बड़े दिल(उदारता) से देना
स्कूल के बाद के बाइबल क्लब में, जहां मेरी पत्नी सू(Sue) सप्ताह में एक बार सेवा करती है, बच्चों को यूक्रेन के युद्धग्रस्त देश में बच्चों की सहायता के लिए पैसे दान करने के लिए कहा गया था l सू(Sue) द्वारा हमारी ग्यारह वर्षीय पोती मैगी को योजना के बारे में बताने के लघभग एक सप्ताह बाद, हमें डाक(mail) में उससे एक लिफाफा मिला l इसमें 3.45 डॉलर(लगभग 250 रूपये) थे, साथ में एक नोट(पर्ची) भी था: “यूक्रेन में बच्चों के लिए मेरे पास बस इतना ही है l मैं बाद में और भेजूंगी l
सू(Sue) ने मैगी को यह सुझाव नहीं दिया था कि उसे मदद करनी चाहिए, लेकिन शायद आत्मा ने उसे प्रेरित किया l और मैगी ने किया, जो यीशु से प्यार करती है और उसके लिए जीना चाहती है l
जब हम बड़े/उदार दिल से इस छोटे से उपहार के बारे में सोचते हैं तो हम बहुत कुछ सीख सकते हैं l यह 2 कुरिन्थियों 9 में पौलुस द्वारा दिए गए दान के बारे में कुछ निर्देशों को दर्शाता "करता" है l सबसे पहले, प्रेरित ने सुझाव दिया कि हमें “उदारता से” बोना चाहिए(पद.6) l “मेरे पास जो कुछ भी है” वह उपहार निश्चित रूप से एक उदार उपहार है l पौलुस ने यह भी लिखा कि हमारे उपहार ख़ुशी-ख़ुशी दिए जाने चाहिए जैसे कि परमेश्वर मार्गदर्शन करता है और जैसा हम सक्षम हैं, इसलिए नहीं कि हम “कुढ़-कुढ़” कर दें (पद.7) l और उसने भजन संहिता 112:9 का सन्दर्भ देते हुए “दरिद्रों को दान”(पद.9) के मूल्य का उल्लेख किया l
जब स्वयं उपहार देने का अवसर आता है, तो आइये पूछें कि परमेश्वर हमसे क्या प्रतिक्रिया चाहता है l जब हम अपने उपहारों को आवश्यकतामंदों तक पहुँचाने में उदार और प्रसन्न होते हैं, जैसे वह हमारा नेतृत्व करता है, तो हम इस तरह से देते हैं कि “परमेश्वर को धन्यवाद” प्राप्त होगा(2 कुरिन्थियों 9:11) l यह बड़े दिल वाला/उदार दान है l डेव ब्रेनन
उन्हें बताएं कि परमेश्वर ने क्या किया है
मेरे कॉलेज मित्र बिल टोबियास ने कई वर्षों तक एक द्वीप पर मिशनरी के रूप में कार्य किया। वह एक ऐसे युवक की कहानी बताता है जिसने अपना भाग्य तलाशने के लिए अपना गृहनगर छोड़ दिया था। लेकिन एक दोस्त उसे चर्च ले गया जहां उसने यीशु के सुसमाचार को सुना, और उसने मसीह पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में भरोसा किया।
वह युवक सुसमाचार को अपने उन लोगों तक ले जाना चाहता था जो “जादू-टोने में डूबे हुए थे”, इसलिए उसने उन तक पहुँचने के लिए एक मिशनरी की तलाश की। लेकिन मिशनरी ने उससे कहा कि “जाओ और उन्हें बताओ कि परमेश्वर ने तुम्हारे लिए क्या किया है” (देखें मरकुस 5:19)। और उसने यही किया। उनके गृहनगर में कई लोगों ने यीशु को ग्रहण किया, लेकिन सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब शहर के ओझा को एहसास हुआ कि मसीह ही “मार्ग और सत्य और जीवन” है (यूहन्ना 14:6)। यीशु पर विश्वास रखने के बाद, उसने पूरे शहर को उसके बारे में बताया। चार वर्षों के भीतर, एक युवक की गवाही के कारण क्षेत्र में सात चर्चों की स्थापना हुई।
2 कुरिन्थियों में, पौलुस उन लोगों को सुसमाचार से परिचित कराने के लिए एक स्पष्ट योजना प्रस्तुत करता है जो अभी तक मसीह को नहीं जानते हैं - और यह उस बात के अनुरूप है जो उस मिशनरी ने यीशु में युवा विश्वासियों को कही थी। हमें “मसीह के राजदूत” बनना है - उनके प्रतिनिधि “मानो परमेश्वर हमारे द्वारा अपनी अपील कर रहे हो” (5:20)। प्रत्येक विश्वासी के पास यह बताने के लिए एक अनोखी कहानी है कि कैसे यीशु ने उन्हें “एक नई सृष्टि बनाया..जिसने उन्हें मिला दिया” परमेश्वर से (पद 17-18)। आइए दूसरों को बताएं कि उसने हमारे लिए क्या किया है। डेव ब्रैनन
परमेश्वर की अब से सर्वदा तक मौजूदगी
मृणालिनी संघर्ष कर रही थी। उसके मित्र जो यीशु में विश्वास करते थे, और वह उनके जीवन के संघर्षों को संभालने के तरीके का सम्मान करती थी। उसे उनसे थोड़ी ईर्ष्या भी हो रही थी। लेकिन मृणालिनी ने नहीं सोचा था कि वह उनकी तरह जीवन जी सकती है; उसने सोचा कि मसीह में विश्वास रखने का मतलब नियमों का पालन करना है। अंततः, कॉलेज के एक साथी छात्र ने उसे यह देखने में मदद की कि परमेश्वर उसका जीवन खराब नहीं करना चाहता था; अपितु वह उसके उतार-चढ़ाव के बीच उसके लिए सर्वोत्तम चाहता था। एक बार जब उसे यह समझ में आ गया, तो मृणालिनी यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में भरोसा करने के लिए तैयार हो गई और उसने अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम के बारे में शानदार सच्चाई को अपना लिया।
राजा सुलैमान मृणालिनी को ऐसी ही सलाह दे सकते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दुनिया में दुख हैं। वास्तव में, “हर चीज़ का एक समय होता है” (सभोपदेशक 3:1) - “रोने का समय और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है” (पद 4)। लेकिन और भी बहुत कुछ है। परमेश्वर ने “मानव हृदय में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान भी उत्पन्न किया है” (पद 11)। अनन्त काल का अर्थ उसकी उपस्थिति में जीना है।
जैसा कि यीशु ने कहा था (यूहन्ना 10:10), मृणालिनी ने “पूरी तरह से” जीवन प्राप्त किया, जब उसने उस पर भरोसा किया। लेकिन उसे और भी बहुत कुछ हासिल हुआ! विश्वास के माध्यम से, “[उसके] हृदय में अनंत काल” (सभोपदेशक 3:11) एक भविष्य का वादा बन गया जब जीवन के संघर्षों को भुला दिया जाएगा (यशायाह 65:17) और परमेश्वर की गौरवशाली उपस्थिति एक शाश्वत वास्तविकता होगी। डेव ब्रैनन
परमेश्वर के अनुग्रह का उपहार
जब मैं एक कॉलेज लेखन कक्षा के लिए, जिसे मैं पढ़ाता हूँ, अध्ययन के एक और ढेर की ग्रेडिंग/मूल्यांकन कर रहा था, तो मैं एक विशेष पेपर से प्रभावित हुआ। यह बहुत अच्छा लिखा गया था! हालाँकि, जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत ही अच्छा लिखा गया था। एक छोटे से शोध से पता चला कि निश्चित रूप से, पेपर एक ऑनलाइन स्रोत से दूसरे के ग्रंथ में से चुराया गया था।
मैंने छात्रा को यह बताने के लिए एक ईमेल भेजा कि उसकी चाल का पता चल गया है। उसे इस पेपर पर शून्य मिल रहा था, लेकिन वह आंशिक क्रेडिट के लिए एक नया पेपर लिख सकती थी। उसकी प्रतिक्रिया : "मैं लज्जित हूं और मुझे बहुत दुख है। आप मुझ पर जो अनुग्रह दिखा रहे हैं मैं उसकी सराहना करती हूँ। मैं इसके लायक नहीं हूँ।" मैंने उसे यह कहकर जवाब दिया कि हम सभी को हर दिन यीशु का अनुग्रह मिलता है। तो मैं उसे अनुग्रह दिखाने से कैसे इनकार कर सकता हूँ?
ऐसे कई तरीके हैं जिनसे परमेश्वर का अनुग्रह हमारे जीवन को सुधारता है और हमें हमारी गलतियों से मुक्त करता है। पतरस का कहना है कि यह उद्धार देता है: "हमारा तो यह निश्चय है कि . . . प्रभु यीशु के अनुग्रह से हमारा उद्धार हुआ है" (प्रेरितों 15:11)। पौलुस कहता है कि यह हमें पाप से बचने में मदद करता है : "तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन् अनुग्रह के आधीन हो" (रोमियों 6:14)। और एक स्थान पर पतरस का कहना है कि अनुग्रह हमें सेवा करने की अनुमति देता है : "जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पतरस 4:10)।
अनुग्रह। यह परमेश्वर द्वारा स्वतंत्र रूप से दिया गया है (इफिसियों 4:7)। क्या हम इस उपहार का उपयोग दूसरों को प्यार करने और प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं। डेव ब्रैनन
यीशु में संगती
मुझे नहीं पता कि रविवार की सुबह की सेवा के बाद लाइट बंद करने और चर्च को बंद करने के लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन मैं उस व्यक्ति के बारे में एक बात जानता हूँ: रविवार का खाना देरी से होने वाला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बहुत से लोग चर्च के बाद समय बिताना पसंद करते हैं, और जीवन के फैसलों, दिल की समस्याओं और संघर्षों और बहुत कुछ के बारे में बात करते हैं। आराधना के बीस मिनट बाद चारों ओर देखना और इतने सारे लोगों को एक-दूसरे की संगति का आनंद लेते देखना एक खुशी की बात है। संगति मसीह के समान जीवन का एक महत्वपूर्ण घटक है। साथी विश्वासियों के साथ समय बिताने से मिलने वाली कनेक्टिविटी के बिना, हम विश्वासी होने के कई लाभों से वंचित रह जाएँगे।
संगति मसीह-सदृश जीवन का एक प्रमुख भाग है। साथी विश्वासियों के साथ समय बिताने से मिलने वाली कनेक्टिविटी के बिना, हम विश्वासी होने के कई लाभों से वंचित रह जाएँगे।
उदाहरण के लिए, पौलुस कहता है कि हम “एक दूसरे को शान्ति [दे सकते हैं] और एक दूसरे की उन्नति का कारण” बन सकते हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:11)। इब्रानियों का लेखक इस बात से सहमत है कि हमें इकट्ठा होने में लापरवाही नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमें "एक दूसरे को समझाते” रहना चाहिए (10:25)। और लेखक यह भी कहता है कि जब हम एक साथ होते हैं, तो हम “भले कामों में उस्काने के लिये एक दूसरे की चिन्ता” करते हैं (पद.24)।
यीशु के लिए जीने के लिए समर्पित लोगों के रूप में, हम खुद को विश्वासयोग्यता और सेवा के लिए तैयार करते हैं जब हम “निरुत्साहित को प्रोत्साहित” करते और “सब की ओर सहनशीलता” दिखाते हैं। (1 थिस्सलुनीकियों 5:14)। उस तरह से जीने से, हमें सच्ची संगति का आनंद लेने में और "आपस में और सब से भी भलाई करने में” (पद.15) मदद करता हैं।
—डेव ब्रैनन
परमेश्वर के सामने बराबर
छुट्टियों के दौरान, मेरी पत्नी और मैंने सुबह-सुबह बाइक की सवारी का आनंद लिया। एक रास्ता हमें करोड़ों डॉलर के घरों के बगल से ले गया। हमने विभिन्न प्रकार के लोगों को देखा--निवासियों को अपने कुत्तों को घुमाते हुए, साथी बाइक सवारों को, और कई श्रमिकों को नए घर बनाते हुए या अच्छी तरह से बनाए गए परिदृश्यों की देखभाल करते हुए। यह जीवन के सारे सामाजिक समूह के लोगों का मिश्रण था और मुझे एक महत्वपूर्ण वास्तविकता की याद आयी। हमारे बीच कोई वास्तविक भेदभाव नहीं था। अमीर या गरीब। धनवान या श्रमिक वर्ग। ज्ञात या अज्ञात। उस सुबह उस सड़क पर हम सब लोग एक जैसे थे। “धनी और निर्धन दोनों में यह समानता होती है; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है” (नीतिवचन 22:2) l मतभेदों के बावजूद, हम सब परमेश्वर के स्वरूप में बनाये गये हैं (उत्पत्ति 1:27)।
लेकिन और भी बहुत कुछ है। परमेश्वर के समक्ष समान होने का अर्थ भी है: भले ही हमारा आर्थिक, सामाजिक, या जातीय स्थिति कुछ भी हो, हम सब पाप स्थिति के साथ पैदा हुए हैं: “सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं” (रोमियों 3:23)। हम सब उसके सामने अवज्ञाकारी और समान रूप से दोषी हैं, और हमें यीशु की ज़रूरत है।
हम अक्सर कई कारणों से लोगों को समूहों में बांट देते हैं। लेकिन, वास्तव में, हम सब मानव जाति के हिस्से हैं। और यद्यपि हम सब एक ही स्थिति में हैं—पापियों को एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है—हम उसके अनुग्रह से “सेंत-मेंत धर्मी ठहराए जाकर” (पद.24) (परमेश्वर के साथ सही बनाए जा सकते हैं।)
—डेव ब्रैनन
एक कार्ड और एक प्रार्थना
हाल ही में विधवा हुई महिला की चिंता बढ़ती जा रही थी । बीमा पॉलिसी से कुछ महत्वपूर्ण धनराशि इकट्ठा करने के लिए, उसे उस दुर्घटना के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता थी जिसने उसके पति की जान ले ली थी। उसने एक पुलिस अधिकारी से बात की थी जिसने कहा था कि वह उसकी मदद करेगा, लेकिन फिर उसने उसका बिजनेस कार्ड कही खो दिया। इसलिए उसने मदद के लिए परमेश्वर से विनती करते हुए प्रार्थना की। थोड़े समय बाद, वह अपने चर्च में थी जब वह खिड़की से गुज़री, एक कार्ड दिखा— उस पुलिसकर्मी का कार्ड— एक खिड़की पर । उसे नहीं पता था कि यह वहाँ कैसे पहुँचा, लेकिन वह जानती थी कि क्यों।
उसने प्रार्थना को गंभीरता से लिया। और क्यों नहीं? शास्त्र कहता है कि परमेश्वर हमारी विनतियों को सुनता है। पतरस ने लिखा, “प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी प्रार्थनाओं की ओर लगे रहते हैं” (1 पतरस 3:12)।
बाइबल हमें इस बात के उदाहरण देती है कि कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का जवाब दिया। एक उदाहरण यहूदा के राजा हिजकिय्याह का है, जो बीमार हो गया था। उसे एक भविष्यवक्ता यशायाह से यह संदेश भी मिला था कि वह मरने वाला है। राजा जानता था कि उसे क्या करना है: उसने “प्रभु से प्रार्थना की” (2 राजा 20:2)। तुरंत, परमेश्वर ने यशायाह से राजा को यह संदेश देने के लिए कहा: “मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुनी है” (वचन 5)। हिजकिय्याह को पंद्रह साल और जीवन दिया गया।
परमेश्वर हमेशा खिड़की पर रखे कार्ड जैसी चीज़ों से प्रार्थनाओं का जवाब नहीं देता, लेकिन वह हमें आश्वस्त करता है कि जब मुश्किल परिस्थितियाँ आती हैं, तो हम उनका सामना अकेले नहीं करते। परमेश्वर हमें देखता है, और वह हमारे साथ है - हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देता है।
—-डेव ब्रैनन
एक कार्ड और एक प्रार्थना
हाल ही में विधवा हुई महिला की चिंता बढ़ती जा रही थी । बीमा पॉलिसी से कुछ महत्वपूर्ण धनराशि इकट्ठा करने के लिए, उसे उस दुर्घटना के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता थी जिसने उसके पति की जान ले ली थी। उसने एक पुलिस अधिकारी से बात की थी जिसने कहा था कि वह उसकी मदद करेगा, लेकिन फिर उसने उसका बिजनेस कार्ड कही खो दिया। इसलिए उसने मदद के लिए परमेश्वर से विनती करते हुए प्रार्थना की। थोड़े समय बाद, वह अपने चर्च में थी जब वह खिड़की से गुज़री, एक कार्ड दिखा— उस पुलिसकर्मी का कार्ड— एक खिड़की पर । उसे नहीं पता था कि यह वहाँ कैसे पहुँचा, लेकिन वह जानती थी कि क्यों।
उसने प्रार्थना को गंभीरता से लिया। और क्यों नहीं? शास्त्र कहता है कि परमेश्वर हमारी विनतियों को सुनता है। पतरस ने लिखा, “प्रभु की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी प्रार्थनाओं की ओर लगे रहते हैं” (1 पतरस 3:12)।
बाइबल हमें इस बात के उदाहरण देती है कि कैसे परमेश्वर ने प्रार्थना का जवाब दिया। एक उदाहरण यहूदा के राजा हिजकिय्याह का है, जो बीमार हो गया था। उसे एक भविष्यवक्ता यशायाह से यह संदेश भी मिला था कि वह मरने वाला है। राजा जानता था कि उसे क्या करना है: उसने “प्रभु से प्रार्थना की” (2 राजा 20:2)। तुरंत, परमेश्वर ने यशायाह से राजा को यह संदेश देने के लिए कहा: “मैंने तुम्हारी प्रार्थना सुनी है” (वचन 5)। हिजकिय्याह को पंद्रह साल और जीवन दिया गया।
परमेश्वर हमेशा खिड़की पर रखे कार्ड जैसी चीज़ों से प्रार्थनाओं का जवाब नहीं देता, लेकिन वह हमें आश्वस्त करता है कि जब मुश्किल परिस्थितियाँ आती हैं, तो हम उनका सामना अकेले नहीं करते। परमेश्वर हमें देखता है, और वह हमारे साथ है - हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देता है।
—-डेव ब्रैनन
जीवन को पाना
ब्रेट के लिए मसीही कॉलेज में जाना और बाइबल का अध्ययन करना एक स्वाभाविक कदम था। आख़िरकार, वह ऐसे लोगों के बीच रहा जो यीशु को उसके पूरे जीवन में जानते आये थे - घर पर, स्कूल में, चर्च में। यहां तक कि वह अपनी कॉलेज की पढ़ाई को "मसीही कार्य" में करियर बनाने के लिए भी तैयार कर रहा था।
लेकिन इक्कीस साल की उम्र में, जब वह एक गाँव के पुराने से चर्च की छोटी सी कलीसिया के साथ बैठ कर और एक पासवान से जो 1 यहुन्ना की पत्री में से प्रचार कर रहे थे, उन्हें सुन रहा था तभी उसने एक चौंकाने वाली खोज की। उसे एहसास हुआ कि वह धर्म की पकड़ और ज्ञान पर निर्भर कर रहा था और उसने वास्तव में कभी भी यीशु में उद्धार नहीं पाया था । उसने महसूस किया कि मसीह उस दिन एक गंभीर संदेश के साथ उसके ह्रदय को छू रहे थे: "तुम मुझे नहीं जानते!"
प्रेरित यूहन्ना का संदेश स्पष्ट है: "हर कोई जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है" (1 यूहन्ना 5:1)। हम "दुनिया पर विजय पा सकते हैं", जैसा कि यहुन्ना कहते हैं (पद 4) केवल यीशु में विश्वास के द्वारा। उसके बारे में ज्ञान नहीं, बल्कि गहरा, सच्चा विश्वास - जो उसने क्रूस पर हमारे लिए किया उस पर हमारे विश्वास द्वारा प्रदर्शित होता है। उस दिन, ब्रेट ने अपना विश्वास केवल मसीह पर रखा।
आज, ब्रेट का यीशु और उनके उद्धार के लिए गहरा जुनून कोई रहस्य नहीं है। यह हर बार ज़ोरदार और स्पष्ट रूप से सामने आता है जब वह पादरी के रूप में मंच के पीछे कदम रखते हैं और एक पासवान-मेरे अपने पासवान के रूप में उपदेश देते है।
“परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है” (पद- 11-12)। उन सभी के लिए जिन्होंने यीशु में जीवन पाया है, यह कितना सान्तवना देने वाला अनुस्मारक है!
-डेव ब्रैनन