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Articles by बिल क्राऊडर

सख्ती और कोमलता

कवि कार्ल सैंडबर्ग ने पूर्व अमेरिकी राष्टपति अब्राहम लिंकन के बारे में लिखा,  “कभी-कभी ही मानव जाति की कहानी में पृथ्वी पर आनेवाला एक व्यक्ति सख्त और कोमल दोनों होता है, . . . जिसके हृदय और मस्तिष्क में भयानक तूफ़ान और बयान से बाहर और सिद्ध शांति का विरोधाभास होता है l” “सख्ती और कोमलता” वर्णन करता है कि किस प्रकार लिंकन ने स्वतंत्रता की लालसा रखनेवाले व्यक्तियों के लिए चिंता के साथ अपने पद की ताकत को संतुलित किया l

सम्पूर्ण इतिहास में केवल एक व्यक्ति ने सामर्थ्य और कोमलता, ताकत और करुणा को पूर्णतया संतुलित किया l वह व्यक्ति यीशु मसीह है l  युहन्ना 8 में, जब धार्मिक अगुओं ने एक दोषी स्त्री को अपराधी ठहराने के लिए यीशु का सामना किया, उसने सख्ती और कोमलता दोनों ही प्रदर्शित किया l उसने रक्त-पिपासु भीड़ की मांगों का विरोध किया, और इसके बदले उनकी आलोचनात्मक दृष्टि को उन्हीं की ओर कर दिया l  उसने उनसे कहा, “तुम में जो निष्पाप हो, वही पहले उसको पत्थर मारे” (पद.7) l उसके बाद यीशु ने स्त्री से यह कहते हुए, “मैं भी तुम पर दण्ड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना” (पद.11) करुणा की कोमलता का नमूना दर्शाया l

पिता का हमें यीशु के समान बनाने के कार्य को हम उसकी “सख्ती और कोमलता” को हमारे अपने प्रत्युत्तर में प्रतिबिंबित करके प्रगट कर सकते हैं l हम संसार को उसका हृदय दिखा सकते हैं जो करुणा की कोमलता और न्याय की सख्ती दोनों ही का भूखा है l

निम्न महसूस करना

अनेक फिल्म आलोचक डेविड लीन की फिल्म लॉरेंस ऑफ़ अरेबिया(Lawrence of Arabia) को अब तक की महान फिल्मों में से एक मानते हैं l अरब के प्रत्यक्ष मरुभूमि के अंतहीन परिदृश्यों के साथ, इसने फिल्म निर्माताओं की एक पीढ़ी को प्रभावित किया है – अकादमी अवार्ड विजेता निदेशक स्टीवन स्पीलबर्ग को मिलाकर l “मैं पहली बार ही लॉरेंस को देखकर प्रेरित हुआ,” स्पीलबर्ग ने कहा l “यह मुझे निम्न महसूस कराता है l यह मुझे अभी भी निम्न महसूस कराता है l और यह उसकी महानता का एक माप है l”

जो मुझे निम्न महसूस कराता है वह सृष्टि का विस्तार है – जब मैं समुद्र को निहारता हूँ, विमान द्वारा ध्रुवीय बर्फ छोटी के ऊपर से उड़ता हूँ, या खरबों तारों से झिलमिलाते हुए रात के आकाश का अवलोकन करता हूँ l यदि रचित सृष्टि इतनी व्यापक है, वह सृष्टिकर्ता कितना महान होगा जिसने अपने शब्दों से इन्हें रच दिया!

परमेश्वर की महानता और हमारी निरर्थकता का भाव दाऊद के शब्दों में प्रतिध्वनित होता है, तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन 8:4) परन्तु यीशु ने हमें निश्चित किया, “आकाश के पक्षियों को देखो ! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उनको खिलाता है l क्या तुम उनसे अधिक मूल्य नहीं रखते? (मत्ती 6:26) l

मैं छोटा और महत्वहीन महसूस कर सकता हूँ, परन्तु मैं अपने पिता की नज़रों में बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण हूँ – ऐसा महत्त्व जो हर बार प्रमाणित होता है जब मैं क्रूस की ओर देखता हूँ l अपनी संगति को मेरे साथ पुनःस्थापित करने के लिए जो कीमत वह देने को तैयार था वही प्रमाण है कि वह मुझे कितना महत्त्व देता है l

प्रेम या पैसे के लिए

आयरिश कवि ऑस्कर वाइल्ड ने कहा, “जब मैं जवान था मैं सोचता था कि पैसा जीवन में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु थी; अब जब कि मैं बूढ़ा हो गया हूँ मैं जानता हूँ कि वह है l” उसकी टिप्पणी मज़ाक बन गयी, वह छियालीस वर्ष की उम्र तक जीवित रहा, इसलिए वास्तव में वह “बूढ़ा” हुआ ही नहीं l वाइल्ड ने पूरी तरह समझ लिया कि जीवन पैसे के विषय नहीं है l

पैसा अस्थायी है; वह आता है और वह चला जाता है l इसलिए जीवन अवश्य ही पैसे से और जो पैसा खरीद सकता है से अधिक होगा l यीशु ने अपनी पीढ़ी के लोगों – धनी और निर्धन दोनों ही को –एक पुनः जांची हुए उपयोगिता पद्धति के प्रति चुनौती दी l लूका 12:15 में यीशु ने कहा, “चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो; क्योंकि किसी का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता l” हमारी संस्कृति में, जहाँ और अधिक और नया और बेहतर की ओर स्थायी ध्यान है, संतोष के लिए और पैसा और सम्पति के विषय हमारा दृष्टिकोण क्या है, दोनों ही के लिए कुछ कहा जाना चाहिए l

यीशु से मुलाकात करके, एक जवान धनी व्यक्ति उदास होकर चला गया क्योंकि उसके पास बहुत अधिक सम्पति थी जिसे वह छोड़ना नहीं चाहता था (देखें लूका 18:18-25), परन्तु कर अधिकारी जक्कई अधिकाधिक सम्पति/पैसा त्याग दिया जिसे उसने इकठ्ठा करने में अपना जीवन लगाया था (लूका 19:8) l मसीह के हृदय को गले से लगाना ही अंतर है l उसके अनुग्रह में, हम अपने अधिकार में की वस्तुओं के प्रति एक स्वस्थ दृष्टिकोण रख सकते हैं – ताकि वे हम पर नियंत्रण करनेवाली वस्तुएँ न बन जाएँ l

फुटबॉल और चरवाहे

इंग्लिश फुटबॉल का एक लुभावना पहलु प्रत्येक मैच के आरंभ में प्रशंसकों द्वारा गाया जानेवाला टीम का गान है l ये गीत आनंद (“Glad All Over”) से लेकर चंचल/मनमौजी (“I’m Forever Blowing Bubbles”) से लेकर आश्चर्यजनक तक होते हैं l उदाहरण के लिए  “भजन 23,” वेस्ट ब्रोमविच ऐल्बियोन के क्लब का गान है l इस भजन के शब्द टीम के स्टेडियम के अन्दर अग्रभाग पर दिखाई देते हैं, जो “वेस्ट ब्रोम बैगिज़” को देखनेवाले सभी दर्शकों से अच्छे, महान, और प्रधान चरवाहे की देखभाल की घोषणा करते हैं l

भजन 23 में, दाऊद ने अपना शाश्वत वचन कहा, “यहोवा मेरा चरवाहा है” (पद.1) l बाद में, सुसमाचार का लेखक, मत्ती हमसे कहनेवाला था, “जब [यीशु ने] भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे” (मत्ती 9:36) l और यूहन्ना 10 में, यीशु ने अपने युग के लोगों “भेड़” के लिए अपना प्रेम और चिंता घोषित किया l “उसने कहा, “अच्छा चरवाहा मैं हूँ” l अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है” (पद.11) l यीशु की करुणा भीड़ के साथ थी, उनकी ज़रूरतों के प्रति उसका प्रतिउत्तर था, और, अंततः, उनके (और हमारे) लिए उसका बलिदान l

“यहोवा मेरा चरवाहा है” एक प्राचीन गीतकाव्य या एक दक्ष स्लोगन से कहीं अधिक है l यह हमारा परमेश्वर हमें जानता है और प्रेम करता है – और उसके पुत्र द्वारा बचाए जाने की सार्थकता बतानेवाला एक भरोसेमंद कथन है l

स्पष्ट संवाद

एशिया में यात्रा करते वक्त, मेरा आई पैड/ipad (जिसमें मेरी पठन सामग्री और कई कार्य के दस्तावेज़ थे) अचानक काम करना बंद कर दिया, एक स्थिति जिसे “मृत्यु का काला स्क्रीन/the black screen of death” कहा जाता है l सहायता चाहते हुए, मुझे एक कंप्यूटर की दूकान मिली और मुझे एक और समस्या का सामना करना पड़ा – मुझे चीनी भाषा नहीं आती थी और दूकान का तकनीशियन अंग्रेजी भाषा नहीं बोलता था l समाधान? उसने एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम खोलकर चीनी भाषा में टाइप किया, किन्तु मैं उसे अंग्रेजी में पढ़ सकता था l प्रक्रिया विपरीत हो गयी जब मैंने अंग्रेजी में उत्तर दिया और उसने चीनी भाषा में पढ़ लिया l इस सॉफ्टवेयर ने हमें स्पष्ट संवाद करने की अनुमति दी, दूसरी भाषाओं में भी l

कभी-कभी, मैं अपने स्वर्गिक पिता से प्रार्थना करते समय उससे संवाद करने और स्पष्ट रूप से अपने दिल की बात बताने में खुद को अयोग्य महसूस करता हूँ – और मैं अकेला नहीं हूँ l हममें से अनेक प्रार्थना के साथ संघर्ष करते हैं l परन्तु प्रेरित पौलुस ने लिखा, “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है : क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर, जो ब्यान से बाहर हैं, हमारे लिए विनती करता है; और मनों का जांचनेवाला जानता है कि आत्मा की मनसा क्या है? क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिए परमेश्वर की इच्छा के अनुसार विनती करता है l रोमियों 8:26-27

पवित्र आत्मा का दान कितना अद्भुत है! किसी भी कंप्यूटर कार्यक्रम से बेहतर l वह पिता के उद्देश्यों के सामंजस्य के साथ मेरे विचारों और इच्छाओं को संप्रेषित करता है l पवित्र आत्मा का कार्य प्रार्थना के कार्य को संभव बनाता है!

आँसुओं का कटोरा

बोस्टन के मेसाचुसेट्स में, “आँसुओं का कटोरा पार करना” शीर्षक की एक पट्टिका 1840 के अंत में भयंकर विपत्ति आयरिश पोटैटो फेमिन(अकाल) के समय मृत्यु से बचने के लिए अटलांटिक महासागर पार करनेवालों की याद दिलाता है l इस महाविपदा में लाखों लोग मर गए थे, जबकि लाखों या उससे भी अधिक संख्या में लोगों ने घर छोड़कर महासागर को पार किया, जिसे जॉन बॉईल ओरीली काव्यात्मक रूप से “आँसुओं का कटोरा” संबोधित करता है l भूख और पीड़ा के कारण, इन यात्रियों ने नैराश्य के समय कुछ आशा ढूंढने का प्रयास किया l  

भजन 55 में, दाऊद ने साझा किया कि उसने किस प्रकार आशा को ढूंढा l जबकि हम उस आशंका की विशिष्टता से जिसका उसने सामना किया अवगत नहीं हैं, उसके अनुभव का बोझ उसे भावनात्मक रूप से तोड़ने में पर्याप्त था (पद.4-5) l उसका स्वाभाविक उत्तर प्रार्थना करना था, “भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता ! (पद.6) l

दाऊद के समान, हम भी पीड़ादायक परिस्थितियों के मध्य सुरक्षा की ओर भागना चाहते हैं l अपनी दशा पर विचार करके, हालाँकि, दाऊद अपनी पीड़ा से दूर भागने के स्थान पर यह गाते हुए, अपने परमेश्वर की ओर भागने का निर्णय किया, “परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूँगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा” (पद.16) l

जब परेशानी आती है, याद रखें कि समस्त सुख का परमेश्वर आपको सबसे अंधकारमय क्षणों और सबसे गहन भय में से निकालने में समर्थ है l उसकी प्रतिज्ञा है कि एक दिन वह स्वयं हमारी आँखों से हर एक आंसू पोंछ देगा (प्रकाशितवाक्य 21:4) l हम इस निश्चयता से बलवंत होकर आज अपने आँसुओं के साथ उस पर दृढ़ भरोसा रख सकते हैं l

भस्म होना

अपनी पुस्तक, द कॉल, में ओस गिन्नेस उस क्षण का वर्णन करते हैं जब विंस्टन चर्चिल, दक्षिणी फ्रांस में अपने मित्रों के साथ छुट्टियों में, एक ठंडी रात खुद को गर्म करने के लिए आग के पास बैठ गए l आग को एक टक देखते हुए, पूर्व प्रधान मंत्री ने चीड़ के लट्ठो को “चटचटाहट, फुसफुसाहट, और खड़खड़ाहट की आवाज़ के साथ जलते हुए देखा l अचानक, उनकी परिचित आवाज़ में गर्जन थी, ‘मैं जानता हूँ लकड़ी के लट्ठे क्यों खड़खड़ाते हैं l भस्म होना क्या होता है मैं जानता हूँ l’”

कठिनाइयाँ, निराशा, ख़तरे, विपत्ति, और हमारी अपनी गलतियों के परिणाम सब हमें भस्म होने की तरह अहसास कराते हैं l परिस्थियां धीरे-धीरे हमारे हृदयों से आनंद और शांति छीन लेती हैं l जब दाऊद ने अपने ही पापी चुनावों के परिणाम को खुद पर पूरी तरह हावी होते देखा, उसने लिखा, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गईं . . . और मेरी तरावट धूपकाल की सी झुर्राहत बनती गयी” (भजन 32:3-4) l

ऐसे कठिन समय में, आप सहायता के लिए किस और मुड़ते हैं? पौलुस, जिसके अनुभव सेवकाई के बोझ और टूटेपन से भरे हुए थे, ने लिखा, “हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते; सताए तो जाते हैं, पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नष्ट नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:8-9) l

यह किस तरह कार्य करता है? जब हम यीशु में विश्राम करते हैं, हमारा अच्छा चरवाहा मेरे जी में जी ले आता है (भजन 23:3) और हमारी यात्रा के अगले कदम के लिए हमें सामर्थ्य देता है l वह यात्रा के हर चरण में हमारा सहचर बनने की प्रतिज्ञा करता है (इब्रानियों 13:5) l

सबसे बड़ा बचाव-मिशन

18 फरवरी 1952 को एक बड़े तूफान ने एक तेलपोत एस एस पेंडलेटन को मैसाचुसेट्स के तट से लगभग दस मील की दूरी पर दो भागों में तोड़ दिया था। चालीस से भी अधिक नाविक खतरनाक हवा और हिंसक लहरों में डूबते हुए जलयान में फंसे हुए थे।  

जब विनाश का संदेश मैसाचुसेट्स के कैथम तट सुरक्षा केन्द्र में पहुँचा, बोट्स्वेन मेट फर्स्ट क्लास के बर्नी वेब्बर लगभग असम्भव प्रतीत होती बाधाओं के विरुद्ध असहाय नाविक दल को बचाने के प्रयत्न में एक जीवन-रक्षक नाव में तीन लोगों को ले कर निकल गए-और वे लगभग मृत्यु-द्वार तक पहुँचे बत्तीस नाविकों को सुरक्षित निकाल लाए। उनके साहसिक कार्य को संयुक्त राज्य के तट रक्षण के इतिहास में सबसे बड़ा बचाव-कार्य माना गया और यह 2016 की फिल्म ड फाईनेस्ट आवर्स का भी विषय बना था।  

लूका 19:10 में यीशु ने यह कहते हुए अपने बचाव-कार्य की घोषणा की, “मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।” क्रूस और पुनरुत्थान उस बचाव-कार्य का अन्तिम प्रदर्शन थे, जब यीशु ने हमारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और उन सभी को पिता से फिर से मिला दिया, जो उस पर भरोसा करते हैं। 2,000 (वर्षों) से लोगों ने उनके साथ उनके भरपूर और अनन्त जीवन के प्रस्ताव को स्वीकार किया है। बचा लिए गए हैं!  

यीशु के अनुगामियों के रूप में पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे पास हमारे उद्धारकर्ता के अब तक के सबसे बड़े बचाव-कार्य में सम्मिलित होने का अवसर है। आपके जीवन में किसे उनके बचाने वाले प्रेम की आवश्यकता है? 

एक सुरक्षित स्थान

मेरा भाई और मैं पश्चिम वर्जिनिया में एक वृक्षयुक्त पहाड़ी की ढाल पर पले और बड़े हुए जिसने हमारी कल्पनाओं के लिए उपजाऊ परिदृश्य प्रदान किया l चाहे टार्जन की तरह बेलों से झुलना हो या स्विस परिवार रोबिनसन की तरह ट्री हाउस बनाना हो, हमने उन कहानियों के परिदृश्यों को निभाया जो हमने पढ़ी थीं और जो फिल्मों में देखा था l हमारे पसंदीदा में से एक था किले बनाकर मान लेना कि हम आक्रमण से सुरक्षित हैं l वर्षों बाद, मेरे बच्चे काल्पनिक शत्रुओं से बचाव के लिए अपने लिए कम्बलों, चादरों, और तकियों से किले अर्थात् “सुरक्षित स्थान” बनाए l एक छिपने का स्थान स्वाभाविक महसूस होता है जहाँ आप सुरक्षित और महफूज़ महसूस कर सकें l

जब इस्राएल का गायक-कवि राजा दाऊद, एक सुरक्षित स्थान ढूंढता था, वह परमेश्वर के आलावा और कहीं नहीं गया l भजन 46:1-2 दावा करते हैं, “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l इस कारण हम को कोई भय नहीं l जब हम दाऊद के जीवन के विषय पुराना नियम के वृतान्त पर विचार करते हैं, और लगभग निरंतर खतरों का सामना करता था, ये शब्द परमेश्वर में भरोसा का एक अद्भुत स्तर प्रगट करते हैं l उन खतरों के बावजूद, वह निश्चित था उसकी सच्ची सुरक्षा परमेश्वर में ही थी l

हम भी उस भरोसे को जान सकते हैं l परमेश्वर जो हमें कभी नहीं छोड़ने या त्यागने का वादा करता है (इब्रानियों 13:5) हम प्रतिदिन अपने जीवन से उसी पर भरोसा रखते हैं l यद्यपि हम एक खतरनाक संसार में रहते हैं, हमारा परमेश्वर हमें शांति और आश्वासन देता हैं – अभी और हमेशा के लिए l वह हमारा सुरक्षित स्थान है l