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Articles by आर्थर जैक्सन

परमेश्वर की भलाई के बारे में बताएं

 
गवाही का समय हमारी चर्च आराधना का वह समय था जब लोग साझा करते थे कि परमेश्वर उनके जीवन में क्या काम कर रहे थे। आंटी - या सिस्टर लैंगफ़ोर्ड, जैसा कि हमारे चर्च परिवार में अन्य लोग उन्हें जानते थे - अपनी गवाही में बहुत सारी प्रशंसाएँ भरने के लिए जानी जाती थीं। ऐसे अवसरों पर जब उसने अपनी व्यक्तिगत उद्धार की कहानी साझा की, तो कोई उम्मीद कर सकता था की आराधना का ज्यादा समय लेंगी। उसका हृदय परमेश्वर की स्तुति से गूँज उठा जिसने दयालुता पूर्वक उसका जीवन बदल दिया! 
 
इसी प्रकार, भजन संहिता 66 के लेखक की गवाही प्रशंसा से भरी हुई है क्योंकि वह इस बात की गवाही देता है कि परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए क्या किया है। "आओ परमेश्वर के कामों को देखो; वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।"(पद 5) उनके कार्यों में चमत्कारी बचाव(पद 6), सुरक्षा (पद 9), और परीक्षण और अनुशासन भी शामिल था जिसके परिणामस्वरूप उनके लोगों को एक बेहतर स्थान पर लाया गया (पद 10-12)। जबकि ऐसे ईश्वर-अनुभव हैं जो यीशु में अन्य विश्वासियों के साथ हमारे समान हैं,लेकिन हमारी व्यक्तिगत यात्राओं के लिए कुछ अनोखी चीज़ें भी हैं। क्या आपके जीवन में ऐसे समय आए हैं जब परमेश्वर ने स्वयं को विशेष रूप से आपके सामने प्रकट किया है? वे दूसरों के साथ साझा करने लायक हैं जिन्हें यह सुनने की ज़रूरत है कि उसने आपके जीवन में कैसे काम किया है। "हे परमेश्वर के सब डरवैयो, आकर सुनो, मैं बताऊँगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है।"(पद 16) 
  
— आर्थर जैक्सन 
 

सभी के लिए एक दरवाजा

मेरे बचपन के पड़ोस में स्थित रेस्तराँ में प्रोटोकॉल  (औपचारिक अवसरों पर सुनिश्चित नियमों और प्रक्रियाओं की व्‍यवस्‍था) 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक की शुरुआत में सामाजिक और नस्लीय गतिशीलता के अनुरूप थे। रसोई में काम करने वाले सहायक - मैरी, रसोइया और मेरे जैसे बर्तन धोने वाले - अश्वेत थे; हालाँकि, रेस्तराँ में मौजूद ग्राहक श्वेत थे। अश्वेत ग्राहक भोजन का ऑर्डर दे सकते थे, लेकिन उन्हें इसे पिछले दरवाजे से उठाना पड़ता था। ऐसी नीतियों ने उस युग में अश्वेतों के साथ असमान व्यवहार को मजबूत किया। हालाँकि हम तब से बहुत आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी हमारे पास परमेश्वर की छवि में बने लोगों के रूप में एक-दूसरे से कैसे संबंध बनाते हैं, इस बारे में विकास की गुंजाइश है। 
जैसे पवित्रशास्त्र में रोमियों 10:8-13  हमें यह देखने में मदद करता हैं कि परमेश्वर के परिवार में सभी का स्वागत है; कोई पिछला दरवाज़ा नहीं है. सभी एक ही रास्ते से प्रवेश करते हैं - शुद्धिकरण और क्षमा के लिए यीशु की मृत्यु में विश्वास के माध्यम से। इस परिवर्तनकारी अनुभव के लिए बाइबल का शब्द है उद्धार पाए हुये (बचाये गये)  (पद- 9, 13)। आपकी सामाजिक स्थिति या नस्लीय (जातीय) स्थिति या फिर दूसरों की अन्य स्थिति से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। "जैसा कि पवित्रशास्त्र कहता है, 'जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। क्योंकि यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिए कि वह सब का प्रभु है और अपने सब नाम लेनेवालों के लिए उदार है " (पद 11- 12) क्या आप अपने हृदय में यीशु के बारे में बाइबल के संदेश पर विश्वास करते हैं? तो उसके परिवार में आपका स्वागत है! 
-आर्थर जैक्सन 

असीम करुणा

फास्ट-फूड रेस्तराँ में काम करने वाले केविन फोर्ड ने सत्ताईस साल में एक भी छुट्टी नहीं की थी।  एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें उन्होंने अपनी दशकों की सेवा के उपलक्ष्य में मिले एक मामूली उपहार के लिए अपनी विनम्र कृतज्ञता दिखाई, हज़ारों लोग उनके प्रति दयालुता दिखाने के लिए एक साथ आए। “यह एक सपने जैसा है, एक सपना सच हो गया,” उन्होंने कहा जब एक धन  जुटाने के प्रयास ने एक सप्ताह से भी कम समय में 250,000 डॉलर जुटाए। बंधुआई में गया यहूदा के राजा यहोयाकीन को भी अत्यधिक दयालुता का पात्र माना गया। बेबीलोन के राजा की दयालुता के परिणामस्वरूप उनकी रिहाई से पहले उन्हें सैंतीस साल तक कैद में रखा गया था। “राजा यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकालकर बड़ा पद दिया; और उस से मधुर मधुर वचन कहकर, जो राजा उसके साथ बाबुल में बंधुए थे, उनके सिंहासनों से उसके सिंहासन को अधीक ऊंचा किया।" (यिर्मयाह 52:31-32)। यहोयाकीन को नया पद, नए कपड़े और नया निवास दिया गया। उसके नए जीवन का पूरा खर्च राजा ने उठाया।  
यह कहानी चित्रित करती है कि आत्मिक रूप से क्या होता है, जब स्वयं या दूसरों के योगदान के बिना, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान में विश्वास करने वाले लोगों को परमेश्वर से अलगाव से बचाया जाता है। उन्हें अंधकार और मृत्यु से प्रकाश और जीवन में लाया गया है; परमेश्वर की अत्यधिक दयालुता के कारण उन्हें परमेश्वर के परिवार में लाया गया है।  
—आर्थर जैक्सन 

विनम्र लेकिन आशावान

चर्च आराधना के अंत में पादरी के निमंत्रण पर, लैट्रिस  सामने आ गई। जब उसे मण्डली का अभिवादन करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो कोई भी उसके द्वारा बोले गए गंभीर और महत्वपूर्ण और अद्भुत शब्दों के लिए तैयार नहीं था। वह केंटकी से स्थानांतरित हुई थी, जहाँ दिसंबर 2021 में विनाशकारी बवंडर ने उसके परिवार के सात सदस्यों की जान ले ली थी। उसने कहा, "मैं अभी भी मुस्कुरा सकती हूँ क्योंकि परमेश्वर मेरे साथ हैं।" हालाँकि परीक्षा से आहत, उसकी गवाही उन लोगों के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन थी जो अपनी चुनौतियों का सामना कर रहे थे। 
भजन संहिता 22 में दाऊद के शब्द (जो यीशु की पीड़ा की ओर संकेत करते हैं) एक आहत व्यक्ति के हैं जो परमेश्वर द्वारा त्यागा हुआ महसूस करता है (पद.1), जिसका दूसरों द्वारा त्याग और उपहास किया जाता है (पद.6-8), और आक्रमणकारियों से घिरा हुआ है (पद. 12-13) l उसने कमज़ोर और थका हुआ महसूस किया (पद.14-18)—लेकिन वह निराश नहीं था l “परन्तु हे यहोवा, तू दूर न रह! हे मेरे सहायक, मेरी सहायता के लिए फुर्ती कर!” (पद.19) l आपकी वर्तमान चुनौती—हालाँकि संभवतः दाऊद या लेट्रीस की तरह एक ही किस्म की नहीं है— पर उतनी ही असली है l और पद 24 के शब्द उतने ही अर्थपूर्ण हैं : “उसने दुखी को तुच्छ नहीं जाना;...पर जब उसने उसकी दोहाई दी, तब उसकी सुन ली l” और जब हम परमेश्वर की सहायता का अनुभव करते हैं, तो आइए हम उसकी भलाई की घोषणा करें ताकि दूसरे इसके बारे में सुन सकें (पद.22) l      
—आर्थर जैक्सन 

मुझे धो !

"मुझे धो दें!" हालाँकि ये शब्द मेरे वाहन पर नहीं लिखे थे, लेकिन हो सकते थे। तो, मैं कार धुलवाने के लिए गया, और अन्य ड्राइवर भी, जो हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद टूटी सड़कों से बचे हुए गंदे पानी से राहत चाहते थे। कतारें लंबी थीं और सेवा धीमी। लेकिन यह प्रतीक्षा के लायक था। मैं एक साफ वाहन के साथ लौटा और, सेवा में देरी के मुआवजे के लिए, कार की धुलाई मुफ़्त में हुई! 
किसी और के खर्च पर सफ़ाई करवाना—यही यीशु मसीह का सुसमाचार है। परमेश्वर ने, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा, हमारे पापों के लिए क्षमा प्रदान की है। जब जीवन की "मैल और गंदगी" हमसे चिपक जाती है तो हममें से किसे "स्नान करने" की आवश्यकता महसूस नहीं होती? जब हम स्वार्थी विचारों या कार्यों से कलंकित हो जाते हैं जो हमें या दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं और प्रभु के साथ हमारी शांति छीन लेते हैं? भजन 51 दाऊद की पुकार है जब उसके जीवन में प्रलोभन की जीत हुई। जब एक आत्मिक सलाहकार ने उसके पाप को दिखाया (2 शमूएल 12), तो उसने प्रार्थना की "मुझे धो दे !" “जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्रा हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा” (पद 7)। गंदा और दोषी महसूस कर रहे हैं? यीशु के पास अपना रास्ता बनाएं और इन शब्दों को याद रखें: " यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। 
 

लिखित संदेश, मुसीबतें, और जीत

 
जिमी ने सामाजिक अशांति, खतरे और असुविधा की वास्तविकता को इसकी अनुमति नहीं दी थी कि वे उसे सेवकाई करने वालो को प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक की यात्रा करने से रोक सकें। घर में हमारी टीम को निरंतर भेजे गये लिखित संदेशों ने उन चुनौतियों का खुलासा किया जिनका उसने सामना किया — “प्रार्थना को सक्रीय करो। हम पिछले दो घंटों में दस मील जा चुके हैं। कार एक दर्जन बार गर्म हो चुकी है।” परिवहन बाधाओं का मतलब था कि वह उन लोगों को प्रचार करने के लिए आधी रात से ठीक पहले पहुँचे, जिन्होंने पाँच घंटे तक उनका इंतज़ार किया था। बाद में हमें एक अलग संदेश मिला — “अदभुत सहभागिता का सुन्दर समय। करीब एक दर्जन लोग प्रार्थना के लिए आगे आए।” यह एक ज़बरदस्त शक्तिशाली रात थी! 
ईमानदारी से परमेश्वर की सेवा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इब्रानियों 11 में सूचीबद्ध विश्वास करने वालों के उदाहरण इस बात से सहमत होंगे। परमेश्वर में अपनी आस्था से विवश होकर सामान्य स्त्री–पुरुषों को असहज और अथाह परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कितनों ने उपहास और कोड़ों का सामना किया, और यहां तक कि जंजीरों में जकड़े जाने और कारावास का भी सामना किया (पद 36)। उनके विश्वास ने उन्हें जोखिम उठाने और परिणाम के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने के लिए विवश किया। हमारे लिए भी यही सच है। अपने विश्वास में बने रहना हमें शायद दूर के जोखिम भरे स्थानों पर तो न ले जाए, लेकिन यह हमें अपनी गली, या कार्य स्थल के परिसर में, या लंचरूम, या सभा कक्ष में एक खाली सीट पर ले जा सकता है। क्या यह जोखिम भरा है? शायद। लेकिन इसका प्रतिफल, अभी या बाद में, जोखिम उठाने के लायक होगा क्योंकि परमेश्वर हमारी मदद करता है।   

यीशु के लिए खड़े होने का साहस

 
सन् 155 ईस्वी में, प्रारम्भिक कलीसिया के पादरी पॉलीकार्प को मसीह पर उनके विश्वास के लिए आग से जलाकर मार डालने की धमकी दी गई थी। उन्होंने यह जवाब दिया था, “मैं छियासी वर्ष से उसका सेवक हूँ, और उसने मेरे साथ कुछ भी गलत नहीं किया। और अब मैं अपने उस राजा की निन्दा कैसे करूँ जिसने मेरा उद्धार किया है? ” जब हम अपने राजा, अर्थात् यीशु पर अपने विश्वास के कारण अधिकतम परीक्षा का सामना करते हैं, तो ऐसे समय में पॉलीकार्प की यह प्रतिक्रिया हमारे लिए भी प्रेरणा हो सकती है। 
यीशु की मृत्यु से कुछ घंटे पहले, पतरस ने साहस से मसीह के प्रति अपनी वफादारी की शपथ ली थी: “ हे प्रभु, मैं तो तेरे लिए अपना प्राण दूँगा” (यूहन्ना 13:37)। यीशु ने, जो पतरस को पतरस से भी अधिक जानता था, उसे यह प्रत्युत्तर दिया, “मैं तुझ से सच-सच कहता हूँ कि मुर्ग बाँग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा!” (पद 38)। हालाँकि, यीशु के जी उठने के बाद, उसी पतरस ने जिसने उसका इन्कार किया था, साहसपूर्वक उसकी सेवा करना आरम्भ किया और उसी ने अंत में अपनी मृत्यु के माध्यम से उसकी महिमा की (21:16-19)।  
तो आप पॉलीकार्प हैं या पतरस? यदि हम ईमानदार बनें, तो हम में से अधिकांश लोग पतरस के समान हैं जिनमें “साहस की कमी है”, अर्थात् यह यीशु पर विश्वास करने वाले एक व्यक्ति के रूप में बोलने या सम्मानपूर्वक कार्य करने की विफलता है। इस प्रकार के अवसरों को हमें स्थाई रुप से परिभाषित नहीं करना चाहिए, चाहे वे कक्षा में हों, सभा कक्ष में हों, या विश्राम कक्ष में हों। जब ऐसी विफलताएँ घटित हों, तो हमें प्रार्थनापूर्वक स्वयं को झाड़कर उस यीशु की ओर फिरना चाहिए, जो हमारे लिए मरा और जो हमारे लिए जीवित है। वह हमें उसके प्रति विश्वासयोग्य रहने में सहायता करेगा और प्रतिदिन कठिन स्थानों में साहसपूर्वक उसके लिए जीवन व्यतीत करने में भी सहायता करेगा। 

थके हुए तम्बू

 
"तम्बू थक गया है!" ये मेरे मित्र पॉल के शब्द थे, जो केन्या के नैरोबी में एक चर्च के पासबान (पादरी) हैं।  2015 से, मण्डली ने एक तम्बू जैसी संरचना में आराधना की है। अब, पॉल लिखता है, “हमारा तम्बू खराब (टूटा हुआ) हो गया है, और वर्षा होने पर टपकता है। 
उनके तम्बू की संरचनात्मक कमजोरियों के बारे में मेरे मित्र के शब्द हमें हमारे मानव अस्तित्व की कमजोरियों के बारे में प्रेरित पौलुस के शब्दों की याद दिलाते हैं। “बाहरी तौर पर हम नाश हो रहे हैं . . . जब तक हम इस तम्बू में हैं, हम कराहते और बोझ से दबे रहते हैं" (2 कुरिन्थियों 4:16; 5:4)। 
यद्यपि हमारे नाजुक मानव अस्तित्व के बारे में जागरूकता अपेक्षाकृत प्रारंभिक जीवन में होती है, लेकीन हमारी उम्र बढ़ने के साथ इसके बारे में अधिक जागरूक हो जाते हैं। दरअसल, हमारा समय चोरी हो जाता है। युवावस्था की जीवन शक्ति उम्र बढ़ने की वास्तविकता के सामने आत्मसमर्पण करती है (सभोपदेशक 12:1-7 देखें)। हमारा शरीर- हमारा तंबू-थक जाता हैं। 
लेकिन थके हुए तंबू को थके हुए भरोसे के बराबर नहीं होना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ आशा और दिल को फीका नहीं पड़ना चाहिए। "इस कारण हम हियाव नहीं छोड़ते," प्रेरित कहते हैं (2 कुरिन्थियों 4:16)। जिस ने हमारी देह बनाई है उसी ने अपने आत्मा के द्वारा वहां वास किया है। और जब यह शरीर अब हमारी सेवा नहीं कर सकता है, तो हमारे पास एक ऐसा निवास होगा जो टूटने और दर्द के अधीन नहीं होगा - हमें "परमेश्वर की ओर से एक भवन, स्वर्ग में एक अनन्त घर" मिलेगा (5:1)। 

यीशु की ओर दौड़ना

 
पेरिस की यात्रा के दौरान, बेन और उसके दोस्तों ने खुद को शहर के प्रसिद्ध संग्रहालयों में से एक में पाया। हालांकि बेन कला का छात्र नहीं था, फिर भी जब उसने यूजीन बर्नांड द्वारा एक चित्रकारी द डिसाइपल पीटर एंड जॉन रंनिंग टू द सेपलकर(The Disciples Peter and John Running to the Sepulcher) को देखा तो वह विस्मय में था। बिना कुछ कहे, पतरस और यूहन्ना के चेहरे और उनके हाथों की स्थिति बहुत कुछ कहती है, दर्शकों को उनकी जगह पर खुद को रखने और अपनी उत्तेजक भावनाओं को साझा करने के लिए आमंत्रित करती है। 
 
यूहन्ना 20:1-10, के आधार पर, पेंटिंग यीशु की खाली कब्र की दिशा में दौड़ते हुए दोनों चेलों को चित्रित करती है (पद. 4)। यह अति उत्कृष्ट कृति भावनात्मक रूप से संघर्ष कर रहे दो चेलों की गहनता को दिखाती है। यद्यपि उस समय उनका विश्वास पूरी तरह से निर्मित  नहीं था, पर वे सही दिशा में दौड़ रहे थे, और अंततः पुनरुत्थित यीशु ने स्वयं को उनके सामने प्रकट किया (पद. 19-29)। उनकी खोज सदियों से यीशु के खोजकर्ताओं से कुछ अलग नहीं थी। हालाँकि हम एक खाली कब्र या  एक शानदार कला के अनुभवों से दूर हो सकते हैं, पर हम सुसमाचार को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। पवित्रशास्त्र हमें आशा और खोज करने और यीशु और उसके प्रेम की दिशा में चलने के लिए विवश करता है—यहाँ तक कि संदेहों, प्रश्नों और अनिश्चितताओं के साथ भी। कल,  जब हम हम ईस्टर मनाते हैं,  हम  परमेश्वर की विश्वसनीयता को याद करते हैं : “तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे” (यिर्मयाह 29:13)।