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Articles by आर्थर जैक्सन

धूल-धूसरित अहसास करना

जब रवि ने हमारी साप्ताहिक सेवा समूह मुलाकात में बताया कि वह “धूल-धूसरित” महसूस कर रहा था, तो मैं जान लिया कि यह उम्रवृद्धि और ख़राब स्वास्थ्य से जुड़ी भौतिक चुनौतियों का सन्दर्भ देने का उसका तरीका था l रवि और उसकी पत्नी के लिए, दोनों जो साठ के उत्तरार्ध में हैं, 2020 में डॉक्टरों से मुलाकात, सर्जिकल प्रक्रियाएँ, और घर को अस्पताल के कमरे के रूप में बदलना जिससे घर पर ही इलाज मिल सके शामिल था l वे दोनों जीवन के प्रमुख पड़ाव की दूसरी ओर थे और उसका आभास कर रहे थे l 

शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक, और आध्यात्मिक रूप से─अपर्याप्तता, अधूरापन, और कमजोरी का एहसास करने से पहले किसी को भी लम्बे समय तक जीने की ज़रूरत नहीं है l परमेश्वर अपने पुत्र यीशु के व्यक्तित्व में, हमारी पापमय दुनिया में प्रवेश किया और मानवीय अस्तित्व के दायित्वों का एहसास करनेवालों की देखभाल करता है (भजन 103:13) l आगे दाऊद लिखता है, “वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी(धूल) है” (पद.14) l शब्द मिट्टी(धूल) हमें वापस उत्पत्ति में ले जाती है : “तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी(धूल)  से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया” (2:7) l 

क्या आप इन दिनों धूसरित(dusty) महसूस कर रहे हैं? सांसारिक जीवन की वास्तविकताओं में आपका स्वागत है। हालाँकि, याद रखें, जब हम सबसे अधिक कमज़ोर महसूस करते हैं, हम अकेले नहीं छोड़े गए हैं l हमारा करुणामय परमेश्वर “जानता” और “याद” रखता है। वह आप और मुझ जैसे पृथ्वी के लोगों को क्षमा देने के लिए अपने पुत्र को भेजकर अपना प्रेम प्रदर्शित किया l जीवन हमारे सामने कुछ भी लेकर आए, हम उस पर भरोसा रखें l

सुरक्षित हाथ

रस्सी के टूटने की तरह,  डॉग मर्की के जीवन के धागे एक-एक कर टूट रहे थे। “मेरी माँ ने कैंसर से अपनी लंबी लड़ाई हार गयी थी; एक लम्बे समय का प्रेम प्रसंगयुक्त संबंध विफल हो रहा था; मेरी आमदनी समाप्त हो रही थी ; मेरा व्यवसाय धुंधला रहा था . . . l मेरे आसपास और मेरे भीतर भावनात्मक और आत्मिक अंधकार गहरा और दुर्बल करने वाला और गहन प्रतीत होता है , ”पादरी और मूर्तिकार ने लिखा। ये सामूहिक घटनाएं, एक तंग अटारी में रहने के साथ मिलकर, वह जगह बन गईं जहां से उनकी मूर्तिकला द हाइडिंग प्लेस उभरी। यह मसीह के बलवन्त, कीलो से ज़ख्मी खुले हुए हाथों को एक सुरक्षित जगह के रूप में दर्शाती है।

डौग ने अपनी कलाकृति की बनावट को इस प्रकार से समझाया: "मूर्तिकला मसीह का निमंत्रण है उसमें छिपने के लिए" भजन संहिता ३२ में, दाऊद ने उस व्यक्ति के रूप में लिखा जिसने परम सुरक्षित स्थान—स्वयं परमेश्वर को पाया था। वह हमें हमारे पापों से क्षमा प्रदान करता है (पद १-५) और हमें कोलाहल के बीच प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करता है (पद ६)। पद ७ में, भजनकार परमेश्वर पर अपने भरोसे की घोषणा करता है: “तू मेरे छिपने का स्थान है; तू विपत्ति से मेरी रक्षा करेगा, और मुझे छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।”

जब संकट आता है, तो आप कहाँ मुड़ते हैं? यह जानना कितना भला है कि जब हमारे सांसारिक अस्तित्व की नाजुक डोरियाँ खुलने लगती हैं, तो हम उस परमेश्वर की ओर दौड़ सकते हैं जिसने यीशु के क्षमाशील कार्य के द्वारा से अनन्त सुरक्षा प्रदान की है।

सामयिक संकल्प

साइमन और जेफ्री के बीच अनसुलझी चोट वर्षों से बनी हुई थी, और साइमन के रिश्ते को फिर से ठीक करने के प्रयासों का विरोध किया गया था। जेफ्री की मां की मृत्यु की खबर सुनकर, साइमन ने केन्या में उनकी अंतिम संस्कार सेवा में शामिल होने के लिए "भीतरी क्षेत्र” की यात्रा की। साइमन ने उनकी मुलाकात पर विचार किया : "मुझे इस बारे में बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सब कुछ कैसा होगा, [लेकिन] सर्विस/धर्मक्रिया के बाद, हम खुल गए और एक उपयोगी बातचीत हुई। हम गले मिले, उस पल को साझा किया, एक साथ प्रार्थना की और फिर से मिलने की योजना बनाई। ”यदि साइमन और जेफ्री पहले ही सुलह करने में सक्षम होते, तो जारी इतने दर्द से बचा जा सकता था।

मत्ती 5:21-26 में यीशु के शब्द न सुलझे संबंध तनावों को दृष्टिकोण में रखने में मदद करते हैं। क्रोध जो ऐसी दरारों को जन्म दे सकता है वह एक गंभीर मामला है (पद 22)। इसके अलावा, चीजों को संबंधित रूप से व्यवस्थित करना परमेश्वर की आराधना करने के लिए एक उपयुक्त प्रस्तावना है (पद 23-24)। यीशु के बुद्धिमान शब्द "अपने मुद्दई से झटपट मेल मिलाप” कर लेना (पद 25) हमें याद दिलाते हैं कि जितनी जल्दी हम मेल-मिलाप की दिशा में काम करते हैं, उतना ही सभी के लिए बेहतर होगा।

रिश्ते जोखिम भरे होते हैं; वे काम की मांग करते हैं—─हमारे परिवारों में, कार्यस्थल में, शैक्षिण व्यवस्थाओं में, और उन लोगों के बीच जो मसीह में हमारे विश्वास को साझा करते हैं। लेकिन उन लोगों के रूप में जो उसका, "शांति का राजकुमार" का प्रतिनिधित्व करते हैं, (यशायाह 9:6), हम उन लोगों के लिए अपने दिल और हाथ बढ़ाने के लिए अधिक प्रयास करते हैं जिनके साथ हमारा अनसुलझा संघर्ष है।

दृढ़ विश्वास

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रेम प्रधाम (1924-1998) के विमान को मार गिराए जाने के बाद,  सुरक्षा के लिए पैराशूट से उतरते समय वह घायल हो गया । परिणामस्वरूप, वह जीवन भर लंगड़ाकर चला । उसने एक बार ध्यान दिया, “मैं लंगड़ा हूँ । क्या यह परमेश्वर के लिए विचित्र नहीं कि उसने [मुझे] हिमालय के पहाड़ों में सुसमाचार प्रचार करने के लिए बुलाया?” और उसने नेपाल में ज़रूर प्रचार किया──लेकिन बिना विरोध के नहीं जिसमें “मौत की काल कोठरी” में कैद शामिल था जहाँ कैदी कठोर स्थितियों का सामना करते थे । पंद्रह वर्षों के अंतराल में, प्रेम चौदह अलग-अलग जेलों में दस साल बिताए । उसकी दृढ़ गवाही, हालाँकि, मसीह के लिए बदले जीवन के रूप में फल उत्पन्न किये जिसमें सुरक्षाकर्मी और कैदी सम्मिलित थे जिन्होंने यीशु के सन्देश को अपने लोगों तक पहुँचाए । 

प्रेरित पतरस को यीशु में अपने विश्वास के कारण और परमेश्वर द्वारा एक “दुर्बल मनुष्य के साथ जो भलाई की गयी” (प्रेरितों 4:9) में उपयोग किये जाने के कारण विरोध सहना पड़ा । लेकिन उसने उस सुअवसर का उपयोग मसीह के लिए दृढ़ता से बोलने के लिए किया (पद.8-13) । 

आज, पतरस की तरह, हम भी विरोध का सामना कर सकते हैं (पद.10-11), फिर भी हमारे पास परिजन, सहयोगी, साथी विद्यार्थी, और दूसरे हैं जिनको हम जानते हैं जिन्हें उस व्यक्ति के विषय जानना अविलम्ब ज़रूरी है जिसमें “उद्धार [मिलता है] (पद.12), जो हमारे पापों की कीमत के रूप में मृत्यु सही और क्षमा देने की उसकी सामर्थ्य के साबुत  के रूप में मृतकों में से जी उठा (पद.10) । वे सुनेंगे जब हम प्रार्थनापूर्वक और दृढ़ता से उद्धार के सुसमाचार की घोषणा करते हैं जो यीशु में पाया जाता है । 

यीशु लेबिल(Jesus ।abel)

“बेटा, मेरे पास तुम्हें देने के लिए बहुत कुछ नहीं है । लेकिन मेरे पास एक अच्छा नाम है, इसलिए इसे नहीं बिगाड़ना ।” ये बुद्धिमान वजनी शब्द जेरोम के पिता ने कहे जब वह कॉलेज के लिए रवाना हुआ । जेरोम ने अपने पिता को उद्धृत किया जब उसने एक व्यवसायी एथलिट के रूप में मंच पर पुरस्कार प्राप्त किये । ये मूल्यवान शब्द जो जेरोम ने अपने सम्पूर्ण जीवन के दौरान अपने साथ ले कर चला इतने प्रभावशाली रहे हैं कि उसने अपने पुत्र से समान शब्द बोलते हुए अपना दिलचस्प भाषण समाप्त किया । “बेटा, मेरे पास अधिक कुछ नहीं है जो मैं तुम्हें दे सकता हूँ जो हमारे भले नाम से अधिक महत्वपूर्ण है ।”

एक अच्छा नाम यीशु में विश्वासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । कुलुस्सियों 3:12-17 में पौलुस के शब्द हमें उसके विषय याद दिलाते हैं जिसके हम प्रतिनिधि हैं (पद.17) । चरित्र एक वस्त्र की तरह है जो हम धारण करते हैं; और यह परिच्छेद “यीशु लेबिल(Jesus ।abe।)” के वस्त्र का प्रदर्शन(disp।ay) करता है । “इसलिए परमेश्वर के चुने हुओं के समान . . . बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो . . . एक दूसरे की सह लो और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो . . . इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबंध है बाँध लो” (पद.12-14) । यह केवल “रविवारीय वस्त्र” नहीं है । इन्हें हमें हर जगह, सब समय, पहनना है, जब परमेश्वर उसे प्रतिबिंबित करने के लिए हममें काम करता है । जब हमारे जीवन इन गुणों से चरितार्थ होते हैं, हम दर्शाते हैं कि हम उसका नाम धारण किये हुए हैं । 

जब वह हमारी ज़रूरतें पूरी करता है हम प्रार्थनापूर्वक और सावधानी से उसका प्रतिनिधित्व करें । 

पवित्रशास्त्र का अध्ययन करना

जे. आई. पैकर (1926-2020), ने अपने उत्कृष्ट पुस्तक नोईंग गॉड(Knowing God) में, मसीह में चार प्रसिद्ध विश्वासियों के विषय बताया, जिन्हें उन्होंने “बाइबल के लिए उदबिलाव (beavers for the Bible)” संबोधित किया l “सभी प्रशिक्षित विद्वान नहीं थे, लेकिन जैसे एक उदबिलाव एक पेड़ को कुतर कर उसमें घुस जाता है, वैसे ही हर एक पवित्रशास्त्र को खा कर परमेश्वर को जानने के लिए बड़ी सावधानी बरतते थे l पैकर ने आगे ध्यान दिया कि बाइबल अध्ययन के द्वारा परमेश्वर को जानना केवल विद्वानों के लिए नहीं है l “एक साधारण बाइबल पढ़ने वाला और उपदेश सुनने वाला जो पवित्र आत्मा से भरा हुआ है एक अधिक दक्ष विद्वान जो धर्मवैज्ञानिक रूप से सही होने से संतुष्ट है की तुलना में अपने परमेश्वर और उद्धारकर्ता के साथ  कहीं अधिक गहरा जान-पहचान बना लेगा l 

दुर्भाग्यवश, बाइबल का अध्ययन करनेवाले सभी लोग विनम्र दिलों के साथ उद्धारकर्ता को बेहतर तरीके से जानने और उसके समान बनने के लक्ष्य के साथ ऐसा नहीं करते हैं l यीशु के काल  में पुराने नियम के ग्रंथों को पढ़ने वाले लोग थे, फिर भी पवित्रशास्त्र जिस एक व्यक्ति के बारे में कहता था उससे वे चूक गए l “तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनंत जीवन तुम्हें मिलाता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिए मेरे पास आना नहीं चाहते” (यूहन्ना 5:39-40) l 

क्या आप कभी-कभी बाइबल पढ़ते हुए खुद को ठगा हुआ पाते हैं? या क्या आपने शास्त्रों का पूरी तरह से अध्ययन करना छोड़ दिया है? बाइबल के “उदबिलाव” बाइबल पाठकों से अधिक हैं l वे प्रार्थना और ध्यान से पवित्रशास्त्र को उन तरीकों से पढ़ते हैं जो यीशु को देखने और उससे प्यार करने के लिए उनकी आँखें और दिल खोलते हैं──जो इसमें प्रकट हुआ है l  

खाली हाथ

रितेश शर्मिंदा हुआ जब वह दोपहर के भोजन के लिए आया और उसे एहसास  हुआ कि वह अपना बटुआ भूल आया था l यह उसे इस बिंदु तक परेशान किया कि उसने विचार किया कि वह बिलकुल ही भोजन नहीं करेगा अथवा केवल कुछ पीने के लिए ले लेगा l अपने मित्र से कुछ निश्चयक मिलने पर, उसने अपना प्रतिरोध शांत किया l वह और उसका मित्र भोजन का आनंद लिए, और उसके मित्र ने ख़ुशी से बिल का भुगतान किया l 

शायद हम इस दुविधा या किसी अन्य स्थिति से पहचान बना सकते हैं जो आपको प्रापक बना देता है l अपना भुगतान करना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसे अवसर आते हैं जब हमें उदारता से जो दिया जाता है उसे हम नम्रतापूर्वक स्वीकार कर लें l 

लूका 15:17-24 में किसी तरह का भुगतान हो सकता है जो छोटे बेटे के मन में था जो वह सोच रहा था कि वह अपने पिता से कहेगा l “अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर के समान रख ले” (पद.19) l “मजदूर?” उसके पिता के पास ऐसा कुछ नहीं होता! उसके पिता की दृष्टि में, वह एक बहुत ही प्यारा बेटा था जो घर लौटा था l उसी रूप में उसका सामना उसके पिता के आलिंगन और स्नेही चुम्बन से हुआ (पद.20) l सुसमाचार का कितना शानदार तस्वीर! यह हमें याद दिलाता है कि यीशु की मृत्यु द्वारा उसने प्रेमी पिता को प्रगट किया जो खाली-हाथ लेकर आये अपने बच्चों’ का स्वागत खुली बाहों से करता है l एक गीत के लेखक ने इसे इस प्रकार वर्णन किया : “छूछे हाथ मैं आता हूँ, तेरा क्रूस मैं पकड़ा हूँ(Nothing in my hand I bring Simply to Thy cross I cling) l”

जब हमें समझ में नहीं आता

“मुझे उसकी योजना समझ में नहीं आती है l मैंने अपना पूरा जीवन उसको दे दिया l और ऐसा हो रहा है!” एक माँ को बेटे का यह सन्देश मिला जब एक पेशेवर एथलीट के रूप में सफल होने का उसका सपना अस्थायी रूप से विफल हो गया l हम में से किसके पास किसी प्रकार का अप्रत्याशित, निराशाजनक अनुभव नहीं हुआ है जो हमारे मन को विस्मयबोधक और प्रश्नों के साथ अतिश्रम में भेजता है? एक परिवार सदस्य स्पष्टीकरण के बिना बातचीत बंद कर देता है;  स्वास्थ्य लाभ उल्टा हो जाता है; एक कंपनी अप्रत्याशित रूप से स्थानांतरित हो जाती है; एक जीवन बदलने वाली दुर्घटना हो जाती है l 

अय्यूब 1-2 अय्यूब के जीवन में त्रासदियों और असफलताओं की एक श्रृंखला दर्ज करती है l  मानवीय रूप से, अगर कोई ऐसा व्यक्ति था जो मुसीबत से मुक्त जीवन के लिए योग्य था, तो वह अय्यूब था l “एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता था” (अय्यूब 1:1) l लेकिन जीवन हमेशा उस तरह से काम नहीं करता है जैसे हम चाहते हैं──यह अय्यूब के लिए नहीं था, और हमारे लिए भी नहीं है l जब उसकी पत्नी ने उसे “परमेश्वर की निंदा कर, और . . . मर [जाने]” की सलाह दी! (2:9), उसके लिए अय्यूब के शब्द हमारे लिए भी जब चीजें होती हैं──बड़ी या छोटी──विवेकी, शिक्षाप्रद और उपयुक्त हैं जो हम निश्चय ही सामना नहीं करते l “ ‘क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दुःख न लें”’ इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुँह से कोई पाप नहीं किया” (पद.10) l 

परमेश्वर की सामर्थ्य से, उस पर हमारा विश्वास और श्रद्धा तब भी बनी रह सकती है, जब हम यह नहीं समझ सकते कि जीवन के कठिन दिनों में वह कैसे काम करता है l 

भुलाया नहीं गया

“अंकल, क्या आपको वो दिन याद है जब आप मुझे नाई की दूकान और सुपरमार्केट में ले गए थे? मैं एक भूरे रंग का पैंट, एक नीली चारखानेदार स्वेटर, भूरे मोज़े, और भूरे रंग के जूते पहने था l वह दिन था गुरूवार, अक्टूबर 20, 2016 l” मेरे भांजे की स्वलीनता(autism)-सम्बंधित चुनौतियाँ उसके असाधारण स्मृति से दूर हो गई हैं जो किसी घटना के वर्षों बाद भी दिन और दिनांक और कपड़े जो वह पहना था याद रख सकता है l 

जिस तरह से उसे बनाया गया है उसके कारण, मेरे भांजे के पास इस प्रकार की स्मृति है जो मुझे सर्वज्ञानी, प्रेमी परमेश्वर──समय और अनंतता का पालक──की याद दिलाता है l वह तथ्यों को जानता है और अपने वादों या अपने लोगों को नहीं भूलेगा l क्या आपके पास ऐसे क्षण हैं जब आपने सवाल किया हो कि परमेश्वर आपको भूल गया या नहीं भूला? जब दूसरे अधिक स्वस्थ, आनंदित या अधिक सफल या अन्यथा बेहतर दिखाई देते हैं? 

प्राचीन इस्राएल की आदर्श से भी कम स्थिति ने उसके बोलने का कारण बना, “यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है” (यशायाह 49:14) l लेकिन मामला यह नहीं था l परमेश्वर की अनुकम्पा और देखभाल स्नेह के स्वाभाविक बंधन से अधिक था जो माताओं का अपने बच्चों के लिए होता है (पद.15) l “त्याग दिया है” या “भूल गया है” जैसे सूचक पत्र को अपनाने से पहले परमेश्वर ने अपने पुत्र, यीशु में और के द्वारा क्या किया है के विषय विचार करें l सुसमाचार में जो क्षमा लेकर आता है, परमेश्वर ने स्पष्ट कहा है, “मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद.15) l