जिस तरह परमेश्वर हमारी सहायता करता है वैसे बोलना
आम तौर पर कोई तितलियों को ज़ोर से बोलने वाला जीव नहीं समझेगा: आख़िरकार, एक राजा या रानी (मोनार्क) तितली के पंखों का फड़फड़ाना व्यावहारिक रूप से सुनाई नहीं पड़ता है। लेकिन मैक्सिकन वर्षावन में, जहां उनमें से कई अपना छोटा जीवन शुरू करते हैं, उनकी सामूहिक फड़फड़ाहट आश्चर्यजनक रूप से तेज़ होती है। जब लाखों राजा या रानी तितलियां एक ही समय में अपने पंख फड़फड़ाते हैं, तो यह एक तेज़ झरने की तरह लगता है।
यही वर्णन तब होता है जब चार बहुत अलग पंख वाले जीव यहेजकेल के दर्शन में दिखाई देते हैं। यद्यपि वे तितलियों की संख्या से कम थे, वह उनके फड़फड़ाते पंखों की ध्वनि की तुलना “बहुत से तेज जल की गर्जना” से करता है (यहेजकेल 1:24)। जब प्राणी शांत खड़े रहे और अपने पंख नीचे कर लिए, तो यहेजकेल ने परमेश्वर की आवाज़ सुनी जो उसे “[इस्राएलियों को] [परमेश्वर के] वचन सुनाने” के लिए बुला रही थी (2:7)।
पुराने नियम के अन्य भविष्यवक्ताओं की तरह, यहेजकेल को, परमेश्वर के लोगों से सच बोलने का कार्य सौंपा गया था। आज, परमेश्वर हम सभी से अपने जीवन में उसके अच्छे कार्यों की सच्चाई को उन लोगों के साथ साझा करने के लिए कहता है जिन्हें वह हमारे आस-पास रखता है (1 पतरस 3:15)। कभी-कभी हमसे एक सीधा सवाल पूछा जाएगा - साझा करने का निमंत्रण जो झरने की तरह “ऊँचे स्वर वाला” होता है। अन्य समय में, निमंत्रण मन्द आवाज़ की तरह हो सकता है, जैसे किसी अनकही आवश्यकता को देखना। चाहे परमेश्वर के प्रेम को साझा करने का निमंत्रण लाखों तितलियों जितना ज़ोरदार है या केवल एक तितली की तरह शांत, हमें यहेजकेल की तरह सुनना चाहिए, कानों को यह सुनने के लिए तैयार रखना चाहिए कि परमेश्वर हमसे क्या कहना चाहता है। कर्स्टन होल्म्बर्ग
दीनता का लाभ
कई शिक्षकों की तरह, कैरी अपनी आजीविका के लिए अनगिनत घंटे देती है, अक्सर पेपरों की ग्रेडिंग/श्रेणीकरण करती है और देर शाम तक छात्रों और अभिभावकों से बातचीत करती है l प्रयास जारी रखने के लिए, वह सौहार्द और व्यवहारिक मदद के लिए अपने सहकर्मियों के समुदाय पर निर्भर रहती है; सहयोग द्वारा उसका चुनौतीपूर्ण काम आसान हो जाता है l शिक्षकों के एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि सहयोग का लाभ सहकर्मियों के विनम्रता प्रदर्शित करने से बढ़ जाता हैं l जब सहकर्मी अपनी कमजोरियाँ स्वीकार करने को तैयार होते हैं, तो अन्य लोग एक-दूसरे के साथ अपना ज्ञान साझा करने में सुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे समूह में सभी को प्रभावी ढंग से सहायता मिलती है l
बाइबल नम्रता का महत्व सिखाती है—बढ़े हुए सहयोग से कहीं अधिक के लिए l “यहोवा का भय [मानना]”—परमेश्वर की सुन्दरता, शक्ति और महिमा की तुलना में हम कौन हैं, इसकी सही समझ रखने से—“धन, महिमा और जीवन” प्राप्त होता है (नीतिवचन 22:4) l विनम्रता हमें समुदाय में इस तरह से रहने की ओर ले जाती है जो न केवल संसार की बल्कि परमेश्वर की अर्थव्यवस्था में भी फलदायी है, क्योंकि हम अपने साथी छवि धारकों को लाभ पहुंचाना चाहते हैंl
हम अपने लिए “धन, महिमा और जीवन” पाने के लिए परमेश्वर से नहीं डरते—यह बिलकुल भी सच्ची विनम्रता नहीं होगी l इसके बजाय, हम यीशु का अनुकरण करते हैं, जिसने “अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया” (फिलिप्पियों 2:7) ताकि हम एक ऐसे शरीर का भाग बन सकें जो विनम्रतापूर्वक एक साथ मिलकर उसका काम करे, उसे सम्मान दे, और अपने चारों ओर के संसार में जीवन का एक सन्देश ले जाए l क्रिस्टन होम्बर्ग
सही केन्द्रबिंदु
हम खा(Kha-नाम) को एक वर्ष से अधिक समय से जानते हैं। वह चर्च के हमारे उस छोटे समूह का हिस्सा था जहाँ परमेश्वर के बारे में हम जो सीख रहे थे उस पर चर्चा करने के लिए साप्ताहिक बैठक करते थे। एक शाम हमारी नियमित बैठक के दौरान, उन्होंने बताया कि उन्होंने ओलंपिक में भाग लिया था। उनका यह बताना इतना अनौपचारिक था कि मुझे इसका ध्यान ही नहीं रहा। और देखो, मुझे पता चला कि मैं एक ओलंपिक के खिलाड़ी को जानता हूं जिन्होंने मैच में कांस्य पदक प्राप्त किया था! मैं समझ नहीं पाया कि उन्होंने पहले इसका उल्लेख नहीं किया था, लेकिन खा के लिए, जबकि उनकी एथलेटिक उपलब्धि उनकी कहानी का एक विशेष हिस्सा थी, अधिक महत्वपूर्ण चीजें उनकी पहचान के केंद्र में थीं : उनका परिवार, उनका समुदाय और उनका विश्वास।
लूका 10:1-23 की कहानी बताती है कि हमारी पहचान के केंद्र में क्या होना चाहिए। जब बहत्तर लोग जिन्हें यीशु ने दूसरों को परमेश्वर के राज्य के बारे में बताने के लिए भेजा था, अपनी यात्रा से लौट आए, तो उन्होंने उसे बताया कि "दुष्टात्मा भी हमारे वश में हैं"(पद.17)। जबकि यीशु ने स्वीकार किया कि उसने उन्हें जबरदस्त शक्ति और सुरक्षा से समर्थ किया है, उन्होंने कहा कि वे गलत चीज़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके आनंदित होने का कारण यह होना चाहिए क्योंकि उनके "नाम स्वर्ग में लिखे गए हैं" (पद.20)।
परमेश्वर ने हमें जो भी उपलब्धियाँ या क्षमताएँ प्रदान की हैं, हमारे आनन्दित होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि हमने स्वयं को यीशु को सौंपा है, तो हमारे नाम स्वर्ग में लिखे गए हैं, और हम अपने जीवन में उनकी दैनिक उपस्थिति का आनंद लेते हैं। किर्स्टन होम्बर्
दूसरों की जरूरतों को पूरा करना
फिलिप के पिता गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित थे और सड़कों पर रहने के लिए घर छोड़ कर चले गए थे। सिंडी और उनके छोटे बेटे फिलिप ने एक दिन उनकी तलाश में बिताया, जिसके बाद फिलिप को अपने पिता की सेहत की चिंता हुई। उसने अपनी माँ से पूछा कि क्या उसके पिता और अन्य बेघर लोग ठण्ड से सुरक्षित हैं। वे खुद को कैसे गर्म और आरामदायक रखते हैं। जवाब में, उन्होंने अपने क्षेत्र में बेघर लोगों को कंबल और ठंड के मौसम के कपड़े इकट्ठा करने और वितरित करने का प्रयास शुरू किया। एक दशक से अधिक समय से, सिंडी ने इसे अपने जीवन का कार्य माना है, सोने के लिए गर्म जगह के नहीं होने की कठिनाई के प्रति जागृत होने का श्रेय अपने बेटे और परमेश्वर में अपने गहरे विश्वास को देती है।
बाइबल ने हमें लंबे समय से दूसरों की ज़रूरतों पर ध्यान देना सिखाया है। निर्गमन की पुस्तक में, मूसा ने उन लोगों के साथ हमारी बातचीत का मार्गदर्शन करने के लिए सिद्धांतों का एक संग्रह दर्ज किया है जिनके पास भरपूर संसाधनों की कमी है। जब हम किसी दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रेरित होते हैं, तो हमें "इसे एक व्यापारिक सौदे की तरह नहीं समझना चाहिए" और इससे कोई लाभ या मुनाफा नहीं कमाना चाहिए (निर्गमन 22:25)। यदि किसी का वस्त्र बन्धक के रूप में लिया गया था, तो उसे सूर्यास्त तक वापस करना था “क्योंकि वह उसका एक ही ओढ़ना है, उसकी देह का वही अकेला वस्त्र होगा; फिर वह किसे ओढ़कर सोएगा?” (पद.27)।
आइए परमेश्वर से कहे कि वह हमारे आँखों और दिल को खोले ताकि हम यह देख सकें कि पीड़ित लोगों का दर्द कैसे कम कर सकते हैं। चाहे हम कई लोगों की ज़रूरतों को पूरा करना चाहते हों—जैसा कि सिंडी और फिलिप्प ने किया है—या किसी एक व्यक्ति का, उनका सम्मान और देखभाल करके हम उनका सम्मान करते हैं।
—कर्स्टन होम्बर्ग
मैं कौन हूँ?
स्थानीय सेवकाई के लिए नेतृत्व दल के सदस्य के रूप में, मेरा काम दूसरों को सामूहिक चर्चा के अगुओं के रूप में हमारे साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करना था। मेरे निमंत्रण में समय की प्रतिबद्धता की आवश्यकता बताई गई थी और अगुओं को बैठकों में और नियमित फ़ोन कॉल के दौरान अपने छोटे समूह के प्रतिभागियों से जुड़ने के तरीकों की रूपरेखा दी गई थी। मैं अक्सर अन्य लोगों पर दबाव डालने से हिचकिचाता था, क्योंकि मैं जानता था कि अगुआ बनने के लिए उन्हें कितना त्याग करना होगा। और फिर भी कभी-कभी उनका जवाब मुझे पूरी तरह से अभिभूत कर देता था: "मुझे सम्मानित महसूस होगा।" अस्वीकार करने के लिए वैध कारणों का हवाला देने के बजाय, उन्होंने अपने जीवन में किए गए सभी कार्यों के लिए परमेश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता का वर्णन किया और बदले में देने के लिए उत्सुक होने का कारण बताया।
जब परमेश्वर के लिए मंदिर बनाने के लिए संसाधन देने का समय आया, तो दाऊद ने भी ऐसी ही प्रतिक्रिया दी: “मैं कौन हूँ, और मेरी प्रजा कौन है, कि कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? ?” (1 इतिहास 29:14)। दाऊद की उदारता उसके और इस्राएल के लोगों के जीवन में परमेश्वर की भागीदारी के लिए कृतज्ञता से प्रेरित थी। उसकी प्रतिक्रिया उसकी विनम्रता और “विदेशियों और अजनबियों” के प्रति उसकी भलाई की स्वीकृति की बात करती है ( (पद 15)।
परमेश्वर के कार्य के लिए हमारा देना—चाहे समय, प्रतिभा, या धन के रूप में—उसके प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है जिसने हमें शुरू में दिया था। हमारे पास जो कुछ भी है वह उसके हाथ से आता है ( (पद 14); जवाब में, हम उसे कृतज्ञतापूर्वक दे सकते हैं।
— कर्स्टन होल्म्बर्ग
एक असंभव उपहार
मैं अपनी सास के जन्मदिन के लिए सही उपहार पाकर बहुत खुश थी: यह एक सुन्दर कंगन था और उस कंगन में उनके जन्म का पत्थर (birth stone) भी जड़ा हुआ था! किसी के लिए सही उपहार ढूँढना हमेशा एक बेहद खुशी की बात होती है। लेकिन क्या होगा अगर किसी व्यक्ति को जिस उपहार की ज़रूरत है वह देना हमारी सामर्थ्य से बाहर है। हममें से बहुत से लोग चाहते हैं कि हम किसी को मानसिक शांति, आराम, या फिर धैर्य भी दे सकें। काश उन्हें खरीदा जा सकता और रिबन के साथ लपेट कर दिया जा सकता!
इस प्रकार के उपहार एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को देना असंभव है। फिर भी यीशु—मानव शरीर में परमेश्वर—उन लोगों को जो उस पर विश्वास करते हैं एक ऐसा "असंभव" उपहार देता है : शांति का उपहार। स्वर्ग में उठाये जाने से पहले और शिष्यों को छोड़ने से पहले, यीशु ने उन्हें पवित्र आत्मा के वादे से सांत्वना दी: वह "तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा" (यूहन्ना 14:26)। उसने उन्हें शांति प्रदान की - अपनी शांति - एक स्थायी, विश्वसनीय उपहार के रूप में, जब उनके ह्रदय परेशान थे या जब वे भय का अनुभव कर रहे थे। वह स्वयं, परमेश्वर के साथ, दूसरों के साथ और हमारे भीतर हमारी शांति है।
हम अपने प्रियजनों को अतिरिक्त धैर्य या बेहतर स्वास्थ्य देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं जो वे चाहते हैं। न ही उन्हें वह शांति देना हमारे वश में है जिसकी हम सभी को जीवन के संघर्षों के दौरान अत्यंत आवश्यकता होती है। लेकिन हम आत्मा के द्वारा प्रेरित होकर उन्हें सच्ची और स्थायी शांति के दाता और प्रतीक यीशु के बारे में बता सकते हैं।
-कर्स्टन होल्म्बर्ग
लाल पोशाक परियोजना
रेड ड्रेस(लाल पोशाक) परियोजना की कल्पना ब्रिटिश कलाकार किर्स्टी मैकलेओड ने की थी और यह दुनिया भर के संग्रहालयों और प्रदर्शन लगाने के स्थानों में एक प्रदर्शनी बन गई है। तेरह वर्षों तक, बरगंडी रेशम के चौरासी टुकड़े दुनिया भर में घूमते रहे जिस पर तीन सौ से अधिक महिलाओं (और मुट्ठी भर पुरुषों) द्वारा कढ़ाई की गई। फिर इन टुकड़ों का एक गाउन बनाया गया जो प्रत्येक योगदान देने वाले कलाकार की कहानियों को बताता है जिनमें से कई अधिकारहीन हैं और गरीब हैं।
लाल पोशाक की तरह हारून और उसके वंशजों द्वारा पहने गए वस्त्र कई कुशल श्रमिकों द्वारा बनाए गए थे (निर्गमन 28:3)। याजक के वस्त्र बनाने के लिए परमेश्वर के निर्देशों में वे विवरण शामिल थे जो इस्राएल की सामूहिक कहानी बताते थे जिसमें गोमेद पत्थरों पर इस्राएल के पुत्रों के नाम खुदवाना शामिल था जो कि प्रभु के सामने एक स्मारक के रूप में याजकों के कंधों पर लगे रहेगें (पद 12) । अंगरखे, कमरबन्द और टोपियाँ याजकों को वैभव और शोभा देती थीं क्योंकि वे परमेश्वर की सेवा करते थे और लोगों को आराधना करने में मदद करते थे।
यीशु में नई वाचा के विश्वासियों के रूप में हम एक चुना हुआ वंश और राज पदधारी याजकों का समाज और पवित्र लोग और परमेश्वर की निज प्रजा हैं और आराधना में एक दूसरे का नेतृत्व करते हैं (1 पतरस 2:4,5, 9) यीशु हमारा महायाजक है (इब्रानियों 4:14)। हालाँकि हम खुद को याजकों के रूप में पहचानने के लिए कोई विशेष पोशाक नहीं पहनते हैं, उसकी मदद से हम बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता और सहनशीलता के वस्त्र धारण करते हैं (कुलुस्सियों 3:12) ।
-कर्स्टन होल्मबर्ग
आराधना के त्यौहार
किसी बड़े आयोजन में शामिल होना आपको आश्चर्यजनक तरीके से बदल सकता है। यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में कई दिनों तक चलने वाले समारोहों में 1,200 से ज़्यादा लोगों से बातचीत करने के बाद, शोधकर्ता डैनियल युडकिन और उनके सहयोगियों ने पाया कि बड़े उत्सव हमारे नैतिक दिशा-निर्देशों को प्रभावित कर सकते हैं, और यहाँ तक कि दूसरों के साथ संसाधनों को साझा करने की हमारी इच्छा को भी प्रभावित कर सकते हैं। उनके शोध में पाया गया कि 63 प्रतिशत उपस्थित लोगों को उत्सव में एक "परिवर्तनकारी" अनुभव हुआ, जिसने उन्हें मानवता से ज़्यादा जुड़ाव और दोस्तों, परिवार और यहाँ तक कि पूरी तरह से अजनबियों के प्रति ज़्यादा उदार महसूस कराया।
हालाँकि, जब हम दूसरों के साथ मिलकर परमेश्वर की आराधना करते हैं, तो हम धर्मनिरपेक्ष त्यौहार के सामाजिक “परिवर्तन” से कहीं ज़्यादा अनुभव कर सकते हैं; हम परमेश्वर से बातचीत करते हैं। परमेश्वर के लोगों ने निस्संदेह उस संबंध का अनुभव किया होगा जब वे प्राचीन काल में पूरे वर्ष अपने पवित्र त्यौहारों के लिए यरूशलेम में एकत्रित होते थे। वे आधुनिक सुविधाओं के बिना यात्रा करके साल में तीन बार “अखमीरी रोटी का त्यौहार, सप्ताहों का त्यौहार और झोपड़ियों का त्यौहार” (व्यवस्थाविवरण 16:16) मनाने के लिए आराधनालय में उपस्थित होते थे। ये सभाएँ परिवार, दास- दासियों , विदेशियों और अन्य लोगों के साथ “प्रभु के सामने” गंभीर स्मरण, आराधना और आनन्द मनाने का समय थीं (वचन 11)। आइए हम दूसरों के साथ आराधना के लिए एकत्रित हों ताकि एक-दूसरे की मदद कर सकें और उनका आनंद लेते रहें और उनकी वफादारी पर भरोसा रखें।
—किर्स्टन होल्बर्ग
चॉकलेट हिमकण
स्विट्ज़रलैंड के ओल्टेन के निवासी पूरे शहर में चॉकलेट की बौछार से आश्चर्यचकित रह गए। पास की एक चॉकलेट फैक्ट्री में वेंटिलेशन सिस्टम ख़राब हो गया था, जिससे हवा में कोको फैल गया और क्षेत्र मिष्टान्न-भण्डार बन गया। चॉकलेट से ढक जाना चॉकलेट के शौक़ीन लोगों के लिए एक सपने के सच होने जैसा लगता है!
हालाँकि चॉकलेट किसी की पोषण संबंधी जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा नहीं करती है, लेकिन परमेश्वर ने इस्राएलियों को स्वर्गीय वर्षा प्रदान की जिसने ये ज़रूरत पूरी भी की। उनकी जंगल में यात्रा के दौरान, वे मिस्र के विभिन्न प्रकार के भोजन को याद कर बड़बड़ाने लगे। जवाब में, परमेश्वर ने उनके लिए प्रयोजन किया "मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा" (निर्गमन 16:4)। जब हर दिन सुबह की ओस सूख जाती थी, तो भोजन की एक पतली परत बच जाती थी। लगभग 20 लाख इस्राएलियों को निर्देश दिया गया कि वे उस दिन जितनी ज़रूरत हो उतना इकट्ठा करें। जंगल में घूमने के चालीस वर्षों तक, उन्हें मन्ना द्वारा परमेश्वर के अलौकिक प्रावधान से पोषित किया गया था।
हम मन्ना के बारे में बहुत कम जानते हैं सिवाय इसके कि यह "धनिया के समान श्वेत था, और उसका स्वाद मधु के बने हुए पुए का सा था।" (पद 31)। हालाँकि मन्ना सुनने में चॉकलेट के जितना आकर्षक नहीं लगे, लेकिन अपने लोगों के लिए परमेश्वर के प्रावधान की मिठास स्पष्ट है। मन्ना हमें यीशु की ओर इंगित करता है जिसने स्वयं को "जीवन की रोटी" (यूहन्ना 6:48) के रूप में वर्णित किया है जो हमें प्रतिदिन संभालता है और हमें अनन्त जीवन का आश्वासन देता है (पद 51)।