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Articles by जेम्स बैंक्स

चेतावनी वृत्त (Alert Circles)

सावन्नाह(वन्यजीव आश्रय) में आराम करने के दौरान अफ़्रीकी मृग सहज रूप से चेतावनी वृत्त (alert circles) बनाती हैं l वे प्रत्येक जानवर के साथ कुछ अलग दिशा में बाहर की ओर मुँह करके समूहों में इकठ्ठा होते हैं l यह उन्हें क्षितिज को पूर्ण 360 डिग्री पर बारीकी से देखने (scan) और खतरों या अवसरों के करीब पहुँचने के बारे में संवाद करने में सक्षम बनाता है l

केवल अपने लिए बाहर देखने के बजाय, समूह के सदस्य एक दूसरे का ख्याल रखते हैं l यह यीशु के अनुयायियों के लिए परमेश्वर की बुद्धि भी है l बाइबल हमें प्रोत्साहित करती है, “और प्रेम और भले कामों में उसकाने के लिए हम एक दूसरे की चिंता किया करें, और एक दूसरे के साथ इकठ्ठा होना न छोड़ें” (इब्रानियों 10:24-25) l

इब्रानियों का लेखक बताता है कि मसीहियों को बिना किसी की सहायता के कोई काम नहीं करना चाहिए l एक साथ हम मजबूत हैं l हम “एक दूसरे को [प्रोत्साहित] कर सकते हैं” (पद.25), “जो [शांति] परमेश्वर हमें देता है [उन्हें वह] शांति दे [सकते हैं] जो किसी प्रकार के क्लेश में [हैं]” (2 कुरिन्थियों 1:4), और हमारा शत्रु शैतान जो “गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” के प्रयासों के प्रति एक दूसरे को सचेत रहने में सहायता कर सकते हैं (1 पतरस 5:8) l  

एक दूसरे के लिए हमारी देखभाल का लक्ष्य अस्तित्व से बहुत अधिक है l यह हमें यीशु की तरह बनाने के लिए है : इस संसार में परमेश्वर के प्रेमी और प्रभावशाली सेवक – वे लोग जो मिलकर उसके आनेवाले राज्य की आशा के लिए आत्मविश्वास से तत्पर रहते हैं l हम सब को प्रोत्साहन की ज़रूरत है, और परमेश्वर हमें एक दूसरे की सहायता करने में मदद करेंगे जब हम प्रेम में उसके निकट आते हैं l

सबसे सुरक्षित स्थान

जैसा कि तूफ़ान फ्लोरेंस विनाशकारी बल के साथ, उत्तरी कैरोलिना के विल्मिंगटंग पर असर डाल रहा था, मेरी बेटी ने अपना घर छोड़ने की तैयारी की l उसने अंतिम क्षण तक इंतज़ार किया था, इस उम्मीद से कि तूफ़ान दिशा बदल देगा l लेकिन अब वह जल्दी-जल्दी महत्वपूर्ण काग़ज़ों, चित्रों, और सामानों को अपने साथ ले जाने के लिए छाँट रही थी l “मुझे उम्मीद नहीं थी कि इसे छोड़ना इतना कठिन होगा,” उसने मुझे बाद में बताया, “लेकिन उस क्षण मुझे नहीं पता था कि जब मैं लौटूंगी तो वहाँ कुछ भी नहीं होगा l”

जीवन के तूफ़ान कई रूप में आते हैं : तूफ़ान, बवंडर, भूकंप, बाढ़, विवाह में या बच्चों के साथ अप्रत्याशित समस्याएँ, स्वास्थ्य या पैसे की अचानक हानि l जिनको हम इतना अधिक अहमियत देते हैं वे एक पल में बह जा सकते हैं l

तूफानों के बीच, पवित्र वचन हमें सबसे सुरक्षित स्थान की ओर इशारा करता है : “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और गढ़ है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएँ” (भजन 46:1-2) l  

भजन के लिखनेवाले एक ऐसे व्यक्ति के वंशज थे, जो पीढ़ियों पहले परमेश्वर की सेवा करते थे, लेकिन फिर उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया और भूकंप में मारे गए (गिनती 26:9-11) l उनके द्वारा साझा किया गया दृष्टिकोण परमेश्वर की महानता, करुणा और छुड़ानेवाला प्रेम है l

मुसीबतें आती हैं, लेकिन परमेश्वर उन सभी को पीछे छोड़ देता है l जो लोग उद्धारकर्ता के पास जाते हैं वे जान जाते हैं कि वह डिग नहीं सकता है l उनके शाश्वत प्रेम की भुजाओं में हमें अपनी शांति का स्थान मिलता है l  

प्रतीक्षा के लायक

टोक्यो के शिबुया ट्रेन स्टेशन के बाहर अकिता प्रजाति का कुत्ता हचिको की मूर्ति है l हचिको को याद किया जाता है क्योंकि वह अपने मालिक, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के प्रति असाधारण रूप से विश्वासयोग्य था जो उस स्टेशन से प्रतिदिन आना-जाना करते थे l कुत्ता प्रति सुबह उनको ट्रेन स्टेशन छोड़ने जाता था और प्रति दोपहर को ट्रेन आने पर वापस उन्हें लाने जाता था l

एक दिन प्रोफेसर ट्रेन स्टेशन नहीं लौटे; दुर्भाग्यवश, काम के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी l परन्तु हचिको अपना बाकी जीवन – नौ वर्ष से अधिक – दोपहर के ट्रेन के समय प्रतिदिन आता रहा l दिन प्रति दिन, मौसम का परवाह किये बिना, वह कुत्ता विश्वासयोग्यता से अपने मालिक के लौटने का इंतज़ार करता रहा l

पौलुस ने थिस्सलुनीकियों के “विशवास के काम,” “प्रेम का परिश्रम,” और प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता” (1 थिस्सलुनीकियों 1:3) का उल्लेख करते हुए उनकी विश्वासयोग्यता के लिए उनको सराहा l कठोर विरोध के बावजूद, उन्होंने “जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा [करने] , और उसके पुत्र के स्वर्ग पर से आने की बाट जोहते [रहने] के लिए अपने पुराने तौर-तरीकों को छोड़ा दिया (पद.9-10) l

ये आरंभिक विश्वासियों का उद्धारकर्ता में उनकी अत्यावश्यक आशा और उनके लिए उसका प्रेम उनको उनकी कठिनाइयों से परे प्रेरित करके उन्हें अपने विश्वास को उत्साहपूर्वक बांटने के लिए प्रेरित किया l वे इस बात से आश्वस्त थे कि यीशु के लिए जीवन जीने से बेहतर और कुछ भी नहीं है l यह जानना कितना अच्छा है कि वही पवित्र आत्मा जिसने उनको उत्साहित किया (पद.5) आज भी यीशु के आने की बाट जोहते हुए उसकी सेवा करने के लिए समर्थ करता है l

प्रेम की लम्बी पहुँच

मेरी ली सोलह फीट, 3,500 पौंड की एक बड़ी सफ़ेद शार्क है जिसे 2012 में समुद्र् विज्ञानियों ने अमरीकी पूर्वी तट से दूर चिन्हित किया था l उसके जल के ऊपर आने पर उपग्रह(sattlelite) उसके पीठ के ऊपर पंख से जुड़े ट्रांसमीटर को ढूँढ लेता है l अगले पांच वर्षों तक शोधकर्ताओं से लेकर लहरों पर बहने वालों(surfers) तक सभी ने तट के आगे पीछे मेरी ली की गतिविधियाँ ऑनलाइन देखी l उसे लगभग 40,000 मील तक देखा गया जबतक कि एक दिन संकेत बंद नहीं हो गया – शायद इसलिए कि ट्रांसमीटर की बैटरी ख़त्म हो गयी थी l

मानव ज्ञान और तकनीक केवल इतनी दूर तक ही पहुँच पाते हैं l मेरी ली का “पीछा करनेवालों” ने उसे खो दिया, परन्तु आप और हम अपने सम्पूर्ण जीवन के दौरान परमेश्वर की अभिज्ञता से बच नहीं सकते हैं l दाऊद की प्रार्थना थी, “मैं तेरी आत्मा से भागकर किधर जाऊँ? या तेरे सामने से किधर भागूँ? यदि मैं आकाश पर चढूँ, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिचौना अचोलोक में बिछाऊँ तो वहां भी तू है!” (भजन 139:7-8) l वह कृतज्ञता से पुकारता है, “यह ज्ञान मेरे लिए बहुत कठिन है” (पद.6) l

परमेश्वर हमसे प्रेम करने के कारण ही हमें जानने का चुनाव करता है l वह केवल हमारे जीवनों की निगरानी ही नहीं करता है परन्तु उनमें निवास करने और उन्हें नया बनाने के लिए पर्याप्त परवाह करता है l उसने यीशु के जीवन, मृत्यु, और पुनरुत्थान द्वारा हमारे निकट आया, कि हम बदले में उसे जाने, और अनंत के लिए उसे प्यार करें l हम परमेश्वर के प्रेम की पहुँच के बाहर कभी नहीं जा सकते हैं l

जानने के लिए बढ़ते जाना

“आप दूसरे के स्थान पर रखे जा रहे छात्र होंगे!” मैं सत्रह वर्ष का था और यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ कि मुझे जर्मनी में अध्ययन करने की स्वीकृति मिल गयी थी l परन्तु यह मेरे प्रस्थान से केवल तीन महीने पहले हुआ था, और मैंने जर्मन भाषा कभी नहीं पढ़ी थी l

उसके बाद के दिनों में मैंने खुद को अत्यधिक पढ़ने और सीखने का प्रयास करते हुए पाया – घंटों पढ़ाई करना और शब्दों को याद करने के लिए अपनी हथेली पर भी लिखना l

महीनों बाद मैं जर्मनी में एक कक्षा में था, हतोत्साहित क्योंकि मैं उस भाषा को अधिक नहीं जानता था l उस दिन एक शिक्षक ने मुझे एक बुद्धिमान सलाह दी l “किसी भाषा को सीखना रेत के एक टीले पर चढ़ने की तरह है l कभी-कभी आपको महसूस होगा कि आप आगे कहीं भी नहीं पहुँच रहे हैं l परन्तु आगे बढ़ते रहें और आप सफल हो जाएंगे l”

कभी-कभी मैं उस अंतर्दृष्टि पर चिंतन करता हूँ जब मैं विचार करता हूँ कि यीशु के शिष्य की तरह बढ़ने का अर्थ क्या होता है l प्रेरित पौलुस ने याद किया, “सब दशाओं में मैं ने तृप्त होना . . . सीखा है l” पौलुस को भी, व्यक्तिगत शांति रातोंरात नहीं मिली l पौलुस उसमें बढ़ता गया l पौलुस ने अपनी प्रगति का रहस्य साझा करता है : “जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें में सब कुछ कर सकता हूँ” (फिलिप्पियों 4:13) l

जीवन की अपनी चुनौतियां हैं l परन्तु जब हम उसकी ओर उन्मुख होते हैं जिसने “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33), हम केवल यह नहीं पाते हैं कि वह हमें पार लगाने में विश्वासयोग्य है परन्तु यह कि उसकी निकटता से बढ़कर कुछ नहीं है l वह हमें अपनी शांति देता है, भरोसा करने में सहायता करता है, और उसके साथ तय दूरी चलने में समर्थ बनाता है l

न बदलने वाला

अभी हाल ही में हम दोनों पति-पत्नी अपने कॉलेज पुनर्मिलन समारोह में उपस्थित होने लिए केलिफोर्निया के सैंटा बारबरा गए – वह शहर जहाँ हम पैतीस वर्ष पूर्व एक दूसरे से मिले थे और प्रेम करने लगे थे l हमनें उन अनेक स्थानों को घूमने की भी योजना बनायी जहाँ हम अपने युवावस्था के कुछ सर्वोत्तम समय बिताए थे l परन्तु जब हम उस स्थान को गए जहाँ हमारा पसंदीदा मेक्सीकन रेस्टोरेंट हुआ करता था, हमें भवन निर्माण सामग्री स्टोर मिला l रेस्टोरेंट और चार दसक तक समाज की उसकी सेवा के यादगार के रूप में ताडय लोह (wrought iron) का एक तख्ता दीवार पर लटका हुआ था l

मैं उजाड़ परन्तु अभी तक परिचित उस संकरे मार्ग को एक टक देखता रहा, जहां एक समय रंगीन मेज़ और चमकीले छाते प्रसन्नता बिखेरते थे l हमारे चारोंओर इतना कुछ बदल गया था! फिर भी इस बदलाव के मध्य, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता नहीं बदलती l दाऊद ने मर्मस्पर्शी ढंग से ध्यान दिया : “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है l परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है” (भजन 103:15-17) l दाऊद इस भजन का अंत इन शब्दों से करता है : “हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!” (पद.22) l

प्राचीन दार्शनिक हेराक्लितुस(philosopher Heraclitus) ने कहा, “आप उसी नदी में दो बार कदम नहीं रख सकते हैं l” हमारे चारोंओर जीवन हमेशा बदल रहा है, परन्तु परमेश्वर हमेशा एक सा है और अपनी प्रतिज्ञाएं पूरी करने के लिए हमेशा भरोसेमंद है! पीढ़ी से पीढ़ी तक उसकी विश्वासयोग्यता और प्रेम पर भरोसा किया जा सकता है l

बुद्धिमत्ता द्वारा चकित

“ऐसा महसूस होता है जैसे मैं जितना वृद्ध होता जाता हूँ, तुम उतना ही बुद्धिमान होते जाते हो l कभी-कभी जब मैं अपने बेटे से बात करता हूँ मैं अपने मुँह से आपके शब्द निकलते हुए सुनता हूँ!”

मेरी बेटी की स्पष्टवादिता ने मुझे हँसाया l मैंने अपने माता-पिता के विषय उसी प्रकार महसूस किया और अपने बच्चों के परवरिश में अक्सर खुद को उनके शब्दों का उपयोग करते हुए पाया l जिसे मैंने किसी समय मुर्खता मानकर “ख़ारिज कर दिया था मेरे विचार में वे उससे भी अधिक बुद्धिमान साबित हुए – बस मैं पहले उसे पहचान नहीं पाया था l

बाइबल सिखाती है कि “परमेश्वर की मुर्खता” निपुण मानवीय बुद्धिमत्ता “से ज्ञानवान है” (1 कुरिन्थियों 1:25) l “जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना, तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा कि” अत्यंत दुखी उद्धारकर्ता के “इस प्रचार की मुर्खता के द्वारा विश्वास करनेवालों को उद्धार दे” (पद.21) l

परमेश्वर के पास हमेशा हमें चकित करने के तरीके हैं l संसार द्वारा विजयी राजा की अपेक्षा करने के स्थान पर, परमेश्वर का पुत्र दुखी सेवक के रूप में आकर क्रूस पर विनम्र मृत्यु सही – इससे पहले कि वह सर्वोत्कृष्ट महिमा में जी उठे l

परमेश्वर की बुद्धिमत्ता में, दीनता का महत्त्व घमण्ड से ऊपर है और करुणा और दया में होकर जिसके हम योग्य नहीं थे प्रेम अपना महत्त्व दर्शाता है l क्रूस के द्वारा, हमारा अजेय उद्धारकर्ता सर्वश्रेष्ठ बलिदान बन गया – जिससे उसमें विश्वास करनेवाले सभी का “पूरा पूरा उद्धार” (इब्रानियों 7:25) कर सके!

छिपा हुआ यीशु

हाल ही में मेरा बेटा जेफ़ एक “बेघर मिथ्याभास(homeless simulation)” में भाग लिया l वह अपने शहर के सड़कों पर, खुले आसमान के नीचे जमाव बिंदु से कम तापमान में तीन दिन और दो रात गुज़ारे l वह भोजन, पैसा, या आश्रय के बिना अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए अनजान लोगों की दया पर आश्रित रहा l उनमें से एक दिन उसका भोजन केवल एक सैंडविच था, जो एक व्यक्ति उसे लाकर दिया था जिसने उसे एक फ़ास्ट-फ़ूड रेस्टोरेंट में बासी भोजन मांगते हुए सुना था l  

जेफ़ ने बाद में मुझसे कहा कि यह सबसे कठिन काम था जो उसने कभी किया हो, फिर भी इस बात ने दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया था l उसने अपने मिथ्याभास(simulation) के बाद एक दिन बेघर लोगों को खोजकर सरल तरीकों से उनकी सहायता की जिन्होनें उसके सड़क पर रहते समय उसपर दया दिखाई थी l उनको यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वह बेघर नहीं था और उन्होंने उनकी नज़रों से जीवन को देखने के लिए उसको धन्यवाद दिये l

मेरे बेटे का अनुभव यीशु के शब्दों की याद दिलाता है : “मैं नंगा था, और तुमने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, और तुमने मेरी सुधि ली, मैं बंदीगृह में था, और तुम मुझसे मिलने आए . . . तुमने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया” (मत्ती 25:36, 40) l चाहे हम प्रोत्साहन का एक शब्द बोलें या एक थैला किराने का सामान दें, परमेश्वर हमें प्रेम से दूसरों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए बुलाता है l दूसरों के प्रति हमारी दयालुता उसके प्रति दयालुता है l

फंदे से बाहर

द वीनस फ्लाईट्रैप(एक मांसाहारी पौधा) नार्थ कैरोलिना में हमारे घर से थोड़ी दूर बलुवा जलमयभूमि वाले एक छोटे क्षेत्र में सबसे पहले खोजा गया l इन पौधों को देखना दिलचस्प है क्योंकि वे मांसाहारी हैं l

वीनस फ्लाईट्रैप पौधे खिले फूल की तरह दिखाई देनेवाले रंगीन फंदों में मीठा-सुगंध वाला मकरंद छोड़ते हैं l उसमें कीट का प्रवेश, बाहरी किनारों के संवेदकों को सक्रीय कर देता है, और फंदा एक क्षण से भी कम समय में बंद हो जाता है जिससे शिकार पकड़ लिया जाता है l फंदा आगे और भी बंद होकर एंजाइम छोड़ता है और अपने शिकार को खा लेता है, जिससे पौधे को पोषण मिलता है जो बलुआ मिटटी नहीं देती है l

परमेश्वर का वचन एक और फंदे के विषय बताती है जो अचानक पकड़ लेती है l प्रेरित पौलुस ने अपने उत्तरजीवी तीमुथियुस को चिताया : “जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा और फंदे और बहुत सी व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा दी हैं l क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए बहुतों ने विशवास से भटककर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है” (1 तीमुथियुस 6:9-10) l

धन और भौतिक वस्तुएं सुख की प्रतिज्ञा करते हैं, परन्तु जब वे हमारे जीवनों में प्रथम स्थान ले लेते हैं, हम खतरनाक भूमि पर होते हैं l हमारे लिए मसीह के द्वारा परमेश्वर की भलाइयों पर केन्द्रित होकर हम धन्यवादी, दीन हृदयों के साथ जीवन जी कर इस फंदे से बच सकते हैं – “पर संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है” (पद.6) l

हमें परमेश्वर की तरह इस संसार की अस्थायी वस्तुएं कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकती हैं l सच्ची, स्थायी संतोष केवल उसके साथ हमारे सम्बन्ध में ही पायी जाती है l