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Articles by किर्स्टन होल्बर्ग

बोलने वाले टेबल

अकेलापन, और उसके समान चीजों के द्वारा प्रभावित कर रहा है l एक अध्ययन के अनुसार सभी लोगों में से लगभग दो-तिहाई उम्र या लिंग की परवाह किए बिना कम से कम कुछ समय तक अकेलापन महसूस करते हैं l एक ब्रिटिश सुपरमार्केट ने लोगों के बीच सम्बन्ध को बढ़ावा देने के तरीके के रूप में अपने स्टोर कॉफ़ी हाउस में “टॉकिंग टेबल” बनाए हैं l जो मनुष्यों के बीच बातचीत करने की इच्छा रखते हैं वे उस उद्देश्य के साथ एक निर्धारित टेबल पर बैठकर, दूसरों से जुड़ते हैं या जुड़ने की इच्छा का संकेत देते हैं l कनेक्शन/ सम्बन्ध और समुदाय की भावना प्रदान करने के लिए बातचीत होती है l
प्रारंभिक कलीसिया के लोग भी साझा कनेक्शन/सम्बन्ध के लिए प्रतिबद्ध थे l एक दूसरे के बिना, वे संभवतः अपने विशवास के अभ्यास में बहुत अकेले महसूस करते थे, जो संसार के लिए अभी भी नया था l केवल, उन्होंने यीशु के पीछे चलने के बारे में जानने के लिए प्रेरितों के “शिक्षण” के लिए अपने आप को “समर्पित” ही नहीं किया, वे “मंदिर में इकठ्ठा” होते थे और आपसी प्रोत्साहन और संगति के लिए अपने घरों में “रोटी तोड़ते थे” (प्रेरितों 2:42,46) l
हमें मानवीय कनेक्शन/सम्बन्ध चाहिये; परमेश्वर ने हमें इस तरह से रचा है! अकेलेपन के दर्दनाक मौसम उस ज़रूरत की ओर इशारा करते हैं l प्रारंभिक कलीसिया के लोगों की तरह, हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम मानव सहचारिता को हमारी भलाई के लिए संलग्न करें और इसे हमारे आस-पास के उन लोगों के लिए भी प्रस्तुत करें जिनको इसकी आवश्यकता है l

चंगाई देने वाले शब्द

हाल ही के एक अध्ययन से पता चला है कि स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के शब्द रोगियों को उनकी बीमारियों से जल्दी स्वाश्य होने में मदद करती हैं l एक साधारण प्रयोग के रूप में स्वयंसेवक अध्ययन भागीदारों को स्किन एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति(skin allergen) से खुजलाने को कहा गया और उसके बाद अपने चिकित्सक से आश्वासन प्राप्त करनेवालों से उन लोगों की प्रतिक्रियाओं की तुलना की गयी जिन्होंने आश्वासन प्राप्त नहीं किये थे l अपने चिकित्सक से प्रोत्साहन प्राप्त करनेवाले रोगियों को उनके प्रतिरूप(counterpart) से कम कष्ट और खुजलाहट हुयी l 

नीतिवचन के लेखक को पता था कि उत्साहजनक शब्द कितने महत्वपूर्ण हैं l “मनभावने वचन . . .  हड्डियों को हरी-भरी करते हैं” (नीतिवचन 16:24) l शब्दों का सकारात्मक प्रभाव हमारे स्वास्थ्य तक सिमित नहीं है : जब हम शिक्षा की बुद्धिमत्ता पर मन लगाते हैं, तो हम अपने प्रयासों में समृद्ध होने की अधिक सम्भावना रखते हैं (पद.20) l इसलिए बहुत अधिक प्रोत्साहन हमें उन चुनौतियों के लिए प्रोत्साहित करता है, जिनका सामना हम अभी करते हैं और भविष्य में सामना कर सकते हैं l 

हम अभी तक पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं कि क्यों और कैसे ज्ञान और प्रोत्साहन हमारे दैनिक जीवन में शक्ति और उपचार लाते हैं l फिर भी हमारे माता-पिता, कोच, और सहकर्मी का प्रोत्सहन और मार्गदर्शन हमें कठिनाई में स्थिर रहने और हमें सफलता की ओर अग्रसर होने में मदद करता है l इसी तरह, बाइबल हमें प्रोत्साहित करता है जब हम परीक्षाओं का सामना करते हैं, जिससे हम सबसे अकल्पनीय परिस्थितियों का सामना करने के लिए सज्जित होते हैं l परमेश्वर, आप अपनी बुद्धि से हमें मजबूत करें और बदले में, हम उन लोगों को “अनुग्रहपूर्ण शब्दों” की चंगाई और आशा प्रदान करें जिन्हें आपने हमारे जीवन में रखा है l 

जिंदादिल

बारह वर्षों से, प्रतिदिन एक सामुद्रिक चिड़िया (seagull) एक व्यक्ति के पास आती रही है जिसने उसके एक टूटे हुए पैर को ठीक करने में उसकी सहायता की l जॉन ने कुत्ते के बिस्कुट के साथ उस चिड़िया को अपनी ओर आने के लिए लुभाया और फिर उसे स्वस्थ करने में मदद की l यद्यपि यह पक्षी केवल गर्मियों में इस छोटे से समुद्र तट शहर में उड़कर आता है, वह और जॉन बहुत सरलता से एक दूसरे को ढूँढ लेते हैं – वह पक्षी हर दिन समुद्र तट पर सीधे उसके पास आता है, यद्यपि वह किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं जाता l यह सुनिश्चित है कि यह एक असामान्य सम्बन्ध है l 

इस पक्षी और जॉन के बीच यह अनोखा बंधन मुझे एक मनुष्य और पक्षी के बीच एक और असामान्य सम्बन्ध की याद दिलाता है l जब परमेश्वर के नबियों में से एक, एलिय्याह को अकाल के समय में, “करीत नाले में” छिपने के लिए जंगले में भेजा गया था, तो परमेश्वर ने कहा कि उसे नाले में का पानी पीना होगा और वह कौवों को उसके लिए भोजन का प्रबंध करने के लिए भेजेगा (1 राजा 17:3-4) l कठिन परिस्थितियों और परिवेश के बावजूद, एलिय्याह की भोजन और पानी की ज़रूरतें पूरी होंगी l कौवे खान-पान का प्रबंध करनेवाले नहीं हो सकते थे – स्वाभाविक रूप से खुद अनुचित भोजन खानेवाले – फिर भी वे एलिय्याह के लिए पोष्टिक भोजन लाते थे l 

शायद यह हमें आश्चर्यचकित नहीं भी करे कि एक आदमी एक पक्षी की मदद करेगा, लेकिन जब पक्षी एक आदमी के लिए “सबेरे और सांझ को . . . उसके पास रोटी और मांस” (पद.6) लेकर आएं तो इसकी व्याख्या केवल परमेश्वर की सामर्थ्य और देखभाल से ही हो सकती है (पद.6) l एलिय्याह की तरह, हम भी अपने लिए ऊसके प्रबंध पर भरोसा कर सकते हैं l 

निकट के पड़ोसी

सोशल मीडिया हमारे पड़ोसियों और मित्रों और हमारे शहर और यहाँ तक कि दुनिया भर के लोगों से जुड़ने का एक सशक्त साथन बन गया है l बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, यह भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुओं के श्रोत का पता लगाने के लिए संसाधन बन गया है l इन्टरनेट की शक्ति का लाभ उठाकर, एक दूसरे के निकट रहने वाले लोग उन तरीकों से फिर से जुड़ रहे हैं जो आज की तेजी से भागते संसार में अक्सर खो जाते हैं l 

उन लोगों के साथ सम्बंधित होना जो निकट रहते हैं बहुत पहले राजा सुलैमान के दिनों में भी महत्वपूर्ण थे l जबकि पारिवारिक रिश्ते वास्तव में महत्वपूर्ण हैं और महान समर्थन का श्रोत हो सकते हैं, सुलैमान इंगित करता है कि एक मित्र की भूमिका महत्वपूर्ण है – खासकर “विपत्ति के दिनों” में (नीतिवचन 27:10) l सम्बन्धी अपने परिवार के सदस्यों और ऐसी परिस्थितयों में मदद की इच्छा के लिये गहराई से देखभाल कर सकते हैं l लेकिन अगर वे बहुत दूर हैं, तो उन क्षणों में बहुत कम कर सकते हैं जब विपत्ति आती है l हालाँकि, पड़ोसी, क्योंकि वे निकट हैं, जल्दी से ज़रूरत के बारे में पता करके अधिक आसानी से सहायता कर सकते हैं l 

क्योंकि तकनीक ने संसार भर में प्रियजनों के साथ जुड़े रहने के लिए पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है, हमें आस-पास रहने वाले लोगों को अनदेखा करने का प्रलोभन हो सकता है l यीशु, हमारे आसपास के लोगों के साथ संबंधों में निवेश करने में हमारी मदद करें!

आपके लिए भला

दुनिया भर में लोगों ने 2016 में चॉकलेट पर अनुमानित 9800 करोड़ रूपये खर्च किए l यह संख्या चौंकानेवाली है फिर भी एक ही समय में यह सब आश्चर्यजनक नहीं है l चॉकलेट, आखिरकार, स्वादिष्ट होता है और हम सब इसे चाव से खाते हैं l तो संसार सामूहिक रूप से आनंदित हुआ जब खाने की इस मीठी वस्तु में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी पाए गए l चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स (flavonoids-वनस्पति रसायन) पाए जाते हैं जो उम्रवृद्धि और हृदय रोग के विरुद्ध शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं l कभी भी स्वास्थ्य के लिए कोई नुश्खा इतनी अच्छी तरह से स्वीकार नहीं किया गया है या उसको अम्ल में नहीं लाया गया है (संतुलन में, निश्चय ही!) l 

सुलैमान ने हमारे निवेश के योग्य एक और “मिष्ठान” का सुझाव दिया है : उसने अपने पुत्र को मधु खाने की सलाह दी “क्योंकि वह अच्छा है” (नीतिवचन 24:13) और उसकी तुलना ज्ञान से की l वह व्यक्ति जो पवित्रशास्त्र में परमेश्वर के ज्ञान का भोजन करता है, वह न केवल आत्मा के लिए मीठा नहीं है परन्तु शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए लाभदायक होता है, जो हमें “हर एक भले कार्य के लिए तत्पर” बनाता है, जिसे हमें जीवन में पूरा करने की ज़रूरत है (2 तीमुथियुस 3:16-17) l 

बुद्धि वह है जो हमें बुद्धिमान चुनाव करने में और हमारे आसपास के संसार को समझने की अनुमति देती है l और यह उन लोगों में निवेश करने और उनके साथ साझा करने के लायक है जिन्हें हम प्यार करते हैं – जैसा कि सुलैमान ने अपने पुत्र के लिए करना चाहा l हम बाइबल में परमेश्वर के ज्ञान का भोज करने पर अच्छा महसूस कर सकते हैं l यह एक मीठा दावत है जिसका हम असीमित आनंद ले सकते हैं – वास्तव में, हमें इसके लिए प्रोत्साहित किया गया है! परमेश्वर, आपके वचन की मिठास के लिए धन्यवाद!

रद्द किये गए ऋण

2009 में, लॉस एंजल्स काउंटी(प्रान्त) ने परिवारों से शुल्क लेना बंद कर दिया जिनके बच्चे जेल में बंद थे l हालाँकि कोई नया शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन निति में बदलाव से पहले  

जिन्होनें शुल्क नहीं चुकाया था उनको अपने ऋण चुकाना ज़रूरी था l उसके  बाद 2018 में काउंटी ने सभी बकाया वित्तीय दायित्वों को रद्द कर दिया l

कुछ परिवारों के लिए, उनके जीवित रहने के संघर्ष में ऋण के रद्दीकरण ने बहुत अधिक सहायता की; अब काउंटी का उनकी संपत्ति पर वैध अधिकार नहीं होना या उनकी मजदूरी/मेहनताना से उनको वंचित नहीं करने के कारण वे अपने लिए भोजन का बेहतर प्रबंध कर पाते थे l इस प्रकार की कठिनाई के कारण ही प्रभु ने प्रत्येक सात साल में कर्ज माफ़ करने का आह्वान दिया था (वव्यवस्थाविवरण 15:2) l वे नहीं चाहते थे कि लोग उनके द्वारा हमेशा के लिए पंगु हो जाएँ l

इसलिए कि इस्राएलियों को साथी इस्राएलियों (निर्गमन 22:25) को दिए गए ऋण पर ब्याज वसूलने की मनाही थी, पड़ोसी को उधार देने का उनका उद्देश्य लाभ प्राप्त करना नहीं था, बल्कि उन लोगों की मदद करना था, जो कठिन समय को सहन कर रहे थे, शायद एक खराब फसल l हर सात साल में ऋणों को स्वतंत्र रूप से माफ़ किया जाना था l परिणामस्वरूप, लोगों के बीच कम गरीबी होती (व्यवस्थाविवरण 15:4) l

आज, यीशु के विश्वासी इन नियमों से बंधे हुए नहीं हैं l लेकिन परमेश्वर कभी-कभार हमें किसी को कर्ज माफ़ करने के लिए प्रेरित कर सकता है ताकि जो लोग संगर्ष कर रहे हैं वे समाज के योगदान करनेवाले सदस्यों के रूप में नए सिरे से शुरु कर सकें l जब हम दूसरों पर ऐसी दया और उदारता दिखाते हैं, तो हम परमेश्वर के चरित्र को ऊंचा उठाते हैं और लोगों को आशा देते हैं l

पुरस्कार के लिए लक्ष्य

1994 की काल्पनिक फिल्म फ़ॉरेस्ट गंप में, फ़ॉरेस्ट दौड़ने के लिए प्रसिद्ध हो जाता है l जो “सड़क के अंत तक” धीरे-धीरे दौड़ने के रूप में प्रारंभ हुआ था तीन वर्ष, दो महीने, चौदह दिन और सोलह घंटे तक जारी रहा l हर बार जब वह अपने गन्तव्य तक पहुँचा, उसने एक नया लक्ष्य निर्धारित किया और संयुक्त राज्य अमेरिका भर में टेढ़ा-मेढ़ा दौड़ते हुए दौड़ना जारी रखा, एक दिन जब तक उसे अब ऐसा महसूस नहीं हुआ l “ऐसा महसूस हो रहा है” ही से उसकी दौड़ शुरू हुयी थी l फ़ॉरेस्ट कहते हैं, “उस दिन बिना किसी विशेष कारण से, मैंने छोटी दौड़ दौड़ने का फैसला किया l”

फ़ॉरेस्ट के प्रतीत होने वाले सनकी दौड़ के विपरीत, प्रेरित पौलुस अपने पाठकों से उसके उदहारण का अनुसरण करते हुए “ऐसे [दौड़ने को कहता है जिसमें जीत हो]”(1 कुरिन्थियों 9:24) l अनुशासित एथलीटों की तरह, हमारा दौड़ना – जिस तरह से हम अपना जीवन जीते हैं – का अर्थ हमारे कुछ सुखों को नकारना हो सकता है l अपने अधिकारों को त्यागने को तैयार रहना हमें दूसरों तक पाप और मृत्यु से हमारे बचाव का शुभ समाचार पहुंचाने में सहायता प्रदान कर सकती है l

अपने प्रशिक्षित हृदयों और मनों के साथ दूसरों को हमारे साथ दौड़ने के लक्ष्य के लिए आमंत्रित करना, हमें परम पुरस्कार अर्थात् परमेश्वर के साथ शाश्वत सहभागिता का भी आश्वासन देते हैं l परमेश्वर द्वारा वेजेता को दिया गया मुकुट सर्वदा तक रहेगा; हम उसकी सामर्थ्य पर निर्भर होकर उसको  प्रगट करने के लक्ष्य के साथ ऐसा करते हैं l दौड़ने के लिए कितना अच्छा कारण है!

स्ट्रीट टीम में शामिल हों

सैन फ्रैंसिस्को में शहर स्वास्थ्य कार्यकर्ता  नशीले पदार्थों (Opioid) के लत से पीड़ित बेघर लोगों के इलाज लिए दवाईयाँ उन तक पहुंचा रहे हैं l यह कार्यक्रम उन बेघर लोगों की बढ़ती संख्या के जवाब में आरम्भ हुआ जो नशेवाली दवा का इंजेक्शन लेते हैं l साधारणतया, डॉक्टर मरीजों के क्लिनिक में आने का इंतज़ार करते हैं l इसके बजाए स्वास्थ्य देखभाल पीड़ितों तक ले जाने से, मरीजों को परिवहन की चुनौतियों को पार करने की अथवा डॉक्टर के साथ नियोजित भेंट याद रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती है l

स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकतामंदों के पास जाना मुझे उस तरीके की याद दिलाता है जिस प्रकार यीशु हमारी ज़रूरत में हमारे पास आया l अपनी सेवकाई में, यीशु उन लोगों को तलाशा जिनकी उपेक्षा धार्मिक कुलीन वर्ग कर रहे थे : वह “पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ” भोजन किया (पद.16) l पूछे जाने पर कि क्यों वह ऐसा करता था, यीशु ने उत्तर दिया, “भले चंगों को वैध की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है” (पद.17) l उसने आगे कहा कि उसका इरादा धर्मियों को नहीं, पापियों को उसके साथ सम्बन्ध रखने के लिए बुलाना था l

जब हमें पता चलता है कि हम सभी “बीमार” हैं और डॉक्टर की ज़रूरत है (रोमियों 3:10), हम “पापियों और चुंगी लेनेवालों” अर्थात् हमारे साथ भोजन करने की यीशु की इच्छा को बेहतर ढंग से सराह सकते हैं l बदले में, सैन फ्रैंसिस्को में स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं की तरह, यीशु ने हमें आवश्यकतामंद दूसरों तक उसका बचानेवाला सन्देश ले जाने के लिए “स्ट्रीट टीम” के रूप में नियुक्त किया है l

सच : कड़वा या मीठा

मेरे नाक पर साल के काफी समय तक एक दाग था जिस समय मैं डॉक्टर के पास गया l बायोप्सी का रिपोर्ट कुछ दिनों के बाद आया, जो मैं सुनना नहीं चाहता था l त्वचा(skin) कैंसर l यद्यपि यह कैंसर ऑपरेशन के लायक था और जीवन के लिए घातक नहीं था, लेकिन यह निगलने के लिए कड़वी गोली थी l  

परमेश्वर ने यहेजकेल को निगलने के लिए एक कड़वी गोली दी थी – विलाप और शोक की एक पुस्तक (यहेजकेल 2:10; 3:1-2) l उसे “अपनी अंतड़ियां इस से भर” लेनी थी और इस्राएल के लोगों के साथ जिन्हें परमेश्वर “निर्लज्ज और हठीले” लोग समझता था, के साथ  साझा करना था (2:4) l सुधार से भरी एक पुस्तक स्वाद के कोई एक कड़वी गोली की तरह हो सकती है l फिर भी यहेजकेल अपने मुँह में उसे “मधु के तुल्य मीठी” (3:3) होने का वर्णन करता है l  

ऐसा लगता है कि यहेजकेल ने परमेश्वर के सुधार के प्रति स्वाद अर्जित कर लिया था l उसकी ताड़ना को कुछ ऐसी चीज़ के रूप में देखने के बजाए जिससे बचा जा सके, यहेजकेल ने जाना कि जो आत्मा के लिए अच्छा है वह “मीठा है l” परमेश्वर हमें करुणा से सिखाते और सुधारते हुए उसे आदर और प्रसन्नता देने के योग्य जीवन जीने में सहायता करता है l

कुछ सच्चाईयाँ निगलने के लिए कड़वी गोली है जबकि दूसरी मीठी हैं l यदि हम याद करते हैं कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है, उसकी सच्चाई मधु की स्वाद सी होगी l उसके वचन हमारी भलाई के लिए हैं, दूसरों को क्षमा करने के लिए, व्यर्थ संवाद से बचने के लिए, और दुर्व्यवहार के समय हौसला रखने के लिए बुद्धि और सामर्थ्य देते हैं l हे प्रभु, हमारी मदद कर, कि हम आपकी बुद्धिमत्ता को मीठे परामर्श के रूप में पहचाने जैसा कि वह वास्तव में है!