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Articles by जेम्स बैंक्स

छिपा हुआ यीशु

हाल ही में मेरा बेटा जेफ़ एक “बेघर मिथ्याभास(homeless simulation)” में भाग लिया l वह अपने शहर के सड़कों पर, खुले आसमान के नीचे जमाव बिंदु से कम तापमान में तीन दिन और दो रात गुज़ारे l वह भोजन, पैसा, या आश्रय के बिना अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए अनजान लोगों की दया पर आश्रित रहा l उनमें से एक दिन उसका भोजन केवल एक सैंडविच था, जो एक व्यक्ति उसे लाकर दिया था जिसने उसे एक फ़ास्ट-फ़ूड रेस्टोरेंट में बासी भोजन मांगते हुए सुना था l  

जेफ़ ने बाद में मुझसे कहा कि यह सबसे कठिन काम था जो उसने कभी किया हो, फिर भी इस बात ने दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया था l उसने अपने मिथ्याभास(simulation) के बाद एक दिन बेघर लोगों को खोजकर सरल तरीकों से उनकी सहायता की जिन्होनें उसके सड़क पर रहते समय उसपर दया दिखाई थी l उनको यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वह बेघर नहीं था और उन्होंने उनकी नज़रों से जीवन को देखने के लिए उसको धन्यवाद दिये l

मेरे बेटे का अनुभव यीशु के शब्दों की याद दिलाता है : “मैं नंगा था, और तुमने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, और तुमने मेरी सुधि ली, मैं बंदीगृह में था, और तुम मुझसे मिलने आए . . . तुमने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया” (मत्ती 25:36, 40) l चाहे हम प्रोत्साहन का एक शब्द बोलें या एक थैला किराने का सामान दें, परमेश्वर हमें प्रेम से दूसरों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए बुलाता है l दूसरों के प्रति हमारी दयालुता उसके प्रति दयालुता है l

फंदे से बाहर

द वीनस फ्लाईट्रैप(एक मांसाहारी पौधा) नार्थ कैरोलिना में हमारे घर से थोड़ी दूर बलुवा जलमयभूमि वाले एक छोटे क्षेत्र में सबसे पहले खोजा गया l इन पौधों को देखना दिलचस्प है क्योंकि वे मांसाहारी हैं l

वीनस फ्लाईट्रैप पौधे खिले फूल की तरह दिखाई देनेवाले रंगीन फंदों में मीठा-सुगंध वाला मकरंद छोड़ते हैं l उसमें कीट का प्रवेश, बाहरी किनारों के संवेदकों को सक्रीय कर देता है, और फंदा एक क्षण से भी कम समय में बंद हो जाता है जिससे शिकार पकड़ लिया जाता है l फंदा आगे और भी बंद होकर एंजाइम छोड़ता है और अपने शिकार को खा लेता है, जिससे पौधे को पोषण मिलता है जो बलुआ मिटटी नहीं देती है l

परमेश्वर का वचन एक और फंदे के विषय बताती है जो अचानक पकड़ लेती है l प्रेरित पौलुस ने अपने उत्तरजीवी तीमुथियुस को चिताया : “जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा और फंदे और बहुत सी व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा दी हैं l क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विशवास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है” (1 तीमुथियुस 6:9-10) l

धन और भौतिक वस्तुएं सुख की प्रतिज्ञा करते हैं, परन्तु जब वे हमारे जीवनों में प्रथम स्थान ले लेते हैं, हम खतरनाक भूमि पर होते हैं l हमारे लिए मसीह के द्वारा परमेश्वर की भलाइयों पर केन्द्रित होकर हम धन्यवादी, दीन हृदयों के साथ जीवन जी कर इस फंदे से बच सकते हैं – “पर संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है” (पद.6) l

हमें परमेश्वर की तरह इस संसार की अस्थायी वस्तुएं कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकती हैं l सच्ची, स्थायी संतोष केवल उसके साथ हमारे सम्बन्ध में ही पायी जाती है l

परमेश्वर के प्रति ईमानदार

मेरे तीन वर्ष के पोते का दिन खराब ढंग से शुरू हुआ l वह अपना पसंदीदा शर्ट ढूढ़ नहीं पा रहा था l जूते जो वह पहनना चाहता था बहुत ही भड़कीला था l वह अपनी दादी से परेशान और उनपर क्रोधित होने के बाद बैठकर रोने लगा l

“तुम इतना परेशान क्यों हो?” मैंने पूछा l हम थोड़े समय तक बाते करते रहे और उसके शांत होने के बाद, मैंने कोमलता से पूछा, “क्या तुम अपनी दादी के लिए अच्छे रहे हो?” वह विचारपूर्वक अपने जुते की ओर देखकर उत्तर दिया, “नहीं, मैं बुरा था, मुझे क्षमा करें l”

मेरा दिल उसके पक्ष में गया l अपने किये का इनकार करने की बजाए, वह ईमानदार था l आनेवाले क्षणों में हम यीशु से क्षमा और बेहतर करने के लिए सहायता मांगे l

यशायाह 1 में, परमेश्वर उन गलतियों के लिए अपने लोगों का सामना करता है जो उन्होंने की थीं l रिश्वत और अन्याय अदालतों में व्याप्त था, और अनाथों और विधवाओं से भौतिक लाभ उठाया जाता था l फिर भी परमेश्वर करुणा से प्रतियुत्तर देकर, यहूदा के लोगों से अपनी गलती मानकर उससे फिरने को कहता है : “आओ हम आपस में वादविवाद करें : तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे” (यशायाह 1:18) l

परमेश्वर हमसे चाहता है कि हम अपने पापों के विषय उसके सामने खुले हुए हों l वह प्यार से क्षमा के साथ ईमानदारी और पश्चाताप की ज़रूरत पूरा करता है : “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l इसलिए कि हमारा परमेश्वर करुनामय है, नयी शुरुआत हमारा इंतज़ार कर रही है!

धन की खोज

जॉन और मेरी अपनी भूसंपत्ति में अपने कुत्ते को घुमा रहे थे जब वे एक जंग लगे कनस्तर से जो हाल ही की बारिश के कारण धरती से थोड़ा बाहर दिखाई दे रहा था, ठोकर खाकर लड़खड़ा गए l उन्होंने उस कनस्तर को घर ले जाकर खोला, और उसमें उनको सौ साल से भी पुराने सोने के सिक्कों का गुप्त भण्डार मिला! दम्पति पुनः उस स्थान पर लौटकर सात और कनस्तरों को ढूँढ निकाला जिनमें कुल मिलकर 1,427 सिक्के थे l उसके बाद उन्होंने अपने धन को सुरक्षित रखने के लिए दूसरी जगह गाड़ दिया l

उन सिक्कों के भण्डार (मूल्य $10 लाख) को सैडल रिज होर्ड(Saddle Ridge Hoard) कहा जाता है, जो अमरीकी इतिहास में अपने प्रकार की सबसे बड़ी खोज है l यह कहानी असाधारण रूप से यीशु द्वारा बताए गए एक दृष्टांत की याद दिलाता है :  “स्वर्ग का राज्य खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाया और छिपा दिया, और मारे आनंद के जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उस खेत को मोल ले लिया” (मत्ती 13:44) l

गड़े हुए धन की कहानियाँ सदियों से कल्पनाओं को जीती हैं, यद्यपि इस प्रकार की खोज बिरले ही होती है l परन्तु यीशु एक ऐसे धन के विषय बताते हैं जो उन सब की पहुँच में है जो अपने पापों का अंगीकार करते हैं और उसको ग्रहण करते हैं और उसका अनुसरण करते हैं (यूहन्ना 1:12) l

हम उस धन का थाह कभी नहीं लगा सकते हैं l जब हम अपने पुराने जीवन को छोड़ते हैं और परमेश्वर और उसके उद्देश्यों का पीछा करते हैं, हम उसके मूल्य जो जान जाते हैं l परमेश्वर हमारी कल्पना से परे हमें “अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु मे हम पर है, आनेवाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन”(इफिसियों 2:7) – उसके पुत्र और पुत्री के रूप में नया जीवन, इस पृथ्वी पर नया उद्देश्य, और उसके साथ समझ से बाहर अनंतता का आनंद - देता है l

प्रार्थना में लगे रहें

केविन ने अपनी आँखों से आंसू पोछा जब वह अपनी पत्नी, कैरी के पढ़ने के लिए कागज़ का एक टुकड़ा लिए हुए था l वह जानता था कि कैरी और मैं अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करते थे कि वह यीशु में पुनः विश्वास करने लग जाए l “यह पर्ची उसकी मृत्यु के बाद मेरी माँ की बाइबल में मिली, और मुझे आशा है कि यह तुम्हें प्रोत्साहित करेगी,” उसने कहा l उस पर्ची के ऊपरी भाग पर ये शब्द थे, “मेरे पुत्र, केविन के लिए l” उन शब्दों के नीचे उसके उद्धार के लिए एक प्रार्थना थी l

केविन ने समझाया, “मैं इस पर्ची को अपनी निजी बाइबल में रखता हूँ l” मेरी माँ ने मेरे उद्धार के लिए पैंतिस वर्षों से अधिक तक प्रार्थना की l मैं परमेश्वर से बहुत दूर था, और अब मैं विश्वासी हूँ l” वह हमारी ओर एक टक देखते हुए अपने आंसुओं में से मुस्कुराया : “अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करने में हार न मानना – चाहे जितना समय लग जाए l”

उसके प्रोत्साहन के शब्दों ने मुझे यीशु द्वारा लूका के सुसमाचार में प्रार्थना के विषय बताई गयी कहानी की भूमिका पर सोचने को विवश किया l लूका इन शब्दों के साथ आरम्भ करता है, “फिर [यीशु ने] इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए, उनसे यह दृष्टांत कहा” (18:1) l  

इस कहानी में, यीशु एक “अधर्मी न्यायी” (पद.6) जो केवल इसलिए एक निवेदन को मान लेता है क्योंकि वह आगे को और परेशान नहीं होना चाहता है, की तुलना सिद्ध स्वर्गिक पिता से करता है जो गहराई से हमारी चिंता करता है और इच्छित है कि हम उसके पास आएँ l जब भी हम प्रार्थना करते हैं हम उत्साहित हों कि परमेश्वर सुनता है और हमारी प्रार्थनाओं का स्वागत करता है l

उधार ली हुई आशीष

दोपहर के भोजन के समय, मेरे मित्र जेफ़ ने प्रार्थना की : “पिता, आपको धन्यवाद आपने हमें सांस लेने के लिए अपनी हवा और खाने के लिए अपना भोजन दिया है l” जेफ़ हाल ही में नौकरी छूटने की कठिनाई से गुज़रा था, इसलिए परमेश्वर में उसका भरोसा और स्वीकृति कि सब कुछ उसका है ने मुझे पूरी तरह प्रेरित किया l मैंने खुद को विचार करते हुए पाया : क्या मैं ईमानदारी से समझता हूँ कि मेरे जीवन में सबसे बुनियादी, दैनिक वस्तुएं भी वास्तव में परमेश्वर की ही हैं, और वह मुझे केवल उनका उपयोग करने दे रहा है?

जब राजा दाऊद यरूशलेम में मंदिर बनाने के लिए इस्राएलियों से भेंट स्वीकार किया, उसने प्रार्थना की, “मैं क्या हूँ और मेरी प्रजा क्या है कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है l” उसके बाद उसने आगे उसमें जोड़ा, “सब तेरा ही है” (1 इतिहास 29:14, 16) l

बाइबल हमें बताती है कि “सम्पति प्राप्त करने की सामर्थ्य” और आजीविका भी उसी की ओर से मिलती है (व्यवस्थाविवरण 8:18) l यह समझ कि सब कुछ जो हमारा है उधार ही का है इस संसार की वस्तुओं पर हमारी पकड़ को ढीला करके खुले हाथों और हृदय से जीने में हमें प्रोत्साहित करता है-उदारतापूर्वक साझा करते हुए क्योंकि हम प्रतिदिन नेकियों के लिए बहुत ही धन्यवादित है l

परमेश्वर उदार दाता है-इतना प्रेमी कि उसने ”हम सब के लिए” अपना पुत्र भी दे दिया (रोमियों 8:32) l इसलिए कि हमें बहुत अधिक मिला है, काश हम भी सभी छोटी और बड़ी आशीष के लिए उसे ह्रदय को छू जाने वाला अपना धन्यवाद प्रेषित करें l

कोई तुलना नहीं

मेरी मित्र सू की टिप्पणी-उसके पति के साथ दोपहर के भोजन पर अनौपचारिक रूप से की गई-पर मैं जोर से हंसा और इसपर मैंने विचार भी किया। सोशल मीडिया एक उत्तम वस्तु भी हो सकती है, जो हमें वर्षों और मीलों दूर बैठे मित्रों के साथ सम्पर्क में रहने और उनके लिए प्रार्थना करने में सहायता कर सकती है। परन्तु यदि हम सावधान नहीं हैं, तो यह जीवन का एक अवास्तविक दृष्टिकोण भी बना सकती है। जब हम “बढ़िया बातों” को और बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया हुआ देखते हैं, तो हम दूसरों के जीवन को बिना किसी कठिनाई वाला होने का विचार करने की ओर पथभ्रष्ट हो सकते हैं, और हम इस बात पर आश्चर्य करने लगते हैं कि हम ने क्या गलत किया है। 

दूसरों के साथ अपनी तुलना करना नाखुश रहने का सबसे बढ़िया नुस्खा है। जब शिष्यों ने आपस में एक-दूसरे से तुलना की (देखें लूका 9:46; 22:24), यीशु ने इसे उसी समय समाप्त करवा दिया। अपने पुनरुत्थान के ठीक बाद यीशु ने पतरस को बताया कि वह अपने विश्वास के लिए किस प्रकार दुःख उठाएगा। तब पतरस यूहन्ना की ओर मुड़ा और पूछा, “प्रभु इसका क्या हाल होगा?” यीशु ने उत्तर दिया, “यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इससे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।” (यूहन्ना 21:21-22) ।

यीशु ने पतरस का ध्यान बेकार की तुलना की सबसे अच्छी दवा की ओर किया। जब हमारे मन परमेश्वर और उसने हमारे लिए क्या किया की ओर केन्द्रित होते हैं, तो हमारा अपने ऊपर से ध्यान हट जाता है और हम उसके पीछे चलने के लिए ललायित रहते हैं। संसार की प्रतिस्पर्धा के दबाव और तनाव के स्थान पर वह हमें अपनी प्रेममय उपस्थिति और शान्ति देता है। उसकी तुलना किसी के साथ नहीं की जा सकती।

प्रार्थना करना और बढ़ना

जब मेरे मित्र डेविड की पत्नी को अल्जाइमर हुआ तो यह उसके जीवन में जो बदलाव लाया इसने उसे चिड़चिड़ा बना दिया। उनकी देखभाल करने के लिए उसे सेवानिवृत्त होना पड़ा और जब वह रोग बढ़ा, तब उनकी पत्नी को और देखभाल की जरूरत पड़ी।

“मैं परमेश्वर से बहुत नाराज़ था” उसने मुझे बताया।  “परन्तु जितना मैंने इसके लिए प्रार्थना की, उतना ही उन्होंने मुझे मेरा हृदय दिखाया, कि मैं हमारे वैवाहिक सम्बन्ध में कितना स्वार्थी रहा था। ” जब उसने अंगीकार किया तो उसकी आँखों से आँसू बहने लगे, “वह दस वर्षों से बीमार है, परन्तु परमेश्वर ने मुझे चीज़ों को भिन्न रूप से देखने में सहायता की है। अब जो कुछ मैं करता हूँ वह उसके लिए मेरे प्रेम के कारण करता हूँ, मैं वह यीशु के लिए भी करता हूँ।  उसकी देखभाल करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी आशीष बन गया है।”

कई बार परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर हमें वह न देने के द्वारा देते हैं, जो हम चाहते हैं, परन्तु वह हमें बदलने की चुनौती देने के द्वारा उत्तर देते हैं। जब नबी योना क्रोधित था, क्योंकि परमेश्वर ने दुष्ट नगर नीनवे को विनाश से बचा लिया था, उतप्त सूर्य से उसे बचाने के लिए परमेश्वर ने एक पौधा उगाया (योना 4:6) । फिर उसने इसे सुखा दिया। जब योना ने शिकायत की, परमेश्वर ने उत्तर दिया, “तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है?” (पद 7-9) । योना ने बस अपने ऊपर ध्यान दिया, और इसी की जिद्द की। परन्तु परमेश्वर ने उसे दूसरों का ध्यान देने और उनपर दया करने की चुनौती दी।

कई बार परमेश्वर हमें सीखने और बढ़ने में हमारी सहायता करने के लिए हमारी प्रार्थनाओं का प्रयोग करता है। यही वह बदलाव है जिसका हम खुले दिल से स्वागत कर सकते हैं, क्योंकि वह अपने प्रेम के द्वारा हमें बदलना चाहता है।

अगाध प्रेम

जब वे पहली बार मिले, तो एडविन स्टैंटन ने यूएस के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से आलोचना की-यहाँ तक कि उन्हें “लम्बी बाँह वाला प्राणी” तक कह दिया। परन्तु लिंकन ने स्टैंटन की योग्यताओं की प्रशंसा की और उन्हें क्षमा कर देने को चुना, और उन्हें गृहयुद्ध के दौरान कैबिनेट के एक मुख्य पद पर नियुक्त किया। बाद में स्टैंटन लिंकन से एक मित्र के रूप में प्रेम में बढ़ते गए। यह स्टैंटन ही थे जो फोर्ड थिएटर में राष्ट्रपति को गोली लगने के बाद सारी रात उनके पलंग पर बैठे रहे थे और उनके देहान्त पर आंसुओं के साथ धीमे स्वर में बोले, “अब इन्हें पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।”

पुनर्मिलन एक खुबसूरत चीज़ है। प्रेरित पौलुस ने यीशु के अनुगामियों की ओर संकेत किया जब उसने लिखा, “एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है” (1 पतरस 4:8)। पतरस के शब्दों पर मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या वह यीशु का इन्कार करने (लूका 22:54-62) और यीशु के द्वारा उसे (और हमें) क्रूस के द्वारा क्षमा कर दिए जाने के बारे में सोच रहा था।

जिस अगाध प्रेम का प्रदर्शन यीशु ने क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा किया, वह हमें हमारे पापों के ऋण से मुक्त करता और परमेश्वर के साथ हमारे पुनर्मिलन का मार्ग खोलता है (कुलुस्सियों 1:19-20)। उसकी क्षमा हमें दूसरों को क्षमा करने के लिए सशक्त करती है, जब हम इस बात का एहसास करते हैं कि हम अपनी ही सामर्थ से क्षमा नहीं कर सकते और हम उससे सहायता मांगते हैं। जब हम दूसरों से प्रेम करते हैं क्योंकि हमारा उद्धारकर्ता उनसे प्रेम करता और क्षमा करता है, क्योंकि परमेश्वर हमें अपने भूतकाल को छोड़ देने और उसके साथ अनुग्रह के सुन्दर स्थानों में आगे बढ़ जाने के लिए सामर्थ प्रदान करता है।