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Articles by किर्स्टन होल्बर्ग

पुरस्कार के लिए लक्ष्य

1994 की काल्पनिक फिल्म फ़ॉरेस्ट गंप में, फ़ॉरेस्ट दौड़ने के लिए प्रसिद्ध हो जाता है l जो “सड़क के अंत तक” धीरे-धीरे दौड़ने के रूप में प्रारंभ हुआ था तीन वर्ष, दो महीने, चौदह दिन और सोलह घंटे तक जारी रहा l हर बार जब वह अपने गन्तव्य तक पहुँचा, उसने एक नया लक्ष्य निर्धारित किया और संयुक्त राज्य अमेरिका भर में टेढ़ा-मेढ़ा दौड़ते हुए दौड़ना जारी रखा, एक दिन जब तक उसे अब ऐसा महसूस नहीं हुआ l “ऐसा महसूस हो रहा है” ही से उसकी दौड़ शुरू हुयी थी l फ़ॉरेस्ट कहते हैं, “उस दिन बिना किसी विशेष कारण से, मैंने छोटी दौड़ दौड़ने का फैसला किया l”

फ़ॉरेस्ट के प्रतीत होने वाले सनकी दौड़ के विपरीत, प्रेरित पौलुस अपने पाठकों से उसके उदहारण का अनुसरण करते हुए “ऐसे [दौड़ने को कहता है जिसमें जीत हो]”(1 कुरिन्थियों 9:24) l अनुशासित एथलीटों की तरह, हमारा दौड़ना – जिस तरह से हम अपना जीवन जीते हैं – का अर्थ हमारे कुछ सुखों को नकारना हो सकता है l अपने अधिकारों को त्यागने को तैयार रहना हमें दूसरों तक पाप और मृत्यु से हमारे बचाव का शुभ समाचार पहुंचाने में सहायता प्रदान कर सकती है l

अपने प्रशिक्षित हृदयों और मनों के साथ दूसरों को हमारे साथ दौड़ने के लक्ष्य के लिए आमंत्रित करना, हमें परम पुरस्कार अर्थात् परमेश्वर के साथ शाश्वत सहभागिता का भी आश्वासन देते हैं l परमेश्वर द्वारा वेजेता को दिया गया मुकुट सर्वदा तक रहेगा; हम उसकी सामर्थ्य पर निर्भर होकर उसको  प्रगट करने के लक्ष्य के साथ ऐसा करते हैं l दौड़ने के लिए कितना अच्छा कारण है!

स्ट्रीट टीम में शामिल हों

सैन फ्रैंसिस्को में शहर स्वास्थ्य कार्यकर्ता  नशीले पदार्थों (Opioid) के लत से पीड़ित बेघर लोगों के इलाज लिए दवाईयाँ उन तक पहुंचा रहे हैं l यह कार्यक्रम उन बेघर लोगों की बढ़ती संख्या के जवाब में आरम्भ हुआ जो नशेवाली दवा का इंजेक्शन लेते हैं l साधारणतया, डॉक्टर मरीजों के क्लिनिक में आने का इंतज़ार करते हैं l इसके बजाए स्वास्थ्य देखभाल पीड़ितों तक ले जाने से, मरीजों को परिवहन की चुनौतियों को पार करने की अथवा डॉक्टर के साथ नियोजित भेंट याद रखने की ज़रूरत नहीं पड़ती है l

स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकतामंदों के पास जाना मुझे उस तरीके की याद दिलाता है जिस प्रकार यीशु हमारी ज़रूरत में हमारे पास आया l अपनी सेवकाई में, यीशु उन लोगों को तलाशा जिनकी उपेक्षा धार्मिक कुलीन वर्ग कर रहे थे : वह “पापियों और चुंगी लेनेवालों के साथ” भोजन किया (पद.16) l पूछे जाने पर कि क्यों वह ऐसा करता था, यीशु ने उत्तर दिया, “भले चंगों को वैध की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है” (पद.17) l उसने आगे कहा कि उसका इरादा धर्मियों को नहीं, पापियों को उसके साथ सम्बन्ध रखने के लिए बुलाना था l

जब हमें पता चलता है कि हम सभी “बीमार” हैं और डॉक्टर की ज़रूरत है (रोमियों 3:10), हम “पापियों और चुंगी लेनेवालों” अर्थात् हमारे साथ भोजन करने की यीशु की इच्छा को बेहतर ढंग से सराह सकते हैं l बदले में, सैन फ्रैंसिस्को में स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं की तरह, यीशु ने हमें आवश्यकतामंद दूसरों तक उसका बचानेवाला सन्देश ले जाने के लिए “स्ट्रीट टीम” के रूप में नियुक्त किया है l

सच : कड़वा या मीठा

मेरे नाक पर साल के काफी समय तक एक दाग था जिस समय मैं डॉक्टर के पास गया l बायोप्सी का रिपोर्ट कुछ दिनों के बाद आया, जो मैं सुनना नहीं चाहता था l त्वचा(skin) कैंसर l यद्यपि यह कैंसर ऑपरेशन के लायक था और जीवन के लिए घातक नहीं था, लेकिन यह निगलने के लिए कड़वी गोली थी l  

परमेश्वर ने यहेजकेल को निगलने के लिए एक कड़वी गोली दी थी – विलाप और शोक की एक पुस्तक (यहेजकेल 2:10; 3:1-2) l उसे “अपनी अंतड़ियां इस से भर” लेनी थी और इस्राएल के लोगों के साथ जिन्हें परमेश्वर “निर्लज्ज और हठीले” लोग समझता था, के साथ  साझा करना था (2:4) l सुधार से भरी एक पुस्तक स्वाद के कोई एक कड़वी गोली की तरह हो सकती है l फिर भी यहेजकेल अपने मुँह में उसे “मधु के तुल्य मीठी” (3:3) होने का वर्णन करता है l  

ऐसा लगता है कि यहेजकेल ने परमेश्वर के सुधार के प्रति स्वाद अर्जित कर लिया था l उसकी ताड़ना को कुछ ऐसी चीज़ के रूप में देखने के बजाए जिससे बचा जा सके, यहेजकेल ने जाना कि जो आत्मा के लिए अच्छा है वह “मीठा है l” परमेश्वर हमें करुणा से सिखाते और सुधारते हुए उसे आदर और प्रसन्नता देने के योग्य जीवन जीने में सहायता करता है l

कुछ सच्चाईयाँ निगलने के लिए कड़वी गोली है जबकि दूसरी मीठी हैं l यदि हम याद करते हैं कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है, उसकी सच्चाई मधु की स्वाद सी होगी l उसके वचन हमारी भलाई के लिए हैं, दूसरों को क्षमा करने के लिए, व्यर्थ संवाद से बचने के लिए, और दुर्व्यवहार के समय हौसला रखने के लिए बुद्धि और सामर्थ्य देते हैं l हे प्रभु, हमारी मदद कर, कि हम आपकी बुद्धिमत्ता को मीठे परामर्श के रूप में पहचाने जैसा कि वह वास्तव में है!

नीली रेखाएं

डाउनहिल स्कीइंग(बर्फ के ढलान पर स्की से फिसलना) के बर्फीले क्षेत्र की सतह अक्सर नीली रंग की पट्टी से चिन्हित होती है l मोटे घुमावदार निशान दर्शकों के लिए विकर्षण हो सकते हैं परन्तु प्रतियोगियों की सफलता और सुरक्षा दोनों के लिए ज़रूरी हैं l ये निशान प्रतियोगियों के लिए पहाड़ी से नीचे तक सबसे तेज़ पट्टी पहचानने के लिए मार्गदर्शिका है l इसके अलावा, बर्फ के विपरीत यह रंग पट्टी प्रतियोगियों के लिए गहन अभिज्ञता है, जो उनके उच्च गति से स्की करते समय उनकी सुरक्षा के लिए अत्यंत ज़रूरी है l

सुलैमान जीवन की दौड़ के मैदान में अपने पुत्रों को सुरक्षित रखने की आशा से उनसे बुद्धिमत्ता ढूँढने का आग्रह करता है l वह कहता है, “उन नीली रेखाओं की तरह, बुद्धिमत्ता, उन्हें “सिधाई के पथ पर [चलाएगी]’ और वे “ठोकर न [खाएंगे]” (नीतिवचन 4:11-12) l एक पिता होने के नाते अपने पुत्रों के लिए उसकी सबसे गहरी आशा है कि वे परमेश्वर की बुद्धिमत्ता से दूर रहने के हानिकारक प्रभाव से विमुक्त रहकर समृद्ध जीवन का आनंद उठाएं l

हमारे प्रेमी पिता के रूप में, परमेश्वर, हमें बाइबल में “नीली-रेखा” मार्गदर्शन देता है l जबकि उसने हमें अपने मन के अनुसार कहीं भी “स्की” करने की स्वतंत्रता दी है, वह जो बुद्धिमत्ता बाइबल में प्रस्तावित करता है, दौड़ के मैदान में चिन्हकों की तरह वे “जिनको . . . प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का . . . कारण होती हैं” (पद.22) l जब हम बुराई से फिरकर उसकी जगह उसके साथ चलते है, हमारा पथ उसकी धार्मिकता से प्रकाशित रहेगा और हमारे पाँव ठोकर नहीं खाएंगे और प्रतिदिन हमें मार्गदर्शन प्राप्त होगा (पद.12, 18) l

स्वामित्व

1900 के आरंभिक काल में, द पैकर्ड मोटर कंपनी ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक स्लोगन “उस व्यक्ति से पूछो जिसके पास स्वामित्व है,” बनाया जो प्रभावशाली प्रचार वाक्य बन गया, और उस युग की प्रभावशाली लक्ज़री गाड़ी बनानेवाली कंपनी की प्रसिद्धि में योगदान दिया l पैकर्ड को प्रतीत हुआ कि सुननेवाले के लिए व्यक्तिगत साक्षी सम्मोहक है : किसी उत्पाद के साथ एक मित्र की तसल्ली एक शक्तिशाली अनुमोदन है l

हमारे प्रति परमेश्वर की भलाई का व्यक्तिगत अनुभव दूसरों के साथ साझा करना भी प्रभाव डालता है l परमेश्वर हमें हमारे धन्यवाद और आनंद को केवल उसके समक्ष प्रगट करने के लिए नहीं परन्तु अपने चारों ओर के लोगों के सामने घोषित करने के लिए आमंत्रित करता है (भजन 66:1) l भजनकार अपने पापों से फिरने के बाद उत्सुकता से अपने गीत में परमेश्वर द्वारा उसे दी गयी क्षमा को साझा किया (पद.18-20) l

परमेश्वर ने इतिहास में अद्भुत काम किये हैं, जैसे लाल समुद्र को दो भाग करना (पद.6) l वह हमारे हर एक के व्यक्तिगत जीवनों में अद्भुत कार्य करता है : पीड़ा में हमें आशा देता है, उसके वचन को समझने के लिए पवित्र आत्मा देता है, और हमारे दैनिक ज़रूरतों को पूरा करता है l जब हम अपने जीवनों में परमेश्वर के कार्य का व्यक्तिगत अनुभव दूसरों के साथ साझा करते हैं, हम किसी ख़ास खरीद की एक अनुमोदन से कही अधिक बड़ा महत्त्व देते हैं – हम जीवन यात्रा में परमेश्वर की भलाई और परस्पर प्रोत्साहन को स्वीकार कर रहे होते हैं l

सर के पीछे आँखें

मैं बचपन में अन्य बच्चों की तरह ही शरारती थी और परेशानी से बचने के लिए अपनी बुरी आदतें छिपाने की कोशिश करती थी l इसके बावजूद अक्सर मेरी माँ मेरी गलतियाँ पकड़ लेती थी l मैं याद करके चकित होती हूँ कैसे तुरंत और सही तौर से वह मेरी शरारत के विषय जान लेती थी l जब मैं अचंभित होकर उनसे पूछती थी, वो हमेशा कहती थी, “मेरे सिर के पीछे भी आँखें हैं l” यह, अवश्य ही, मुझे पता लगाने को विवश किया कि क्या वास्तव में उनके सर के पीछे आँखें थीं – क्या अदृश्य आँखें या ऑंखें जो उनके लाल बालों में छिपी हुयी थीं? बड़ी होने पर मैं उनकी सर के पीछे आँखें खोजना बंद कर दी और मैंने जाना कि अब मैं उतनी शरारती नहीं थी l उनकी सतर्क आँखें उनके बच्चों के लिए प्रेमी चिंता का प्रमाण था l

मैं बहुत अधिक अपनी माँ के सतर्क देखभाल के लिए कृतज्ञ हूँ (बावजूद इसके कि कभी-कभी निराश होती थी कि मैं पकड़ी जाती थी), मैं उससे भी अधिक धन्यवादित हूँ कि परमेश्वर स्वर्ग से दृष्टि करके “सब मनुष्यों को निहारता है” (भजन 33:13) l हम जितना करते हैं उससे कहीं अधिक वह देखता है; वह हमारे दुःख, हमारे आनंद, और एक दूसरे के लिए हमारे प्रेम को देखता है l

परमेश्वर हमारा वास्तविक चरित्र देखता है और हमेशा जानता है हमें किसकी ज़रूरत है l सिद्ध दृष्टि से, जो हमारे हृदयों के भीतर भी देखता है, वह उससे प्रेम करनेवालों और उसमें आशा रखनेवालों की हिफाजत करता है (पद.18) l वह हमारा ध्यान देनेवाला और प्रेमी पिता है l

टुकड़ों को आपस में बाँटना

साठ वर्षीय बेघर सेवानिवृत सैनिक, स्टीव, गर्म मौसम वाले स्थान पर चला गया जहां पूरे साल खुले आसमान के नीचे सोना(विश्राम करना) बर्दास्त करने लायक था l एक शाम के समय, जब वह हाथ की बनाई हुई अपनी कला को प्रदर्शित कर रहा था – अपने प्रयास से कुछ पैसे कमाने के लिए – एक युवा स्त्री ने आगे आकर उसे पिज़्ज़ा के कुछ टुकड़े ऑफर किये l स्टीव ने धन्यवाद के साथ उसे स्वीकार कर लिया l कुछ क्षण बाद, स्टीव ने अपनी उदारता एक दूसरे भूखे, बेघर व्यक्ति के साथ साझा किया l लगभग तुरंत ही, उसी युवा स्त्री ने भोजन का एक और थाली लेकर आई, यह मानते हुए कि वह जो उसे मिला था के साथ बहुत ही उदार था l 

स्टीव की कहानी नीतिवचन 11:25 के सिद्धांत का वर्णन करती है कि जब हम दूसरों के साथ उदार हैं, हम भी कदाचित उदारता का अनुभव करेंगे l लेकिन हम वापस पाने की आशा से न दें; कभीकभार ही हमारी उदारता हमारे पास लौटती है और स्पष्तः जिस प्रकार उसके साथ हुआ l इसके बदले, हम परमेश्वर के निर्देश के प्रेममय प्रतिउत्तर में देकर दूसरों की मदद करते हैं (फिलिप्पियों 2:3-4; 1 यूहन्ना 3:17) l और जब हम ऐसा करते हैं, परमेश्वर प्रसन्न होता है l यद्यपि वह हमारी झोली या पेट को भरने के लिए बाध्य नहीं है, वह अक्सर हमें तरोताज़ा करने के लिए तरीके ढूढ़ता है – कभी-कभी भौतिक रूप से, और दूसरे समयों में आत्मिक रूप से l

स्टीव ने पिज़्ज़ा की अपनी दूसरी थाली भी मुस्कराहट और खुले हाथों के साथ साझा किया l अपने संसाधन की कमी के बावजूद, वह उदारतापूर्वक जीने का क्या अर्थ है का एक नमूना है, अपने लिए संग्रह करके रखने के विपरीत जो हमारे पास है उसे आनंद के साथ साझा करने की इच्छा l जैसे परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है और सामर्थ्य देता है, वैसा ही हमारे विषय भी कहा जाए l

यहाँ आपके लिए

सम्पूर्ण संसार के दूसरे शहरों की तरह, पेरिस के बाहिरी भाग में भी, लोग अपने समुदाय के बेघर लोगों की सहायता के लिए आगे आ रहे रहें l वाटरप्रूफ बैग्स में, कपड़े, सड़क पर रहनेवालों के लिए नामित बाड़ों/रेलिंग पर टांग दिए जाते हैं जिन्हें वे अपनी ज़रूरत के अनुसार ले जा सकते हैं l उन बैग्स पर लेबल लगे…

जीवन के लिए सर्वोत्तम रणनीति

जब मैं दीर्घा में बैठकर अपनी बेटी का बास्केटबाल मैच देख रही थी, मैंने कोच को लड़कियों से एक शब्द बोलते सुना : “डबल्स”(समरूप खेल) l तुरंत, उनकी खेलने वाली टीम की बचाव रणनीति बॉल फेंकने वाले सबसे लम्बे प्रतिद्वंदी के विरुद्ध एक एक के साथ से दो दो एक  साथ हो गयी l वे उनके बॉल फेंककर और स्कोर बनाने के प्रयास को विफल करने में सफल हो गए, और आख़िरकार बॉल को अपने क्षेत्र के बास्केट(basket) में ले गए l

जब सभोपदेशक का लेखक, सुलेमान, संसार के परिश्रम और निराशाओं का सामना कर रहा था, उसने भी पहचाना कि हमारे मेहनत में सहयोगी के होने से “अच्छा फल मिलता है” (सभोपदेशक 4:9) l जबकि सघर्ष करते हुए अकेले व्यक्ति पर “कोई प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे” (पद.12) l जब हम गिर जाते हैं निकट का एक मित्र हमारी सहायता कर सकता है (पद.10) l

सुलेमान के शब्द हमारी यात्रा को दूसरों के साथ साझा करने के लिए उत्साहित करते हैं ताकि हमें अकेले ही जीवन की आजमाइशों का सामना न करना पड़े l हममें से कुछ के लिए, यह अतिसंवेदनशीलता के एक मानक की मांग करता हैं जिससे हम अपरिचित हैं या जो हमारे लिए असुखद है l हममें से कुछ लोग उस प्रकार की निकटता की तीव्र इच्छा करते हैं और मित्रों को ढूंढने में संघर्ष करते हैं जिनके साथ हम उन बातों को साझा करना चाहते हैं l जो भी मामला हो, हमें प्रयास में हार नहीं मानना चाहिए l

सुलेमान और बास्केटबाल के कोच सहमत हैं : जीवन में और खेल के मैदान में टीम के साथियों का अपने आस-पास होना हमारे ऊपर मंडराने वाले संघर्षों का सामना करने के लिए सबसे सर्वोत्तम रणनीति है l हे प्रभु, उन लोगों के लिए धन्यवाद जिन्हें आपने हमारे उत्साह और सहयोग के लिए हमारे जीवनों में दिए हैं l