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Articles by एलिसामॉर्गन

प्रेम की गहराईयाँ

तीन साल का एक लड़का, हाल ही में तैरना सीखा था जब वह अपने दादा के पिछवाड़े के आँगन में एक चालीस फुट गहरे, पत्थर की दीवार वाले कुएं में एक ढके हुए सड़े प्लाईवुड के पुट्ठे से फिसलकर गिर गया । वह दस फीट पानी में तब तक रहने में कामयाब रहा जब तक कि उसके पिता उसे बचाने के लिए नहीं उतरे । अग्निशामकों ने लड़के को निकालने के लिए रस्सियाँ लाईं,  लेकिन पिता अपने बेटे के बारे में इतना चिंतित था कि पहले से निश्चित करने के लिए कि उसका बेटा सुरक्षित है वह फिसलन वाली चट्टानों से नीचे उतर गया l

ओह, एक माता-पिता का प्यार! ओह, वह लंबाई (और गहराई) जहाँ तक हम अपने बच्चों के लिए जाएंगे!

जब प्रेरित यूहन्ना आरम्भिक कलीसिया में विश्वासियों को लिखता हैं जो अपने विश्वास के लिए पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे जब उनके चारोंओर झूठी शिक्षा व्याप्त थी,  तो उसने इन शब्दों को एक जीवन-रक्षक की तरह पहुँचाया : “देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की संतान कहलाएं; और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1) l यीशु में विश्वासियों को परमेश्वर की “संतान” संबोधित करना एक अंतरंग और कानूनी नाम-पत्र लगाना था जो उन सभी के लिए वैधता लाया जो उस पर भरोसा करते हैं l

ओह, वह लंबाई और गहराई जहाँ तक परमेश्वर अपने बच्चों के लिए जाएगा!

ऐसे कदम होते हैं जो माता-पिता केवल अपने बच्चे के लिए उठाते हैं – जैसे कि यह पिता जो अपने बेटे को बचाने के लिए कुएँ में उतरता है l और हमारे स्वर्गिक पिता के अंतिम कार्य की तरह, जिसने अपने इकलौते बेटे को हमें अपने हृदय के करीब लाने के लिए भेजा और हमें अपने साथ जीवन देने के लिए किया (पद.5-6) l

हरे की तलाश करें

कर्कश आवाज़ वाले कप्तान ने एक और विलम्ब की घोषणा की । मैं विमान में अपनी खिड़की वाली सीट में कसी बैठी थी जो दो घंटे से एक ही जगह खड़ा था l  मैं हताशा में खिज रही थी l  एक लम्बा कार्य-सप्ताह के कारण बाहर रहने के बाद,  मैं आराम और घर के विश्राम के लिए तरस गयी थी । और कितनी देर?  जब मैंने वर्षा के बूंदों से आच्छादित खिड़की से बाहर देखा,  मैंने ध्यान दिया कि सीमेंट की दरार में हरी घास का एक अकेला त्रिकोण बढ़ रहा है जहाँ हवाई पट्टियां मिल रही थी l उस ठोस कंक्रीट के बीच में ऐसा विचित्र दृश्य ।

एक अनुभवी चरवाहे के रूप में,  दाऊद अच्छी तरह से जानता था कि विश्राम से भरी हरी चराइयां उसकी भेड़ों की ज़रूरत थी l भजन 23 में, उसने एक महत्वपूर्ण सबक दिया,  जो उसे इस्राएल के राजा के रूप में अग्रणी दिनों में आगे ले जाने वाला था l “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी l वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है . . . वह मेरे जी में जी ले आता है”  (पद.1-3) l

एक हवाईअड्डा की पक्की कंक्रीट जंगल पर, अपने गंतव्य में विलंबित और आराम और विश्राम रहित महसूस करते हुए, परमेश्वर, मेरा अच्छा चरवाहा, मेरा ध्यान उस हरे रंग के टुकड़े की ओर ले गया l उसके साथ संबंध में,  मैं जहाँ भी हूँ,  उसके आराम के निरंतर प्रावधान को देख सकती हूँ - अगर मैं ध्यान दूँ और उसमें प्रवेश करूँ ।

यह पाठ वर्षों से कायम रहा है : हरा ढूंढ़ते रहें l वह वहां है l जब हमारे जीवन में परमेश्वर का साथ है, तो हमें कुछ भी घटी नहीं है l वह हमें हरी हरी चराइयों में बैठाता है l वह मेरे जी में जी ले आता है l

घुसपैठिये को निकालना

जब मेरे पति बिस्तर से उठकर रसोई में गए, तो बहुत सबेरा नहीं हुआ था l मैंने बत्ती को जलते और बुझते हुए देखा और उनकी हरकत पर आश्चर्य किया l तब मुझे याद आया कि पिछली सुबह मैं रसोई के काउंटर पर एक “घुसपैठिए” को देखकर चिल्लाई थी l अनुदित : छह पैरों वाला किस्म का अवांछनीय प्राणी l मेरे पति मेरे संदेह को जानते थे और उसे निकालने के लिए तुरंत पहुंच गए थे l आज सुबह वह यह सुनिश्चित करने के लिए जल्दी उठे कि हमारा रसोई कीड़ा रहित(bug-free) हो ताकि मैं बिना किसी चिंता के प्रवेश कर सकूँ l गजब के पति है!

मेरे पति मुझे अपने मन में रखते हुए जागे, खुद की ज़रूरत के ऊपर मेरी ज़रूरत को l मेरे लिए, उनकी क्रिया पौलुस द्वारा इफिसियों 5:25 में वर्णित प्रेम को दर्शाती है, “हे पतियो, अपनी अपनी पत्नी से प्रेम रखो जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिए दे दिया l” पौलुस आगे बढ़ता है, “पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे”    (पद.28) l पौलुस द्वारा पति के प्रेम की तुलना यीशु मसीह के प्रेम से करना इस केंद्र बिंदु पर है कि कैसे यीशु ने अपनी ज़रूरतों के आगे हमारी ज़रूरतों को रखा l मेरे पति को पता है कि मैं कुछ घुसपैठियों से डरती हूँ, और इसलिए उन्होंने मेरी चिंता को अपनी प्राथमिकता बना दिया l

यह सिद्धांत केवल पतियों पर लागू नहीं होता है l यीशु के उदाहरण के बाद, हम में से प्रत्येक तनाव, भय, शर्म या चिंता के किसी घुसपैठिये को दूर करने में मदद करने के लिए प्यार से त्याग कर सकता है ताकि कोई व्यक्ति दुनिया में अधिक स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सके l

फुस्फुसनेवाला गुम्बज(Whispering Gallery)

लंदन के सेंट पॉल कैथेड्रल(प्रधान गिरजाघर) के विशाल गुम्बज में, आगंतुक फुस्फुसानेवाला गुम्बज(Whispering Gallery) तक पहुंचने के लिए 259 सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं l वहाँ आप फुसफुसा सकते हैं और वृत्ताकार पथ में कहीं भी लगभग एक सौ फीट की दूरी पर भी बड़े फासले के पार दूसरा व्यक्ति आपको सुन सकता है l इंजीनियर्स इस विषमता को गुम्बज के गोलाकार आकार और एक फुसफुसाहट की कम तीव्रता वाली ध्वनि तरंगों का परिणाम बताते हैं l

हम इस बात के लिए कितना अधिक निश्चित होना चाहते हैं कि परमेश्वर हमारे कष्टदायी फुसफुसाहट को सुनता है! भजन इस बात से भरे पड़े हैं कि वह हमारी पुकार, प्रार्थना, सुनता है – और फुसफुसाता है l दाऊद लिखता है, अपने संकट में मैंने यहोवा परमेश्वर को पुकारा; मैंने अपने परमेश्वर की दोहाई दी” (भजन 18:6) l बार-बार, उन्होंने और अन्य भजनकार अनुनय करते हैं, “मेरी प्रार्थना सुन ले” (4:1), मेरी वाणी (5:3), [मेरा] कराहना (102:20) l कभी-कभी अभिव्यक्ति एक फुसफुसाहट से अधिक होती है, “मेरी ओर कान [लगा] (77:1), जहाँ पर “हृदय में ध्यान” और “आत्मा खोज . . . करती है” (77:6 Hindi – C.L.) l

इन दलीलों के जवाब में, भजनकार - दाऊद की तरह भजन 18:6 में – प्रगट करते हैं कि परमेश्वर सुन रहा है : “उसने अपने मंदिर में से मेरी बातें सुनी; और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी l” चूँकि वास्तविक मंदिर अभी तक नहीं बनाया गया था, हो सकता है कि दाऊद परमेश्वर द्वारा अपने स्वर्गीय निवास में सुनने का सन्दर्भ दे रहा हो?

पृथ्वी के ऊपर स्वर्ग के अपने “फुसफुसाने वाले गुम्बज” से, परमेश्वर हमारी गहरी मंद ध्वनि, हमारी फुसफुसाहट की ओर भी झुकता है, और सुनता है l

काफी बड़ा

मेरा पोता मनोरंजन पार्क में रोलर कोस्टर(टेढ़ा-मेढ़ा घुमावदार रेल-पथ) लाइन के निकट गया और ऊँचाई-अनिवार्यता संकेत से अपनी पीठ सटा कर यह देखने के लिए खड़ा हो गया कि क्या वह सवारी करने के लिए बड़ा है या नहीं l जब उसका सिर निशान से अधिक हो गया वह ख़ुशी से चीख उठा l

जीवन का बहुत कुछ काफी “बड़ा” होने के विषय है, है कि नहीं? एक चालाक की परीक्षा देना l मतदान करना l विवाह करना l मेरे पोते की तरह, हम अपने जीवन को बड़े होने के लिए तरसते हैं l

नए नियम के समय में, बच्चों को प्यार किया जाता था, लेकिन समाज में तब तक बहुत महत्व नहीं दिया गया जब तक कि वे “एक ख़ास उम्र के” नहीं हो जाते थे और घर में योगदान कर सकते थे और व्यस्क विशेषाधिकारों के साथ आराधनालय में प्रवेश कर सकते थे l यीशु ने दरिद्रों, रोगियों और यहाँ तक कि बच्चों का स्वागत करके अपने दिन के मानकों को तोड़ दिया l तीन सुसमाचार (मत्ती, मरकुस, और लूका) माता-पिता को छोटे बच्चों को यीशु के पास लाने के लिए कहते हैं ताकि वह उन पर हाथ रखे और उनके लिए प्रार्थना करें (मत्ती 19:13; मरकुस 10:16) l

व्यस्क जिसको असुविधा के रूप में देख रहे थे शिष्यों ने उसके लिए उनको फटकार लगाई l इस पर, यीशु “क्रोधित”  हुआ (मरकुस 10:14) और उसने अपनी बाँहों को छोटे बच्चों के लिए खोल दिया l उसने अपने राज्य में उनका मान बढ़ाया और सभी को बच्चों की तरह बनने की चुनौती दी – उनकी भेद्यता/कोमलता को अपनाने और उसे जानने के लिए उनकी आवश्यकता (लूका 18:17)। यह हमारी बच्चों की सी जरूरत है जो हमें उसके प्रेम को प्राप्त करने के लिए “बड़ा” बनाती है l

प्रार्थना के अन्डे

मेरी रसोई की खिड़की के ठीक बाहर, एक कबूतर ने अपना घोंसला हमारी आँगन की छत के नीचे बनाया l उसका एक सुरक्षित स्थान पर घास रखना और उसके बाद अन्डे सेने मकसद से उन पर बैठना मुझे अच्छा लगा l प्रत्येक सुबह मैं उसकी प्रगति जांचती थी; लेकिन हर सुबह, वहां कुछ भी नहीं था l कबूतर के अन्डे से बच्चे निकलने में कुछ हफ्ते लगते हैं l

इस तरह की अधीरता मेरे लिए नई नहीं है l मैंने इंतज़ार करने के आगे हमेशा अथक प्रयास किया है, खासकर प्रार्थना में l मेरे पति और मैंने अपने पहले बच्चे को दत्तक लेने में पांच साल इंतज़ार किया l दशकों पहले, लेखिका कैथरीन मार्शल ने लिखा, “प्रार्थनाएं, अण्डों की तरह, रखते ही तुरंत नहीं फूटती हैं l”

नबी हबक्कूक ने प्रार्थना में प्रतीक्षा के साथ कुश्ती की l यहूदा के दक्षिणी राज्य के बाबुल के क्रूर दुर्व्यवहार के साथ परमेश्वर की चुप्पी से निराश, हबक्कूक “पहरे पर खड़ा [रहने], और गुम्मट पर चढ़कर [ठहरे रहने], और [ताकते रहने] कि मुझ से वह कहेगा” (हबक्कूक 2:1) के लिए समर्पित  होता है l परमेश्वर उत्तर देता है कि हबक्कूक को “नियत समय” तक इंतज़ार करना है (पद.3) और हबक्कूक को “दर्शन की बातें लिख” देने के लिए निर्देश देता है ताकि ये बातें दिए जाने के तुरंत बाद ही फ़ैल जाए (पद.2) l

परमेश्वर जो बातें उल्लिखित नहीं करता है वह यह है कि “नियत समय” जब बाबुल पराजित होगा वह छह दशक दूर है, जिससे प्रतिज्ञा और उसके पूरा होने के बीच एक लम्बा अंतर उत्पन्न करता है l अण्डों की तरह, प्रार्थनाएं अक्सर तुरंत पूरी नहीं होती हैं, बल्कि परमेश्वर के अति महत्वपूर्ण उद्देश्यों में हमारे संसार और हमारे जीवनों के लिए पूरी होती हैं l 

क्षमा करने के लिए चुने गए

जनवरी 23, 1999 को ग्रैहम स्टेंस और उनके दो छोटे बेटे फिलिप और टिमोथी को, उनकी जीप में जहाँ वे सो रहे थे, आग लगाकर जला दिया गया था l उस समय तक भारत के ओडिशा में गरीब कुष्ठ रोगियों के बीच उनकी समर्पित सेवा के विषय बाहरी संसार बहुत कम जानता था l इस तरह की त्रासदी के बीच, उनकी पत्नी ग्लेडिस और बेटी एस्तर ने सबको चकित कर दिया l उन्होंने नफरत से नहीं बल्कि क्षमा के साथ प्रत्युत्तर देने का चुनाव किया l

बराह वर्षों के बाद जब मुक़दमा समाप्त हुआ, तो ग्लेडिस ने एक ब्यान जारी किया जिसमें कहा गया था कि “मैंने हत्यारों को माफ़ कर दिया है और मुझे उनके खिलाफ कोई कड़वाहट नहीं है . . . मसीह में परमेश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया है और वह अपने अनुयायियों से भी ऐसा ही करने की उम्मीद करता है l” परमेश्वर ने ग्लेडिस को दिखाया कि क्षमा करने की कुंजी यह है कि दूसरों ने हमारे साथ जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करना बंद करें और यीशु ने हमारे लिए जो किया है उस पर ध्यान केन्द्रित करें l मसीह के सतानेवालों के प्रति उसके शब्द थे “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34) इस प्रकार यीशु की क्षमा के विषय जकर्याह की याजकीय नबूवत पूरा हुआ (1:77) l

जबकि हम में से अधिकांश एक अकल्पनीय त्रासदी को सहन नहीं करेंगे जैसा कि ओडिशा में हुआ, हम में से हर एक के साथ किसी न किसी तरह से अन्याय हुआ है l कोई पति या पत्नी धोखा देती है l कोई बच्चा विद्रोह करता है l कोई कर्मचारी अनुचित व्यवहार करता है l हम किस तरह व्यवहार करते हैं? शायद हम अपने उद्धारकर्ता के आदर्श की ओर देखते हैं l तिरस्कार और क्रूरता के सामने, वह क्षमा करता है l यह यीशु के द्वारा हमारे पापों की क्षमा ही है कि हम, हम लोग, उद्धार पाते हैं, जिसमें दूसरों को क्षमा करने की योग्यता शामिल है l और ग्लेडिस स्टेंस की तरह, हम अपनी कड़वाहट को त्यागकर क्षमा करने के लिए अपने हृदय खोल सकते हैं l

हर्षरुपी तेल

यदि आप किसी फिल्म में यीशु का भाग निभाते, तो आप इस भूमिका को कैसे निभाते? ब्रूस मार्शिआनो ने इसी चुनौती का सामना किया, जिसने 1993 में दृश्य बाइबल फिल्म मैथ्यू(Mathew) में यीशु की भूमिका निभायी l यह जानकार कि लाखों दर्शक उसके काम के आधार पर यीशु के बारे में निष्कर्ष निकालेंगे, मसीह को “सही” तौर पर पेश करने का भार उसको अभिभूत कर रहा था l वह घुटनों पर गिर गया और उसने यीशु से अनुनय किया – हां, यीशु के लिए l
ब्रूस ने इब्रानियों के पहले अध्याय से अंतर्दृष्टि प्राप्त की, जहाँ लेखक बताता है कि कैसे परमेश्वर पिता ने पुत्र को “हर्षरुपी तेल से” (1:9) अभिषेक करके अलग किया l इस प्रकार का आनंद एक उत्सव है – पिता के साथ सम्बन्ध जो पूर्ण हृदय से व्यक्त किया गया है l यीशु के हृदय पर इस तरह का आनंद जीवन भर राज्य किया l जिस प्रकार इब्रानियों 12:2 वर्णन करता है, “जिसने उस आनंद के लिए जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिंता न करके क्रूस का दुःख सहा, और परमेश्वर के सिंहासन की दाहिनी ओर जा बैठा l”
पवित्र वचन की इस अभिव्यक्ति से अपना सम्बन्ध रखते हुए, ब्रूस ने अपने उद्धारकर्ता का आनंद से भरा विशिष्ट चित्रण पेश किया l परिणामस्वरूप, वह “मुस्कुराता हुआ यीशु” के रूप में जाना जाने लगा l हम भी अपने घुटनों पर जाने की हिम्मत कर सक सकते हैं और “यीशु से यीशु के लिए अनुनय कर सकते हैं l” काश वह अपना चरित्र हममें भर दे ताकि चारों ओर के लोग उसके प्रेम का प्रगटीकरण हममें देख सकें l

यीशु की तरह प्रार्थना करना

हर सिक्के के दो पहलु होते हैं l सामने वाले को “हेड” कहा जाता है और, आरंभिक रोमी काल से, आमतौर पर एक देश के प्रमुख को दर्शाया जाता है l पीछे की ओर को “टेल्स” कहा जाता है, एक शब्द जो संभवतः एक ब्रिटिश सिक्के से आता है जो एक शेर की उठाई हुयी पूंछ को दर्शाता है l 

एक सिक्के की तरह, गतसमनी के बगीचे में मसीह की प्रार्थना के दो पक्ष हैं l अपने जीवन के सबसे कठिन घंटे में, क्रूस पर उसकी मृत्यु की पूर्व रात को, यीशु ने प्रार्थना की, “हे पिता, यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले, तौभी मेरी नहीं परन्तु तेरी ही इच्छा पूरी हो” (लूका 22:42) l जब मसीह कहता है, “इस करोरे को . . . हटा ले,” तो यही प्रार्थना की सरल सच्चाई है l वह अपनी व्यक्तिगत इच्छा को प्रगट करता है, “यह वही है जो मैं चाहता हूँ l”

उसके बाद यीशु यह प्रार्थना करते हुए कि “मेरी नहीं” सिक्के को पलट देता है l यह पहलु ही त्याग का है l जब हम सरलता से कहते हैं, “परन्तु परमेश्वर आप क्या चाहते हैं?” तब परमेश्वर के प्रति हमारा त्याग आरम्भ हो जाता है l 

यह दो तरफ़ा प्रार्थना मत्ती 26 और मरकुस 14 में भी शामिल है और यूहन्ना 18 में उल्लेख किया गया है l यीशु ने प्रार्थना के दोनों पक्षों से प्रार्थना की : यह कटोरा . . . टल जाए (परमेश्वर, जो मैं चाहता हूँ), तौभी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं (परमेश्वर, आप क्या चाहते हैं?), के मध्य केन्द्रीय बिंदु पर रहा l 

यीशु के दो पक्ष l प्रार्थना के दो पक्ष l