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Articles by डेव ब्रेनन

परमेश्वर के अनुग्रह का उपहार

जब मैं एक कॉलेज लेखन कक्षा के लिए, जिसे मैं पढ़ाता हूँ, अध्ययन के एक और ढेर की ग्रेडिंग/मूल्यांकन कर रहा था, तो मैं एक विशेष पेपर से प्रभावित हुआ। यह बहुत अच्छा लिखा गया था! हालाँकि, जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत ही अच्छा लिखा गया था। एक छोटे से शोध से पता चला कि निश्चित रूप से, पेपर एक ऑनलाइन स्रोत से दूसरे के ग्रंथ में से चुराया गया था।

मैंने छात्रा को यह बताने के लिए एक ईमेल भेजा कि उसकी चाल का पता चल गया है। उसे इस पेपर पर शून्य मिल रहा था, लेकिन वह आंशिक क्रेडिट के लिए एक नया पेपर लिख सकती थी। उसकी प्रतिक्रिया : "मैं लज्जित हूं और मुझे बहुत दुख है। आप मुझ पर जो अनुग्रह दिखा रहे हैं मैं उसकी सराहना करती हूँ। मैं इसके लायक नहीं हूँ।" मैंने उसे यह कहकर जवाब दिया कि हम सभी को हर दिन यीशु का अनुग्रह मिलता है। तो मैं उसे अनुग्रह दिखाने से कैसे इनकार कर सकता हूँ?

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे परमेश्वर का अनुग्रह हमारे जीवन को सुधारता है और हमें हमारी गलतियों से मुक्त करता है। पतरस का कहना है कि यह उद्धार देता है: "हमारा तो यह निश्चय है कि . . . प्रभु यीशु के अनुग्रह से हमारा उद्धार हुआ है" (प्रेरितों 15:11)। पौलुस कहता है कि यह हमें पाप से बचने में मदद करता है : "तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन् अनुग्रह के आधीन हो" (रोमियों 6:14)। और एक स्थान पर पतरस का कहना है कि अनुग्रह हमें सेवा करने की अनुमति देता है : "जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पतरस 4:10)।

अनुग्रह। यह परमेश्वर द्वारा स्वतंत्र रूप से दिया गया है (इफिसियों 4:7)। क्या हम इस उपहार का उपयोग दूसरों को प्यार करने और प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं। डेव ब्रैनन

यीशु में संगती

 मुझे नहीं पता कि रविवार की सुबह की सेवा के बाद लाइट बंद करने और चर्च को बंद करने के लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन मैं उस व्यक्ति के बारे में एक बात जानता हूँ: रविवार का खाना देरी से होने वाला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बहुत से लोग चर्च के बाद समय बिताना पसंद करते हैं, और जीवन के फैसलों, दिल की समस्याओं और संघर्षों और बहुत कुछ के बारे में बात करते हैं। आराधना के बीस मिनट बाद चारों ओर देखना और इतने सारे लोगों को एक-दूसरे की संगति का आनंद लेते देखना एक खुशी की बात है। संगति मसीह के समान जीवन का एक महत्वपूर्ण घटक है। साथी विश्वासियों के साथ समय बिताने से मिलने वाली कनेक्टिविटी के बिना, हम विश्वासी होने के कई लाभों से वंचित रह जाएँगे।

संगति मसीह-सदृश जीवन का एक प्रमुख भाग है। साथी विश्वासियों के साथ समय बिताने से मिलने वाली कनेक्टिविटी के बिना, हम विश्वासी होने के कई लाभों से वंचित रह जाएँगे।

उदाहरण के लिए, पौलुस कहता है कि हम “एक दूसरे को शान्ति [दे सकते हैं] और एक दूसरे की उन्नति का कारण” बन सकते हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)। इब्रानियों का लेखक इस बात से सहमत है कि हमें इकट्ठा होने में लापरवाही नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमें "एक दूसरे को समझाते” रहना चाहिए (10:25)। और लेखक यह भी कहता है कि जब हम एक साथ होते हैं, तो हम “भले कामों में उस्काने के लिये एक दूसरे की चिन्ता” करते हैं (पद.24)।

यीशु के लिए जीने के लिए समर्पित लोगों के रूप में, हम खुद को विश्वासयोग्यता और सेवा के लिए तैयार करते हैं जब हम “निरुत्साहित को प्रोत्साहित” करते और “सब की ओर सहनशीलता” दिखाते हैं। (1 थिस्सलुनीकियों 5:14)। उस तरह से जीने से, हमें सच्ची संगति का आनंद लेने में और "आपस में और सब से भी भलाई करने में” (पद.15) मदद करता हैं।                                 

—डेव ब्रैनन

परमेश्वर के सामने बराबर

छुट्टियों के दौरान, मेरी पत्नी और मैंने सुबह-सुबह बाइक की सवारी का आनंद लिया। एक रास्ता हमें करोड़ों डॉलर के घरों के बगल से ले गया। हमने विभिन्न प्रकार के लोगों को देखा--निवासियों को अपने कुत्तों को घुमाते हुए, साथी बाइक सवारों को, और कई श्रमिकों को नए घर बनाते हुए या अच्छी तरह से बनाए गए परिदृश्यों की देखभाल करते हुए। यह जीवन के सारे सामाजिक समूह के लोगों का मिश्रण था और मुझे एक महत्वपूर्ण वास्तविकता की याद आयी। हमारे बीच कोई वास्तविक भेदभाव नहीं था। अमीर या गरीब। धनवान या श्रमिक वर्ग। ज्ञात या अज्ञात। उस सुबह उस सड़क पर हम सब लोग एक जैसे थे। “धनी और निर्धन दोनों में यह समानता होती है; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है” (नीतिवचन 22:2) l मतभेदों के बावजूद, हम सब परमेश्वर के स्वरूप में बनाये गये हैं (उत्पत्ति 1:27)।

 लेकिन और भी बहुत कुछ है। परमेश्वर के समक्ष समान होने का अर्थ भी है: भले ही हमारा आर्थिक, सामाजिक, या जातीय स्थिति कुछ भी हो, हम सब पाप स्थिति के साथ पैदा हुए हैं: “सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं” (रोमियों 3:23)। हम सब उसके सामने अवज्ञाकारी और समान रूप से दोषी हैं, और हमें यीशु की ज़रूरत है।

हम अक्सर कई कारणों से लोगों को समूहों में बांट देते हैं। लेकिन, वास्तव में, हम सब मानव जाति के हिस्से हैं। और यद्यपि हम सब एक ही स्थिति में हैं—पापियों को एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है—हम उसके अनुग्रह से “सेंत-मेंत धर्मी ठहराए जाकर” (पद.24) (परमेश्वर के साथ सही बनाए जा सकते हैं।)

—डेव ब्रैनन

 

एक कार्ड और एक प्रार्थना

 
हाल ही में विधवा हुई महिला की चिंता बढ़ती जा रही थी । बीमा पॉलिसी से कुछ महत्वपूर्ण धनराशि इकट्ठा करने के लिए, उसे उस दुर्घटना के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता थी जिसने उसके पति की जान ले ली थी।  उसने एक पुलिस अधिकारी से बात की थी जिसने कहा था कि वह उसकी मदद करेगा, लेकिन फिर उसने उसका बिजनेस कार्ड कही खो दिया।  इसलिए उसने मदद के लिए परमेश्वर से विनती करते हुए प्रार्थना की। थोड़े समय बाद, वह अपने चर्च में थी जब वह खिड़की से गुज़री, एक कार्ड दिखा— उस पुलिसकर्मी का कार्ड— एक खिड़की पर । उसे नहीं पता था कि यह वहाँ कैसे पहुँचा, लेकिन वह जानती थी कि क्यों। 
 
उसने प्रार्थना को गंभीरता से लिया। और क्यों नहीं? शास्त्र कहता है कि   परमेश्वर हमारी विनतियों को सुनता है। पतरस ने लिखा, “प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी प्रार्थनाओं की ओर लगे रहते हैं” (1 पतरस 3:12)।  
 
बाइबल हमें इस बात के उदाहरण देती है कि कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का जवाब दिया।  एक उदाहरण यहूदा के राजा हिजकिय्याह का है, जो बीमार हो गया था। उसे एक भविष्यवक्ता यशायाह से यह संदेश भी मिला था कि वह मरने वाला है।  राजा जानता था कि उसे क्या करना है: उसने “प्रभु से प्रार्थना की” (2 राजा 20:2)। तुरंत, परमेश्वर ने यशायाह से राजा को यह संदेश देने के लिए कहा: “मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुनी है” (वचन 5)। हिजकिय्याह को पंद्रह साल और जीवन दिया गया। 
 
परमेश्वर हमेशा खिड़की पर रखे कार्ड जैसी चीज़ों से प्रार्थनाओं का जवाब नहीं देता, लेकिन वह हमें आश्वस्त करता है कि जब मुश्किल परिस्थितियाँ आती हैं, तो हम उनका सामना अकेले नहीं करते। परमेश्वर हमें देखता है, और वह हमारे साथ है - हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देता है।  
—-डेव ब्रैनन 
 

एक कार्ड और एक प्रार्थना

 
हाल ही में विधवा हुई महिला की चिंता बढ़ती जा रही थी । बीमा पॉलिसी से कुछ महत्वपूर्ण धनराशि इकट्ठा करने के लिए, उसे उस दुर्घटना के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता थी जिसने उसके पति की जान ले ली थी।  उसने एक पुलिस अधिकारी से बात की थी जिसने कहा था कि वह उसकी मदद करेगा, लेकिन फिर उसने उसका बिजनेस कार्ड कही खो दिया।  इसलिए उसने मदद के लिए परमेश्वर से विनती करते हुए प्रार्थना की। थोड़े समय बाद, वह अपने चर्च में थी जब वह खिड़की से गुज़री, एक कार्ड दिखा— उस पुलिसकर्मी का कार्ड— एक खिड़की पर । उसे नहीं पता था कि यह वहाँ कैसे पहुँचा, लेकिन वह जानती थी कि क्यों। 
 
उसने प्रार्थना को गंभीरता से लिया। और क्यों नहीं? शास्त्र कहता है कि   परमेश्वर हमारी विनतियों को सुनता है। पतरस ने लिखा, “प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी प्रार्थनाओं की ओर लगे रहते हैं” (1 पतरस 3:12)।  
 
बाइबल हमें इस बात के उदाहरण देती है कि कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का जवाब दिया।  एक उदाहरण यहूदा के राजा हिजकिय्याह का है, जो बीमार हो गया था। उसे एक भविष्यवक्ता यशायाह से यह संदेश भी मिला था कि वह मरने वाला है।  राजा जानता था कि उसे क्या करना है: उसने “प्रभु से प्रार्थना की” (2 राजा 20:2)। तुरंत, परमेश्वर ने यशायाह से राजा को यह संदेश देने के लिए कहा: “मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुनी है” (वचन 5)। हिजकिय्याह को पंद्रह साल और जीवन दिया गया। 
 
परमेश्वर हमेशा खिड़की पर रखे कार्ड जैसी चीज़ों से प्रार्थनाओं का जवाब नहीं देता, लेकिन वह हमें आश्वस्त करता है कि जब मुश्किल परिस्थितियाँ आती हैं, तो हम उनका सामना अकेले नहीं करते। परमेश्वर हमें देखता है, और वह हमारे साथ है - हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देता है।  
—-डेव ब्रैनन 
 

जीवन को पाना

ब्रेट के लिए मसीही कॉलेज में जाना और बाइबल का अध्ययन करना एक स्वाभाविक कदम था। आख़िरकार, वह ऐसे लोगों के बीच रहा जो यीशु को उसके पूरे जीवन में जानते आये थे - घर पर, स्कूल में, चर्च में। यहां तक ​​कि वह अपनी कॉलेज की पढ़ाई को "मसीही कार्य" में करियर बनाने के लिए भी तैयार कर रहा था। 
लेकिन इक्कीस साल की उम्र में, जब वह एक गाँव के पुराने से चर्च की छोटी सी कलीसिया के साथ बैठ कर और  एक पासवान से जो 1 यहुन्ना की पत्री में से प्रचार कर रहे थे, उन्हें सुन रहा था तभी उसने एक चौंकाने वाली खोज की। उसे एहसास हुआ कि वह धर्म की पकड़ और ज्ञान पर निर्भर कर रहा था और उसने वास्तव में कभी भी यीशु में उद्धार नहीं पाया था । उसने महसूस किया कि मसीह उस दिन एक गंभीर संदेश के साथ उसके ह्रदय को छू रहे थे: "तुम मुझे नहीं जानते!" 
प्रेरित यूहन्ना का संदेश स्पष्ट है: "हर कोई जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है" (1 यूहन्ना 5:1)। हम "दुनिया पर विजय पा सकते हैं", जैसा कि यहुन्ना कहते हैं (पद 4) केवल यीशु में विश्वास के द्वारा। उसके बारे में ज्ञान नहीं, बल्कि गहरा, सच्चा विश्वास - जो उसने क्रूस पर हमारे लिए किया उस पर हमारे विश्वास द्वारा प्रदर्शित होता है। उस दिन, ब्रेट ने अपना विश्वास केवल मसीह पर रखा। 
आज, ब्रेट का यीशु और उनके उद्धार के लिए गहरा जुनून कोई रहस्य नहीं है। यह हर बार ज़ोरदार और स्पष्ट रूप से सामने आता है जब वह पादरी के रूप में मंच के पीछे कदम रखते हैं और एक पासवान-मेरे अपने पासवान के रूप में उपदेश देते है।  
“परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है” (पद- 11-12)। उन सभी के लिए जिन्होंने यीशु में जीवन पाया है, यह कितना सान्तवना देने वाला अनुस्मारक है! 
-डेव ब्रैनन 

कोई प्रश्न?

ऐन, प्रारंभिक परीक्षा के लिए अपने ओरल सर्जन से मिल रही थी — जो एक चिकित्सक थे जिसे वह कई वर्षों से जानती थी। उसने ऐन से पूछा, “क्या कोई प्रश्न पूछना है?” उसने कहा “हाँ“ क्या आप पिछले रविवार को चर्च गए थे?” उसका सवाल आलोचनात्मक नहीं था, उसने केवल विश्वास के बारे में बातचीत शुरू करने के लिए यह पूछा था। 
सर्जन जब  बड़ा हो रहा था तो उसके पास चर्च का कोई सकारात्मक अनुभव नहीं था और वह फिर कभी लौट के वहां गया नहीं । ऐन के प्रश्न और उनकी बातचीत के कारण, उसने अपने जीवन में यीशु और चर्च की भूमिका पर पुनर्विचार किया। जब ऐन ने बाद में उसे एक बाइबल दी जिस पर उसका नाम लिखा हुआ था तो बाइबल लेते समय उसकी आंखों में आंसू आ गये।  
कभी कभी हम विरोध से डरते हैं या अपने विश्वास को साझा करने में बहुत आक्रामक नहीं दिखना चाहते। लेकिन यीशु के बारे में गवाही देने का एक अच्छा तरीका हो सकता है कि —प्रश्न पूछें। 
एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो परमेश्वर था, और सब कुछ जानता था, यीशु ने निश्चित रूप से बहुत सारे प्रश्न पूछे। जबकि हम उसके उद्देश्यों को नहीं जानते हैं, यह स्पष्ट है कि उसके प्रश्नों ने दूसरों को प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने शिष्य अन्द्रियास  से पूछा, “तुम क्या चाहते हो?” (यूहन्ना 1:38)। उसने अंधे बरतिमाई से पूछा“ तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूं?” (मरकुस 10:51; लूका 18:41)। उसने लकवे के रोगी से पूछा, “क्या तू चंगा होना चाहता है?” (यूहन्ना 5:6)। यीशु के प्रारंभिक प्रश्न के बाद इनमें से प्रत्येक व्यक्ति के लिए बदलाव हुआ। क्या कोई ऐसा है जिससे आप विश्वास के मामलों के बारे में संपर्क करना चाहते हैं? परमेश्वर से मांगें कि वह आपको पूछने के लिए सही प्रश्न दे। 
-डेव ब्रैनन 

एक भिन्न तरीका

जब मैरी स्लेसर 1800 के दशक के अंत में अफ्रीकी देश कैलाबार (अब नाइजीरिया) के लिए रवाना हुईं, तो वे दिवंगत डेविड लिविंगस्टोन के मिशनरी कार्य को जारी रखने के लिए उत्साहित थीं। साथी मिशनरियों के बीच रहते हुए स्कूल में पढ़ाने का उनका पहला काम उन्हें सेवा करने के लिए एक अलग तरीके से प्रेरित कर रहा था। इसलिए उन्होंने उस क्षेत्र में कुछ ऐसा किया जो दुर्लभ था - वे उन लोगों के साथ रहने लगीं जिनकी वे सेवा कर रही थीं। मैरी ने उनकी भाषा सीखी, उनके तरीके से जीवन जिया और उनका खाना खाया। उन्होंने दर्जनों ऐसे बच्चों को भी अपने साथ रखा जिन्हें छोड़ दिया गया था। लगभग चालीस वर्षों तक, वे उन लोगों तक आशा और सुसमाचार लेकर आईं जिन्हें दोनों की ज़रूरत थी।  
प्रेरित पौलुस को पता था कि हमारे आस-पास के लोगों की ज़रूरतों को पूरा करना कितना ज़रूरी है। उसने 1 कुरिन्थियों 12:4-5  में इसका ज़िक्र किया है — “वरदान तो कई प्रकार के हैं, परन्तु आत्मा एक ही है,” और “सेवा भी कई प्रकार की हैं परन्तु प्रभु एक ही है l” इसलिए उसने लोगों की आवश्यकता के क्षेत्र में उनकी सेवा की l उदाहरण के लिए, “निर्बलों के लिए [वह] निर्बल सा बना” (9:22) l  
एक चर्च जिसके बारे में मैं जानता हूँ, ने हाल ही में एक “सभी क्षमताओं” वाली सेवकाई पद्धति की शुरुआत की घोषणा की है, जिसमें बाधा-मुक्त सुविधा शामिल है - विकलांग लोगों के लिए आराधना उपलब्ध कराना। यह पौलुस जैसी सोच है जो दिल जीतती है और समुदाय में सुसमाचार को पनपने देती है। जब हम अपने आस-पास के लोगों के सामने अपने विश्वास को जीते हैं, तो परमेश्वर हमें उन्हें नए और ताज़ा तरीकों से यीशु से परिचित कराने के लिए प्रेरित करे।   
—डेव ब्रेनन 

अंधकार से प्रकाश की ओर

कुछ भी आकाश को उसके गहरे अवसाद से बाहर नहीं निकाल सका। एक ट्रक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने पर, उसे दक्षिण पश्चिम एशिया के एक मिशनरी अस्पताल में ले जाया गया। आठ ऑपरेशनों द्वारा उसकी टूटी हुई हड्डियाँ को ठीक किया गया, लेकिन वह खा नहीं पा रहा था। अवसाद शुरू हो गया। पालन-पोषण के लिए उसका परिवार उस पर निर्भर था, जो वह अब नहीं कर पा रहा था, इसलिए उसकी दुनिया और अंधकारमय हो गई। 
एक दिन एक अतिथि ने आकाश को उसकी ही भाषा में यूहन्ना सुसमाचार पढ़कर सुनाया और उसके लिए प्रार्थना की। यीशु के द्वारा परमेश्वर की क्षमा और मुक्ति के मुफ़्त उपहार की आशा से छुए जाकर, उसने उस पर अपना विश्वास रखा। उसका अवसाद शीघ्र ही दूर हो गया। जब वह घर लौटा, तो पहले तो वह अपने नये विश्वास का जिक्र करने से डर रहा था। हालाँकि, अंततः, उसने अपने परिवार को यीशु के बारे में बताया - और उनमें से छह ने भी उस पर विश्वास किया! 
यूहन्ना सुसमाचार अंधकार की दुनिया में प्रकाश की किरण है। इसमें हम पढ़ते हैं कि "जो कोई [यीशु पर] विश्वास करेगा, वह नाश न होगा, परन्तु अनन्त जीवन पाएगा" (3:16)। हमें पता चलता है कि "जो कोई [यीशु का] वचन सुनता है और [परमेश्वर] पर विश्वास करता है, उसके पास अनन्त जीवन है" (5:24)। और हम यीशु को यह कहते सुनते हैं, “मैं जीवन की रोटी हूं। जो कोई मेरे पास आएगा, वह कभी भूखा न रहेगा” (6:35)। वास्तव में, "जो सत्य पर चलता है वह प्रकाश में आता है" (3:21) 
हम जिन परेशानियों का सामना करते हैं वे बड़ी हो सकती हैं, लेकिन यीशु अतिमहान हैं। वह हमें "जीवन" देने आया। . . भरपूरी से” (10:10) । आकाश की तरह, आप भी यीशु पर अपना विश्वास रख सकते हैं - जो दुनिया की आशा और पूरी मानवता के लिए प्रकाश है।