Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by एलिसा मॉर्गन

चौराहे पर परमेश्वर

कई दिनों की बीमारी और फिर तेज़ बुखार के बाद, यह स्पष्ट था कि मेरे पति को आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता थी। अस्पताल ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया; एक दिन अगले दिन में बदल गया। उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन इतना नहीं कि उन्हें अस्पताल से छोड़ दिया जाये। मुझे अपने पति के साथ रहने या एक महत्वपूर्ण कार्य यात्रा को पूरा करने के कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा जहां कई लोग और परियोजनाएं शामिल थीं। मेरे पति ने मुझे आश्वासन दिया कि वह ठीक हो जायेंगे। लेकिन मेरा दिल उसके और मेरे काम के बीच बंटा हुआ था।

परमेश्वर के लोगों को जीवन के निर्णयों के चौराहे पर उसकी सहायता की आवश्यकता थी। बहुत बार, उन्होंने उसके प्रकट निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसलिए मूसा ने लोगों से उसकी आज्ञाओं का पालन करके "जीवन को चुनने" का आग्रह किया (व्यवस्थाविवरण 30:19)। बाद में, भविष्यवक्ता यिर्मयाह ने परमेश्वर के भटके हुए लोगों को दिशा-निर्देश दिए, और उन्हें उसके मार्गों पर चलने के लिए प्रेरित
किया : "सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी पर चलो" (यिर्मयाह 6:16)। पवित्रशास्त्र बाइबल के प्राचीन मार्ग और परमेश्वर के पिछले प्रावधान हमें निर्देशित कर सकते हैं।

मैंने खुद को एक भौतिक चौराहे पर कल्पना की और यिर्मयाह के ज्ञान के नमूना को लागू किया। मेरे पति को मेरी जरूरत थी, और मेरे काम को भी। तभी, मेरे संचालक ने फोन किया और मुझे घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया। मैंने राहत की सांस ली और चौराहे पर परमेश्वर के प्रावधान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। परमेश्वर का निर्देश हमेशा स्पष्ट रूप से नहीं आता, लेकिन आता है। जब हम चौराहे पर खड़े हों, तो आइए सुनिश्चित करें कि हम उसकी तलाश करें। एलिसा मॉर्गन

कलीसिया (चर्च) बनो

कोविड-19 महामारी के दौरान, डेव और कार्ला ने एक घरेलू चर्च की तलाश में महीनों बिताए। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन  किया , जिसने विभिन्न व्यक्तिगत अनुभवों को सीमित कर दिया, और इसे और भी कठिन बना दिया। वे यीशु में विश्वासियों के एक समूह से जुड़ने के लिए तरस रहे थे। कार्ला ने मुझे ईमेल किया, "यह चर्च खोजने का कठिन समय है।" मेरे भीतर अपने चर्च परिवार के साथ फिर से जुड़ने की मेरी अपनी लालसा से एक अहसास उभरा। "यह चर्च बनने का कठिन समय है," मैंने जवाब दिया। उस समय में, हमारे चर्च ने  आस-पास के इलाकों में भोजन दिया, ऑनलाइन सेवाएँ बनाईं और हर सदस्य को समर्थन और प्रार्थना के साथ फ़ोन किया। मेरे पति और मैंने भाग लिया और फिर भी सोचा कि हम अपनी बदली हुई दुनिया में "चर्च होने" के लिए और क्या कर सकते हैं।

इब्रानियों 10:25 में, लेखक पाठकों से “एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें” और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो” की उपेक्षा न करने का आग्रह करता है । संभवतः उत्पीड़न के कारण (पद. 32-34) या शायद केवल थके होने का परिणाम (12:3), संघर्षरत प्रारंभिक विश्वासियों को कलीसिया बने रहने के लिए एक प्रोत्साहन की आवश्यकता थी।

और आज, मुझे भी एक प्रोत्साहन की आवश्यकता है। क्या आपको भी जरूरत है ? जब परिस्थितियाँ बदल जाती हैं तो हम चर्च का अनुभव कैसे करते हैं, क्या हम चर्च बने रहेंगे? जैसे परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है आइए रचनात्मक रूप से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें और एक-दूसरे का निर्माण करें। अपने संसाधनों को साझा करें। समर्थन का संदेश भेजें। इकट्ठा हों जिस तरह हम सक्षम हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें। आइए चर्च बने रहें ।

—एलिसा मॉर्गन 

कलीसिया (चर्च) बनो

कोविड-19 महामारी के दौरान, डेव और कार्ला ने एक घरेलू चर्च की तलाश में महीनों बिताए। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया , जिसने विभिन्न व्यक्तिगत अनुभवों को सीमित कर दिया, और इसे और भी कठिन बना दिया। वे यीशु में विश्वासियों के एक समूह से जुड़ने के लिए तरस रहे थे। कार्ला ने मुझे ईमेल किया, "यह चर्च खोजने का कठिन समय है।" मेरे भीतर अपने चर्च परिवार के साथ फिर से जुड़ने की मेरी अपनी लालसा से एक अहसास उभरा। "यह चर्च बनने का कठिन समय है," मैंने जवाब दिया। उस समय में, हमारे चर्च ने आस-पास के इलाकों में भोजन दिया, ऑनलाइन सेवाएँ बनाईं और हर सदस्य को समर्थन और प्रार्थना के साथ फ़ोन किया। मेरे पति और मैंने भाग लिया और फिर भी सोचा कि हम अपनी बदली हुई दुनिया में "चर्च होने" के लिए और क्या कर सकते हैं।

इब्रानियों 10:25 में, लेखक पाठकों से “एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें” और ज्यों-ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों-त्यों और भी अधिक यह किया करो” की उपेक्षा न करने का आग्रह करता है । संभवतः उत्पीड़न के कारण (पद. 32-34) या शायद केवल थके होने का परिणाम (12:3), संघर्षरत प्रारंभिक विश्वासियों को कलीसिया बने रहने के लिए एक प्रोत्साहन की आवश्यकता थी।

और आज, मुझे भी एक प्रोत्साहन की आवश्यकता है। क्या आपको भी जरूरत है ? जब परिस्थितियाँ बदल जाती हैं तो हम चर्च का अनुभव कैसे करते हैं, क्या हम चर्च बने रहेंगे? जैसे परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है आइए रचनात्मक रूप से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें और एक-दूसरे का निर्माण करें। अपने संसाधनों को साझा करें। समर्थन का संदेश भेजें। इकट्ठा हों जिस तरह हम सक्षम हैं। एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें। आइए चर्च बने रहें ।

—एलिसा मॉर्गन

परमेश्वर में शक्ति एकत्रित करना

 
ग्रिंगर मैककॉय एक कलाकार हैं जो पक्षियों का अध्ययन करते हैं और उनकी सुंदरता, भेद्यता और शक्ति को कैद करते हुए उनकी मूर्तियाँ बनाते हैं  । उनकी एक कलाकृति का शीर्षक है रिकवरी। इसमें एक पिंटेल बत्तख का दाहिना पंख दिखाया गया है, जो एक खड़ा  (सीधा) स्थिति में ऊपर की ओर फैला हुआ है। नीचे, एक पट्टिका है जो पक्षी के रिकवरी स्ट्रोक का वर्णन इस प्रकार करती है "उड़ान में पक्षी की सबसे बड़ी कमजोरी का क्षण, फिर भी वह क्षण जब वह आगे की यात्रा के लिए ताकत जुटाता है।" ग्रिंगर ने यह श्लोक शामिल किया है: "मेरा अनुग्रह तुम्हारे लिए पर्याप्त है, क्योंकि मेरी शक्ति कमजोरी में सिद्ध होती है" (2 कुरिन्थियों 12:9)। 
 
प्रेरित पौलुस ने ये शब्द कुरिन्थ की कलीसिया को लिखे। एक ऐसे दौर को सहते हुए जब वह व्यक्तिगत संघर्ष से विचलित हो गया, पौलुस ने परमेश्वर से विनती की कि वह उसे हटा दे जिसे उसने "मेरे शरीर में एक काँटा" कहा था (पद 7) उसका कष्ट शायद शारीरिक बीमारी या आध्यात्मिक विरोध रहा होगा। क्रूस पर चढ़ने से एक रात पहले बगीचे में यीशु की तरह(लूका 22:39-44), पौलुस ने बार-बार परमेश्वर से उसकी पीड़ा दूर करने के लिए प्रार्थना की। पवित्र आत्मा ने उसे यह आश्वासन देकर जवाब दिया कि वह आवश्यक शक्ति प्रदान करेगा। पौलुस ने सीखा, "जब मैं निर्बल होता हूँ, तभी बलवन्त होता हूँ।"(2 कुरिंन्थियों 12:10) 
 
ओह, इस जीवन में हम कितने काँटों का अनुभव करते हैं! एक पक्षी की तरह जो आगे की यात्रा के लिए अपनी ताकत जुटाता है, हम भी अपने सामने आने वाली चुनौतियों के लिए परमेश्वर की ताकत जुटा सकते हैं। उसकी ताकत में, हम अपनी ताकत पाते हैं 
 
— एलिसा मॉर्गन 
 

विश्राम की अनुमति

मेरी सहेली सूज़ी और मैं समुद्र तट के कुछ शिलाखंडों पर बैठकर, समुद्र के झाग को धनुषाकार छल्ले उछालते हुए देख रहे थे l एक के बाद एक लहरों को लौटकर चट्टानों से टकराते हुए देखकर, सूज़ी बोल पड़ी, “मुझे समुद्र से प्यार हैl वह गतिमान रहता है इसलिए मुझे ज़रूरत नहीं! 

क्या यह दिलचस्प नहीं है कि हममें से कुछ महसूस करते हैं कि हमें अपने काम से विश्राम करने के लिए “अनुमति” की ज़रूरत होती है? और बिल्कुल यही है जो हमारा अच्छा परमेश्वर हमें प्रदान करता है! छह दिनों तक, परमेश्वर ने प्रकाश, भूमि, वनस्पति, जानवरों और मनुष्यों को बनाकर पृथ्वी को अस्तित्व में लाया l फिर सातवें दिन, परमेश्वर ने विश्राम किया (उत्पत्ति 1:31-2:2) दस आज्ञाओं में, परमेश्वर ने उसका सम्मान करने के लिए स्वस्थ जीवन के लिए अपने नियमों को सूचीबद्ध किया (निर्गमन 20:3-17) जिसमें सब्त को विश्राम के दिन के रूप में याद रखने की आज्ञा शामिल है (पद.8-11) नए नियम में हम यीशु को नगर के सभी बीमारों को चंगा करते हुए देखते हैं (मरकुस 1:29:34) और फिर अगली सुबह प्रार्थना करने के लिए एकांत स्थान पर जाते हुए पाते हैं (पद.35) उद्देश्यपूर्ण ढंग से, हमारे परमेश्वर ने काम किया और विश्राम किया l 

कार्य में, परमेश्वर के प्रावधान की लय और विश्राम के लिए उसका निमंत्रण हमारे चारों ओर गूंजता हैl वसंत के रोपण से ग्रीष्मकाल में वृद्धि, पतझड़ में फसल और शीतकाल में विश्राम मिलाता है l सुबह, दोपहर, दोपहर, शाम, रात l परमेश्वर हमारे जीवन को काम और आराम दोनों के लिए आदेश देता है, हमें दोनों करने की अनुमति देता है l 

गुलाबी कोट

ब्रेंडा मॉल से बाहर निकल रही थी, जब एक प्रदर्शन खिड़की (डिस्पले विन्ड़ो) से गुलाबी रंग की एक चीज ने उसका ध्यान आकर्षित  किया। वह मुड़ी और एक हल्के गुलाबी रंग के कोट को देखा; वह उसके   सामने मंत्रमुग्ध सी होकर खड़ी रही। उसने सोचा कि  हॉली इसे पसंद करेगी! हॉली, उसकी सहकर्मी मित्र के लिए आर्थिक तंगी थी, जो एक अकेली माँ थी, और जब ब्रेंडा जानती थी कि  हॉली को एक गर्म कोट की आवश्यकता है, तो उसे यह भी विश्वास था कि उसकी सहेली अपने लिए ऐसी खरीदारी पर कभी भी  पैसा नहीं खर्च सकती है। थोड़ा सोचने के बादए ब्रेंडा मुस्कुराई, अपना बटुआ निकाला, और कोट को हॉली के घर भेजने की व्यवस्था की। उसने एक गुमनाम कार्ड  लिखकर उसमें रखा “तुम बहुत प्यारी हो।” और फिर  ब्रेंडा खुशी  में भरकर व्यावहारिक रूप से नाचती हुई अपनी कार तक गई ।

आनंद, ईश्वर द्वारा दिए गए देने का उप फल  है। जैसा कि पौलुस ने कुरिन्थियों को उदारता की कला में निर्देश दिया थाए उसने कहा, “हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करेय न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव सेए क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है” (2 कुरिन्थियों 9:7)  उसने यह भी कहा, “जो बहुत  बोता है, वह बहुत काटेगा” (पद 6)।

कभी कभी हम भेंट की थाली में नकद रख देते हैं। अन्य समयों में हम एक योग्य सेवकाई को ऑनलाइन दान करते हैं। और फिर ऐसे क्षण आते हैं जब परमेश्वर अपने प्रेम की मूर्त अभिव्यक्ति के साथ एक मित्र की आवश्यकता का प्रत्युत्तर देने के लिए हमारी अगुवाई करता है। हम किराने का सामान, गैस का एक टैंक प्रदान करते हैं। या एक बिल्कुल गुलाबी कोट का उपहार भी।

फास्ट-फूड प्रोत्साहन

मध्य एशिया में एक साथ पले-बढ़े बहीर(Baheer) और मेडेट(Medet) सबसे अच्छे मित्र थे l लेकिन जब बहीर यीशु में विश्वास करने लगा, तो सब कुछ बदल गया l मेडेट द्वारा सरकारी अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बाद, बहीर को असहनीय यातना सहनी पड़ी l गार्ड गुर्राया, “यह मुँह फिर कभी यीशु का नाम नहीं बोलेगा l” बूरी तरह लहूलुहान होने के बावजूद, बहीर यह कहने में सफल रहा कि वे उसे मसीह के बारे में बोलना बन्द करवा सकते हैं, लेकिन वे “उसने मेरे दिल में जो किया है उसे कभी नहीं बदल सकते l” 

वे शब्द मेडेट के मन में बने रहे l कुछ महीनों बाद, बीमारी और हानि का सामना करने के बाद, मेडेट बहीर को खोजने निकला, जो जेल से रिहा हो गया था l अपने घमण्ड से हटकर उसने अपने मित्र से उसे अपने यीशु से मिलवाने के लिए कहा l 

मेडेट ने पवित्र आत्मा के दृढ़ विश्वास पर उसी तरह कार्य किया जैसे कि जो लोग पिन्तेकुस्त के पर्व पर पतरस के आसपास एकत्र हुए थे, जब उन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह का प्रवाह देखा और मसीह के बारे में पतरस की साक्षी सुने तो उनके “हृदय छिद [गए थे]”(प्रेरितों के काम 2:37) l पतरस ने लोगों को मन फिराने और यीशु के नाम से बप्तिस्मा लेने के लिए बुलाया, और लगभग तीन हज़ार लोगों ने ऐसा किया l जिस प्रकार उन्होंने जीवन के अपने पुराने तरीकों को पीछे छोड़ दिया, उसी प्रकार मेडेट ने भी मन फिराया और उद्धारकर्ता का अनुसरण किया l 

यीशु में नए जीवन का उपहार उन सभी के लिए उपलब्ध है जो उस पर विश्वास करते हैं l हमने जो कुछ भी किया है, जब हम उस पर भरोसा करते हैं तो हम अपने पापों की क्षमा का आनंद ले सकते हैं l

"छोटे" आश्चर्यकर्म

हमारे वेडिंग शॉवर (करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए शादी से पहले मिलने और जश्न मनाने का अवसर) में, हमारा शर्मीला दोस्त डेव एक कोने में एक, टिशू से लिपटी हुई अंडाकार वस्तु को पकड़कर खड़ा था। जब उसकी उपहार देने की बारी आई तो वह उसे  लेकर आया। इवान और मैंने इसे खोला और लकड़ी का एक हाथ से नक्काशीदार लंबाकार टुकड़ा पाया जिसमें खोद कर लिखा हुआ था, "परमेश्वर के कुछ आश्चर्यकर्म छोटे भी होते हैं।" यह पट्टिका हमारे घर में पैंतालीस वर्षों से लटकी हुई है, जो हमें बार-बार याद दिलाती है कि परमेश्वर छोटी-छोटी चीजों में भी काम करते हैं। बिल का भुगतान करना हो, या भोजन उपलब्ध कराना हो, या सर्दी और खांसी ठीक करना हो । यह सब परमेश्वर के प्रावधान के प्रभावशाली  प्रमाण के सबूत है। 

भविष्यवक्ता जकर्याह के द्वारा, यहूदा के हाकिम, जरुब्बाबेल को यरूशलेम और मंदिर के पुनर्निर्माण के संबंध में परमेश्वर से इसी तरह का संदेश मिला था। बेबीलोन की बन्धुवाई से लौटने के बाद, एक धीमी प्रगति का समय चल रहा था, और इस्राएली हतोत्साहित हो गए। लेकिन परमेश्वर ने कहा, "इन छोटी शुरुआतों का तिरस्कार मत करो" (जकर्याह 4:10 )। वह अपनी इच्छाओं को हमारे द्वारा से और कभी-कभी हमारे बावजूद भी पूरा करता है। सर्वशक्तिमान यहोवा का यही वचन है, ''न तो बल से और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा'' (पद 6)।

जब हमें ज़ाहिर रूप से परमेश्वर के काम बहुत बड़े पैमाने में नहीं दिखते तो हम थकने लगते है, पर हम याद रखें कि उसके कुछ आश्चर्यकर्म "छोटे" हो सकते हैं। वह अपने बड़े उद्देश्यों को पूरा करने के लिए छोटी चीज़ों का उपयोग करता है।

स्वागत चटाई/Mat

अपने स्थानीय सुपरमार्केट में प्रदर्शित चटाई/doormat को देखते हुए, मैंने उनकी सतहों पर अंकित संदेशों को देखा l “हेलो!/Hello!” “ओ/O के साथ “घर/Home” l और जो अधिक परिचित था, मैंने उसे चुना, “स्वागत है/Welcome l” इसे घर पर रखकर मैंने अपने हृदय की जांच की l क्या मेरा घर वास्तव में उस तरह का स्वागत कर रहा था जैसा ईश्वर चाहता है? संकट या पारिवारिक अशांति में फंसे बच्चे का? आवश्यकतामंद पड़ोसी शहर के बाहर से परिवार का कोई सदस्य जिसने अचानक ही फोन कर दिया? 

मरकुस 9 में, यीशु रूपांतरण के पर्वत से आगे बढ़ता है जहां पतरस, याकूब और यूहन्ना उसकी पवित्र उपस्थिति में विस्मय में खड़े थे (पद.1-13), एक पिता के साथ एक दुष्टात्माग्रस्त लड़के को ठीक करने के लिए जो आशा खो चुका था (पद.14-29) l तब यीशु ने अपने शिष्यों को अपने आने वाली मृत्यु के विषय में व्यक्तिगत शिक्षा दी (पद.30-३२) l वे उसकी बात से बूरी तरह चूक गए (पद.33-34) l जबाब में, यीशु ने एक बच्चे को अपने गोद में उठाया और कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता, वह मुझे नहीं, वरन् मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है” (पद.37) l यहाँ स्वागत शब्द का अर्थ अतिथि के रूप में स्वागत करना और स्वीकार करना है l यीशु चाहते हैं कि उनके शिष्य सभी का स्वागत करें, यहाँ तक कि कम महत्व वाले और असुविधाजनक लोगों का भी, मानो हम उनका स्वागत कर रहे हों l 

मैंने अपने स्वागत चटाई/mat के बारे में सोचा और विचारा कि मैं दूसरों तक उसका प्रेम कैसे बढ़ाती हूँ l इसका आरम्भ यीशु को एक बहुमूल्य अतिथि के रूप में स्वागत करने से होता है l क्या मैं उसे अपने नेतृत्व करने की अनुमति दूंगी, दूसरों का उस तरह से स्वागत करते हुए जिस तरह वह चाहता है?