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Articles by जेम्स बैंक्स

दोषी करार दिया गया और स्वतंत्र किया गया

“मैंने यह नहीं किया!” यह एक झूठ था, और मैं इससे लगभग बच ही गया था, जब तक कि परमेश्वर ने मुझे नहीं रोका l जब मैं माध्यमिक स्कूल में था, मैं एक प्रदर्शन के दौरान हमारे बैंड के पीछे स्पिटबॉल शूट करने वाले समूह का हिस्सा था l हमारे निदेशक एक पूर्व नौसैनिक थे और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध थे, और मैं उनसे डरता था l इसलिए जब अपराध में मेरे साझेदारों ने मुझे फंसाया, तो मैंने इस बारे में उनसे झूठ बोला l फिर मैंने अपने पिता से भी झूठ बोला l

लेकिन परमेश्वर झूठ को चलने नहीं देने वाला था l उसने मेरे भीतर अपराधबोध की भावना जागृत की l कई सप्ताहों तक विरोध करने के बाद, मैं मान गया l मैंने परमेश्वर और अपने पिता से क्षमा मांगी l थोड़ी देर बाद, मैं अपने निदेशक के घर गया और रोते हुए स्वीकार किया l शुक्र है, वह दयालु और क्षमाशील था l

मैं कभी नहीं भूलूंगा कि उस बोझ का हटाया जाना कितना अच्छा लगा l मैं कई सप्ताहों में पहली बार अपराधबोध के बोझ से मुक्त और आनंदित था l दाऊद अपने जीवन में भी दृढ़ विश्वास और स्वीकारोक्ति के समय का वर्णन करता है l वह परमेश्वर से कहता है, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियाँ पिघल गयीं l क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा l” वह आगे कहता है, “मैंने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया” (भजन संहिता संहिता 32:3-5) l

परमेश्वर के लिए सत्यता मायने रखती है l वह चाहता है कि हम उसके सामने अपने पापों को स्वीकार करें और उन लोगों के लिए क्षमा भी मांगे जिनके साथ हमने अन्याय किया है l दाऊद घोषणा करता है, “तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया [है]” (पद.5) l परमेश्वर की क्षमा की स्वतंत्रता को जानना कितना अच्छा है! जेम्स बैंक्स

 

प्रार्थना के प्रति समर्पित

बुजुर्ग महिला ने कहा, “मैं पचास साल से आपके लिए प्रार्थना कर रही हूँ।” मेरे मित्र लोउ ने उसकी आँखों में गहन कृतज्ञता से देखा। वह बल्गेरियाई गाँव का दौरा कर रहा था जहाँ उसके पिता बड़े हुए और किशोरावस्था में चले गए। यीशु में विश्वासी वह महिला उसके दादा-दादी के बगल में रहती थी। जैसे ही उसने लोउ के जन्म के बारे में सुना, जो एक महाद्वीप की दूरी पर था, उसने उसके लिए प्रार्थना करना शुरू कर दिया। अब, आधी सदी से भी अधिक समय के बाद, वह एक व्यापारिक यात्रा पर गाँव का दौरा कर रहा था, और वहाँ उसने एक समूह से अपने विश्वास के बारे में बात की; लोउ लगभग तीस वर्ष की आयु तक यीशु में विश्वासी नहीं बना था, जब लोउ की बात समाप्त हुई तब यह महिला उसके पास आई, लोउ यह जानकर आश्चर्यचकित था कि उस महिला कि लगातार प्रार्थनाओं ने उसके विश्वास में आने पर क्या प्रभाव डाला था।

हम स्वर्ग के इस तरफ अपनी प्रार्थनाओं का पूरा प्रभाव कभी नहीं जान पाएंगे। लेकिन पवित्रशास्त्र हमें यह सलाह देता है: “प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो।” (कुलुस्सियों 4:2)। जब पौलुस ने कुलुस्से के छोटे से शहर में विश्वासियों को ये वचन लिखे, तो उसने स्वयं के लिए भी प्रार्थना करने के लिए कहा ताकि वह जहां भी जाए, परमेश्वर उसके संदेश के लिए “द्वार खोल दे” (पद 3)।

कभी-कभी हम सोच सकते हैं, मेरे पास प्रार्थना का आत्मिक वरदान नहीं है। लेकिन बाइबल में सूचीबद्ध सभी आत्मिक वरदानों में से प्रार्थना उनमें से नहीं है। शायद इसका कारण यह है कि परमेश्वर चाहता है कि हममें से प्रत्येक व्यक्ति ईमानदारी से प्रार्थना करें, ताकि हम देख सकें कि केवल वह क्या कर सकता है। जेम्स बैंक्स

 

उदारतापूर्वक दिया गया एवं साझा किया गया

जब मेरी पत्नी और मैंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, हम पर बहुत अधिक कर्ज था जिसे हमें कम ब्याज दर के साथ देना ज़रूरी था l हमने स्थानीय बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था लेकिन हमें अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि हम लम्बे समय से उस शहर में नहीं रहे थे या काम नहीं किये थे l कुछ दिनों बाद, जो कुछ मेरे साथ हुआ था मैंने अपने मित्र के साथ साझा किया जो हमारे चर्च में एक वृद्ध व्यक्ति था l “मैं यह बात अपनी पत्नी से कहना चाहूँगा,” उसने कहा l

कुछ घंटो बाद फोन की घंटी बजी l यह मेरा मित्र था: “मेरी पत्नी और मैं आपको व्याज मुक्त, आपकी ज़रूरत का पैसा उधार देना चाहेंगे,” उन्होंने प्रस्ताव रखा l मुझे नहीं पता था कि क्या कहूँ, इसलिए मैंने उत्तर दिया, “मैं आपसे यह नहीं मांग सकता l” “आप नहीं मांग रहे हैं!” मेरे मित्र ने ख़ुशी से उत्तर दिया l उन्होंने सहजता से हमें ऋण दिया, और मैंने और मेरी पत्नी ने जितनी जल्दी हो सकता था उसे वापस कर दिया l

मेरा मानना है कि ये मित्र परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम के कारण उदार थे l जैसा कि पवित्रशास्त्र हमें बताता है, “जो पुरुष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकदमे को जीतेगा” (भजन संहिता 112:5) l जो लोग परमेश्वर पर भरोसा करते हैं उनके पास “भरोसा रखने वाला” और “संभला हुआ” हृदय होता है (पद.7-8), यह समझते हुए कि वह उनके जीवन में हर अच्छी चीज़ का श्रोत है l

परमेश्वर हमारे प्रति उदार रहा है, उसने हमें जीवन और क्षमा दी है l आइये ज़रूरतमंद लोगों के साथ उनके प्यार और हमारे संसाधनों को साझा करने में उदार बने l जेम्स बैंक्स

 

प्रशंसा की घाटी

कवि विलियम काउपर अपने जीवन के अधिकांश समय अवसाद से जूझते रहे। आत्महत्या के प्रयास के बाद, उन्हें एक अस्पताल में रख दिया गया था। लेकिन वहाँ एक मसीही चिकित्सक की देखभाल के माध्यम से काउपर को यीशु में अपने मन से महत्वपूर्ण विश्वास आया। इसके तुरंत बाद, काउपर पादरी और स्तुति गीत लेखक जॉन न्यूटन से परिचित हो गए, जिन्होंने उन्हें अपने चर्च के लिए एक स्तुति गीत पर सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। काउपर द्वारा लिखे गए स्तुति गीतों में “गॉड मूव्स इन ए मिस्टीरियस वे” था, जिसमें अनुभव की भट्टी से निकले ये शब्द शामिल हैं: “हे भयभीत संतों, साहसी बनो; जिन बादलों से तुम इतना डरते हो, वे दया से बड़े हैं और तुम्हारे सिर पर आशीष के रूप में टूट पड़ेंगे।”

काउपर की तरह, यहूदा के लोगों को भी अप्रत्याशित रूप से परमेश्वर की दया मिली। जैसे ही सेनाओं के एक गठबंधन ने उनके देश पर आक्रमण किया, राजा यहोशापात ने लोगों को प्रार्थना के लिए इकट्ठा किया। जैसे ही यहूदा की सेना आगे बढ़ी, अग्रिम पंक्ति के लोगों ने परमेश्वर की स्तुति की (2 इतिहास 20:21)। हमलावर सेनाओं ने खुद पर हमला कर दिया, और “कोई नहीं... बचा... इतनी लूट हुई कि उसे इकट्ठा करने में तीन दिन लग गए” (पद 24-25)।

चौथे दिन, वही स्थान जहां परमेश्वर के लोगों के खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण आक्रमणकारी सेना एकत्र हुई थी, उसे बराका की घाटी (पद 26) कहा गया - शाब्दिक रूप से, “प्रशंसा की घाटी” या “आशीष” क्या बदलाव है! परमेश्वर की दया हमारी सबसे कठिन घाटियों को भी प्रशंसा के स्थानों में बदल सकती है जब हम उन्हें उन्हें सौंप देते हैं। जेम्स बैंक्स

 

स्वामी या प्रबंधक (अधिकारी) ?

“क्या मैं स्वामी हूं या प्रबंधक?” एक अरबों डॉलर की कंपनी के सी.ई.ओ ने स्वयं से यह सवाल पूछा क्योंकि उन्होंने सोचा कि उनके परिवार के लिए सबसे बेहतर क्या है। बहुत अधिक धन के साथ आने वाले प्रलोभनों के बारे में चिंतित होकर, वह अपने उत्तराधिकारियों पर उस चुनौती का बोझ नहीं डालना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपनी कंपनी का स्वामित्व(मालिकाना हक़) छोड़ दिया और 100 प्रतिशत वोटिंग स्टॉक (मताधिकार वाले शेयर) एक ट्रस्ट (किसी अन्‍य व्‍यक्ति की संपति की देखभाल के लिए, की गई वैधानिक व्‍यवस्‍था) में रख दिया। यह मानते हुए कि उनके पास जो कुछ भी है वह परमेश्वर का है, जिन्होंने उनको यह निर्णय लेने में मदद की है, कि उनका परिवार वहाँ काम करके अपनी जीविका कमा सकें और साथ ही भविष्य में मिले मुनाफ़े द्वारा मसीही सेवकाई में भी मदद कर सकें।

भजन संहिता संहिता 50:10 में, परमेश्वर अपने लोगों से कहते हैं “वन के सारे जीव-जन्तु और हज़ारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैI” सभी चीज़ों के सृष्टिकर्ता के रूप में, परमेश्वर को हमसे कुछ भी नहीं चाहिए और न ही उन्हें कोई ज़रुरत ही है। वह कहते हैं। “मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशाला से बकरे लूँगा” (पद 9)। वे उदारतापूर्वक वह सब कुछ प्रदान करते है जो हमारे पास है और उनका उपयोग भी करते है, साथ ही जीविका कमाने के लिए शक्ति और क्षमता भी प्रदान करते है। क्योंकि वह करता है, जैसा कि भजन संहिता हमें दिखाता है, वह हमारी हार्दिक आराधना के योग्य है। परमेश्वर सभी चीज़ों के स्वामी है लेकिन अपनी भलाई के कारण जब भी कोई उनके पास आता है तब उसके साथ रिश्ते में जुड़ने के लिए परमेश्वर स्वयं को भी समर्पित करने का निर्णय लेते है । “क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।” (मरकुस 10:45) जब हम उपहारों से अधिक महत्व उपहार देने वाले को देते हैं और उन उपहारों से उसकी सेवा करते हैं, तो हम उसमें सदैव आनंदित रह कर धन्य हो जाते हैं। जेम्स बैंक्स

 

गिनने से परे प्यार

"मैं तुम्हें किस तरह से प्यार करती हूँ? मुझे तरीकों को गिनने दें।" ये शब्द एलिजाबेथ बैरेट ब्राउनिंग के सोनेट्स फ्रॉम द पोर्च्युगीज की अंग्रेजी भाषा की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से हैं। उन्होंने इन्हें शादी से पहले रॉबर्ट ब्राउनिंग को लिखा था, और वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी कविताओं का पूरा संग्रह प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन चूँकि गीतों की भाषा बहुत कोमल थी, व्यक्तिगत गोपनीयता की इच्छा से बैरेट ने उन्हें इस तरह प्रकाशित किया जैसे कि वे किसी पुर्तगाली लेखक के अनुवाद हों।

कभी-कभी जब हम खुलेआम दूसरों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं तो हमें अजीब महसूस हो सकता है। लेकिन इसके विपरीत, बाइबल परमेश्वर के प्रेम की अपनी प्रस्तुति से पीछे नहीं हटती। यिर्मयाह ने अपने लोगों के प्रति परमेश्वर के स्नेह को इन कोमल शब्दों में वर्णित किया : "मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करूणा बनाए रखी है"(यिर्मयाह 31:3)। भले ही उसके लोग उससे दूर हो गए थे, फिर भी परमेश्वर ने उन्हें बहाल करने और व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने पास लाने का वादा किया। "मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ," उसने उनसे कहा (पद.2)।

यीशु परमेश्वर के सबल बनानेवाला प्रेम की चरम अभिव्यक्ति हैं, जो उसके पास आने वाले किसी भी व्यक्ति को शांति और आराम देता है। चरनी से लेकर क्रूस से लेकर खाली कब्र तक, वह एक भटकी हुई दुनिया को अपने पास बुलाने की परमेश्वर की इच्छा का प्रतीक है। बाइबल को शुरू से अंत तक पढ़ें और आप बार-बार परमेश्वर के प्रेम के "तरीके गिनेंगे"; लेकिन वे शाश्वत हैं, आप कभी भी उनके अंत तक नहीं पहुंचेंगे। जेम्स बैंक्स

क्रिसमस का तारा

"यदि आपको वह तारा मिल जाए, तो आप हमेशा अपने घर का रास्ता खोज सकते हैं।" ये मेरे पिता के शब्द थे जब उन्होंने मुझे बचपन में उत्तर तारा(North Star) का पता लगाना सिखाया था। पिताजी ने युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों में सेवा की थी, और ऐसे क्षण भी आए जब उनका जीवन रात के आकाश को देख अपना रास्ता ढूंढ़ने पर निर्भर था। इसलिए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मुझे कई नक्षत्रों के नाम और स्थान मालूम हों, लेकिन पोलारिस(Polaris/Pole Star/North Star) को ढूंढने में सक्षम होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण था। उसके स्थान को जानने का मतलब था कि मैं जहां भी था दिशा का ज्ञान प्राप्त कर सकता था और यह जान सकता था कि मुझे कहां होना चाहिए था।

पवित्रशास्त्र एक और अत्यंत महत्वपूर्ण तारे के बारे में बताता है। “पूर्व के ज्योतिषी,” विद्वान लोग (वर्तमान के ईरान और इराक से घिरे क्षेत्र से) उस व्यक्ति के जन्म के संकेतों को आकाश में देख रहे थे जो अपने लोगों के लिए परमेश्वर का राजा बनने वाला था। वे यह पूछते हुए यरूशलेम आए “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं” (मत्ती 2:1-2)। 

खगोलशास्त्रियों को यह पता नहीं कि बेथलहम का तारा क्यों प्रकट हुआ, लेकिन बाइबल बताती है  कि परमेश्वर ने इसे दुनिया को यीशु—“भोर का चमकता हुआ तारा” (प्रकाशितवाक्य 22:16) की ओर  इंगित करने के लिए बनाया था। मसीह हमें हमारे पापों से बचाने और हमें वापस परमेश्वर की ओर मार्गदर्शन करने के लिए आया। उसका अनुसरण करें, और आपको आपके घर का रास्ता मिल जाएगा।

—जेम्स बैंक्स      

अनुचित धारणा और परमेश्वर का प्रेम

“तुम वो नहीं हो जिसकी मुझे उम्मीद थी। मुझे लगा कि मैं तुमसे नफरत करूंगा, लेकिन मैं नहीं करता।” युवक के शब्द कठोर लग रहे थे, लेकिन वे वास्तव में दयालु होने का प्रयास थे। मैं उसके देश में विदेश में पढ़ रहा था, एक ऐसा देश जो दशकों पहले मेरे देश के साथ युद्ध में था। हम कक्षा में एक साथ एक सामूहिक चर्चा में भाग ले रहे थे, और मैंने देखा कि वह अलग लग रहा था। जब मैंने पूछा कि क्या मैंने उसे किसी तरह से नाराज किया है, तो उसने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं . . . . और यही बात है। मेरे दादा उस युद्ध में मारे गए थे, और मैं इसके लिए आपके लोगों और आपके देश से नफरत करता था। लेकिन अब मैं देखता हूं कि हम दोनों में कितनी समानताएं हैं, और यह मुझे आश्चर्यचकित करता है। मुझे नहीं लगता कि हम दोस्त क्यों नहीं हो सकते।”  
 
अनुचित धारणा मानव जाति जैसा ही पुराना है । दो हज़ार साल पहले, जब नतनएल ने पहली बार यीशु के नासरत में रहने के बारे में सुना, तो उसकी अनुचित धारणा स्पष्ट हो गयी : उसने पूछा, “क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?” (यूहन्ना 1:46) । नतनएल यीशु की तरह गलील के क्षेत्र में रहता था। संभवतः उसने सोचा था कि परमेश्वर का मसीहा किसी अन्य स्थान से आएगा; यहाँ तक कि अन्य गलीली लोगों ने भी नासरत को नीची दृष्टि से देखा क्योंकि यह एक साधारण छोटा सा गाँव लग रहा था।   
इतना तो स्पष्ट है, नतनएल के प्रतिक्रिया ने यीशु को उससे प्रेम करने से नहीं रोका, और जब वह यीशु का शिष्य बना, वह बदल गया। नतनएल ने बाद में घोषणा किया “तू परमेश्‍वर का पुत्र हे;” (पद.49)। ऐसी कोई अनुचित धारणा नहीं है जो परमेश्वर के परिवर्तनकारी प्रेम के विरुद्ध खड़ी हो सके।

—जेम्स बैंक्स

अनुचित धारणा और परमेश्वर का प्रेम

 

“तुम वो नहीं हो जिसकी मुझे उम्मीद थी। मुझे लगा कि मैं तुमसे नफरत करूंगा, लेकिन मैं नहीं करता।” युवक के शब्द कठोर लग रहे थे, लेकिन वे वास्तव में दयालु होने का प्रयास थे। मैं उसके देश में विदेश में पढ़ रहा था, एक ऐसा देश जो दशकों पहले मेरे देश के साथ युद्ध में था। हम कक्षा में एक साथ एक सामूहिक चर्चा में भाग ले रहे थे, और मैंने देखा कि वह अलग लग रहा था। जब मैंने पूछा कि क्या मैंने उसे किसी तरह से नाराज किया है, तो उसने जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं . . . . और यही बात है। मेरे दादा उस युद्ध में मारे गए थे, और मैं इसके लिए आपके लोगों और आपके देश से नफरत करता था। लेकिन अब मैं देखता हूं कि हम दोनों में कितनी समानताएं हैं, और यह मुझे आश्चर्यचकित करता है। मुझे नहीं लगता कि हम दोस्त क्यों नहीं हो सकते।”

अनुचित धारणा मानव जाति जैसा ही पुराना है । दो हज़ार साल पहले, जब नतनएल ने पहली बार यीशु के नासरत में रहने के बारे में सुना, तो उसकी अनुचित धारणा स्पष्ट हो गयी : उसने पूछा, “क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है?” (यूहन्ना 1:46) । नतनएल यीशु की तरह गलील के क्षेत्र में रहता था। संभवतः उसने सोचा था कि परमेश्वर का मसीहा किसी अन्य स्थान से आएगा; यहाँ तक कि अन्य गलीली लोगों ने भी नासरत को नीची दृष्टि से देखा क्योंकि यह एक साधारण छोटा सा गाँव लग रहा था।  

इतना तो स्पष्ट है, नतनएल के प्रतिक्रिया ने यीशु को उससे प्रेम करने से नहीं रोका, और जब वह यीशु का शिष्य बना, वह बदल गया। नतनएल ने बाद में घोषणा किया “तू परमेश्‍वर का पुत्र हे;” (पद.49)। ऐसी कोई अनुचित धारणा नहीं है जो परमेश्वर के परिवर्तनकारी प्रेम के विरुद्ध खड़ी हो सके।  

—जेम्स बैंक्स