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Articles by बिल क्राऊडर

घड़ियाँ और कैलेंडर

मेरे पिता की मृत्यु 58 वर्ष की उम्र में हुई l उस समय से, मैं ठहर कर उस तारीख को अपने पिता और मेरे जीवन पर उनके प्रभाव को याद करता हूँ l जब मैंने पहचाना कि मैंने उनके साथ  रहने से अधिक उनके बिना  जीवन बिताया है, तो मैंने अपने जीवन की संक्षिप्तता पर विचार करने लगा l

पिछली बातों पर विचार करते समय, हम समय के किसी घटना और हमारे हृदयों में उससे उत्पन्न होने वाली भावनाओं से भी संघर्ष करते हैं l समय को घड़ियों और कैलन्डरों की सहायता से मापने  के बावजूद भी हम घटनाओं के कारण समय को याद करते हैं l जीवन के उन क्षणों में जो गहरी भावनाएं उत्पन्न करता हैं, हम आनंद, हानि, आशीष, पीड़ा, सफलता, और पराजय का अनुभव कर सकते हैं l

बाइबल हमें उत्साहित करती है : “हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर करो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है” (भजन 62:8) l यह कथन आरामदायक समय का नहीं है l शत्रुओं से घिरे हुए दाऊद ने इन शब्दों को लिखा (पद.3-4) l ऐसी स्थिति में भी, वह परमेश्वर के सामने ठहरा रहा (पद.1,5) जिससे हम याद करते हैं कि परमेश्वर का अपराजित प्रेम (पद.12) संघर्ष के उन सभी समयों से कहीं महान है जिसका हम सामना करते हैं l

हर एक घटना में, हमें यह भरोसा है : हमारा परमेश्वर हमारे साथ खड़ा है, और वह हमारे जीवनों के सभी क्षणों में भरोसेमंद से कहीं बढ़कर है l जब जीवन के समय हमें पराजित करने की कोशिश करें, उसकी सहायता सही समय पर मिलेगी l

बाबुश्का महिला

1963 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या सम्बंधित रहस्यों में “बाबुश्का महिला” एक रहस्य है l मूवी कैमरा द्वारा उन घटनाओं की ली गयी तस्वीरों में, वह पकड़ में नहीं आयी है l यह रहस्यमयी महिला, जो एक ओवरकोट और स्कार्फ(रुसी बूढ़ी महिला  की तरह दिखाई देती हुई) पहनी हुई दिखाई देती है, की पहचान नहीं हुई है और उसकी फिल्म कभी नहीं देखी गयी है l दशकों से, इतिहासकार और विद्वानों का अनुमान है कि भय ने “बाबुश्का महिला” को उस नवम्बर की दुखद शाम की अपनी कहानी बताने से रोका है l

यीशु के शिष्यों के छिप जाने के पीछे किसी तरह का अनुमान लगाना ज़रूरी नहीं है l वे उन अधिकारियों के भय से जिन्होंने उनके स्वामी की हत्या की थी दुबक गए थे (यूहन्ना 20:19) और सामने आकर अपने अनुभव बताने से हिचकिचा रहे थे l किन्तु तब ही यीशु मृतकों में से जी उठा l पवित्र आत्मा के आने के बाद मसीह के अनुयायियों का जो एक समय डरे हुए थे अब शांत रखना असंभव था! पेंतिकुस्त के दिन, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से पूर्ण शमौन पतरस ने घोषणा की, “अतः अब इस्राएल का सारा घराना निश्चित रूप से जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया , प्रभु भी ठहराया और मसीह भी” (प्रेरितों 2:36) l

यीशु के नाम में निडरतापूर्वक बोलने का अवसर निर्भीक लोगों अथवा सेवा को जीविका के रूप में लेने का प्रशिक्षण प्राप्त करनेवालों तक सीमित नहीं है l यह तो अन्तर्निवास करनेवाला पवित्र आत्मा है जो यीशु का सुसमाचार बताने की योग्यता देता है l उसकी सामर्थ्य से, हम साहस का अनुभव करके दूसरों के साथ अपने उद्धारकर्ता के विषय में बताते हैं l  

नहीं लौटने का स्थान

एक और नदी पार करने की तरह यह इतना सरल नहीं था l कानून के अनुसार, कोई भी रोमी सेनापति सेना के टुकड़ी के साथ रोम में प्रवेश नहीं कर सकता था l  इसलिए जब जुलियस सीज़र ई.पू. 49 में सेना की 13 वीं टुकड़ी को रुबिकोन नदी के पार इटली में प्रवेश कराया, यह राजद्रोह था l सीज़र का निर्णय बदला नहीं जा सकता था, और रोम के महान सेनापति का पूर्ण शासक बनने तक गृह-युद्ध होता रहा l  आज भी, वाक्यांश “रुबिकोन नदी पार करना,” अलंकार “जहां से लौटा नहीं जा सकता है उस स्थान को पार करना” के रूप में उपयोग किया जाता है l

कभी-कभी हम दूसरों को कुछ बोलकर सम्बन्धात्मक रुबिकोन नदी पार कर देते हैं l कहे गए शब्द, वापस नहीं लिए जा सकते हैं l जब ये शब्द हमारे होठों से निकल जाते हैं, उनसे मदद और आराम मिलता है अथवा हानि होती है जो सुधारी नहीं जा सकती, उसी प्रकार जिस तरह सीज़र रोम में प्रवेश किया था l याकूब यह लिखते हुए, शब्दों के विषय एक और चित्रण देता है, “जीभ भी एक आग है; जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है, और सारी देह पर कलंक लगाती है, और जीवन गति में आग लगा देती है, और नरक कुण्ड कि आग से जलती रहती है (याकूब 3:6) l

जब हमें अहसास हो कि हमने किसी के साथ रुबिकोन नदी पार कर दी है, हम उनसे और परमेश्वर से क्षमा मांग सकते हैं (मत्ती 5:23-24); 1 यूहन्ना 1:9) l किन्तु इससे बेहतर परमेश्वर के पवित्र आत्मा में विश्राम प्राप्त करते हुए, पौलुस की चुनौती पर ध्यान देना है, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो” (कुलु. 4:6), ताकि हमारे शब्दों द्वारा केवल प्रभु को आदर ही नहीं मिलेगा, किन्तु हमारे चारों ओर के लोग की उन्नत्ति होगी और वे उत्साहित होंगे l

कब तक?

लुईस कैरल की उत्कृष्ट कृतिएलिस इन वंडरलैंड में, ऐलिस पूछती है, "सदा के लिए कब तक होता है?" व्हाईट रेबिट उत्तर देता है, "कभी-कभी, सिर्फ एक सेकंड ।"

समय का आभास कुछ ऐसा ही था जब मेरे भाई डेविड का अचानक देहांत हो गया। उनकी शोकसभा तक जितने दिन बाकि थे, लंबे लगने लगे जिसने उन्हें खो देने के दुख को और  गहरा बना दिया। हर सेकंड सदा चलने वाले युग के समान प्रतीत होता।

एक दूसरे डेविड (राजा दाउद) ने इस भाव को इस गीत में प्रतिध्वनित किया, हे परमेश्वर, तू कब तक? ...? (भजन संहिता 13:1 -2)। सिर्फ दो छंदों में चार बार वह परमेश्वर से पूछते हैं, "कब तक?" कभी-कभी जीवन के दर्द अंतहीन लगने लगते हैं।

हमारे इस दर्द में हमारे स्वर्गीय पिता हमें अपनी उपस्थिति परवाह से भरते हैं। राजा दाऊद के समान हम अपनी दर्द और पीड़ा के साथ सच्चाई से उनके पास जा सकते हैं, यह जानते हुए कि वह हमें कभी न छोडेंगे और त्यागेंगे (इब्रानियों 13:5)। यह भजनकार भी जान गया था, उसने अपने विलाप को विजयी घोषणा में बदल दिया: परन्तु मैं ने तो तेरी...। "(भजन संहिता 13:5)।

उनकी करूणा  हमें उन संघर्ष के घड़ियों में थाम लेगी, जो अंतहीन प्रतीत होती हैं। हम उनके उद्धार में आनंदित हो सकते हैं।

फ़ोन का ज़ोन

मोबाइल फ़ोन के कारण दूसरों तक हमारी असीमित पहुंच हो गई है। कई लोग वाहन चलाते हुए फोन या टेक्स्ट करते हैं जिससे कभी-कभी भयानक दुर्घटनाएँ होती हैं। कई देशों में ध्यान भंग करके वाहन चलाना गैरकानूनी है। अमेरिका में  हाईवे पर विशेष ज़ोन बने हैं, जहाँ वाहन रोक कर लोग सुरक्षित रूप से जितना चाहें फ़ोन इस्तेमाल कर सकते हैं।

फ़ोन पर बात करते हुए वाहन चलाने पर प्रतिबंध अच्छा है, पर एक ऐसी बातचीत है जिसे करने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता: प्रार्थना। परमेश्वर हमें उनसे बात करने को हर समय आमंत्रित करते हैं, आते-जाते समय या जब हम स्थिर हों। नए नियम में, पौलुस के शब्द हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो परमेश्वर से बातचीत करना चाहता हैं, “निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो”। साथ ही वह हमें "सदा आनन्दित” रहने" और "सभी परिस्थितियों में धन्यवाद देने" के लिए प्रोत्साहित करता है (1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18)। आनन्दित और धन्यवादित रहना-मसीह के द्वारा परमेश्वर पर हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति है, निरन्तर प्रार्थना में जिसका लंगर है।

चाहे रोने के लिए हो या लंबी बातचीत के लिए, परमेश्वर सर्वदा हमारे लिए उपलब्ध होते हैं। वह चाहते हैं हम अपनी खुशियों, आभार, इच्छाओं, प्रश्नों और चिंताओं को निरन्तर उनसे साझा करें (इब्रानियों 4:15-16)। हम निरन्तर प्रार्थना के ज़ोन में होते हैं।

सीट बेल्ट पहन लो!

"हम एक हलचल वाले वायुमंडल में प्रवेश कर रहे हैं। कृपया अपनी सीट पर तुरंत लौटें और अपनी सीट बेल्ट को तुरंत और सुरक्षित रूप से पहन लें।" जब आवश्यक हो तो फ्लाइट अटेंडेंट ऐसी चेतावनी देते हैं क्योंकि तूफानी वायुमंडल में, बिना सीट बेल्ट लगाए यात्रियों की घायल होने के सम्भावना होती हैं। अपनी सीट पर बेल्ट लगाकर बैठने पर, वे सुरक्षित रूप से हलचल वाले क्षेत्र के बाहर निकल सकते हैं।

हमारे मार्ग में आने वाली गडबडियों के बारे में आमतौर पर जीवन हमें चेतावनी नहीं देता। परन्तु हमारे प्यारे पिता हमारे संघर्षों को जानते हैं और उनकी परवाह करते हैं, और वह हमें अपनी चिंताओं, दर्द और भय को उनके पास लाने के लिए आमंत्रित करते हैं। बाइबिल बताती है कि “हमारा महायाजक, हमारी निर्बलताओं को जानता है...” (इब्रानियों 4:15–16)।

अशांत ऋतु में  प्रार्थना में हमारे पिता के पास जाना सबसे उत्तम बात है। “आवश्यकता के समय अनुग्रह पाएं”-वाक्यांश का अर्थ है कि उनकी उपस्थिति में हम संकट में शांति की सुरक्षा की “बेल्ट” लगा सकते हैं, क्योंकि हम अपनी चिंताओं को उनके पास ले जाते हैं जो उन चिंताओं से बड़े हैं! जब जीवन बोझिल लगने लगे, तो हम प्रार्थना कर सकते हैं। अशांत वातावरण से गुज़रने में वे हमारी मदद कर सकते हैं।

जानते और प्रेम करते हुए

"जीसस लव्स में दिस आई नो" मसीही अराधना के सर्वप्रचलित गीतों में से एक इस गीत में बड़े कोमल भाव में यीशु के साथ हमारे सम्बंध की बात करता है-हमसे प्रेम किया जाता है।

किसी ने मेरी पत्नी को एक पट्टिका दी जो इन शब्दों को एक सरल मोड़ दे कर एक नया अर्थ देती है। उसमें ऐसा लिखा है, "जीसस नोस मी दिस आई लव"। यह उनके साथ हमारे सम्बंध पर एक भिन्न दृष्टिकोण प्रदान करता है-हमें जाना जाता है।

भेड़ से प्रेम करना और उनके बारे में जानना यह बात प्राचीन इज़राइल में, एक सच्चे चरवाहे को मजदूर चरवाहे से भिन्न बनाती थी। चरवाहा भेड़ों के साथ इतना समय बिताता कि उसे सदा भेड़ का ख्याल और परवाह होती। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि यीशु ने उसकी अपनी भेड़ों के लिए कहा "अच्छा चरवाहा मैं हूं...(यूहन्ना 10:14, 27)।

वे हमें जानते हैं और हमें प्यार करते हैं! हमारे प्रति उनकी योजनाओं पर हम भरोसा कर सकते हैं और अपनी परवाह वायदे पर विश्राम कर सकते हैं क्योंकि उनका पिता "[हमारे] माँगने से पहले ही जानता है....(मत्ती 6:8)। आप जब उतार चढ़ाव का सामना करें, तो विश्राम में बने रहें। आपकी आत्मा का चरवाहा आपको जानता है और आपसे प्रेम करता है।

बड़ा संसार, उससे बड़ा परमेश्वर

जब हम अपनी गाड़ी से उत्तरी मिशिगन से होकर जा रहे थे, मारलीन आश्चर्य से बोली, “विश्वास नहीं होता कि संसार इतना बड़ा है!” उसने यह बात तब कही जब हम उस संकेत को पार किये जो भूमध्य रेखा और उत्तरी ध्रुव के बीच है l  हम आपस में बातचीत किये कि हम कितने छोटे हैं और हमारा संसार कितना विशाल है l फिर भी, विश्व के आकर से तुलना करने पर, हमारा छोटा गृह धूल का एक कण है l

यदि हमारा संसार बड़ा है, और विश्व उससे भी कहीं बड़ा, इसका बनानेवाला कितना बड़ा होगा जिसने इसे अपनी शक्ति से बनाया? बाइबल हमसे कहती है, “क्योंकि [यीशु में] सारी वस्तुओं की सृष्टि हुई, स्वर्ग की हों अथबा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुताएं, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएँ उसी के द्वारा और उसी के लिए सृजी गयी हैं” (कुलुस्सियों 1:16)

सुसमाचार यह है कि यही यीशु जो इस विश्व का सृष्टिकर्ता है हमें हमारे पापों से प्रतिदिन और हमेशा के लिए बचाने आया l जिस दिन यीशु मरा उसके पहले वाली रात, यीशु ने कहा, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिए कहीं हैं कि तुम्हें मुझ में शांति मिले l संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33) l

जीवन की बड़ी और छोटी चुनौतियों का सामना करते हुए, हम संसार के सृष्टिकर्ता को पुकारते हैं जिसने मृत्यु सही और मुर्दों में से जी उठा, और संसार के टूटेपन पर विजयी हुआ l हमारे संघर्ष के समय, वह सामर्थ्य के साथ हमें अपनी शांति देता है l

आनंद और न्याय

एशिया के एक सम्मलेन में, कुछ ही घंटों की बातचीत की अवधि में दो बार मेरी आँखें खुल गयी l पहले, एक पासवान ने बताया कि रिहा से पूर्व हत्या का गलत आरोप सिद्ध होने के कारण उसे ग्यारह वर्ष जेल काटनी पड़ी l उसके बाद, कुछ परिवारों ने बताया कि किस तरह अपने देश में धार्मिक सताव से बचने के लिए उन्होंने अपनी सम्पत्ति खर्च कर दी, और जिन लोगों पर छुटकारे का भरोसा किया उन्होंने ही उनको धोखा दिया l अब वर्षों तक एक शरणार्थी शिविर में रहने के बाद, उनका सोचना है कि शायद ही कभी उनके पास घर होगा l

दोनों ही घटनाओं में, अत्याचार के साथ न्याय नहीं था, जो हमारे संसार के टूटेपन का एक प्रमाण है l किन्तु इस न्याय का खालीपन स्थायी स्थिति नहीं है l

भजन 67 परमेश्वर के लोगों से इस दुःख देनेवाले संसार का परिचय परमेश्वर से कराने  के लिए कहा गया है l केवल परमेश्वर के प्रेम के कारण ही नहीं किन्तु उसके न्याय के कारण भी उसका परिणाम आनंद होगा l भजनकार कहता है, “राज्य राज्य के लोग आनंद करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोगों का न्याय धर्म से करेगा” (पद.4) l

यद्यपि बाइबिल के लेखकों ने समझा कि “न्याय” (निष्पक्षता और न्याय) परमेश्वर के प्रेम का भाग है, उन्होंने जाना कि भविष्य में ही यह पूरी तौर से समझा जाएगा l उस समय तक, हम अपने अन्यायी संसार में, दूसरों को परमेश्वर के पवित्र न्याय के विषय बताते रहें l उसका आना “न्याय [का] नदी के समान, और धर्म [का] महानद के समान होगा” (आमोस 5:24) l