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Articles by एमी बाउचर पाई

जटिल रहस्य

सैर करते हुए मेरी मित्र और मैं बाइबिल के प्रति अपने प्रेम की बात करने लगे। उसने कहा, " मुझे पुराना नियम खास पसंद नहीं। जटिल बातें और प्रतिशोध-मुझे बस यीशु चाहिए!"

उसके कहे अनुसार कदापि हम भी नहूम जैसी पुस्तक में लिखे वचन को पढ़ कर, घबरा जाएँगे। “यहोवा जल उठने वाला...; (नहूम 1:2) और इसके बावजूद अगला ही पद हमें आशा से भरता है: "यहोवा विलम्ब से क्रोध...।" (पद 3)।

परमेश्वर के क्रोध के विषय पर अधिक गहराई से मनन करने पर हम पाते हैं कि वह अधिकतर अपने लोगों का या अपने नाम का बचाव करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। अपने असीम प्रेम के कारण, वह गलतियों के लिए न्याय और मनफिराव कर उनकी ओर मुड़ने वालों के लिए छुटकारा चाहते हैं। हम इसे न केवल पुराने नियम में देखते हैं-जब अपने लोगों को अपने पास वापस बुलाते हैं, परन्तु नए नियम में भी जब हमारे पापों के बलिदान के लिए वह अपने निज पुत्र को भेजते हैं।

भले ही हम परमेश्वर के चरित्र के रहस्यों को ना समझें, परन्तु हम भरोसा कर सकते हैं कि वह न केवल न्यायी परमेश्वर हैं वरन सभी प्रेमों का स्रोत भी हैं। हमें उनसे डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह "भला है; संकट के दिन में...।"(पद 7)

दुःख में आशा

 

जब मैं उन्नीस वर्ष की थी, एक कार एक्सीडेंट में मेरी एक निकट सहेली की मृत्यु हो गयी l आगे के सप्ताहों और महीनों में, मैं प्रतिदिन गहरे दुःख से होकर निकली l इतनी छोटी उम्र में किसी को खो देने के दुःख से मेरी दृष्टि धुंधली हो गयी, और कभी-कभी मुझे यह भी पता नहीं होता था कि मेरे आस-पास क्या हो रहा है l दुःख और पीड़ा ने मुझे इतना अँधा कर दिया था कि मैं परमेश्वर को भी नहीं देख पा रही थी l

लूका 24 में, दो शिष्य, यीशु की मृत्यु के बाद भ्रमित और अति दुखित होने के कारण जान न सके कि वे पुनरुत्थित गुरु ही के साथ चल रहें हैं l मार्ग में वह उन्हें शास्त्र से समझाता जा रहा था कि क्यों प्रतिज्ञात उद्धारकर्ता को बलिदान होना और जी उठना अवश्य था l यीशु द्वारा रोटी लेकर तोड़ने के बाद ही उन्होंने उसको पहचाना (पद.30-31) l यद्यपि उसके अनुयायियों ने यीशु की मृत्यु के समय बहुत ही भयंकर मृत्यु का सामना किया था, मृत्यु से जी उठने के द्वारा परमेश्वर ने उनको दिखा दिया कि फिर से आशा कैसे रखी जा सकती है l

हमें भी उन शिष्यों की तरह, घबड़ाहट या गहरा दुःख दबा देता है l किन्तु हम इस सच्चाई में कि यीशु जीवित है और संसार में और हममें कार्य कर रहा है आशा और विश्राम पा सकते हैं l यद्यपि हम अभी भी व्यथा और दुःख का सामना करते हैं, हम यीशु को हमारे दुःख में साथ चलने को बुलाएं l जगत की ज्योति होकर (जूहन्ना 8:12), वह आशा की किरणों से हमारे कोहरे को साफ़ कर देगा l

सर्वोत्तम उपहार

 

जब मैं लन्दन, घर जाने के लिए सामन पैक कर रही थी, मेरी माँ मेरे लिए एक उपहार लेकर आई – उनकी एक अंगूठी जो मुझे बहुत पसंद थी l चकित होकर, मैंने पूछा, “यह किस लिए?” उन्होंने उत्तर दिया, “मेरे विचार से अब तुम इसको पहनने का आनंद लो l मेरी मृत्यु तक इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है? कैसे भी यह मेरी ऊँगली में आती भी नहीं है l” मुस्कराकर मैंने उनका अनापेक्षित उपहार प्राप्त किया, आरंभिक विरासत जो मेरे लिए आनंद का कारण है l

मेरी माँ ने मुझे एक भौतिक उपहार दी, किन्तु यीशु की प्रतिज्ञा है कि उसका पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा देगा (लूका 11:13) l यदि पाप के साथ जन्में माता-पिता अपने बच्चों की ज़रूरतें(जैसे भोजन) पूरी करते हैं, तो हमारा स्वर्गिक पिता अपने वच्चों को और भी अधिक देगा l पवित्र आत्मा के वरदान के द्वारा(यूहन्ना 16:13), हम परेशानी के समय आशा, प्रेम, आनंद, और शांति का अनुभव कर सकते हैं और हम इन वरदानों को दूसरों के साथ बाँट सकते हैं l

उम्र में बढ़ते हुए, शायद हमारे माता-पिता पूरी तौर से हमसे प्रेम नहीं कर सके और हमारी देखभाल नहीं कर सके l अथवा हमारे माता-पिता बलिदानी प्रेम के प्रशिद्ध नमूना थे l अथवा हमारा अनुभव इन दोनों के बीच था l जो भी हमने अपने सांसारिक माता-पिता के विषय जाना है, हम इस प्रतिज्ञा को थामे रह सकते हैं कि हमारा स्वर्गिक पिता हमसे अत्यधिक प्रेम करता है l उसने अपने बच्चों को पवित्र आत्मा का उपहार दिया है l

स्वतंत्र

प्रमस्तिष्क पक्षाघात(Cerebral Palsy-मस्तिष्क क्षति जिसके कारण भुजाओं और टांगों पर नियंत्रण भी क्षतिग्रस्त हो जाता है) के साथ जन्मा एक लड़का बोलने या बातचीत करने में असमर्थ था l किन्तु उसकी माँ, शेटल ब्रायन ने हार नहीं मानी, और जब वह दस वर्ष का हुआ उसने अपने बेटे के साथ अपनी आखों और एक अक्षर बोर्ड की सहायता से बातचीत करना ढूंढ़ लिया l इस महत्वपूर्ण खोज के बाद, उसने कहा, “वह स्वतंत्र हो गया था और हम उससे कुछ भी पूछ सकते थे l” अब जोनाथन आँखों की सहायता से बातचीत करते हुए लिख और पढ़ सकता था जिसमें कविता भी सम्मिलित थी l जब उससे पुछा गया कि अपने परिवार और मित्रों से “बातचीत” करना कैसा लगता है, उसने कहा, “उनको बताना कि मैं उनसे प्यार करता हूँ अद्भुत है l”

जोनाथन की कहानी पूरी तौर से मार्मिक है और हमें विचार करने को मजबूर करती है कि परमेश्वर किस तरह हमें पाप के कैद से स्वतंत्र करता है l जिस तरह प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीहियों को लिखा, कि पहले हम “निकाले हुए थे” (कुलुस्से 1:21), हमारा बुरा स्वभाव हमें परमेश्वर का शत्रु बना दिया था, किन्तु क्रूस पर मसीह की मृत्यु के द्वारा हम परमेश्वर की उपस्थिति में “पवित्र” ठहराए गए हैं (पद.22) l फलवंत होते हुए हमारा “चाल-चलन प्रभु के योग्य” होता जाए, हम परमेश्वर के ज्ञान में उन्नत्ति करते जाएँ, और उसकी सामर्थ्य में सबल बनते जाएं l

हम अपनी स्वतंत्र आवाज़ को परमेश्वर की महिमा करने और उसका सुसमाचार बांटने के लिए उपयोग करते हुए दर्शाएँ कि अब हम पापी जीवन के दास नहीं हैं l अपने विश्वास में उन्नत्ति करते हुए, हम मसीह में अपनी आशा को थामे रहें l

नाम लेकर बुलाया गया

विज्ञापनदाता यह मानते हैं कि सर्वाधिक ध्यान आकर्षित करनेवाला शब्द दर्शक का नाम ही होता है जिस पर दर्शक प्रतिक्रिया करते हैं l इस प्रकार यू के में एक टेलीविजन चैनल ने अपने ऑनलाइन चलनेवाली सेवाओं में व्यक्तिगत विज्ञापनों को तैयार किया है l

हम टेलीविजन पर अपना नाम सुनना पसंद करेंगे, किन्तु जब तक आपका कोई प्रिय जो आपका नाम लेकर आपसे प्रेम करता है आपको न पुकारे तब तक वह सार्थक महसूस नहीं होता है l

मरियम मगदलीनी का ध्यान उस कब्र के निकट ठहर गया, जहां क्रूसित होने के बाद यीश का  शव रखा गया था, जब यीशु ने मरियम का नाम लिया (यूहन्ना 20:16) l एक शब्द से उसने अपने गुरु को अविश्वास और आनंद के एक तीव्र प्रवाह द्वारा पहचान लिया जिससे वह प्रेम करती थी और जिसका वह अनुसरण करती थी l जिस लोकप्रियता से उसने उसका नाम पुकारा, उसने बगैर शक के मरियम को आश्वस्त कर दिया कि जो उसे पूरी तरह जानता था मृतक नहीं किन्तु जीवित था l

यद्यपि मरियम ने यीशु के साथ एक अनोखा और विशेष क्षण का आनंद उठाया, परमेश्वर हमें भी व्यक्तिगत रूप से प्रेम करता है l यीशु ने मरियम से कहा कि वह पिता के पास जाएगा (पद.17), किन्तु उसने अपने शिष्यों से यह भी कहा था कि वह उन्हें अकेले नहीं छोड़ेगा (यूहन्ना 14:15-18) l परमेश्वर पवित्र आत्मा को अपनी संतानों में निवास करने के लिए भेजेगा (देखें प्रेरितों 2:1-13) l

परमेश्वर की कहानी बदलती नहीं है l चाहे तब या वर्तमान में, वह जिनसे प्रेम करता है उनको जानता है (देखें यूहन्ना 10:14-15) l वह हमें नाम लेकर बुलाता है l

कार्य में व्यस्त परमेश्वर

“अभी हाल में क्या आपने परमेश्वर को कार्य करते हुए देखा है?” मैंने अपने कुछ मित्रों से पूछा l एक का उत्तर था, “प्रति भोर को बाइबल पढ़ते समय मैं उसे कार्य करते हुए पाता हूँ; मैं उसे कार्य करते हुए देखता हूँ जब वह मुझे नए दिन का सामना करने में सहायता करता है; मैं उसे मार्ग में मेरे हर कदम पर मदद करते हुए देखता हूँ l मैंने मेहसूस किया है कि उसने मुझे आनंद देते हुए हर चुनौती का सामना करने में मदद की है l” मुझे उसका उत्तर पसंद है क्योंकि उससे पता चलता है कि किस तरह परमेश्वर का वचन और अन्दर निवास करने वाला पवित्र आत्मा के द्वारा, परमेश्वर उससे प्रेम करनेवालों के निकट रहता है, उनमें काम करता है l

परमेश्वर का अपने अनुयायियों में कार्य करना एक अद्भुत सेवा है जिसके विषय इब्रानियों का लेखक अपनी पत्री के समापन आशीष में लिखते हुए इस प्रकार कहता है : “ . . . जो कुछ उसको भाता है उसे यीशु मसीह के द्वारा हम में उत्पन्न करे” (इब्रानियों 13:21) l इस समापन के साथ, लेखक अपने विशेष सन्देश पर बल देता है – कि परमेश्वर उसका अनुसरण करने में अपने लोगों को सज्जित करेगा और कि वह अपनी महिमा के लिए उनमें होकर और उनके द्वारा कार्य करेगा l

परमेश्वर का वरदान जो हममें कार्य करता है हमें चकित कर सकता है; शायद हम किसी को क्षमा करते हैं जिसने हमारी हानि की है अथवा किसी कठिन व्यक्ति के साथ उसने हमें धीरज रखने में सहायता की है l हमारा “शांति का परमेश्वर” हममें होकर और हमारे द्वारा अपना प्रेम और शांति प्रगट करता है l अभी हाल में आपने परमेश्वर को किस तरह कार्य करते हुए देखा है?”

निकट रहना

अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर एक मील चलकर लौटना मुझे बाइबल से कुछ पदों को कंठस्त करने का अवसर देता है, वो भी यदि मैं इसके विषय इच्छा रखता हूँ l जब मैं अपने मन में परमेश्वर के वचन पर विचार करने के लिए कुछ पल देता हूँ, मैं महसूस करता हूँ कि वे वचन बाद में उस दिन मेरे मन में आकर मुझे शांति और बुद्धि देते हैं l

जब मूसा ने इस्राएलियों को प्रतिज्ञात देश में प्रवेश करने के लिए तैयार किया, उसने उन्हें परमेश्वर की आज्ञाओं और विधियों को पकड़े रहने के लिए कहा (व्यव.6:1-2) l उसकी इच्छा थी कि वे तरक्की करें, इस कारण उसने उनको इन आज्ञाओं को बार-बार याद करने और उनको अपने बच्चों के साथ उन पर विचार करने को कहा (पद.6-7) l उसने उनसे उनको अपने कलाइयों और माथे पर भी बाँधने के लिए कहा (पद.8) l उसकी इच्छा थी कि वे परमेश्वर के लोग हैं जो उसे आदर देते हुए उसकी आशीषों का आनंद उठाते हैं, और वे उसकी आज्ञाओं को कभी नहीं भूलें l

आज आप परमेश्वर के वचन के विषय क्या सोचते हैं? एक विचार है कि आप एक पद वचन से लिख लें, और हर एक काम करते समय, उसे पढ़ें और अपने मन में याद करें l अथवा सोने से पहले, बाइबल से एक छोटे परिच्छेद पर विचार करें जो आपके दिन का अंतिम कार्य हो l परमेश्वर के वचन को याद रखने के अनेक तरीके हैं!

जंजीरों को तोड़ना

स्टोन टाउन, ज़ांज़ीबार में क्राइस्ट चर्च कैथेड्रल की यात्रा ने हमारे दिल को छू लिया, क्योंकि यह ऐसे स्थान पर स्थित है जहाँ पूर्व अफ्रीका का सबसे बड़ा गुलाम बाजार था। कैथेड्रल में वास्तविक प्रतीकों के माध्यम से सुसमाचार द्वारा दासता की जंजीरों का तोड़ा जाना प्रदर्शित किया गया है। अब यह बुरे कामों और भयानक अत्याचारों का नहीं, वरन परमेश्वर के प्रस्तुत अनुग्रह का स्थान होगा।

कैथेड्रल निर्माता दिखाना चाहते थे कि किस प्रकार क्रूस पर यीशु की मृत्यु पाप से छुटकारा प्रदान करती है-जिसे प्रेरित पौलुस ने इफिसुस की कलीसिया को अपनी पत्री में व्यक्त किया था:"हम को उस में...."(इफिसियों 1:7)। यहां छुटकारा शब्द, पुराने नियम के बाज़ार के भाव को इंगित करता है, किसी व्यक्ति या वस्तु को वापस खरीद लेने द्वारा। यीशु मनुष्य को पाप की दासता और बुरे काम करने के जीवन से वापस खरीद लेते हैं।

मसीह में अपने छुटकारे के विचार से वह खुशी से फूले नहीं समाते(पद 3-14)। परत-दर-परत गुणगान करते हुए वह, यीशु की मृत्यु द्वारा हमारे लिए किए गए परमेश्वर के अनुग्रह के उस कार्य का बखान करते हैं, जो हमें पापों के बंधन से छुड़ा लेता है। अब हमें पाप के दास होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम परमेश्वर और उसकी महिमा के लिए जीवित रहने के लिए स्वतंत्र हैं।

उतावले ना बनो

"उतावलेपन को कठोरता पूर्वक निकाल डालो" दो दोस्तों द्वारा बुद्धिमान डालेस विलर्ड के इस कथन के दोहराए जाने पर मैं समझ गया कि मुझे इसके बारे में सोचना चाहिए। मैं अपना समय और ऊर्जा कहाँ बर्बाद कर रहा था? मार्गदर्शन और सहायता के लिए परमेश्वर की ओर देखने की बजाय मैं उतावला होकर बेसुध चल रहा था। आगे चलकर मैंने परमेश्वर और उनकी बुद्धिमत्ता की ओर रुख कियाI अपने तरीकों पर चलने के बजाय परमेश्वर पर विश्वास करने की बात को ध्यान में रखाI

बेतहाशा दौड़ना उसका विपरीत होता है जिसे भविष्यवक्ता यशायाह "पूर्ण शांति" कहते हैं। यह वरदान परमेश्वर उन्हे देते हैं जिनके मन उसमे स्थिर हैं क्योंकि वह उनपर भरोसा करते हैं। और वह सदा विश्वासयोग्य हैं आज, कल, और हमेशा, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान हैं (पद 4)। धीरज धर कर परमेश्वर पर विश्वास करना उतावलेपन के जीवन का इलाज है।

हमारे बारे में क्या?  क्या हम जानते हैं कि हम उतावलापन या जल्दबाजी कर रहे हैं?  शायद हमें शांति भी अनुभव होती हो। या शायद हम इन दोनों चरम सीमाओं के बीच में कहीं हों। हम जहां भी हों, मैं आज प्रार्थना करती हूं कि हम अपने उतावलेपन को छोड़कर परमेश्वर पर भरोसा करें जो हमें कभी निराश नही करते और हमें अपनी शांति देते हैंI