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Articles by डेव ब्रेनन

घर

हाल ही में एक मित्र की कैंसर से मृत्यु हो गयी जो अपनी आजीविका के लिए मकान बेचा करती थी l पैट्सी के विषय अपनी यादें तरोताज़ा करते समय, मेरी पत्नी सू ने याद किया कि बहुत वर्ष पूर्व पैट्सी ने एक व्यक्ति को मसीह में विश्वास करने में मार्गदर्शन किया था और वह हमलोगों का अच्छा मित्र बन गया था l

यह याद करना कितना उत्साहजनक है कि पैट्सी न केवल परिवारों को हमारे समुदाय में रहने के लिए घर पाने में सहायता करती थी, बल्कि वह दूसरों को यह सुनिश्चित करने में भी सहायता करती थी कि उनके पास एक अनंत घर है l

हमारे लिए क्रूस तक जाने की तैयारी करते समय, यीशु ने हमारे अनंत घर के विषय भी गहरी रूचि दिखायी l उसने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूँ” और उनको याद दिलाया कि उसपर विश्वास करनेवालों के लिए उसके पिता के घर में पर्याप्त स्थान है (यूहन्ना 14:2) l

हम इस जीवन में रहने के लिए एक सुन्दर घर चाहते हैं – अपने परिवार के भोजन, विश्राम, और संगति के लिए एक विशेष स्थान l लेकिन विचार करें कि यह कितना आश्चर्यजनक होगा जब हम अगले जीवन में पहुँच कर यह जानेंगे कि परमेश्वर ने हमारे लिए अनंत घर का प्रबंध किया है l परमेश्वर की स्तुति हो जिसने हमें “बहुतायत का” जीवन के साथ-साथ वर्तमान में अपनी उपस्थिति देता है और उस स्थान पर भी देगा जो वह हमारे लिए तैयार कर रहा है (14:3) l

विचार करते हुए कि परमेश्वर ने यीशु पर विश्वास करनेवालों के लिए क्या रखा है, पैट्सी की तरह कार्य करने और दूसरों का यीशु से परिचय कराने के लिए चुनौती देता है l

परमेश्वर कौन है के लिए धन्यवाद

ग्रीटिंग कार्ड्स पर मुद्रित हजारों भावनाओं में से, शायद सबसे मर्मस्पर्शी यह सरल कथन है: "आप के व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l" अगर आपको वह कार्ड प्राप्त होता है, तो आप जानते
हैं कि कोई आपकी परवाह करता है इसलिए नहीं क्योंकि आपने उसके लिए कुछ असाधारण किया है, लेकिन इसलिए कि आपके गुण के लिए आपकी सराहना की जाती है l
मैं सोचता हूँ कि इस तरह की भावना हमें परमेश्वर को "धन्यवाद" कहने का सबसे अच्छा तरीका बता सकती है l निश्चित रूप से, ऐसा समय होता है जब परमेश्वर हमारे जीवन में स्पष्ट तरीके से हस्तक्षेप करता है, और हम कुछ इस तरह कहते हैं, "धन्यवाद, परमेश्वर, मुझे वह नौकरी मिली l" किन्तु अक्सर, हम केवल यह कह सकते हैं, "परमेश्वर, आप के व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l"
इसी तरह की भावनाएं प्रगट करते कुछ पद, 1 इतिहास 16:34 : "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है l" परमेश्वर, आप जो हैं, भले और प्रेमी, उसके लिए धन्यवाद l और भजन 7:17 : "मैं यहोवा के धर्म(धार्मिकता) के अनुसार उसका धन्यवाद करूँगा l" परमेश्वर, आप जो हैं, पवित्र, उसके लिए धन्यवाद l "हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएँ, . . . क्योंकि यहोवा महान् ईश्वर है" (भजन 95:2-3) l परमेश्वर, आप जो हैं, संसार के सर्वशक्तिमान परमेश्वर, उसके लिए धन्यवाद l
परमेश्वर जो है l यह हमारे लिए ठहरकर उसकी स्तुति और धन्यवाद करने का पर्याप्त कारण है l परमेश्वर, आप जो है उसके लिए धन्यवाद!

सुस्वागतम्

हाल ही की छुट्टियों में, हम दोनों पति-पत्नी एक प्रसिद्ध एथलेटिक काम्प्लेक्स घूमने गए l उसके फाटक पूरी रीति से खुले थे, और ऐसा अहसास हो रहा था मानों हमें उसे देखने के लिए बुलाया जा रहा है l हमने मैदान और सजे हुए स्पोर्ट्स फ़ील्ड्स को देखने का आनंद उठाया l लौटते समय किसी ने हमें रोक कर हमसे कठोरतापूर्वक कहा कि हमें वहां नहीं होना था l अचानक हमने याद किया कि हम बाहरी लोग थे और हम असहज हो गए l  
उसी मौके पर हम एक चर्च देखने गए l पहले की तरह, दरवाजे खुले थे, इसलिए हम अन्दर गए l कितना अंतर था! कई लोगों ने गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया और हमें अपने घर जैसा महसूस कराया l
दुःख की बात है, बाहरी लोगों के लिए चर्च में प्रवेश पर, “आप यहाँ नहीं आ सकते” जैसे अनकहे शब्दों से सामना असाधारण बात नहीं है l किन्तु वचन हमसे सबके प्रति पहुनाई दिखाने को कहता है l यीशु ने हमसे अपने पड़ोसियों को अपने समान प्रेम करने को कहा है, अर्थात् उन्हें अपने जीवनों में और हमारे कलीसियाओं में स्वीकार करना है (मत्ती 22:39) l इब्रानियों में, हमें “अतिथि सत्कार करना न भूलना” (13:2) याद दिलाया गया है l लूका और पौलुस दोनों ही हमें सामजिक और भौतिक आवश्यकताओं वाले लोगों से क्रियाशील प्रेम करने की शिक्षा देते हैं (लूका 14:1313-14; रोमियों 12:13) l और विश्वासियों के परिवार में, हमारे पास प्रेम प्रगट करने की विशेष जिम्मेदारी है (गलातियों 6:10) l
जब हम गर्मजोशी से और मसीह के प्रेम से सब लोगों का स्वागत करते हैं, हम उद्धारकर्ता का प्रेम और तरस प्रगट करते हैं l

रहस्य खोलना

एक दिन मैं काम से घर लौटकर अपने घर के वाहनमार्ग पर किसी स्त्री की ऊँची एड़ी वाली जूतियाँ पड़ी देखकर समझ गया कि किसकी हो सकती है l इसलिए मैंने उन्हें अपनी बेटी लीसा को देने के लिए गराज में रख दी l वह अपने बच्चों को लेने आ रही थी l जब मैंने लीसा से जूतियों के विषय पूछा, तो मैंने जाना कि वे उसकी नहीं थीं l वास्तव में वे हमारे परिवार में किसी की नहीं थीं l इसलिए मैंने उन्हें वहीं पर रख दी जहां से उन्हें उठाया था l अगले दिन, वे वहां नहीं थीं l रहस्मय l

क्या आप जानते हैं कि प्रेरित पौलुस अपनी पत्रियों में एक रहस्य लिखता है? किन्तु उसके द्वारा वर्णित रहस्य किसी “जासूसी कहानी” से कहीं अधिक था l उदाहरण के लिए इफिसियों 3 में, पौलुस एक रहस्य के विषय बताता है जो “अन्य समयों में मनुष्यों की संतानों को ऐसा नहीं बताया गया था” (पद.5) l रहस्य यह है कि, बीते समयों में परमेश्वर खुद को इस्राएल द्वारा प्रगट किया, वर्तमान में, गैरमसीहियों(अन्यजातियों) पर यीशु द्वारा प्रगट किया अर्थात् जो इस्राएल के बाहर हैं वे भी “मीरास में साझी” हो सकते हैं (पद.6) l

विचार कीजिए कि इसका अर्थ क्या हो सकता है : यीशु को उद्धारकर्ता माननेवाले मिलकर परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं और उसकी सेवा कर सकते हैं l हम सभी के पास “भरोसे के साथ परमेश्वर के निकट आने का अधिकार है”(पद.12) l और चर्च की एकता के द्वारा संसार परमेश्वर का ज्ञान और अनुग्रह देखेगी (पद.10) l

अपने उद्धार के लिए परमेश्वर की स्तुति करें l यह हमारे लिए अर्थात् किसी भी और सभी पृष्ठभूमि के लोग जो यीशु में एक हो जाते हैं, के लिए एकता के रहस्य को खोलता है l 

क्या आपके लिए भला है ?

इसलिए कि मैं डार्क चॉकलेट पसंद करता हूँ, मैंने एक बार गूगल पर खोजा “क्या डार्क चॉकलेट आपके लिए अच्छा है?” मुझे अनेक उत्तर मिले –कुछ अच्छे, कुछ ख़राब l आप किसी भी उत्पाद के लिए ऐसा कर सकते हैं? क्या दूध आपके लिए अच्छा है? क्या कॉफ़ी आपके लिए अच्छी है? क्या चावल आपके लिए अच्छा है? इन प्रश्नों की उत्तर श्रृखला समूह चक्कर में डालनेवाले हैं, इसलिए आपको सावधान रहना होगा कि शायद आपकी खोज अपने आप में आप के लिए अच्छी नहीं है l इससे आपको सर दर्द हो सकता है!

किन्तु यदि आप सौ फीसदी अच्छी वस्तुएँ खोज रहें हैं, तो क्या मैं परमेश्वर के वचन की सिफारिश कर सकता हूँ? सुनिए कि परमेश्वर उसके साथ सम्बन्ध बनानेवाले यीशु के अनुयायी के लिए क्या कर सकता है l

          वह आपको पवित्र कर सकता है (भजन 119:9, 11) l

          वह आपको आशीष देता है (लूका 11:28) l

          वह आपको बुद्धिमान बनाता है (मत्ती 7:24) l

          वह आपको आलोकित और समझदार बनाता है (भजन 119:130) l

          वह आपको आत्मिक उन्नति देता है ( 1 पतरस 2:2) l

हमारा परमेश्वर भला है : भजन 145:9 कहता है, “यहोवा सब के लिए भला है l” और उसने अपनी भलाई में, उससे प्रेम करनेवालों को उसके साथ सम्बन्ध विकसित करने के लिए मार्गदर्शक के रूप में एक सहायक दिया है l जब हम विकल्पों के संसार में रहने का प्रयास करते हैं, परमेश्वर की स्तुति हो कि उसने अपने वचन में हमें बता दिया है कि हमारे लिए भला क्या है l आइए हम भजनकार के साथ कहें : “तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुहँ में मधु से भी मीठे हैं” (भजन 119:9) l

मेरे प्रिय मित्र के नाम

पहली सदी में प्रेरित यूहन्ना का गयुस को पत्र लिखना ऐसी कला है जो इक्कीसवीं सदी में लुप्त हो चुकी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की लेखिका कैथरीन फील्ड लिखती हैं, "पत्र लिखना हमारी प्राचीनतम कलाओं में से एक है।

गयुस को लिखे पत्र में, यूहन्ना शारीरिक और आत्मिक चंगाई की आशा के साथ गयुस की सत्यनिष्ठा पर एक उत्साहवर्धक वचन शमिल करते हैं और कलीसिया के प्रति उसके प्रेम पर टिपण्णी करते हैं। यूहन्ना ने कलीसिया में किसी समस्या की बात कही जिसे अलग से बाद में संबोधित करने का वादा किया। और उन्होंने परमेश्वर की महिमा हेतु अच्छे कार्य करने के महत्व के बारे में लिखा। कुल मिलाकर यह पत्र उत्साहवर्धक और चुनौतीपूर्ण था।

डिजिटल बातचीत के युग का अर्थ है, कागज के पत्र का लुप्त होना, परन्तु इसे दूसरों को प्रोत्साहित करने से हमें नहीं रोकना चाहिए। पौलुस ने चर्मपत्र पर प्रोत्साहन भरे पत्र लिखे; हम विभिन्न तरीकों में दूसरों को प्रोत्साहित कर सकते हैं। मुख्य यह नहीं कि तरीका क्या है, परन्तु यह है कि हम दूसरों को बताएँ कि हम यीशु के नाम पर उनकी परवाह करते हैं!

गयुस को यूहन्ना के पत्र से मिले प्रोत्साहन की कल्पना करें। हम भी मेसेज लिखकर या फ़ोन करके प्रेरणाप्रद शब्दों द्वारा अपने मित्रों को परमेश्वर का प्रेम दिखा सकते हैं।

फिर भी आशा

 

मेरे द्वारा 1988 से लेकर अब तक हमारी प्रतिदिन की रोटी  के लिए लिखे गए सैंकड़ों लेखों में से, कुछ एक मेरे मन में बस गए हैं l उनमें से एक लेख 1990 के दशक के मध्य का है जिसमें मैंने लिखा था कि हमारी तीन बेटियाँ कैंप या मिशन दौरे पर गयी हुई थीं, इसलिए छः साल का स्टीव और मैंने कुछ मनोरंजक समय एक साथ बिताए l

एयरपोर्ट की ओर सैर पर जाते समय, स्टीव ने मुड़कर मुझसे कहा, “मलेस्सा के बिना उतना आनंद नहीं है l” मलेस्सा उसकी आठ वर्षीय बहन और दिलीदोस्त थी l  उस समय हममें से कोई नहीं जानता था कि उसके वे शब्द कितने हृदयस्पर्शी होंगे l कार दुर्घटना में किशोरी मेलेस्सा की मृत्यु के बाद के वर्षों में जीवन “उतना आनंददायक” नहीं रहा है l बीच का समय दर्द को कम कर सकता है, किन्तु कोई भी दर्द को पूरी रीति से मिटा नहीं सकता l समय घाव को भर नहीं सकता है l लेकिन यहाँ कुछ है जिससे सहायता मिल सकती है : ढाढ़स देनेवाले परमेश्वर द्वारा प्रतिज्ञात दिलासा को सुनें, उस पर चिंतन करें, और उसका स्वाद लें l

सुनें: “हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरूणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है l (विलापगीत 3:22) l

चिंतन करें: वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा l (भजन 27:5) l

स्वाद लें: मेरे दुःख में मुझे शांति उसी से हुई है, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैंने जीवन पाया है l (119:50) l

किसी प्रिय की मृत्यु के बाद जीवन फिर कभी भी पहले जैसा नहीं होता l किन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ आशा और शांति/दिलासा लेकर आती हैं l

परमेश्वर की महान सृष्टि

 

हाल ही में जब हम अपने नाती-पोते के साथ एक सैर पर थे, फ्लोरिडा में हमें एक वेब कैमरा की सहायता से एक उकाब के परिवार को देखने का अवसर मिला l भूमि से बहुत ऊपर बने घोंसले में हमने प्रतिदिन माँ, पिता और उकाब के छोटे बच्चे के दैनिक क्रिया पर ध्यान दिया l हर दिन दोनों माता-पिता निरंतर अपने बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए, उसके पोषण के लिए निकट के नदी से मछली लाकर खिलाया करते थे l
उकाब के परिवार की यह कहानी परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि की एक छवि अर्थात् सृष्टि की छवि का एक विस्तृत वर्णन, परमेश्वर के रचनात्मक हाथों के कार्यों का रूप प्रस्तुत करती है, जिसका वर्णन भजनकार अपने भजन 104 में करता है l

हम कायनात से सम्बंधित परमेश्वर की सृष्टि का प्रताप देखते हैं (पद.2-4) l
हम पृथ्वी की रचना का अनुभव करते हैं अर्थात् जल, पर्वत, घटी (पद.5-9) l
हम परमेश्वर के उपहार की महिमा अर्थात् पशु, पक्षी, और उपज का आनंद लेते हैं (पद.10-18) l
हम परमेश्वर द्वारा रचित प्रकृति के क्रम का अर्थात् सुबह/रात, अन्धकार/ प्रकाश, कार्य/विश्राम पर अचम्भा करते हैं (पद.19-23) l

परमेश्वर ने अपने हाथों से हमारे आनंद और अपनी महिमा के लिए कितनी शानदार सृष्टि रची है! “हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!”(पद.1) l हममें से हर एक उसको सभी बातों के लिए जो उसने हमें दिया है जिसको हम सराह सकते हैं और जिसका हम आनंद ले सकते हैं उसे धन्यवाद दे सकते हैं l

हार्दिक स्वागत

“कौन सबको गले लगाएगा?”

यही सवाल उन अनेक सवालों में से एक था जो हमारे मित्र स्टीव ने तब पूछा जब उसे पता चला कि उसे कैंसर हो गया है और उसे जान पड़ा कि वह थोड़े समय के लिए हमारे चर्च में अनुपस्थित रहेगा l यदि हम रोमियों 16:16 को लागू करें जिसके अनुसार, “आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो” लिखा है, तो, स्टीव सबके साथ मित्रवत भाव रखते हुए अभिनन्दन करता था,  गर्मजोशी से हाथ मिलाता था, और “पवित्र चुम्बन” से बहुतों को गले भी लगाता था l

और अब जब हम सब स्टीव की चंगाई के लिए परमेश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं, वह इस बात से चिंतित है कि जब उसकी शल्यचिकित्सा और इलाज होता है और वह हमारे चर्च से कुछ समय के लिए अनुपस्थित रहेगा, हम उसके अभिवादन करने की कमी को महसूस करेंगे l

शायद हम सब स्टीव की तरह एक दूसरे का अभिवादन खुलकर नहीं कर सकते, किन्तु लोगों की चिंता करने का उसका नमूना हमारे लिए ताकीद है l स्मरण करें कि पतरस कहता है, “बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो,” अथवा जिसका केंद्र प्रेम हो (1 पतरस 4:9; देखें फ़िलि. 2:14) l जबकि प्रथम शताब्दी की पहुनाई में यात्रियों को रहने की व्यवस्था करना होता था, तो उसमें भी गर्मजोशी से स्वागत सम्मिलित होता था l

जब हम दूसरों के साथ प्रेम से व्यवहार करते हैं, चाहे गले लगाकर या मित्रवत मुस्कराहट के द्वारा, हम “सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट [करें]” (1 पतरस 4:11) l