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Articles by आर्थर जैक्सन

एक वर्ष में सम्पूर्ण बाइबल

नशीली दवाओं के साथ संघर्ष और यौन पाप से जूझ रहा रंजन हताश था । जिन रिश्तों को वह महत्व देता था, उनमें गड़बड़ी हो गयी थीं, और उसका विवेक उस पर प्रहार कर रहा था । अपने दुख में, उसने एक चर्च में खुद को अनापेक्षित महसूस किया जो पास्टर से बात करना चाह रहा था l वहाँ उसे अपनी जटिल कहानी साझा करने और परमेश्वर की दया और क्षमा के बारे में सुनने से राहत मिली ।

माना जाता है कि भजन 32 की रचना दाऊद ने अपने यौन पाप के बाद की है । उसने एक पापी रणनीति को अपनाते हुए गलत काम किया, जिसके परिणामस्वरूप उस स्त्री के पति की मृत्यु हुई (देखें 2 शमूएल 11: 12) । जबकि ये बदसूरत घटनाएं उसके पीछे थीं, उसके कृत्यों का प्रभाव बना रहा । भजन 32:3-4 में उसके कर्मों की कुरूपता को स्वीकार करने से पहले उसके द्वारा किए गए गंभीर संघर्षों का वर्णन है; अपुष्ट पाप के कुतरने वाले प्रभाव निर्विवाद थे । राहत किससे मिली? राहत परमेश्वर को स्वीकार करने और उसके द्वारा प्रस्तावित क्षमा स्वीकार करने से शुरू हुआ (पद.5) ।

आरम्भ करने का कितना महान स्थान – परमेश्वर की दया का स्थान – जब हम ऐसा काम करते हैं जिससे खुद को और दूसरों को चोट और हानि पहुँचती है । हमारे पाप के अपराध बोध  के स्थायी होने की आवश्यकता नहीं है । जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और उसकी क्षमा चाहते हैं, तो उसकी बाहें खुली होती हैं । हम उन लोगों के साथ गीत में शामिल हो सकते हैं जो गाते हैं, “क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और उसका पाप ढाँपा गया हो” (पद.1) l

लकड़ी, ईंट, और परमेश्वर

अपने जीवन के अगले चरण में ईश्वर उन्हें क्या करने के लिए बुला रहा था, इस बारे में प्रार्थना करने के बाद, मार्क और नीना ने निर्धारित किया कि उन्हें नगर के बीच के शहरी इलाके में रहने जाना होगा । उन्होंने एक खाली घर खरीदा और नवीकरण अच्छी तरह से चल रहा था - फिर तूफान आया । मार्क ने मुझे एक संदेश भेजा : “आज सुबह हमें आश्चर्य हुआ । हमारे शहर से होकर आए तूफान ने हमारे नवीनीकरण को नष्ट कर दिया – कुछ नहीं बचा l परमेश्वर कुछ करने वाला है l”

अनियंत्रित तूफान ही एकमात्र ऐसी चीज नहीं है जो हमें हैरान करती है और हमारे जीवन में घबराहट पैदा करती है । दुर्भाग्य के बीच परमेश्वर से दृष्टि नहीं हटाना, हालांकि, जीवित रहने की एक कुंजी है ।

अय्यूब के जीवन में मौसम की तबाही, जिसका परिणाम उसकी संपत्ति का नुकसान और उसके बच्चों की मृत्यु थी (अय्यूब 1:19), जो एक चौंकाने वाला आश्चर्य था जिसका उसे सामना  करना पड़ा । उससे पहले, तीन संदेशवाहक बुरी खबर लेकर आए थे (पद.13-17) ।

किसी भी दिन, हम दावत देने से लेकर शोक मनाने तक, जीवन का जश्न मनाने से लेकर मौत को पार करने तक, या जीवन की किसी और चुनौती की ओर बढ़ सकते हैं । हमारे जीवन शीघ्र ही “लकड़ी-ईंट/मलबे” में बदल सकते हैं - आर्थिक रूप से, सम्बन्धात्मक रूप से, शारीरिक रूप से, भावनात्मक रूप से, आध्यात्मिक रूप से । लेकिन परमेश्वर किसी भी तूफान से अधिक शक्तिशाली है । जीवन की आजमाइशों से बचने के लिए विश्वास की आवश्यकता होती है, जो उस पर केंद्रित है – विश्वास जो हमें अय्यूब और अन्य लोगों के साथ कहने में सक्षम बनाता है, “यहोवा का नाम धन्य है” (पद.21) ।

नफरत से मजबूत

अपनी माँ शारोंडा की दुखद मृत्यु के चौबीस घंटे के भीतर, क्रिस ने खुद को इन शक्तिशाली, अनुग्रह से भरे शब्दों का उच्चारण करते हुए पाया : "प्यार नफरत से ज्यादा मजबूत है ।" उसकी माँ, आठ अन्य लोगों के साथ, अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना के चार्ल्सटन में बुधवार रात बाइबिल अध्ययन के समय मारी गयी थी । ऐसा क्या था जिसने इस किशोर के जीवन को इतना आकार दिया कि ये शब्द उसके होठों और उसके दिल से बह सके? क्रिस यीशु में एक विश्वासी है जिसकी माँ ने "हर किसी से पूरे दिल से प्यार किया था l”

लूका 23:26-49 में हमें सामने वाली पंक्ति से एक मृत्यु देने का दृश्य मिलता है जिसमें दो अपराधी और निर्दोष यीशु (पद.32) शामिल थे । तीनों को क्रूस पर चढ़ाया गया (पद.33) l  क्रूस पर टंगे हुओं से हांफने और आहें भरने और संभावित कराहों के बीच, यीशु के निम्नलिखित शब्दों को सुना जा सकता था : “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34) l धर्मगुरुओं की घृणा से भरी पहल का नतीजा प्रेम के हिमायती को क्रूसित किया जाना था l यद्यपि वेदना में, यीशु का प्यार विजयी होता गया l

आप या आप जिसे प्यार करते हैं, किस तरह नफरत, बुरी इच्छा, कड़वाहट या कुरूपता का निशाना बने हैं? काश आपकी पीड़ा आपकी प्रार्थनाओं को प्रेरित करे, और यीशु का उदाहरण और क्रिस जैसे लोग आपको नफरत पर प्यार का चयन करने के लिए आत्मा की शक्ति से प्रोत्साहित करें ।

वादा निभाने वाला

लीना से किए गए वादों की गंभीरता से घबराया हुआ, जॉन ने अपनी शादी की कसमों को दोहराते हुए खुद को लड़खड़ाते हुए पाया । उसने सोचा, विश्वास किये बिना कि वादों को पूरा करना संभव है मैं ये वादे कैसे कर सकता हूं? उसने विवाह समारोह को पूरा किया, लेकिन उसकी प्रतिबद्धताओं का वजन बना रहा । स्वागत समारोह(reception) के बाद, जॉन अपनी पत्नी को चैपल/चर्च में ले गया, जहाँ उसने प्रार्थना की - दो घंटे से अधिक समय तक - कि परमेश्वर उसे लीना को प्यार करने और उसकी देखभाल करने के उसके वादे को निभाने में मदद करेगा ।

जॉन की शादी के दिन का खौफ उसके मानवीय भंगुरता की मान्यता पर आधारित थी । लेकिन परमेश्वर, की ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसने अब्राहम की संतानों (गलतियों 3:16) के माध्यम से राष्ट्रों को आशीष देने का वादा किया था l

अपने यहूदी मसीही पाठकों को दृढ़ता और धैर्य से यीशु में अपने विश्वास में बने रहने के लिए चुनौती देने के लिए, इब्रानियों के लेखक ने अब्राहम को दी गयी परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ याद दिलायी, कुलपिता की धीरज से प्रतीक्षा और उन वादों की पूर्णता जो की गयी थी (इब्रानियों 6:13-15) l अब्राहम और सारा की वरिष्ठ नागरिकों के रूप में स्थिति, अब्राहम को "कई संतान" (पद.14) देने के परमेश्वर के वादे को पूरा करने में कोई बाधा नहीं थी ।

क्या कमजोर, निर्बल और मानवीय होने के बावजूद आप परमेश्वर पर भरोसा करने की चुनौती महसूस करते हैं? क्या आप अपनी वचनबद्धताओं, अपने संकल्पों और वादों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं? 2 कुरिन्थियों 12: 9 में, परमेश्‍वर हमारी मदद करने का वादा करता है : “मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है l” छत्तीस से अधिक वर्षों तक परमेश्वर ने जॉन और लीना को अपने वादों के प्रति समर्पित रहने में मदद की है । उसकी मदद प्राप्त करने के लिए उस पर भरोसा क्यों नहीं?

साहसपूर्वक बोलिए!

बानू ने रेस्तरां में अपने सहकर्मी से कहा, “वह आदमी है! वह आदमी है!” वह मेल्विन का जिक्र कर रही थी, जिसने भिन्न परिस्थितियों में पहली बार उसका सामना किया l जब वह अपने चर्च के लॉन में काम कर रहा था, तब आत्मा ने उसे एक स्त्री के साथ बातचीत शुरू करने के लिए कहा, जो एक वेश्या जान पड़ती थी l चर्च में आमंत्रित करने पर उसका जवाब था : “क्या तुम जानते हो कि मैं क्या करती हूँ? वे मुझे वहां पसंद नहीं करेंगे l” जब मेल्विन ने उसे यीशु के प्यार के बारे में बताया और उसकी सामर्थ्य के विषय उसे आश्वस्त किया जो उसकी जिंदगी बदल सकती थी, उसके चेहरे पर आंसू बह निकले l अब, कुछ हफ्ते बाद, बानू एक नए वातावरण में काम कर रही थी, जो जीवन को बदलने के लिए यीशु की सामर्थ्य का जीवित प्रमाण था l

विश्वासियों को प्रार्थना के लिए समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित करने के संदर्भ में, प्रेरित पौलुस ने एक दुहरा अनुरोध किया : “हमारे लिए भी प्रार्थना करते रहो कि परमेश्वर हमारे लिए वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिसके कारण मैं कैद में हूँ, और उसे ऐसा प्रगट करूँ, जैसा मुझे करना उचित है” (कुलुस्सियों 4:3-4) l

क्या आपने यीशु के लिए साहसपूर्वक और स्पष्ट रूप से बोलने के अवसरों के लिए प्रार्थना की है? कितनी सटीक प्रार्थना है! ऐसी प्रार्थनाएँ मेल्विन की तरह उनके अनुयायियों को अनापेक्षित स्थानों और अनापेक्षित लोगों से उसके विषय बात करने में मार्गदर्शन कर सकती हैं l यीशु के लिए बोलना असहज लग सकता है, लेकिन पुरस्कार - परिवर्तित जीवन - हमारी असुविधाओं की भरपाई कर सकते हैं l

केवल भरोसा

तीन सौ बच्चों को कपड़े पहनाए गए और नाश्ते के लिए बैठाया गया और नाश्ता के लिए धन्यवाद की प्रार्थना की गई l लेकिन भोजन नहीं था! अनाथालय के निदेशक और मिशनरी जॉर्ज म्युलर (1805-1898) के लिए इस तरह की स्थिति असामान्य नहीं थी l यहाँ यह देखने का एक और अवसर था कि परमेश्वर कैसे प्रदान करेगा l म्युलर की प्रार्थना के कुछ ही मिनटों बाद,  एक डबल रोटी बनाने वाला(baker) जो पिछली रात को सो न सका था दरवाजे पर दिखाई दिया l यह देखते हुए कि अनाथालय रोटी का उपयोग कर सकता है,  उसने डबल रोटी के तीन खेप बनाए थे l थोड़ी ही देर में,  शहर का दूधवाला(town milkman) दिखाई दिया l अनाथालय के सामने उसकी गाड़ी खराब हो गई थी l दूध को खराब होने से बचाने के लिए,  उसने इसे म्युलर को दे दिया l

चिंता, धबराहट, और आत्म-तरस के समयों का अनुभव करना स्वाभाविक है जब हमारे सुख/स्वास्थ्य के लिए आवश्यक संसाधनों - भोजन,  आश्रय,  स्वास्थ्य,  वित्त/पैसा,  मित्रता - की कमी होती है l 1 राजा 17:8-16 हमें याद दिलाता है कि एक ज़रुरात्मन्द विधवा के अनापेक्षित श्रोतों द्वारा परमेश्वर की मदद पहुँच सकती है l  “मेरे पास एक भी रोटी नहीं है केवल घड़े में मुट्ठी भर मैदा और कुप्पी में थोड़ा सा तेल है” (पद.12) l इससे पहले एक कौवा था जिसने एलिय्याह के लिए प्रबंध किया था (पद.4-6) l हमारी जरूरतों को पूरा करने की चिंता हमें कई दिशाओं में ढूँढने के लिए भेज सकती है l प्रबंध करनेवाले के रूप में परमेश्वर की स्पष्ट दृष्टि जिसने हमारी जरूरतों को पूरा करने का वादा किया है मुक्तिदायक हो सकता है l इससे पहले कि हम समाधान की तलाश करें,  क्या हम पहले उसकी तलाश करने में सावधान हो सकते हैं l ऐसा करने से हमारा समय,  ऊर्जा और निराशा बच सकती है l

हितकर सुधार

गर्मी का शुरूआती मौसम तरोताजगी वाला था, और यात्रा में मेरी पत्नी से बेहतर सहयोगी और कोई नहीं हो सकता था l लेकिन उन क्षणों की मनोहरता जल्द ही त्रासदी में बदल सकती थी यदि वह लाल और सफ़ेद चेतवानी संकेत नहीं होता जिसने मुझे सूचित किया कि मैं गलत दिशा में आगे बढ़ रहा था l क्योंकि मैंने अपनी गाड़ी पूरी रीति से मोड़ी नही थी, मैंने तुरंत “प्रवेश निषेध” का संकेत देखा जो मानों मुझे घूर रहा था l मैंने जल्दी से सुनियोजित कर लिया, परन्तु हानि के विषय सोच कर डरता हूँ जो मेरे कारण मेरी पत्नी की, मुझे, और दूसरों को होती यदि मैं उस संकेत को नज़रंदाज़ कर देता जिसने मुझे याद दिलाया कि मैं गलत मार्ग पर जा रहा था l

याकूब के समापन शब्द सुधार के महत्व पर जोर देते हैं l हममें से किसको हमारी चिंता करने वाले उन लोगों के द्वारा हमें उन पथों या कार्यों से, उन निर्णयों या इच्छाओं से “फेर लाने” की ज़रूरत नहीं पड़ी होगी जो हमें हानि पहुंचा सकती थीं? कौन जानता है कि खुद को या मित्रों को क्या नुक्सान हो सकता था, यदि किसी ने सही समय पर हिम्मत नहीं की होती l

याकूब इन शब्दों के साथ हितकर सुधार के मूल्य पर जोर देता हैं “जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्यु से बचाएगा” (5:20) l सुधार ईश्वर की दया की अभिव्यक्ति है l दूसरों के कल्याण के लिए हमारा प्यार और चिंता हमें उन तरीकों से बात करने और कार्य करने के लिए मजबूर करे जो वह “उस (व्यक्ति) को फेर [लाने]” (पद.19) में उपयोग कर सकता है l

उसके दाग़

गौरव के साथ मेरी बातचीत के बाद, मैं सोचने लगा कि क्यों उसका पसंदीदा अभिवादन “मुट्ठी टकराना” था और हाथ मिलाना नहीं l हाथ मिलाने से उसकी कलाई पर लगे दाग़ दिखाई देने लगेंगे – जो उसके खुद को नुक्सान पहुंचाने की कोशिशों का नतीजा है l हमारे लिए अपने घावों को छिपाना असामान्य नहीं है – बाहरी या भीतरी – दूसरों के कारण या आत्म-प्रेरित l

गौरव के साथ मेरी बातचीत के मद्देनज़र, मैंने यीशु के शारीरिक दागों के बारे में सोचा, उसके हाथों और पैरों में ठोंकी गयी किलों के घाव और उसके पंजर में भला बेधा गया l अपने दाग़ छुपाने के बजाय, मसीह ने उनकी ओर ध्यान आकर्षित किया l

थोमा के पहले शक करने पर कि यीशु मृतकों में से जी उठा है, उसने उससे कहा, “अपनी ऊंगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल, और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो” (यूहन्ना 20:27) l जब थोमा ने अपने लिए उन निशानों को देखा और मसीह के अद्भुत शब्दों को सुना, तो उसे यकीन हो गया कि यह यीशु है l उसने विश्वास में कहा, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!” (पद.28) l यीशु ने तब उन लोगों के लिए एक विशेष आशीष उच्चारित किया, जिन्होंने उसे या उसके शारीरिक घावों को नहीं देखा था, लेकिन अभी भी उस पर विशवस करते है : “धन्य हैं वे जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया” (पद.29) l

ऋण मिटाने वाला

स्तब्ध सिर्फ एक शब्द है जो एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में 2019 के स्नातक समारोह में भीड़ की प्रतिक्रिया का वर्णन करता है l अमरीकी दीक्षान्त समारोह वक्ता ने घोषणा की कि वह और उसका परिवार पूरे स्नातक वर्ग के विद्यार्थी ऋण को मिटाने के लिए लाखों डॉलर का दान करेंगे l एक विद्यार्थी जिसके ऊपर - $100,000 (72 लाख रुपये) का ऋण था – अभिभूत स्नातकों में से था, जिन्होंने आँसू और प्रशंसा ध्वनि के साथ अपनी खुशियाँ व्यक्त कीं l

हम में से अधिकाँश ने किसी न किसी रूप में ऋणग्रस्तता(indebtedness) का अनुभव किया है – घरों, वाहनों, शिक्षा, चिकित्सा खर्चों या अन्य चीजों के भुगतान के लिए l लेकिन हमें “भुगतान”! (“PAID!”) का मुहर लगने वाले बिल की आश्चर्यजनक राहत भी अनुभव करने को मिली है l

यीशु को “विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहिलौठा और पृथ्वी के राजाओं का हाकिम” घोषित करने के बाद, यूहन्ना ने अपने ऋण-उन्मूलन कार्य को भक्ति के साथ स्वीकार किया : “वह हम से प्रेम रखता है, और उसने अपने लहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है” (प्रकाशितवाक्य 1:5) l यह कथन सरल है लेकिन इसका अर्थ गहरा है l यह मोरहाउस(Morehouse) स्नातक कक्षा द्वारा सुनी गई अच्छी खबर की घोषणा के आश्चर्य से बेहतर है कि यीशु की मृत्यु (क्रूस पर उसका खून बहाना) हमें उस दंड से मुक्त करती है जो हमारे पापी व्यवहार, इच्छाओं और कर्मों के लायक है l इसलिए कि वह ऋण चुका दिया गया है, जो यीशु पर विश्वास करते हैं, उन्हें माफ़ कर दिया जाता है और वे परमेश्वर के राज्य परिवार का हिस्सा बन जाते हैं (पद.6) यह खुशखबरी समस्त ख़बरों से सर्वोत्तम खबर है!