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Articles by लिसा एम समरा

परिवार का हिस्सा

एक लोकप्रिय अंग्रेजी टेलीविजन नाटक जो एक काल्पनिक परिवार का अनुसरण करता है क्योंकि उन्होंने 1900 के दशक की शुरुआत में एक बदलती सामाजिक संरचना को दिशा निर्देश  किया था। प्रमुख पात्रों में से एक, परिवार में सबसे छोटी बेटियों से शादी करने से पहले सभी को चौंकाने से पहले परिवार के नौकर के रूप में काम किया। निर्वासन की अवधि के बाद, युवा जोड़ा परिवार के घर लौट आया और नया दामाद परिवार का हिस्सा बन गया, अधिकारों और विशेषाधिकारों तक पहुंच प्राप्त करने से उसे एक कर्मचारी के रूप में वंचित कर दिया गया था।

हमें एक बार “विदेशी और अजनबी” (इफिसियों 2:19) के रूप में माना जाता था और उन लोगों को दिए गए अधिकारों से बाहर रखा गया था जो परमेश्वर के परिवार का हिस्सा हैं। परन्तु यीशु के कारण, सभी विश्वासी, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लेते हैं और “उसके घराने के सदस्य” कहलाते हैं (v 19)।

परमेश्वर के परिवार का सदस्य होना अविश्वसनीय अधिकार और विशेषाधिकार लाता है। हम “स्वतंत्रता और विश्वास के साथ परमेश्वर के पास जा सकते हैं” (3:12) और परमेश्वर तक असीमित, निर्बाध पहुंच का आनंद ले सकते हैं। हम एक बड़े परिवार का हिस्सा बन जाते हैं, विश्वास का एक समुदाय जो हमें समर्थन और प्रोत्साहित करता है (2:19–22)। परमेश्वर के परिवार के सदस्यों को परमेश्वर के भव्य प्रेम की विशालता को समझने में एक दूसरे की मदद करने का विशेषाधिकार प्राप्त है (3:18)।

डर या संदेह हमें आसानी से एक बाहरी व्यक्ति की तरह महसूस करा सकता है, जो हमें परमेश्वर के परिवार का हिस्सा होने के लाभों तक पूरी तरह से पहुंचने से रोकता है। लेकिन परमेश्वर के प्रेम के स्वतंत्र और उदार उपहार (2:8-10) की वास्तविकता को एक बार फिर से सुनें और गले लगाएं और उसके होने के आश्चर्य का आनंद लें।

विविधता का जश्न

एक विश्वविद्यालय में 2019 के ग्रेजुएशन समारोह में, 608 छात्रों ने अपने प्रमाण पत्र प्राप्त करने की तैयारी की। प्रिंसिपल ने छात्रों को उस देश का नाम पढ़ने के लिए खड़े होने के लिए कहा जहां वे पैदा हुए थे: अफगानिस्तान, बोलीविया, बोस्निया। . . . प्रिंसिपल तब तक पढ़ते रहे जब तक उन्होंने साठ देशों का नाम नहीं लिया और हर छात्र एक साथ खड़े होकर जय-जयकार कर रहा था। साठ देश; एक विश्वविद्यालय।

विविधता के बीच एकता की सुंदरता एक शक्तिशाली छवि थी जिसने परमेश्वर के दिल के करीब कुछ मनाया गया─एकता में रहने वाले लोग।

हम भजन 133 में परमेश्वर के लोगों के बीच एकता के लिए प्रोत्साहन के विषय में पढ़ते हैं, आरोहण का एक भजन─एक गीत गाया जाता था जब लोग वार्षिक समारोहों के लिए यरूशलेम में प्रवेश करते थे। भजन ने लोगों को सामंजस्य के साथ रहने के लाभों के बारे में याद दिलाया (पद 1) मतभेदों के बावजूद जो विभाजन का कारण बन सकते हैं। विशद कल्पना में, एकता को ताज़ा ओस (पद 3) और तेल के रूप में वर्णित किया गया है─याजकों का अभिषेक करने के लिए उपयोग किया जाता था (निर्गमन 29:7)─एक याजक के सिर, दाढ़ी और कपड़ों के "नीचे बहना" (पद 2)। साथ में, ये छवियां इस वास्तविकता की ओर इशारा करती हैं कि एकता में परमेश्वर के आशीर्वाद इतने भव्य रूप से प्रवाहित होते हैं कि उन्हें समेटा नही जा सकता है।

यीशु में विश्वासियों के लिए, जातीयता, राष्ट्रीयता, या उम्र जैसे मतभेदों के बावजूद, आत्मा में एक गहरी एकता है (इफिसियों 4:3)। जब हम एक साथ खड़े होते हैं और उस सामान्य बंधन का जश्न मनाते हैं जब यीशु हमारी अगुवाई करते हैं, तो हम अपने ईश्वर प्रदत्त मतभेदों को स्वीकार कर सकते हैं और सच्ची एकता के स्रोत का जश्न मना सकते हैं।

विरोध के सामने परमेश्वर पर भरोसा

एस्तर की परवरिश फिलिपीन्स में एक जनजाति में हुई  जो मसीह में विश्वास के विरुद्ध था । उसने जीवन-घातक बीमारी से अपनी लड़ाई के दौरान एक चाची की प्रार्थना के बाद यीशु के द्वारा उद्धार को स्वीकार किया । आज हिंसा और यहाँ तक कि मृत्यु के जोखिम के बावजूद एस्तेर अपने स्थानीय समुदाए में बाइबल अध्ययन में अगुवाई करती है । वह यह कहते हुए आनंदित सेवा करती है, “मैं यीशु के विषय लोगों को बताना छोड़ नहीं सकती हूँ क्योंकि मैंने अपने जीवन में परमेश्वर की सामर्थ्य, प्रेम, भलाई, और विश्वासयोग्यता का अनुभव किया है ।”

विरोध की सूरत में ईश्वर की सेवा करना आज भी कई लोगों के लिए एक वास्तविकता है, जैसा कि बेबीलोन की कैद में रहनेवाले तीन युवा इस्राएली, शद्रक, मेशक, अबेदनगो के लिए था । दानिय्येल की पुस्तक में, हम सीखते हैं कि उन्होंने आसन्न मृत्यु के सामने भी राजा नबूकदनेस्सर की एक बड़ी सोने के मूरत के सामने प्रार्थना करने से इनकार कर दिया । पुरुषों ने गवाही दी कि परमेश्वर उनको बचाने में सक्षम था, लेकिन “यदि नहीं” भी बचाता है तो भी उन्होंने उसकी सेवा करने का चुनाव किया था (दानिय्येल 3:18) । जब उन्हें आग में फेंक दिया गया, परमेश्वर वास्तव में उनकी पीड़ा में उनके साथ शामिल हुआ (पद.25) । सभी के विस्मय में, वे बच गए और उनके “सिर का एक बाल भी न झुलसा” (पद.27) । 

यदि हम विश्वास के कार्य के कारण दुःख या सताव का सामना करते हैं, प्राचीन और वर्तमान उदाहरण हमें याद दिलाते हैं कि जब हम उसकी आज्ञा मानने का चुनाव करते हैं, परमेश्वर का आत्मा हमें सामर्थ्य देने और हमें थामने के लिए उपस्थित है “भले ही” चीजें हमारी उम्मीद से अलग हों । 

बुद्धि की आवश्यकता

पिता के बिना बड़े होने पर, रॉब ने महसूस किया कि वह बहुत सारे व्यवहारिक ज्ञान से वंचित रह गए हैं जो पिता अक्सर अपने बच्चों को देते हैं l न चाहते हुए कि किसी को महत्वपूर्ण जीवन कौशल की कमी हो, रॉब ने विडियो श्रृंखला “डैड, मैं कैसे करूँ?” बनाया जिसमें उसने एक शेल्फ कैसे सजाते हैं से लेकर एक टायर कैसे बदलते हैं, सब कुछ दर्शाया l अपने हितकर संवेदना और स्नेही शैली में, रॉब ने एक यूट्यूब सनसनी बनकर लाखों सब्सक्राइबर इकठ्ठा किये हैं l 

हममें से कई लोग हमें मूल्यवान कौशल सिखाने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों को पार करने में मदद करने के लिए एक माता-पिता जैसे व्यक्तित्व की विशेषज्ञता की चाह रखते हैं l मूसा और इस्राएलियों के मिस्र के दासत्व से भागने के बाद और एक राष्ट्र के रूप में स्थापित होते समय उसे कुछ बुद्धि की आवश्यकता पड़ी l मूसा के ससुर, यित्रो ने उस तनाव को देखा जो लोगों के विवादों को हल करने में मूसा को हो रहा था l इसलिए यित्रो ने मूसा को नेतृत्व में जिम्मेदारियों को किस तरह बांटना है की विचारशील सलाह दी (निर्गमन 18:17-23) l “अपने ससुर की यह बात मन कर मूसा ने उसके सब वचनों के अनुसार किया” (पद.24) l 

परमेश्वर जानता है कि हम सब को बुद्धि की ज़रूरत है l कुछ को धर्मी माता-पिता की आशीष मिलती है जो बुद्धिमान सलाह देते हैं, लेकिन यदि नहीं तो, हम परमेश्वर से बुद्धि मांग सकते हैं, जो उन सबको देता है जो मांगते हैं (याकूब 1:5) l वह पवित्रशास्त्र के पन्नों में भी बुद्धि दिया है, जो हमें याद दिलाता है कि जब हम दीनता और सच्चाई से बुद्धिमान की सुनते हैं, हम “अनंतकाल तक बुद्धिमान ठहरें” (नीतिवचन 19:20) और दूसरों के साथ साझा करने के लिए बुद्धि हो l 

स्वतंत्रता में उछलना कूदना

एक तीसरी पीढ़ी का किसान, बाला तब इतना अधिक द्रवित हुआ जब उसने पढ़ा “तुम्हारे लिए जो मेरे नाम का भय मानते हो . . . तुम निकलकर पाले हुए बछड़ों के समान कूदोगे और फाँदोगे”(मलाकी 4:2) कि उसने यीशु के अनंत जीवन के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए प्रार्थना की l जब बाला ने अपने बछड़ों को अपने तंग गौशालों से तीव्र गति से निकलकर उत्साह से उछल-कूद करने को सजीव ढंग से याद किया तो उसने आखिरकार परमेश्वर के वास्तविक स्वतंत्रता के वादे को समझ लिया l  

बाला की बेटी ने मुझे यह कहानी बतायी क्योंकि हम मलाकी 4 में काल्पनिक चित्र पर विचार कर रहे थे, जहाँ पर नबी ने जो परमेश्वर का भय मानते हैं, या उसके प्रति विश्वासयोग्य है, और जो केवल खुद पर भरोसा करते हैं के बीच एक भेद करता है (4:1-2) l नबी एक ऐसे समय में इस्राएलियों को परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित करता है जब बहुत सारे लोग, जिसमें धार्मिक अगुए भी शामिल थे, परमेश्वर और वफादार रहन-सहन के मानक को भूल गए थे (1:12-14; 3:5-9) l मलाकी ने  एक आनेवाले समय के कारण जब परमेश्वर दोनों समूहों के बीच एक अंतिम भेद करेगा के कारण लोगों को विश्वासयोग्यता से जीने का आह्वान किया l इस सन्दर्भ में, मलाकी ने बयान से बाहर आनंद का वर्णन करने के लिए एक उछलते-कूदते हुए बछड़े का एक अनापेक्षित चित्र उपयोग किया जो विश्वासी समूह अनुभव करेगा जब “धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे” (4:2) l 

यीशु इस प्रतिज्ञा का असली पूर्णता है, सुसमाचार को लानेवाला कि सभी लोगों के लिए वास्तविक स्वतंत्रता उपलब्ध है (लूका 4:16-21) l और एक दिन, परमेश्वर के नवीकृत और पुनर्स्थापित सृष्टि में, हम इस स्वतंत्रता का पूर्ण अनुभव करेंगे l वहाँ उछल-कूद करने का आनंद कितना अवर्णनीय होगा!

सर्वश्रेष्ठ चंगाई देनेवाला

जब एक परिवार के सदस्य की गंभीर खाद्य एलर्जी(food allergies) के लिए एक चिकित्सा उपचार ने राहत देना शुरू किया, तो मैं इतना उत्साहित हो गया कि मैंने हर समय इसके बारे में बात की l मैंने गहन प्रक्रिया का वर्णन किया और उस डॉक्टर की प्रशंसा की जिसने योजना बनायीं थी l अंत में, कुछ दोस्तों ने टिप्पणी की, “हमें लगता है कि परमेश्वर को हमेशा चंगे का श्रेय मिलना चाहिए l” उनके इस कथन ने मुझे रोक दिया l क्या मैंने अपनी आँख सर्वश्रेष्ठ चंगाई देनेवाले से हटा दी थी और चंगे को एक मूर्ति बना दिया था?

इस्राएल राष्ट्र एक ऐसे ही जाल में घिर गया जब वे एक पीतल के साँप के सामने धूप जलाने लगे जिसे परमेश्वर ने उन्हें चंगा करने के लिए उपयोग किया था l वे आराधना के इस कार्य को तब तक करते रहे जब तक हिजिकिय्याह ने इसे मूर्तिपूजा के रूप में नहीं पहचाना और “पीतल का जो साँप मूसा ने बनाया था, उसको . . . चूर-चूर कर दिया” (2 राजा 18:4) l 

कई शताब्दी पहले, विषैले साँपों के एक समूह ने इस्राएल के शिविर पर आक्रमण किया था l साँपों ने लोगों को काटा और कई लोग मर गए (गिनती 21:6) l हालाँकि आध्यात्मिक विद्रोह ने इस समस्या को पैदा किया था, फिर भी लोग ने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा l दया दिखाते हुए, उसने मूसा को एक पीतल का साँप बनाने, और उसे एक खम्बे पर बाँधने और सभी को देखने के लिए उसे पकड़ने के लिए निर्देशित दिया l जब लोगों ने इसे देखा, तो वे चंगे हो गए (पद.4-9) l 

आपके लिए परमेश्वर के उपहार के बारे में विचार करें l क्या इनमें से कोई भी उसकी दया और कृपा के साक्ष्य के बजाय तारीफ़ की वस्तु तो नहीं बन गई है? केवल हमारा पवित्र परमेश्वर──हर एक अच्छे उपहार का श्रोत (याकूब 1:17) ──आराधना के योग्य है l 

पुनः उठ खड़े हो

ओलंपिक धावक रेयान हॉल आधी लम्बी दौड़(half merathon) के लिए अमेरिकी रिकॉर्ड-धारक है l उन्होंने 13.1 मील (21 किलोमीटर) की दूरी को इक्यावन मिनट और तैंतालीस सेकंड के उल्लेखनीय समय में पूरा किया, जिससे वह एक घंटे के भीतर दौड़ने वाले पहले अमेरिकी एथलीट बन गए l जबकि हॉल ने रिकॉर्ड-सेटिंग की जीत का जश्न मनाया है, उसने एक दौड़ पूरी नहीं कर पाने की निराशा को भी जाना है l 

सफलता और असफलता दोनों का स्वाद चखने के बाद, उसे सँभालने के लिए हॉल यीशु में अपने विश्वास को श्रेय देता है l उसकी पसंददीदा बाइबल पदों में से एक नीतिवचन की किताब से एक उत्साहजनक अनुस्मारक है कि “धर्मी चाहे सात बार गिरे तौभी उठ खड़ा होता है” (24:16) l यह नीतिवचन हमें याद दिलाता है कि धर्मी लोग, जिन पर भरोसा करते हैं और परमेश्वर के साथ एक रिश्ता रखते हैं, वे इसके बावजूद भी परेशानियों और कठियाइयों का अनुभव करेंगे l हालाँकि, जब वे कठिनाई के मध्य भी निरंतर उसे ढूढ़ते है, परमेश्वर उन्हें फिर से उठ कर खड़े होने की ताकत देता है l

क्या आपने हाल ही में एक विनाशकारी निराशा या असफलता का अनुभव किया है और महसूस करते हैं कि आप कभी भी ठीक नहीं होंगे? पवित्रशास्त्र हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने ताकत पर भरोसा न करें, लेकिन परमेश्वर और उसके वादों पर अपना विश्वास बनाए रखें l जैसा कि हम उस पर भरोसा करते हैं, परमेश्वर की आत्मा हमें इस जीवन में आने वाली हर कठिनाई के लिए ताकत देता है, जो सांसारिक रूप से महत्वपूर्ण संघर्षों से मिलती है (2 कुरिन्थियों 12:9) l 

जिन्दगी के तूफान पार करना

16 जुलाई 1999 को, जॉन.एफ़. कैनेडी जूनियर (अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति के पुत्र) द्वारा चालित छोटा विमान अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया । जांचकर्ताओं ने दुर्घटना की वजह एक सामान्य त्रुटी बतायी जिसे स्थान-सम्बन्धी भटकाव कहा जाता है l यह घटना तब होती है जब, कम दृश्यता की वजह से पायलट भटक जाते हैं और अपने गंतव्य तक सफलतापूर्वक पहुँचने के लिए अपने उपकरणों पर सहाहता के लिए भरोसा करना भूल जाते हैं l

जब हम जिन्दगी की सफ़र करते हैं, तो कई बार जिन्दगी काफी कठिन हो जाता है, हम गुमराह महसूस करते हैं l कैंसर का लक्षण, किसी प्रिय की मृत्यु, नौकरी की हानि, मित्र द्वारा विश्वासघात——जीवन की अनापेक्षित त्रासदियाँ हमें भूला हुआ और भ्रमित छोड़ जाती हैं l

जब हम अपने को ऐसी परिस्थितियों में पाते है, हम भजन 43 की प्रार्थना करने की कोशिश कर सकते हैं l इस भजन में, भजनकार व्याकुल है और गुमराह महसूस कर रहा है क्योंकि वह बुराई और अन्याय से घिरा हुआ महसुस कर रहा है l निराशा में, भजनकार परमेश्वर से अपने इच्छित गंतव्य, परमेश्वर की उपस्थिति (पद.3-4) तक सुरक्षित पहुँचने के लिए मार्गदर्शन और मदद की गुहार लगाता है l भजनकार जानता है कि परमेश्वर की उपस्थिति में वह नवीकृत आशा और हर्ष प्राप्त करेगा । 

कौन से उपकरण हैं जो भजनकार मार्गदर्शन के लिए आग्रह करता है? पवित्र आत्मा के द्वारा सत्य की ज्योति और परमेश्वर की उपस्थिति का आश्वासन l

विश्वास का मार्ग

2017 में विश्व कप क्वालिफाइंग मैच जिसने अमेरिका को ट्रिनिडाड और टोबागो के खिलाफ खड़ा किया, इस कम ज्ञात टीम ने विश्व को चौंका दिया जब उन्होंने अमेरिका के पुरुषों की राष्ट्रीय टीम को हराया, एक टीम जो छप्पन स्थान ऊपर थी l 2-1 की गड़बड़ी ने 2018 विश्व कप से अमेरिकी टीम को हटा दिया l 

ट्रिनीडैड और टोबागो की जीत बहुत ही अनपेक्षित थी कुछ हद तक इसलिए कि अमेरिका की जनसंख्या और संसाधन बाकी छोटे कैरिबियन राष्ट्रों को बौना बना दिया था l लेकिन वह अजेय सुविधाएँ उस उत्साही टीम को हराने के लिए काफी नहीं थीं ।

गिदोन और मिद्यानियों की कहानी योद्धाओं के एक छोटे समूह और एक बड़ी सेना के बीच, एक सामान्य परेशानी को दर्शाता है l इस्राएली सेना के पास वास्तव में 30,000 से भी अधिक योद्धा थे, लेकिन परमेश्वर ने सेना को घटाकर केवल 300 योद्धा कर दिया ताकि राष्ट्र सीख सके कि उनकी सफलता परमेश्वर पर आधारित थी──न कि उनकी सेना के आकर, खजाने की धनराशि, अथवा उनके अगुओं के कौशल पर (न्यायियों 7:1-8)

जिन चीजों को हम देख सकते या माप सकते हैं उन पर भरोसा और विश्वास करना प्रलोभक  हो सकता है, परन्तु यह विश्वास का मार्ग नहीं है । हालाँकि, यह अक्सर मुश्किल होता है, जब हम परमेश्वर पर निर्भर होने के लिए इच्छुक होते हैं, “उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवंत” बनने के लिए (इफिसियों 6:10), हम साहस और आत्मविश्वास के साथ परिस्थितियों में जा सकते है, उस समय भी जब हम अभिभूत और अयोग्य महसूस करते है । उसकी उपस्थिति और सामर्थ्य हम में और हमारे द्वारा अद्भुत कार्य कर सकते हैं l