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Articles by क्रिस्टन होलबर्ग

सही समय

कल मैंने अपनी बड़ी बेटी के लिए जो कॉलेज जानेवाली थी, हवाई जहाज़ का टिकट खरीदा l मुझे आश्चर्य हुआ कि हवाई यात्रा का टिकट चुनने की प्रक्रिया में मेरे बहते आंसुओं से मेरे कंप्यूटर का कीबोर्ड भीग जाने के बावजूद वह काम कर रहा था l मैंने अपनी बेटी के साथ अठारह वर्षों तक दैनिक जीवन का आनंद उठाया है, इस कारण मैं उसके जाने की बात से दुखी हूँ l यह जानकार भी कि वह मुझसे दूर हो जाएगी, मैं उसे उसके भावी जीवन के अवसर से वंचित नहीं कर सकती l उसके जीवन के इस मुकाम पर, उसके लिए वयस्कता को समझना और देश के एक दूसरे भाग को जानने के लिए नयी यात्रा पर जाना उचित है l

जबकि बेटी की परवरिश का मेरा समय समाप्त हो रहा है, एक और समय आरम्भ हो रहा है l उसमें अवश्य ही चुनौतियां और खुशियाँ दोनों होंगी l इस्राएल का तीसरा राजा, सुलैमान, लिखता है कि परमेश्वर “हर एक बात का एक अवसर, और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय” नियुक्त किया है (सभोपदेशक 3:1) l हम मनुष्यों का अपने जीवन की घटनाओं पर बहुत कम नियंत्रण है – चाहे हम उन घटनाओं को अपने पक्ष में देखें या नहीं l किन्तु परमेश्वर, अपनी महान सामर्थ्य में, “सब कुछ ऐसा [बनाता है] कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं” (पद.11) l

मानसिक व्यथा के समयों में, हम भरोसा करते हैं कि परमेश्वर समय पर उससे कुछ भलाई उत्पन्न करेगा l हमारे सुख और आनंद आ सकते हैं और जा सकते हैं, किन्तु परमेश्वर का काम “सदा स्थिर रहेगा” (पद.14) l हम सभी समयों को पसंद नहीं करेंगे – उनमें से कुछ बहुत दुःख भरे होंगे – फिर भी वह उन सब को खुबसूरत बना सकता है l

ताकत लगाना

शरीर को गठीला बनानेवाले प्रतिस्पर्धी खुद को कठोर प्रशिक्षण क्रम से गुजरने देते हैं l पहले के कुछ महीनों में, वे आकार और ताकत बढ़ाने में लगाते हैं l जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा निकट आता हैं, वे अपना ध्यान शरीर के अतिरिक्त चर्बी को कम करने में लगाते हैं जिससे उनकी मांश पेशियाँ दिखाई दे सकें l प्रतिस्पर्धा से पहले अंतिम कुछ दिनों में, मांश पेशियों के स्पष्ट दिखाई देने के लिए वे कम पानी पीते हैं l पोषण कम लेने के कारण, प्रतिस्पर्धा के दिन ताकतवर दिखाई देने के बावजूद, प्रतिस्पर्धी अपने सबसे बलहीन अवस्था में होते हैं l

2 इतिहास 20 में, हम विपरीत सच्चाई देखते हैं : परमेश्वर की सामर्थ्य का अनुभव करने के लिए अपनी बलहीनता को पहचानना l “लोगों ने यहोशापात से कहा, “एक बड़ी सेना आपके विरुद्ध आक्रमण करने आ रही है l” इस कारण उसने खुद को और अपने सारे लोगों को पोषण/भोजन से वंचित करके “पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया” (पद.3) l उसके बाद उन्होंने परमेश्वर से सहायता मांगी l अंत में अपनी सेना को इकठ्ठा करने के बाद, यहोशापात ने गायकों को नियुक्त किया जो उसकी सेना के आगे-आगे परमेश्वर की प्रशंसा करते थे (पद.21) l जब वे गाकर स्तुति करने लगे,  प्रभु ने “लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए” (पद.22) l

यहोशापात का निर्णय परमेश्वर में उसके गहरे भरोसे को प्रगट कर रहा था l उसने जानबूझकर मनुष्य और सेना के कौशल पर भरोसा नहीं करने का चुनाव किया किन्तु इसके बदले परमेश्वर पर भरोसा किया l अपने संघर्षों/परीक्षाओं में खुद पर भरोसा न करके, हम उसकी ओर फिरें और उसे अपनी ताकत बनने दें l

क्या तुम मुझे प्रेम करते हो?

युवावस्था में मैं मां का विद्रोह कर चुकी हूँ। मेरी किशोरावस्था से पहले मेरे पिता की मृत्यु हो गई इसलिए माँ को मेरी परवरिश का बोझ अकेले उठाना पड़ा था। 

मुझे लगता था कि माँ नहीं चाहती कि मुझे मज़ा मिले-शायद उन्हें मुझसे प्यार नहीं था-क्योंकि वो हर बात के लिए मुझे मना कर देती थी। अब समझ आता है, मुझसे प्रेम करने के कारण वह उन बातों के लिए मना करती थी जो सही नहीं थी।

बाबुल में बंधुवाई के कुछ समय बाद इस्राएलियों ने परमेश्वर के प्रेम पर सवाल उठाया। परन्तु वास्तव में उनके निरंतर विद्रोह के कारण परमेश्वर ने उन्हें बंधुवाई में भेजा था। फिर, उनके पास परमेश्वर ने मलाकी को भेजा (मलाकी 1:2)। परमेश्वर ने कहा, "मैंने तुमसे प्रेम किया है"। इस्राएल ने संदेहपूर्वक पूछा कि परमेश्वर ने किस बात में उन से प्रेम किया है? मलाकी के माध्यम से परमेश्वर ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने उस प्रेम को किस तरह दिखाया था: उन्हें एदोमियों के ऊपर चुनकर।

जीवन के मुश्किल मौसम से गुजरने पर हम परमेश्वर के प्रेम पर प्रश्न उठाने को प्रलोभित हो जाते हैं। याद रखें कि परमेश्वर ने हम पर अपना अचूक प्रेम किस प्रकार दर्शाया है। उनकी भलाई पर विचार करके हम देखते हैं कि वह वास्तव में एक प्रेमी पिता हैं।

रैपिड्स पर सवारी

नदी के किनारे पहुंच कर राफ्टिंग गाइड ने हमारे समूह को लाइफ जैकेट पहनने और पतवार पकड़ने के निर्देश दिए। नदी में आने वाले रैपिड्स (क्षिप्रिकाओं) का सामना करते समय स्थिरता बनाए रखने के लिए उसने नौका पर हमरी सीटें बांट लीं। आगे की जलयात्रा के रोमांच और चुनौतियों के बारे में बता कर, उसने निर्देशों को विस्तार से समझाया जिसे हमारा ध्यानपूर्वक सुनना जरूरी था-ताकि हम प्रभावी तरीके से नाव नियंत्रित कर सकें। उसने आश्वासन दिया कि हालांकि तनावपूर्ण क्षण होंगे, हमारी जलयात्रा रोमांचकारी और सुरक्षित दोनों होगी।

कभी-कभी जीवन एक रिवर राफ्टिंग की तरह होता है, जिसमें अपेक्षा से अधिक रैपिड्स आते हैं। जब समय सबसे बुरा लगे, तो यशायाह द्वारा इस्राएल को दिए परमेश्वर का वादा हमारी भावनाओं का मार्गदर्शक कर सकता है: "जब तू जल में हो कर..." (यशायाह 43:2)। पाप के परिणामस्वरूप जब इस्राएलियों को निर्वासित होना पड़ा, उन्हें परमेश्वर द्वारा त्यागे जाने का भय था। पर इसके बजाय उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया और उनसे अपने प्रेम के कारण उनके साथ रहने का वादा किया (2-4)।

बुरे समय में परमेश्वर हमें छोड़ते नहीं हैं। जब हम-भय से और पीड़ादायक परेशानियों से-गुजरते हैं तो मार्गदर्शन के लिए हम उन पर भरोसा कर सकते हैं-क्योंकि वह हमसे भी प्रेम करते हैं और हमारे साथ रहने का वादा करते हैं।

चुनौतियों पर विजय

 

हम हर महीने अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों के प्रति एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने के लिए इकट्ठे होते थे l मेरी सहेली मैरी वर्ष के अंत से पहले अपने डाइनिंग रूम की कुर्सियों पर गद्दियाँ लगाना चाहती थी l हमारी नवम्बर की सभा में उसने मजाकीय तरीके से अक्टूबर से अपनी प्रगति के विषय बताया : कुर्सियों पर गद्दियाँ लगाने में 10 महीने और दो घंटे लगे l” महीनों तक सामग्री उपलब्ध नहीं होने या  नौकरी में बहुत मांग होने के कारण और अपने छोटे बच्चे की देखभाल करने के बाद समय निकालकर, मात्र दो घंटों में गद्दियाँ लगाने का काम पूरा हो गया l  

प्रभु ने नहेम्याह को कहीं बड़े काम के लिए बुलाया था : यरूशलेम को पुनःस्थापित करने के लिए जिसकी दीवारें 150 वर्षों तक खंडहर पड़ी थीं (नहेम्याह 2:3-5, 12) l जब वह लोगों को काम करने में अगुआई कर रहा था, उन्होंने उपहास, आक्रमण, विकर्षण, और पाप के प्रति परीक्षा का सामना किया (4:3, 8; 6:10-12) l फिर भी परमेश्वर ने उनको अपने प्रयास में अडिग खड़े रहने हेतु सज्जित किया और केवल बावन दिनों में चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा कर लिया गया l

इस तरह की चुनौतियों पर विजय पाने के लिए व्यक्तिगत इच्छा या लक्ष्य से अधिक की ज़रूरत होती है; नहेम्याह इस समझ से प्रेरित था कि परमेश्वर ने उसको इस काम के लिए नियुक्त किया था l असाधारण विरोध के बावजूद उसके उद्देश्य के कारण ने लोगों को उसके नेतृत्व में चलने के लिए बल दिया l चाहे किसी सम्बन्ध को ठीक करना हो अथवा अपनी साक्षी देना हो, जब परमेश्वर हमें कोई काम देता है वह हमें उस काम को करने के लिए समस्त कौशल और सामर्थ्य देता है ताकि सभी चुनौतियों का सामना करके हम अपने प्रयास में आगे बढ़ सकें l

सह-हस्ताक्षरकर्ता की ज़रूरत नहीं

 

जिस किसी व्यक्ति की भुगतान सम्बन्धी पिछली उपलब्धियाँ विलम्ब से देने का रहा हो, कर्ज देनेवाले वित्तीय जोखिम उठाकर उसे घर या कार ऋण देने में हिचकिचाएंगे l पिछला कार्य-निष्पादन रिकॉर्ड के बगैर, उस व्यक्ति का ऋण चुकाने का वादा बैंक के लिए पर्याप्त नहीं है l ऋण लेनेवाला संभावित व्यक्ति आमतौर पर ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ता है जिसका इतिहास ऋण चुकाने का रहा है, और उससे ऋण के दस्तावेज़ पर अपना नाम दर्ज करने को कहता है l सह-हस्ताक्षरकर्ता का हस्ताक्षर ऋण देनेवाले को आश्वास्त कर देता है कि कर्ज चुका दिया जाएगा l  

जब कोई हमसे वादा करता है - चाहे वित्तीय, वैवाहिक, या कोई और कारण से, हम आशा करते हैं कि वह अपना वादा पूरा करेगा l हम जानना चाहते हैं कि परमेश्वर भी अपने वादे पूरी करेगा l  जब उसने अब्राहम से वादा किया कि वह उसे आशीष देगा और उसके “सन्तान को बढ़ाता [जाएगा]” (इब्रानियों 6:14; देखें उत्पत्ति 22:17), अब्राहम ने परमेश्वर के वचन पर विश्वास किया l सबका सृष्टिकर्ता जो जीवित है, उससे महान और कोई नहीं है; केवल परमेश्वर अपने वादा की गारन्टी ले सकता था l

अब्राहम को अपने पुत्र के जन्म के लिए ठहरना था (इब्रानियों 6:15) (और वह कभी नहीं देख पाया कि उसकी संतान अनगिनित होगी), किन्तु परमेश्वर अपने वादे में सच्चा था l जब वह हमारे साथ सदा रहने का (13:5), हमें सुरक्षित तौर से थामने का (यूहन्ना 10:29), और हमें आराम देने का वादा करता है (2 कुरिन्थियों 1:3-4), हम भी भरोसा कर सकते हैं कि वह अपने वचन के प्रति सच्चा होगा l  

आलोचक को शांत करना

मैं एक समूह के साथ मिलकर वार्षिक समुदायिक कार्यक्रम आयोजित करती हूँ l हम आयोजन की सफलता के लिए ग्यारह महीने योजना बनाते और तैयारी करते हैं l हम तिथि और स्थान का चुनाव करते हैं l हम टिकट की कीमत निर्धारित करते हैं l हम भोजन बिक्रेता से लेकर ध्वनि टेक्नीशियन तक, सभी बातों का चुनाव करते हैं l आयोजन के निकट आने पर, हम लोगों के प्रश्नों का उत्तर देते हैं और उनको जानकारी भी देते हैं l बाद में हम उनसे भी प्रतिउत्तर लेते हैं l हमारी टीम को उपस्थित लोगों से उत्साहमयी प्रसन्नता और क्षेत्र से शिकायतें भी सुनने को मिलती हैं l नकारात्मक प्रतिउत्तर निराशाजनक हो सकती हैं और कभी-कभी हमारे सामने पराजित होने की परीक्षा भी आती है l  

यरूशलेम की दीवार की मरम्मत के समय नहेम्याह और उसकी टीम की आलोचना भी हुई l  उन्होंने नहेम्याह और उसके साथ कार्यरत टीम का यह कहकर ठठ्ठा उड़ाया, “जो कुछ वे बना रहे हैं, यदि कोई गीदड़ भी उस पर चढ़े, तो वह उनकी बनायी हुई पत्थर की शहरपनाह को तोड़ देगा” (नहेम्याह 4:3) l आलोचकों के प्रति उसका उत्तर मेरी भी मदद करता है : निरुत्साहित होने अथवा उनकी आलोचनाओं का खण्डन करने की जगह, उसने परमेश्वर से सहायता मांगी l उसने सीधे तौर पर प्रतिउत्तर देने की अपेक्षा, परमेश्वर से उसके लोगों की दशा समझने और जानने और उनकी रक्षा करने को कहा (पद.4) l उन चिंताओं को परमेश्वर को सौंपने के बाद, वह और उसके साथियों का “मन उस काम में नित लगा रहा” (पद.6) और वे निरंतर दीवार की मरम्मत करते चले गए l

हमारे कार्य की आलोचना करनेवालों से हम विचलित न हों, यह हम नहेम्याह से सीख सकते है l जब हमारी आलोचना हो या हमारा मज़ाक उड़ाया जाए, पीड़ा या क्रोध के साथ अपने आलोचकों को उत्तर देने की अपेक्षा, हम परमेश्वर से प्रार्थनापूर्वक निराशा से हमारा बचाव करने को कहें ताकि हम पूरे मन से आगे बढ़ते रहें l

कोई भी मुझे पसंद नहीं करता

मैं बचपन में जब भी बहुत ही अकेला, त्यागा हुआ, या खुद के विषय खेद महसूस करता था, मेरी माँ मुझे खुश करने के लिए एक लोकप्रिय गीत गाती थी : “कोई मुझे पसंद नहीं करता, सब मुझे से घृणा करते हैं l मेरे विचार में मैं जाकर कीड़ा खाऊंगा l” मेरे उतरे हुए चेहरे पर मुस्कराहट देखकर, वह मुझमें धन्यवाद देने के विशेष सम्बन्ध और कारण खोजने में मेरी मदद करती थी l

जब मैं पढ़ता हूँ कि दाऊद ने महसूस किया कि कोई भी उसकी परवाह नहीं करता, उसका गीत मेरे कानों में गूंजता है l फिर भी दाऊद की पीड़ा का बयान बढ़ा चढ़ा कर नहीं किया गया है l जहां मेरी आयु के अनुसार मैंने अकेलापन महसूस किया, दाऊद के पास त्यागा हुआ महसूस करने का उचित कारण था l उसने ये शब्द एक गुफा के अँधेरे में लिखा जहां वह शाऊल के भय से छिपा हुआ था जो उसकी हत्या करने की योजना बनाकर उसका पीछा कर रहा था(1 शमूएल 22:1; 24:3-10) l दाऊद जिसका अभिषेक भावी राजा के रूप में हुआ था, वर्षों तक शाऊल की सेवा की थी (16:13), किन्तु अब अपना जीवन बचाने के लिए “इधर-उधर भटक” रहा था l अपने अकेलेपन में दाऊद ने आभास किया और परमेश्वर को “शरणस्थान” और “मेरे जीते जी तू मेरा भाग है” माना (भजन 142:5 l

दाऊद की तरह, हम भी अपने अकेलेपन में परमेश्वर को पुकार सकते हैं, और उसके प्रेम की सुरक्षा में अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं l परमेश्वर कभी भी हमारे अकेलेपन को कम नहीं आंकता है l वह जीवन के अँधेरे गुफाओं में हमारा साथी बनना चाहता है l उस समय भी परमेश्वर हमारी चिंता करता है, जब हम सोचते हैं कि कोई हमारी चिंता नहीं करता है!

गीत गाने का कारण

13 वर्ष के होने पर हमारे स्कूल के नियमों के अनुसार छात्रों को चार शोधपूर्ण कोर्स लेने अनिवार्य थे जिसमें गृह-अर्थशास्त्र, कला, गायक-वृंद तथा बढ़ईगिरी शामिल थे। गायन की पहली कक्षा में प्रशिक्षक ने छात्रों की आवाज सुनने के लिए एक-एक करके पियानो के पास बुलाया और उनकी स्वर क्षमता के अनुसार कमरे में पंक्तिबद्द किया। अपनी बारी पर मैंने पियानो के साथ गाने की कोशिश की, कई प्रयासों के बाद मुझे किसी पंक्ति की बजाए कोई दूसरी कक्षा लेने के लिए काउंसलिंग ऑफिस भेज दिया गया। मुझे लगा कि मुझे नहीं गाना चाहिए।

मैंने 10 वर्ष तक यह बात मन में रखी जबतक कि मैंने भजन-संहिता 98 ना पढ़ा। लेखक "प्रभु के लिए गाने" (भजन 98:1) के निमंत्रण से इसे आरम्भ करता है। इसका हमारे गाने की क्षमता से कोई सारोकार नहीं। वह अपने सभी बच्चों के धन्यवाद और स्तुति के गीतों से प्रसन्न होते हैं। वह हमें इसलिए गाने को कहता है क्योंकि परमेश्वर ने "अद्भुतकाम किए हैं "(पद 1)। 

भजनकार ने अपने गीतों और व्यवहार में आनन्दित होकर परमेश्वर की स्तुति करने के दो कारण दिए: हमारे जीवन में उनके उद्धार का कार्य और उनकी निरंतर रहने वाली विश्वासयोग्यता। परमेश्वर की गायन मंडली में हम में से प्रत्येक के पास उनके अद्भुत कामों के लिए गीत होते हैं।