Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by बिल क्राऊडर

कब तक?

लुईस कैरल की उत्कृष्ट कृतिएलिस इन वंडरलैंड में, ऐलिस पूछती है, "सदा के लिए कब तक होता है?" व्हाईट रेबिट उत्तर देता है, "कभी-कभी, सिर्फ एक सेकंड ।"

समय का आभास कुछ ऐसा ही था जब मेरे भाई डेविड का अचानक देहांत हो गया। उनकी शोकसभा तक जितने दिन बाकि थे, लंबे लगने लगे जिसने उन्हें खो देने के दुख को और  गहरा बना दिया। हर सेकंड सदा चलने वाले युग के समान प्रतीत होता।

एक दूसरे डेविड (राजा दाउद) ने इस भाव को इस गीत में प्रतिध्वनित किया, हे परमेश्वर, तू कब तक? ...? (भजन संहिता 13:1 -2)। सिर्फ दो छंदों में चार बार वह परमेश्वर से पूछते हैं, "कब तक?" कभी-कभी जीवन के दर्द अंतहीन लगने लगते हैं।

हमारे इस दर्द में हमारे स्वर्गीय पिता हमें अपनी उपस्थिति परवाह से भरते हैं। राजा दाऊद के समान हम अपनी दर्द और पीड़ा के साथ सच्चाई से उनके पास जा सकते हैं, यह जानते हुए कि वह हमें कभी न छोडेंगे और त्यागेंगे (इब्रानियों 13:5)। यह भजनकार भी जान गया था, उसने अपने विलाप को विजयी घोषणा में बदल दिया: परन्तु मैं ने तो तेरी...। "(भजन संहिता 13:5)।

उनकी करूणा  हमें उन संघर्ष के घड़ियों में थाम लेगी, जो अंतहीन प्रतीत होती हैं। हम उनके उद्धार में आनंदित हो सकते हैं।

फ़ोन का ज़ोन

मोबाइल फ़ोन के कारण दूसरों तक हमारी असीमित पहुंच हो गई है। कई लोग वाहन चलाते हुए फोन या टेक्स्ट करते हैं जिससे कभी-कभी भयानक दुर्घटनाएँ होती हैं। कई देशों में ध्यान भंग करके वाहन चलाना गैरकानूनी है। अमेरिका में  हाईवे पर विशेष ज़ोन बने हैं, जहाँ वाहन रोक कर लोग सुरक्षित रूप से जितना चाहें फ़ोन इस्तेमाल कर सकते हैं।

फ़ोन पर बात करते हुए वाहन चलाने पर प्रतिबंध अच्छा है, पर एक ऐसी बातचीत है जिसे करने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता: प्रार्थना। परमेश्वर हमें उनसे बात करने को हर समय आमंत्रित करते हैं, आते-जाते समय या जब हम स्थिर हों। नए नियम में, पौलुस के शब्द हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो परमेश्वर से बातचीत करना चाहता हैं, “निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो”। साथ ही वह हमें "सदा आनन्दित” रहने" और "सभी परिस्थितियों में धन्यवाद देने" के लिए प्रोत्साहित करता है (1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18)। आनन्दित और धन्यवादित रहना-मसीह के द्वारा परमेश्वर पर हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति है, निरन्तर प्रार्थना में जिसका लंगर है।

चाहे रोने के लिए हो या लंबी बातचीत के लिए, परमेश्वर सर्वदा हमारे लिए उपलब्ध होते हैं। वह चाहते हैं हम अपनी खुशियों, आभार, इच्छाओं, प्रश्नों और चिंताओं को निरन्तर उनसे साझा करें (इब्रानियों 4:15-16)। हम निरन्तर प्रार्थना के ज़ोन में होते हैं।

सीट बेल्ट पहन लो!

"हम एक हलचल वाले वायुमंडल में प्रवेश कर रहे हैं। कृपया अपनी सीट पर तुरंत लौटें और अपनी सीट बेल्ट को तुरंत और सुरक्षित रूप से पहन लें।" जब आवश्यक हो तो फ्लाइट अटेंडेंट ऐसी चेतावनी देते हैं क्योंकि तूफानी वायुमंडल में, बिना सीट बेल्ट लगाए यात्रियों की घायल होने के सम्भावना होती हैं। अपनी सीट पर बेल्ट लगाकर बैठने पर, वे सुरक्षित रूप से हलचल वाले क्षेत्र के बाहर निकल सकते हैं।

हमारे मार्ग में आने वाली गडबडियों के बारे में आमतौर पर जीवन हमें चेतावनी नहीं देता। परन्तु हमारे प्यारे पिता हमारे संघर्षों को जानते हैं और उनकी परवाह करते हैं, और वह हमें अपनी चिंताओं, दर्द और भय को उनके पास लाने के लिए आमंत्रित करते हैं। बाइबिल बताती है कि “हमारा महायाजक, हमारी निर्बलताओं को जानता है...” (इब्रानियों 4:15–16)।

अशांत ऋतु में  प्रार्थना में हमारे पिता के पास जाना सबसे उत्तम बात है। “आवश्यकता के समय अनुग्रह पाएं”-वाक्यांश का अर्थ है कि उनकी उपस्थिति में हम संकट में शांति की सुरक्षा की “बेल्ट” लगा सकते हैं, क्योंकि हम अपनी चिंताओं को उनके पास ले जाते हैं जो उन चिंताओं से बड़े हैं! जब जीवन बोझिल लगने लगे, तो हम प्रार्थना कर सकते हैं। अशांत वातावरण से गुज़रने में वे हमारी मदद कर सकते हैं।

जानते और प्रेम करते हुए

"जीसस लव्स में दिस आई नो" मसीही अराधना के सर्वप्रचलित गीतों में से एक इस गीत में बड़े कोमल भाव में यीशु के साथ हमारे सम्बंध की बात करता है-हमसे प्रेम किया जाता है।

किसी ने मेरी पत्नी को एक पट्टिका दी जो इन शब्दों को एक सरल मोड़ दे कर एक नया अर्थ देती है। उसमें ऐसा लिखा है, "जीसस नोस मी दिस आई लव"। यह उनके साथ हमारे सम्बंध पर एक भिन्न दृष्टिकोण प्रदान करता है-हमें जाना जाता है।

भेड़ से प्रेम करना और उनके बारे में जानना यह बात प्राचीन इज़राइल में, एक सच्चे चरवाहे को मजदूर चरवाहे से भिन्न बनाती थी। चरवाहा भेड़ों के साथ इतना समय बिताता कि उसे सदा भेड़ का ख्याल और परवाह होती। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि यीशु ने उसकी अपनी भेड़ों के लिए कहा "अच्छा चरवाहा मैं हूं...(यूहन्ना 10:14, 27)।

वे हमें जानते हैं और हमें प्यार करते हैं! हमारे प्रति उनकी योजनाओं पर हम भरोसा कर सकते हैं और अपनी परवाह वायदे पर विश्राम कर सकते हैं क्योंकि उनका पिता "[हमारे] माँगने से पहले ही जानता है....(मत्ती 6:8)। आप जब उतार चढ़ाव का सामना करें, तो विश्राम में बने रहें। आपकी आत्मा का चरवाहा आपको जानता है और आपसे प्रेम करता है।

बड़ा संसार, उससे बड़ा परमेश्वर

जब हम अपनी गाड़ी से उत्तरी मिशिगन से होकर जा रहे थे, मारलीन आश्चर्य से बोली, “विश्वास नहीं होता कि संसार इतना बड़ा है!” उसने यह बात तब कही जब हम उस संकेत को पार किये जो भूमध्य रेखा और उत्तरी ध्रुव के बीच है l  हम आपस में बातचीत किये कि हम कितने छोटे हैं और हमारा संसार कितना विशाल है l फिर भी, विश्व के आकर से तुलना करने पर, हमारा छोटा गृह धूल का एक कण है l

यदि हमारा संसार बड़ा है, और विश्व उससे भी कहीं बड़ा, इसका बनानेवाला कितना बड़ा होगा जिसने इसे अपनी शक्ति से बनाया? बाइबल हमसे कहती है, “क्योंकि [यीशु में] सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हों अथबा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएं, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिए सृजी गयी हैं” (कुलुस्सियों 1:16)

सुसमाचार यह है कि यही यीशु जो इस विश्व का सृष्टिकर्ता है हमें हमारे पापों से प्रतिदिन और हमेशा के लिए बचाने आया l जिस दिन यीशु मरा उसके पहले वाली रात, यीशु ने कहा, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिए कहीं हैं कि तुम्हें मुझ में शांति मिले l संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33) l

जीवन की बड़ी और छोटी चुनौतियों का सामना करते हुए, हम संसार के सृष्टिकर्ता को पुकारते हैं जिसने मृत्यु सही और मुर्दों में से जी उठा, और संसार के टूटेपन पर विजयी हुआ l हमारे संघर्ष के समय, वह सामर्थ्य के साथ हमें अपनी शांति देता है l

आनंद और न्याय

एशिया के एक सम्मलेन में, कुछ ही घंटों की बातचीत की अवधि में दो बार मेरी आँखें खुल गयी l पहले, एक पासवान ने बताया कि रिहा से पूर्व हत्या का गलत आरोप सिद्ध होने के कारण उसे ग्यारह वर्ष जेल काटनी पड़ी l उसके बाद, कुछ परिवारों ने बताया कि किस तरह अपने देश में धार्मिक सताव से बचने के लिए उन्होंने अपनी सम्पत्ति खर्च कर दी, और जिन लोगों पर छुटकारे का भरोसा किया उन्होंने ही उनको धोखा दिया l अब वर्षों तक एक शरणार्थी शिविर में रहने के बाद, उनका सोचना है कि शायद ही कभी उनके पास घर होगा l

दोनों ही घटनाओं में, अत्याचार के साथ न्याय नहीं था, जो हमारे संसार के टूटेपन का एक प्रमाण है l किन्तु इस न्याय का खालीपन स्थायी स्थिति नहीं है l

भजन 67 परमेश्वर के लोगों से इस दुःख देनेवाले संसार का परिचय परमेश्वर से कराने  के लिए कहा गया है l केवल परमेश्वर के प्रेम के कारण ही नहीं किन्तु उसके न्याय के कारण भी उसका परिणाम आनंद होगा l भजनकार कहता है, “राज्य राज्य के लोग आनंद करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोगों का न्याय धर्म से करेगा” (पद.4) l

यद्यपि बाइबिल के लेखकों ने समझा कि “न्याय” (निष्पक्षता और न्याय) परमेश्वर के प्रेम का भाग है, उन्होंने जाना कि भविष्य में ही यह पूरी तौर से समझा जाएगा l उस समय तक, हम अपने अन्यायी संसार में, दूसरों को परमेश्वर के पवित्र न्याय के विषय बताते रहें l उसका आना “न्याय [का] नदी के समान, और धर्म [का] महानद के समान होगा” (आमोस 5:24) l

बच्चों के लिए प्रेम

थॉमस बार्नाडो चीन देश में मेडिकल मिशनरी बनने का सपना देखते हुए लन्दन हॉस्पिटल मेडिकल स्कूल में 1865 में दाखिला लिया l बार्नाडो को जल्द ही अपने घर के सामने अनेक बेघर बच्चे दिखाई दिये जो लन्दन की सड़कों पर मर रहे थे l उसने इस भयानक स्थिति के विषय कुछ करने का निर्णय लिया l लन्दन के पूर्वी छोर पर उसने इन गरीब बच्चों के लिए एक आवास बनाया और 60,000 लड़के और लड़कियों को गरीबी और अकाल मृत्यु से बचा लिया l धर्मशास्त्री और पासवान जॉन स्टोट ने कहा, “आज हम उन्हें लावारिस बच्चों के संरक्षक संत पुकार सकते हैं l”

यीशु ने कहा, “बालकों को मेरे पास आने दो, और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है” (मत्ती 19:14) l कल्पना करें कि इस घोषणा पर भीड़ और यीशु के शिष्य कैसा महसूस किये होंगे l प्राचीन संसार में, बच्चों का महत्त्व कम था और उन्हें जीवन में मुख्य स्थान नहीं दिया जाता था l फिर भी यीशु ने उनका स्वागत किया, उनको आशीष देकर उनको अनमोल बताया l

नए नियम के लेखक याकूब ने, मसीह के अनुयायियों को यह कहकर चुनौती दी, “हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है कि अनाथों और विधवाओं के क्लेश में उसकी सुधि लें ...” (याकूब 1:37) l प्रथम शाताब्दी के अनाथों की तरह वर्तमान में भी, अनाथ, और हर स्तर, हर नस्ल के बच्चे, और पारिवारिक माहौल, मानव व्यापार, दुर्व्यवहार, नशीले पदार्थ, और बहुत सी, उपेक्षाओं के कारण जोखिम में है l हम किस तरह स्वर्गिक पिता को आदर दे सकते हैं जो इन छोटे बच्चों की जिन्हें यीशु अपने पास बुलाता है, की देखभाल करके हमसे प्रेम करता है?

जीवित किये गए

मेरे पिता अपने युवावस्था में मित्रों के एक समूह के साथ शहर के बाहर एक स्पोर्ट्स कार्यक्रम में जा रहे थे जब उनकी कार के पहिये गीली सड़क पर फिसल गए l उनके साथ गंभीर दुर्घटना हुई l एक मित्र को पक्षघात हो गया और दूसरे की मृत्यु l मेरे पिता को मृत घोषित करके लाश-घर में रख दिया गया l उनके स्तंभित और शोक-संतप्त माता-पिता उन्हें पहचानने पहुँचे l किन्तु मेरे पिता उस गहरे कोमा से वापस पुनर्जीवित हो गए l उनका विलाप आनंद में बदल गया l

इफिसियों 2 में, प्रेरित पौलुस हमें याद दिलाता है कि मसीह से अलग हम “अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे” (पद.1) l किन्तु हमारे लिए उसके महान प्रेम के कारण, “परमेश्वर ने जो दया का धनी है, ... जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे तो हमें मसीह के साथ जिलाया” (पद.4-5) l मसीह के द्वारा हमें मृत्यु से जीवन में लाया गया है l

तो एक भाव में, हम सभों के जीवन का श्रोत स्वर्गिक परमेश्वर है l उसके महान प्रेम के द्वारा, उसने उनको जो पापों में मृत थे उसके पुत्र के द्वारा जीवन और उद्देश्य को संभव किया l

एक छोटी आग

सितम्बर में एक रविवार की रात, जब सब लोग सो रहे थे, पुडिंग लेन पर थॉमस फेरिनर की बेकरी में छोटी सी आग लगी l जल्द ही आग एक घर से दूसरे घर में फ़ैल गयी और लन्दन 1966 के भयानक आग में घिर गया l इस आग से 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए  जिसने शहर के चार बटे पाँच हिस्से को अपने चपेट में ले लिया l एक छोटी सी आग से कितना अधिक विनाश!

बाइबिल हमें एक और छोटी किन्तु विनाशक अग्नि के विषय चिताती है l याकूब यह लिखते समय, “जीभ भी एक छोटा सा अंग है और वह बड़ी-बड़ी डींगें मारती है l देखो, थोड़ी से आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है” (याकूब 3:5) l

किन्तु हमारे शब्द रचनात्मक  भी हो सकते हैं l नीतिवचन 16:24 ताकीद देता है, “मनभावने वचन मधुभारे छत्ते के सामान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं l” प्रेरित पौलुस कहता है, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो कि तुम्हें हर महुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलु. 4:6) l जैसे नमक भोजन को स्वादिष्ट करता है, हमारे अनुग्रही शब्द दूसरों का निर्माण करते हैं l

पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द दुखित लोगों को, विश्वास में बढ़ने को इच्छित, अथवा जिन्हें उद्धारकर्ता के निकट आना ज़रूरी है, को उत्साहित करते हैं l हमारे शब्द आग उत्पन्न करने की जगह आग बुझा सकते हैं l