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Articles by एलिसामॉर्गन

असीमित आयाम

मैं शान्त हो कर विनाइल से ढकी हुई चटाई पर लेटी हुई थी, जब संकेत देने पर मशीन घरघराई और आवाज़ की, तो मैंने अपनी साँस रोक लीl मुझे पता था कि अनेक लोग एमआरआई का सामना कर चुके हैं, परन्तु मेरे जैसे घबराए हुए व्यक्ति के लिए इस अनुभव में डटे रहने के लिए मुझ से कहीं अधिक साहसवान व्यक्ति की आवश्यकता थीl                                                                                                                                                                                                                                                                                     मेरे मस्तिष्क में, पवित्रशास्त्र से एक वाक्यांश--उसके प्रेम की... चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है” (इफिसियों 3:18) मशीन की घरघराहट के साथ तालमेल में चल रहा थाl इफिसियों की कलीसिया के लिए पौलुस की प्रार्थना में उसने परमेश्वर के प्रेम और उसकी उपस्थिति के अनन्त मापदण्ड पर बल देने के लिए परमेश्वर के प्रेम के चार आयामों का वर्णन कियाl  

एमआरआई की मशीन पर लेटे हुए मेरी स्थिति ने मेरी समझ को एक नया रूप उपलब्ध करवायाl चौड़ा: दोनों ओर छ: इंच जहाँ उस ट्यूब में मेरी दोनों बाँहों को कस कर मेरे शरीर से बांधा गया थाl लम्बा: उस सिलेण्डर के दोनों ओर के छेदों की लम्बाई, जो मेरे सिर से पैरों तक थीl ऊँचा: मेरी नाक से उस ट्यूब की छत तक l गहरा: उस ट्यूब का सहारा, जिससे वह ट्यूब मेरे नीचे भूमी पर टिकी हुई थी, जिसने मुझे ऊपर थामा हुआ थाl चारों आयाम परमेश्वर की उपस्थिति का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे थे, जिसने मुझे एमआरआई की उस ट्यूब—और जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में घेर और थाम रखा थाl

परमेश्वर का प्रेम हमारे चारों ओर हैl चौड़ा: वह हर स्थान के लोगों तक पहुँचने के लिए अपनी बाँहों को फैलाता है l लम्बा: उसका प्रेम कभी समाप्त नहीं होता हैl ऊँचा: वह हमें ऊँचा उठाता हैl  गहरा: हमें हर परिस्थिति में थमे रखने के लिए वह नीचे झुक जाता हैl हमें कुछ भी उससे अलग नहीं कर सकता! (रोमियों 8:38-39)l

“बच्चे की आशा” ट्री

सफ़ेद चमकने वाली बत्तियों से क्रिसमस ट्री को लपेटने के बाद, मैंने उसकी डालियों पर गुलाबी और नीले बो बाँध कर उसे “बच्चे की आशा” क्रिसमस ट्री नाम दिया l हम दोनों पति-पत्नि चार वर्षों से अधिक समय से एक बच्चे को गोद लेना चाह रहे थे l निश्चय ही क्रिसमस के समय तक!

प्रति भोर मैं उस ट्री के निकट खड़ी होकर प्रार्थना करती हुयी, खुद को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता याद दिलाती थी l दिसम्बर 21 को हमें खबर मिली : क्रिसमस के समय तक कोई बच्चा नहीं l उजड़ा हुआ महसूस करते हुए, मैं ट्री के समक्ष ठहर गयी जो परमेश्वर के प्रावधान का चिन्ह बन गया था l क्या परमेश्वर अभी भी विश्वासयोग्य था? क्या मैं कोई गलती कर रही थी?

कभी-कभी परमेश्वर का प्रत्यक्ष रोकथान उसके प्रेममय अनुशासन का परिणाम है l दूसरे समयों में परमेश्वर का प्रेमी विलम्ब हमारे भरोसे को नूतन करने के लिए l विलापगीत में, यिर्मयाह नबी इस्राएल के लिए परमेश्वर के सुधार का वर्णन करता है l दर्द महसूस किया जा सकता है : “उसने अपने तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है” (3:13) l इन सब में भी, यिर्मयाह अपना अंतिम भरोसा परमेश्वर की विश्वासयोग्यता में दर्शाता है : “उसकी दया अमर है l प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान् है” (पद.22-23) l

मैंने उस क्रिसमस ट्री को क्रिसमस के काफी बाद तक खड़ा रहने दिया और अपनी सुबह की प्रार्थना करती रही l अंत में, ईस्टर सप्ताहांत में, हमें अपनी बेटी प्राप्त हुयी l परमेश्वर सर्वदा विश्वासयोग्य है, यद्यपि ज़रूरी नहीं कि हमारे समय में न ही हमारी इच्छानुकूल l

मेरे बच्चे अब तीस वर्ष के ऊपर हैं, किन्तु प्रत्येक वर्ष मैं उस क्रिसमस ट्री का छोटा रूप सजाती हूँ, और खुद को और दूसरों को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता याद दिलाती हूँ l

कठोर संवाद

मैं पचास मील गाड़ी चलाकर एक दूर के कार्यकर्ता से कठोर बातचीत करने गया l मुझे एक अन्य कर्मचारी से एक रिपोर्ट मिली थी जिसने यह सुझाया था कि वह हमारी कंपनी को गलत ढंग से पेश कर रहा था, और हमारे लोकमत के विषय मैं चिंतित था l मैं एक राय देने के लिए परेशान हुआ जो उसके चुनाव को बदल सकता था l
1 शमुएल 25 में, एक अविश्वसनीय व्यक्ति ने एक बड़ा व्यक्तिगत जोखिम उठाकर इस्राएल के भावी राजा का सामना किया जो एक विनाशकारी चुनाव करनेवाला था l अबीगैल का विवाह नाबाल से हुआ था, जिसका चरित्र उसके नाम के अर्थ के साथ मेल खाता था ("मूढ़") (पद.3, 25) l नाबाल ने दाऊद और उसकी सेना को उसके पशुओं की रक्षा के लिए प्रथागत मजदूरी का भुगतान करने से इनकार कर दिया था (पद.10-11) l यह सुनकर कि दाऊद ने उसके समस्त घराने से प्राणघाती बदला लेने की ठान ली है, और यह जानकार कि उसका मूर्ख पति कारण नहीं सुनेगा, अबीगैल ने शांति की पेशकश करके, दाऊद से मिलने गयी, और उसे पुनः विचार करने को राज़ी किया (पद.18-31) l
अबीगैल ने यह कैसे किया? दाऊद और उसके लोगों को संतुष्ट करने और ऋण चुकाने के लिए भोजन से लदे गधों को आगे भेजने के बाद, उसने दाऊद से सच बोला l उसने बुद्धिमानी से दाऊद को उसके जीवन की बुलाहट याद दिलाई l जब परमेशवर ने उसे राजा बनाया था, यदि वह बदला लेने की अपनी इच्छा को रोकता, तो उसे "इस कारण पछताना न [होता], या मेरे प्रभु का हृदय पीड़ित न होता कि तू ने अकारण खून किया" (पद.31) l
आप किसी को एक खतरनाक गलती के निकट जानते भी होंगे जिससे दूसरों को हानि पहुँच सकती है और परमेश्वर के लिए उसकी भावी प्रभावशीलता जोखिम में पड़ सकती है l अबीगैल की तरह, शायद परमेश्वर आपको एक कठोर संवाद के लिए बुला रहा होगा?

चमक

“ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार” अंग्रेजी की एक लोरी है l जेन टेलर ने इसे एक कविता के रूप में लिखा था जो परमेश्वर की सृष्टि के आश्चर्य को आकर्षित करता है जहाँ तारे “पृथ्वी से बहुत ऊपर आसमान में लटके हुए दिखाई देते हैं l” बाद के अंतरा में जो कभी प्रकाशित हुआ, तारे मार्गदर्शक का काम करते हैं : “तुम्हारे चमकीले और छोटी किरण अँधेरे में राहगीर को मार्ग दिखाते हैं l”
फिलिप्पियों की पत्री में, पौलुस फिलिप्पी के विश्वासियों को निर्दोष और पवित्र रहने की चुनौती देता है जब वे अपने चारोंओर के लोगों को सुसमाचार बांटते हुए “आसमान में तारों की तरह चमकते हैं (2:15-16) l हम सोचते हैं कि हम किस प्रकार तारों की तरह चमक सकते हैं l हम अक्सर अक्षम महसूस करते हैं और हमारा प्रकाश अंतर लाने में दीप्तिमान है, इसके विषय संघर्ष करते हैं l किन्तु तारे, तारे बनने की कोशिश  नहीं करते हैं l वे तारे हैं l प्रकाश हमारे संसार को बदल देता है l और वह हमें बदलता है l परमेश्वर हमारे संसार में भौतिक प्रकाश लेकर आया (उत्पत्ति 1:3); और यीशु के द्वारा, परमेश्वर आत्मिक प्रकाश हमारे जीवनों में लाता है (यूहन्ना 1:1-4) l
हम जिनके पास परमेश्वर का प्रकाश है, को अपने चारोंओर के लोगों के समक्ष इस तरह चमकना है कि वे प्रकाश को देखकर उसके श्रोत की ओर आकर्षित हो जाएँ l एक तारे के समान जो रात में सहजता से आसमान में चमकता है, हमारा जीवन भी अपने व्यक्तित्ब के कारण स्वतः अंतर लाता है : प्रकाश! जब हम स्वाभाविक रूप से चमकते हैं, हम पौलुस के “वचन को दृढ़ता से थामे” रहने की निर्देशों को अंधकारमय संसार में मानते हैं, और दूसरों को हमारी आशा के श्रोत, यीशु की ओर आकर्षित करते हैं l

मन की भूख

जब मैं अपने पति के साथ कुछ काम से बाहर थी तब फोन पर उस मिठाई की दुकान के विज्ञापन का ईमेल को देख कर  हैरान थी, जिसे हमने अभी पार ही किया था। अचानक मेरे पेट से चूहे दौड़ने लगे। मैं हैरान थी कि दुकानदार अपने सामानों से हमें लुभाने के लिए टेक्नालजी का कैसे प्रयोग करते हैं।

विज्ञापन बंद कर मैं सोचने लगी कि किस प्रकार परमेश्वर मुझे अपनी निकटता का अहसास देते  हैं। उन्हें हमेशा पता होता है कि मैं कहां हूं और मुझे क्या पसंद है। मैं सोचने लगी कि, क्या मेरा मन परमेश्वर के लिए इतना ही भूखा है जितना मेरा पेट खाने के लिए?

यूहन्ना 6 में, पांच हजार को खिलाने के आश्चर्यकर्म के बाद, चेलों ने बेसब्री से यीशु से सर्वदा "जीवन देने वाली रोटी उन्हें देने को कहा" (पद 33-34)। पद 35 में यीशु ने उत्तर दिया, "जीवन की रोटी...।" कितनी अद्भुत बात है कि यीशु के साथ संबंध होना हमारे रोजमर्रा के जीवन में लगातार पोषण प्रदान कर सकता है!

विज्ञापन का लक्ष्य मेरे मेरे पेट की भूख को जगाना था, परन्तु परमेश्वर का मेरे मन की स्थिति को निरंतर जानना मुझे बाध्य करता है कि मैं समझ सकूं कि मुझे उनकी जरूरत है और वह मन्ना पाऊँ जिसे केवल वो दे सकते हैं।

अपनी पीड़ा को छिपाना

 

मैंएक स्थानीय चर्च में अतिथि-उपदेशक होकर परमेश्वर के समक्ष अपना टूटापन रखकर उसके द्वारा दी जानेवाली उस चंगाई को प्राप्त करने के विषय एक सच्चा उपदेश दे रहा था l अंतिम प्रार्थना से पहले, पास्टर ने वीच के गलियारे में खड़े होकर अपनी मंडली की आँखों में देखते हुए बोले, “आपका पास्टर होने के कारण मैं आपसे सप्ताह के मध्य मिलूँगा और आपके हृदय के टूटेपन की कहानियाँ सुनना चाहूँगा l उसके बाद सप्ताह के अंत की आराधनाओं में, आप अपना दुःख छिपाएंगे और मुझे दुखित होकर यह सब देखना होगा l”

मेरा हृदय उन छिपी हुई पीड़ाओं को देखकर रोया जिसे परमेश्वर दूर कर सकता था l इब्रानियों का लेखक परमेश्वर के वचन को जीवित और क्रियाशील बताता है l कितनों ने इस “वचन” को बाइबल समझा है, किन्तु यह तो उससे कहीं अधिक है l यीशु परमेश्वर का जीवित  वचन है l वह हमें प्यार करते हुए हमारे विचारों और व्यवहार को जांचता है l

यीशु बलिदान हुआ कि हमें सदैव परमेश्वर की उपस्थिति तक पहुँच मिल जाए l और जबकि हमें ज्ञात है कि सभी के साथ सब बातें बांटना बुद्धिमानी नहीं है, हम यह भी जानते हैं कि  परमेश्वर चाहता है कि कलीसिया वह स्थान बने जहां हम ग्लानी के बगैर मसीह के टूटे और क्षमा प्राप्त अनुयायी की तरह जीवन जी सकें l कलीसिया को वह स्थान बनना है जहां हम “एक दूसरे का भार” उठाते हैं (गलातियों 6:2) l
आज आप दूसरों से क्या छिपा रहें हैं? और आप किस प्रकार परमेश्वर से भी छिपा रहे हैं? परमेश्वर यीशु के द्वारा हमें देखता है l और वह अभी भी हमें प्यार करता है l क्या हम उसे प्यार करने की अनुमति देंगे?

एक साल में बाइबल

मेरी सहेली और मैं सर्वदा-लयबद्ध समुद्र के निकट रेत पर बैठे हुए थे l सूर्य जैसे- जैसे दूर अस्त हो रहा था, लहरें बार-बार मुड़कर हमारे पावों के निकट आकर ठहर जाती थीं l “मुझे समुद्र पसंद है,” वह मुस्करा कर बोली l “उसमें गति है इसलिए मुझे गतिमान होने की ज़रूरत नहीं l”

कितना अच्छा विचार! हममें से कितने लोग ठहरने  के लिए संघर्ष करते हैं l हम इस भय से अत्यधिक प्रयास करते जाते हैं, कि कहीं हमारे प्रयासों के विफल होने से हमारा अस्तित्व ही न मिट जाए l अथवा हमारा सामना उन वर्तमान सच्चाइयों से होगा जिनसे हम दूरी बनाकर रखना चाहते हैं l

भजन 46:8-9 में, परमेश्वर अपने सर्वसामर्थी ताकत का उपयोग करके अपनी सामर्थ्य का प्रदर्शन करता है l “आओ, यहोवा के महाकर्म देखो . . . . वह पृथ्वी की छोर तक की लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है l” परमेश्वर एक व्यस्त परमेश्वर है, जो हमारे अव्यवस्थित दिनों को शांत करता है l

और उसके बाद हम पद 10 में पढ़ते है, “चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ l”

अवश्य ही अव्यवस्थित दिनों में भी परमेश्वर को जानना संभव है l किन्तु खुद के प्रयासों को विराम देने का भजनकार का निमंत्रण हमें एक भिन्न प्रकार का बोध कराता है l यह जानना कि हम अपने प्रयासों को विराम देकर भी अस्तित्व में रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर कभी भी नहीं रुकता है l यह जानना कि यह परमेश्वर की सामर्थ्य है जो हमें असली महत्त्व, सुरक्षा, और शांति देती है l  

पेड़ के ऊपर

मेरी माँ ने मेरी बिल्ली, वेलवेट को रसोई के चौके पर घर में बनी ब्रेड खाते देखा l उससे तंग आकर, उन्होंने उसे दरवाजे से बाहर कर दिया l कुछ घंटों बाद, हमने उस खोयी हुई बिल्ली को ढूंढा पर वह नहीं मिली l उसकी हलकी सी आवाज़ सुनाई दी, और मैंने उसे एक पोपुलर पेड़ की चोटी पर एक झुकी हुई डाली पर बैठे देखा l

मेरी माँ ने जब उसकी आदत से तंग आकर उसे घर के बाहर किया, वेलवेट(बिल्ली) ने एक खतरनाक चुनाव किया l क्या यह संभव नहीं कि हम भी कभी-कभी कुछ वैसा ही करते हैं – अपनी गलती से भाग कर खुद को खतरे में डालते हैं? ऐसे समय में भी परमेश्वर हमें बचाने आता है l

योना नबी अनाज्ञाकारिता में नीनवे में प्रचार करने की परमेश्वर की बुलाहट से भागा, और एक महामच्छ ने उसे निगल लिया l “तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना की l ‘मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उस ने मेरी सुन ली है’” (योना 2:1-2) l परमेश्वर ने योना का निवेदन सुनकर मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया” (पद.10) l उसके बाद परमेश्वर ने योना को एक और अवसर दिया (3:1) l

वेलवेट को नीचे उतारने के लिए काफी प्रयास करने के बाद, हमने स्थानीय अग्निशमन सेवा(फायर ब्रिगेड) को बुलाया l सबसे लम्बी सीढ़ी की सहायता से, एक दयालु व्यक्ति ऊपर चढ़कर मेरी बिल्ली को नीचे मेरे सुरक्षित बाहों में दे दिया l

परमेश्वर अपने बचानेवाले प्रेम से ऊँचाइयों और गहराइयों में जाकर हमें बचाता है!

कहीं भी

अपनी शादी की तस्वीरें देखते हुए, मैं एक पर रुक गई जिसमें हम नए "मिस्टर एंड मिसेज" बने थेI मेरा समर्पण भाव स्पष्ट दिख रहा था, मैं उनके साथ कहीं भी जाने को तैयार थीI

40 वर्षों बाद भी हमारी शादी प्रेम और प्रतिबद्धता की डोर से बंधी है, जिसने हमें कठिन और अच्छे समय से निकाला है। उनके साथ कहीं भी चलने के वचन को हर साल मैंने पुनःसमर्पित किया है।

यिर्मयाह 2:2 में परमेश्वर अपने प्रिय परंतु हठी इस्राइल से कहते हैं, "तेरी जवानी का..."। स्नेह भक्ति का इब्रानी शब्द सर्वोच्च कोटि की विश्वासयोग्यता और वचनबद्धता को व्यक्त करता है। पहले इस्राइल परमेश्वर के प्रति दृढ़ संकल्प से समर्पित रहने के लिए वचनबध्द था परंतु धीरे-धीरे वह दूर हो गया।

समर्पण में आत्मसंतुष्टता प्रेम को फ़ीका कर सकती है तथा उत्साह की कमी विश्वासघात पैदा कर सकती है। शादी में ऐसी लापरवाही से संघर्ष करने के महत्व को तो हम जानते हैं। परंतु परमेश्वर के साथ हमारे प्रेम-संबंध के बारे में क्या?  क्या उनके प्रति हम आज वैसे समर्पित हैं जैसे पहली बार विश्वास में आने पर थे?

परमेश्वर विश्वासयोग्यता से अपने लोगों को वापस आने की अनुमति देते हैं (3:14-15)।

हम नए सिरे से अपनी प्रतिज्ञा को दोहरा सकते हैं, कि हम उनके पीछे चलेंगे- कहीं भी।