प्रोत्साहन का उपहार
“तुम्हारी मधुमक्खियाँ जानेवाली हैं!” मेरी पत्नी ने दरवाज़े के अंदर अपना सिर घुसाया और मुझे ऐसी खबर दी जिसे कोई भी मधुमक्खी पालक सुनना नहीं चाहता। मैं बाहर भागा, और देखा कि हज़ारों मधुमक्खियाँ छत्ते से उड़कर एक ऊँचे चीड़ के पेड़ की चोटी पर जा रही हैं, और फिर कभी वापस नहीं लौटीं। मैं उन संकेतों को पढ़ने में थोड़ा पीछे रह गया था कि मधुमक्खियाँ झुण्ड बनाकर छत्ता छोड़ने वाली थीं ; एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से चल रहे तूफ़ानों ने मेरे निरीक्षण में बाधा डाली थी। जिस सुबह तूफ़ान खत्म हुआ, मधुमक्खियाँ चली गईं। छत्ता नया और स्वस्थ था, और मधुमक्खियाँ वास्तव में एक नई शुरुआत करने के लिए छत्ते को विभाजित कर रही थीं। “अपने आप पर कठोर मत बनो,” एक अनुभवी मधुमक्खी पालक ने मेरी निराशा को देखकर खुशी से मुझसे कहा। “यह किसी के साथ भी हो सकता है!”
प्रोत्साहन एक सुखद उपहार है l जब दाऊद निराश हुआ, क्योंकि शाऊल उसको मारने हेतु उसका पीछा कर रहा था, तब शाऊल का पुत्र योनातान ने दाऊद को उत्साहित किया l योनातान ने कहा, "उस ने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है।" ” (1 शमुएल 23:17) l
ये आश्चर्यजनक रूप से निःस्वार्थ यह सिंहासन पर बैठने वाले अगले व्यक्ति द्वारा कहा गया था । यह संभव है कि योनातान ने पहचाना कि परमेश्वर दाऊद के साथ था, इसलिए उसने विश्वास के विनम्र हृदय से बात की l
हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जिन्हें प्रोत्साहन की ज़रूरत है। परमेश्वर हमें उनकी मदद करने में मदद करेगा जब हम उसके सामने खुद को नम्र करेंगे और उससे हमारे ज़रिए उनसे प्यार करने के लिए कहेंगे।
—जेम्स बैंक्स
परिणामों से परे आशा
क्या आपने कभी गुस्से में कुछ ऐसा किया है जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़ा हो? जब मेरा बेटा ड्रग्स की लत से जूझ रहा था, तो मैंने कुछ कठोर बातें कही उसकी एसी चीज़े चुनने की प्रतिक्रिया में। मेरे क्रोध ने उसे और अधिक हतोत्साहित कर दिया। लेकिन आख़िरकार उसका सामना ऐसे विश्वासियों से हुआ जिन्होंने उससे जीवन और आशा के बारे में बात की, और समय के साथ वह आज़ाद हुआ।
यहां तक कि मूसा जैसे विश्वास में अनुकरणीय व्यक्ति ने भी कुछ ऐसा किया जिसके लिए उसे बाद में पछताना पड़ा। जब इस्राएल के लोग मरुभूमि में थे और पानी की कमी थी, तब उन्होंने कटुतापूर्वक शिकायत की। इसलिए परमेश्वर ने मूसा और हारून को विशिष्ट निर्देश दिए: "मण्डली को इकट्ठा करके उनके देखते उस चट्टान से बातें कर, तब वह अपना जल देगी" (गिनती 20:8)। लेकिन मूसा ने क्रोध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, परमेश्वर के बजाय खुद को और हारून को आश्चर्यकर्म का श्रेय दिया: "सुनो, तुम विद्रोहियों, क्या हम को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा?" (v.10). फिर उसने सीधे तौर पर परमेश्वर की अवज्ञा की और "अपना हाथ उठाकर लाठी चट्टान पर दो बार मारी" (पद 11)।
हालाँकि पानी फूट निकला, फिर भी दुखद परिणाम हुए। न तो मूसा और न ही हारून को उस देश में प्रवेश करने की अनुमति थी जिसका वादा परमेश्वर ने अपने लोगों से किया था। लेकिन वह फिर भी दयालु था, उसने मूसा को इसे दूर से देखने की अनुमति दी (27:12-13)।
मूसा की तरह, परमेश्वर अभी भी दयापूर्वक हमारी अनाज्ञाकारिता के रेगिस्तान में हमसे मिलता है। यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा से, वह हमें क्षमा और आशा प्रदान करता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कहाँ हैं या हमने क्या किया है, अगर हम उसकी ओर मुड़ते हैं, तो वह हमें जीवन में ले जाता है।
परमेश्वर का बगीचा
जीवन की सुंदरता और संक्षिप्तता (छोटापन) की याद दिलाने वाला एक पौधा मेरे सामने के दरवाजे के बाहर उगता है। पिछले वसंत में, मेरी पत्नी ने मूनफ्लावर बेलें लगाईं, उनके बड़े और गोल सफेद फूलों के खिलने के कारण उनका नाम मूनफ्लॉवर दिया गया है जो एक पूरे चांद जैसा दिखाई देता है। प्रत्येक फूल एक रात के लिए खिलता है और फिर अगली सुबह तेज धूप में मुरझा जाता है, फिर कभी नहीं खिलता। लेकिन पौधा हरा भरा रहता है, और हर शाम यह ताजे फूलों से भर जाता है। हर दिन आते जाते हम इसे देखना पसंद करते हैं और सोचते हैं कि जब हम लौटेंगे तो कौन सी नई सुंदरता हमारा स्वागत करेगी।
ये नाजुक फूल पवित्रशास्त्र से एक महत्वपूर्ण सत्य को याद दिलाते हैं। प्रेरित पतरस ने भविष्यवक्ता यशायाह के शब्दों को याद करते हुए लिखा, “क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। क्योंकि हर एक प्राणी घास की नाईं है, और उस की सारी शोभा घास के फूल की नाईं है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।" (1 पतरस 1:23–24)। लेकिन वह हमें विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर अपने वादों को हमेशा के लिए पूरा करता है! (पद 25)। ।
एक बगीचे में फूलों की तरह, अनंत काल की तुलना में पृथ्वी पर हमारा जीवन संक्षिप्त (छोटा) है। लेकिन परमेश्वर ने हमारी संक्षिप्तता में सुंदरता को बताया है। यीशु के सुसमाचार के द्वारा, हम परमेश्वर के साथ एक नई शुरुआत करते हैं और उनकी प्रेमपूर्ण उपस्थिति में असीमित जीवन के उसके वादे पर भरोसा करते हैं। जब पृथ्वी के सूर्य और चंद्रमा केवल एक यादगार (स्मृति) होंगे, तब भी हम उसकी स्तुति करेंगे।
आशा जो थामे रखती है
"मुझे पता है कि पिताजी घर आ रहे हैं क्योंकि उन्होंने मुझे फूल भेजे हैं।" ये मेरी सात साल की बहन के शब्द थे जब युद्ध के दौरान पिताजी के बारे में कुछ भी पता नहीं चला। इससे पहले कि पिताजी अपने मिशन के लिए रवाना होते, उन्होंने मेरी बहन के जन्मदिन के लिए पहले से फूलों का ऑर्डर दिया, और जब वे लापता थे तब फूल आ गए। लेकिन वह सही थी: पिताजी घर लौट आए - एक कठिन युद्ध की स्थिति के बाद। और दशकों बाद, वह अभी भी उस फूलदान को संभाल कर रखती है जिसमें फूल रखे थे, यह याद दिलाने के लिए कि हमेशा उम्मीद बनाए रखें।
कभी-कभी टूटी हुई, पापी दुनिया में उम्मीद बनाए रखना आसान नहीं होता। पिताजी हमेशा घर नहीं आते, और बच्चों की इच्छाएँ कभी-कभी अधूरी रह जाती हैं। लेकिन परमेश्वर सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद देते हैं।
युद्ध के एक और समय में, भविष्यवक्ता हबक्कूक ने यहूदा पर बेबीलोन के आक्रमण की भविष्यवाणी की थी (हबक्कूक 1:6; 2 राजा 24 देखें) लेकिन फिर भी पुष्टि की कि परमेश्वर हमेशा अच्छा है (हबक्कूक 1:12-13)। अतीत में अपने लोगों के प्रति परमेश्वर की दयालुता को याद करते हुए, हबक्कूक ने घोषणा की: “"क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़- बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।।" (3:17-18)।
कुछ टीकाकारों का मानना है कि हबक्कूक के नाम का अर्थ "चिपकना" है। हम परीक्षाओं में भी अपनी परम आशा और आनन्द के रूप में परमेश्वर से लिपटे रह सकते हैं क्योंकि वह हमें थामे रहता है और कभी जाने नहीं देगा।
पूंछ और जीभ हिलाना
अखबार ने घोषणा की कि पेप ने गवर्नर की पत्नी की बिल्ली की जान ली है—लेकिन उसने ऐसा नहीं किया था । एक बात जिसका वह दोषी हो सकता था वह थी गवर्नर की हवेली में सोफा चबाने का।
पेप 1920 के दशक में, पेंसिल्वेनिया के गवर्नर गिफोर्ड पिंचोट का एक उग्र युवा लैब्राडोर रिट्रीवर (एक प्रकार का शिकारी कुत्ता) कुत्ता था। कुत्ते को वास्तव में ईस्टर्न स्टेट पेनिटेंटरी भेजा गया था, जहां कैदी की पहचान संख्या के साथ उसकी तस्वीर ली गई थी। जब एक अखबार के रिपोर्टर ने इसके बारे में सुना तो उसने बिल्ली की कहानी बनाई। क्योंकि उनकी रिपोर्ट अखबार में छपी थी, कई लोगों का मानना था कि पेप वास्तव में एक बिल्ली का हत्यारा था।
इस्राएल का राजा सुलैमान अच्छी तरह जानता था कि गलत जानकारी की ताकत क्या होती है। उसने लिखा, “कानाफूसी करनेवाले के वचन स्वादिष्ट भोजन के समान लगते हैं; वे पेट में पाच जाते हैं” (नीतिवचन 18:8) । कभी-कभी हमारा पतित मानव स्वभाव हमें दूसरों के बारे में उन बातों पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है जो सत्य नहीं हैं। फिर भी जब दूसरे हमारे बारे में झूठ पर विश्वास करते हैं, तब भी परमेश्वर हमें भलाई के लिए उपयोग कर सकता है l वास्तव में, गवर्नर ने पेप को जेल भेज दिया ताकि वह वहां के कैदियों का दोस्त बन सके—और उसने कई वर्षों तक अग्रणी चिकित्सा कुत्ते के रूप में सेवा की।
दूसरे क्या कहते या सोचते हैं, इसकी परवाह किए बिना हमारे जीवन के लिए परमेश्वर के उद्देश्य अभी भी कायम हैं। जब दूसरे हमारे बारे में कानाफूसी करते हैं, तो याद रखें कि उसके विचार—और हमारे लिए उसका प्रेम—ही है जो अत्यधिक मायने रखता है।
स्तुति करना याद रखे
जब हमारी कलीसिया ने हमारी पहली इमारत का निर्माण किया, तो लोगों ने इमारत का आंतरिक भाग पूरा होने से पहले, दीवार के स्टड(stud) (एक सीधा सहायक फ्रेम जो मुख्य दीवार को सहारा देता है) और कंक्रीट के फर्श पर आभारी अनुस्मारक लिखे। स्टड से शुष्क दीवार को वापस खींच लें और आप उन्हें वहां पाएंगे। पवित्रशास्त्र से एक के बाद एक पद, स्तुति की प्रार्थनाओं के साथ लिखे गए हैं जैसे “आप कितने भले हैं!” हमने उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक साक्षी के रूप में छोड़ दिया कि हमारी चुनौतियों के बावजूद, परमेश्वर दयालु बना रहा और हमारी देखभाल करता रहा l
हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर ने हमारे लिए क्या किया है और दूसरों को इसके बारे में बताना चाहिए। यशायाह ने इसका उदाहरण दिया जब उसने लिखा, “जितना उपकार यहोवा ने हम लोगों का किया अर्थात् इस्राएल के घराने पर दया और अत्यन्त करूणा करके उस ने हम से जितनी भलाई, कि उस सब के अनुसार मैं यहोवा के करूणामय कामों का वर्णन और उसका गुणानुवाद करूंगा।" (यशायाह 63:7)। बाद में, भविष्यवक्ता पूरे इतिहास में अपने लोगों के लिए परमेश्वर की करुणा को भी याद करता है, यहाँ तक कि यह भी बताता है कि कैसे “उनके सारे संकट में उस ने भी कष्ट उठाया” (पद.9) । परन्तु यदि आप उस अध्याय को पढ़ते रहेंगे, तो आप देखेंगे कि इस्राएल फिर से संकट के समय में है, और भविष्यवक्ता परमेश्वर के हस्तक्षेप (बीच बिचाव) के लिए तरस रहा है।
परमेश्वर की पिछली दयालुता को याद करना कठिन समय में मदद करता है I चुनौतीपूर्ण मौसम आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन उसका विश्वासयोग्य चरित्र कभी नहीं बदलता। जब हम उसके द्वारा किए गए सभी कामों की याद में आभारी हृदय से उसकी ओर मुड़ते हैं, तो हमें नए सिरे से पता चलता है कि वह हमेशा हमारी प्रशंसा के योग्य है।
भाई शाऊल
हे प्रभु, कृपया मुझे कहीं भी भेज दें लेकिन वहां नहीं l” एक वर्ष के लिए एक विदेशी विनिमय छात्र (foreign exchange student) के रूप में आरम्भ करने से पहले एक किशोर के रूप में यही मेरी प्रार्थना थी l मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जाने वाला था, लेकिन मुझे पता था कि मैं कहाँ नहीं जाना चाहता था l मैं उस देश की भाषा नहीं बोलता था, और मेरा मन उसके रीति-रिवाजों और लोगों के प्रति पूर्वाग्रहों(prejudices) से भरा हुआ था l इसलिए मैंने ईश्वर से मुझे कहीं और भेजने के लिए कहा l
लेकिन ईश्वर ने अपनी असीम बुद्धि में मुझे ठीक वहीँ भेजा जहाँ मैंने नहीं जाने के लिए कहा था l मुझे बहुत ख़ुशी है कि उसने ऐसा किया! चालीस साल बाद भी, उस देश में मेरे प्रिय मित्र हैं l जब मेरी शादी हुयी, तो मेरा बेस्ट मैन(best man) स्टीफन वहां से आया l जब उसकी शादी हुयी, तो मैं उपकार लौटाने के लिए वहां हवाई जहाज़ से गया l और हम जल्द ही एक और यात्रा की योजना बना रहे हैं l
सुन्दर चीजें घटित होती हैं जब परमेश्वर हृदय परिवर्तन का कारण बनता है! इस तरह के परिवर्तन को केवल दो शब्दों द्वारा चित्रित किया गया है : “भाई शाऊल” (प्रेरितों 9:17)
वे शब्द एक विश्वासी, हनन्याह के थे, जिसे परमेश्वर ने शाऊल के ह्रदय परिवर्तन के तुरंत बाद उसकी दृष्टि ठीक करने के लिए बुलाया था (पद.10-12) शाऊल के हिंसक अतीत के कारण पहले तो हनन्याह ने विरोध किया, और प्रार्थना की : “मैं ने इस मनुष्य के विषय में बहुतों से सुना है कि इसने . . . तेरे पवित्र लोगों के साथ बड़ी-बड़ी बुराइयाँ की हैं” (पद.13)
लेकिन हनन्याह आज्ञाकारी था और चला गया l और क्योंकि उसका ह्रदय परिवर्तन हो चुका था, हनन्याह ने विश्वास में एक नया भाई प्राप्त किया, शाऊल पौलुस के रूप में जाना जाने लगा, और यीशु का सुसमाचार सामर्थ्य के साथ फैलता गयाl सच्चा परिवर्तन हमेशा उसके द्वारा संभव है!
परमेश्वर के सामने चुप रहना
एक जीवित व्यक्ति की पहली तस्वीर 1838 में लुई डागुएरे द्वारा ली गयी थी l तस्वीर में दोपहर के मध्य पेरिस में अन्यथा खाली सड़क पर एक आकृति को दर्शाया गया है l लेकिन इसके बारे में एक स्पष्ट रहस्य है; सड़क और फुटपाथों पर दिन के उस समय गाड़ियों और पैदल चलने वालों के यातायात से हलचल होनी चाहिए थी, फिर भी कोई दिखाई नहीं देता है l
वह आदमी अकेला नहीं था l लोग और घोड़े भी बुलवर्ड ड्यू टेम्पल(Boulevard du Temple) में मौजूद थे, वह लोकप्रिय क्षेत्र जहाँ यह तस्वीर ली गयी थी l वे तस्वीर में दिखे ही नहीं l तस्वीर को तैयार करने के लिए संसर्ग समय(exposure)(जिसे डागरेरोटाइप के रूप में जाना जाता है) को एक छवि लेने में सात मिनट लग गए, जो उस समय के दौरान स्थिर/अचल रहना था l ऐसा प्रतीत होता है कि फूटपाथ पर मौजूद व्यक्ति अकेला व्यक्ति था जिसकी फोटो खिंची गयी थी क्योकि वह ही स्थिर खड़ा था—वह अपने जूते पोलिश करा रहा था l
कभी-कभी स्थिरता वह कर देती है जो गति और प्रयास नहीं कर सकते l भजन 46:10 में परमेश्वर अपने लोगों से कहता है, “चुप हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ l” यहाँ तक कि जब राष्ट्र “झल्ला उठते हैं” (पद.6) और “पृथ्वी” चाहे उलट जाए (पद.2), तब भी जो चुपचाप उस पर भरोसा करते हैं, वे उसमें “अति सहज से मिलनेवाला सहायक” पाएँगे (पद.1)
इब्रानी भाषा की क्रिया(verb) “चुप रहो” का अनुवाद “प्रयास करना बंद करो” भी किया जा सकता है l जब हम अपने सीमित प्रयासों पर निर्भर रहने के बजाय परमेश्वर में विश्राम करते हैं, तो हम पाते हैं कि वह हमारा अजेय “शरणस्थान और बल” हैI (पद.1)
परमेश्वर की सुनना
जब मैं कॉलेज जाने के लिए गाड़ी चला रहा था और फिर वापसी में घर लौट रहा था, तो रेगिस्तान में हमारे घर की ओर जाने वाली सड़क कष्टदायी रूप से बेहद निष्क्रय और सुस्त लग रही थी l क्योकि यह सड़क लम्बी और सीधी थी, मैंने पाया कि मैं एक से अधिक बार तेज़ गति से गाड़ी चला रहा था l सबसे पहले, मुझे राजमार्ग गश्ती(highway patrol) से चेतावनी दी गयी l उस समय मुझे जुर्माना देना पड़ा l फिर मुझे उसी स्थान पर दूसरी बार तलब किया गया l
सुनने से इनकार करने के दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम हो सकते हैं l इसका एक दुखद उदाहरण एक अच्छे और विश्वासयोग्य राजा योशिय्याह के जीवन से है l जब मिस्र का राजा नको बाबुल के विरुद्ध युद्ध में अश्शुर की सहायता करने को यहूदा के देश में होकर गया, तब योशिय्याह उसका मुकाबला करने को निकला l नको ने दूतों से योशिय्याह को यह कहला भेजा, “परमेश्वर ने मुझे फुर्ती करने को कहा है l इसलिए परमेश्वर जो मेरे संग है, उससे अलग रह” (2 इतहास 35:21)परमेश्वर ने वास्तव में नको को भेजा था, परन्तु योशिय्याह ने “नको के उन वचनों को नहीं माना जो उसने परमेश्वर की ओर से कहे थे, और मगिद्दो की तराई में उससे युद्ध करने को गया” (पद.22) युद्ध में योशिय्याह घातक रूप से घायल हो गया, “और यहूदियों और यरूशलेमियों ने . . . उसके लिए विलाप कियाI” (पद.24)
योशिय्याह, जो परमेश्वर से प्रेम करता था, उसने पाया कि उसकी परमेश्वर की बात सुनने या दूसरों के द्वारा उसकी बुद्धि को सुनने के लिए समय निकाले बिना अपने तरीके पर ज़ोर देना कभी भी अच्छा नहीं होता l ईश्वर हमें वह विनम्रता प्रदान करे जिसकी हमें हमेशा अपने आप को जांचने और उसकी बुद्धि को अपने हृदय में धारण करने की ज़रूरत है l