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Articles by डेव ब्रेनन

क्या आप अभी भूखे हैं?

थॉमस को मालूम था उसे क्या करना था? भारत में एक निर्धन परिवार में जन्म लिया और अमरीकियों द्वारा गोद लिया गया, और भारत लौटने पर उसने अपने ही गृह शहर के बच्चों  को खौफ़नाक स्थिति में देखा l इसलिए वह जान गया उसे सहायता करनी होगी l वह अमरीका लौटकर, अपनी शिक्षा समाप्त करके, ढेर सारा पैसा जमा करके, भविष्य में भारत लौटने की योजना बनाने लगा l

उसके बाद, याकूब 2:14-18 पढ़ने के बाद जिसमें प्रेरित प्रश्न करता है, “यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो इससे क्या लाभ?” थॉमस ने अपने मातृभूमि में एक छोटी लड़की को उसने अपनी माँ से चीखते सुना : “परन्तु माँ, मैं तो अभी भूखी हूँ!” उसने उन दिनों को याद किया जब वह भी बचपन में बहुत ही भूखा था – कूड़ेदानों में भोजन ढूढ़ता था l थॉमस ने सहायता करने के लिए वर्षों तक इंतज़ार नहीं कर सकता था l उसने निर्णय किया, “मैं अभी सहायता करना आरंभ करूँगा!!”

वर्तमान में इस अनाथालय में जिसे उन्होंने आरंभ किया था पचास बच्चे हैं जिन्हें भरपूर भोजन मिलता है और उनकी उचित देखभाल की जाती है और वे यीशु के बारे में सीखते हैं और शिक्षा भी प्राप्त कर रहे हैं – यह सब इसलिए क्योंकि एक व्यक्ति ने समझ लिया कि परमेश्वर उन्हें क्या करने को बुला रहा है और वह इस काम को टाल नहीं सकता है l

याकूब का सन्देश हम सब पर लागू होता है l यीशु मसीह में हमारा विश्वास हमें बहुत लाभ देता है – उसके साथ एक सम्बन्ध, बहुतायत का जीवन, और भविष्य की एक आशा l परन्तु इसका कुछ भी लाभ नहीं यदि हम आगे बढ़कर ज़रुरतमंदों की मदद नहीं करते हैं? क्या आप उस चीख को सुन रहे हैं : “मैं तो अभी भूखा हूँ!” 

ऐबी की प्रार्थना

जब ऐबी हाई स्कूल की छात्रा थी, उसने और उसकी माँ ने एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में बुरी तरह घायल एक व्यक्ति की कहानी सुनी – एक ऐसी दुर्घटना जिसमें उसके पिता और सौतेली माँ की मृत्यु हो गयी थी l यद्यपि वे इस व्यक्ति को नहीं जानते थे, ऐबी की माँ ने कहा, “हमें केवल इस व्यक्ति और इसके परिवार के लिए प्रार्थना करना होगा l और उन्होंने किया l

जल्द ही कुछ वर्ष बीत गए, और एक दिन ऐबी अपने विश्विद्यालय में एक कक्षा में प्रवेश की l एक विद्यार्थी ने उसे बैठने के लिए अपने करीब एक सीट दी l वह विद्यार्थी ऑस्टिन हैच था, हवाई दुर्घटना का शिकार जिसके लिए ऐबी ने प्रार्थना की थी l जल्द ही वे एक दूसरे के साथ मिलने लगे, और 2018 में उनका विवाह हो गया l

ऐबी ने अपने विवाह के तुरंत बाद एक साक्षात्कार में कहा, “यह सोचना पागलपन है कि मैं अपने भावी पति के लिए प्रार्थना कर रही थी l” दूसरों के लिए प्रार्थना करने का समय न निकालकर, अपने व्यक्तिगत ज़रूरतों और अपने निकट के लोगों के लिए अपनी प्रार्थनाओं को सीमित करना सरल है l हालाँकि, पौलुस इफिसुस के मसीहियों को लिखते हुए उनसे कहा कि “हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना और विनती करते रहो, और इसी लिए जागते रहो कि सब पवित्र लोगों के लिए लगातार विनती किया करो” (इफिसियों 6:18) l और 1 तीमुथियुस 2:1 हमसे अधिकारियों के साथ-साथ “सब मनुष्यों” के लिए प्रार्थना करने को कहता है l

आइये हम दूसरों के लिए प्रार्थना करें – उनके लिए भी जिनको हम जानते नहीं हैं l यह “एक दूसरे का भार”(गलातियों 6:2) उठाने का एक तरीका है l

खाली बिछौना

मैं मोंटेगो बे, जमाइका के सैंट जेम्स इनफर्मरी(अस्पताल) लौटकर रेंडेल से पुनः मिलने के लिए उत्सुक था, जो दो वर्ष पूर्व उसके लिए यीशु के प्रेम के विषय जाना था l हाई स्कूल गायक-मण्डली की एक किशोरी, इवी और मैं प्रत्येक बसंत ऋतु के समय, रेंडेल के साथ वचन पढ़ते थे और सुसमाचार समझाते थे, और उसने व्यक्तिगत रूप से…

फटा हुआ पर्दा

वह दिन यरूशलेम के बाहरी क्षेत्र में एक अंधकारमय और निराशाजनक दिन था l शहरपनाह के ठीक बाहर एक पहाड़ी पर, एक व्यक्ति जो बीते तीन वर्षों तक उत्साही अनुयायियों की भीड़ आकर्षित करता रहा था उबड़-खाबड़ लकड़ी के एक क्रूस पर अपमान और पीड़ा में टंगा हुआ था l विलाप करनेवाले शोक में रो और बिलख रहे थे l सूर्य का प्रकाश अब दोपहर के आसमान को चमक नहीं दे  पा रहा था l और क्रूस पर उस व्यक्ति के अत्यधिक पीड़ा का अंत हुआ जब वह ऊँची आवाज़ में चिल्लाया, “पूरा हुआ” (मत्ती 27:50; यूहन्ना 19:30) l

उसी क्षण, नगर के भीतर उस बड़े मंदिर से एक और आवाज़ आयी – कपड़े के चीरने की आवाज़ l आश्चर्यजनक रूप से, मनुष्य के हस्तक्षेप के बिना, वह अत्यधिक बड़ा, मोटा पर्दा जो मंदिर के बाहरी भाग को महा पवित्र स्थान से अलग करता था ऊपर से नीचे तक दो टुकड़े हो गया (मत्ती 27:51) l

वह फटा हुआ पर्दा क्रूस की सच्चाई का प्रतीक था : परमेश्वर तक एक नया मार्ग खुल गया था! क्रूस पर का व्यक्ति, यीशु, अंतिम बलिदान के रूप में अपना लहू बहा दिया था – एकमात्र वास्तविक और उपयुक्त बलिदान (इब्रानियों 10:10) – जो उसपर विश्वास करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति को क्षमा का आनंद उठाने और परमेश्वर के साथ एक सम्बन्ध स्थापित  करने देता है (रोमियों 5:6-11) l

उस मूल शुभ शुक्रवार के अंधकार के बीच में, हमने अबतक का सबसे उत्तम समाचार सुना – यीशु ने हमें हमारे पापों से बचाने के लिए और परमेश्वर के साथ संगति का अनुभव करने के लिए एक नया मार्ग खोल दिया (इब्रानियों 10:19-22) l हे मेरे परमेश्वर उस फटे हुए परदे के सन्देश के लिए धन्यवाद!

नम्र और सामर्थी

जैसे ही नीदरलैंड में शत्रु का कब्ज़ा बढ़ा, एन्नी फ्रैंक और उनके परिवार ने साहसिक रूप से तैयारी की और खतरे से बचने के लिए छिपने के एक गुप्त स्थान पर चले गए। विश्व युद्ध II के दौरान पकड़े जाने और बन्दी-शिविर में भेज दिए जाने से पहले वे दो वर्ष तक वहाँ रहे। फिर भी एन्नी का लिखा हुआ डायरी ऑफ ए यंग गर्ल जो बहुत ही प्रसिद्ध हो गया, उसमें उन्होंने कहा: “लम्बे समय टिके रहने के लिए सबसे धारदार हथियार नम्र और शान्त आत्मा है।”

जब हम वास्तविक जीवन की बात करते हैं तो नम्रता एक जटिल मुद्दा हो सकता है।

यशायाह 40 में हम परमेश्वर की एक तस्वीर को देखते हैं जो उन्हें नम्र और सामर्थी दिखाती है। पद 11 में हम पढ़ते हैं : “वह चरवाहे के समान अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्‍चों को अँकवार में लिए रहेगा।” परन्तु यह इस पद के बाद आता है: “देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ आ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा” (पद 10)। सामर्थ से भरा हुआ, परन्तु जब दुर्बलों की सुरक्षा की बात आती है तो नम्र।    

और यीशु का विचार करें, जिसने एक कोड़ा बनाया और मंदिर में जब उन्होंने सराफों की चौकियाँ उलट दीं तो इसे चारों और घुमाया, परन्तु उन्हीं ने नम्रता के साथ बच्चों की देखभाल की। उन्होंने फरीसियों को धमकाने  के लिए कड़े शब्दों का प्रयोग किया (मत्ती 23) परन्तु उस महिला को क्षमा कर दिया जिसे उनकी दया की आवश्यकता थी (यूहन्ना 8:1-11) ।

ऐसे कुछ समय भी हो सकते हैं जब आपको दुर्बलों को न्याय दिलवाने के लिए अन्य लोगों को चुनौती देनी पड़े- “परन्तु हमें सभी को अपनी नम्रता का प्रमाण भी अवश्य देना है” (फिलिप्पियों 4:5) । जब हम परमेश्वर की सेवा करते हैं, तो कई बार हमारी सबसे बड़ी ताकत जरूरतमन्दों के लिए हमारे नम्र हृदय को प्रदर्शित करती है।

प्रोत्साहन का वातावरण

हर बार जब मैं मेरे घर के फिटनेस सेंटर जाता हूँ, तो मैं प्रोत्साहित हो जाता हूँ। उस व्यस्त स्थान में मैं उन अन्य लोगों से घिरा होता हूँ, जो अपने शारीरिक स्वास्थ्य और सामर्थ को बेहतर बनाने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे होते हैं। वहाँ लगे हुए पोस्टर हमें एक-दूसरे को न जाँचना स्मरण कराते रहते हैं, परन्तु उन शब्दों और कार्यों का सर्वदा स्वागत किया जाता है, जो दूसरों की परिस्थिति में सहायता को प्रदर्शित करते हैं।  

जीवन के आत्मिक क्षेत्र में चीज़ें किस प्रकार होनी चाहिए, यह उसकी एक सटीक तस्वीर है! हम में से वे, जो आत्मिक रूप से “स्वस्थ” होने, अपने विशवास में बढ़ने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं, कईबार महसूस कर सकते, कि उनका इस क्षेत्र से कोई सम्बन्ध नहीं है, क्योंकि हम आत्मिक रूप से मसीह के साथ हमारे चाल-चलन में उतने परिपक्व और उतने स्वस्थ नहीं हैं, जितने दूसरे हैं।    

पौलुस हमें छोटा परन्तु सीधा सुझाव देता है: “इस कारण एक दूसरे को शान्ति दो और एक दूसरे की उन्नति का कारण बनो” ( 1 थिस्सलुनीकियों 5:11) । और रोम के विश्वासियों के लिए उसने लिखा: हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिये प्रसन्न करे कि उसकी उन्नति हो” (रोमियों 15:2)। यह पहचानना कि हमारा पिता हमारे ऊपर बहुत ही स्नेह के साथ अनुग्रहकारी है, इसलिए आइए हम दूसरे लोगों को प्रोत्साहन के शब्दों और कार्यों के साथ परमेश्वर का अनुग्रह दिखाएँ।

जब हम “एक दूसरे को स्वीकार” (पद 7) करते हैं, आइए हम अपनी आत्मिक उन्नति के लिए परमेश्वर-पवित्र आत्मा के कार्य पर आधारित हों। और जब हम प्रतिदिन उसके पीछे चलना खोजते हैं, तो हम यीशु में हमारे भाइयों और बहनों को प्रोत्साहन का एक वातावरण बनाएँ, जब वे अपने विशवास में बढ़ते हैं।

चिन्ता के लिए एक विकल्प

कानून को मानने वाले एक ईमानदार व्यक्ति को एक वायस मेल प्राप्त हुई, जो इस प्रकार थी, “मैं पुलिस विभाग से________अधिकारी बोल रहा हूँl कृपया मुझे इस नम्बर पर फोन करेंl” उसी समय उस व्यक्ति ने चिन्ता करनी आरम्भ कर दी—वह डरा हुआ था कि कहीं न कहीं उसने कुछ गलत कर दिया हैl वह वहाँ फोन करने से डर रहा था, यहाँ तक कि वह अनेक प्रकार की सम्भव परिस्थितियों पर विचार करते हुए अनेक रातों तक जागता रहा—वह चिन्ता कर रहा था कि वह किसी न किसी प्रकार की समस्या में थाl उस अधिकारी ने कभी दुबारा फोन नहीं किया, परन्तु उस चिन्ता को जाने में हफ्तों का समय लगाl

चिन्ता के विषय में यीशु ने एक रोचक प्रश्न किया: “तुम में कौन है जो चिन्ता करके अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? (मत्ती 6:27)l सम्भवतः यह हमारी चिन्ता करने की प्रवृति पर पुन: विचार करने में हमारी सहायता कर सकता है, क्योंकि यह सलाह देता है कि उस परिस्थिति के बारे में चिन्ता करने से कोई लाभ नहीं है, जिसके बारे में हम चिन्ता कर रहे हैंl

हमारे जीवन में जब समस्याएँ चरम पर होती हैं, तो उस समय हम इस दो कदम वाले निम्नलिखित प्रस्ताव को अपना कर देख सकते हैं: कार्य करो और परमेश्वर पर भरोसा रखोl यदि हम समस्या से बचने के लिए कुछ कर सकते हैं, तो हम उसका प्रयास कर सकते हैंl हम परमेश्वर से उस कार्य को करने के लिए, जो हमें करना चाहिए, सहायता प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन माँग सकते हैंl परन्तु यदि हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं, तो हम यह जानकर शान्ति के साथ रह सकते हैं कि परमेश्वर स्वयं को ऐसी अवस्था में कदापि नहीं रखताl वह सर्वदा ही हमारे पक्ष में कार्य कर सकता हैl हम भरोसे और आत्मविश्वास के साथ अपनी परिस्थिति को उस पर डाल सकते हैंl

जब चिन्ता करने जैसा महसूस हो, तो हम राजा दाऊद के प्रेरित शब्दों की ओर जाएँ, जिसने अपनी कठिनाइयों और चिन्ताओं का सामना किया, परन्तु यह निष्कर्ष निकाला: “अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा” (भजन संहिता 55:22) l चिन्ता के लिए कितना उत्तम विकल्प!

घर

हाल ही में एक मित्र की कैंसर से मृत्यु हो गयी जो अपनी आजीविका के लिए मकान बेचा करती थी l पैट्सी के विषय अपनी यादें तरोताज़ा करते समय, मेरी पत्नी सू ने याद किया कि बहुत वर्ष पूर्व पैट्सी ने एक व्यक्ति को मसीह में विश्वास करने में मार्गदर्शन किया था और वह हमलोगों का अच्छा मित्र बन गया था l

यह याद करना कितना उत्साहजनक है कि पैट्सी न केवल परिवारों को हमारे समुदाय में रहने के लिए घर पाने में सहायता करती थी, बल्कि वह दूसरों को यह सुनिश्चित करने में भी सहायता करती थी कि उनके पास एक अनंत घर है l

हमारे लिए क्रूस तक जाने की तैयारी करते समय, यीशु ने हमारे अनंत घर के विषय भी गहरी रूचि दिखायी l उसने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूँ” और उनको याद दिलाया कि उसपर विश्वास करनेवालों के लिए उसके पिता के घर में पर्याप्त स्थान है (यूहन्ना 14:2) l

हम इस जीवन में रहने के लिए एक सुन्दर घर चाहते हैं – अपने परिवार के भोजन, विश्राम, और संगति के लिए एक विशेष स्थान l लेकिन विचार करें कि यह कितना आश्चर्यजनक होगा जब हम अगले जीवन में पहुँच कर यह जानेंगे कि परमेश्वर ने हमारे लिए अनंत घर का प्रबंध किया है l परमेश्वर की स्तुति हो जिसने हमें “बहुतायत का” जीवन के साथ-साथ वर्तमान में अपनी उपस्थिति देता है और उस स्थान पर भी देगा जो वह हमारे लिए तैयार कर रहा है (14:3) l

विचार करते हुए कि परमेश्वर ने यीशु पर विश्वास करनेवालों के लिए क्या रखा है, पैट्सी की तरह कार्य करने और दूसरों का यीशु से परिचय कराने के लिए चुनौती देता है l

परमेश्वर कौन है के लिए धन्यवाद

ग्रीटिंग कार्ड्स पर मुद्रित हजारों भावनाओं में से, शायद सबसे मर्मस्पर्शी यह सरल कथन है: "आप के व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l" अगर आपको वह कार्ड प्राप्त होता है, तो आप जानते
हैं कि कोई आपकी परवाह करता है इसलिए नहीं क्योंकि आपने उसके लिए कुछ असाधारण किया है, लेकिन इसलिए कि आपके गुण के लिए आपकी सराहना की जाती है l
मैं सोचता हूँ कि इस तरह की भावना हमें परमेश्वर को "धन्यवाद" कहने का सबसे अच्छा तरीका बता सकती है l निश्चित रूप से, ऐसा समय होता है जब परमेश्वर हमारे जीवन में स्पष्ट तरीके से हस्तक्षेप करता है, और हम कुछ इस तरह कहते हैं, "धन्यवाद, परमेश्वर, मुझे वह नौकरी मिली l" किन्तु अक्सर, हम केवल यह कह सकते हैं, "परमेश्वर, आप के व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l"
इसी तरह की भावनाएं प्रगट करते कुछ पद, 1 इतिहास 16:34 : "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है l" परमेश्वर, आप जो हैं, भले और प्रेमी, उसके लिए धन्यवाद l और भजन 7:17 : "मैं यहोवा के धर्म(धार्मिकता) के अनुसार उसका धन्यवाद करूँगा l" परमेश्वर, आप जो हैं, पवित्र, उसके लिए धन्यवाद l "हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएँ, . . . क्योंकि यहोवा महान् ईश्वर है" (भजन 95:2-3) l परमेश्वर, आप जो हैं, संसार के सर्वशक्तिमान परमेश्वर, उसके लिए धन्यवाद l
परमेश्वर जो है l यह हमारे लिए ठहरकर उसकी स्तुति और धन्यवाद करने का पर्याप्त कारण है l परमेश्वर, आप जो है उसके लिए धन्यवाद!