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Articles by जेम्स बैंक्स

परमेश्वर के पैरों के निशान

“मुझे पता है कि ईश्वर कहाँ रहते हैं,” हमारे चार वर्षीय पोते ने मेरी पत्नी, कैरी से बोला l “वह कहाँ है?” अपनी जिज्ञासा को जागते हुए देखकर, उसने पूछा l “वह आपके घर के बगल में जंगल में रहते हैं,” उसने उत्तर दिया l

जब कैरी ने मुझे अपनी बातचीत के बारे में बताया,  तो उसने सोचा कि उसकी सोच किस बात से प्रेरित थी l “मुझे पता है,” मैंने उत्तर दिया l “"जब वह पिछली बार आया था तो हम उसके साथ जंगल में घूमने गए थे, और मैंने उससे कहा था कि भले ही हम परमेश्वर को नहीं देख सकते,  लेकिन हम उसके द्वारा किये गए कार्यों को देख सकते हैं l” “क्या तुम मेरे द्वारा बनाए गए पैरों के निशान देखते हो?”  मैंने अपने पोते से पूछा था जब हमने एक नदी के किनारे रेतीले स्थान पर कदम रखे थे l “जानवर और पेड़ और नदी परमेश्वर के पैरों के निशान की तरह हैं l  हम जानते हैं कि वह यहाँ हैं क्योंकि हम उसके द्वारा बनाई गई चीजों को देख सकते हैं l

भजन 104 के लेखक ने भी सृष्टि में ईश्वर के प्रमाणों की ओर संकेत करते हुए कहा, “हे यहोवा, तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी संपत्ति से परिपूर्ण है” (पद.24) l यहाँ बुद्धि के लिए पाया जाने वाला इब्री शब्द बाइबल में अक्सर कुशल शिल्पकारिता का वर्णन करने के लिए उपयोग किया गया है l प्रकृति में परमेश्वर के हाथ के कार्य उसकी उपस्थिति की घोषणा करती है और हमें उसकी प्रशंसा करने को प्रेरित करती है l

भजन 104 “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह” (पद.1, 35) शब्दों से शुरू और समाप्त होता है l एक शिशु के हाथ से लेकर बाज के आँख तक, हमारे चारों-ओर हमारे सृष्टिकर्ता की कारीगरी उसके उत्कृष्ट कौशल को प्रगट करती है l आज हम इन सभी को आश्चर्य से स्वीकार्य करें – और इन सब के लिए उसकी प्रशंसा करें!

अदृश्य का परमेश्वर

“कभी-कभी मुझे लगता है जैसे मैं अदृश्य हूँ l लेकिन मैं इस कारण चाहता हूँ कि परमेश्वर मेरा उपयोग करें l”

मैं जिस होटल में ठहरा था ऐन उसके व्यायाम कक्ष को ठीक-ठाक कर रही थी  जब हमदोनों के बीच बातचीत शुरू हो गयी l जब हम बात कर रहे थे, मुझे पता चला कि उसके पास एक अद्भुत कहानी थी l

“मैं सड़कों पर रहने वाली एक ज़ोरदार व्यसनी(addict) और वेश्या हुआ करती थी,”  उसने कहा l “लेकिन मुझे पता था कि परमेश्वर चाहता था कि मैं अपनी सिगरेट/आदत छोड़ दूँ और उसके साथ चलूँ l कई साल पहले एक दिन मैंने यीशु के चरणों में घुटने टेक दिए,  और उसने मुझे आज़ाद कर दिया l”

मैंने ऐन को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया कि परमेश्वर ने उसके लिए क्या किया था और उसे आश्वस्त किया कि वह अदृश्य नहीं है - उसने हमारी बातचीत में उसका इस्तेमाल खूबसूरत तरीके से किया था ताकि मुझे जीवन बदलने की अपनी सामर्थ्य की याद दिला सके l

परमेश्वर उन लोगों का उपयोग करना पसंद करता है जिनको दूसरे नज़रंदाज़ कर सकते हैं l  प्रेरित अन्द्रियास अपने भाई पतरस की तरह लोकप्रिय नहीं है,  लेकिन बाइबल यह बताती है कि “उसने पहले अपने सगे भाई शमौन [पतरस] से मिलकर उस से कहा, ‘हम को ख्रिस्त, अर्थात् मसीह, मिल गया l’ [और] वह उसे यीशु के पास लाया” (यूहन्ना 1:41-42) l

पतरस की मुलाकात यीशु से अन्द्रियास के द्वारा हुयी l जो यूहन्ना बपतिस्मादाता का एक शिष्य, अन्द्रियास ने यीशु के विषय यूहन्ना से सुना, वह यीशु का अनुयायी बना और विश्वास किया – और तुरंत अपने भाई को बताया l अन्द्रियास की शांत विश्वासयोग्यता का प्रभाव था जो संसार को हिला देने वाला था l

परमेश्वर प्रसिद्धि के ऊपर विश्वासयोग्य सेवा को महत्व देता है l वह हमें शक्तिशाली रूप से वहां उपयोग कर सकता है जहाँ हम हैं – तब भी जब कोई नहीं देख रहा हो l

जब शांति फूट पड़ती है

1914 में बेल्जियम में एक ठंडी क्रिसमस की पूर्व संध्या पर,  उन खंदकों से गायन की आवाज़ आती हुई सुनाई दी जहाँ सैनिक छिपे हुए थे l क्रिसमस प्रशंसागान(Carol) “धन्य रात” की लय पहले जर्मन भाषा में और फिर अंग्रेजी में सुनाई दी l सैनिक जो दिन के आरम्भ में एक दूसरे पर गोलियां बरसा रहे थे अपने हथियारों को रखकर अपने खंदकों से निकल कर दूसरे से हाथ मिलाने अवांतर भूमि(no man’s land) में आए और एक दूसरे के साथ क्रिसमस की शुभकामनाएं और अपने रसद में से स्वाभाविक उपहार एक दूसरे को दिए l अगले दिन भी युद्धविराम जारी रहा जब सैनिकों ने एक दूसरे से बातें की और हंसे और यहां तक ​​कि एक साथ फुटबॉल मैच भी आयोजित किए ।

1914 का क्रिसमस युद्धविराम/truce जो प्रथम विश्व युद्ध के साथ पश्चिमी शरहद पर हुआ था ने पहले क्रिसमस की पूर्व संध्या पर घोषित स्वर्गदूतों की शांति की संक्षिप्त झलक पेश की । एक स्वर्गदूत ने इन आश्वस्त करनेवाले शब्दों के साथ घबराए हुए चरवाहों से बात की : “मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है” (लूका 2:10–11) । तब स्वर्गदूतों का दल स्तुति करते हुए दिखाई दिया, “आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है, शांति हो” (पद.13–14) ।

यीशु "शांति का राजकुमार" है जो हमें हमारे पापों से बचाता है (यशायाह 9: 6)। क्रूस पर उनके बलिदान के माध्यम से वह क्षमा और परमेश्वर के साथ शांति प्रदान करता है जो उस पर भरोसा करते हैं।

क्रिसमस की उपस्थिति

“खामोशी में एक बेश बहा, बख्सिश है नमूदार; आसमानी बरकतों का अब, हर दिल में है इज़हार; हर आजिज़ दिल में यीशु तू दाखिल होता है; और ताइब गुनाहगार को भी, काबुल तू करता है l” एक अत्याधिक पसंदीदा गीत “बैतलहेम के ऐ छोटे कस्बे(O Little Town of Bethlehem)” के शब्द क्रिसमस के सार की ओर इशारा करता है l यीशु हमें हमारे पाप से छुड़ाने के लिए हमारी टूटी-फूटी दुनिया में आया और परमेश्वर में अपना विश्वास रखनेवालों को परमेश्वर के साथ एक नया और महत्वपूर्ण सम्बन्ध देता है l

गीत लिखने के दशकों बाद एक मित्र को लिखे एक पत्र में, रचयिता ने मार्मिक रूप से अपने जीवन में इस रिश्ते के परिणाम का वर्णन किया : “मैं आपको यह नहीं बता सकता कि यह मेरे लिए कितना व्यक्तिगत है । वह यहाँ है । वह मुझे जानता है और मैं उसे जानता हूँ l यह अलंकार(figure of speech) नहीं है । यह दुनिया की सबसे असली चीज़ है, और हर दिन इसे और अधिक वास्तविक बनाता है । और कोई भी खुशी के साथ आश्चर्य करता है कि जैसे-जैसे वर्ष बीतते जाते हैं यह किस दिशा में उन्नति करेगा l

उसके जीवन में परमेश्वर की उपस्थिति की यह शांत निश्चयता यशायाह द्वारा नबूवत किये गए यीशु के नामों में से एक को प्रतिबिम्बित करता है : “एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र को जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी” (यशायाह 7:14) l मत्ती का सुसमाचार हमें इब्री नाम इम्मानुएल का अर्थ बताता है : "परमेश्वर हमारे साथ” (1:23) ।

परमेश्वर यीशु के द्वारा हमारे निकट आया ताकि हम उसे व्यक्तिगत रूप से जान सकें और हमेशा उसके साथ रह सकें l हमारे साथ उसकी प्रेममय उपस्थिति सबसे बड़ा उपहार है l

परमेश्वर सब कुछ सुनता है

इतिहास में सबसे लंबे समय तक दर्ज किए गए डाक विलंब में से एक नवासी साल तक का था l  2008 में यूके में एक घर के मालिक को एक पार्टी का निमंत्रण मिला जो मूल रूप से 1919 में उसके पते के एक पूर्व निवासी को भेजा गया था । उस निमंत्रण पत्र को रॉयल मेल के माध्यम से उसके लेटरबॉक्स में रखा गया था, लेकिन इसके लंबे विलंब के पीछे का कारण एक रहस्य बना हुआ है ।

यहां तक ​​कि संचार के सर्वोत्तम मानवीय प्रयास भी कभी-कभी हमें निराश करते हैं, लेकिन पवित्रशास्त्र यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने विश्वासी लोगों को सुनने में कभी विफल नहीं होता है । 1 राजा 18 में, एलिय्याह ने मूर्तिपूजक बाल देवता और यहोवा परमेश्‍वर के बीच असाधारण विरोधाभास का प्रदर्शन किया । बाल के नबियों द्वारा घंटों प्रार्थना करने के बाद, सच्चा परमेश्वर कौन था, यह प्रदर्शित करने के लिए, एलिय्याह ने उनका ठट्ठा किया : “ऊंचे शब्द से पुकारो, वह तो देवता है; वह तो ध्यान लगाए होगा, या कहीं  गया होगा, या यात्रा में होगा या हो सकता है कि सोता हो और उसे जगाना चाहिये” (पद.27) l तब एलिय्याह ने यहोवा से उत्तर के लिए प्रार्थना की ताकि उसके लोग विश्वास में लौट आएँ, और परमेश्वर की सामर्थ्य स्पष्टता से प्रदर्शित हुई ।

यद्धपी हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर हमेशा एलिय्याह के समान नहीं मिल सकती है, हम आश्वस्त हो सकते हैं कि परमेश्वर उन्हें सुनता है (भजन 34:17) । बाइबल हमें याद दिलाती है कि वह हमारी प्रार्थनाओं को इस कदर संजोता है कि वह उन्हें “सुनहरे कटोरों” में अनमोल धूप की तरह रखता है (प्रकाशितवाक्य 5:8) । परमेश्वर हर प्रार्थना का जवाब अपनी पूर्ण बुद्धि और तरीके से देगा । स्वर्ग में कोई खोए हुए पत्र नहीं हैं ।

तारों से परे सुनना

मोबाइल फोन, वाई-फाई, जीपीएस, ब्लूटूथ डिवाइस या माइक्रोवेव ओवन के बिना जीवन की कल्पना करें । यह वैसा ही है जैसा कि ग्रीन बैंक के छोटे शहर वेस्ट वर्जीनिया में है, जिसे "अमेरिका का सबसे शांत शहर" कहा जाता है । यह ग्रीन बैंक वेधशाला/आकाशलोचन का स्थान भी है, जो दुनिया का सबसे बड़ा घुमाने वाला(steerable) रेडियो टेलीस्कोप है । दूरबीन को गहरे अंतरिक्ष में पल्सर(अत्यधिक घनत्व का तारा) और आकाशगंगाओं की गति से उत्सर्जित होने वाली रेडियो तरंगों को "सुनने" के लिए "शांति/निस्तभ" की ज़रूरत है l यह एक सतह क्षेत्र है जो एक फुटबॉल मैदान से बड़ा है और टेलिस्कोप की चरम संवेदनशीलता के लिए इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए स्थापित राष्ट्रीय रेडियो शांत क्षेत्र के 13,000 वर्ग मील के क्षेत्र में स्थित है ।

यह साभिप्राय शांति/निस्तभ वैज्ञानिकों को "आकाश का संगीत" सुनने में सक्षम बनाता है । यह मुझे ब्रह्मांड को बनाने वाले को सुनने के लिए पर्याप्त रूप से खुद को शांत करने की हमारी आवश्यकता की भी याद दिलाता है । परमेश्वर ने भविष्यवक्ता यशायाह के द्वारा एक हठधर्मी और विचलित लोगों से बातचीत की, “कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बांधूंगा” (यशायाह 55:3) l परमेश्‍वर उन सभी के प्रति अपने विश्वासयोग्य प्रेम का वादा करता है जो उसे खोजते हैं और क्षमा के लिए उसके पास लौटते हैं l

हम जानबूझकर परमेश्वर की सुनने के लिए अपनी व्याकुलता से मुड़कर उससे पवित्रशास्त्र में और प्रार्थना में मिलते हैं । परमेश्वर दूर नहीं है । वह हमें उसके लिए समय निकालने के लिए लालायित रहता है ताकि वह हमारे दैनिक जीवन की प्राथमिकता हो और फिर अनंत काल के लिए ।

अपनी प्रार्थनाओं द्वारा दूसरों से प्रेम

यह पहला सवाल था जो एक मिशनरी ने अपनी पत्नी से पूछा जब भी उसकी पत्नी को जेल में उससे मिलने की अनुमति दी गई । उसे उसके विश्वास के लिए झूठा अभियुक्त बनाया गया था और दो साल के लिए कैद किया गया था l जेल में परिस्थितियों और विरोध के कारण उसका जीवन अक्सर खतरे में रहता था, और दुनिया भर के विश्वासियों ने उसके लिए ईमानदारी से प्रार्थना की थी । वह आश्वस्त होना चाहता था कि वे नहीं रुकेंगे, क्योंकि उसका मानना ​​था कि परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं का शक्तिशाली तरीके से उपयोग कर रहा था ।

दूसरों के लिए हमारी प्रार्थनाएँ - विशेष रूप से वे जो अपने विश्वास के लिए सताए जाते हैं - एक महत्वपूर्ण उपहार हैं । पौलुस ने यह स्पष्ट किया जब उसने कुरिंथुस में विश्वासियों को अपनी मिशनरी यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में लिखा । वह "भारी बोझ से दबा” हुआ था, यहाँ तक कि वह “जीवन से भी हाथ धो” बैठा था (2 कुरिन्थियों 1: 8) । लेकिन फिर उसने कहा कि परमेश्वर ने उसे छुडाया था और उस उपकरण का वर्णन किया जिसका उपयोग परमेश्वर ने उसे करने के लिए किया : “हमारी यह आशा है कि वह आगे को भी बचाता रहेगा l तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे” (पद 10–11 महत्व दिया) ।

परमेश्वर हमारी प्रार्थना के माध्यम से अपने लोगों के जीवन में महान भलाई करने के लिए आगे बढ़ता है। दूसरों से प्यार करने का एक सबसे अच्छा तरीका उनके लिए प्रार्थना करना है, क्योंकि हमारी प्रार्थनाओं के माध्यम से हम उस सहायता के द्वार को खोलते हैं जो केवल परमेश्वर दे सकता है l जब हम दूसरों के लिए प्रार्थना करते हैं, तो हम उसकी सामर्थ्य में उनसे प्यार करते हैं । उससे बड़ा या अधिक प्रेम करने वाला कोई नहीं है ।

अंतिम लहर

लोग “लहर(the wave” करना पसंद करते हैं l दुनिया भर में खेल की घटनाओं और समारोहों में, यह तब शुरू होता है जब कुछ लोग खड़े होकर अपना हाथ उठाते हैं l एक क्षण बाद,  उनके पास बैठे लोग भी ऐसा ही करते हैं l लक्ष्य है कि एक पूरे प्रवाह के दौरान एक क्रमिक प्रवाहित गति अपना काम करे l एक बार जब यह अंत तक पहुँच जाता है,  तो इसे शुरू करने वाले लोग मुस्कुराते हैं और खुश होते हैं और गति को जारी रखते हैं l

लहर की पहली दर्ज की गई घटना 1981 में अमेरिका में एक पेशेवर खेल कार्यक्रम में हुई थी l  मुझे इस लहर में शामिल होना पसंद है क्योंकि यह मजेदार है l लेकिन मेरे साथ यह भी हुआ कि यह करते हुए हमें जो खुशी और साथ का अनुभव होता है,  वह सुसमाचार की याद दिलाता है - यीशु में उद्धार की अच्छी खबर जो प्रशंसा और आशा में हर जगह विश्वासियों को एकजुट करती है l यह “अंतिम लहर(ultimate wave)” यरूशलेम में बीस सदी पहले शुरू हुई थी l  कुलुस्से के चर्च के सदस्यों को लिखते हुए, पौलुस ने इसे इस तरह वर्णित किया : “[सुसमाचार] फल लाता और बढ़ता जाता है, वैसे ही जिस दिन से तुम ने उसको सुना और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है”(कुलुस्सियों 1:6) l इस शुभ समाचार का स्वाभाविक नतीजा है, “ आप का विश्वास और प्रेम उस आशा पर आधारित है, जो स्वर्ग में आपके लिए सुरंक्षित है”(पद.5 Hindi-C.L.) l

यीशु में विश्वासियों के रूप में,  हम इतिहास की सबसे बड़ी लहर का हिस्सा हैं l चलते रहने दें! एक बार इसके पूरा हो जाने के बाद,  हम उस व्यक्ति की मुस्कान देखेंगे, जिसने इसे शुरू किया था l

उद्देश्य पर जीना

“हम छुट्टी पर जा रहे हैं!” मेरी पत्नी ने उत्साह से हमारे तीन वर्षीय पोते अजय को बताया जब हम अपनी यात्रा के पहले चरण में घर से निकले l छोटे अजय ने उन्हें विचारमग्न ढंग से देखकर कर जवाब दिया, “मैं छुट्टी पर नहीं जा रहा हूँ। मैं एक मिशन पर जा रहा हूँ!”

हमें यकीन नहीं है कि हमारे पोते ने "एक मिशन पर" जाने की अवधारणा को कहां प्राप्त किया,  लेकिन उसकी टिप्पणी ने मुझे विचारने के लिए कुछ दिया, जब हम हवाई अड्डे पर गए : जब मैं इस छुट्टी पर जा रहा हूँ और कुछ दिनों के लिए अवकाश लेता हूँ,  क्या मैं इस बात को ध्यान में रख रहा हूँ कि मैं अभी भी “मिशन पर हूँ” और प्रत्येक क्षण परमेश्वर के साथ और उसके लिए जी सकूँ?  क्या मुझे अपने हर काम में उसकी सेवा करना याद है?

प्रेरित पौलुस ने रोमी साम्राज्य की राजधानी रोम में रहने वाले विश्वासियों को “आशा में आनंदित; क्लेश में स्थिर; प्रार्थना में नित्य” (रोमियों 12:11) लगे रहने के लिए उत्साहित किया l उसका कहना था कि यीशु में हमें अपना जीवन उद्देश्य और उत्साह के साथ जीना है l यहां तक ​​कि सबसे नीरस क्षण नए अर्थ प्राप्त करते हैं जब हम परमेश्वर की ओर आशा से देखते हैं और उसके उद्देश्यों के लिए जीते हैं l

जब हम ट्रेन में अपने-अपने सीटों पर बैठ गए, मैंने प्रार्थना की, “प्रभु, मैं आपका हूँ l इस सैर में जो कुछ आप मेरे लिए रखे हैं, मुझे उसे याद रखने में मदद करें l”

हर दिन उसके साथ एक अनंत महत्वपूर्ण मिशन है!