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Articles by लिसा एम समरा

स्वतंत्रता में जीना

 
टेक्सास, संयुक्त राज्य अमेरिका में जहां मैं पला–बढ़ा था, हर 19 जून को काले समुदायों में उत्सव भरी परेड और पिकनिक होती थी। किशोर होने तक मैंने जूनटीन्थ (जून और नाइनटीन को मिलाने से बना एक शब्द) समारोह का दिल तोड़ने वाला महत्व नहीं सीखा था। जूनटीन्थ उस दिन की याद में मनाया जाता है जब 1865 में टेक्सास में गुलाम लोगों को पता चला कि राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने ढाई साल पहले उनकी आजादी के उद्घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। टेक्सास में ग़ुलाम बनाए गए लोग ग़ुलामी में रहते थे क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि उन्हें आज़ाद कर दिया गया है। 
मुक्त होना और फिर भी गुलामों के रूप में रहना संभव है। गलातियों में, पौलुस ने एक अन्य प्रकार की गुलामी के बारे में लिखा: धार्मिक नियमों की कुचलने वाली माँगों के अधीन जीवन जीना। इस महत्वपूर्ण वचन में, पौलुस ने अपने पाठकों को प्रोत्साहित किया कि “मसीह ने हमें स्वतंत्रता के लिये स्वतंत्र किया है। इसलिये इसी में स्थिर रहो (डटे रहो), और दासत्व के जूए से फिर से न जुतो” (गलातियों 5:1)। यीशु के विश्वासियों को बाहरी नियमों से मुक्त कर दिया गया था, जिसमें क्या खाना चाहिए और किससे मित्रता करनी चाहिए शामिल थे। फिर भी बहुत से लोग अभी भी ऐसे रहते थे जैसे कि गुलाम हों। 
दुख की बात है कि आज हम वही काम कर सकते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिस क्षण हमने उस पर भरोसा किया, यीशु ने हमें मनुष्यों के बनाये धार्मिक मानकों के डर में जीने से मुक्त कर दिया। आजादी का ऐलान किया गया है। आइए इसे उसकी शक्ति में जीएं। 

टुकड़ों को टुकड़ों को एक साथ रखना (जोड़ना)

 
जब हमारा परिवार वैश्विक महामारी के कारण क्वारंटीन था, तब हमने एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम किया- अठारह हज़ार टुकड़ों वाली पहेली! हालाँकि हम इस पर लगभग रोज़ाना काम करते थे, लेकिन अक्सर हमें लगता था कि हम ज़्यादा प्रगति नहीं कर पा रहे हैं। शुरू करने के पाँच महीने बाद, हमने आखिरकार नौ-बाई-छह फ़ीट की पहेली में आखिरी टुकड़ा जोड़ने का जश्न मनाया, जो हमारे डाइनिंग रूम के फर्श को ढक लिया था। 
कभी–कभी मुझे मेरा जीवन एक विशाल पहेली की तरह महसूस होता है — कई टुकड़े जगह में हैं, लेकिन बहुत कुछ अभी भी फर्श पर मिले जुले पड़े हैं। जबकि मैं जानती हूं कि परमेश्वर मुझे अधिक से अधिक यीशु की तरह बदलने के लिए काम कर रहा है, लेकिन कभी–कभी बहुत अधिक प्रगति देखना कठिन हो जाता है। 
फिलिप्पियों को लिखे अपने पत्र में पौलुस के प्रोत्साहन में मुझे बहुत शान्ति मिलती है जब उसने कहा कि जो अच्छा काम वे कर रहे थे उसके कारण उसने खुशी के साथ उनके लिए प्रार्थना की (1:3–4)। लेकिन उसका भरोसा उनकी योग्यताओं पर नहीं बल्कि परमेश्वर पर था, यह मानते हुए कि जिस ने अच्छा काम आरम्भ किया वह इसे पूर्णता तक ले जायेगा (पद 6)। 
परमेश्वर ने हममें अपने कार्य को पूरा करने की प्रतिज्ञा की है। एक पहेली की तरह, ऐसे अंश हो सकते हैं जिन पर अभी भी हमें ध्यान देने की आवश्यकता है, और कई बार ऐसा भी होता है जब लगता है कि हम ज्यादा प्रगति नहीं करते हैं। लेकिन हम भरोसा रख सकते हैं कि हमारा विश्वासयोग्य परमेश्वर अब भी टुकड़ों को जोड़ रहा है।  

प्रेमपूर्ण नेतृत्व

 
एक माँ भालू का वायरल वीडियो ने, जिसमें वह अपने चार ऊर्जावान छोटे बच्चों को व्यस्त सड़क पार कराने की कोशिश कर रही थी, मेरे चेहरे पर एक मुस्कान ला दी। उसे अपने बच्चों को एक-एक करके उठाकर सड़क पार कराते हुए देखना बहुत ही आनंददायक था - लेकिन बच्चे वापस दूसरी तरफ चले गए। कई निराशाजनक प्रयासों के बाद, माँ भालू ने आखिरकार अपने चारों बच्चों को घेर लिया और वे सुरक्षित रूप से सड़क पार कर गए।  
वीडियो में दिखाए गए माता-पिता के अथक परिश्रम की झलक, थिस्सलुनीके के चर्च में लोगों के लिए पौलुस द्वारा की गई देखभाल का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल की गई कल्पना से मेल खाती है।  अपने अधिकार पर जोर देने के बजाय, प्रेरित ने उनके बीच अपने काम की तुलना छोटे बच्चों की देखभाल करने वाले माता और पिता से की (1 थिस्सलुनीकियों 2:7, 11)। यह थिस्सलुनीकियों के लिए गहरा प्रेम था (पद. 8) जिसने पौलुस के चल रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करने, सांत्वना देने और उन्हें " तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो " के लिए आग्रह करने के लिए प्रेरित किया (पद. 12)। ईश्वरीय जीवन जीने के लिए यह भावुक आह्वान उनकी प्रेमपूर्ण इच्छा से पैदा हुआ था कि वे अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में परमेश्वर का सम्मान करें।   
पौलूस का उदाहरण हमारे सभी नेतृत्व के अवसरों में हमारे लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम कर सकता है - खासकर जब जिम्मेदारियां हमें थका देती हैं। परमेश्वर की आत्मा द्वारा सशक्त, हम अपनी देखभाल के अधीन लोगों को धीरे और लगातार प्यार कर सकते हैं जब हम उन्हें यीशु की ओर प्रोत्साहित करते हैं और मार्गदर्शन करते हैं। 
  

 

लाल रंग की बूंदें

 
स्कॉटिश नेशनल गैलरी में से चलते हुए, मैं डच कलाकार विंसेंट वान गाग की ऑलिव ट्रीज़ की कई पेंटिंग्स में से एक की प्रभावशाली ब्रश की कला और जीवन से भरपूर चमकीले रंगों की ओर आकर्षित हुआ। कई इतिहासकारों का मानना है कि यह काम जैतून के पहाड़ पर गतसमनी के बगीचे में यीशु के अनुभव से प्रेरित था । जिस चीज़ ने मुझे विशेष रूप से आकर्षित किया, वह थी पेंटिंग के कैनवास पर प्राचीन पेड़ों के बीच रंग के छोटे-छोटे लाल छींटे ।  
सभी जैतून के पेड़ उस पहाड़ पर स्थित होने के कारण उसे जैतून के पहाड़ से जाना जाता है l उस रात वहाँ यीशु प्रार्थना करने के लिए गए जब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि उनका चेला यहूदा उन्हें धोखा देगा। यीशु यह जानकर पीड़ा से व्याकुल थे कि विश्वासघात का परिणाम सूली पर उनका चढ़ना होगा। जब उन्होंने प्रार्थना की, “उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदों के समान भूमि पर गिर रहा था” (लूका 22:44) l यीशु की व्यथा बगीचे में स्पष्ट थी  क्योंकि वह उस सार्वजनिक मृत्यु की पीड़ा और अपमान का सामना करने के लिए तैयार हो रहे थे जिसका परिणाम बहुत पहले गुड फ्राइडे के दिन उनका लहू बहाया जाना था ।    
वान गॉग की पेंटिंग पर लाल रंग हमें याद दिलाता है कि यीशु को “बहुत दुःख उठाना था और तुच्छ समझा जाना” था (मरकुस 8:31)। जबकि पीड़ा उनकी कहानी का हिस्सा है, तथापि, यह अब चित्र पर प्रबल नहीं है। मृत्यु पर यीशु की विजय हमारे क्लेशों को भी बदल देती है, जिससे यह हमारे जीवन के सुंदर परिदृश्य का एक हिस्सा बन जाता है जिसे वह रच रहा है।  
 

पीड़ितों का बोझ उठाना

जहाँ दिशा निर्देश सूचक हमें चेतावनी दे रहे थे कि ऊपर चलना बहुत कठिन होगा। सीढ़ियों के नीचे, हमारी पैदल यात्रा में एक नाटकीय मोड़ आया जब हमने पाया कि एक युवती को आपातकालीन चिकित्सा की ज़रुरत पड़ गयी है। राहत कर्मियों ने पहले एक स्ट्रेचर प्रदान किया, लेकिन उस युवती को सुरक्षित रूप से गड्ढे (घाटी) से बाहर ले जाने के लिए उन्हें मदद की ज़रूरत थी। बचाव दल में शामिल होकर, हम आभारी थे कि उनके साथ मिलकर काम करके हम उस युवती को ऐसी जगह पहुंचा सकें जहां पर उसे मदद मिल सके।   
 

परमेश्वर की सामर्थ्यशाली उपस्थिति

2020 में, इस उत्सव ने अमेरिकी संविधान के उन्नीसवें संशोधन के पारित होने की सौवीं वर्षगाँठ को चिन्हित किया, जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया l पुरानी तस्वीरों में भजन 68:11 के शब्दों से अलंकृत झंडो के साथ प्रदर्शन करनेवालों को कदमताल/मार्च(march) करते हुए दिखाया गया है :“प्रभु आज्ञा देता है, तब शुभ समाचार सुनानेवालियों की बड़ी सेना हो जाती है l”  

भजन सहिंता 68 में, दाऊद ने परमेश्वर का वर्णन एक ऐसे व्यक्ति के रूप में किया है जो बंदियों को छुड़ाता है (पद.6), अपने निज भाग को [जो] बहुत सूखा था . . . उसको हरा भरा किया है” (पद.9-10) l इस भजन के पैंतीस पदों में, दाऊद बयालीस बार परमेश्वर का ज़िक्र करता है, यह प्रकट करते हुए कि कैसे वह लगातार उनके साथ रहा है, उन्हें अन्याय और पीड़ा से बचाने के लिए काम कर रहा है l और स्त्रियों की एक बड़ी भीड़ इस सत्य का प्रचार करती हैI (पद.11) 

चाहे वे स्त्रियाँ जिन्होंने मतदान के अधिकार के लिए कदमताल/मार्च किया था, पूरी तरह से भजन 68 को समझ पायी थीं या नहीं लेकिन उनके झंडों ने एक कालातीत सत्य की घोषणा की l परमेश्वर, “अनाथों का पिता” और “विधवाओं का न्यायी” है (पद.5), अपने लोगों के आगे-आगे जाकर उन्हें आशीष, विश्राम और आनंद के स्थानों की ओर ले जाता है l 

आज यह याद करते हुए प्रोत्साहित हों कि परमेश्वर की उपस्थिति हमेशा अपने लोगों के साथ रही है, और विशेष रूप से कमज़ोर और पीड़ितों के साथ l जैसे कि अतीत में वह उसकी आत्मा के माध्यम से था,परमेश्वर आज भी हमारे साथ सामर्थ्यशाली रूप से उपस्थित है l 

आनन्दित प्रेम

ब्रेंडन और केटी एक दूसरे पर मुस्कराए। उनके चेहरों पर सच्चा आनंद देखकर, आपने कभी अनुमान नहीं लगाया होगा कि कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण उनकी शादी की कई योजनाओं को नाटकीय रूप से बदल दिया गया था। और सिर्फ पच्चीस परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में जब उन्होंने एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम के लिए प्रतिज्ञा ली और उन्हें संभाले कर रखने वाले परमेश्वर के प्रेम के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की तब भी उन दोनों में से आनंद और शांति की चमक प्रकट हो रही थीI

एक दूल्हे और दुल्हे की एक दूसरे के प्रति प्रसन्नता की छवि वह चित्र है जिसे भविष्यद्वक्ता यशायाह ने अपने लोगों के लिए परमेश्वर के आनंद और प्रेम के प्रकार का वर्णन करने के लिए चित्रित किया था। परमेश्वर के प्रतिज्ञात छुटकारे के एक सुंदर काव्यात्मक वर्णन में, यशायाह ने अपने पाठकों को याद दिलाया कि परमेश्वर ने उन्हें जो उद्धार प्रदान किया है वह एक टूटे हुए संसार में रहने की वास्तविकता को दर्शाता है - खेदित मन के लोगो को शांति, शोक करने वालों को हर्ष, और उसके लोगों की ज़रूरतों के लिए प्रावधान ( यशायाह 61:1-3) परमेश्वर ने अपने लोगों को मदद की पेशकश की, क्योंकि जैसे एक दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे के लिए अपने प्यार का जश्न मनाते हैं, वैसे ही "तेरा परमेश्वर तुम्हारे कारण हर्षित होगा" (62:5)

यह एक उल्लेखनीय सत्य है कि परमेश्वर हमसे प्रसन्न होता है और हमारे साथ एक रिश्ता चाहता है। यहाँ तक कि जब हम एक टूटे हुए संसार में रहने के प्रभावों के कारण संघर्ष करते हैं, तो भी हमारे पास एक परमेश्वर है जो हमसे प्रेम करता है, कुढ़न से नहीं, बल्कि हर्षित, स्थायी प्रेम के साथ जो "सदा बना रहता है" (भजन संहिता 136:1)

प्यार जो माफ करता है

शादी के अस्सी साल! मेरे पति के परदादा पीट और परदादी रूथ ने 31 मई, 2021 को इस उल्लेखनीय उपलब्धि का जश्न मनाया। 1941 में जब रूथ अभी भी हाई स्कूल में थी, तब संयोग से मिलने के बाद, युवा जोड़ा शादी करने के लिए इतना उत्सुक थे कि रूथ के स्नातक होने के अगले दिन वे भाग गए। पीट और रूथ का मानना है कि परमेश्वर उन्हें एक साथ लाया और उसने इन सभी वर्षों में उनका मार्गदर्शन किया है।

शादी के आठ दशकों पर विचार करते हुए, पीट और रूथ दोनों सहमत हैं कि उनके रिश्ते को बनाए रखने की एक प्रमुख बात क्षमा को चुनने का निर्णय रहा है। एक स्वस्थ रिश्ते में कोई भी यह समझता है कि हम सभी को नियमित रूप से क्षमा की आवश्यकता होती है, जिस तरह से हम एक दूसरे को दुख पहुँचाते हैं: चाहे वह एक निर्दयी शब्द हो, एक टूटा हुआ वादा हो, या एक भूला हुआ कार्य हो।

यीशु में विश्वासियों को एकता में एक साथ रहने में मदद करने के लिए पवित्रशास्त्र के एक भाग में  पौलुस क्षमा की आवश्यक भूमिका का उल्लेख करता है। अपने पाठकों को करुणा, भलाई, दीनता, और नम्रता,  और सहनशीलता (कुलुस्सियों 3:12) चुनने के लिए आग्रह करने के बाद, पौलुस फिर प्रोत्साहित करता है “यहि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो तो एक दूसरे की सह लो ओर एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।” (पद 13)। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक के साथ उनका सारा व्यवहार प्रेम द्वारा निर्देशित होना था (पद 14)।

रिश्ते जो  पौलुस द्वारा उल्लिखित विशेषताओं को आकार देते हैं,  एक आशीर्वाद हैं। प्यार और क्षमा की विशेषता वाले स्वस्थ संबंधों को विकसित करने के लिए परमेश्वर हम सबकी मदद करे।

स्वागतम बालक यीशु

ऐसा लगा जैसे हम हमेशा से इस खबर का इन्तजार कर रहे थे कि हमारी गर्भवती पड़ोसन ने अपने पहले बच्चे का स्वगत किया है l जब एक घोषणा करने वाला संकेत, “यह एक लड़की है!” अंततः उनके सामने वाले लॉन में दिखायी दिया, हमने उनकी बेटी के जन्म का जश्न मनाया और उन मित्रों को सन्देश भेजा जिन्होंने शायद बाहरी प्रदर्शन नहीं देखा हो l 

बच्चे के आगमन की प्रतीक्षा में बहुत उत्साह है l यीशु के जन्म से पहले, यहूदी लोग केवल कुछ महीनों तक ही प्रतीक्षा नहीं कर रहे थे, वे पीढ़ियों से, इस्राएल के अपेक्षित बचानेवाले, मसीहा/अभिषिक्त/Messiah के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे थे l मैं कल्पना करता हूँ कि वर्षों तक विश्वासयोग्य यहूदी सोचते रहे कि क्या वे अपने जीवनकाल में इस प्रतिज्ञा को पूरा होते देखेंगे l 

एक रात लम्बे समय से प्रतीक्षित समाचार स्वर्ग में प्रदर्शित हुआ जब एक स्वर्गदूत बैतलहम में चरवाहों के सामने प्रकट हुआ और घोषणा की कि मसीहा/Messiah का आखिरकार जन्म हो गया है l उसने उनसे कहा, “तुम्हारे लिए यह पता है कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे”(लूका 2:12) l चरवाहों ने यीशु को देखने के बाद, परमेश्वर की स्तुति की और बच्चे के बारे में “वह बात . . . प्रगट की”(पद.17) l 

परमेश्वर चाहता था कि चरवाहों को पता चले कि लम्बे समय से प्रतीक्षित बालक आ गया है ताकि वे दूसरों को यीशु के जन्म के बारे में बता सकें l हम अभी भी उनके जन्म का जश्न मनाते हैं क्योंकि उनका जीवन विश्वास करने वाले किसी भी व्यक्ति को संसार के टूटेपन से मुक्ति/छुटकारा प्रदान करता है l हमें अब शांति प्राप्त करने और आनंद का अनुभव करने के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा, जो घोषणा करने लायक अच्छी खबर है!