विश्वास की विजय
चार साल के छोटे कैल्विन की नियमित स्वास्थ्य जांच में उसके शरीर पर कुछ अप्रत्याशित धब्बे दिखाई दिए। मुलाक़ात के दौरान, उसे कुछ टीके दिए गए, और इंजेक्शन वाली जगह को एक पट्टी से ढक दिया गया। घर पर, जब छोटे चिपकने वाले आवरण को हटाने का समय आया, तो केल्विन डर से रोने लगा। अपने बेटे को सांत्वना देने की कोशिश करते हुए, उसके पिता ने कहा, "केल्विन, तुम्हें पता है कि मैं तुम्हें चोट पहुँचाने के लिए कभी कुछ नहीं करूँगा।" उसके पिता चाहते थे कि उनका बेटा पट्टी हटने के डर से ज्यादा उन पर भरोसा करे।
असुविधा के कारण निर्बल हो जाने वालों में केवल चार साल के बच्चे अकेले नहीं हैं। सर्जरी, प्रियजनों से अलगाव, मानसिक या मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ—और भी बहुत कुछ—हमारे डर, आहें, रोने और कराहने को उत्तेजित करती हैं।
दाऊद के डर से भरे क्षणों में से एक वह था जब उसने ईर्ष्यालु राजा शाऊल से भागते समय खुद को पलिश्ती क्षेत्र में पाया। जब उसे पहचाना गया, तो वह चिंतित था कि उसके साथ क्या होगा (देखें 1 शमूएल 21:10-11): “दाऊद. . . गत के राजा आकीश से बहुत डर गया” (पद 12)। इस असहज स्थिति पर विचार करते हुए, दाऊद ने लिखा, “जिस समय मुझे डर लगेगा मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा। . . . मैं ने परमेश्वर पर भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा” (भजन संहिता संहिता 56:3-4)।
जब जीवन की असुविधाएँ हमारे डर को बढ़ा दें तो हमें क्या करना चाहिए? हम अपने स्वर्गीय पिता पर भरोसा रख सकते हैं।आर्थर जैक्सन
परमेश्वर मेरा सहायक है
मेरा मित्र रैले अपने अस्सीवें जन्मदिन की ओर तेजी से बढ़ रहा है! पैंतीस साल पहले उनसे मेरी पहली बातचीत के बाद से, वह प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। जब उन्होंने हाल ही में उल्लेख किया कि सेवानिवृत्त होने के बाद से, उन्होंने एक पुस्तक पांडुलिपि पूरी कर ली है और प्रचार कार्य की एक और पहल शुरू कर दी है - तो मुझे जिज्ञासा हुई लेकिन आश्चर्य नहीं हुआ।
पचहत्तर साल की उम्र में, बाइबल में कालेब भी रुकने को तैयार नहीं था। यहोवा के प्रति उनकी आस्था और भक्ति ने उन्हें दशकों तक जंगल में रहने और उस विरासत को सुरक्षित करने के लिए युद्धों के माध्यम से बनाए रखा था जिसका वादा परमेश्वर ने इस्राएल से किया था। उसने कहा, “जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, या भीतर बाहर आने जाने के लिये जितनी उस समय मुझ में सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है।” (यहोशू 14:11)। वह किस उपाय से विजय प्राप्त करेगा? कालेब ने घोषणा की कि “यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूँ” (पद 12)।
उम्र, जीवन की अवस्था या परिस्थिति की परवाह किए बिना, परमेश्वर उन सभी की मदद करेगा जो पूरे दिल से उस पर भरोसा करते हैं। यीशु में, हमारे उद्धारकर्ता जो हमारी मदद करते हैं, परमेश्वर को दृश्यमान बनाया गया था। सुसमाचार की पुस्तकों के द्वारा हम मसीह में जो देखते हैं उसके माध्यम से वह हमारे परमेश्वर में विश्वास को बढ़ाती हैं। उसने उन सभी के लिए परमेश्वर की देखभाल और करुणा का प्रदर्शन किया जो मदद के लिए उसकी ओर देखते थे। जैसा कि इब्रानियों के लेखक ने स्वीकार किया, “प्रभु मेरा सहायक है; मैं नहीं डरूंगा” (इब्रानियों 13:6)। युवा या बूढ़ा, कमजोर या मजबूत, बंधा हुआ या स्वतंत्र, दौड़ना या लंगड़ाकर चलना - आज हमें उसकी मदद मांगने से क्या रोक रहा है? आर्थर जैकसन
चुनाव मायने रखता है
पादरी डेमियन के कार्यक्रम में मृत्यु के करीब दो लोगों का अस्पताल दौरा शामिल था जिन्होंने दो अलग-अलग जीवन पथ चुने थे। एक अस्पताल में अपने परिवार की एक प्यारी महिला थी। उनकी निस्वार्थ सार्वजनिक सेवा ने उन्हें कई लोगों का प्रिय बना दिया था। यीशु में अन्य विश्वासी उसके चारों ओर इकट्ठे हो गए थे, और आराधना, प्रार्थना और आशा से कमरा भर गया था। एक अन्य अस्पताल में पादरी डेमियन के चर्च के एक सदस्य के रिश्तेदार की भी मृत्यु हो रही थी। उनके कठोर हृदय के कारण उनका जीवन कठिन हो गया था और उनका अस्त-व्यस्त परिवार उनके खराब निर्णयों और कुकर्मों के कारण परेशानी का जीवन जी रहा था। दोनों वातावरणों में अंतर प्रत्येक के रहने के तरीके में विरोधाभास को दर्शाता है।
जो लोग इस बात पर विचार करने में विफल रहते हैं कि वे जीवन में कहाँ जा रहे हैं, वे अक्सर स्वयं को असुविधाजनक, अवांछनीय, एकाकी स्थानों में फँसा हुआ पाते हैं। नीतिवचन 14:12 कहता है कि “ऐसा मार्ग है जो सीधा दिखाई देता है, परन्तु अन्त में मृत्यु ही पहुंचाता है।” युवा या बूढ़ा, बीमार या स्वस्थ, धनी या दरिद्र - अपने पथ का पुनर्परीक्षण करने में अभी देर नहीं हुई है। यह कहां ले जाएगा? क्या यह परमेश्वर का सम्मान करता है? क्या यह दूसरों की मदद करता है या उन्हें परेशान करता है? क्या यह यीशु में विश्वास करने वाले के लिए सबसे अच्छा मार्ग है?
चुनाव मायने रखते हैं, और स्वर्ग का परमेश्वर हमें सर्वोत्तम विकल्प चुनने में मदद करेगा जब हम उसके पुत्र, यीशु के माध्यम से उसकी ओर मुड़ेंगे, जिसने कहा, “मेरे पास आओ... और मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” (मत्ती 11:28)। आर्थर जैकसन
परमेश्वर के लिए अच्छा करना
हालाँकि वह आम तौर पर अपने साथ पैसे नहीं रखता था, लेकिन पैट्रिक को महसूस हुआ कि परमेश्वर घर से बाहर निकलने से पहले उसे जेब में पाँच डॉलर (लगभग ₹400) रखने के लिए प्रेरित कर सुने है। उसे समझ आया कि जिस स्कूल में वह काम करता था, वहाँ दोपहर के भोजन के दौरान कैसे परमेश्वर ने उसे एक बेहद ज़रुरी काम को पूरा करने के लिए तैयार किया है। लंचरूम की चहलपहल के बीच, उसने ये शब्द सुने: “स्कॉटी [एक जरूरतमंद बच्चे] को अपने खाते में 5 डॉलर डालने की जरूरत है ताकि वह सप्ताह के बाकी दिनों में दोपहर का खाना खा सके।” कल्पना कीजिए कि पैट्रिक ने स्कॉटी की मदद के लिए अपना पैसा देते समय क्या भावनाएँ अनुभव की होंगी!
तीतुस में, पौलुस ने यीशु में विश्वासियों को याद दिलाया कि वे “अपने धर्म के कामों के कारण उद्धार नहीं पाए थे” (3:5) “जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले- भले कामों मे लगे रहना सीखें ” (पद- 8; पद- 14) जीवन भरा हुआ, अत्यधिक व्यस्त और चहल-पहल भरा हो सकता है। अपने हित का ख्याल रखना पराजित कर सकता है; और फिर भी, यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमें “अच्छे कामों के लिए तैयार” रहना है। जो हमारे पास नहीं है और जो हम नहीं कर सकते उससे अभिभूत होने के बजाय, आइए इस बारे में सोचें कि हमारे पास क्या है और हम क्या कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर हमारी मदद करता है । ऐसा करने से, हम दूसरों की ज़रूरत के समय में उनकी मदद कर सकते है, और परमेश्वर का आदर होता है। “तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके, कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें” (मत्ती 5:16)। आर्थर जैक्सन
परमेश्वर के पुनरुद्धार के लिए तैयार
मेरे पास एक मित्र की ओर से आयीं तस्वीरें आश्चर्यजनक थीं! उनकी पत्नी के लिए एक आश्चर्यजनक उपहार फिर से नई की गई लक्जरी कार : बाहर का शानदार गहरा नीला रंग, चमकदार क्रोम रिम्स, अन्दर की सीट/गद्दियाँ काले रंग की बनाई हुई, और एक मोटर जो अन्य ऊंची कोटि के सुधारों से मेल खा रही थी l उसी वाहन की "पहले" की तस्वीरें भी थीं—एक फीका, घिसा-पिटा, प्रभावहीन पीला रूप । हालाँकि इसकी कल्पना करना कठिन हो सकता है, यह संभव है कि जब वाहन असेंबली लाइन से निकली थी तो यह ध्यान आकर्षित करने वाली रही हो। लेकिन समय, टूट-फूट और अन्य कारकों ने इसे ज्यों का त्यों बनाये जाने के लिये तैयार कर दिया था।
पुनरुद्धार के लिए तैयार! भजन संहिता संहिता 80 में परमेश्वर के लोगों की स्थिति ऐसी ही थी और इस प्रकार बार-बार प्रार्थना की गई : "हे परमेश्वर, हम को ज्यों के त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा!" (पद.3; पद.7,19 देखें)। हालाँकि उनके इतिहास में मिस्र से बचाव और भरपूरी के देश में रोपा जाना शामिल था(पद.8-11), अच्छे समय आए और गए। विद्रोह के कारण, वे परमेश्वर के न्याय का अनुभव कर रहे थे(पद.12-13)। इस प्रकार, उनकी प्रार्थना थी : "हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ! स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले"(पद14)l
क्या आपको कभी परमेश्वर से संवेदनाशून्य, दूर या अलग हुआ महसूस होता है? क्या आनंदपूर्ण आत्म-संतुष्टि नहीं है? क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि यीशु और उसके उद्देश्यों के साथ तालमेल नहीं है? परमेश्वर बहाल करने के लिए हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है(पद.1)। परमेश्वर से मांगने से आपको क्या रोक रही है? आर्थर जैक्सन
व्याकुल आत्माएं, सत्य प्रार्थनाएं
जनवरी 1957 में उनके घर पर बम विस्फोट होने से तीन दिन पहले, डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर के साथ एक ऐसी घटना हुई जिसने उनके जीवन को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। एक धमकी भरा फ़ोन कॉल आने के बाद, किंग ने खुद को नागरिक अधिकार आंदोलन से बाहर निकलने की रणनीति पर विचार करते हुए पाया। फिर उन्होंने अपनी आत्मा से प्रार्थना करना शुरू कर दिया — "मैं यहाँ उस बात के लिए खड़ा हूँ जो मुझे सही लगता है। लेकिन अब मुझे डर लग रहा है। मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है। मैं उस बिंदु पर आ गया हूँ जहाँ मैं इसका सामना अकेले नहीं कर सकता।" उनकी प्रार्थना के बाद, एक शांत आश्वासन मिला । किंग ने कहा, "लगभग तुरंत ही मेरा डर दूर होने लगा। मेरी अनिश्चितता गायब हो गई। मैं किसी भी चीज़ का सामना करने के लिए तैयार था।"
यूहन्ना 12 में, यीशु ने कहा, "अब मेरा जी व्याकुल है" (पद.27)। वह अपने आंतरिक स्वभाव के प्रति पारदर्शी रूप से ईमानदार था; फिर भी वह अपनी प्रार्थना में परमेश्वर-केंद्रित था। “हे पिता, अपने नाम की महिमा कर” (पद.28)। यीशु की प्रार्थना परमेश्वर की इच्छा के प्रति समर्पण था।
जब हम अपने सामने परमेश्वर का सम्मान करने या न करने का विकल्प पाते हैं तो भय और असुविधा का पीड़ा महसूस करना हमारे लिए कितना मानवीय है; जब बुद्धि के लिए रिश्तों, आदतों या अन्य पैटर्न/स्वरूप (अच्छे या बुरे) के बारे में कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हमें किस चीज़ का सामना करना पड़ा है, जब हम साहसपूर्वक परमेश्वर से प्रार्थना करते है, वह हमें हमारे और डर और असहजता पर काबू पाने और वह करने के लिए सामर्थ्य देगा जो उसको महिमा देता है—हमारी भलाई और दूसरों की भलाई के लिए।
—आर्थर जैक्सन
परमेश्वर की भलाई के बारे में बताएं
गवाही का समय हमारी चर्च आराधना का वह समय था जब लोग साझा करते थे कि परमेश्वर उनके जीवन में क्या काम कर रहे थे। आंटी - या सिस्टर लैंगफ़ोर्ड, जैसा कि हमारे चर्च परिवार में अन्य लोग उन्हें जानते थे - अपनी गवाही में बहुत सारी प्रशंसाएँ भरने के लिए जानी जाती थीं। ऐसे अवसरों पर जब उसने अपनी व्यक्तिगत उद्धार की कहानी साझा की, तो कोई उम्मीद कर सकता था की आराधना का ज्यादा समय लेंगी। उसका हृदय परमेश्वर की स्तुति से गूँज उठा जिसने दयालुता पूर्वक उसका जीवन बदल दिया!
इसी प्रकार, भजन संहिता 66 के लेखक की गवाही प्रशंसा से भरी हुई है क्योंकि वह इस बात की गवाही देता है कि परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए क्या किया है। "आओ परमेश्वर के कामों को देखो; वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है।"(पद 5) उनके कार्यों में चमत्कारी बचाव(पद 6), सुरक्षा (पद 9), और परीक्षण और अनुशासन भी शामिल था जिसके परिणामस्वरूप उनके लोगों को एक बेहतर स्थान पर लाया गया (पद 10-12)। जबकि ऐसे ईश्वर-अनुभव हैं जो यीशु में अन्य विश्वासियों के साथ हमारे समान हैं,लेकिन हमारी व्यक्तिगत यात्राओं के लिए कुछ अनोखी चीज़ें भी हैं। क्या आपके जीवन में ऐसे समय आए हैं जब परमेश्वर ने स्वयं को विशेष रूप से आपके सामने प्रकट किया है? वे दूसरों के साथ साझा करने लायक हैं जिन्हें यह सुनने की ज़रूरत है कि उसने आपके जीवन में कैसे काम किया है। "हे परमेश्वर के सब डरवैयो, आकर सुनो, मैं बताऊँगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है।"(पद 16)
— आर्थर जैक्सन
सभी के लिए एक दरवाजा
मेरे बचपन के पड़ोस में स्थित रेस्तराँ में प्रोटोकॉल (औपचारिक अवसरों पर सुनिश्चित नियमों और प्रक्रियाओं की व्यवस्था) 1950 के दशक के अंत और 1960 के दशक की शुरुआत में सामाजिक और नस्लीय गतिशीलता के अनुरूप थे। रसोई में काम करने वाले सहायक - मैरी, रसोइया और मेरे जैसे बर्तन धोने वाले - अश्वेत थे; हालाँकि, रेस्तराँ में मौजूद ग्राहक श्वेत थे। अश्वेत ग्राहक भोजन का ऑर्डर दे सकते थे, लेकिन उन्हें इसे पिछले दरवाजे से उठाना पड़ता था। ऐसी नीतियों ने उस युग में अश्वेतों के साथ असमान व्यवहार को मजबूत किया। हालाँकि हम तब से बहुत आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी हमारे पास परमेश्वर की छवि में बने लोगों के रूप में एक-दूसरे से कैसे संबंध बनाते हैं, इस बारे में विकास की गुंजाइश है।
जैसे पवित्रशास्त्र में रोमियों 10:8-13 हमें यह देखने में मदद करता हैं कि परमेश्वर के परिवार में सभी का स्वागत है; कोई पिछला दरवाज़ा नहीं है. सभी एक ही रास्ते से प्रवेश करते हैं - शुद्धिकरण और क्षमा के लिए यीशु की मृत्यु में विश्वास के माध्यम से। इस परिवर्तनकारी अनुभव के लिए बाइबल का शब्द है उद्धार पाए हुये (बचाये गये) (पद- 9, 13)। आपकी सामाजिक स्थिति या नस्लीय (जातीय) स्थिति या फिर दूसरों की अन्य स्थिति से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। "जैसा कि पवित्रशास्त्र कहता है, 'जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। क्योंकि यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिए कि वह सब का प्रभु है और अपने सब नाम लेनेवालों के लिए उदार है " (पद 11- 12) क्या आप अपने हृदय में यीशु के बारे में बाइबल के संदेश पर विश्वास करते हैं? तो उसके परिवार में आपका स्वागत है!
-आर्थर जैक्सन
असीम करुणा
फास्ट-फूड रेस्तराँ में काम करने वाले केविन फोर्ड ने सत्ताईस साल में एक भी छुट्टी नहीं की थी। एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें उन्होंने अपनी दशकों की सेवा के उपलक्ष्य में मिले एक मामूली उपहार के लिए अपनी विनम्र कृतज्ञता दिखाई, हज़ारों लोग उनके प्रति दयालुता दिखाने के लिए एक साथ आए। “यह एक सपने जैसा है, एक सपना सच हो गया,” उन्होंने कहा जब एक धन जुटाने के प्रयास ने एक सप्ताह से भी कम समय में 250,000 डॉलर जुटाए। बंधुआई में गया यहूदा के राजा यहोयाकीन को भी अत्यधिक दयालुता का पात्र माना गया। बेबीलोन के राजा की दयालुता के परिणामस्वरूप उनकी रिहाई से पहले उन्हें सैंतीस साल तक कैद में रखा गया था। “राजा यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकालकर बड़ा पद दिया; और उस से मधुर मधुर वचन कहकर, जो राजा उसके साथ बाबुल में बंधुए थे, उनके सिंहासनों से उसके सिंहासन को अधीक ऊंचा किया।" (यिर्मयाह 52:31-32)। यहोयाकीन को नया पद, नए कपड़े और नया निवास दिया गया। उसके नए जीवन का पूरा खर्च राजा ने उठाया।
यह कहानी चित्रित करती है कि आत्मिक रूप से क्या होता है, जब स्वयं या दूसरों के योगदान के बिना, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान में विश्वास करने वाले लोगों को परमेश्वर से अलगाव से बचाया जाता है। उन्हें अंधकार और मृत्यु से प्रकाश और जीवन में लाया गया है; परमेश्वर की अत्यधिक दयालुता के कारण उन्हें परमेश्वर के परिवार में लाया गया है।
—आर्थर जैक्सन