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Articles by डेव ब्रेनन

पुनर्निर्माण

यह रात का समय था जब अगुआ घोड़े पर सवार होकर काम का निरीक्षण करने निकल पड़ा जो उसके आगे धरा था l जब वह अपने चारों ओर विनाश का दौरा कर रहा था, तो उसने देखा कि शहर की दीवारें नष्ट हो गयीं थीं और फाटक जो जले हुए थे l कुछ क्षेत्रों में, बहुत अधिक मलबे के ढेर उसके घोड़े को आगे बढ़ने में मुश्किल कर दिए l दुखी होकर, घुड़सवार घर की ओर मुड़ गया l

जब शहर के अधिकारीयों से हानि बताने का समय आया, वह इस तरह बताना आरम्भ किया, “तुम आप देखते हो कि हम कैसी दुर्दशा में हैं” (नहेम्याह 2:17) l उसने बताया कि नगर खंडहर हो गया था, और नगर को सुरक्षित रखने वाले नगर की दीवारें बेकार हो गयीं थीं l

परन्तु उसने एक कथन कहा जिससे परेशान नागरिक उत्साहित हो गए : फिर मैंने उनको बतलाया, कि मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझे पर कैसे हुई l” तुरन्त, लोगों ने उत्तर दिया, “आओ हम कमर बांधकर बनाने लगें” (पद.18) l

बोलने में असमर्थ व्यक्ति

वरिष्ठ नागरिक भवन में, एक व्यक्ति आनंद से हाई स्कूल किशोर समूह को यीशु के विषय गाते हुए सुन रहा था। बाद में, जब कुछ किशोर उसके साथ संवाद करने की कोशिश किये, उन्होंने पाया कि वह बोलने में असमर्थ था। आघात ने उसके बोलने की योग्यता छीन लिया था।
क्योंकि वे उस व्यक्ति से संवाद नहीं कर सकते थे, किशोरों ने उसके लिए गाने का निर्णय किया। जब वे गाना शुरू किये, कुछ आश्चर्जनक हुआ। व्यक्ति जो बोल नहीं सकता था गाने लगा। उत्साह के साथ, वह ज़ोर से अपने नए मित्रों के साथ “प्रभु महान” गाने लगा।
यह क्षण सभी के लिए अद्भुत था। परमेश्वर के लिए उस व्यक्ति का प्रेम रुकावटों को तोड़ कर  श्रव्य आराधना(audible worship) – हृदय को छू लेनेवाली, आनंदित आराधना - में व्यक्त हुआ।
हम सब के पास समय-समय पर आराधना में रुकावटें होती हैं। शायद एक सम्बन्ध संघर्ष या धन की समस्या अथवा यह एक हृदय हो सकता है जो परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध में थोड़ा ठंडा हो गया है।
हमारा बोलने में असमर्थ मित्र हमें स्मरण दिलाता है कि हमारा सर्वशक्तिमान परमेश्वर किसी भी बाधा को दूर कर सकता है। “प्रभु महान – विचारुं कार्य तेरे, कितने अद्भुत जो तूने बनाए!”
क्या आप अपनी आराधना में संघर्ष कर रहे हैं? भजन 96 जैसे एक अंश को पढ़कर हमारा परमेश्वर कितना महान है पर चिंतन करें, और आप भी अपनी बाधाओं और आपत्तियों को प्रशंसा में बदला हुआ पाएंगे।

परमेश्वर को ढूँढ़ना

जबकि यह ईमानदारी से कुछ सांसारिक मूल्य की तलाश करने के लिए अच्छा हो सअपने सपनों का पीछा करने में लोगों के जुनून और समर्पण को देखना प्रेरणादायक है l एक युवा महिला ने जिसे मैं जानता हूँ हाल ही में अपनी पी.एच.डी. एक वर्ष में पूरी कर ली – एक कार्य जिसने सम्पूर्ण समर्पण ले लिया l एक मित्र एक विशेष कार चाहता था, तो उसने अपने लक्ष्य तक पहुँचने तक केक बेक करके उन्हें बेचने का काम किया l एक और व्यक्ति जो बिक्री(sales) के व्यवसाय में है प्रति सप्ताह सौ नए लोगों से मिलने की इच्छा रखता है l 

कता है, वहाँ एक और अधिक महत्वपूर्ण प्रकार की तलाश है जिसे हमें विचार करना चाहिए l 

हताशा में, मरुभूमि में संघर्ष करते हुए, राजा दाऊद ने लिखा, “हे परमेश्वर, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूँढूँगा” (भजन 63:1) l जब दाऊद ने उसे पुकारा, परमेश्वर उस थके हुए राजा के निकट आया l परमेश्वर के लिए दाऊद की गहरी आत्मिक प्यास उसकी उपस्थिति में ही संतुष्ट हो सकती थी l राजा ने परमेश्वर से उसके “पवित्रस्थान” में मुलाकात को याद किया (पद.2), उसके सम्पूर्ण विजय देनेवाले प्रेम का अनुभव किया (पद.3), और दिन-प्रतिदिन उसकी प्रशंसा करना – उसी में सच्ची संतुष्टि पाना जो एक पूर्ण और संतोषजनक भोजन का आनंद लेने के विपरीत नहीं है (पद.4-5) l रात में भी उसने परमेश्वर की महानता पर विचार किया, उसकी सहायता और सुरक्षा को पहचाना (पद.6-7) l 

आज पवित्र आत्मा हमें परमेश्वर को ईमानदारी से खोजने के लिए विवश करता है l जब हम उससे लिपटे रहते हैं, परमेश्वर सामर्थ्य और प्रेम में अपने शक्तिशाली दाहिने हाथ से हमें ऊपर थामे रहता है l आत्मा की अगुवाई द्वारा, हम सभी अच्छी चीजों के निर्माता के करीब आएँ l 

एक लक्ष्य और एक उद्देश्य

2018 में, एक अमेरिकी एथलीट(खिलाड़ी) कॉलिन ओब्रैडी ने एक ऐसी सैर की जो पहले कभी नहीं की गयी थी l अपने पीछे एक आपूर्ति स्लेज(बर्फ पर चलने वाली गाड़ी) को खींचते हुए, ओब्रैडी ने अकेले ही अंटार्कटिका की कठिन यात्रा की – 54 दिनों में कुल 932 मील l यह समर्पण और साहस की एक महत्वपूर्ण यात्रा थी l 

बर्फ, ठण्ड और कठिन दूरी में अकेले रहने पर, ओब्रैडी ने टिप्पणी की, “मैं पूरे समय एक गहरे प्रवाह की स्थिति में कैद था [पूरी तरह से प्रयास में डूबा हुआ], समान रूप से अंतिम लक्ष्य पर केन्द्रित, यद्यपि अपने मन को इस यात्रा के गहन पाठों को फिर से गिनने की अनुमति देता था l 

हममें से जिन्होंने यीशु पर अपना विश्वास रखा है, उनके लिए यह कथन एक परिचित स्वर बजाता है l यह विश्वासियों के रूप में बहुत कुछ हमारे आह्वान जैसा लगता है : लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित रखते हुए ऐसा जीवन जीना जो परमेश्वर का सम्मान (आदर) करता है और उसे दूसरों पर प्रकट करता है l प्रेरितों 20:24 में, पौलुस, जो खतरनाक यात्रा के लिए कोई अजनबी नहीं था, ने कहा, “मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता कि उस प्रिय जानूँ, वरन् यह कि मैं अपनी दौड़ को और सेवा को पूरी करूँ, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिए प्रभु यीशु से पाई है l” 

जब हम यीशु के साथ अपने संबंधों में आगे बढ़ते हैं, हम पहचाने कि हम अपनी यात्रा के उद्देश के बारे में क्या जानते हैं और उस दिन की ओर आगे बढ़ते जाएँ जब हम अपने उद्धारकर्ता को आमने-सामने देखेंगे l 

अकल्पनीय

बार्ट मिल्लार्ड ने 2001 में एक अत्यंत लोकप्रिय गीत लिखा, “आई कैन ओन्ली इमेजिन(I Can Only Imagine) l” यह गीत मसीह की उपस्थिति में कितना अद्भुत होगा को चित्रित करता है l मिल्लार्ड के गीतों ने हमारे परिवार को अगले वर्ष यह दिलासा दिया जब हमारी सत्रह वर्षीय बेटी मेलिसा की कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी और हमने कल्पना की कि उसके लिए परमेश्वर की उपस्थिति में होना यह कैसा था l 

लेकिन कल्पना कीजिये(imagine) ने मेल(Mell) की मृत्यु के बाद के दिनों में मुझसे एक भिन्न तरीके से बात की l जब मेलिसा के मित्रों के पिता लोगों ने चिंता और दर्द से पूर्ण, मुझसे संपर्क किया, उन्होंने कहा, “मैं कल्पना नहीं कर सकता कि आपके ऊपर क्या बीत रही है l”

उनके भाव सहायक थे, यह दिखाते हुए कि वे हमारे नुक्सान के साथ सहानुभूति के साथ जूझ रहे थे – यह अकल्पनीय लग रहा था l 

दाऊद ने बड़े नुक्सान की गहराई को इंगित किया जब उसने “घोर अन्धकार से भरी हुई घाटी” में से चलने का वर्णन किया (भजन 23:4) l किसी प्रियजन की मृत्यु निश्चित रूप से ऐसी है, और हमें कभी-कभी यह पता नहीं होता है कि हम अँधेरे को कैसे पार करेंगे l हम कभी भी दूसरी तरफ जाने की कल्पना नहीं कर सकते l 

लेकिन जैसा कि परमेश्वर ने हमारे साथ हमारी सबसे अँधेरी घाटी में रहने का वादा किया है, वह हमें यह आश्वासन देकर भविष्य के लिए बहुत आशा प्रदान करता है कि घाटी से परे हम उसकी उपस्थिति में होंगे l एक विश्वासी के लिए, “देह से अलग” होने का मतलब है उसके साथ मौजूद होना (2 कुरिन्थियों 5:8) l जैसा कि हम अपने भविष्य में उससे और दूसरों से पुनर्मिलन की कल्पना करते हैं, उससे हमें अकल्पनीय में चलने में सहायता मिलती है l 

प्रकाश चमकाना

स्टीफन ने अपने माता-पिता से बोला कि उसे प्रतिदिन जल्दी स्कूल जाना ज़रूरी है, लेकिन किसी कारण से उसने कभी नहीं बताया कि क्यों ज़रूरी है l फिर भी उन्होंने यह निश्चित किया कि वह प्रत्येक सुबह 7.15 बजे स्कूल पहुँच जाए l 

अपने जूनियर वर्ष में एक ठंडी सुबह के समय, स्टीफन का कार एक्सीडेंट हो गया जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गयी l बाद में, उसके माता पिता को पता चला कि क्यों वह जल्दी स्कूल जाया करता था l हर सुबह वह और उसके कुछ मित्र स्कूल के प्रवेश द्वार पर इकठ्ठा होकर मुस्कुराते हुए, हाथ हिलाते हुए और एक मधुर शब्द के साथ दूसरे विद्यार्थियों का अभिवादन करते थे l इससे सभी विद्यार्थी – वे भी जो लोकप्रिय नहीं थे – सुखद और स्वीकार्य महसूस करते थे l 

यीशु में एक विश्वासी, स्टीफन अपनी ख़ुशी उन लोगों के साथ बांटना चाहता था, जिन्हें इसकी सख्त ज़रूरत थी l उसका उदाहरण एक अनुस्मारक के रूप में मौजूद है कि मसीह के प्रेम के प्रकाश को चमकाने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक दयालुता के इशारों और एक स्वागत योग्य भावना के माध्यम से है l 

मत्ती 5:14-16 में, यीशु ने बताया कि हम उसके लिए “जगत की ज्योति” और “नगर [हैं] जो पहाड़ पर बसा हुआ है” (पद.14) l प्राचीन शहर अक्सर सफ़ेद चूना पत्थर से बने होते थे, वास्तव में अलग से दिखाई देते हुए चमकते सूरज को प्रतिबिंबित करते थे l काश हम भी छिपने के लिए नहीं बल्कि “घर के सब लोगों को प्रकाश” पहुँचाने का चुनाव करें (पद.15) l 

और जब हम “[अपने] उजियाला को [दूसरों] के सामने [चमकने देते हैं]” (पद.16), काश हम मसीह के स्वागत करने वाले प्रेम का अनुभव करें l 

खोया हुआ लिफाफा

जब वह मुझे मिला हम अपने परिवार के साथ दूसरे राज्य से घर लौट रहे थे l मैं अपने वाहन में इंधन भर रहा था जब मैंने एक गन्दा, भारी लिफाफा धरती पर पड़ा हुए देखा l मैं उसे गन्दी और जैसा वह था की अवस्था में लपक लिया और उसके अन्दर देखा l मैं आश्चर्यचकित हुआ, उसमें सौ डॉलर के अनेक नोट थे l

सौ डॉलर के अनेक नोट जिन्हें किसी ने खो दिए थे और उस क्षण संभवतः कौन उन्हें व्यग्रतापूर्वक ढूँढ रहा होगा l मैंने उस पेट्रोल पंप के परिचारकों को अपना फोन नंबर दे दिया कि शायद कोई उसे ढूंढता हुआ वहाँ आए l परन्तु कभी किसी ने फोन नहीं किया l

किसी के पास वो पैसे थे और उसने उन्हें खो दिये l पृथ्वी पर का धन अक्सर ऐसा ही होता है l वह खो सकता है, चोरी हो सकता है, या यहाँ तक कि व्यर्थ खर्च किया जा सकता है l यह खराब निवेश में या किसी मौद्रिक बाज़ार में भी खो सकता है, जिस पर हमारा नियंत्रण नहीं है l लेकिन हमारे पास यीशु में जो स्वर्गिक खजाना है अर्थात् परमेश्वर के साथ एक पुनर्स्थापित सम्बन्ध और अनंत जीवन की प्रतिज्ञा, उस प्रकार का नहीं है l हम उसे पेट्रोल पंप पर या कहीं और नहीं खो सकते हैं l  

यही कारण है कि मसीह ने हमें “स्वर्ग में धन” इकठ्ठा करने को कहा है (मत्ती 6:20) l हम ऐसा तब करते हैं जब हम “भले काम में धनी” (1 तीमुथियुस 6:18) या “विश्वास में धनी” (याकूब 2:5) बनते हैं – प्रेमपूर्वक दूसरों की मदद करके और उनके साथ यीशु को साझा करके l जैसे परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है और हमें सशक्त करता है, हम अनंत खज़ाने को भी संचित कर सकते हैं, जब हम अपने अनंत भविष्य की आशा करते हैं l

यह तो अद्भुत था!

यह सातवें कक्षा का पहली क्रॉस-कंट्री(छोटी) प्रतियोगिता थी, लेकिन वह दौड़ना नहीं चाहती थी l यद्यपि वह इस आयोजन की तैयारी में लगी हुयी थी, वह ख़राब प्रदर्शन से डरती थी l फिर भी, उसने बाकी सभी के साथ दौड़ आरम्भ की l बाद में, एक के बाद दूसरे धावकों ने दो मील की दौड़ पूरी करके समापन रेखा पार की – अनिच्छुक धावक को छोड़कर सभी l अंत में, उसकी माँ, जो अपनी बेटी को दौड़ पूरी करते हुए देख रही थी, ने दूर एक अकेला व्यक्ति को देखी l माँ उस परेशान प्रतियोगी को ढाढ़स देने उस समापन रेखा तक गयी l इसके बदले, जब वह युवा धाविका ने अपनी माँ को देखा, वह पुकार उठी, “यह तो अद्भुत था!”

अंत में समाप्त करने के विषय क्या अद्भुत हो सकता है? समाप्त करना!

लड़की कुछ कठिन कोशिश करके उसे पूरा किया था! पवित्र वचन कड़ी मेहनत और परिश्रम का सम्मान करता है, एक अवधारणा जो अक्सर खेल या संगीत या अन्य चीजों के माध्यम से सीखी जाती है जिन्हें दृढ़ता और प्रयास की आवश्यकता होती है l

नीतिवचन 12:24 कहता है, “कामकाजी लोग प्रभुता करते हैं, परन्तु आलसी बेगार में पकड़े जाते हैं l” ये बुद्धि के सिद्धांत – प्रतिज्ञाएँ नहीं – अच्छी प्रकार परमेश्वर की सेवा करने में सहायता कर सकते हैं l

हमारे लिए परमेश्वर की योजना में कार्य हमेशा शामिल था l पतन से पहले भी, आदम को [वाटिका में] “काम” करना था और “उसकी रक्षा” करनी थी (उत्पत्ति 2:15) l और हमारे द्वारा किया गया कोई भी प्रयास “तन मन से” होना चाहिए (कुलुस्सियों 3:23) l आइये हम उसके द्वारा दी गयी शक्ति में कार्य करें – और परिणाम उसपर छोड़ दें l

लोमड़ियाँ पकड़ना

जब पहली बार एक चमगादड़ हमारे घर में घुसा हमने उसे परजीवी कीड़े की तरह सरलता से हटा दिया l परन्तु दूसरी बार रात के समय उसके अन्दर आने के बाद, मैंने इन छोटे प्राणियों के विषय थोड़ी जानकारी प्राप्त की और पता चला कि मनुष्य से मुलाकात के लिए उन्हें बहुत छोटा सा सुराख़ चाहिए l वास्तव में, यदि उनको सिक्के के किनारे के बराबर भी जगह मिल जाती है वे अन्दर घुस आते हैं l

इसलिए मैंने अपनी बन्दुक भरी और लक्ष्य की ओर चल पड़ा l मैं घर में चारों ओर गया और छोटे से छोटा सुराख़ भी बंद कर दिया l

श्रेष्ठगीत 2:15 में, सुलैमान एक और कष्टकर स्तनधारी जीव के विषय बताता है l वह “छोटी लोमड़ियों” के खतरे के विषय लिखता है जो “दाख की बारियों को बिगाड़ती हैं l” प्रतीकात्मक रूप से, वह उन खतरों के विषय बोल रहा है जो किसी सम्बन्ध के बीच आकर उसे बर्बाद कर सकती हैं l अब मुझे चमगादड़-प्रेमियों या लोमड़ी-प्रेमियों को ठेस पहुँचाने का इरादा नहीं है परन्तु चमगादड़ों को घर के बाहर और लोमड़ियों को दाख की बारी से बाहर रखना अपने जीवनों से पाप को दूर रखना है (इफिसियों 5:3) l परमेश्वर के अनुग्रह से पवित्र आत्मा हमारे अन्दर काम करता है इसलिए कि हम “शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्मा के अनुसार” चलें (रोमियों 8:4) l आत्मा की सामर्थ्य से हम पाप की परीक्षा का सामना कर सकते हैं l

परमेश्वर की स्तुति हो कि, मसीह में, अब हम “प्रभु में ज्योति” हैं और इस प्रकार प्रभु को “भानेवाला” जीवन जी सकते हैं (इफिसियों 5:8-10) l आत्मा उन छोटी लोमड़ियों को पकड़ने में हमारी मदद करता है l