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Articles by केनेथ पीटरसन

क्षमा और भूलना

 

जिल प्राइस हाइपरथाइमेसिया की स्थिति के साथ पैदा हुई थी: अतीत में उसके साथ हुई हर घटना को असाधारण विस्तार से याद रखने की क्षमता। वह अपने दिमाग में अपने जीवनकाल में हुई किसी भी घटना की सटीक घटना को दोहरा सकती है।

टीवी शो अनफॉरगेटेबल, हाइपरथाइमेसिया से पीड़ित एक महिला पुलिस अधिकारी पर आधारित था - जो उसे सामान्य ज्ञान के खेल और अपराधों को सुलझाने में बहुत मदद करता है। हालाँकि, जिल प्राइस के लिए यह स्थिति इतनी मज़ेदार नहीं है। वह जीवन के उन पलों को नहीं भूल सकती जब उसकी आलोचना की गई थी, नुकसान का अनुभव किया था, या उसने कुछ ऐसा किया था जिसका उसे बहुत पछतावा था। वह अपने दिमाग में उन दृश्यों को बार-बार दोहराती है। 

हमारा परमेश्वर सर्वज्ञानी है (संभवतः एक प्रकार का ईश्वरीय हाइपरथिमेसिया) : बाइबल हमें बताती है कि उसके समझ की कोई सीमा नहीं है। और फिर भी हम यशायाह में एक अत्यंत आश्वस्त करने वाली बात पाते हैं : "मैं वही हूँ जो . . . तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ और तेरे पापों को स्मरण न करूँगा। इब्रानियों की पुस्तक इसको पुष्ट करता है: “हम यीशु मसीह . . . के द्वारा पवित्र किए गए हैं . . . [और हमारे] . . . पापों को और . . . अधर्म के कामों को [परमेश्वर] फिर कभी स्मरण न [करेगा]” (इब्रानियों 10:10, 17)।  

जब हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने स्वीकार करते हैं, हम उन्हें अपने मन में बार-बार दोहराना बंद कर सकते हैं। हमें उन्हें भूलना चाहिए, जैसा वह करता है: “अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो, न प्राचीनकाल की बातों पर मन लगाओ” (यशायाह 43:18) l अपने अपार प्रेम में, परमेश्वर हमारे विरुद्ध हमारे पापों को याद नहीं रखना चाहता। आइए इसे याद रखें।

—केनेथ पीटरसन

राख के बदले सुंदरता

कोलोराडो के इतिहास की सबसे विनाशकारी आग, मार्शल फायर के बाद, एक सेवकाई  ने परिवारों को राख में से मूल्यवान वस्तुओं की खोज करने में मदद करने की पेशकश की। परिवार के सदस्यों ने उन बहुमूल्य वस्तुओं का उल्लेख किया जिनकी उन्हें बहुत कम आशा थी कि वे अभी भी बची  हैं। एक आदमी ने बहुत प्यार से अपनी शादी की अंगूठी के बारे बताया। उसने इसे ऊपर के शयनकक्ष में अपने ड्रेसर पर रखा था। घर अब नष्ट हो चुका है, इसकी सामग्री जलकर या पिघलकर तहखाने के स्तर पर मलबे की एक परत में बदल गई है। खोजकर्ताओं ने उसी कोने में अंगूठी की तलाश की, जहां शयनकक्ष था - लेकिन सफलता नहीं मिली। 
भविष्यवक्ता यशायाह ने शोकपूर्वक यरूशलेम के निकट आ रहे विनाश के बारे में लिखा, जिसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया जायेगा। इसी तरह, कई बार हमें लगता है कि हमने जो जीवन बनाया था वह राख में तब्दील हो गया है। हमें लगता है कि हमारे पास भावनात्मक और आत्मिक रूप से कुछ भी नहीं बचा है। लेकिन यशायाह यह आशा प्रदान करता है कि उसे: “परमेश्वर ने खेदित मन के लोगों को शांति देने के लिए भेजा है” (यशायाह 61:1-2)। परमेश्वर हमारी त्रासदी को महिमा में बदल देते हैं और वादा करते है कि: "[वे] उनकी राख के बदले सुंदर पगड़ी बाँध देंगे" (पद- 3)। वे "बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे, पूर्वकाल से पड़े हुए खण्डहरों में वे फिर घर बनाएँगे" (पद- 4)। 
उस मार्शल आग वाले स्थान पर, एक महिला ने विपरीत दिशा में राख में ढूंढना शुरू किया। और वहां, अभी भी डब्बे में पड़ी, अपने पति की शादी की अंगूठी को ढूँढ निकाला। आपकी निराशा में, परमेश्वर आपकी राख में पहुँचते हैं और एक सचमुच कीमती चीज़ को बाहर निकालते हैं: वह है आप! 
-केनेथ पीटरसन 

भीतर से सर्वोत्तम रचना

लेखक आर्थर सी. ब्रुक्स अपनी किताब द अटलांटिक में, ताइवान में नेशनल पैलेस संग्रहालय की अपनी यात्रा के बारे में बताते हैं, जिसमें दुनिया में चीनी कला का सबसे बड़ा संग्रह है। संग्रहालय के गाइड ने पूछा, "जब मैं आपसे किसी कला के काम की कल्पना करने के लिए कहता हूं जो अभी शुरू नहीं हुआ है तो आप क्या सोचते हैं?" ब्रुक्स ने कहा, "मुझे लगता है, एक खाली कैनवास।" गाइड ने उत्तर दिया, "इसे देखने का एक और भी तरीका है: कला पहले से ही मौजूद है, और कलाकारों का काम बस इसे प्रकट करना होता है।" 
इफिसियों 2:10 में, हस्तकला शब्द, जिसे कभी-कभी "कारीगरी" या " सर्वोत्तम रचना" के रूप में अनुवादित किया जाता है, ग्रीक शब्द पोइमा से है, जिससे हमें कविता (poetry) शब्द प्राप्त होता हैं। परमेश्वर ने हमें कला की कृतियों, जीवित कविताओं के रूप में बनाया है। हालाँकि, हमारी कला धूमिल हो गई है: "जहाँ तक तुम्हारी बात है, तुम अपने अपराधों और पापों में मरे हुए थे" (पद 1)। संग्रहालय के गाइड के शब्दों को संक्षेप में कहें तो, "[हमारी] कला पहले से ही मौजूद है, और इसे प्रकट करना दिव्य कलाकार का काम है।" वास्तव में, परमेश्वर हमें पुनर्स्थापित कर रहा हैं, हम उसकी सर्वोत्तम रचना है: "परमेश्वर ने, जो दया का धनी हैं, हमें जिलाया है" (पद- 4-5)। 
जैसे-जैसे हम चुनौतियों और कठिनाइयों से गुजरते हैं, हमें यह जानकर आराम मिल सकता है कि दिव्य कलाकार काम कर रहा है: "क्योंकि परमेश्वर ही है जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है" (फिलिप्पियों 2:13)। जान लें कि परमेश्वर अपनी सर्वोत्तम रचना को प्रकट करने के लिए आप में काम कर रहे हैं। 
-केनेथ पीटरसन 

कम से कम होने की संभावना

 
हॉलीवुड हमें स्मरण करने योग्य (प्रसिद्ध व्यक्ति) जासूस देता है जो आकर्षक एस्टन–मार्टिंस और अन्य लक्जरी स्पोर्ट्स कारों के तेजतर्रार ड्राइवर हैं। लेकिन पूर्व सी आई ए प्रमुख (CIA Chief) जॉना मेंडेज़ वास्तविक चीज़ की इसके बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करती हैं। वह कहती हैं, “एक एजेंट को सीधा सादा आम आदमी होना चाहिए, जिसका कोई खास विवरण न हो और जो बहुत आर्कषक न हो। आप चाहते हैं कि वे भूलने योग्य हों। सबसे अच्छे एजेंट वे होते हैं जिनके एजेंट की तरह दिखने की संभावना सबसे कम होती है।” 
जब इस्राएल के दो जासूस यरीहो में घुसे, तो वह राहाब ही ने उन्हें राजा के सैनिकों से छिपा दिया (यहोशू 2:4)। ऐसा प्रतीत होता है कि वह परमेश्वर द्वारा जासूसी एजेंट के रूप में नियुक्त की जाने वाली सबसे कम संभावना वाली व्यक्ति थी, क्योंकि उसके खिलाफ तीन बातें थीं — वह एक कनानी थी, एक महिला थी, और एक वेश्या थी। फिर भी राहाब ने इस्राएलियों के परमेश्वर पर विश्वास करना शुरू कर दिया था, क्योंकि “तुम्हारा परमेश्वर यहोवा ऊपर के आकाश का परमेश्वर है” (पद 11)। उसने परमेश्वर के जासूसों को छत पर सन (flax) के नीचे छिपा दिया, और उनके बच निकलने में सहायता की। परमेश्वर ने उसके विश्वास का प्रतिफल दिया, और “यहोशू ने राहाब वेश्या और उसके पिता के घराने को, वरन उसके सब लोगों को जीवित छोड़ दिया” (6:25)। 
कभी कभी हमें यह महसूस हो सकता है कि परमेश्वर द्वारा हमारा उपयोग किए जाने की संभावना सबसे कम है। शायद हमारी शारीरिक सीमाएँ हैं, हम नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त आकर्षक नहीं हैं, या हमारा अतीत कलंकित है। लेकिन इतिहास परमेश्वर द्वारा छुड़ाए गए अस्पष्ट विश्वासियों से भरा है – राहाब जैसे लोग जिन्हें उसके राज्य के लिए एक विशेष मिशन (विशेष कार्य) दिया गया था। आश्वस्त रहें: हममें से सबसे कम संभावना वाले व्यक्ति के लिए भी उसके पास ईश्वरीय उद्देश्य हैं। 
-केनेथ पीटरसन 

प्रकाश के हज़ार बिंदु

संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्तर-पश्चिमी अलबामा में डिसमल्स कैनियन(Dismals Canyon) कई पर्यटकों को आकर्षित करता है, अधिकतर मई और जून में जब जुगनू के लार्वा फूटकर जुगनू बन जाते हैं l रात में, ये शानदार नीली चमक बिखेरते हैं, और हज़ारों मिलकर एक असाधारण रौशनी उत्पन्न करते हैं l   
एक तरह से, प्रेरित पौलुस मसीह में विश्वासियों को जुगनू कहता है l वह समझाता है कि “तुम तो पहले अन्धकार थे, परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो” (इफिसियों 5:8) l लेकिन कभी-कभी हम सोचते हैं कि “मेरा यह छोटा सा प्रकाश अंतर कैसे ला सकता है l पौलुस का सुझाव है कि यह एकल कार्य नहीं है l वह हमें “ज्योति की संतान” कहता है (पद.8) और समझाता है कि हम “ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में सहभागी” हैं (कुलुस्सियों 1:12) l संसार में ज्योति होना सामूहिक प्रयास है, मसीह की देह का कार्य है, कलीसिया का कार्य है l पौलुस ने हम जुगनुओं की तस्वीर के साथ इसे पुष्ट किया है जो एक साथ आराधना करते हैं,, “आपस में भजन और स्तुतिगान, और आत्मिक गीत गाते हुए” (इफिसियों 5:19) l   
जब हम निराश हो जाते हैं, यह सोचकर कि हमारे जीवन की गवाही आधी रात के अंधेरे में बस एक छोटा सा बिंदु है, तो हम बाइबल से आश्वासन ले सकते हैं।  हम अकेले नहीं हैं l एक साथ, जब परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है, हम एक अंतर लाते हैं और एक शानदार रौशनी चमकाते हैं l ऐसा लगता है कि जुगनुओं की एक पूरी मण्डली बहुत सारी दिलचस्पी आकर्षित कर सकती है l  
—केनेथ पीटरसन 
 

न बदलनेवाला परमेश्वर

एक प्रतिष्ठित तस्वीर भूरे रंग की पृष्ठभूमि पर बूट के चिन्ह को दिखाती है। यह अंतरिक्ष यात्री बज़ एल्ड्रिन का पदचिह्न है, जिसे उन्होंने 1969 में चंद्रमा पर छोड़ा था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतने सालों के बाद भी पदचिन्ह अभी भी है, अपरिवर्तित है। हवा या पानी के बिना, चंद्रमा पर कुछ भी नष्ट नहीं होता है, इसलिए चंद्र परिदृश्य पर जो कुछ भी होता है, वह वहीं रहता है।  
स्वयं परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति पर चिंतन करना और भी अद्भुत है। याकूब लिखता हैं, " हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।" (याकूब 1:17)। प्रेरित इसे हमारे अपने संघर्षों के संदर्भ में कहता हैं: "जब किसी भी प्रकार की परेशानी आपके सामने आए, तो इसे बड़े आनंद का अवसर मानें" (पद 2) क्यों? क्योंकि हमसे एक महान और न बदलनेवाला परमेश्वर प्रेम करता हैं! 
संकट के समय में, हमें परमेश्वर के निरंतर प्रावधान को याद रखने की आवश्यकता है। शायद हमें महान भजन "तेरी विश्वासयोग्यता महान है"”( “Great Is Thy Faithfulness”) के शब्द याद आ सकते हैं: “तू कभी प्रभु बदलता नहीं; / ना बदलता, ना तुम्हारा दया मिटता है; / जैसा तू है सदा रहेगा भी।” हाँ, हमारे परमेश्वर ने हमारे संसार पर अपना स्थायी पदचिन्ह छोड़ा है। वह हमेशा हमारे लिए रहेगा। उसकी विश्वासयोग्यता महान है। 

हृदय के स्थान

 
यहाँ छुट्टियाँ मनाने के कुछ सुझाव दिए गए हैं: अगली बार जब आप संयुक्त राज्य अमेरिका में विस्कॉन्सिन मिडलटन से होकर यात्रा कर रहे हों, तो हो सकता है कि आप राष्ट्रीय मस्टर्ड (सरसों) संग्रहालय की यात्रा करना चाहें। हम में से जो लोग ऐसा महसूस करते हैं कि एक सरसों ही बहुत होता है, उन्हें यह जगह आश्चर्य से भर देगी, जिसमें संसार भर से 6,090 विभिन्न सरसों के प्रकारों को प्रस्तुत किया गया है। टेक्सास के मैक्लीन में, आप कंटीले तार वाले संग्रहालय को पा कर आश्चर्यचकित हो सकते हैं — या वहाँ इससे भी अधिक आश्चर्य की बात है बाड़ा लगाने के लिए विशेष जुनून। यह बता रहा है कि हम महत्वपूर्ण बनाने के लिए किस प्रकार की चीजें चुनते हैं। एक लेखक का कहना है कि आप केले के संग्रहालय में दोपहर बिताने से भी बुरा कुछ और कर सकते हैं (यद्यपि हम इससे सहमत नहीं हैं)। 
हम मस्ती में हँसते हैं, फिर भी यह स्वीकार करना साहस की बात है कि हम अपने स्वयं के संग्रहालयों को बनाए रखते हैं — अर्थात् हृदय के ऐसे स्थान जहाँ हम अपनी स्वयं की बनाई हुई कुछ मूर्तियों का उत्सव मनाते हैं। परमेश्वर हमें निर्देश देता है कि “तू मुझे छोड़ दूसरों को परमेश्‍वर करके न मानना” (निर्गमन 20:3) और “तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना” (पद 5)। लेकिन हम करते हैं, हम खुद के तराशे हुए देवता बनाते हैं — शायद धन या वासना या सफलता के, या किसी अन्य रिक्त स्थान को भरने के लिए किसी “खजाने” की जिसकी हम गुप्त रूप से आराधना करते हैं। 
इस अनुच्छेद को पढ़ते हुए इसके मतलब को न जानना आसान है। हाँ, परमेश्वर हमें पाप के उन संग्रहालयों के लिए जवाबदेह ठहराता है जिनका निर्माण हम स्वयं ही करते हैं। परन्तु वह “[उससे] प्रेम रखनेवालों की हजारों पीढ़ियों पर करुणा करने” के बारे में भी बात करता है (पद 6)। वह जानता है कि हमारे “संग्रहालय” वास्तव में कितने तुच्छ हैं। वह जानता है कि केवल उसके लिए हमारे प्रेम में ही हमारी सच्ची संतुष्टि वास करती है।  

दादी की खोज

एमोरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दादी-नानी के दिमाग का अध्ययन करने के लिए एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल किया। उन्होंने उन छवियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण प्रतिक्रियाओं को मापा, जिनमें उनके अपने पोते, उनके अपने वयस्क बच्चे और एक अज्ञात बच्चा शामिल था। अध्ययन से पता चला कि दादी-नानी अपने वयस्क बच्चे की तुलना में अपने पोते-पोतियों के प्रति अधिक सहानुभूति रखती हैं। इसका श्रेय वे "प्यारा कारक" को देते हैं - उनका अपना पोता-पोती वयस्क की तुलना में अधिक "प्यारा" होता है। 
इससे पहले कि हम कहें "ठीक है, जाहिर है!" हम अध्ययन करनेवाले जेम्स रिलिंग के शब्दों पर गौर कर सकते हैं: “अगर उनका पोता मुस्कुरा रहा है, [दादी] बच्चे की खुशी महसूस कर रही है। और अगर उनका पोता रो रहा है, तो वे बच्चे के दर्द और संकट को महसूस कर रहे हैं।” 
एक भविष्यवक्ता ने परमेश्वर की भावनाओं की एक “एमआरआई छवि” चित्रित की है जब वह अपने लोगों को देखता है: “वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा,; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा। ” (सपन्याह 3:17)। कुछ लोग इसका अनुवाद इस प्रकार करते हैं, “तुम उसका हृदय आनन्द से भर दोगे, और वह जोर से गाएगा।” एक सहानुभूतिपूर्ण दादी की तरह, परमेश्वर हमारे दर्द को महसूस करता है: “उनके सारे संकट में उस ने भी कष्ट उठाया, ” (यशायाह 63:9), और वह हमारे आनंद को महसूस करता है: “प्रभु यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है” (भजन संहिता 149:4)। जब हम निराश महसूस करते हैं, तो यह याद रखना अच्छा होता है  
जब वह अपने लोगों को देखता है तो एक भविष्यवक्ता परमेश्वर की भावनाओं की एक "एमआरआई छवि" चित्रित करता है: "वह तुम से बहुत प्रसन्न होगा; अपने प्रेम में वह करेगा। . . तेरे कारण गीत गाकर आनन्दित होगा” (सपन्याह 3:17)। कुछ इसका अनुवाद यह कहने के लिए करते हैं, "तू उसके हृदय को आनन्द से भर देगा, और वह ऊंचे स्वर से गाएगा।" एक सहानुभूतिपूर्ण दादी की तरह, परमेश्वर हमारे दर्द को महसूस करता है: "उनके सारे संकट में उस ने भी कष्ट उठाया" (यशायाह 63:9), और वह हमारे आनंद को महसूस करता है: "यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है" (भजन संहिता 149:4)। 
जब हम निराश महसूस करते हैं, तो यह याद रखना अच्छा होता है कि परमेश्वर के मन में हमारे लिए सच्ची भावनाएँ हैं। वह उदासीन, वह आपसे दूर नहीं है, बल्कि वह है जो हमसे प्रेम करता है और हमसे प्रसन्न होता है। यह उनके करीब आने, उनकी मुस्कान को महसूस करने और उनके गायन को सुनने का समय है। 

 

परमेश्वर का हमसे बोलना

मुझे एक अनजान नंबर से फोन आया। अक्सर,  मैं उन कॉल्स को वायसमेलपर (voicemail – इलेक्‍ट्रॉनिक प्रणाली जिसकी सहायता से संदेशों को बाद में सुना जा सकता है) जाने देता था,  लेकिन इस बार मैंने फोन उठाया। अनजान फोन करने वाले ने विनम्रता से पूछा कि क्या मेरे पास उनके द्वारा बाइबल का एक छोटा अंश साझा करने के लिए सिर्फ एक मिनट का समय है। उसने प्रकाशितवाक्य 21:3-5 को उद्धृत किया कि कैसे परमेश्वर “उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा ।“ उसने यीशु के बारे में बात की,  कैसे वह हमारा आश्वासन और आशा है। मैंने उससे कहा कि मैं पहले से ही यीशु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में जानता हूं। लेकिन फोन करने वाले का लक्ष्य मुझे “साक्षी” देना नहीं था। इसके बजाय, उसने बस पूछा कि क्या वह मेरे साथ प्रार्थना कर सकता है। और उसने परमेश्वर से मुझे प्रोत्साहन और शक्ति देने के लिए प्रार्थना करी।   
उस कॉल ने मुझे पवित्रशास्त्र में एक और “पुकार (कॉल)” की याद दिला दी—परमेश्वर ने युवा लड़के शमूएल को आधी रात में बुलाया (1 शमूएल 3:4-10)। शमूएल ने तीन बार आवाज सुनी, यह सोचकर कि यह बुजुर्ग याजक एली है। अंतिम बार, एली के निर्देश का पालन करते हुए, शमूएल ने महसूस किया कि परमेश्वर उसे बुला रहा था : “कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है” (पद.10) l उसी तरह,  हमारे दिनों और रातों में, परमेश्वर हमसे भी बात कर रहा हो। हमें परमेश्वर की “पुकार सुनने” की जरूरत है ,  जिसका अर्थ उसकी उपस्थिति में अधिक समय व्यतीत करना और उसकी आवाज़ सुनना हो सकता है ।  
मैंने फिर “कॉल (पुकार) ” के बारे में दूसरे तरीके से सोचा। क्या होगा यदि हम कभी-कभी किसी और के लिए परमेश्वर के वचनों के संदेशवाहक होते हैं?  हमें लग सकता है कि हमारे पास दूसरों की मदद करने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन जैसा कि परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है,  हम एक मित्र को फोन कर सकते हैं और पूछ सकते हैं,  “क्या यह ठीक होगा यदि मैं आज आपके साथ प्रार्थना करूं?”