गिनने से परे प्यार
"मैं तुम्हें किस तरह से प्यार करती हूँ? मुझे तरीकों को गिनने दें।" ये शब्द एलिजाबेथ बैरेट ब्राउनिंग के सोनेट्स फ्रॉम द पोर्च्युगीज की अंग्रेजी भाषा की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से हैं। उन्होंने इन्हें शादी से पहले रॉबर्ट ब्राउनिंग को लिखा था, और वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी कविताओं का पूरा संग्रह प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन चूँकि गीतों की भाषा बहुत कोमल थी, व्यक्तिगत गोपनीयता की इच्छा से बैरेट ने उन्हें इस तरह प्रकाशित किया जैसे कि वे किसी पुर्तगाली लेखक के अनुवाद हों।
कभी-कभी जब हम खुलेआम दूसरों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं तो हमें अजीब महसूस हो सकता है। लेकिन इसके विपरीत, बाइबल परमेश्वर के प्रेम की अपनी प्रस्तुति से पीछे नहीं हटती। यिर्मयाह ने अपने लोगों के प्रति परमेश्वर के स्नेह को इन कोमल शब्दों में वर्णित किया : "मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करूणा बनाए रखी है"(यिर्मयाह 31:3)। भले ही उसके लोग उससे दूर हो गए थे, फिर भी परमेश्वर ने उन्हें बहाल करने और व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने पास लाने का वादा किया। "मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ," उसने उनसे कहा (पद.2)।
यीशु परमेश्वर के सबल बनानेवाला प्रेम की चरम अभिव्यक्ति हैं, जो उसके पास आने वाले किसी भी व्यक्ति को शांति और आराम देता है। चरनी से लेकर क्रूस से लेकर खाली कब्र तक, वह एक भटकी हुई दुनिया को अपने पास बुलाने की परमेश्वर की इच्छा का प्रतीक है। बाइबल को शुरू से अंत तक पढ़ें और आप बार-बार परमेश्वर के प्रेम के "तरीके गिनेंगे"; लेकिन वे शाश्वत हैं, आप कभी भी उनके अंत तक नहीं पहुंचेंगे। जेम्स बैंक्स
क्रिसमस का तारा
"यदि आपको वह तारा मिल जाए, तो आप हमेशा अपने घर का रास्ता खोज सकते हैं।" ये मेरे पिता के शब्द थे जब उन्होंने मुझे बचपन में उत्तर तारा(North Star) का पता लगाना सिखाया था। पिताजी ने युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों में सेवा की थी, और ऐसे क्षण भी आए जब उनका जीवन रात के आकाश को देख अपना रास्ता ढूंढ़ने पर निर्भर था। इसलिए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मुझे कई नक्षत्रों के नाम और स्थान मालूम हों, लेकिन पोलारिस(Polaris/Pole Star/North Star) को ढूंढने में सक्षम होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण था। उसके स्थान को जानने का मतलब था कि मैं जहां भी था दिशा का ज्ञान प्राप्त कर सकता था और यह जान सकता था कि मुझे कहां होना चाहिए था।
पवित्रशास्त्र एक और अत्यंत महत्वपूर्ण तारे के बारे में बताता है। “पूर्व के ज्योतिषी,” विद्वान लोग (वर्तमान के ईरान और इराक से घिरे क्षेत्र से) उस व्यक्ति के जन्म के संकेतों को आकाश में देख रहे थे जो अपने लोगों के लिए परमेश्वर का राजा बनने वाला था। वे यह पूछते हुए यरूशलेम आए “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं” (मत्ती 2:1-2)।
खगोलशास्त्रियों को यह पता नहीं कि बेथलहम का तारा क्यों प्रकट हुआ, लेकिन बाइबल बताती है कि परमेश्वर ने इसे दुनिया को यीशु—“भोर का चमकता हुआ तारा” (प्रकाशितवाक्य 22:16) की ओर इंगित करने के लिए बनाया था। मसीह हमें हमारे पापों से बचाने और हमें वापस परमेश्वर की ओर मार्गदर्शन करने के लिए आया। उसका अनुसरण करें, और आपको आपके घर का रास्ता मिल जाएगा।
—जेम्स बैंक्स
अनुचित धारणा और परमेश्वर का प्रेम
“तुम वो नहीं हो जिसकी मुझे उम्मीद थी। मुझे लगा कि मैं तुमसे नफरत करूंगा, लेकिन मैं नहीं करता।” युवक के शब्द कठोर लग रहे थे, लेकिन वे वास्तव में दयालु होने का प्रयास थे। मैं उसके देश में विदेश में पढ़ रहा था, एक ऐसा देश जो दशकों पहले मेरे देश के साथ युद्ध में था। हम कक्षा में एक साथ एक सामूहिक चर्चा में भाग ले रहे थे, और मैंने देखा कि वह अलग लग रहा था। जब मैंने पूछा कि क्या मैंने उसे किसी तरह से नाराज किया है, तो उसने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं . . . . और यही बात है। मेरे दादा उस युद्ध में मारे गए थे, और मैं इसके लिए आपके लोगों और आपके देश से नफरत करता था। लेकिन अब मैं देखता हूं कि हम दोनों में कितनी समानताएं हैं, और यह मुझे आश्चर्यचकित करता है। मुझे नहीं लगता कि हम दोस्त क्यों नहीं हो सकते।”
अनुचित धारणा मानव जाति जैसा ही पुराना है । दो हज़ार साल पहले, जब नतनएल ने पहली बार यीशु के नासरत में रहने के बारे में सुना, तो उसकी अनुचित धारणा स्पष्ट हो गयी : उसने पूछा, “क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?” (यूहन्ना 1:46) । नतनएल यीशु की तरह गलील के क्षेत्र में रहता था। संभवतः उसने सोचा था कि परमेश्वर का मसीहा किसी अन्य स्थान से आएगा; यहाँ तक कि अन्य गलीली लोगों ने भी नासरत को नीची दृष्टि से देखा क्योंकि यह एक साधारण छोटा सा गाँव लग रहा था।
इतना तो स्पष्ट है, नतनएल के प्रतिक्रिया ने यीशु को उससे प्रेम करने से नहीं रोका, और जब वह यीशु का शिष्य बना, वह बदल गया। नतनएल ने बाद में घोषणा किया “तू परमेश्वर का पुत्र हे;” (पद.49)। ऐसी कोई अनुचित धारणा नहीं है जो परमेश्वर के परिवर्तनकारी प्रेम के विरुद्ध खड़ी हो सके।
—जेम्स बैंक्स
अनुचित धारणा और परमेश्वर का प्रेम
“तुम वो नहीं हो जिसकी मुझे उम्मीद थी। मुझे लगा कि मैं तुमसे नफरत करूंगा, लेकिन मैं नहीं करता।” युवक के शब्द कठोर लग रहे थे, लेकिन वे वास्तव में दयालु होने का प्रयास थे। मैं उसके देश में विदेश में पढ़ रहा था, एक ऐसा देश जो दशकों पहले मेरे देश के साथ युद्ध में था। हम कक्षा में एक साथ एक सामूहिक चर्चा में भाग ले रहे थे, और मैंने देखा कि वह अलग लग रहा था। जब मैंने पूछा कि क्या मैंने उसे किसी तरह से नाराज किया है, तो उसने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं . . . . और यही बात है। मेरे दादा उस युद्ध में मारे गए थे, और मैं इसके लिए आपके लोगों और आपके देश से नफरत करता था। लेकिन अब मैं देखता हूं कि हम दोनों में कितनी समानताएं हैं, और यह मुझे आश्चर्यचकित करता है। मुझे नहीं लगता कि हम दोस्त क्यों नहीं हो सकते।”
अनुचित धारणा मानव जाति जैसा ही पुराना है । दो हज़ार साल पहले, जब नतनएल ने पहली बार यीशु के नासरत में रहने के बारे में सुना, तो उसकी अनुचित धारणा स्पष्ट हो गयी : उसने पूछा, “क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?” (यूहन्ना 1:46) । नतनएल यीशु की तरह गलील के क्षेत्र में रहता था। संभवतः उसने सोचा था कि परमेश्वर का मसीहा किसी अन्य स्थान से आएगा; यहाँ तक कि अन्य गलीली लोगों ने भी नासरत को नीची दृष्टि से देखा क्योंकि यह एक साधारण छोटा सा गाँव लग रहा था।
इतना तो स्पष्ट है, नतनएल के प्रतिक्रिया ने यीशु को उससे प्रेम करने से नहीं रोका, और जब वह यीशु का शिष्य बना, वह बदल गया। नतनएल ने बाद में घोषणा किया “तू परमेश्वर का पुत्र हे;” (पद.49)। ऐसी कोई अनुचित धारणा नहीं है जो परमेश्वर के परिवर्तनकारी प्रेम के विरुद्ध खड़ी हो सके।
—जेम्स बैंक्स
बर्बादी का सर्वनाश
"बच्चे पक्षी कल उड़ेंगे!" मेरी पत्नी कैरी हमारे सामने के बरामदे पर लटकी टोकरी में रेन्स के एक परिवार की प्रगति से बहुत खुश थी। वह उन्हें रोज़ देखती थी, जब माँ घोंसले में भोजन लाती थी, तो तस्वीरें लेती थी। कैरी अगली सुबह उन्हें देखने के लिए जल्दी उठ गई। उसने घोंसले को ढकने वाली कुछ हरियाली को हटा दिया, लेकिन बच्चे पक्षियों को देखने के बजाय, एक साँप की संकीर्ण आँखों ने उसकी आँखों को देखा। साँप एक खड़ी दीवार पर चढ़ गया था, घोंसले में घुस गया था, और उन सभी को खा गया था। कैरी का दिल टूट गया और वह गुस्से में थी। मैं शहर से बाहर था, इसलिए उसने साँप को हटाने के लिए एक दोस्त को बुलाया। लेकिन नुकसान हो चुका था।
वचन एक और साँप के बारे में बताता है जिसने अपने मार्ग में विनाश छोड़ दिया। अदन के बगीचे में सर्प ने हव्वा को उस पेड़ के बारे में धोखा दिया, जिसके फल को खाने के खिलाफ परमेश्वर ने उसे चेतावनी दी थी: "तुम निश्चित रूप से नहीं मरोगे," उसने झूठ बोला, "क्योंकि परमेश्वर जानता है कि जब तुम उसमें से खाओगे, तो तुम्हारी आँखें खुल जाएँगी, और तुम परमेश्वर के समान हो जाओगे, और अच्छे और बुरे का ज्ञान प्राप्त करोगे" (उत्पत्ति 3:4-5)। हव्वा और आदम द्वारा परमेश्वर की अवज्ञा के परिणामस्वरूप पाप और मृत्यु दुनिया में आई, और "उस पुराने सर्प, जो शैतान है" द्वारा किया गया धोखा जारी है (प्रकाशितवाक्य 20:2)। लेकिन यीशु "शैतान के काम को नष्ट करने" के लिए आया था (1 यूहन्ना 3:8), और उसके माध्यम से हम परमेश्वर के साथ संबंध में बहाल हो जाते हैं। एक दिन, वह "सब कुछ नया" कर देगा (प्रकाशितवाक्य 21:5)। जेम्स
-जेम्स बैंक्स
परमेश्वर के अप्रत्याशित (पहले से न सोचा हुआ) तरीके
पासवान ने अपने उपदेश को तिरछी नज़र से देखा, पन्नों को अपने चेहरे के नज़दीक रखा ताकि वह शब्दों को देख सके। वह केवल पास ही की चीजें देख सकता था। और बहुत ही ध्यानपूर्वक चुने गए प्रत्येक वाक्यांश को एक बेहद ही अप्रभावित और नीरस ढंग से पढ़ता था। लेकिन जोनाथन एडवर्ड्स के उपदेश के माध्यम से परमेश्वर की आत्मा ने प्रथम महान पुनरुद्धार जागृति की आग को भड़काने और हजारों लोगों को मसीह में विश्वास लाने का काम किया I
परमेश्वर अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अक्सर अप्रत्याशित चीज़ों का उपयोग करता है। क्रूस पर हमारे लिए यीशु की प्रेमपूर्ण मृत्यु के द्वारा भटकी हुई मानव जाति को अपने निकट लाने की उसकी योजना के बारे में लिखते हुए, पौलुस ने यह निष्कर्ष निकाला, “परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है कि ज्ञानवानों को लज्जित करें; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्जित करे” (1 कुरिन्थियों 1:27)। दुनिया को उम्मीद थी कि दिव्य ज्ञान हमारे जैसा दिखेगा और अथक शक्ति के साथ आएगा। परन्तु इसके विपरीत, यीशु हमें हमारे पापों से बचाने के लिए विनम्रतापूर्वक और धीरे से आए और इस प्रकार हमारे लिए "परमेश्वर की ओर से ज्ञान - अर्थात हमारी धार्मिकता, पवित्रता और छुटकारा" बन गया (पद 30)।
शाश्वत और सर्वज्ञानी परमेश्वर एक मानव शिशु बन कर आया, जो बड़ा होकर वयस्क होगा, पीड़ा सहेगा, मरेगा और हमें प्रेम से अपने शरण स्थान (घर) का मार्ग दिखाने के लिए पुनर्जीवित किया जाएगा। वह उन महान चीजों को पूरा करने के लिए जिन्हें हम अपनी सामर्थ्य से कभी हासिल नहीं कर सकते साधारण साधनों और विनम्र लोगों का उपयोग करना पसंद करता है । यदि हम इच्छुक हों, तो वह हमारा उपयोग भी कर सकता है ।
-जेम्स बैंक्स
सब मेरे खिलाफ है
“आज सुबह मुझे लगा कि मैं बहुत पैसे वाला हूँ; अब मुझे नहीं पता कि मेरे पास एक डॉलर है या नहीं।” भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट ने ये शब्द उस दिन कहे थे जब उनके एक व्यापारिक साझेदार ने उनके जीवन की सारी बचत ठग ली थी। महीनों बाद ग्रांट को लाइलाज (निरुपाय) कैंसर का पता चला। अपने परिवार के भरण-पोषण के बारे में चिंतित होकर उन्होंने लेखक मार्क ट्वेन से अपने संस्मरण प्रकाशित करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसे उन्होंने मरने से एक सप्ताह पहले पूरा किया।
बाइबल हमें एक और व्यक्ति के बारे में बताती है जिसने गम्भीर कठिनाइयों का सामना किया था। याकूब ने विश्वास कर लिया था कि उसके पुत्र यूसुफ को किसी “जंगली पशु” के द्वारा “फाड़” डाला गया था (उत्पत्ति 37:33)। बाद में उसके पुत्र शिमोन को पराए देश में बंधुआ बना लिया गया, और याकूब को इस बात का डर था कि उसका पुत्र बिन्यामीन भी उससे ले लिया जाएगा। इनसे बहुत अधिक परेशान होकर ,वह चिल्ला उठा, “ये सब विपत्तियाँ मेरे ऊपर आ पड़ी हैं!” (42:36)। परन्तु ऐसा नहीं था। याकूब को मालूम नहीं था कि उसका पुत्र यूसुफ अभी भी जीवित है और परमेश्वर उसके परिवार को बहाल करने के लिए “पर्दे के पीछे” से काम कर रहा है। उनकी कहानी उदाहरण के साथ इस बात की व्याख्या करती है कि भले ही हम अपनी परिस्थितियों में उसका हाथ न देख पाएँ, पर उस समय भी परमेश्वर पर भरोसा किया जा सकता है।
ग्रांट के संस्मरण एक बड़ी सफलता साबित हुए और उनके परिवार की अच्छी देखभाल हुई। यद्यपि वह इसे देखने के लिए जीवित नहीं रहे, परन्तु उनकी पत्नी ने यह देखा। हमारी दृष्टि सीमित है, परन्तु परमेश्वर की नहीं। और हमारी आशा के रूप में यीशु के साथ, “यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” (रोमियों 8:31) आइए हम आज उस पर अपना भरोसा रखें।
—जेम्स बैंक्स
प्रोत्साहन का उपहार
“तुम्हारी मधुमक्खियाँ जानेवाली हैं!” मेरी पत्नी ने दरवाज़े के अंदर अपना सिर घुसाया और मुझे ऐसी खबर दी जिसे कोई भी मधुमक्खी पालक सुनना नहीं चाहता। मैं बाहर भागा, और देखा कि हज़ारों मधुमक्खियाँ छत्ते से उड़कर एक ऊँचे चीड़ के पेड़ की चोटी पर जा रही हैं, और फिर कभी वापस नहीं लौटीं। मैं उन संकेतों को पढ़ने में थोड़ा पीछे रह गया था कि मधुमक्खियाँ झुण्ड बनाकर छत्ता छोड़ने वाली थीं ; एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से चल रहे तूफ़ानों ने मेरे निरीक्षण में बाधा डाली थी। जिस सुबह तूफ़ान खत्म हुआ, मधुमक्खियाँ चली गईं। छत्ता नया और स्वस्थ था, और मधुमक्खियाँ वास्तव में एक नई शुरुआत करने के लिए छत्ते को विभाजित कर रही थीं। “अपने आप पर कठोर मत बनो,” एक अनुभवी मधुमक्खी पालक ने मेरी निराशा को देखकर खुशी से मुझसे कहा। “यह किसी के साथ भी हो सकता है!”
प्रोत्साहन एक सुखद उपहार है l जब दाऊद निराश हुआ, क्योंकि शाऊल उसको मारने हेतु उसका पीछा कर रहा था, तब शाऊल का पुत्र योनातान ने दाऊद को उत्साहित किया l योनातान ने कहा, "उस ने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है।" ” (1 शमुएल 23:17) l
ये आश्चर्यजनक रूप से निःस्वार्थ यह सिंहासन पर बैठने वाले अगले व्यक्ति द्वारा कहा गया था । यह संभव है कि योनातान ने पहचाना कि परमेश्वर दाऊद के साथ था, इसलिए उसने विश्वास के विनम्र हृदय से बात की l
हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जिन्हें प्रोत्साहन की ज़रूरत है। परमेश्वर हमें उनकी मदद करने में मदद करेगा जब हम उसके सामने खुद को नम्र करेंगे और उससे हमारे ज़रिए उनसे प्यार करने के लिए कहेंगे।
—जेम्स बैंक्स
परिणामों से परे आशा
क्या आपने कभी गुस्से में कुछ ऐसा किया है जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़ा हो? जब मेरा बेटा ड्रग्स की लत से जूझ रहा था, तो मैंने कुछ कठोर बातें कही उसकी एसी चीज़े चुनने की प्रतिक्रिया में। मेरे क्रोध ने उसे और अधिक हतोत्साहित कर दिया। लेकिन आख़िरकार उसका सामना ऐसे विश्वासियों से हुआ जिन्होंने उससे जीवन और आशा के बारे में बात की, और समय के साथ वह आज़ाद हुआ।
यहां तक कि मूसा जैसे विश्वास में अनुकरणीय व्यक्ति ने भी कुछ ऐसा किया जिसके लिए उसे बाद में पछताना पड़ा। जब इस्राएल के लोग मरुभूमि में थे और पानी की कमी थी, तब उन्होंने कटुतापूर्वक शिकायत की। इसलिए परमेश्वर ने मूसा और हारून को विशिष्ट निर्देश दिए: "मण्डली को इकट्ठा करके उनके देखते उस चट्टान से बातें कर, तब वह अपना जल देगी" (गिनती 20:8)। लेकिन मूसा ने क्रोध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, परमेश्वर के बजाय खुद को और हारून को आश्चर्यकर्म का श्रेय दिया: "सुनो, तुम विद्रोहियों, क्या हम को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा?" (v.10). फिर उसने सीधे तौर पर परमेश्वर की अवज्ञा की और "अपना हाथ उठाकर लाठी चट्टान पर दो बार मारी" (पद 11)।
हालाँकि पानी फूट निकला, फिर भी दुखद परिणाम हुए। न तो मूसा और न ही हारून को उस देश में प्रवेश करने की अनुमति थी जिसका वादा परमेश्वर ने अपने लोगों से किया था। लेकिन वह फिर भी दयालु था, उसने मूसा को इसे दूर से देखने की अनुमति दी (27:12-13)।
मूसा की तरह, परमेश्वर अभी भी दयापूर्वक हमारी अनाज्ञाकारिता के रेगिस्तान में हमसे मिलता है। यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा से, वह हमें क्षमा और आशा प्रदान करता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कहाँ हैं या हमने क्या किया है, अगर हम उसकी ओर मुड़ते हैं, तो वह हमें जीवन में ले जाता है।