे में तम्बू पर आकर ठहरता था, मूसा उनका प्रतिनिधि होकर बातें करता था l परमेश्वर ने उनके साथ अपनी उपस्थिति का वादा किया (पद.14) l

यीशु की क्रूसित मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण, हमें परमेश्वर से बातें करने के लिए मूसा की तरह व्यक्ति नहीं चाहिए l इसके बदले, शिष्यों के सामने यीशु की पेशकस की तरह, हम मसीह द्वारा परमेश्वर के साथ मित्रता कर सकते हैं (यूहन्ना 15:15) l हम भी उससे मुलाकात कर सकते हैं, प्रभु के साथ मित्र की तरह बातें कर सकते हैं l

विश्राम दिवस

एक रविवार को, मैं एक कलकल नदी के निकट खड़ी थी जो हमारी उत्तरी लन्दन आबादी क्षेत्र की ओर मुड़कर अपनी ख़ूबसूरती भिन्न प्रकार से बसे क्षेत्र को प्रदान करती है l जलप्रपात को देखकर और चिड़ियों की चहचाहट सुनकर मुझे आराम मिला l मैंने रुककर प्रभु को हमारी आत्माओं को विश्राम देने के लिए धन्यवाद दिया l

प्रभु ने सब्त का दिन स्थापित किया-विश्राम और नवीनीकरण का दिन-अपने लोगों के लिए प्राचीन निकट पूर्व क्योंकि उसकी इच्छा थी कि वे जीवित रहें l जैसे कि हम निर्गमन में पाते हैं, वह उनको छः वर्ष खेती करने को और सातवें वर्ष विश्राम करने को कहता है l इसी तरह छः दिन काम और सातवें दिन विश्राम l उसके तरीके ने इस्राएलियों को अन्य राष्ट्रों से अलग किया, क्योंकि केवल वे ही नहीं किन्तु विदेशी और उनके घर के दासों को भी उनके तरीके मानना अनुमत था l

हम विश्राम दिवस में अपेक्षा और रचनात्मकता के साथ उपासना करके अपनी आत्माओं को पोषित कर सकते हैं, जो हमारे चुनावों के अनुसार भिन्न होगा l कोई खेल खेलना पसंद करेंगे; कोई बगीचे में काम; कोई मित्रों और परिजनों के साथ भोजन करेंगे; कोई दोपहर में आराम करेंगे l

हम किस तरह विश्राम दिवस की खूबसूरती और भरपूरी को पुनः खोजेंगे, यदि वह हमारे जीवनों में नहीं है?

व्यवहारिक विश्वास

किराने की दूकान जाते समय मेरी सहेली को लगा जैसे सड़क किनारे जाती स्त्री को अपने कार में बैठा लूँ l कार में बैठाने के बाद, उसने जाना कि पैसे नहीं होने के कारण वह गर्म और आर्द्र वातावरण में अनेक मील पैदल चलकर वापस अपने घर जा रही थी l केवल वह पैदल लम्बी यात्रा करके घर ही नहीं जा रही थी किन्तु उसी दिन अनेक घंटे चलकर प्रातः 4 बजे अपने काम पर भी पहुंची थी l

उस स्त्री को अपनी कार में बैठाकर मेरी सहेली ने आज के सन्दर्भ में याकूब के मसीहियों को अपने कार्यों द्वारा अपने विश्वास को प्रगट करने का निर्देश पूरा किया : “विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है” (पद.17) l उसकी चिंता थी कि कलीसिया विधवाओं और अनाथों की देखभाल करें (याकूब 1:27), किन्तु वह यह भी चाहता था कि वे मात्र शब्दों पर नहीं किन्तु विश्ववास पर चलकर प्रेम के कार्य करें l

हम अपने कर्मों से नहीं विश्वास से बचाए गए हैं, किन्तु हम दूसरों से प्रेम करके और उनकी ज़रूरतों को पूरा करके विश्वास को प्रगट करते हैं l इस जीवन में साथ चलते हुए, काश हम भी, मेरी सहेली की तरह, ज़रुरतमंदों के प्रति सजग रहें जिन्हें हमारी मदद चाहिए l

शांति का मेल

एक विषय पर विचारों में अंतर होने पर मैंने ई-मेल द्वारा अपनी सहेली का सामना किया किन्तु उसने उत्तर नहीं दिया l क्या मैंने हद पार कर दी थी? मैं उसको परेशान करके स्थिति को और बदतर नहीं बनाना चाहती थी, और उसकी विदेश यात्रा से पूर्व समस्या का समाधान चाहती थी l आनेवाले कुछ दिनों तक उसकी याद आने पर, मैंने आगे की बातें न जानते हुए भी उसके लिए प्रार्थना की l तब एक दिन स्थानीय पार्क में घूमते हुए मैंने उसे देखा l जब उसने मुझे देखा उसके चेहरे पर दर्द था l “प्रभु धन्यवाद, कि मैं उससे बातें कर सकती हूँ, मैं धीरे से बोलकर इच्छित हृदय से उसकी ओर बढ़ी l हम दोनों खुलकर बातें किये और समस्याएँ सुलझ गयीं l

कभी-कभी हमारे संबंधों में जब तकलीफ और खामोशी आ जाती है, उनको ठीक करना हमारे नियंत्रण से बाहर महसूस होता है l किन्तु जिस तरह प्रेरित पौलुस इफिसुस की कलीसिया को लिखता है, कि हमें अपने संबंधों में परमेश्वर की चंगाई को ढूंढते हुए, परमेश्वर की आत्मा द्वारा शांति और एकता के लिए, दीनता, नम्रता, और धीरज को धारण करने के लिए बुलाया गया है l प्रभु हममें एकता चाहता है, और उसकी आत्मा द्वारा वह अपने लोगों को एक कर सकता है-अनपेक्षित रूप से भी जब हम पार्क में घूमने जाते हैं l

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दैनिक प्रार्थना

गायक/गीतकार रोबर्ट हैमलेट ने “लेडी हु प्रेज़ फॉर मी” गीत अपनी माँ के सम्मान में लिखी जिन्होंने प्रति भोर अपने बेटों के बस स्टॉप जाने से पूर्व उनके लिए प्रार्थना की l हैमलेट की युवा माँ ने उसका गीत सुनकर, उसके साथ प्रार्थना करने का निश्चय किया l परिणाम आनंदित करने वाला था! उस बेटे के बाहर जाने से पूर्व, उसकी माँ ने उसके लिए प्रार्थना की l पाँच मिनट बाद वह अपने साथ कुछ और बच्चों को लेकर लौटा! उसकी माँ ने चकित होकर उससे पूछा कि क्या बात है l बेटे का उत्तर था, “इनकी माताएँ इनके लिए प्रार्थना नहीं करती हैं l”

इफिसियों की पत्री में, पौलुस “हर समय और हर प्रकार से ... प्रार्थना” करने को कहता है  (6:18) l परिवार में सबको परमेश्वर पर दैनिक भरोसा प्रगट करना चाहिए क्योंकि बच्चे अपने निकट के लोगों को विश्वास करते देखकर ही परमेश्वर पर भरोसा करना सीखते हैं (2 तीमु. 1:5) l बच्चों के लिए  और उनके साथ  प्रार्थना करना ही उनको प्रार्थना का परम महत्त्व सिखाने का अहम् तरीका है l यह उनके लिए विश्वास से परमेश्वर के पास व्यक्तिगत रूप से जाने का ज़रूरी कारण समझने का एक तरीका है l

जब हम परमेश्वर में “असली विश्वास” की शिक्षा प्रगट रूप से “[बच्चों] को ... देना आरम्भ करते हैं” (निति. 22:6; 2 तीमु. 1:5), हम उनको एक विशेष इनाम, भरोसे से देते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में हमेशा उपस्थित रहकर निरंतर प्रेम, मार्गदर्शन, और सुरक्षा देता है l

पूरी दौड़

2016 के रिओ ओलंपिक्स में, 5,000 मीटर दौड़ में दो धावकों ने संसार का ध्यान आकर्षित किया l 3,200 मीटर दौड़ के बाद, न्यूज़ीलैण्ड की निक्की हैम्बलिन और अमरीका की एबे डीऔगुस्तटिनो आपस में टकराकर गिर गयीं l एबे तुरन्त खड़ी हो गयी, किन्तु निक्की की मदद करने ठहर गयी l क्षण भर बाद दोनों धावक दौड़ने लगे, और एबे गिरने के कारण दायीं पैर में चोट से लड़खड़ाने लगी l अब निक्की की बारी थी कि दौड़ पूरी करने के लिए ठहर कर सह-धावक को उत्साहित करे l एबे के लड़खड़ाने के बाद, निक्की समापन रेखा पर आख़िरकार, उसे गले लगाने के लिए खड़ी थी l आपसी उत्साह का कितना सुन्दर तस्वीर!

यह मुझे बाइबिल का एक परिच्छेद याद दिलाता है : “एक से दो अच्छे हैं .... यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो” (सभो. 4:9-10) l आत्मिक दौड़ में धावक होकर, हमें परस्पर सहायता चाहिए-शायद और अधिक, क्योंकि हम दौड़ प्रतियोगिता में नहीं हैं किन्तु एक ही टीम के सदस्य हैं l गिरने के क्षण होंगे जहाँ उठने में किसी की मदद चाहिए; दूसरे क्षणों में किसी को प्रार्थना और उपस्थिति द्वारा उत्साह की आवश्यकता होगी l

आत्मिक दौड़ में अकेला नहीं दौड़ा जाता l क्या परमेश्वर आपको किसी के जीवन में निक्की या एबे बना रहा है? आज ही तुरंत मदद देकर, दौड़ पूरी करें!

सर्वोत्तम भाग

“उसका टुकड़ा मेरे से बड़ा है!”

बचपन में घर में बनी मिठाई के टुकड़े माँ से मिलने पर हम भाई एक दूसरे से लड़ते थे l एक दिन पिता ने अपनी भौंवें चढ़ाकर हमारे हरकत देखे, और अपना प्लेट उठाकर माँ को देखकर मुस्कराए : “कृपया मुझे अपने हृदय के बराबर टुकड़ा दो l” हम दोने भाई हैरान होकर  माँ को हँसते हुए उनको सबसे बड़ा टुकड़ा देते हुए देखा l

परायी सम्पत्ति पर ध्यान देने से बहुत बार ईर्ष्या होती है l फिर भी परमेश्वर का वचन हमारे ध्यान को सांसारिक सम्पत्ति से कुछ अधिक मूल्यवान पर ले जाता है l भजनकार लिखता है, “यहोवा मेरा भाग है; मैंने तेरे वचनों के अनुसार चलने का निश्चय किया है l मैं ने पूरे मन से तुझे मनाया है” (भजन 119:57-58) l पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर लेखक ने सच्चाई बतायी कि परमेश्वर के निकट रहना सबसे महत्वपूर्ण है l    

हमारे प्रेमी और असीम सृष्टिकर्ता से अधिक हमारा बेहतर भाग और क्या हो सकता है? संसार की किसी वस्तु से उसकी तुलना नहीं, और कुछ भी उसे हमसे छीन नहीं सकता l मानवीय इच्छा बड़ा खालीपन है; किसी के पास संसार का “सब कुछ” हो सकता है  और फिर भी अभागा l किन्तु जब परमेश्वर हमारा आनंद है, हम वास्तव में संतुष्ट हैं l हमारे अन्दर एक खाली स्थान है जिसे केवल परमेश्वर ही भर सकता है l वही हमारे हृदयों में अनुकूल शांति दे सकता है l