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Articles by एलिसामॉर्गन

क्षमा करने के लिए चुने गए

जनवरी 23, 1999 को ग्रैहम स्टेंस और उनके दो छोटे बेटे फिलिप और टिमोथी को, उनकी जीप में जहाँ वे सो रहे थे, आग लगाकर जला दिया गया था l उस समय तक भारत के ओडिशा में गरीब कुष्ठ रोगियों के बीच उनकी समर्पित सेवा के विषय बाहरी संसार बहुत कम जानता था l इस तरह की त्रासदी के बीच, उनकी पत्नी ग्लेडिस और बेटी एस्तर ने सबको चकित कर दिया l उन्होंने नफरत से नहीं बल्कि क्षमा के साथ प्रत्युत्तर देने का चुनाव किया l

बराह वर्षों के बाद जब मुक़दमा समाप्त हुआ, तो ग्लेडिस ने एक ब्यान जारी किया जिसमें कहा गया था कि “मैंने हत्यारों को माफ़ कर दिया है और मुझे उनके खिलाफ कोई कड़वाहट नहीं है . . . मसीह में परमेश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया है और वह अपने अनुयायियों से भी ऐसा ही करने की उम्मीद करता है l” परमेश्वर ने ग्लेडिस को दिखाया कि क्षमा करने की कुंजी यह है कि दूसरों ने हमारे साथ जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करना बंद करें और यीशु ने हमारे लिए जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करें l मसीह के सतानेवालों के प्रति उसके शब्द थे “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34) इस प्रकार यीशु की क्षमा के विषय जकर्याह की याजकीय नबूवत पूरा हुआ (1:77) l

जबकि हम में से अधिकांश एक अकल्पनीय त्रासदी को सहन नहीं करेंगे जैसा कि ओडिशा में हुआ, हम में से हर एक के साथ किसी न किसी तरह से अन्याय हुआ है l कोई पति या पत्नी धोखा देती है l कोई बच्चा विद्रोह करता है l कोई कर्मचारी अनुचित व्यवहार करता है l हम किस तरह व्यवहार करते हैं? शायद हम अपने उद्धारकर्ता के आदर्श की ओर देखते हैं l तिरस्कार और क्रूरता के सामने, वह क्षमा करता है l यह यीशु के द्वारा हमारे पापों की क्षमा ही है कि हम, हम लोग, उद्धार पाते हैं, जिसमें दूसरों को क्षमा करने की योग्यता शामिल है l और ग्लेडिस स्टेंस की तरह, हम अपनी कड़वाहट को त्यागकर क्षमा करने के लिए अपने हृदय खोल सकते हैं l

हर्षरुपी तेल

यदि आप किसी फिल्म में यीशु का भाग निभाते, तो आप इस भूमिका को कैसे निभाते? ब्रूस मार्शिआनो ने इसी चुनौती का सामना किया, जिसने 1993 में दृश्य बाइबल फिल्म मैथ्यू(Mathew) में यीशु की भूमिका निभायी l यह जानकार कि लाखों दर्शक उसके काम के आधार पर यीशु के बारे में निष्कर्ष निकालेंगे, मसीह को “सही” तौर पर पेश करने का भार उसको अभिभूत कर रहा था l वह घुटनों पर गिर गया और उसने यीशु से अनुनय किया – हां, यीशु के लिए l
ब्रूस ने इब्रानियों के पहले अध्याय से अंतर्दृष्टि प्राप्त की, जहाँ लेखक बताता है कि कैसे परमेश्वर पिता ने पुत्र को “हर्षरुपी तेल से” (1:9) अभिषेक करके अलग किया l इस प्रकार का आनंद एक उत्सव है – पिता के साथ सम्बन्ध जो पूर्ण हृदय से व्यक्त किया गया है l यीशु के हृदय पर इस तरह का आनंद जीवन भर राज्य किया l जिस प्रकार इब्रानियों 12:2 वर्णन करता है, “जिसने उस आनंद के लिए जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिंता न करके क्रूस का दुःख सहा, और परमेश्वर के सिंहासन की दाहिनी ओर जा बैठा l”
पवित्र वचन की इस अभिव्यक्ति से अपना सम्बन्ध रखते हुए, ब्रूस ने अपने उद्धारकर्ता का आनंद से भरा विशिष्ट चित्रण पेश किया l परिणामस्वरूप, वह “मुस्कुराता हुआ यीशु” के रूप में जाना जाने लगा l हम भी अपने घुटनों पर जाने की हिम्मत कर सक सकते हैं और “यीशु से यीशु के लिए अनुनय कर सकते हैं l” काश वह अपना चरित्र हममें भर दे ताकि चारों ओर के लोग उसके प्रेम का प्रगटीकरण हममें देख सकें l

यीशु की तरह प्रार्थना करना

हर सिक्के के दो पहलु होते हैं l सामने वाले को “हेड” कहा जाता है और, आरंभिक रोमी काल से, आमतौर पर एक देश के प्रमुख को दर्शाया जाता है l पीछे की ओर को “टेल्स” कहा जाता है, एक शब्द जो संभवतः एक ब्रिटिश सिक्के से आता है जो एक शेर की उठाई हुयी पूंछ को दर्शाता है l 

एक सिक्के की तरह, गतसमनी के बगीचे में मसीह की प्रार्थना के दो पक्ष हैं l अपने जीवन के सबसे कठिन घंटे में, क्रूस पर उसकी मृत्यु की पूर्व रात को, यीशु ने प्रार्थना की, “हे पिता, यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42) l जब मसीह कहता है, “इस करोरे को . . . हटा ले,” तो यही प्रार्थना की सरल सच्चाई है l वह अपनी व्यक्तिगत इच्छा को प्रगट करता है, “यह वही है जो मैं चाहता हूँ l”

उसके बाद यीशु यह प्रार्थना करते हुए कि “मेरी नहीं” सिक्के को पलट देता है l यह पहलु ही त्याग का है l जब हम सरलता से कहते हैं, “परन्तु परमेश्वर आप क्या चाहते हैं?” तब परमेश्वर के प्रति हमारा त्याग आरम्भ हो जाता है l 

यह दो तरफ़ा प्रार्थना मत्ती 26 और मरकुस 14 में भी शामिल है और यूहन्ना 18 में उल्लेख किया गया है l यीशु ने प्रार्थना के दोनों पक्षों से प्रार्थना की : यह कटोरा . . . टल जाए (परमेश्वर, जो मैं चाहता हूँ), तौभी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं (परमेश्वर, आप क्या चाहते हैं?), के मध्य केन्द्रीय बिंदु पर रहा l 

यीशु के दो पक्ष l प्रार्थना के दो पक्ष l 

छोड़ने का आह्वान

एक युवती के रूप में, मैंने तीस साल की उम्र तक खुद को विवाहित और एक अच्छी नौकरी में रहने की कल्पना की – परन्तु ऐसा नहीं हुआ l मेरा भविष्य खाली होकर मेरे सामने मुँह बाये था और अपने जीवन के साथ क्या करना है के विषय मैंने संघर्ष किया l अंत में मैंने दूसरों की सेवा करके उसकी सेवा करने का मार्गदर्शन महसूस किया और सेमिनरी में दाखिला ले ली l तब यह वास्तविकता सामने आई कि मुझे अपने घर, मित्रों और परिवार से दूर जाना होगा l परमेश्वर की बुलाहट का प्रत्युत्तर देने के लिए, मुझे निकलना पड़ा l 

यीशु गलील के झील के निकट चल रहे थे जब उन्होंने पतरस और उसके भाई अन्द्रियास को जीविका के लिए झील में जाल डालते हुए देखा l उसने उनको आमंत्रित किया, “मेरे पीछे चले आओ, और मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊँगा” (मत्ती 4:19) l तब यीशु ने दो और मछुआरों, याकूब और उसके भाई युहन्ना को देखा और उन्हें भी वही निमंत्रण दिया (पद.21) l 

जब ये चेले यीशु के पास आए, उन्होंने भी कुछ छोड़ा l पतरस और अन्द्रियास ने अपने “जालों” को छोड़ा (पद.20) l याकूब और युहन्ना ने “नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए” (पद.22) l लूका ईसे इस तरह कहता है : “और वह नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़कर उसके पीछे हो लिए” (लूका 5:11) l 

यीशु की प्रत्येक बुलाहट में किसी और चीज़ से अलग होने की बुलाहट भी शामिल होती है l जाल l नाव l पिता l मित्र l घर l परमेश्वर हम सभी को अपने साथ एक रिश्ते के लिए बुलाता है l फिर वह हम में से प्रत्येक को सेवा करने के लिए कहता है l 

भेदित प्रेम

उसने फोन किया था l उसने टेक्स्ट किया था l अब चांदनी अपने भाई के घर के फाटक के बाहर खड़ी थी, और उस पार उत्तर पाने में विफल थी l अवसाद से बोझिल और नशे की लत से जूझते हुए, उसके भाई ने खुद को अपने घर में छिपा लिया था l उसके अलगाव को बेधने की एक असफल कोशिश में, चांदनी ने अपने कई पसंदीदा खाद्य पदार्थों को इकठ्ठा करने के साथ-साथ पवित्र शास्त्र के प्रोत्साहित करनेवाले वचन लेकर गठरी को फाटक से नीचे उतारने की कोशिश की l 

लेकिन जैसे ही गठरी उसके हाथ से छूटी, वह फाटक के एक कील में लगकर चिर गयी, जिससे एक छेद हो गया और उसमें की सब वस्तुएं नीचे बजरी पर गिर गयीं l उसके अच्छे उद्देश्य, और प्रेम से पूर्ण भेंट मानो बर्बाद हो गयी l क्या कभी उसका भाई उसके उपहार पर ध्यान देगा? जो आशा का उद्देश्य उसके मन में था क्या वह पूरा होगा? उसकी चंगाई का इंतज़ार करते हुए वह केवल आशा कर सकती है और प्रार्थना कर सकती है l 

परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा – सार-रूप में – उसने हमारे पाप की दीवार पर अपने इकलौते पुत्र को उतारा, उससे दूर चले गए संसार के लिए प्रेम और चंगाई का तोहफा दिया (यूहन्ना 3:16) l यशायाह नबी ने यशायाह 53:5 में प्रेम के इस कार्य की लागत की भविष्वाणी की l यही पुत्र “हमारे ही अपराधों के कारण घायल” किया जाएगा और “हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला” जाएगा l आखिरकार चंगाई की आशा उसके घाव से आएगी l उसने अपने ऊपर “हम सभों के अधर्म का बोझ” उठा लिया (पद.6) l 

हमारे पाप और ज़रूरतों के लिए बेधा गया, परमेश्वर का उपहार यीशु आज हमारे दिनों में ताज़गी और सामर्थ्य के साथ प्रवेश करता है l उसका उपहार आपके लिए क्या मायने रखता है?

साफ़ कंटेनर्स

“ढोनेवाले कंटेनर में नफरत से जंग लग जाता है l” ये शब्द पूर्व विधायक(Senator) एलन सिम्सन ने जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के अंतिम संस्कार में बोले थे l अपने मित्र की दयालुता का वर्णन करने का प्रयास करते हुए, सीनेटर सिम्सन ने याद किया कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका के चालीसवें राष्ट्रपति ने अपने पेशवर नेतृत्व और व्यक्तिगत संबंधों में घृणा के बजाय हास्य और प्रेम को अपनाया l

मैं सीनेटर के उद्धरण से सम्बद्ध रखता हूँ, क्या आप नहीं रखते हैं? ओह, मेरी कितनी हानि होती है जब मैंने नफरत को पनाह देता हूँ!

चिकित्सा अनुसन्धान हमारे शरीर को हुए नुक्सान को प्रगट करता है जब हम नकारात्मक क्रोध से चिपके रहते हैं या हम क्रोध का बौछार करते हैं l हमारा रक्त चाप बढ़ जाता है l हमारा हृदय जोर से धड़कने लगता है l हमारी आत्मा बैठती है l हमारे कंटेनर(व्यक्तित्व) बिगड़ने लगते हैं l 

नीतिवचन 10:12 में राजा सुलैमान कहता है, “बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं l” यहाँ नफरत के परिणामस्वरुप जो संघर्ष होता है, वह विभिन्न जनजातियों और जातियों के लोगों के बीच खुनी संघर्ष है l इस तरह की नफरत बदला लेने के लिए सहज प्रवृति को बढ़ावा देती है ताकि जो लोग एक दूसरे से घृणा करते हैं वे मिल न सकें l 

इसके विपरीत, परमेश्वर के प्यार का तरीका ढांपता है – सभी गलतियों - के ऊपर एक पर्दा डालता है, को छुपाता है, या उनको क्षमा करता है l इसका मतलब यह नहीं है कि हम त्रुटियों को अनदेखा करते हैं या गलत काम करनेवाले की सहायता करते हैं l लेकिन हम गलतियों को पोषित नहीं करते हैं कोई सच में पश्च्तापी है l और यदि वे कभी पश्चाताप नहीं करते हैं, इसके बावजूद भी हम अपनी भावनाओं को परमेश्वर को बताते हैं l (1 पतरस 4:8) l हम जो महः प्रेम करनेवाले को जानते हैं “एक दूसरे से प्रेम [रखें] क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है” (1 पतरस 4:8) l 

स्वीकृतियों का धागा

एक क्रिसमस के समय, मेरी दादी ने मुझे सुन्दर मोती का एक हार दिया l वे सुन्दर मोती मेरे गले में चमकते रहे जब तक कि एक दिन धागा टूट नहीं गया l मोती हमारे घर की सख्त लकड़ी के फर्श पर सभी दिशा में उछलने लगे l तख्तों पर रेंगते हुए, मैंने हर एक मोती को बटोर लिया l अपने दम पे, वे छोटे थे l लेकिन ओह, जब वे एक धागे में पिरोए हुए थे, उन्होंने कितना प्रभाव दिखाया था!

कभी-कभी परमेश्वर को मेरी हाँ इतनी बेतुकी लगती है – उन अलग-अलग मोतियों की तरह l मैं यीशु की माँ मरियम के साथ अपनी तुलना करती हूँ, जो बहुत ही आश्चर्जनक रूप से आज्ञाकारी थी l उसने हामी भरी जब उसने मसीहा को अपने कोख में रखने की परमेश्वर की बुलाहट को गले लगाया l “’देख, मैं प्रभु की दासी हूँ, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो’” (लूका 1:38) l क्या वह सब समझ पायी थी जो उससे माँगा जाने वाला था? कि आगे चलकर  उसे अपने पुत्र को क्रूस पर छोड़ने की उससे भी बड़ी स्वीकृति?

स्वर्गदूतों और चरवाहों की मुलाकात के बाद, लूका 2:19 हमें बताता है कि मरियम ने “सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही l” रखना अर्थात् “संचित करना” सोचना अर्थात् “एक साथ पिरोना l” यह वाक्यांश मरियम द्वारा लूका 2:51 में दोहराया गया है l वह समय के साथ अनेक हाँ के द्वारा प्रत्युत्तर देने वाली थी l

जैसे मरियम के साथ हुआ, पिता के अनुरोध के प्रति हमारी आज्ञाकारिता की कुंजी अनेक हाँ के साथ एक एक करके मिलेंगी, जब तक कि वे एक समर्पित जीवन का खज़ाना न बन जाए l

खूबसूरती से बोझिल

मैं घोर अँधकार में जागी l मैं तीस मिनट से अधिक नहीं सो पायी थी और मेरे दिल को अहसास हुआ कि नींद जल्दी नहीं आएगी l एक सहेली का पति हॉस्पिटल में पड़ा था, जिसे भयानक खबर मिली थी, “कैंसर वापस आ गया है – मस्तिष्क और अब रीढ़ में l” मेरी सहेली के लिए मेरा सम्पूर्ण व्यक्तित्व दुखित था l कितना भारी बोझ है! और फिर भी, किसी प्रकार प्रार्थना की मेरी पवित्र चौकसी द्वारा मेरी आत्मा उभारी गयी l आप कह सकते हैं कि मैंने खूबसूरती से उनके लिए बोझ महसूस किया l यह कैसे हो सकता है?

मत्ती 11:2-20 में, यीशु हमारी थकी हुयी आत्माओं के लिए आराम देने की प्रतिज्ञा करता है l असाधारण रूप से, उसका विश्राम तब मिलता है जब हम उसके जूए के नीच झुकते हैं और उसके बोझ को ग्रहण करते हैं l पद 30 में वह स्पष्ट करता है, “मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है l” जब हम यीशु को अपनी पीठ से अपना बोझ उठाने की अनुमति देते हैं और फिर अपने आप को यीशु के जूए से बांधते हैं, तब हम उसके साथ जोते जाकर, उसके साथ और जिसकी भी वह अनुमति देता है के साथ कदम मिलाकर चलते हैं l जब हम उसके जूए के नीचे झुकते हैं, हम उसके कष्टों में हिस्सा लेते हैं, जो आख़िरकार हमें उसके आराम में भी हिस्सा लेने की अनुमति देता है (2 कुरिन्थियों 1:5) l

मेरे मित्रों के लिए मेरी चिंता एक भारी बोझ थी l फिर भी मुझे यह आभारी लगा कि परमेश्वर मुझे प्रार्थना में ले जाने अनुमति देंगे l धीरे-धीरे मैं सो गयी और जागी भी – फिर भी खूबसूरती से बोझिल थी लेकिन अब यीशु के साथ चलने के आसान जूए और हलके बोझ के तहत l

दाग़ की कहानियाँ

वह तितली मेरी माँ के पांडा-मुखी पैन्ज़ी फूलों के मध्य फुर्ती से अन्दर बाहर मंडरा रही थी l बालिका होने के कारण, मैं उसे पकड़ना चाहती थी l मैंने अपने पीछे के आँगन से दौड़कर रसोई से एक कांच का जार उठा ली, परन्तु जल्दबाजी में लौटते समय, ठोकर खाई और ठोस आँगन के फर्श से टकरा गयी l जार मेरी कलाई के नीचे चूर-चूर हो गया और एक बदसूरत कटे का दाग छोड़ गया जिसमें लगभग अठारह टाँके लगने थे l आज वह दाग मेरी कलाई पर एक इल्ली की तरह दिखाई देता है, और घायल होने और ठीक होने की कहानी बताता है l

जब यीशु अपनी मृत्यु के बाद अपने शिष्यों के समक्ष प्रगट हुआ, वह अपने दाग़ लेकर आया l युहन्ना बताता है कि थोमा उसके “हाथों में कीलों के दागों” को देखना चाहता था और यीशु ने थोमा को “अपनी ऊंगली . . . लाकर [उसके] हाथों में” और अपना हाथ [उसके] पंजर में” डालने के लिए आमंत्रित किया (युहन्ना 20:25, 27) l यह प्रगट करने के लिए कि वह वही यीशु था, वह अपनी मृत्यु में से दुःख के दागों के साथ जी उठा जो अभी भी दिखाई दे रहा था l

यीशु के दाग़ उसको उद्धारकर्ता प्रमाणित करते हैं और हमारे उद्धार की कहानी बताते हैं l उसके हाथों और पैरों के दाग और उसके पंजर में छेद वह कहानी बताते हैं कि उसने हमारे लिए पीड़ा सही और फिर हमें चंगाई दी l उसने ऐसा इसलिए किया ताकि हम उसके लिए  पुनःस्थापित और पूर्ण किये जाएँ l  

क्या आपने कभी मसीह के दाग़ द्वारा बतायी गयी कहानी पर विचार किया है?