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Articles by बिल क्राऊडर

तरस की थकान

एनी फ्रैंक अपने दैनिकी लिखने के लिए लोकप्रिय है जिसमें उसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने परिवार के छिपने का वर्णन करती है l बाद में जब वह नाज़ी मृत्यु शिविर में कैद कर दी गयी, उनके साथ के लोगों ने कहा, “[उनके लिए] उसके आँसू कभी नहीं सूखते था,” जो उसे “उसके सभी जाननेवालों में धन्य उपस्थिति” बना देती थी l इस कारण, विद्वान केनेथ बेली यह निष्कर्ष निकालते हैं कि एनी “तरस दिखाने में कभी नहीं थकती थी l”
एक टूटे संसार में रहने का एक परिणाम तरस दिखाने में थकान हो सकती है l मानव दुःख का वास्तविक फैलाव हमारे बीच सर्वोत्तम इरादा रखनेवाले को भी स्तब्ध कर देता है l हलाकि, तरस दिखाने में श्रमित होना, यीशु के व्यक्तित्व में नहीं था l मत्ती 9:35-36 कहता है, “यीशु सब नगरों और गाँवों में फिरता रहा और उनके आराधनालयों में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बिमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा l जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे” (मत्ती 9:35-36) l
हमारा संसार केवल भौतिक आवश्यकताओं से नहीं किन्तु आत्मिक टूटेपन से भी पीड़ित है l यीशु उस आवश्यकता को पूरा करने और अपने अनुयायियों को इस कार्य में मदद करने की चुनौती देने आया (पद.37-38) l उसकी प्रार्थना थी कि पिता हमारे चारोंओर अर्थात् अकेलापन, पाप, और बिमारी से संघर्षरत लोगों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए कार्यकर्त्ताओं को खड़ा करेगा l काश पिता दूसरों के लिए हमारे अन्दर इच्छा दे जो उसके हृदय को प्रतिबिंबित करता है l उसकी आत्मा की शक्ति में, हम उसके दयालु फ़िक्र को पीड़ितों पर दर्शा सकते हैं l

प्रमुख उत्कर्ष

मेरे माता-पिता ने मुझे सभी प्रकार का संगीत पसंद करना सिखाया-देसी से लेकर शास्त्रीय संगीत तक l इसलिए जब मैं मास्को राष्ट्रीय सिम्फनी(सम स्वरता) सुनने के लिए रूस के एक सबसे बड़े संगीत हॉल, मास्को कन्सरवेटरी(रक्षा गृह) में गया मेरा हृदय गति से धड़कने लगा l जब संचालक ने संगीतकारों को कुशल काइकोफस्की(प्रसिद्ध रुसी गीतकार एवं संगीतकार) अंश बजाने को कहा, धुन विकसित होकर धीरे-धीरे एक प्रबल अर्थात् एक गहन/प्रगाढ़ और नाटकीय संगीत उत्कर्ष में बदल गया l
वचन इतिहास के सबसे प्रबल उत्कर्ष की ओर बढ़ता है : यीशु मसीह का क्रूस और उसका पुनरुत्थान l अदन के बगीचे में आदम और हव्वा के पाप में गिर जाने के बाद, परमेश्वर ने एक उद्धारकर्ता के आने की प्रतिज्ञा दी (उत्पति 3:15)), और पूरा पुराना नियम में यह मुख्य विषय आगे बढ़ता गया l यह प्रतिज्ञा फसह के मेमने में (निर्गमन 12:21), नबियों की आशा में (1 पतरस 1:10), और परमेश्वर के लोगों की चाहतों में गुंजायमान हुयी l
1 यूहन्ना 4:14 उस कहानी के लक्ष्य को प्रमाणित करता है : “हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है l” कैसे? परमेश्वर ने अपने टूटे संसार के लिए अपनी बचाव प्रतिज्ञा को पूरा किया जब यीशु हमें क्षमा देने के लिए और हमारे सृष्टिकर्ता के साथ हमारे सम्बन्ध को पुनःस्थापित करने के लिए मृत्यु सहा और जी उठा l और एक दिन वह पुनः वापस आएगा और अपने सम्पूर्ण सृष्टि को पुनःस्थापित कर देगा l
जब हम हमारे लिए परमेश्वर पुत्र का कार्य याद करते हैं, हम परमेश्वर का अनुग्रह अर्थात् यीशु का महान उत्कर्ष और अपने लिए और उसके संसार के लिए बचाव का उत्सव मानते हैं l

साहसी कदम

दूसरे विश्व युद्ध के आरम्भ में टेरेसा प्रेकेरोवा किशोर ही थी जब नाज़ी लोगों ने उसके देश पोलैंड पर हमला किए l यह सर्वनाश[holocaust] के आरम्भ में था जब नाज़ी लोग उसके यहूदी पड़ोसियों को गिरफ्तार करने लगे और वे गायब होने लगे l इसलिए टेरेसा और पोलैंड के अन्य नागरिकों ने अपने जीवनों को दाँव पर लगाकर उन पड़ोसियों को वॉरसॉ यहूदी बस्तियों और नाज़ी लोगों के शोधन/क़त्ल[purge] से बचाया l टेरेसा युद्ध और सर्वनाश [holocaust] की प्रमुख इतिहासकार हो सकती थी, किन्तु यह तो उसका साहस ही था जिसके कारण वह उस बुराई की लहरों के विरुद्ध खड़ी रह सकी और जिसने उसे यरुशलेम में याड वशेम होलोकोस्ट मेमोरियल[Yad Vashem Holocaust memorial] में राईचस अमंग द नेशन्स[Righteous Among the Nations]की सूची में पहुँचा दिया l
बुराई के विरुद्ध खड़े रहने के लिए साहस की ज़रूरत है l पौलुस ने इफिसुस की कलीसिया से कहा, “क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध लहू और माँस से नहीं परन्तु प्रधानों से, और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं” (इफिसियों 6:12) l स्पष्ट रूप से यह अदृश्य विरुद्धता हममें से किसी के लिए सहन से बाहर है, इसलिए परमेश्वर ने हमें “शैतान की युक्तियों के सामने खड़े” (पद.11) रहने हेतु सक्षम बनाने के लिए ज़रूरी आत्मिक संसाधन दिए हैं  अर्थात् (परमेश्वर के सारे हथियार) l
उस साहसी कदम में क्या कुछ शामिल हो सकता है? यह अन्याय के विरुद्ध कार्य करना या किसी परिचित निर्बल या शोषित व्यक्ति के पक्ष में खड़े रहकर उसकी मदद करना हो सकता है l चाहे किसी प्रकार का संघर्ष हो, हम साहसी हो सकते हैं-हमारे परमेश्वर ने पहले से ही हमें उसके लिए और बुराई के विरुद्ध खड़े रहने का संसाधन दिया है l  

एक नाम में क्या है?

“जिप” हार्डिन, एक मेथोडिस्ट प्रचारक ने अपनी आशा और अभिलाषा को दर्शाते हुए अपने छोटे बेटे का नाम प्रसिद्ध प्रचारक जॉन वेस्ली के नाम पर रखा l हालाँकि, यह दुखद था कि जॉन वेस्ली हार्डिन, ने मिशनरी हमनाम के विपरीत अलग मार्ग का चुनाव किया l बयालिस लोगों की हत्या करने का दावा करते हुए, हार्डिन पश्चिमी अमरीका का 1800 वीं सदी के अंतिम काल का सबसे कुख्यात बन्दुक युद्ध में शामिल लड़ाका और अपराधी बना l

वर्तमान के अनेक संस्कृतियों की तरह,  बाइबल में, नाम का विशेष महत्त्व दिखाई देता है l परमेश्वर पुत्र के जन्म की घोषणा के समय, एक स्वर्गदूत ने युसूफ से मरियम के पुत्र का नाम यीशु, रखने को कहा, “क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा” (मत्ती 1:21) l यीशु नाम का अर्थ “प्रभु उद्धार करता है” जो पापों से बचाने के उसके मिशन/उद्देश्य को प्रमाणित किया l

हार्डिन के विपरीत, यीशु पूरी रीति से और संतोषजनक तरीके से अपने नाम के अनुकूल जीवन व्यतीत किया l उसने बचाने के अपने मिशन को पूरा किया l यूहन्ना ने यीशु के नाम की जीवन देनेवाली सामर्थ की यह कहकर पुष्टि की, “परन्तु यह इसलिए लिखे गए हैं कि तुम विश्वास करो कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ” (यूहन्ना 20:31) l प्रेरितों के काम पुस्तक सबको उस पर भरोसा करने के लिए बुलाता है, क्योंकि, “स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें” (प्रेरितों 4:12) l

यीशु के अतुलनीय नाम पर विश्वास करनेवाले उसके द्वारा अपने लिए क्षमा और आशा का अनुभव् करेंगे l क्या आपने अभी तक उसका नाम पुकारा है?

स्काई गार्डन

जब मैं लंदन में था तो एक मित्र ने मेरी पत्नी मार्लीन और मेरे लिए स्काई गार्डन की यात्रा की व्यवस्था की। यह गार्डन पैंतीस मंजिला इमारत की छत पर बना है जिसका ढांचा (छत और दीवारें) कांच की हैं और वहां पौधे, पेड़ और फूल हैं। वहां 500 फीट की ऊंचाई से नीचे देखते हुए हम सेंट पॉल कैथेड्रल, टॉवर ऑफ लन्दन, और अन्य दृश्यों की सराहना कर रहे थे। यह लुभावना दृश्य हमारे देखने के नजरिए पर एक उपयोगी सबक दे रहा था।

परमेश्वर हमारे हर अनुभव को अपने नज़रिए से देखते हैं। भजनकार ने लिखा, "क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि ...; "(भजन संहिता 102:19-20 )

भजन संहिता 102 में वर्णित लोगों के समान, हम भी अक्सर निराशा से "तड़पते हुए" अपने संघर्षों के साथ वर्तमान में कैद हो जाते हैं, ऐसा संभव नही कि परमेश्वर न जानते हों कि हमारेजीवन में क्या होने वाला है। जैसे भजनकार ने आशा की, कि परमेश्वर का नज़रिया ऐसा छुटकारा देगा  जो अंत में “घात होन वालों: को भी छुड़ा लेगा" (पद 20, 27-28)।

कठिन क्षणों में, याद रखें: भले ही आगे होने बातों की हमें जानकारी न हो, परन्तु हमारे परमेश्वर को निश्चय है।  हम हर आने वाले क्षण के लिए उन पर भरोसा कर सकते हैं।

समय बताना

“पश्चिम के देश के लोगों के पास घड़ियाँ होती हैं l अफ्रीकियों के पास समय होता है l” ऑस गिनिस ने अपनी पुस्तक इम्पॉसिबल पिपल में  एक अफ़्रीकी कहावत का सन्दर्भ देते हुए यह कहा l यह मुझे उन समयों पर विचार करने को विवश किया जब मैंने किसी निवेदन का उत्तर, “मेरे पास समय नहीं है” से दिया था l मैंने विचार किया कि किस तरह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य पीड़ादायक होता है, और कार्यक्रम और काम को पूरा करने का निर्धारित समय जो मेरे जीवन पर अधिकार रखता है l 

मूसा ने भजन 90 में प्रार्थना की, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं” (पद.12) l और पौलुस लिखता है, “इसलिए ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो . . . अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:15-16) l

मेरा अनुमान है कि पौलुस और मूसा इस बात में सहमत होंगे कि हमारे द्वारा समय का बुद्धिमत्ता से उपयोग केवल घड़ी देखना नहीं है l स्थिति हमें एक सख्त कार्यक्रम के पालन करने को विवश करेगी या हम अपने समय के बढ़ाए हुए भाग का उपहार किसी को देंगे l

इस संसार में हमारे पास मसीह के लिए अंतर लाने के लिए बहुत थोड़ा समय है और हमें उस अवसर को बढ़ाने की ज़रूरत है l इसका मतलब है कि मसीह जिन व्यक्तियों को हमारे जीवनों में आने देता है उन तक मसीह के धीरजवंत प्रेम को दिखाने के लिए हमें अपने घड़ियों और अपनी योजनाओं को थोड़े समय के लिए अलग रखना होगा l

जब हम अनंत मसीह की सामर्थ और अनुग्रह में जीवन बिताते हैं, हम अनंत के लिए अपने समय को प्रभावित करते हैं l

घड़ियाँ और कैलेंडर

मेरे पिता की मृत्यु 58 वर्ष की उम्र में हुई l उस समय से, मैं ठहर कर उस तारीख को अपने पिता और मेरे जीवन पर उनके प्रभाव को याद करता हूँ l जब मैंने पहचाना कि मैंने उनके साथ  रहने से अधिक उनके बिना  जीवन बिताया है, तो मैंने अपने जीवन की संक्षिप्तता पर विचार करने लगा l

पिछली बातों पर विचार करते समय, हम समय के किसी घटना और हमारे हृदयों में उससे उत्पन्न होने वाली भावनाओं से भी संघर्ष करते हैं l समय को घड़ियों और कैलन्डरों की सहायता से मापने  के बावजूद भी हम घटनाओं के कारण समय को याद करते हैं l जीवन के उन क्षणों में जो गहरी भावनाएं उत्पन्न करता हैं, हम आनंद, हानि, आशीष, पीड़ा, सफलता, और पराजय का अनुभव कर सकते हैं l

बाइबल हमें उत्साहित करती है : “हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर करो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है” (भजन 62:8) l यह कथन आरामदायक समय का नहीं है l शत्रुओं से घिरे हुए दाऊद ने इन शब्दों को लिखा (पद.3-4) l ऐसी स्थिति में भी, वह परमेश्वर के सामने ठहरा रहा (पद.1,5) जिससे हम याद करते हैं कि परमेश्वर का अपराजित प्रेम (पद.12) संघर्ष के उन सभी समयों से कहीं महान है जिसका हम सामना करते हैं l

हर एक घटना में, हमें यह भरोसा है : हमारा परमेश्वर हमारे साथ खड़ा है, और वह हमारे जीवनों के सभी क्षणों में भरोसेमंद से कहीं बढ़कर है l जब जीवन के समय हमें पराजित करने की कोशिश करें, उसकी सहायता सही समय पर मिलेगी l

बाबुश्का महिला

1963 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या सम्बंधित रहस्यों में “बाबुश्का महिला” एक रहस्य है l मूवी कैमरा द्वारा उन घटनाओं की ली गयी तस्वीरों में, वह पकड़ में नहीं आयी है l यह रहस्यमयी महिला, जो एक ओवरकोट और स्कार्फ(रुसी बूढ़ी महिला  की तरह दिखाई देती हुई) पहनी हुई दिखाई देती है, की पहचान नहीं हुई है और उसकी फिल्म कभी नहीं देखी गयी है l दशकों से, इतिहासकार और विद्वानों का अनुमान है कि भय ने “बाबुश्का महिला” को उस नवम्बर की दुखद शाम की अपनी कहानी बताने से रोका है l

यीशु के शिष्यों के छिप जाने के पीछे किसी तरह का अनुमान लगाना ज़रूरी नहीं है l वे उन अधिकारियों के भय से जिन्होंने उनके स्वामी की हत्या की थी दुबक गए थे (यूहन्ना 20:19) और सामने आकर अपने अनुभव बताने से हिचकिचा रहे थे l किन्तु तब ही यीशु मृतकों में से जी उठा l पवित्र आत्मा के आने के बाद मसीह के अनुयायियों का जो एक समय डरे हुए थे अब शांत रखना असंभव था! पेंतिकुस्त के दिन, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से पूर्ण शमौन पतरस ने घोषणा की, “अतः अब इस्राएल का सारा घराना निश्चित रूप से जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया , प्रभु भी ठहराया और मसीह भी” (प्रेरितों 2:36) l

यीशु के नाम में निडरतापूर्वक बोलने का अवसर निर्भीक लोगों अथवा सेवा को जीविका के रूप में लेने का प्रशिक्षण प्राप्त करनेवालों तक सीमित नहीं है l यह तो अन्तर्निवास करनेवाला पवित्र आत्मा है जो यीशु का सुसमाचार बताने की योग्यता देता है l उसकी सामर्थ्य से, हम साहस का अनुभव करके दूसरों के साथ अपने उद्धारकर्ता के विषय में बताते हैं l  

नहीं लौटने का स्थान

एक और नदी पार करने की तरह यह इतना सरल नहीं था l कानून के अनुसार, कोई भी रोमी सेनापति सेना के टुकड़ी के साथ रोम में प्रवेश नहीं कर सकता था l  इसलिए जब जुलियस सीज़र ई.पू. 49 में सेना की 13 वीं टुकड़ी को रुबिकोन नदी के पार इटली में प्रवेश कराया, यह राजद्रोह था l सीज़र का निर्णय बदला नहीं जा सकता था, और रोम के महान सेनापति का पूर्ण शासक बनने तक गृह-युद्ध होता रहा l  आज भी, वाक्यांश “रुबिकोन नदी पार करना,” अलंकार “जहां से लौटा नहीं जा सकता है उस स्थान को पार करना” के रूप में उपयोग किया जाता है l

कभी-कभी हम दूसरों को कुछ बोलकर सम्बन्धात्मक रुबिकोन नदी पार कर देते हैं l कहे गए शब्द, वापस नहीं लिए जा सकते हैं l जब ये शब्द हमारे होठों से निकल जाते हैं, उनसे मदद और आराम मिलता है अथवा हानि होती है जो सुधारी नहीं जा सकती, उसी प्रकार जिस तरह सीज़र रोम में प्रवेश किया था l याकूब यह लिखते हुए, शब्दों के विषय एक और चित्रण देता है, “जीभ भी एक आग है; जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है, और सारी देह पर कलंक लगाती है, और जीवन गति में आग लगा देती है, और नरक कुण्ड कि आग से जलती रहती है (याकूब 3:6) l

जब हमें अहसास हो कि हमने किसी के साथ रुबिकोन नदी पार कर दी है, हम उनसे और परमेश्वर से क्षमा मांग सकते हैं (मत्ती 5:23-24); 1 यूहन्ना 1:9) l किन्तु इससे बेहतर परमेश्वर के पवित्र आत्मा में विश्राम प्राप्त करते हुए, पौलुस की चुनौती पर ध्यान देना है, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो” (कुलु. 4:6), ताकि हमारे शब्दों द्वारा केवल प्रभु को आदर ही नहीं मिलेगा, किन्तु हमारे चारों ओर के लोग की उन्नत्ति होगी और वे उत्साहित होंगे l