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Articles by डेव ब्रेनन

हार्दिक स्वागत

“कौन सबको गले लगाएगा?”

यही सवाल उन अनेक सवालों में से एक था जो हमारे मित्र स्टीव ने तब पूछा जब उसे पता चला कि उसे कैंसर हो गया है और उसे जान पड़ा कि वह थोड़े समय के लिए हमारे चर्च में अनुपस्थित रहेगा l यदि हम रोमियों 16:16 को लागू करें जिसके अनुसार, “आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो” लिखा है, तो, स्टीव सबके साथ मित्रवत भाव रखते हुए अभिनन्दन करता था,  गर्मजोशी से हाथ मिलाता था, और “पवित्र चुम्बन” से बहुतों को गले भी लगाता था l

और अब जब हम सब स्टीव की चंगाई के लिए परमेश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं, वह इस बात से चिंतित है कि जब उसकी शल्यचिकित्सा और इलाज होता है और वह हमारे चर्च से कुछ समय के लिए अनुपस्थित रहेगा, हम उसके अभिवादन करने की कमी को महसूस करेंगे l

शायद हम सब स्टीव की तरह एक दूसरे का अभिवादन खुलकर नहीं कर सकते, किन्तु लोगों की चिंता करने का उसका नमूना हमारे लिए ताकीद है l स्मरण करें कि पतरस कहता है, “बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो,” अथवा जिसका केंद्र प्रेम हो (1 पतरस 4:9; देखें फ़िलि. 2:14) l जबकि प्रथम शताब्दी की पहुनाई में यात्रियों को रहने की व्यवस्था करना होता था, तो उसमें भी गर्मजोशी से स्वागत सम्मिलित होता था l

जब हम दूसरों के साथ प्रेम से व्यवहार करते हैं, चाहे गले लगाकर या मित्रवत मुस्कराहट के द्वारा, हम “सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट [करें]” (1 पतरस 4:11) l

बाधित संगति

तेज़, दुखी पुकार ने उस अँधेरे दोपहर के वातावरण को बेध दिया l मैं यीशु के पांवों के निकट उसके मित्रों और प्रियों के घोर विलाप की कल्पना कर सकता हूँ l यीशु के दोनों ओर क्रूसित अपराधियों की आहें भी फीकी महसूस हो रही थीं l और सब सुननेवाले भी चकित थे l  

यीश गुलगुथा के उस क्रूस पर लटके हुए अत्यंत वेदना में पूरी निराशा से पुकार उठा,  “एली, एली, लमा शबक्तनी?”  (मत्ती 27:45-46) l

उसने कहा, “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?”

मैं हृदय को कष्ट देनेवाले इन शब्दों से अधिक की कल्पना भी नहीं कर सकता हूँ l अनंतकाल से, यीशु परमेश्वर पिता के साथ पूर्ण संगति में था l दोनों ने मिलकर सृष्टि की रचना की, अपनी समानता और स्वरुप में मनुष्य को रचा, और उद्धार की योजना बनायी l कभी भी दोनों एक दूसरी की संगति से अलग नहीं हुए l

और अब, जब क्रूस की अत्यंत मनोव्यथा यीशु पर तिरस्कारपूर्ण पीड़ा लेकर आई, उसने संसार के पाप का बोझ उठाते हुए पहली बार परमेश्वर की उपस्थिति से अपने को दूर पाया l

यह एक ही मार्ग था l केवल इस बाधित संगति के द्वारा ही हमें उद्धार मिल सकता था l यीशु के क्रूस पर त्यागे जाने का अनुभव करने के कारण ही हम मनुष्य जाति परमेश्वर के साथ संगति रख सकते हैं l

यीशु, आपको धन्यवाद l हमें क्षमा देने के लिए आपने अत्यंत पीड़ा सही l  

बस एक पल

वैज्ञानिक समय को लेकर काफी नुक्ताचीनी करते हैं। 2016 के अंत में,  मैरीलैंड के स्पेस फ्लाइट सेंटर पर लोगों ने साल में एक अतिरिक्त सेकंड जोड़ दिया। यदि आपको वह साल सामान्य से अधिक लम्बा लगा हो, तो आप सही थे।

उन्होंने ऐसा क्यों किया?  क्योंकि समय के साथ धरती की परिक्रमा की गति धीमी और साल थोड़े लम्बे होते जाते हैं। अंतरिक्ष में मनुष्य द्वारा भेजी वस्तुओं को ट्रैक करते हुए वैज्ञानिकों को एक-एक मिली सेकंड तक सटीक होना पड़ता है। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि टकराने से बचाने वाले हमारे कार्यक्रम सही कार्य कर रहे हैं।

हम में से अधिकांश के लिए एक पल पा लेने से या उसे गवा देने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन वचन के अनुसार, हमारा समय, और इसका उपयोग हम कैसे करते हैं यह महत्वपूर्ण है। पौलुस ने 1कुरिन्थियों 7:29 में कहा कि "समय कम है"। परमेश्वर के लिए किए जाने वाले कार्यों के लिए समय सीमित है, इसलिए हमें बुद्धिमानी से इसका उपयोग करना चाहिए। वह कहता है, "और अवसर को..."। (इफिसियों 5:16 इएसवी)

इसका अर्थ यह नहीं कि हमें वैज्ञानिकों के समान प्रत्येक सेकंड गिनना चाहिए, परंतु जब हम जीवन की अनित्य प्रकृति (भजन 39:4) पर विचार करें तो समय के बुद्धिपूर्वक उपयोग की बात याद रखें।

एक अच्छा मौसम

आज संसार के उत्तरी आधे हिस्से में बसंत ऋतु का पहला दिन है। उत्तरी गोलार्ध में पतझड़ और दक्षिणी गोलार्ध में शरद-काल है। आज सूर्य भूमध्य रेखा पर सीधा चमकता है, दिन की रौशनी और रात की लंबाई संसार में लगभग बराबर होती है।

नया मौसम कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है। कुछ लोग दिन इसलिए गिनते हैं क्योंकि वे नए मौसम में कुछ नए की अपेक्षा करते हैं। कुछ लोग अपने क्षेत्र में वसंत-ऋतु के आगमन का समय अपने कैलेंडर में चिन्हित करते हैं। या अन्य क्षेत्र में कुछ शरद-ऋतु में सूर्य से राहत लाने की प्रतीक्षा करते हैं। हम भी जीवन की ऋतुओं से गुजरते हैं जिसका मौसम से कुछ लेना-देना नहीं है। सभोपदेशक 3:1-11 के अनुसार हर एक बात का एक अवसर है-परमेश्वर द्वारा नियुक्त समय जिसमें हम जीवन जीते हैं।

जब मूसा ने इस्राएल के लोगों की जंगल से अगुवाई की, तो अपने जीवन के एक नए समय की बात की (व्यवस्थाविवरण 31:2), उन्हें यहोशू के लिए अपनी भूमिका को छोड़ना था। जब पौलुस रोम में बंधक थे उन्होंने अकेलेपन का सामना करते हुए साथ पाने की प्रार्थना की-परन्तु प्रभु की सहायता को पहचाना (2 तीमुथियुस 4:17)। जीवन का मौसम जो हो, आईए परमेश्वर की महानता, सहायता, और साथ रहने के लिए उनका धन्यवाद करें।

संकोचहीन निष्ठा

खेल प्रशंसक अपनी प्रिय टीम की प्रशंसा में बहुत कुछ करते हैं। टीम का प्रतीक चिन्ह पहनना, फेसबुक में पोस्ट डालना, मित्रों से चर्चा करना, उनकी निष्ठा पर कोई संदेह नहीं छोड़ता। मेरी प्रिय tiटीम की अपनी टोपी, टीशर्ट और बातें दिखाती है कि मैं भी इनमें शामिल हूं। खेलों में हमारी निष्ठा याद दिलाती है कि हमारी सच्ची और महान निष्ठा परमेश्वर के प्रति होनी चाहिए। भजन संहिता 34 में परमेश्वर के प्रति संकोचहीन निष्ठा के बारे में सोचिए, जो पृथ्वी पर किसी चीज़ से अधिक महत्वपूर्ण है।

दाऊद कहता है, "मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा" (पद 1), और हम अपने जीवन की कमियों को लेकर बैठ जाते हैं तो हम जीवन ऐसे जीते हैं मानो हमारे सत्य, प्रकाश और उद्धार का स्रोत परमेश्वर हैं ही नहीं। वह कहता है, "उसकी प्रशंसा सदा मेरे मुख पर होगी" (पद 1) और हम संसार की चीजों की प्रशंसा उनसे अधिक करते हैं। दाऊद कहता है, "मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा" (पद 2), हम जानते हैं कि जितना यीशु ने हमारे लिए किया, उससे अधिक हम अपनी सफलताओं का घमण्ड करते हैं।

अपनी प्रिय टीमों, रुचियों, और उपलब्धियों का आनन्द लेना गलत नहीं है। लेकिन हमारी सर्वोच्च प्रशंसा परमेश्वर को जाती है, "मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो...(पद 3)"।

यह अद्भुत है!

अपनी प्राकृतिक अवस्था में हम सभी उससे से रहित हैं। (रोमियो 3:23)

यीशु उस का प्रकाश था (इब्रानियों 1:3), और जो उन्हें जानते थे, उन्होंने उस की महिमा देखी (यूहन्ना 1:14)।

उस तेज ने तम्बू को भर दिया (निर्गमन 40:34–35), और इस्राएली उसकी अगुवाई में आगे बढ़ते थे।

और प्रतिज्ञा की गई है कि अंत समय में स्वर्ग उससे उज्जवलित होगा, ऐसा उजाला कि चान्द और सूरज के उजाले का प्रयोजन ना होगा (प्रकाशित वाक्य 21:23)।

उपर दिए सभी वाक्यों में "उस" शब्द क्या दिखता है? "उस" परमेश्वर की महिमा दिखता है। और वे अद्भुत हैं!

बाइबिल बताती है कि हम इस पृथ्वी पर, जिसे उन्होंने बनाया है, हमारे निवास करने के कारण हम परमेश्वर की भव्य महिमा की झलक पा सकते हैं। परमेश्वर की महिमा का वर्णन उनके अस्तित्व के बाहरी प्रदर्शन के रूप में किया गया है। अपनी उपस्थिति और कार्यों को वे  ब्रह्मांड के वैभव, हमारे उद्धार की विशालता और हमारे जीवन में पवित्र आत्मा की उपस्थिति में प्रकट करते हैं।  परमेश्वर की महानता के प्रमाण के लिए-उनकी महिमा की खोज करें। आप इसे प्रकृति की सुंदरता, एक शिशु की हंसी, और दूसरों के प्यार में देख सकेंगे। परमेश्वर उनकी महिमा से पृथ्वी को भरते हैं।

प्रेम की एक "हाँ"

21 अगस्त, 2016 को कैरिसा ने लुइसियाना में आई विनाशकारी बाढ़ की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की। अगले दिन बाढ़ ग्र्स्त क्षेत्र में मदद करने को उनके साथ चलने का आग्रह किया। चौबीस घंटे के भीतर वो अपने पति बॉबी और तेरह लोगों के साथ 1,000 मील की यात्रा पर थी।

ऐसा क्या है जो लोगों को सब कुछ छोड़ कर आशा प्रदान करने के लिए वहाँ जाने के लिए प्रेरित करता है जहाँ वे पहले कभी न गए हों? वह प्रेम है।

मदद मांगने के आग्रह के साथ उसने यह वचन भी पोस्टpost किया था: "अपने मार्ग की चिंता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा कर वही पूरा करेगा "(भजन 37:5)। यह विशेष रूप से तब सार्थक होता है जब हम मदद करने के लिए परमेश्वर की बुलाहट का अनुसरण करते हैं। प्रेरित यूहन्ना ने कहा, "वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे ..."(1 यूहन्ना 3:17) जब हम "वह करते हैं जो उन्हें भाता है तब हमारी मदद करने का परमेश्वर ने वादा किया है"। (22)

आवश्यकता पड़ने पर जब हमें लगे की परमेश्वर दूसरों के लिए कुछ करने के लिए हम से कह रहे हैं, तब हम स्वेच्छा से प्यार की एक "हाँ" से परमेश्वर का आदर कर सकते हैं।

मंत्रमुग्ध करने वाली महिमा

यूरोप की यात्रा में लैंडस्केप को रंग-बिरंगा बनाने वाले ग्रैंड कैथेड्रल्स का दौरा करने का अपना आनंद है। ये गगनचुम्बी भव्य इमारतें अद्भुत रूप से सुन्दर हैं। इन भवनों की वास्तुकला और यहाँ प्रयुक्त प्रतीकात्मकता विस्मय और वैभव का मंत्रमुग्ध करने वाला अनुभव देती हैं।

परमेश्वर की महिमा और उनके महानतम वैभव को प्रदर्शन करने वाले इन भवनों को देखकर, मैं सोचने लगा कि परमेश्वर की भव्यता का अनुभव हम अपने मन और मस्तिष्क में किस प्रकार पुनः संभव बना सकते हैं जिससे उनकी महानता हमें स्मरण रहे। हमें मानव निर्मित भव्य इमारतों से बड़कर उस महान रचना पर विचार करना चाहिए जिसे परमेश्वर ने रचा है। तारों से टिमटिमाती रात परमेश्वर के सामर्थ को दिखाती है, जिन्होंने अपने शब्द से सृष्टि की रचना की। किसी नवजात शिशु को बाँहों में उठाकर जीवन के चमत्कार के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें। अलास्का के बर्फ़ीले पहाड़ों या विशालकाय अटलांटिक महासागर को देखें जो लाखों प्राणियों से भरे हैं जिनकी रचना परमेश्वर ने की है और ईकोसिस्टम चलाने वाली शक्ति की कल्पना करें।

ऊँची इमारतों से आकाश की ऊंचाईयां छूना गलत नहीं है, परन्तु हमारी सच्ची प्रशंसा परमेश्वर के लिए होनी चाहिए, जैसे लिखा है, "हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरे ही हैं।" (1 इतिहास 29:11)

परम्पराएं और क्रिसमस

इस क्रिसमस के समय जब आप कैंडी(टॉफी) खाते हैं, जर्मनी के लोगों से कहिये, “डंके स्कोन,”क्योंकि यह मिठाई सबसे पहले क्लोन में बनी थी l जब आपको पोइंसेटिया(एक प्रकार का पौधा) अच्छा लगे तो मेक्सिको वासियों से बोलिए “ग्रेसियास,” क्योंकि यह पौधा इसी देश का है l फ्रांस के लोगों से नोएल  शब्द के लिए “मर्सीबियाउकूप” बोलें, और अपने मिसलटो(अमर बेल) के लिए अंग्रेजों की “प्रशंसा” करें l

किन्तु क्रिसमस के मौसम की अपनी परम्पराओं और उत्सवों अर्थात ऐसी रीति-रिवाजों को मानते हुए जो पूरे संसार में हैं, हम अपने भले, करुणामय, और प्रेमी परमेश्वर को अपना सबसे सच्चा और हृदयस्पर्शी “धन्यवाद” ज़रूर दें l 2,000 वर्ष से अधिक पहले यहूदा के चरनी में उस बालक के जन्म के कारण हम क्रिसमस उत्सव मानते हैं l एक स्वर्गदूत ने यह कहकर मानव जाति के लिए इस उपहार की घोषणा की थी, “मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ ... तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है” (लूका 2:10-11) l

इस बार क्रिसमस में, क्रिसमस ट्री की जगमगाती रोशनी में और उसके चारों ओर रखे नए उपहारों के बीच, अपना ध्यान यीशु बालक की ओर करने से ही सच्ची ख़ुशी मिलती है, जो “अपने लोगों का उनके पाप से उद्धार” करने आया” (मत्ती. 1:21) l उसका जन्म परम्पराओं से परे है : जब हम इस अवर्णनीय उपहार के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए उसकी प्रशंसा करते हैं वही हमारा केंद्र बिंदु है l