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Articles by लेस्ली कोह

पार्किंग स्थल झगड़ा

पार्किंग स्थल का दृश्य देखने में हास्यास्पद होता यदि वह उतना त्रासदीपूर्ण नहीं होता l दो वाहन चालक एक कार के रास्ता रोकने के कारण ऊंची आवाज में झगड़ा कर रहे थे, जिसमें वह एक दूसरे को बुरा भला कह रहे थे।

इसे इस बात ने और भी ख़ास दर्दनाक बना दिया कि यह झगड़ा चर्च के पार्किंग स्थल में हो रहा था l शायद अभी-अभी इन दो आदमियों ने प्रेम, धीरज, या क्षमा के विषय उपदेश सुना था, लेकिन उस क्रोध के क्षण में वे सब कुछ भूल गए थे l  

गुज़रते हुए, मैंने अपना सिर हिलाया─फिर तुरंत अनुभव किया कि मैं भी बेहतर नहीं था l मैंने भी बाइबल को बहुत बार पढ़ा था, कुछ क्षण बाद केवल एक निर्दय विचार के साथ पाप में गिरने के लिए? कितनी बार मैंने उस व्यक्ति की तरह व्यवहार किया था जो “उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है l इसलिए कि वह अपने आप को देखकर चला जाता और तुरंत भूल जाता है कि मैं कैसा था”(याकूब 1:23-24)?

याकूब अपने पढ़ने वालों से अपील कर रहा था कि न केवल पढ़ें और परमेश्वर के निर्देशों पर विचार करें, बल्कि उसके कहे अनुसार करें भी (पद.22) l उसने ध्यान दिया कि एक संपूर्ण विश्वास का अर्थ वचन को जानना और उसे कार्य रूप देना है l 

जो वचन में लिखा है उसे जीवन की परिस्थितियां लागू करने में कठिन बना सकती हैं। परंतु यदि हम पिता से सहायता मांगते हैं तो वह अवश्य ही अपने वचन को मानने में एवं अपने कार्य द्वारा उसे प्रसन्न करने में मदद करेगा l

एक नई शुरुआत

तमिल परिवारों द्वारा हर जगह मनाया जाने वाला तमिल नव वर्ष ऋतुओं के परिवर्तन से जुड़ा है। आमतौर पर जनवरी के मध्य में कहीं गिरते हुए, परिवार के पुनर्मिलन के लिए यह समय कई परंपराओं के साथ आता है-कुछ बहुत महत्वपूर्ण हैं। नए कपड़े खरीदना और दान करना, हमारे घरों को अच्छी तरह से साफ करना, और सभी को घर का खाना खिलाना, इस प्रकार रिश्तों को सुधारना। यह हमें अतीत को पीछे छोड़ने की याद दिलाता है और साल की शुरुआत एक साफ स्लेट के साथ करता है।

ये परंपराएं मुझे मसीह में हमारे नए जीवन की भी याद दिलाती हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कौन थे या हमने क्या किया है, हम इसे अपने पीछे रख सकते हैं। हम अपने अतीत के लिए खुद को पीटना बंद कर सकते हैं और अपने अपराध बोध को छोड़ सकते हैं, यह जानते हुए कि हमें यीशु की क्रूस पर मृत्यु के कारण पूरी तरह से क्षमा कर दिया गया है। और हम नए सिरे से शुरुआत कर सकते हैं, यह जानते हुए कि हम प्रतिदिन पवित्र आत्मा पर भरोसा कर सकते हैं ताकि हमें यीशु की तरह और अधिक बनाया जा सके।

इसलिए पौलुस विश्वासियों को याद दिलाता है "पुराना चला गया, नया आ गया!" (2 कुरिन्थियों 5:17) । हम भी सरल लेकिन शक्तिशाली सत्य के कारण यह कह सकते हैं: परमेश्वर ने हमें मसीह के द्वारा अपने साथ मिला लिया है और अब हमारे पापों को हमारे विरुद्ध नहीं गिना (v 19) ।

हमारे आस-पास के अन्य लोग हमारे अतीत के पापों को भूलने के लिए तैयार नहीं हो सकते हैं, परन्तु हम हृदय से लगा सकते हैं कि परमेश्वर की दृष्टि में अब हम दोषी नहीं हैं (रोमियों 8:1)। जैसा कि पौलुस बताता है, "यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोध कौन कर सकता है?" (v 31). आइए उस नई शुरुआत का आनंद लें जो परमेश्वर ने हमें यीशु के माध्यम से दी है।

एक सार्थक प्रतीक्षा

लंबे घंटों और एक अनुचित बॉस के साथ तनावपूर्ण नौकरी में फंसे अभिनव की इच्छा थी कि वह नौकरी छोड़ दे। लेकिन उसकी कुछ चीज गिरवी थी, एक पत्नी और एक छोटे बच्चे की देखभाल करनी थी। फिर भी वह इस्तीफा देने के लिए ललचा रहा था, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे याद दिलाया : "आइए रुकें और देखें कि परमेश्वर हमें क्या देंगे।"

कई महीने बाद, उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया गया। अभिनव को एक नई नौकरी मिली जिसमें उन्हें मज़ा आया और उन्हें परिवार के साथ अधिक समय मिला। "वे महीने लंबे थे," उसने मुझसे कहा, "लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने परमेश्वर के समय में उसकी योजना के प्रकट होने की प्रतीक्षा की।"

मुसीबत के बीच में परमेश्वर की सहायता की प्रतीक्षा करना कठिन है; पहले अपना समाधान खोजने की कोशिश करना लुभावना हो सकता है। इस्राएलियों ने ठीक वैसा ही किया: अपने शत्रुओं की धमकी के कारण, उन्होंने परमेश्वर की ओर मुड़ने के बजाय मिस्र से सहायता मांगी (यशायाह 30:2)। परन्तु परमेश्वर ने उनसे कहा : यदि केवल वे पश्चाताप करेंगे और उस पर भरोसा रखेंगे, तो उन्हें बल और उद्धार मिलेगा (पद 15)। वास्तव में, उसने आगे कहा, "प्रभु तुम पर अनुग्रह करना चाहता है" (पद 18)।

परमेश्वर की प्रतीक्षा में विश्वास और धैर्य की आवश्यकता होती है। लेकिन जब हम इस सब के अंत में उसका उत्तर देखते हैं, तो हम महसूस करेंगे कि यह इसके लायक था : "धन्य हैं वे जो उसपर आशा लगाए रहते हैं!" (पद 18)। और इससे भी अधिक आश्चर्यजनक बात यह है कि परमेश्वर, हमारे उसके पास आने की प्रतीक्षा कर रहा है!

स्वीकार्य और अनुमोदित

एक बच्चे के रूप में, टेनी ने असुरक्षित महसूस किया । उसने अपने पिता से अनुमोदन माँगा, लेकिन उसे कभी नहीं मिला । ऐसा प्रतीत हुआ कि उसने जो भी किया, चाहे स्कूल या घर में, वह कभी भी अच्छा नहीं था । जब वह व्यस्क हो गया, वह असुरक्षा कायम रहा । वह निरंतर सोचता रहा, क्या मैं लायक हूँ? 

केवल जब टेनी ने यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार  कर लिया उसने सुरक्षा और अनुमोदन प्राप्त किया जिसकी वह लम्बे समय से अभिलाषा करता था । उसने सीखा कि परमेश्वर──उसको रचने के बाद──उससे प्रेम करता था और उसे अपने पुत्र की तरह दुलारता था । टेनी आख़िरकार उस भरोसे के साथ जी सकता था कि वास्तव में उसका महत्त्व था और वह अधिमुल्यित था । 

यशायाह 43:1-4 में, परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों से बोला कि, उनको बनाने के बाद, वह उन्हें छुड़ाने के लिए अपनी सामर्थ्य और प्रेम का उपयोग करेगा । “मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है,” उसने घोषणा की । इसलिए कि वह उनसे प्यार करता था वह उनके पक्ष में कार्य करेगा (पद.4) । 

परमेश्वर जिनसे प्रेम करता है उन पर जो मूल्य रखता है वह हमारे द्वारा किये गए कार्यों के कारण नहीं है, लेकिन सरल और शक्तिशाली सच्चाई से कि उसने हमें अपना बनाने के लिए चुना है । 

यशायाह 43 में ये शब्द टेनी को केवल महान सुरक्षा ही नहीं दिया, बल्कि जो भी कार्य करने के लिए उसे बुलाया गया था, उसमें परमेश्वर के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ करने के भरोसे के साथ उसे सामर्थी बनाया । आज वह एक पास्टर है जो इस जीवन-सत्य के साथ दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए वह सब करता है : हम यीशु में स्वीकृत और अनुमोदित हैं । आज हम इस सच्चाई को भरोसा के साथ जीएँ । 

दूसरों के लिए

कोविड-19 महामारी के दौरान, कई सिंगापुरी संक्रमित होने से बचने के लिए घर में ही रहे l लेकिन भरोसा करते हुए कि सब सुरक्षित है, मैं आनंदपूर्वक तैरता रहा l 

मेरी पत्नी, हालाँकि, भयभीत थी कि मैं एक सार्वजनिक तरणताल में संक्रमित हो सकता हूँ और अपनी वृद्ध माँ को संक्रमित कर सकता हूँ──जो, दूसरे वरिष्ठों की तरह, इस वायरस के चपेट में आ सकती थी l “क्या आप मेरे लिए, कुछ समय के लिए तैरना छोड़ सकते हैं?” उसने कहा l 

पहले, मैं बहस करना चाहता था कि जोखिम बहुत कम था l फिर मुझे एहसास हुआ कि यह उसकी भावनाओं से कम मायने रखता है l मैं तैरने पर जोर क्यों दूँ──शायद ही एक ज़रूरी चीज़──जब इसने व्यर्थ उसको चिंतित किया?  

रोमियों 14 में, पौलुस कुछ ऐसे मामलों को संबोधित किया जैसे कि मसीह में विश्वासियों को कुछ ख़ास भोजन खाना चाहिए या ख़ास त्योहारों को मानना चाहिए l वह चिंतित था कि कुछ लोग अपने विचार दूसरों पर थोप रहे थे l 

पौलुस ने रोम में चर्च को, और हमें, याद दिलाया, कि मसीह में विश्वासी स्थितियों को दूसरे तरीके से देख सकते हैं l हमारी पृष्ठ्भूमि भी विविध हैं जो हमारे दृष्टिकोण और प्रथाओं को रंग देती हैं l उसने लिखा, “हम एक दूसरे पर दोष न लगाएँ, पर तुम ठान लो कि कोई अपने भाई [या बहिन] के सामने ठोकर खाने का कारण न रखे” (पद.13) l

परमेश्वर के अनुग्रह से हमें बहुत स्वतंत्रता मिलती है, जब यह सह विश्वासियों के प्रति उसके प्रेम को वक्त करने में मदद करता है l हम इस स्वतंत्रता का उपयोग नियमों और प्रथाओं को अपने स्वयं के विश्वासों से ऊपर दूसरों की आध्यात्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर सकते हैं जो कि सुसमाचार में पाए गए आवश्यक सत्य के विपरीत नहीं है (पद.20) l 

पवित्र आत्मा से मदद

जबकि मेरे सहपाठी और मैं विश्वविद्यालय में कभी-कभी होने वाले व्याख्यान को छोड़ देते थे, साल के अंत की परीक्षा से पूर्व सप्ताह में प्रोफ़ेसर क्रिस के व्याख्यान में अवश्य ही सभी उपस्थित होते थे l यह वह समय होता था जब वह परीक्षा प्रश्नों के विषय जो उन्होंने बनाया था हमेशा बड़े संकेत देते थे l 

मैंने हमेशा आश्चर्य किया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, जब तक मुझे एहसास नहीं हुआ कि प्रोफेसर क्रिस चाहते थे कि हम अच्छा करें l उनके पास उच्च मानक थे, लेकिन उनको पूरा करने में वे हमारी मदद करते थे l हमें केवल आकर सुनना था ताकि हम उचित तरीके से तैयारी कर सकते थे l 

मेरे मन में भी अचानक आया कि परमेश्वर भी वैसा ही है l परमेश्वर अपने मानक से समझौता नहीं कर सकता है, लेकिन इसलिए कि उसकी इच्छा है कि हम उसके समान बने, उसने हमें उन मानकों को पूरा करने के लिए पवित्र आत्मा दिया है l 

यिर्मयाह 3:11-14 में, परमेश्वर ने अविश्वासयोग्य इस्राएल से अपना दोष स्वीकार कर उसके पास लौटने का आग्रह किया l लेकिन यह जानकार कि वे कितने अड़ियल और कमजोर है, वह उनकी मदद करने वाला था l वह उनके भटकने को सुधारने की प्रतिज्ञा करता है (पद.22), और उसने उनको सिखाने और मार्गदर्शित करने के लिए चरवाहे भेजे (पद.15) l 

यह जानना कितना आरामदायक है कि चाहे हम कितने बड़े पाप में फंसे हों या हम परमेश्वर से कितनी ही दूर चले गए हों, वह हमारी अविश्वसनीयता को चंगा करने के लिए तैयार है l हमें सिर्फ अपने गलत मार्ग को स्वीकार करना है और पवित्र आत्मा को हमारे हृदयों को बदलने के लिए पवित्र आत्मा को अनुमति देना है l 

हर एक सांस

जब टी अन्न एक दुर्लभ स्व-संक्राम्य(autoimmune) बीमारी के साथ आया, जिसने उसकी सभी मांसपेशियों को कमजोर कर दिया था और लगभग उसे मरणासन्न कर दिया था तो उसने महसूस किया कि सांस लेने में सक्षम होना एक उपहार था l एक हफ्ते से अधिक समय तक, एक मशीन को हर कुछ सेकंड में उसके फेफड़ों में हवा पंप करना पड़ता था, जो उसके उपचार का एक पीड़ादायक हिस्सा था l
टी अन्न ने एक चमत्कारी पुनर्प्राप्ति की, और आज वह खुद को जीवन की चुनौतियों के बारे में शिकायत नहीं करने की याद दिलाता है l वह कहता है, “मैं बस एक गहरी साँस लूँगा और परमेश्वर को धन्यवाद दूँगा कि मैं ले सकता हूँ l”
अपनी आवश्यकताओं या इच्छाओं पर ध्यान देना कितना आसान है, और हम भूल जाते हैं कि कि कभी-कभी जीवन की सबसे छोटी चीज़ें सबसे बड़े चमत्कार हो सकते हैं l यहेजकेल के दर्शन में (यहेजकेल 37:1-14), परमेश्वर ने भविष्यवक्ता को दिखाया कि केवल वह सूखी हड्डियों को जीवन दे सकता है l यहां तक ​​कि नस, मांस और त्वचा के आने के बाद भी, “उनमें साँस कुछ न थी” (पद.8) l केवल जब परमेश्वर ने उन्हें सांस देता तब वे फिर से जीवित हो सकते थे (पद.10) l
यह दर्शन इस्राएल को तबाही से बचाने के लिए परमेश्वर के वादे को दर्शा दिया l यह मुझे यह भी याद दिलाता है कि मेरे पास जो कुछ भी है, बड़ा या छोटा है, वह बेकार है जब तक कि परमेश्वर मुझे सांस न दे l
आज जीवन में सबसे साधारण आशीषों के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देना कैसा रहेगा? दैनिक संघर्ष के मध्य, कभी-कभी गहरी साँस लेने के लिए ठहरें, और “सब के सब याह की स्तुति करें!” (भजन 150:6) l

टिक-टिक करती घड़ी

श्रमिकों का एक समूह एक आइसहाउस(icehouse) में बर्फ जमा कर रहा था, जब उनमें से एक को एहसास हुआ कि उसने खिड़की रहित भवन में अपनी घड़ी खो दी है l उसने और उसके मित्रों ने इसे व्यर्थ में खोजा l
जब उन्होंने हार मान ली, तो एक युवा लड़का, जिसने उन्हें बाहर निकलते देखा था, भवन में अन्दर गया l जल्द ही, वह घड़ी के साथ बाहर आया l यह पूछे जाने पर कि उसे यह कैसे मिला, उसने जवाब दिया : ‘मैं बस बैठ गया और चुप हो गया, और जल्द ही मैं इसकी टिक-टिक सुन सकता था l”
बाइबल चुप रहने के महत्व के बारे में बहुत बात कहती है l और कोई आश्चर्य नहीं, क्योंकि परमेश्वर कभी-कभी धीमी आवाज़ में बोलता है (1 राजा 19:12) l जीवन की व्यस्तता में, उसे सुनना कठिन हो सकता है l लेकिन यदि हम इधर-उधर भागना बंद करदे और उसके साथ और पवित्रशास्त्र में कुछ समय व्यतीत करें, हम अपने विचारों में उसकी धीमी आवाज़ को सुन सकेंगे l
भजन 37: 1-7 हमें विश्वास दिलाता है कि बुरे लोगों की “दुष्ट योजनाओं” से हमें बचाने के लिए, हमें शरण देने के लिए, और हमें वफादार बने रहने में मदद के लिए, हम परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं l लेकिन जब हमारे चारों तरफ अशांति है तो हम यह कैसे कर सकते हैं?
पद 7 सलाह देता है : “यहोवा के सामने चुप रह, और धीरज से उसकी प्रतीक्षा कर l” हम प्रार्थना के बाद कुछ मिनटों तक चुप रहना सीख सकते हैं l या फिर चुपचाप बाइबल पढने और शब्दों को हमारे दिलों में भीगने दें l और फिर, शायद, हम उसकी बुद्धि को शांत और स्थिर तरीके से हमसे टिक-टिक करती हुई घड़ी के समान बात करते हुए सुनेंगे l

लम्बी दूरी

चूंकि उनके साथियों को एक-एक करके पदोन्नत किया गया था, बेंजामिन नहीं चाहते हुए भी थोड़ी ईर्ष्या महसूस की l “आप अभी तक प्रबंधक कैसे नहीं हैं? आप इसके लायक हैं, ”दोस्तों ने उससे कहा । लेकिन बेन ने अपना कैरियर/जीविका परमेश्वर पर छोड़ने का फैसला किया । "अगर यह मेरे लिए परमेश्वर की योजना है, तो मैं अपना काम अच्छी तरह से करूंगा," उसने जवाब दिया ।

कई साल बाद, बेन को आखिरकार पदोन्नत कर दिया गया । तब तक, उसके अतिरिक्त अनुभव ने उसे आत्मविश्वास से अपना काम करने में सक्षम बना दिया और उसे अधीनस्थों का सम्मान मिला । इस बीच, उसके कुछ साथी, अभी भी अपनी पर्यवेक्षी(supervisory) जिम्मेदारियों से जूझ रहे थे, क्योंकि वे तैयार होने से पहले ही पदोन्नत हो चुके थे । बेन ने महसूस किया कि परमेश्वर उसे “लम्बे मार्ग” से ले गया था ताकि वह अपनी भूमिका के लिए बेहतर तैयार हो सके ।

जब परमेश्वर ने इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाला (निर्गमन 13: 17-18), तो उसने एक लंबा रास्ता चुना क्योंकि कनान के लिए "छोटा मार्ग/shortcut" जोखिम से भरा था । बाइबल के टिप्पणीकारों पर ध्यान दें, लम्बी यात्रा, उन्हें बाद की लड़ाइयों के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाने के लिए और अधिक समय दिया ।

सबसे छोटा रास्ता हमेशा सबसे अच्छा नहीं होता है । कभी-कभी परमेश्वर हमें जीवन में लंबा रास्ता तय करने देता है, चाहे वह हमारे कैरियर/जीविका में हो या अन्य प्रयासों में, ताकि हम आगे की यात्रा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों । जब चीजें बहुत जल्दी होती नहीं लगती हैं, तो हम परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं - जो हमारा नेतृत्व और मार्गदर्शन करता है ।