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Articles by ऐनी सिटास

एक घर की अभिलाषा

ऐनीऑफ़ ग्रीन गेबल्स  कहानियों के मुख्य पात्र ऐनी को एक परिवार की इच्छा थी। वह अनाथ थीं और उसने कभी एक ऐसे जगह पाने की आशा खो दी थी जिसे वह घर कह सके। फिर उसने यह जाना कि मैथ्यू नामक एक बूढा आदमी और उसकी बहन मरिला उसे स्वीकार करने के लिए तैयार थे। एक छोटी गाड़ी में उनके घर जाते हुए ऐनी ने बार–बार बकबक करने के लिए माफ़ी मांगी, पर मैथ्यू, जो एक शांत स्वभाव का था ने कहा, “तुम जितना चाहो उतना बात कर सकती हो। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।”  यह ऐनी के कानों के लिए संगीत था। उसे लगता था कि कोई भी कभी उसे अपने आसपास नहीं चाहता, तो  उसकी बकबक क्यों सुनना चाहेगा। पहुंचने के बाद, उसकी उम्मीदें धराशायी हो गई जब उसे पता चला कि  भाई–बहनों ने सोचा था की उन्हें खेत में मदद करने के लिए एक लड़का मिल रहा है। वह लौटाए जाने से डरी, लेकिन ऐनी की एक प्यार भरे घर की लालसा तब पूरी हुई जब उन्होंने उसे अपने परिवार का एक हिस्सा बनाया।

हम सब ने ऐसे समय का सामना किया है जब जब हम अनचाहे और अकेला महसूस करते हैं। लेकिन जब हम यीशु में उद्धार के द्वारा परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बनते हैं तो वह हमारे लिए एक सुरक्षित गढ़ बन जाता है। भजनसंहिता 62:2।वह हममें प्रसन्न होता है और हमे अपने साथ सब कुछ के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित करता है — हमारी चिंता, परीक्षाएं, दुःख और आशा। भजनकार हमें कहता है “ परमेश्वर में आराम पाओ और अपने मन की बातें उससे खोल के कहो। (पद5,8) 

संकोच न करें। जितना चाहे परमेश्वर से बात करें। वह बुरा नहीं मानेगा। वह आपके हृदयों से प्रसन्न है। उसमें आप एक घर पा सकते है।

अटूट विश्वास

अरुण अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका सामान लेने के लिए वृद्धाश्रम में गया। कर्मचारियों ने उसे दो छोटे बक्से सौंपे। उसने कहा कि उस दिन उसे यह महसूस हुआ कि खुश रहने के लिए वास्तव में बहुत सारी संपत्ति नहीं चाहिए होती।

उसके पिता, सतीश, चिन्तामुक्त और हमेशा एक मुस्कान और दूसरों के लिए एक उत्साहजनक शब्द के साथ तैयार रहते थे। उनकी खुशी का कारण एक दूसरी  "संपत्ति" थी जो किसी बक्से में नहीं समा सकती थी : उनके उद्धारकर्ता, यीशु में एक अटूट विश्वास।

यीशु हमसे आग्रह करते हैं कि “अपने लिए स्वर्ग में धन इकट्ठा करो" (मत्ती 6:20)। उन्होंने यह नहीं कहा कि हम एक घर या गाड़ी नहीं खरीद सकते हैं या भविष्य के लिए धन नहीं जोड़ सकते या हमारे पास अन्य कई संपत्तियां नहीं हो सकती। परन्तु वह हमसे यह आग्रह करते है कि हम जांचे कि हमारा हृदय कहाँ केंद्रित है। सतीश का ध्यान कहाँ था? दूसरों से प्रेम करने के द्वारा परमेश्वर से प्रेम करने पर। वह उन बड़े कमरों में ऊपर और नीचे घूमते थे जहां वे रहते थे, अपने मिलने वालों का अभिवादन और उनको प्रोत्साहित करते थे । अगर किसी की आंखों में आंसू होते, तो वह एक सुकून देने वाले शब्द या सुनने वाले कान या दिल से की गई प्रार्थना करने के लिए मौजूद रहते थे। उनका मन इस बात पर केंद्रित था कि वह अपना जीवन परमेश्वर का आदर और दूसरों की भलाई करने के लिए जीएँ।

हम शायद खुद से पूछना चाहेंगे कि क्या हम कम चीजों में भी खुश रह सकते हैं जो हमें दौड़-धूप कराती हैं और हमें परमेश्वर और दूसरों से प्रेम करने के अधिक महत्वपूर्ण विषय से विचलित करती हैं। "जहाँ [हमारा] धन है, वहाँ [हमारा] मन भी रहेगा" (पद 21 )। हम जिस चीज को महत्व देते हैं, वह इस बात से झलकती है कि हम कैसे जीवन जीते हैं।

विश्वास से जीना

चलते समय मोहित को कुछ संतुलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए उसके चिकित्सक ने उसका संतुलन सुधारने के लिए भौतिक चिकित्सा का आदेश दिया। एक सत्र के दौरान उनके चिकित्सक ने उनसे कहा, "आप जो देख सकते हैं उस पर आप बहुत अधिक भरोसा कर रहे हैं, भले ही वह गलत हो! आप अपनी अन्य प्रणालियों पर पर्याप्त निर्भर नहीं हैं - जो आप अपने पैरों के नीचे महसूस करते हैं और आपके आंतरिक-कान के संकेत - जो आपको संतुलित रखने में मदद करने के लिए भी हैं। ”

"आप जो देख सकते हैं उस पर आप बहुत अधिक भरोसा कर रहे हैं" डेविड की कहानी, एक युवा चरवाहा, और गोलियत के साथ उसकी मुठभेड़ को ध्यान में लाता है। चालीस दिनों के लिए, गोलियत, एक पलिश्ती चैंपियन, "इस्राएली सेना के सामने लड़खड़ाता हुआ," उन्हें ताना मारता रहा कि किसी को उससे लड़ने के लिए बाहर भेजो (1 शमूएल 17:16 एनएलटी)। लेकिन लोगों ने स्वाभाविक रूप से जिस पर ध्यान केंद्रित किया, उससे उन्हें डर लगा। तब युवा दाऊद प्रकट हुआ क्योंकि उसके पिता ने उसे अपने बड़े भाइयों के लिए सामग्री लेने के लिए कहा था (v 18)।

दाऊद ने स्थिति को कैसे देखा? ईश्वर में विश्वास से, दृष्टि से नहीं। उसने विशाल को देखा लेकिन भरोसा था कि परमेश्वर उसके लोगों को बचाएगा। हालाँकि वह सिर्फ एक लड़का था, उसने राजा शाऊल से कहा, “इस पलिश्ती की चिंता मत करो। . . . मैं उससे लड़ने जाऊंगा!" (v 32)। तब उसने गोलियत से कहा, "लड़ाई तो यहोवा की है, और वह तुम सब को हमारे हाथ में कर देगा" (v 47)। और बस यही परमेश्वर ने किया।

परमेश्वर के चरित्र और शक्ति पर भरोसा करने से हमें दृष्टि के बजाय विश्वास से अधिक निकटता से जीने में मदद मिल सकती है।

प्यारा परमेश्वर

प्रोफेसर ने हर बार दो में से एक तरीके से अपनी ऑनलाइन कक्षा समाप्त की। वह कहते, "अगली बार मिलते हैं" या "आपका सप्ताहांत अच्छा हो।" कुछ छात्र "धन्यवाद" के साथ जवाब देते। आप का भी!" लेकिन एक दिन एक छात्र ने जवाब दिया, "मैं आपसे प्यार करता हूँ।" आश्चर्यचकित होकर, उन्होंने उत्तर दिया, "मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ!" उस शाम सहपाठियों ने अपने प्रोफेसर की प्रशंसा में अगली कक्षा के लिए "मैं  तुमसे प्यार करता हूँ - कड़ी" बनाने के लिए सहमति व्यक्त की, जिन्हें अपने कंप्यूटर पर एक स्क्रीन पर पढ़ाना था, न कि व्यक्तिगत रूप से शिक्षण जैसा वह पसंद करते थे। कुछ दिनों बाद जब उन्होंने पढ़ाना समाप्त किया, तो प्रोफेसर ने कहा, "अगली बार मिलते हैं," और एक-एक करके छात्रों ने उत्तर दिया, "मैं आपसे प्यार करता हूँ।" उन्होंने इस प्रथा को महीनों तक जारी रखा। शिक्षक ने कहा कि इसने उनके छात्रों के साथ एक मजबूत बंधन बनाया, और अब उन्हें लगता है कि वे "परिवार" हैं।

1 यूहन्ना 4:10-21 में, हम, परमेश्वर के परिवार के हिस्से के रूप में, उसे "मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ" कहने के कई कारण पाते हैं : उसने अपने पुत्र को हमारे पाप के लिए बलिदान के रूप में भेजा (पद 10)। उसने हमें हम में रहने के लिए अपनी आत्मा दी (पद 13, 15)। उसका प्रेम हमेशा विश्वसनीय है (पद 16), और हमें न्याय से कभी भी डरने की आवश्यकता नहीं है (पद 17)। वह हमें उसे और दूसरों से प्रेम करने में सक्षम बनाता है "क्योंकि उसने पहिले हम से प्रेम किया" (पद 19)।

अगली बार जब आप परमेश्वर के लोगों के साथ एकत्रित हों, तो उसे प्रेम करने के अपने कारणों को साझा करने के लिए समय निकालें। परमेश्वर के लिए "मैं तुमसे प्यार करता हूँ" श्रृंखला बनाना उसको स्तुति देगा और आपको करीब लाएगा।

भयभीत न हों

मिथुन एक छोटा लड़का था जो सुरक्षा के लिए हमेशा अपने पसंदीदा स्टफ्ड टेडी (खिलोना) को कसकर पकड़े हुए रहता था। वह इसे हर जगह ले जाता था और आराम के लिए इसकी आवश्यकता पर शर्मिंदा नहीं होता था। उसकी बहन मेघा को यह आदत पसंद नहीं थी और वह अक्सर इसे छुपाती रहती थी। हालाँकि मिथुन यह भी जानता था कि उसे अपने टेडी पर कम निर्भर रहना चाहिए और उसे समय-समय पर जाने देना चाहिए, लेकिन वह हमेशा इसे पकड़े हुए रहता था।

एक क्रिसमस में एक चर्च के बच्चों के प्रोग्राम में जिसका शीर्षक था 'क्रिसमस क्या है?' मिथुन को एक कथावाचक के रूप में लिया गया था, और जैसे ही उसने लूका 2:8-14 का पाठ करने के लिए कदम आगे बढ़ाया, विशेष रूप से शब्द "मत डरो," उसने अपने टेडी को गिरा दिया──वह चीज जिसे, जब वह डरता था तो उससे हमेशा चिपका रहता था।

क्रिसमस के बारे में ऐसा क्या है जो हमें याद दिलाता है कि हमें डरने की जरूरत नहीं है? चरवाहों को दिखाई देनेवाले स्वर्गदूतों ने कहा, “मत डरो . . . तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा हुआ है" (लूका 2:10-11)।

यीशु "परमेश्वर हमारे साथ" है (मत्ती 1:23)। हमारे पास उसकी उपस्थिति उसकी पवित्र आत्मा, सच्चे दिलासा देने वाले (यूहन्ना 14:16) के माध्यम से है, इसलिए हमें डरने की आवश्यकता नहीं है। हम अपने "सुरक्षा कंबल" को छोड़ सकते हैं और उस पर भरोसा कर सकते हैं।

परमेश्वर हमारे टूटेपन को चंगा करता है

आदित और उसकी पत्नी, रेशमा, घर में एक तस्वीर लटकाने के लिए, क्राफ्ट स्टोर में घूमते रहे । आदित ने सोचा कि उसे सही वस्तु मिल गयी है और रेश्मा को इसे दिखाने के लिए उसे बुलाया । सिरेमिक शिल्पकृति के दाहिनी ओर शब्द अनुग्रह था । लेकिन बायीं ओर दो लम्बी दरारें थीं । “ये तो टूटा हुआ है!” रेशमा बोली जब वह शेल्फ पर एक अखंडित वस्तु ढूँढने लगी । लेकिन तब आदित ने कहा, “नहीं । यही तो बात है । हम सब टूटे हुए हैं और तब अनुग्रह पहुँचता है──अवधि में ।” उन्होंने दरारों के साथ वाला खरीदने का निर्णय लिया । जब वे भुगतान स्थल पर पहुंचे, दूकानदार बोला, “अरे नहीं, यह तो टूटा है!” “हाँ, हम भी,” रेश्मा फुसफुसाई । 

एक “टूटा” व्यक्ति होने का मतलब क्या है? किसी ने इसे इस तरह परिभाषित किया है : एक बढ़ती जागरूकता कि चाहे हम जितनी भी कोशिश कर लें, जीवन को बेहतर बनाने की हमारी क्षमता बेहतर के बजाय बदतर होती जाती है । यह ईश्वर के लिए हमारी ज़रूरत और हमारे जीवन में उसके हस्तक्षेप की मान्यता है । 

प्रेरित पौलुस ने इन शब्दों में हमारे टूटेपन के बारे में बात किया “अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए” (इफिसियों 2:1) । क्षमा किए  जाने और बदल दिए जाने की हमारी ज़रूरत का उत्तर पद. 4 और 5 में मिलता है : “परमेश्वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण . . . हमें . . . जिलाया । अनुग्रह ही से [हमारा] उद्धार हुआ है ।” 

परमेश्वर अपने अनुग्रह से हमारे टूटेपन को चंगा करना चाहता है जब हम स्वीकार करते हैं, “मैं टूटा हूँ ।”

परस्पर मदद करना

चक दे! इन्डिया 2002 की कॉमन वेल्थ गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत पर आधारित एक काल्पनिक बॉलीवुड फिल्म है l मुख्य दृश्यों में से एक में, कोच का किरदार  निभाने वाले अभिनेता शाहरुख़ खान टीम को सखापन और टीम वर्क का भाव विकसित करने में मदद करता है l प्रारंभ में जब खिलाडी अपना परिचय देते हैं, तो वे अपना नाम और फिर अपने गृह राज्य का नाम बताते हैं l हालाँकि वह उन्हें सिखाता है कि वे अब एक राज्य के नहीं हैं, लेकिन वे एक टीम हैं──टीम इन्डिया l पारस्परिक समर्थन का यह मनोभाव उन्हें सफल बनाने में मदद करता है और अंततः विषय मंच पर जीत दिलाता है l 

परमेश्वर अपने लोगों से एक दूसरे की मदद करने के लिए संगठित होने की इच्छा रखता है l प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनीकियों से “एक दूसरे की उन्नति का कारण [बनने] का आग्रह किया (1 थिस्सलुनीकियों 5:11) l परमेश्वर ने हमें अपने लोगों के परिवार में हमारे जीवन में समर्थन के लिए रखा है l मसीह में जीवन की राह पर चलते रहने के लिए हमें एक-दूसरे की आवश्यकता है l कभी-कभी इसका मतलब हो सकता है कि किसी ऐसे व्यक्ति की सुनना जो संघर्ष कर रहा है, व्यवहारिक ज़रूरत पूरा करना, या प्रोत्साहन के कुछ शब्द बोलना l हम सफलताओं का जश्न मना सकते हैं, एक कठिनाई में ताकत के लिए प्रार्थना कर सकते हैं, या विश्वास में बढ़ने के लिए एक दूसरे को चुनौती दे सकते हैं l और हर बात में, हम हमेशा “सब से भी भलाई ही की चेष्टा” (पद.15) कर सकते हैं l 

यीशु के साथ-साथ परमेश्वर पर भरोसा रखने के लिए हम अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर किस तरह के सखापन का आनंद ले सकते हैं!

कोई ग़लतफ़हमी नहीं

एलेक्सा, सिरी और अन्य आवाज़ सहायक हमारे घरों में स्मार्ट उपकरणों में अन्तःस्थापित हैं, जिनको कभी-कभी ग़लतफ़हमी हो जाती है कि हम क्या कह रहे हैं l एक छह साल की लड़की ने अपने परिवार के नए उपकरण से बिस्कुट और गुड़ियाघर के बारे में बात की l बाद में उसकी माँ ने एक ई-मेल प्राप्त किया जिसमें कहा गया था कि सात पौंड बिस्कुट और 170 डॉलर का गुड़िया घर का एक ऑर्डर उसके घर पर पहुँच रहा था l लन्दन में एक बोलने वाले तोता ने, जिसके मालिक ने कुछ भी ऑनलाइन कभी नहीं ख़रीदा था, किसी तरह गोल्डन उपहार डिब्बों का एक पैकेज उनको बताए बगैर ऑर्डर कर दिया l एक व्यक्ति ने अपने उपकरण से “लिविंग रूम की बत्ती जलाने को कहा,” और उसने उत्तर दिया, “कोई भी पुडिंग रूम नहीं है l”

जब हम परमेश्वर से बात करते हैं तो परमेश्वर की ओर से ऐसी ग़लतफ़हमी नहीं होती है l वह कभी भी भ्रांत नहीं है, क्योंकि वह हमारे हृदयों को हमसे बेहतर जानता है l आत्मा हमारे हृदयों को टटोलता है और परमेश्वर की इच्छा को समझता भी है l प्रेरित पौलुस ने रोम की कलीसिया से कहा कि परमेश्वर हमें परिपक्व करने और हमें अपने पुत्र के समान बनाने के अपने भले उद्देश्य को पूरा करेगा (रोमियों 8:28) l यहाँ तक कि “हमारी दुर्बलता” के कारण हम नहीं जानते कि हमारी उन्नति के लिए हमें क्या चाहिए, आत्मा हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना करता है (पद.26-27) l 

परमेश्वर के सामने खुद को कैसे अभिव्यक्त करें के विषय समस्या है? समझ नहीं है कि क्या या कैसे प्रार्थना करें? अपने हृदय से जो आप बोल सकते हैं वह बोलें l आत्मा समझकर परमेश्वर का उद्देश्य पूरा करेगा l 

प्रेम का सच्चा स्वभाव

महामारी तालाबंदी के दौरान, जेरी को अपना फिटनेस सेन्टर को बंद करने को विवश होना पड़ा और महीनों तक उसको कोई आमदनी नहीं हुई l एक दिन उसके एक मित्र से उसे एक सन्देश प्राप्त हुआ, जो उसे शाम 6.00 बजे उसके प्रतिष्ठान पर मिलने के लिए कह रहा था l जेरी को नहीं मालूम था क्यों लेकिन वह वहां गया l जल्द ही कारें पार्किंग स्थल पर पहुँचने लगीं l पहली कार के ड्राईवर ने इमारत के निकट फूटपाथ पर एक टोकरी रखी l उसके बाद एक के बाद दूसरी (लगभग 50) कारें आयीं l जो कारों के अन्दर थे उन्होंने जेरी को हाथ से इशारा किया या जोर से हेलो बोला, टोकरी के निकट पहुंचकर, और एक कार्ड या नगद डालें l कुछ लोगों ने पैसे दिए; सभी ने उसको प्रोत्साहित करने के लिए अपना समय दिया l 

प्रेरित पौलुस के अनुसार, प्रेम का सच्चा स्वरूप बलिदानी है l उसने कुरिन्थियों को समझाया कि मकिदुनिया के लोगों ने “अपनी सामर्थ्य भर वरन् सामर्थ्य से भी बाहर” दिया ताकि वे प्रेरितों और दूसरों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दे सकें (2 कुरिन्थियों 8:3) l उन्होंने पौलुस से उनको और परमेश्वर के लोगों को देने के सुअवसर के लिए “निवेदन” किया l उनके देने का आधार स्वयं यीशु का बलिदानी हृदय था l वह स्वर्ग के धन को छोड़कर एक दास बनने और अपने ही जीवन को देने इस धरती पर आया l “वह धनी होकर भी [हमारे] लिए कंगाल बन गया” (पद.9) l 

हम भी परमेश्वर से अनुरोध करें ताकि हम भी “इस दान के काम में भी बढ़ते जाएँ” (पद.7) जिससे दूसरों की आवश्यकताओं को प्रेमपूर्वक पूरा कर सकें l