यह क्यों की जाए?
जब मैं छठी कक्षा में पढ़ रहे अपने पौत्र, लोगन, की बीजगणित के कुछ जटिल गृहकार्य में सहायता कर रहा था, तो उसने मुझे इंजिनियर बनने के अपने सपने के बारे में बताया l जब हम उसके गृहकार्य में x और y के साथ क्या करना है, पता लगा चुके, तब उसने कहा, “मैं कब इसका उपयोग करूँगा?”
मैं यह कहते हुए मुस्कराए बिना नहीं रह सका, “ठीक है, लोगन, अगर तुम इंजिनियर बनते हो तो तुम इसी का उपयोग करोगे!” उसे बीजगणित और अपने प्रत्याशित भविष्य के बीच के सम्बन्ध का एहसास नहीं था l
कभी-कभी हम पवित्रशास्त्र को इसी तरह से देखते हैं l जब हम धर्मोपदेशों को सुनते हैं और बाइबल के कुछ हिस्सों को पढ़ते हैं, तो हम विचार कर सकते हैं, “मैं इसका उपयोग कब करूँगा?” भजनकार दाऊद के पास कुछ उत्तर थे l उसने कहा कि पवित्रशास्त्र में पाए जाने वाले परमेश्वर के सत्य “प्राण को बहाल करती है,” “साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते है,” और “हृदय को आनंदित कर देते है” (भजन 19:7-8) बाइबल की पहली पांच पुस्तकों में पाया जाने वाला पवित्रशास्त्र का ज्ञान, जैसा कि भजन 19 (साथ ही सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र) में उल्लिखित है, प्रतिदिन आत्मा की अगुवाई पर भरोसा करने में हमारी सहायता करता हैI (नीतिवचन 2:6)
और पवित्रशास्त्र के बगैर, हमें उस महत्वपूर्ण तरीके की कमी रहेगी जो परमेश्वर ने हमें उसे अनुभव करने और उसके प्रेम और तरीकों को बेहतर ढंग से जानने के लिए प्रदान किया है l बाइबल का अध्ययन क्यों करें? क्योंकि “यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आँखों में ज्योति ले आती है I” (भजन 19:8)
सबसे अकेला आदमी
20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन अपने चंद्र लैंडिंग मॉड्यूल(लूनर लैंडिंग मॉड्यूल/Lunar Module Landing ) से बाहर निकले और चंद्रमा की सतह पर चलने वाले पहले इंसान बने। लेकिन हम अक्सर उनकी टीम के तीसरे व्यक्ति माइकल कोलिन्स के बारे में नहीं सोचते हैं, जो अपोलो 11 के लिए कमांड मॉड्यूल उड़ा रहे थे।
चांद की सतह का परीक्षण करने के लिए उनके साथियों के सीढ़ी से नीचे उतरने के बाद, कोलिन्स चंद्रमा से दूर की ओर अकेले इंतजार कर रहे थे। वह नील, बज़ और पृथ्वी पर सभी के संपर्क से बाहर हो गये थे। नासा के मिशन नियंत्रण ने टिप्पणी की, "आदम के बाद से माइक कोलिन्स के रूप में किसी भी मानव ने इस तरह के अकेलापन नहीं जाना।"
ऐसे समय होते हैं जब हम पूरी तरह से अकेला महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, कल्पना कीजिए, याकूब के पुत्र यूसुफ को कैसा लगा होगा जब उसके भाइयों द्वारा उसे बेच दिए जाने के बाद उसे इस्राएल से मिस्र ले जाया गया था (उत्पत्ति 37:23-28) फिर उसे झूठे आरोपों में जेल में डाल कर और भी अलग-थलग कर दिया गया (39:19-20)
युसूफ एक विदेशी भूमि में जेल में बिना किसी परिवार के कहीं भी कैसे जीवित रहा होगा? इसे सुनें: जब तक यूसुफ बन्दीगृह में था,“पर यहोवा युसुफ़ के संग संग रहा" (पद. 20-21) उत्पत्ति 39 में हमें इस सांत्वनादायक सत्य की चार बार याद दिलाई गई है।
क्या आप अकेला या दूसरों से अलग-थलग महसूस करते हैं? परमेश्वर की उपस्थिति की सच्चाई को थामे रहें, जिसका वादा स्वयं यीशु ने किया था: "और देखो मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20) अपने उद्धारकर्ता के रूप में यीशु के साथ, आप कभी अकेले नहीं होते।
भय के सात मिनट
जब 18 फरवरी, 2021 को मार्स रोवर पर्सिवेरेंस उस लाल ग्रह पर उतरा, तो इसके आगमन की निगरानी करने वालों को सात मिनट का भय (दहशत) सहना पड़ा। जैसे ही अंतरिक्ष यान ने अपनी 292 मिलियन मील की यात्रा समाप्त की, यह एक जटिल लैंडिंग प्रक्रिया से गुजरा, जिसे इसे स्वयं ही करना था। मंगल ग्रह से पृथ्वी तक सिग्नल आने में कई मिनट लगते हैं, इसलिए नासा लैंडिंग के दौरान पर्सिवेरेंस से कुछ सुन नहीं सका। संपर्क में न होना उस टीम के लिए बहुम डरावना था जिसने इस मिशन में इतना प्रयास और संसाधन लगाया था।
कभी कभी हम अपने स्वयं के डर के समय का अनुभव कर सकते हैं जब हमें लगता है कि हम परमेश्वर से नहीं सुन रहे हैं; हम प्रार्थना करते हैं लेकिन हमें जवाब नहीं मिलता है। पवित्रशास्त्र में हम पाते हैं कि लोगों को उनकी प्रार्थना के उत्तर जल्दी मिल जाते हैं (दानिय्येल 9: 20– 23) और जिन्हें लंबे समय तक उत्तर नहीं मिल रहा था, हन्ना की कहानी (1शमूएल 1:10–20 में) । विलंबित उत्तर का शायद सबसे मार्मिक उदाहरण, जिसने निश्चित रूप से मरियम और मार्था के दिलों में खौफ पैदा कर दिया था– जब उन्होंने यीशु से अपने बीमार भाई लाजर की मदद करने के लिए कहा (यूहन्ना 11:3)। यीशु ने देर की, और उनके भाई की मृत्यु हो गई (पद 6, 7; 14, 15) । फिर भी चार दिन बाद, मसीह ने लाजर को पुनर्जीवित करके उत्तर दिया (पद 43,44)।
हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर की प्रतीक्षा करना कठिन हो सकता है। लेकिन परमेश्वर हमें दिलासा दे सकता है और हमारी मदद कर सकता है जब हम उसके अनुग्रह के सिंहासन के पास विश्वास के साथ पहुँचते हैं “ कि हम पर दया करें, और उस अनुग्रह को पाएं जो हमारी आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे” इब्रानियों 4:16 ।
अपने शरणस्थान की ओर दौड़ना
जब मैं पेरू की एक अल्पकालिक मिशन यात्रा के दौरान सुसमाचार प्रचार कार्य पर थी, एक युवा ने मुझसे पैसे मांगे l सुरक्षा कारणों से, मेरी टीम को पैसे नहीं देने का निर्देश दिया गया था, तो मैं उसकी मदद कैसे कर सकती थी? तब मुझे प्रेरितों के काम 3 में लंगड़े आदमी के प्रति प्रेरित पतरस और यूहन्ना की प्रतिक्रिया याद आई l मैंने उसे समझाया कि मैं उसे पैसे नहीं दे सकती, लेकिन मैं उसके साथ परमेश्वर के प्रेम का सुसमाचार साझा कर सकती हूँ l जब उसने कहा कि वह एक अनाथ है, तो मैंने उससे कहा कि परमेश्वर उसका पिता बनना चाहता है l इससे उसकी आँखों में आंसू आ गए l मैंने सहायता करने के लिए उसे हमारे मेजबान(host) चर्च के एक सदस्य के साथ जोड़ा l
कभी-कभी हमारे शब्द अपर्याप्त लग सकते हैं, लेकिन जब हम दूसरों के साथ यीशु को साझा करते हैं तो पवित्र आत्मा हमें सशक्त बना सकता है l
जब पतरस और यूहन्ना मंदिर के प्रांगन में उस व्यक्ति से मिले, तो उन्हें पता चला कि मसीह को साझा करना अब तक का सबसे बड़ा उपहार था l “तब पतरस ने कहा, “चाँदी और सोना तो मेरे पास है नहीं, परन्तु जो मेरे पास है वह तुझे देता हूँ; यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर”(पद.6) l उस दिन उस व्यक्ति को उद्धार और चंगाई मिली l परमेश्वर खोए हुए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हमारा उपयोग करता रहता है l
जब हम इस क्रिसमस पर देने के लिए सही उपहार खोज रहे हैं, आइये याद रखें कि सच्चा उपहार यीशु को जानना और उसके द्वारा प्रदान किये जाने वाला शाश्वत उद्धार है l आइये हम लोगों को उद्धारकर्ता की ओर ले जाने के लिए परमेश्वर द्वारा उपयोग किये जाने का प्रयास जारी रखें l
लोगों से यीशु के बारे में बताएं
पौलुस यहूदी शुद्धिकरण समारोह में मंदिर में गया था(प्रेरितों 21:26) l लेकिन कुछ उपद्रवियों ने सोचा कि वह क़ानून के विरुद्ध शिक्षा दे रहा था, इसलिए उन्होंने उसे मार डालना चाहा(पद.31) l रोमी सैनिक तुरंत हस्तक्षेप कर पौलुस को गिरफ्तार कर लिये, उसे बाँध दिया, और भीड़ के चिल्लाते हुए, “उसका अंत कर दो!”(पद.36) उसे मंदिर क्षेत्र से बाहर ले गए l
प्रेरित ने इस धमकी पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त दी? उसने पलटन के सरदार से पुछा कि क्या वह “लोगों से बात [कर सकता है]”(पद.39) l जब रोमी सरदार ने अनुमति दी, तो पौलुस, जिसका खून बह रहा था, और घायल था, क्रोधित भीड़ की ओर मुड़ा और यीशु में अपना विश्वास साझा किया(22:1-16) l
यह दो हज़ार साल से भी पहले की बात है—बाइबल की एक पुरानी कहानी जिससे हमें जुड़ना मुश्किल हो सकता है l ऐसे देश में जहां विश्वासियों पर नियमित रूप से अत्याचार किया जाता है, अभी हाल ही में, पीटर नाम के एक व्यक्ति को उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह जेल में बन्द अपने एक मित्र से मिलने गया था जो यीशु में विश्वास करता था l पीटर को जेल की एक अँधेरी कोठरी में डाल दिया गया और पूछताछ के दौरान उसकी आँखों पर पट्टी बाँध दी गयी l जब आँखों से पट्टी हटाई गयी तो उसने चार सैनिकों को बंदूकें ताने हुए देखा l पीटर की प्रतिक्रिया? उसने इसे अपना विश्वास साझा करने के “एक उत्तम अवसर के रूप में देखा l”
पौलुस और एक आधुनिक/modern-day पीटर एक कठिन, महत्वपूर्ण सत्य की ओर इशारा करते हैं l भले ही परमेश्वर हमें कठिन समय का अनुभव करने की अनुमति देता है—यहाँ तक कि सताव भी—हमारा कार्य एक ही है : “सुसमाचार प्रचार [करें]”(मरकुस 16:15) l वह हमारे साथ रहेगा और हमें अपना विश्वास साझा करने के लिए बुद्धि और सामर्थ्य देगा l
यीशु के लिए दौड़ना
जब लोग 100 मीटर दौड़ के बारे में विचारते हैं, तो वर्तमान विश्व-रिकॉर्ड धारक उसेन बोल्ट(Usain Bolt) का ख्याल आ सकता है l लेकिन हम जूलिया “हरिकेन” हॉकिंस(Julia “Hurricane” Hawkins”) के बारे में नहीं भूल सकते हैं l 2021 में, जूलिया ने लुइसियाना सीनियर गेम्स(Louisiana Senior Games) में 100 मीटर दौड़ जीतने के लिए अन्य सभी धावकों से पहले समापन रेखा पार कर ली l उसका समय बोल्ट(Bolt) के 9.58 सेकंड से थोड़ा धीमा था—60 सेकंड से थोड़ा अधिक l लेकिन उनकी उम्र भी 105 वर्ष थी!
उस महिला के विषय पसंद करने लायक बहुत कुछ है जो इस उम्र में भी फर्राटा दौड़ रही है l और यीशु में विश्वासियों के बारे में पसंद करने लायक बहुत कुछ है जो उसे अपने लक्ष्य के रूप में लेकर दौड़ना कभी नहीं छोड़ते(इब्रानियों 12:1-2) l भजनकार जीवन के बाद के चरणों में विश्वासयोग्य लोगों के बारे में यह कहता है : “धर्मी लोग खजूर के पेड़ की तरह फूले फलेंगे . . . वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे”(भजन 92:12-14) l
पुराने विश्वासी जो इस प्रकार के मानक का पालन करते हैं, उन्हें प्रेरित पौलुस के तीतुस को लिखे पत्र में और निर्देश मिल सकते हैं l अनुभवी पुरूषों का “विश्वास और प्रेम और धीरज पक्का हो”(तीतुस 2:2), और बूढ़ी स्त्रियाँ “अच्छी बातें सिखानेवाली हों”(पद.3) l
पुराने विश्वासियों से दौड़ में भाग लेना बंद करने का कोई बुलावा नहीं है l शायद उस तरह नहीं जैसे जूलिया ट्रैक पर करती है लेकिन उन तरीकों से जो परमेश्वर का आदर करते हैं क्योंकि वह उन्हें ज़रूरी सामर्थ्य देता है l आइये हम सब उसकी और दूसरों की अच्छी सेवा करने की दौड़ में भाग लें l
परमेश्वर की दी हुयी सुरक्षा
मेरी पत्नी और मैं हर साल अपनी साइकिल से अपने घर के आसपास की पगडंडियों पर सैकड़ों मील की दूरी तय करते हैं l अनुभव को बेहतर बनाने के लिए, हमारे पास कुछ सहायक उपकरण हैं जिन्हें हमने अपनी साइकिल से जोड़ा है l सू(Sue) के पास साइकिल के आगे की लाइट, एक बैक लाइट, एक ओडोमीटर(odometer-गति मापने का मीटर), साइकिल का एक ताला है l मेरी साइकिल में पानी की बोतल रखने वाला है l वास्तव में, हम हर दिन अपने मार्ग पर सफलतापूर्वक यात्रा कर सकते हैं और बिना अतिरिक्त खर्च के समस्त दूरी तय कर सकते हैं l वे सहायक हैं लेकिन वैकल्पिक हैं l
इफिसियों की पत्री में, प्रेरित पौलुस सहायक उपकरणों के एक और सेट के बारे में लिखता है—लेकिन ये वैकल्पिक नहीं हैं l उसने लिखा कि हमें यीशु में अपना विश्वास दर्शाने के लिए इन चीज़ों को “धारण करना” चाहिए l हमारे जीवन सरल पथ नहीं हैं l हम एक ऐसी लड़ाई में हैं जिसमें हमें “शैतान की युक्तियों के विरुद्ध खड़ा [होना है]”(6:11), इसलिए हमें अच्छी तरह से सुसज्जित होना चाहिए l
पवित्रशास्त्र की बुद्धिमत्ता के बिना, हमें त्रुटी स्वीकार करने के लिए भटकाया जा सकता है l हम यीशु की सहायता के बिना “सच्चाई” को जी नहीं पाएंगे, और झूठ के आगे झुक जायेंगे (पद.14) l “सुसमाचार” के बिना, हमारे पास कोई “शांति” नहीं है(पद.15) l “विश्वास” द्वारा हमारी रक्षा नहीं होने पर, हम संदेह के शिकार हो जाएंगे(पद.16) l हमारा “उद्धार” और पवित्र आत्मा हमें परमेश्वर के लिए अच्छा जीवन जीने के लिए सहारा देते हैं(पद.17) l यह हमारा कवच/हथियारबंदी है l
यह कितना विशेष है कि हम जीवन के वास्तविक खतरों से सुरक्षित रहकर यात्रा करें l हम ऐसा तब करते हैं जब मसीह हमें रास्ते में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करता है—जब हम परमेश्वर द्वारा प्रदान किये गए कवच/शस्त्र को “धारण” कर लेते हैं l
अब से हम विदेशी नहीं
"तुम यहाँ की नहीं हो।" इन शब्दों ने एक आठ साल की बच्ची के दिल को गहरा दुख पहुंचाया और यह दुख उसके साथ बना रहा । उसका परिवार युद्धग्रस्त देश के एक शरणार्थी शिविर से एक नए देश में पहुँचा था, और उसके आप्रवास कार्ड ( किसी दूसरे देश में रहने के लिए आना) पर विदेशी शब्द अंकित था। उसे महसूस हुआ जैसे वह अलग की हुई है।
एक वयस्क के रूप में, हालाँकि उसने यीशु में अपना विश्वास रखा, फिर भी वह अलग-थलग महसूस कर रही थी - इस भावना से आहत थी कि वह एक अप्रिय विदेशी थी। अपनी बाइबल पढ़ते समय, उसने इफिसियों 2 में लिखे वादों को पाया। पद 12 में, उसने उस पुराने, परेशान करने वाले शब्द अलग को देखा। "तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।" लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ती रही, उसने देखा कि कैसे मसीह के बलिदान ने उसकी स्थिति बदल दी थी। उसे पद 19 मिला, जिसने उससे कहा, " तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।" वह परमेश्वर के लोगों की "साथी नागरिक" थी। यह जानकर कि उसकी नागरिकता स्वर्ग की है, वह आनंद से भर गई। अब वह फिर कभी विदेशी नहीं कहलाएगी। परमेश्वर ने उसे अंदर ले लिया है और उसे स्वीकार किया है।
हमारे पाप के कारण, हम परमेश्वर से बहुत दूर थे। लेकिन अब हमें उसी दशा में नहीं रहना। यीशु उन सभी के लिए शांति लाया जो "दूर" थे (पद 17), उन सभी को जो उस पर भरोसा करते है, अपने अनंतकाल के राज्य का साथी नागरिक बना दिया - मसीह की देह के रूप में एकजुट हो गए।
एक बच्चे की आशा
जब मेरी पोती एलियाना सिर्फ सात वर्ष की थी, उसने अपने स्कूल में ग्वाटेमाला के एक अनाथालय के बारे में एक विडियो देखा l उसने अपनी माँ से कहा, “हमें उनकी सहायता करने के लिए वहाँ जाना होगा l” उसकी माँ ने उत्तर दिया कि वो इसके बारे में तब विचार करेंगी जब वह बड़ी हो जाएगी l
एलियाना कभी नहीं भूली, और निश्चित रूप से, जब वह दस वर्ष की थी, तो उसका परिवार अनाथालय में सहायता करने गया l दो वर्ष बाद, वे पुनः गए, इस बार वे एलियाना के स्कूल के दूसरे परिवारों से एक जोड़े को भी साथ ले गए l जब एलियाना पंद्रह वर्ष की थी, तो वह और उसके पिता सेवा करने के लिए पुनः ग्वाटेमाला गए l
हम कभी-कभी सोचते हैं कि छोटे बच्चों की इच्छाएँ और सपने वयस्कों की आशाओं का बोझ नहीं उठाते l लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि बाइबल ऐसा कोई भेद नहीं करती l परमेश्वर बच्चों को बुलाता है, जैसे शमूएल के मामले में (1 शमूएल 3:4) l यीशु छोटों के विश्वास का सम्मान करता है (लूका 18:16) l और पौलुस ने कहा कि युवा विश्वासियों को लोगों को केवल इसलिए उन्हें नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि वे “युवा हैं” (1 तीमुथियुस 4:12) l
इसलिए, हमें अपने बच्चों का मार्गदर्शन करने के लिए बुलाया गया है (व्यवस्थाविवरण 6:6-7; नीतिवचन 22:6), यह पहचानते हुए कि उनका विश्वास हम सभी के लिए एक आदर्श है (मत्ती 18:3) और यह समझना कि उन्हें रोकना कुछ ऐसा है जिसके खिलाफ मसीह ने चेतावनी दी थी (लूका 18:15) l
जब हम बच्चों में आशा की चिंगारी देखते हैं, तो वयस्कों के रूप में हमारा काम उसे प्रज्वलित करने में मदद करना है l और जैसे ही ईश्वर हमारी अगुवाई करता है, उन्हें यीशु में विश्वास और उनकी सेवा के लिए समर्पित जीवन के लिए प्रोत्साहित करें l